सल्ट उप चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने खोले प्रत्याशियों के नाम

कुमाऊं मंडल की सल्ट विधानसभा के विधायक सुरेंद्र सिंह जीना का पिछले वर्ष नवंबर में अचानक निधन हो गया था। इसके बाद से ही यह सीट रिक्त चल रही थी। चुनाव आयोग ने सल्ट विधानसभा के उपचुनाव की तिथि 17 अप्रैल को निश्चित की है। अब राज्य के दोनों बड़े राजनीतिक दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की घोषणा की है। भाजपा ने उपचुनाव में इस सीट पर दिवंगत विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के भाई महेश जीना को प्रत्याशी बनाया है, पार्टी ने महेश जीना के नाम की घोषणा कर एक तरह से मतदाताओं से सहानुभूति बटोरने का काम किया है।

तो वहीं, कांग्रेस ने इस सीट पर 2017 में कांग्रेस की प्रत्याशी रही महिला उम्मीदवार गंगा पंचोली पर ही पुनः दांव खेला है। कांग्रेस का गंगा पंचोली पर दांव खेलने के पीछे का एक कारण यह भी हो सकता है कि पिछले विस चुनाव में गंगा पंचोली ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी। उस दौरान वह मात्र 2600 मतों के अंतर से पराजित हुईं थी।

तीरथ सिंह रावत की हो सकती है परीक्षा
2022 के चुनाव से पूर्व राज्य में 17 अप्रैल को होने जा रहा उप चुनाव एक तरह से मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की परीक्षा भी साबित होगा। भाजपा के चार साल के कार्यकाल से लेकर मुख्यमंत्री बदलने तक के सफर तक का जनता इस चुनाव के जरिए अपने मतों का उपयोग करेगी।

मुख्य चुनाव अधिकारी पर दो उम्मीदवारों ने लगाया फर्जी वोटर बनाने का आरोप

नगर उद्योग व्यापार महासंघ के चुनाव को लेकर आज दो उम्मीदवारों (अध्यक्ष पद सूरज गुल्हाटी व महामंत्री राजीव मोहन अग्रवाल) ने प्रेसवार्ता की। उन्होंने मुख्य चुनाव अधिकारी नरेश अग्रवाल पर अन्य विपक्षी चार उम्मीदवारों के एजेंट होने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव अधिकारी अन्य चार उम्मीदवारों के एजेंट के तौर पर काम कर रहे है, उनके लिए फर्जी वोटरों को भी तैयार किया जा रहा है। वहीं, नरेश अग्रवाल ने भी बचाव में सभी आरोपों को गलत बताकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

हरिद्वार मार्ग स्थित एक होटल में प्रेसवार्ता में महामंत्री प्रत्याशी राजीव मोहन अग्रवाल ने कहा कि महासंघ की सदस्यता तक समय के बजाए गुपचुप तरीके से की जा रही हे, साथ ही सदस्यता शुल्क भी नहीं लिया गया। उनकी ओर से जब आपत्ति की गई तो मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा उनके साथ दुव्र्यवहार किया गया। उन्होंने एजेंट होने का आरोप तक लगा डाला। साथ ही विपक्षी उम्मीदवारों की मुंशीगिरी करने का भी आरोप जड़ा। उन्होंने मुख्य चुनाव अधिकारी नरेश अग्रवाल को बदलने की मांग की। साथ ही वोटर लिस्ट जारी न होने तक चुनाव बहिष्कार की बात कहीं है।
जयेंद्र रमोला ने प्रेसवार्ता के दौरान प्रश्न किया कि क्या रात के दस बजे भी सदस्यता फार्म भरे जा सकते है, जबकि तय समय शाम सात बजे तक का ही निर्धारित हो। कहा कि रात के दौरान सदस्यता फार्म 400 थे, जबकि आज सुबह यह बढ़कर 1200 हो गए। रातों रात 800 फार्म की संख्या किस तरह बढ़ गई। उन्होंने सदस्यता शुल्क की रसीद का भी मामला उठाया। कहा कि नरेश अग्रवाल की ओर से यह कहा जाना कि सदस्यता फार्म का शुल्क की रसीद वह स्वयं काटेंगे, उनके आरोपों को सिद्ध करता है।

दीपक जाटव ने कहा कि बीते रोज लिखित में मुख्य चुनाव अधिकारी नरेश अग्रवाल को शिकायत की गई। मगर, कोई वाजिब जवाब नहीं मिला। आज तक उनके कार्यालय पर जवाब जानने पहुंचे तो मौके पर कुछ फार्म ऐसे मिले, जिनका आॅनलाइन जीएसटी नंबर जांचने पर गलत पाया गया। उन्होंने चुनाव बहिष्कार की बात कही।

इस मौके पर अध्यक्ष प्रत्याशी सूरज गुल्हाटी, ललित सक्सेना, अजय गर्ग, हितेंद्र पंवार, यशपार पंवार, राजेंद्र सेठी, अंशुल अरोड़ा आदि उपस्थित रहे।

उधर, अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए मुख्य चुनाव अधिकारी नरेश अग्रवाल ने कहा कि सभी आरोप बेबुनियाद है। दरअसल, चार दिन पूर्व ही सदस्यता बढ़ाने की तिथि तय की गई थी। इसमें जो लोग आरोप लगा रहे है, उन्होंने सदस्यता फार्म की सूची पेन ड्राइव में दी है, जबकि जो मौजूदा फार्म में सभी जानकारी स्पष्ट दी गई है। उन्होंने कहा कि जो भी फार्म स्वीकार किए गए है, वह सभी चुनाव समिति के सदस्यों की मौजूदगी में लिए गए हैं, कहा कि इन वोटर लिस्ट की सूची की जांच के बाद अंतिम वोटर लिस्ट जारी की जाएगी। चुनाव तय समय पर किए जाएंगे।

100 से ज्यादा लोगों के होली पर जमा होने पर हो सकती है कार्रवाई

होली पर्व पर इस बार 100 से अधिक लोगों के एक साथ रहने पर पाबंदी रहेगी। शासन स्तर से आज होली को लेकर एसओपी जारी की गई।
राज्य में कोविड के बढ़े मामलो को देखते हुए शासन ने होलिका पर्व आयोजन की गाइड लाइन जारी कर दी है।साथ ही नियमो के अनुपालन न होने पर जिम्मेदार अधिकारियों को कारवाई के लिए निर्देश दिए है।
1. होलिका दहन हेतु कार्यक्रम स्थल की क्षमता के 50 प्रतिशत व्यक्तियों हेतु अनुमति रहेगी तथा होलिका दहन स्थल पर अनावश्यक भीड़ का जमावाड़ा नहीं किया जायेगा। कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले समस्त व्यक्ति मास्क एवं सामाजिक दूरी का पालन करेंगे। होलिका दहन कार्यक्रम में 60 साल से ऊपर की महिला व पुरूष, दस साल से कम उम्र के बच्चे तथा गम्भीर बीमारी से ग्रसित व्यक्ति उक्त कार्यक्रम में प्रतिभाग करने से बचे ऐसे लोग सार्वजनिक स्थलों पर होली खेलने से बचें एवं घरों के अन्दर ही होली मनायें।
2. होली मिलन स्थल पर स्थल की क्षमता का 50 प्रतिशत (अधिकतम 100 ) से ज्यादा व्यक्ति प्रतिभाग नहीं करेंगे। 3. समारोह के आयोजकों द्वारा स्थल के प्रवेश पर थर्मल स्कैनिंग, सैनिटाइजर आदि व्यवस्थायें
सुनिश्चित की जायेंगी तथा बुखार, जुखाम आदि से पीड़ित व्यक्तियों तथा बिना मास्क पहने
व्यक्तियों को शालीनता के साथ स्थल पर प्रवेश न करने की सलाह दी जाये।
4. होली मिलन स्थलों पर शालीनता के साथ होली मनाई जायेगी। किसी प्रकार का हुडदंग आदि नहीं किया जायेगा। सार्वजनकि स्थल पर मदिरा पान, तेज म्यूजिक, लाउडस्पीकर आदि का प्रयोग नहीं किया जायेगा। 5. कैन्टेनमैन्ट जोन में होली खेलना पूर्णतया प्रतिबन्धित रहेगा । लोग अपने घरों के अन्दर ही होली
मना सकते हैं।
6. संकरी सडकों एवं संकरी गलियों आदि में होली खेलने से बचें ।
होली में पानी एवं गीले रंगों का प्रयोग करने से बचे व सखे रंग, आर्गनिक (फूलों से बने रंगा) का प्रयोग करते हुए अन्य लोगों को भी प्रेरित करें तथा गले मिलने आदि से बचने की कोशिश करें। 8. होली मिलन समारोह में यथासंभव खाद्य सामग्री आदि का वितरण से परहेज किया जायेगा याद
अति आवश्यक हो तो खाद्य पदार्थ एवं पेयजल वितरण हेतु डिस्पोजेवल गिलास तथा वर्तनों का
प्रयोग किया जायेगा ।

9. समारोह स्थल पर आयोजकों द्वारा डस्टविन आदि की समुचित व्यवस्था की जायेगी तथा कूडे आदि को इधर-उधर न बिखराकर डस्टबिन का प्रयोग किया जायेगा । 10. समारोह स्थल पर कोविड के मानकों एवं दिशा -निर्देशों का समुचित अनुपालन करान की
दायित्व आयोजकों का होगा।
11. समय-समय पर भारत सरकार, राज्य सरकार, एवं जिला प्रशासन द्वारा जारी किये गये दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग, सेनेटाइजेशन और मास्क का प्रयोग इत्यादि शामिल है।
12. माह की विभिन्न तिथियों में मनाये जाने वाले अन्य त्यौहारों में भी कोविड संक्रमण से बचाव हेतु सोशल डिस्टेंसिंग, सेनेटाइजेशन और मास्क का प्रयोग किया जायेगा एवं त्यौहार मनाने के स्थल पर थर्मल स्कैनिंग आदि व्यवस्थायें सुनिश्चित की जायेंगी । त्यौहार के स्थल पर 50 प्रतिशत (अधिकतम 100) से ज्यादा व्यक्ति प्रतिभाग नहीं करेंगे। त्यौहार के स्थल पर यथासंभव खाद्य सामग्री आदि का वितरण से परहेज किया जायेगा एवं समय-समय पर भारत सरकार, राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा जारी किये गये दिशा दृ निर्देशों का कडाई से अनुपालन किया जाये

कुंभ मेला क्षेत्र में व्यवस्थाओं को दो दिन में पूरा करें अधिकारीः मुख्य सचिव

आस्था का महापर्व कुंभ मेला शुरू होने में केवल चार दिन शेष रह गए हैं। बावजूद इसके अभी तक ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए जुटाई जाने वाली व्यवस्थाएं अधूरी हैं। मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने निरीक्षण के बाद यह तमाम बातों को उजागर किया।

दरअसल आज मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट, सरकारी अस्पताल मुनीकीरेती और स्वर्गाश्रम क्षेत्र में तमाम व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान काफी सारी कमियां मुख्य सचिव को दिखाई दी। जिस पर उन्होंने अधिकारियों को फटकार भी लगाई। मौके पर 2 दिन में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान कुंभ मेला अधिकारी दीपक रावत भी साथ में उपस्थित रहे। कुंभ मेला अधिकारी ने निरीक्षण से पहले गढ़वाल मंडल विकास निगम के रिसोर्ट में तमाम विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक भी की। जिसमें कुंभ मेले की व्यवस्थाओं में दिखाई दे रही कमियों को लेकर सवाल जवाब किए गए। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि कुंभ की व्यवस्थाओं को लगातार बैठक दर बैठक हो रही है, फिर भी कमियां दुरुस्त होने का नाम नहीं ले रही हैं। ऐसे में मुख्य सचिव के द्वारा 2 दिन में कमियों को पूरा करने के दिए गए निर्देश कितने कारगर साबित होंगे। वही नगर की महापौर अनीता ममगाई ने मुख्य सचिव को एक ज्ञापन देकर गंगा की जलधारा त्रिवेणी घाट तक लाने के लिए तटबंध बनाने की मांग की है।

निरीक्षण में मेलाधिकारी कुम्भ दीपक रावत, जिलाधिकारी गढ़वाल डाॅ0 विजय कुमार जोगदण्डे, जिलाधिकारी देहरादून डॉ आशीष कुमार श्रीवास्तव, जिलाधिकारी ईवा आशीष श्रीवास्तव आदि अधिकारी मौजूद थे।

वनाग्नि रोकने के लिये युद्धस्तर पर करें तैयारियांः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी को निर्देश दिये हैं कि वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिये पुख्ता व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली जाएं। इसके लिये युद्धस्तर पर तैयारियां कर ली जाएं। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में जहां पहुंचना बहुत मुश्किल हो, वहां वनाग्नि शमन के लिए हेलीकाप्टर की उपलब्धता होनी चाहिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वनाग्नि के प्रति जन जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाए और इसे रोकने में स्थानीय लोगों से भी सहयोग लिया जाए। स्थानीय सहभागिता से ही वनों का संरक्षण किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वनाग्नि प्रबंधन की नियमित समीक्षा की जाए और फील्ड लेवल तक सभी जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित हो। फायरलाईन की भी मॉनिटरिंग की जाए। इसके लिये ड्रोन का भी उपयोग किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वनाग्नि शमन के दौरान मृतक कार्मिकों और स्थानीय नागरिकों के परिवारों को अनुग्रह राशि अविलम्ब उपलब्ध कराई जाएं।

सीएम के निर्देश पर हुई एक बार समाधान योजना लागू

आम लोगों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के निर्देश पर ’एक बार समाधान योजना, 2021’ लागू की गई है। इस बारे में शासन से अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने आम जन की सहूलियत के लिए भवन उपविधि का सरलीकरण भी जल्द ही करने के निर्देश दिये हैं।

पूर्व में एक बार समाधान योजना के क्रियान्वयन में उत्पन्न व्यवहारिक कठिनाईयों का निराकरण करने के लिए और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री के निर्देश पर यह ’एक बार समाधान योजना, 2021’ लागू की गई है।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार आम जन को लाभ पहुंचाने के लिये कार्य कर रही है। जन केंद्रीत योजनाओं पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इसी क्रम मे ’एक बार समाधान योजना लागू की गई है।

शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत ने कहा कि ’एक बार समाधान योजना’ से आम लोगों को बङी राहत मिलेगी और उनकी व्यावहारिक दिक्कतें दूर होंगी। इससे पर्यटन आदि क्षेत्रों में लोगों की आजीविका में भी फायदा होगा।
एक बार समाधान योजना में एकल आवासीय एवं व्यवसायिक भवन, आवासीय/व्यावसायिक भू-उपयोग में व्यवसायिक दुकान/ कार्यालय, आवासीय क्षेत्रों में नर्सिंग होम/क्लीनिक/ओ०पी०डी० / पैथोलॉजी लैब / डाइग्नोस्टिक सेंटर/चाईल्ड केयर/नर्सरी स्कूल /क्रेच एवं प्ले ग्रुप स्कूल आदि के संबंध में किये गये अनियमित निर्माण कार्य को शमनीय किया जाना प्रस्तावित है।

19 निरीक्षकों के हुए तबादले, 10 पहाड़ चढ़े तो 09 उतरे मैदान

पुलिस विभाग से बड़ी खबर है, 19 निरीक्षकों के तबादले किए गए है, जिनमें 10 को पहाड़ चढ़ाया गया है तो 09 को मैदान उतारा गया है। आज डीआइजी गढ़वाल रेंज नीरू गर्ग ने तबादलों की सूची जारी की है।

शहर कोतवाल शिशुपाल नेगी का ट्रांसफर टिहरी गढ़वाल, डोईवाला कोतवाली में तैनात निरीक्षक सूर्यभूषण नेगी को टिहरी गढ़वाल, डालनवाला कोतवाली के निरीक्षक मणिभूषण श्रीवास्तव को पौड़ी गढ़वाल, एसएसपी आफिस में तैनात निरीक्षक चंद्रभान सिंह अधिकारी को चमोली, नेहरू कॉलोनी में तैनात राकेश गुसांई को चमोली, विकासनगर में तैनात निरीक्षक राजीव रौथाण को उत्तरकाशी, एसएसपी कार्यालय में तैनात निरीक्षक भावना कैंथोला व नदीम अतहर को टिहरी गढ़वाल व हरिद्वार जिले में कनखल थाने में तैनात निरीक्षक कमल कुमार लुंठी को उत्तरकाशी और रानीपुर कोतवाली प्रभारी योगेश सिंह देव का ट्रांसफर पौड़ी गढ़वाल किया गया है।

वहीं, उत्तरकाशी में तैनात निरीक्षक दिग्पाल सिंह कोहली, टिहरी गढ़वाल में तैनात रविंदर कुमार, चमोली थाने में तैनात गिरीश चंद्र शर्मा व महेश कुमार लखेड़ा, रुद्रप्रयाग थाने में तैनात निरीक्षक होशियार सिंह पंखोली, पौड़ी गढ़वाल में तैनात संर्पूणानंद गैरोला को जिला देहरादून और टिहरी गढ़वाल में तैनात निरीक्षक रामकिशोर सकलानी व मनीष उपाध्याय, पौड़ी गढ़वाल में तैनात प्रमोद कुमार उनियाल को हरिद्वार जिले में भेजा गया है।

तीरथ बदल सकते हैं त्रिवेंद्र सरकार के पीपीपी मोड वाला फैसला…

देहरादून। प्रदेश की बागडोर संभालते ही सीएम तीरथ रावत द्वारा त्रिवेंद्र सरकार के कुछ तथाकथित जनभावना विरोधी निर्णयों पर पुनर्विचार करने के फैसलों से प्रदेश भर में आम जनता के मध्य संतोष और खुशी का माहौल है। नंदप्रयाग-घाट मोटरमार्ग के चैड़ीकरण, देवस्थानम बोर्ड के गठन, विकास प्राधिकारण व गैरसैण मंडल की स्थापना से संबंधित मसलों पर तीरथ रावत द्वारा बेबाकी से उदारतापूर्वक विचार कर पुनर्विचार करने की बात कही गई है। अब पौड़ी की जनता त्रिवेंद्र रावत सरकार द्वारा जिला अस्पताल पौड़ी को पीपीपी मोड पर संचालन हेतु एक संस्था को देने के निर्णय पर भी पुनर्विचार होने के प्रति आश्वस्त है।

त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख्यमंत्रित्व काल में प्रदेश सरकार द्वारा जनपद पौड़ी के जिला अस्तपाल सहित जनपद के ही सीएचसी घंडियाल व सीएचसी पाबौ को संचालन हेतु देहरादून स्थित एक ट्रस्ट को सौंप दिया गया था। हाल ही में ट्रस्ट द्वारा तीनों अस्पतालों का अधिग्रहण कर संचालन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। त्रिवेंद्र सरकार द्वारा जनता के विरोध को दरकिनार कर लिए गए इस निर्णय से क्षेत्र की जनता मायूस थी, लेकिन त्रिवे्रद्र के पदच्युत होने व तीरथ द्वारा सीएम पद पर विराजमान होते ही तमाम जनविरोधी फैसलों पर गंभीरता से पुनर्विचार करने के कदम से लोगों में उम्मीद जगने लगी है।

दरअसल, जिला अस्पताल मंडल मुख्यालय पौड़ी का एकमात्र अस्तपाल है, जिससे नगर की चालीस हजार की आबादी के साथ आसपास के चार विकासखंडों की करीब एक लाख की आबादी सेवित होती है। पीपीपी मोड पर दिए जाने से पूर्व इस अस्पताल में डेढ़ दर्जन के करीब वरिष्ठ डाक्टर सेवाएं दे रहे थे, लेकिन यकायक चल रहे इस अस्पताल को सरकार द्वारा पीपीपी मोड पर दे दिया गया। पीपीपी मोड पर दिए जाने के बाद से क्षेत्रवासियों के मन में अनेक आशंकाएं पैदा होने लगी हैं। बताया जा रहा है कि पीपीपी मोड पर संचालन कर रही संस्था द्वारा इस महत्वपूर्ण अस्पताल में संस्था के मेडिकल कालेज में अध्ययनरत जूनियर डाक्टरों को प्रैक्टिस हेतु अधिग्रहण किए गए अस्पतालों में भेजे जा रहे हैं। इतना ही नहीं सूत्रों की माने तो सरकार और ट्रस्ट के मध्य हुए एमओयू की शर्तों के तहत इन अस्पतालों में तैनात होने वाले डाक्टरों को कम से कम तीन वर्ष अस्पताल में सेवाएं देनी होंगी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि संस्था द्वारा 15-15 दिन के लिए जूनियर डाक्टरों को रोटेट कर काम चलाया जा रहा है। ऐसे में मरीजों को स्तरीय सलाह व चिकित्सा मिलना संभव नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इन अस्पतालों में सेवाएं दे रहे संस्था के डाक्टर भारतीय चिकित्सा परिषद मंे पंजीकृत हैं भी अथवा नहीं।

’मेडिको लीगल कार्यों के संपादन की भी चुनौती’

वैधानिक रूप से पोस्टमार्टम जैसे मेडिको लीगल कार्यों के लिए सरकारी चिकित्सक का होना आवश्यक है, मंडल मुख्यालय जैसे स्थान पर आवश्यकता पड़ने पर पोस्टमार्टम के लिए एक अदद डाक्टर न होने से भविष्य में अनेक दिक्कतें आ सकती हैं। गौरतलब है कि गत दिनों रामनगर अस्पताल, जो पीपीपी मोड पर संचालित किया जा रहा है, वहां एक शव के पोस्टमार्टम के लिए परिजनों को तीन दिन का लंबा इंतजार करना पड़ा। यदि ऐेसी परिस्थिति पौड़ी जैसे पहाड़ी नगर में बनती है तो भविष्य में यह सरकार के खिलाफ आका्रेश का कारण बन सकता है।

’पिछले अनुभवों से आशंकित हैं क्षेत्रवासी’

दरअसल, सरकार द्वारा पूर्व में भी प्रदेश के अनेक अस्पतालों को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के नाम पर पीपीपी मोड पर दिया गया था, लेकिन सेवाएं बेहतर होने के विपरीत इन अस्पतालों की दशा और बदतर हो गई, ऐसे अधिंकाश अस्पताल तो रैफर सेंटर मात्र बन कर रह गए। बीते एक साल की सुर्खियों पर नजर डाली जाए तो हाल ही में टिहरी के जिला अस्तपाल व रामनगर के संयुक्त अस्तपाल को लेकर लिया गया निर्णय उल्टा साबित हो रहा है। ऐसे में क्षेत्रवासी सरकार के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।

’पीपीपी मोड तकनीकि रूप से भी असंगतः डा0 जोशी’

उत्तराखंड राजकीय चिकित्सक संघ के पूर्व अध्यक्ष व प्रदेश के जाने माने काया चिकित्सक डा0 एसडी जोशी का कहना है कि अक्सर देखने में आया है कि ऐसी संस्थाओं द्वारा एमसीआई और उत्तराखंड चिकित्सा परिषद से बिना मान्यता प्राप्त डाक्टरों से प्रेक्टिस करवाई जाती है, जो कानूनी दृष्टि से भी उचित नहीं है। किसी अनहोनी की स्थिति में यह कानूनी तौर पर आॅॅॅफेंस का मामला भी बन सकता है। वहीं डा0 जोशी का कहना है कि किसी भी मरीज की व्यापक जांच व इलाज के लिए निंरतर जांच आवश्यक है। इन संस्थाओं द्वारा हर प्रदंह दिन में डाक्टर बदल दिए जाते हैं जिससे नए चिकित्सक को मरीज की केस हिस्ट्री का आंकलन करने में दिक्कत आती है, जिससे मरीजों के उपचार में कुछ दिक्कतें भी पेश आ सकती हैं।

भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने को मेयर ने लिया भगवाकरण का सहारा, प्रेसवार्ता में पार्षदों ने रखी अपनी बात

इन दिनों में ऋषिकेश में भगवा रंग काफी चर्चा में है। बीते 15 मार्च को नगर निगम ऋषिकेश की बोर्ड बैठक में ओरेंज सिटी को लेकर मेयर अनिता ममगाईं की ओर से प्रस्ताव लाया गया। इसमें भाजपा के अधिकांश पार्षद सहित कांग्रेसी पार्षदों ने विरोध जताया था। करीब 27 पार्षदों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। इसके बावजूद यह प्रस्ताव को निरस्त नहीं किया गया। इसके अगले ही दिन से ऋषिकेश में हर कोई भगवा रंग को लेकर अपनी-अपनी राय देने लगा।

हुआ यूं कि मेयर अनिता ममगाईं ने संतों के साथ न सिर्फ बैठक की, बल्कि नगर के मुख्य मार्ग घाट रोड पर संतों के साथ रैली निकाली। संतों ने भी अपनी-अपनी राय देकर उन पार्षदों की निंदा कर डाली। अब आज मेयर की संतों के साथ रैली में भाजपा पार्षदों ने काउंटर जवाब मारा है। रेलवे रोड स्थित भाजपा कार्यालय में भाजपा पार्षदों की बैठक हुई। इसमें निर्वाचित 16 भाजपा पार्षद शामिल हुए, जबकि चयनित पार्षदों ने भी शिरकत की। सभी ने भगवा रंग को लेकर पार्षदों पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया। पार्षदों ने कहा कि भगवा रंग उनके दिलों, दिमाग में बसता है। उसके बारे में गलत कहना तो दूर सुन भी नहीं सकते। उन्होंने बल्कि मेयर अनिता ममगाईं पर ही भाजपाई पार्षदों को संतों के साथ मतभेद पैदा करने का आरोप लगाया।

भाजपा से ही तीन बार के पार्षद शिवकुमार गौतम ने कहा उनका विरोध भगवा रंग के लेकर नहीं है, उन्होंने सिर्फ ओरेंज सिटी के नाम वित्तीय अनियमितता करने का आरोप लगाया था। मगर, मेयर अनिता ने इसे दूसरे रूप में घुमा दिया और पार्षदों के खिलाफ गलत माहौल बनाया। उन्होंने कहा कि सभी पार्षद जनता से मत से जीत कर सदन में पहुंचे है, लिहाजा प्राथमिकता वार्डों में धरातल स्तर पर विकास कार्यों को लेकर होनी चाहिए। जबकि विकास कार्य ठप पड़े हुए है। उन्होंने यहां तक कहा कि मेयर अनिता ममगाईं विकास कार्यों में हुई अनियमितताओं पर पर्दा डालते हुए अपने भ्रष्टाचार को छुपाने को भगवाकरण का शिगूफा चला रही है।
ग्रामीण क्षेत्र से भाजपा पार्षद सुंदरी कंडवाल और शहरी क्षेत्र से भाजपा पार्षद रीना शर्मा ने कहा कि भाजपा हिंदुत्व की पार्टी है। उनके खून में भगवा है। ऐसे में भगवा रंग को लेकर राजनीति करना अच्छी बात नहीं है। उन्होंने मेयर पर आरोप लगाया कि मेयर तानाशाही कर रही है, सदन में पार्षदों की आवाज नहीं सुनी जा रही है।
भाजपा पार्षद विकास तेवतिया ने स्ट्रीट लाइट के यूनीपोल की खरीद फरोख्त को लेकर मेयर अनिता ममगाईं को घेरा। उन्होंने कहा कि इसमें मेयर ने अनियमितता की है। जिस पर उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि आगामी 21 मार्च की बोर्ड बैठक में इस मुद्दे को भी रखा जाएगा। कहा कि भगवा रंग हमारी पहचान है। इसका कोई विरोध नहीं है।

मतभेदों को लेकर दोनों पक्षों से होगी बातः दिनेश सती

ऋषिकेश भाजपा मंडल अध्यक्ष दिनेश सती ने कहा कि तीन दिनों से मेयर और भाजपा पाषदों के बीच मतभेद का मुद्दा गरमाया हुआ है। उक्त मामले को संगठन दोनों पक्षों के साथ मिलकर निपटायेगा। उन्होंनें कहा कि मेयर व पार्षद संगठन के ही लोग है।

प्रेस वार्ता में पार्षद शौकल अली, लव कांबोज, मीनाक्षी बिरला, शारदा देवी, सोनू प्रभाकर, तनु तेवतिया, जयेश राणा, चेतन चैहान, राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट, राजेश दिवाकर, लता तिवारी आदि 16 पार्षद व नामित पार्षद मौजूद रहे।

नगर निगम बोर्ड बैठक में सिर्फ हंगामा हुआ, बजट और प्रस्ताव नहीं हुए पास

नगर निगम ऋषिकेश की आज बोर्ड बैठक अब तक की सबसे शर्मशार रही। ढाई साल में एक पहला वाक्या रहा जब एक भी प्रस्ताव और न ही बजट पास हुआ। पूरे दिन सदन में सिर्फ हंगामा देखने को मिला। हंगामें में पार्षद द्वारा मेयर पर व्यक्तिगत आरोप भी लगाया गया, तो कई पार्षदों ने अपने वार्ड में विकास कार्यों की अनदेखी करने की अपनी पीड़ा भी बयान की। साथ ही निगम के अधिकारियों को पार्षदों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया। सदन में नए प्रस्तावों पर चर्चा के बजाए पुरानी बोर्ड बैठक की पुष्टि की गई। इसमें हंगामा जोरदार देखने को मिला। सदन में पक्ष विपक्ष ने एक दूसरे पर राजनीति करने के आरोप भी जड़े।

सुबह 11 बजे नगर निगम की बोर्ड बैठक होनी थी। मगर, करीब 20 मिनट बाद यह बैठक शुरू हुई। सदन की कार्रवाई को शुरू किया ही जा रहा था कि पार्षद राकेश मियां ने बीते वर्ष 30 जुलाई को हुई बोर्ड बैठक के प्रस्तावों व कार्यों को लेकर निगम अफसरों से रिपोर्ट मांगी। इसपर मेयर अनिता ने पूर्ववर्ती बैठक की पुष्टि के लिए हामी भरी गई। पार्षद मियां ने नगर के ड्रेनेज सिस्टम पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि जब पूर्व में बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास है, तो किस कारण इसमें विलंब हो रहा है। इस पर निर्माण विभाग के एई आनंद मिश्रवाण ने बताया कि यह कार्य अगले वित्तीय वर्ष यानी अप्रैल माह से शुरू किया जाना है, यह अमुत योजना के तहत किया जाएगा। इसी तरह पार्षद शिव कुमार गौतम ने डेढ़ वर्ष से अधर में लटके नाले के निर्माण, पार्षद सुंदरी कंडवाल ने पास प्रस्तावों का निर्माण कार्य शुरू न किए जाने पर सवाल किए।

इस पर नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वींरियाल ने कहा कि ऐसे वार्ड जहां बहुत काम हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के साथ किया जाएगा।

त्रिवेणी घाट के आरती स्थल पर लगे पत्थर गलतः रीना शर्मा
पार्षद रीना शर्मा ने सदन के समक्ष यह मामला उठाया कि त्रिवेंणी घाट स्थित आरती स्थल पर ग्रेनाइट के पत्थर लगा दिए गए है, जिस पर चलकर श्रद्धालु चोटिल हो रहे है। इस पर मेयर ने भी माना कि ग्रेनाइट पत्थर का वहां लगाया जाना गलत फैसला रहा है। इसमें उन्होंने एमडीडीए के अफसरों से भी बात की है।

निगम के दिए कूड़ेदान में सज रहे गमलेः राधा रमोला
पार्षद राधा रमोला ने कहा कि नगर निगम ने जो गीले और सूखे कूड़ेदान वितरित किए हैं, उन पर लोग अपने घरों में आटा, चावल रखने के उपयोग में ला रहे है। इतना ही नहीं अधिकांश लोग उसमें गमला लगाकर घरों में टांगे रखे है। इस पर एमएनए ने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान की जाएगा। जो भी आवश्यक कार्यवाही हो सकती है, की जाएगी।

कब-कब हंगामे का माहौल बना और जोरदार हंगामा हुआ

1. पार्षद का निकला दर्द, रूदन भरी आवाज में मेयर पर लगा डाले आरोप
सदन में प्रत्येक वार्ड के पुराने प्रस्तावों पर अपनी रिपोर्ट देने के दौरान पार्षद जयेश राणा का भी नंबर आया। उन्होंने अपनी बात जरूर रखी। मगर, अमर्यादित तरीके से। हुआ यूं कि मेयर अनिता ममगाईं पर पार्षद जयेश राणा ने वार्ड में काम न होने देने, विधानसभा अध्यक्ष के कार्यों को सोशल मीडिया पर अपलोड करने तथा प्रचारित करने पर सड़क बनवाने की मांग को ठुकरा देने व इग्नोर करने का आरोप जड़ दिया। पार्षद भाव विभोर होते हुए बहुत आगे तक निकल गए। इसी बीच मेयर अनिता ममगाईं ने भी रूठे स्वर में पार्षद से बात की और सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला।

2. इसी बीच शिवाजी नगर में चले धरने को लेकर भी बात उठी। पार्षद शिवकुमार गौतम ने सदन के समक्ष मेयर पर आरोप लगाया कि उक्त धरना उन्हीं के इशारे पर किया गया। उन्हीं के साथ हर वक्त रहने वाले लोगों ने धरने को समर्थन दिया। इसके बाद रणनीति के तहत मेयर ने ही धरने को समाप्त कराया। इस पर मेयर बिफर गई और आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि मेरे साथ जो कोई भी रहे, इससे आपको क्या लेना देना।

3. पार्षद मनीष शर्मा ने पार्षद शिव कुमार गौतम को कहा कि यह भाजपा कार्यालय नहीं है जो यहां भाजपा की बात की जा रही है। इस पर अधिकांश चयनित और नामित पार्षदों ने आपत्ति जताई और एक बार फिर सदन में भयंकर हंगामा देखने को मिला।

4. पार्षद राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट ने निगम के अफसरों पर यह आरोप लगाया कि जो कार्य पूर्व में टीएचडीसी की ओर से किया गया है, उसे नगर निगम का दिखाकर वहां साइन बोर्ड क्यों लगाया गया। इतना ही नहीं निगम की ओर से एक साल की उपलब्धि वाली पुस्तक पर इसे प्रकाशित तक कर दिया गया। इस पर ज्यादातर पार्षदों ने नाराजगी जताई और पुनः सदन में हंगामा देखने को मिला। इस पर निगम ने अपनी गलती स्वीकार की और इसे सुधारने की बात कही।

5. वार्ड 40 पार्षद शारदा देवी ने निगम पर बिना काम किए उपलब्धि वाली पुस्तक पर निर्माण कार्यों को प्रकाशित करने पर घोर आपत्ति जताई। इस पर भी हंगामा होता रहा।

6. करीब शाम चार बजे बोर्ड की आज की बैठक शुरू हुई। पार्षद विकास तेवतिया, पार्षद शिव कुमार गौतम ने निगम पर बजट की काॅपी पूर्व में न देकर मौके पर दिए जाने का आरोप लगाया। यहां भी हंगामा हुआ।

7. आज की बोर्ड बैठक का पहला प्रस्ताव ऋषिकेश को ओरेंज सिटी करने को लेकर मेयर अनिता ममगाईं की ओर से दिया गया। इस पर पहले तो पार्षद शिव कुमार गौतम ने आपत्ति जताई कि क्या एक मेयर अपना प्रस्ताव दे सकती है। काफी देर इस पर बहस होती रहीं। इसके बाद ओरेंज सिटी को लेकर करीब 27 पार्षदों ने सदन को बीच में ही छोड़ दिया और नगर निगम के खिलाफ बाहर नारेबाजी की गई। पार्षदों के बैठक में न आने पर मेयर अनिता ममगाईं ने उक्त बैठक 21 मार्च दिन रविवार को करने की घोषणा की। इस पर उपस्थित पार्षदों ने सहमति दी।

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