दो चरणों में होगा लच्छीवाला नेचर पार्क का पुननिर्माण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने लच्छीवाला नेचर पार्क के पुनर्निमाण संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस नेचर पार्क का निर्माण दो चरणों में किया जायेगा। जिस पर 1008.35 लाख का व्यय आगणित है। इसके लिये कैम्पा मद में भी एक करोड़ की धनराशि प्रविधानित है।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा जनपद पौड़ी के विधानसभा क्षेत्र चैबटाखाल के विकासखण्ड एकेश्वर में पाटीसैंण तछवाड़ एकेश्वर मोटर मार्ग के सुधारीकरण एवं डामरीकरण के लिये 306.42 लाख तथा विधानसभा क्षेत्र घनसाली के अंतर्गत कोट से चैठारा होते हुए हुन्ण तक मोटर मार्ग निर्माण हेतु 28.04 लाख की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री घोषणा के तहत विकास खण्ड जयहरीखाल के अन्तर्गत मोलखण्डी अकरी तथा मोलखण्डी सकरी हेतु मोटर मार्ग नव निर्माण हेतु भी मुख्यमंत्री द्वारा 17.24 लाख की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पौत्रियों के विवाह को सरकार ने दी धनराशि
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जनपद देहरादून, पौड़ी उत्तरकाशी एवं बागेश्वर के 06 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पौत्रियों के विवाह हेतु 3 लाख की धनराशि स्वीकृत की है। इस प्रकार 50 हजार की धनराशि प्रति आवेदक को उपलब्ध होगी।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा उत्तराखण्ड मुक्त विश्व विद्यालय हल्द्वानी में अतिथि गृह, कुलपति आवास एवं बहुउदेश्यीय भवन हेतु फर्नीचर फिक्सिंग कार्य हेतु 928.55 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। यह धनराशि विश्व विद्यालय द्वारा स्वयं के संसाधनों से व्यय की जायेगी।

बागेश्वर में अधिकारियों की बैठक पर बोले सीएम, मनरेगा में अधिक से अधिक लोगों का पंजीकरण करें

मुख्यमंत्री ने बागनाथ मंदिर में जाकर पूजा अर्चना कर मंदिर की परिक्रमा की। इस दौरान उन्होंने नये निमार्ण, जीर्णोद्धार तथा सौंैदर्यीकरण कार्यों के बारे में जानकारी लेते हुए कहा कि मंदिर का परिदृश्य पहाड़ी शैली पर हों इस ओर कार्यदायी संस्था को कार्य करने के निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बागेश्वर में अधिकारियों के साथ विभिन्न योजनाओं व कार्यों की समीक्षा बैठक की। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में कोविड-19 से निपटने के लिए हम सभी को सामूहिक रूप से प्रयास करने होंगे, इसमें किसी भी प्रकार का शिथिलता न बरती जाय। इस कार्य में पुलिस को एक्टिव होकर कार्य करना होगा तथा बिना मास्क व नियमों का पालन न करने वालों के विरूद्ध आवश्यक कार्रवाई करते हुए जुर्माना वसूला जाय।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि इस योजना से लाभार्थियों को लाभान्वित करने के लिए विभाग निरंतर बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करें। लाभार्थियों की परेशानियों को दूर करने के लिए बैंकों के साथ मेले का आयोजन करें तथा इसके लिए जनपद स्तर पर एक नोडल अधिकारी की तैनाती की जाय। सीएम ने पशुपालन विभाग को पोल्ट्री के क्षेत्र में सुनियोजित तरीके से कार्य करने को कहा, उन्होंने कहा कि कोई भी कार्य परिणात्मक होना चाहिए। मनरेगा की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिक से अधिक व्यक्तियों का पंजीकरण कराने के निर्देश दिये।

ग्रोथ सेंटर योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि ग्रोथ सेंटर आत्मनिर्भर भारत और वोकल फोर लोकल का अच्छा उदाहरण है, इसलिए ग्रोथ सेंटर से जुड़े लोगों के स्किल डेवलवमेंट की भी व्यवस्था की जाय। ग्रोथ सेंटरों की उत्पादों की सीजनल ही नहीं बल्कि नियमित बिक्री सुनिश्चित की जाय। उन्होंने कहा कि शहद की बहुत मॉग रहती है इसलिए इससे संबंधित ग्रोथ सेंटर बनाये जाने के लिए कार्य किया जाय। उन्होंने मसाला प्रसंस्करण ग्रोथ सेंटर के बारे में कहा कि इसके उत्पाद पूर्ण रूप से आर्गेनिक हो तथा इन्हें प्रमाणित ऐजेंसी द्वारा प्रमाणित कराया जाय। उन्होंने किसानों की आय में अभिवृद्धि के लिए भेड़ पालकों को संगठित करने को कहा ताकि भेड पालक ऊन को एकत्रित कर क्रेता विक्रेता सम्मेलन के माध्यम से विक्रय कर पायें, जिससे उनकी आय में अभिवृद्धि हो पायेगी, तथा उन्हें उन्नत नस्लों के भेड़ों को पालने के लिए प्रोत्साहित किया जाय।

जल जीवन मिशन की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत एक रूपये में पानी के कनेक्शन दिये जा रहे है। तथा यह कार्य तीन चरणों में पूर्ण करना है जिसमें प्रथम चरण पर पानी का कनेक्शन, द्वितीय चरण में पानी की मात्रा तथा तृतीय चरण में गुणवत्ता इसलिए विभाग प्रत्येक दिन का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करें, इसके लिए उन्होंने ग्राम व न्याय पंचायत स्तर पर कार्य योजना तैयार करने को कहा।

मुख्यमंत्री घोषणा के संबंध में उन्होंने कहा कि जो कार्य शासन स्तर पर लम्बित है उन्हें चिन्हित कर तत्काल शासन को प्रेषित की जाय। सिंचाई विभाग द्वारा बागेश्वर के घाट निर्माण के संबंध में उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में स्थानीय पत्थरों का उपयोग किया जाय। जिला योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि 40 प्रतिशत धनराशि का व्यय रोजगारपरक योजनाओं पर अनिवार्य रूप से किया जाय।

बैठक से पूर्व मुख्यमंत्री ने जनपद में ई ऑफिस का शुभारम्भ किया। इस संबंध में जिलाधिकारी विनीत कुमार ने अवगत कराया कि इस प्रक्रिया को जिला कार्यालय से शुरू किया जा रहा है तद्पश्चात मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय तथा तहसील कार्यालयों में प्रारम्भ किया जायेगा।

बागेश्वर में सीएम ने किया जिला भाजपा कार्यालय का उद्धाटन

बागेश्वर। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने विधानसभा क्षेत्र बागेश्वर की 12 योजनाओं का शिलान्यास धनराशि 4032.91 लाख तथा 05 योजनाओं का लोकार्पण धनराशि 848.33 लाख से किया। वहीं, विधानसभा कपकोट की 15 योजनाओं का शिलान्यास धनराशि 4480.59 लाख तथा 09 योजनाओं का लोकार्पण धनराशि 1825.34 लाख इस प्रकार 14 योजनाओं का लोकार्पण तथा 27 योजनाओं का शिलान्यास कुल धनराशि 11187.17 लाख के विभिन्न विभागों के योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री ने जिला कार्यालय भाजपा का भी उद्घाटन किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य व अवस्थापना के क्षेत्र पर कार्य कर रही है। प्रदेश सरकार विकास को प्राथमिकता देते हुए अपना कार्य कर रही है। साढ़े तीन वर्षों में प्रदेश सरकार ने अपनी साफ सुथरी छवि बनाई है, इसी का परिणाम है कि इस अवधि में कोई भी भ्रष्टाचार का मामला नहीं आया। कोविड के दौरान भी प्रदेश सरकार ने विकास कार्यों को रूकने नहीं दिया। कोरोना संक्रमण के रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए स्वास्थ को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए प्रत्येक जनपद में आईसीयू तथा ऑक्सीजन बैड की उपलब्धता सुनिश्चित करायी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्तमान समय में 2400 डॉक्टर कार्यरत है तथा 720 डॉक्टर तथा नर्सेज की भर्ती की जा रही है। उत्तराखण्ड अटल आयुष्मान योजना की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है। इस योजना के अन्तर्गत देश के 22 हजार अस्पतालों में 05 लाख रूपये की राशि तक की चिकित्सा सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगले सत्र से अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में कक्षायें शुरू हो जायेंगी तथा पिथौरागढ़, हरिद्वार व रूद्रपुर में मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति मिल चुकी है।

महिला समूहों को 05 लाख तक का ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर दे रही है तथा आगामी 09 नवम्बर से किसानों को 03 लाख तक का ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ऑगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चे स्वस्थ रहे इस ओर प्रदेश सरकार कार्य कर रही है जिससे ऑगनबाड़ी केन्द्रों में पढ़ने वाले बच्चों को 02 दिन दूध, 02 दिन अण्डा और 02 दिन फल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऑगनबाड़ी केन्द्रों में सबसे अधिक पैसा देने वाले में देश के टॉप थ्री प्रदेशों में उत्तराखण्ड का भी नाम भी शामिल है। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकत्रियों का पिछले 05 साल का मानधन की धनराशि का बकाया 25000 रूपये उनके खाते में डाला गया है तथा प्रदेश सरकार ने इसे सालाना रू0 5000 से बढाकर रू0 18000 सालाना किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं, किसानों व डॉक्टरों आदि के संबंध में अपनी घोषणाओं के अनुसार कार्य कर रही है।

मौके पर प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत, अध्यक्ष जिला पंचायत बागेश्वर बसंती देव, क्षेत्रीय विधायक चन्दन राम दास, विधायक कपकोट बलवन्त सिंह भौर्याल आदि मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास कार्यों के लिये धनराशि स्वीकृत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ‘‘मेरा गांव मेरी सड़क‘‘ योजना के अन्तर्गत 7 सड़कों हेतु 01 करोड़ 83 लाख की धनराशि स्वीकृत की है। जिसमें जनपद टिहरी व अल्मोड़ा की दो हैं तथा उधम सिंह नगर की 03 सड़के शामिल है। मुख्यमंत्री की घोषणा के अधीन जनपद टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम में अवशेष कार्यों के निर्माण हेतु 91.06 लाख की धनराशि स्वीकृत करने के साथ ही मुख्यमंत्री ने रामलीला भवन बागेश्वर के सौन्दर्यीकरण हेतु 15 लाख की धनराशि स्वीकृत की है।

मुख्यमंत्री द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना अन्तर्गत ग्राम पंचायत जसपुर, विकासखण्ड भिलगंना जनपद टिहरी में सांस्कृतिक भवन के निर्माण हेतु प्रथम किस्त के रूप में 3.99 लाख की धनराशि स्वीकृत की है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कुम्भ मेला 2021 के अन्तर्गत लालतारो पुल स्थित 33-11 केवी उप संस्थान कन्ट्रोल भवन निर्माण व 01 कि0मी0 33 के0वी0 भूमिगत लाइन के निर्माण हेतु 647.81 लाख की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने के साथ ही प्रथम किस्त के रूप में 77.74 लाख अवमुक्त किये जाने की भी स्वीकृति प्रदान की है।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने देहरादून नगरीय पेयजल कार्यक्रम के अन्तर्गत कौलागढ़ जौन में कैनाल रोड ओएनजीसी फायर स्टेशन के समीप नलकूप निर्माण हेतु 98.83 लाख की धनराशि स्वीकृत की है।

राष्ट्रपति पुरस्कार हासिल करना प्रत्येक शिक्षक का होता है सपना

शिक्षक दिवस पर उत्तराखंड की एक महिला सहित दो शिक्षकों को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसमें महिला शिक्षिका सुधा पैंयूली को देहरादून और पुरूष शिक्षक डा. केवलानंद कांडपाल को बागेश्वर में जिलाधिकारी ने पुरस्कार दिया।

शिक्षक दिवस पर कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी सभागार में ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रपति पुरस्कार हासिल करना प्रत्येक शिक्षक का सपना होता है। देहरादून से प्रत्येक वर्ष राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए शिक्षक चुने जाते हैं, यह वाकई में बड़ी उपलब्धि है। 

बता दें कि सुधा पैन्यूली 30 वर्षों से शिक्षा विभाग में शिक्षिका के रूप में अपनी सेवा दे रही हैं। वर्तमान में वह कालसी ब्लाक स्थित एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल में उप प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं।

वहंी, राजकीय हाईस्कूल पुड़कुनी (कपकोट) के प्रधानाचार्य डॉ. केवलानंद कांडपाल को डीएम विनीत कुमार ने मेडल और प्रशस्ति पत्र दिया। डीएम विनीत कुमार ने कहा कि हमें ऐसे शिक्षकों की जरूरत है, जो विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए कार्य करें। उन्होंने डॉ. कांडपाल प्रेरणा लेने की अपील की।

रिटायरमेंट के बाद भी पूर्व फौजी युवाओं को कर रहे देश सेवा के लिए प्रेरित

कहते हैं कि, फौंजी कभी रिटायर नहीं होता है, चाहे वो ऑन ड्यूटी हो या ऑफ ड्यूटी। उत्तराखंड में ऐसे कई पूर्व फौंजी हैं जो रिटायरमेंट के बाद समाज की तस्वीर बदलने में जुटे पड़े हैं और इनकी मेहनत के अच्छे नतीजे भी सामने आने लगे हैं। इन्हीं में से हैं बागेश्वर जिले के रूनीखेत निवासी पूर्व कैप्टन नारायण सिंह उन्यूड़ी। जिनकी तीन साल की मेहनत से 17 युवा फौंज में भर्ती हो चुके हैं। कैप्टन के कदम अभी थमे नहीं हैं उनका मुकाम नशे की गिरफत से युवाओं को मुक्त करा उन्हें देश सेवा से जोड़ना है।

उत्तराखंड के लोगों में देशसेवा का जज्बा कूट-कूटकर भरा है। पहाड़ के हर घर में फौजी हैं, और ये फौजी रिटायरमेंट के बाद भी देशकृसमाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते आ रहे हैं। वर्ष 2017 में 12 कुमाउं में तैनात सुबेदार मेजर नारायण सिंह को रिटायर के वक्त सेना ने ऑनरी कैप्टन की उपाधी से नवाजा। घर आने पर उन्होंने देखा कि गांव के ज्यादातर युवाकृबुजुर्ग नशे की गिरफ्त में हैं। इस पर उन्हें बहुत पीड़ा पहुंची तो उन्होंने युवाओं को देश सेवा का जज्बा भरने के लिए गांव के ही एक युवक को लेकर ग्राम पंचायत खोली के तोक घाटबगड़ रुनीखेत मैदान में निरूशुल्क ट्रैनिंग देनी शुरू कर दी। उनके जज्बे को देख कुछ ही महीनों में हल्द्वानी, सोमेश्वर, चौंरा, कपकोट, दफौट के दूरस्थ क्षेत्रों से युवा उनके पास ट्रैनिंग के लिए आने शुरू हो गए। ट्रैनिंग में जरूरत के सामानों के लिए कैप्टन की मदद के लिए कुछेक लोगों ने मदद की तो मैदान में बारिश से बचने के लिए जिला पंचायत उपाध्यक्ष नवीन परिहार ने भी अपने खर्चे पर डेढ़ लाख रुपये से वहां एक व्यायामशाला बना दी।

भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए जो मानक बने हैं उन सारे मानकों की वो निरूशुल्क ट्रैनिंग दे रहे हैं। सुबह पांच से सात बजे तक फिजिकल ट्रैनिंग के सांथ ही रिटर्न टैस्ट की भी ट्रैनिंग युवाओं को दी जा रही है। इसके सांथ ही हर रविवार को युवाओं की फिजिकल प्रोग्रस को आंका जाता है। विगत तीन सालों में उनसे ट्रैनिंग लिए 17 युवा स्पेशल फोर्स, लद्वाख स्कॉट, पैरा कंमाडो सहित अन्य बटालियनों में भर्ती हो चुके हैं।

इस मुहिम में कैप्टन नारायण सिंह अकेले नहीं हैं। उनके साथ प्रिंसिपल चंदन सिंह परिहार भी जुड़ गए हैं, जो कि ट्रैनिंग ले रहे युवाओं का लेखाकृजोखा रखने में मदद करते हैं। रूनीखेत मे चल रहे कैंप मे इस वक्त चालीस युवा निशुल्क ट्रेनिंग ले रहे हैं।

आज के वक्त में जब ज्यादातरों ने अपने हुनर को बिजनस बना लिया है वहीं कैप्टन नारायण सिंह रिटायर होने के बाद भी निस्वार्थ हो अपना कीमती वक्त युवा पीड़ी में देश सेवा का जज्बा भरने में जुटे पड़े हैं। देश सेवा के उनके जुनुन को युवा पीड़ी भी समझ उनके कदम से कदम मिला अपने भविष्य को संवारने में लगी है।

मानव अस्तित्व के लिए सरला बहन ने दिया था प्रकृति संरक्षण का मंत्र

केशव भट्ट (वरिष्ठ पत्रकार)
जंगल में जानवरों को भेजने की जगह खेतों में चारा लगाओ। छोटे पेड़ बचाओ। पत्तियां न तोड़ो ,पेड़ों से प्रेम करो, प्रकृति की चाल के साथ चलो। पर्यावरण संरक्षण शब्द की रचियता और जिन्होंने अपना पूरा जीवन प्रकृति में आत्मसात करके जिया और प्रकृति पर आने वाले संकट के प्रति सचेत किया और दर्शन भी विश्व को प्रदान किया। शोर से दूर हिमालय के आगोश में शांत वातावरण में विश्व पर्यावरण के संरक्षण पर गहन चिंतन और मनन करने वाली सरला बहन के जन्मदिन 5 अप्रैल को उनकी कहीं और लिखी एक एक बात मार्ग दर्शक की तरह विकास की सही दिशा की ओर आज ही इशारा करती है।
गांधी जी ने कुछ सोच कर सरला बहन को कौसानी भेजा होगा। उनको सरला बहन में एक बड़ी संभावना दिखी होगी। सरला बहन ने कौसानी से ही स्त्री शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जय जगत को सिद्ध करने के लिए अपना जीवन आहूत किया।
प्रथम विश्व युद्ध की विभीषिका और पागलपन को देख उन्होंने शांति और अहिंसा का मार्ग खोजने की अपनी यात्रा में गांधी जी को एक अडिग पड़ाव ही नही मंजिल के रूप में पाया। युद्ध और विकास के उफनते उन्मांद और युद्ध रोमांस से दुनिया विनाश की उस नाव में बैठी हुई है, जिसका चप्पू उनके हाथ के नियंत्रण से बेकाबू होने के कगार पर होता जा रहा है। प्रकृति की अपनी एक चाल होती है। सतत और निरंतर, कोई जल्दबाजी नही, उतावलापन नही जीत और हार की रेस से परे केवल चलते जाना ही है। गांधी ने इस चाल को अनुभव किया और उसकी चाल और उससे निकल रहे संगीत को समझा और उसकी चाल में कदम मिलाकर ग्राम स्वराज्य का मॉडल निर्मित किया। शिक्षा की नई तालीम में इन सब को पिरो दिया। प्रकृति ने जो दिया है, उसकी चाल के साथ सतत चला जा सकता है। प्रकृति के इर्द गिर्द ही मानव अपना विकास कर सकता है। मानव अस्तित्व के लिए प्रकृति का विनाश नही अपितु संरक्षण ही मंत्र हो सकता है। शिक्षा प्रकृति के अनुसार होनी चाहिए, उसके विरुद्ध नही। प्रकृति के परे कोई मार्ग हो ही नही सकता।
गांधी के जीवन दर्शन और जीवन ने ये सब एक सूत्र में सरला बहन ने विश्व को प्रदान किया। विश्व युद्ध की विभीषिका को देख कैथरीन, उनका असली नाम, संमझा की युद्ध जीतने वाला और युद्ध हारने वाला दोनों ही हारते है। केवल मानव के भीतर दम्भ और दूसरे को हराने का उन्माद जो विनाश का पर्याय है, ही जीतता है। आज ये सब हमारे सामने चरितार्थ हो रहा है।
सरला बहन के जन्मदिन पर उनकी हिमदर्शन की धार पर बैठना और प्रकृति के संरक्षण की गहन चिंतन करना मानव को एक दिशा प्रदान करता है। लक्ष्मी आश्रम का सतत परिवेश आज ही एक आशा प्रदान तो करता ही है। हालांकि विश्व में बेतरतीव भागता विकास सब कुछ लील लेने को अंधी दौड़ में चारो ओर भाग रहा है। उसकी अंधी दौड़ को रोक पाना संभव नही है। लेकिन गांधी के ग्राम स्वराज्य में अभी भी गांव को गांव बनाने की दिशा और मार्ग संरक्षित है। पुरखों की सतत और मेहनत के परिचायक खेत और गांव आज भी मानव सभ्यता को अमरता प्रदान करने की असीम क्षमता है।

सरला बहन ने लक्ष्मी आश्रम को एक मॉडल के रूप में विकसित किया। ये गांधी का ही जीवित मॉडल है। दूसरी और हिमदर्शन कुटीर को चिंतन स्थली के रूप में सरला बहन ने विश्व को प्रदान किया।
आज विकास के बेतरतीव मॉडल को मानव ही नही वन्य प्राणियों की सहज और नीरव जीवन शैली को भी प्रभावित किया है। विकास की तुरत गति ने सतत गति को बाधित ही किया है। वन्य प्राणियों का जंगल से बाहर आना इसका संकेत है। पर्यावरण संरक्षण ही इसका एक मात्र समाधान हो सकता है।
विश्व में जल संकट का गहराता भयावह रूप प्रकृति की चाल को बाधित करने वाले तुरत विकास का ही परिणाम है। मुट्ठी भर लोग दुनियां को तेजी से भागना चाहते है, इस भागमभाग में वो न जाने किस मंजिल को छूना चाहते है और पूरी मानव जाति को इस चाल में अपने अंधकूप में झोंकना चाह रहे है। ये आज प्रकृति के विनाश से संमझा जा सकता है। जब महानगर की चकाचैंध में सांस लेना कठिन हो जाती है, उस वक्त सब बेमानी लगता है। खाने के स्वाद में तेजी से आये बदलाव, विश्व में पिघलते ग्लेशियर, भारत में गंगा नदी समेत सारी नदियों को नालों में परिवर्तित होते देख प्रकृति की सतत चाल को समझना भी कहाँ रह गया है, संभव।
ये सब सहसा सरला बहन के जन्मदिन पर याद हो चला। कृत्रिम शोर से दूर प्रकृति के संगीत के साथ कैसे सुरताल मिल कर चला जा सकता है। ये सरला बहन के जीवन दर्शन और उनकी यादों में आज भी कौसानी के लक्ष्मी आश्रम और उनकी चिंतन स्थली हिमदर्शन में खोजा जा सकता है, बस प्रकृति की चाल के संग चलने मात्र से, जंगल के संगीत में सराबोर हुए, आज भी तमाम कोलाहल के बावजूद भी पक्षियों का कलरव ध्यान खींच ही लेता है। हिमालय की बर्फानी चोटियां अपनी ओर आकर्षित आज भी करती है। घाटियों से आती हवा एक संगीत ही तो है। घने जंगल में अनहद का संगीत तनिक एकाग्र होने से सुना जा सकता है। आज भी सूर्यास्त की लालिमा, रात का सन्नाटा, चन्द्रमा का प्रकाश अपने होने का अहसास छोड़ ही जाता है। ये सब सतत और निरंतर ही है। तुरत विकास की अवधारणा से ये कब तक रहेगा, इस पर चिंतन तो करना ही होगा, ये तय है।

यूटयूब में वेस्ट मेटिरियल से उपयोगी वस्तुएं बनाना सीखा और जीत लिया राष्ट्रीय पुरस्कार

केशव भट्ट (वरिष्ठ पत्रकार)
आज के वक्त में कोई भी चीज बेकार नहीं होती हैं, घर के पुराने वेस्ट मेटिरियल हों या पुराने अखबार। इनसे भी घर को नया लुक दिया जा सकता है, बशर्ते उसका बखूबी इस्तेमाल करने का हुनर आपके पास हो। इस बात को सच साबित करने में लगी है बागेश्वर जिले के मेलाडुंगरी गांव की अर्चना भंडारी। लॉकडाउन में ऑनलाइन शिल्पकला के अपने हुनर से अर्चना ने न केवल राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय शिल्पकला प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया, बल्कि अब वो स्वयं शिल्पकला में अभिनव प्रयोग करने के साथ 20 अन्य बालिकाओं को भी पुराने अखबार, गत्ते व अन्य वैस्ट मैटीरियल का सदुपयोग कर उपयोगी सामान बनाने का प्रशिक्षण देने में जुटी पड़ी है।
कोरोना काल के लॉकडाउन में अर्चना की प्रतिभा निखर कर सामने आई। शुरूआत में उसने कोरोना वायरस से बचाव के लिए घर में ही मॉस्क बनाकर बांटने शुरू कर दिए। समय था तो उसने यूटयूब से वेस्ट मेटिरियल से उपयोगी वस्तुएं बनाना भी सीखना शुरू कर दिया और ऑनलाइन शिल्पकला में राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में द्वितीय पुरूष्कार भी हांसिल कर लिया। इससे उसके सांथियों ने भी शिल्पकला सीखने की बात कही तो अब वो 20 बालिकाओं को भी पुराने अखबार, गत्ते व अन्य वैस्ट मैटीरियल का सदुपयोग कर उपयोगी सामान बनाने का प्रशिक्षण देने में लगी है। अर्चना, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के सांथ ही स्वरोजगार अभियान को लेकर काफी जागरूक है। कई नुक्कड़ नाटकों में प्रतिभाग कर वो इसका संदेश भी दे चुकी हैं। अभी रक्षाबंधन के त्यौहार पर उन्हें पांच सौ राखियों की डिमांड मिली है तो वो सभी राखियां बनाने में जुटी पड़ी हैं।

हर दिन सुबह आठ से दस बजे तक के प्रशिक्षण में हाईस्कूल, ग्रेजुएशन कर रहे छात्राओं के सांथ ही नौकरीपेशा भी अर्चना से कलमदान, पेन स्टैंड, न्यूज पेपर होल्डर, फोटो फ्रेम, ज्यूलरी बॉक्स समेत राखी बनाना सीख रहे हैं। लगातार अभ्यास से वो अब पारंगत होते जा रहे हैं और अभी तक उन्होंने तीन हजार से भी ज्यादा सजावटी सामान बना दिए हैं। गुजरात सूरत के एक स्कूल में सुपरवाईजर पोस्ट पर तैनात भावना नयाल लॉकडाउन में स्कूल बंद होने पर गांव आ गई और अब वो भी यहां शिल्पकला का प्रशिक्षण ले खुश हैं।
अर्चना की इस पाठशाला में हर कोई अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए पूरी मेहनत से जुटे हैं। वहीं अर्चना भी उनका उत्साहवर्धन कर बेटियों की प्रतिभा को सामने लाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को सच साबित कर समाज को नया संदेश देने में लगी है।

पंत के सपनों को अब कौन लगायेगा पंख!

उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत की मौत के साथ ही उनकी ये दिली इच्छा भी अधूरी रह गई। प्रकाश पंत उत्तराखंड के जागेश्वर और बागेश्वर को एक ट्रैक रूट में जोड़कर पांचवां धाम बनाने की ख्वाहिश रखते थे। वित्त मंत्री प्रकाश पंत आखिरी बार 14 जनवरी को उत्तरायणी मेले का शुभारंभ करने के लिए बागेश्वर आए थे। यहां की जनता और जन प्रतिनिधियों ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए योजना बनाने की मांग की थी। इस पर उन्होंने आश्वासन दिया था कि अल्मोड़ा के प्रसिद्ध जागेश्वर और कुमाऊं की काशी के बागनाथ मंदिर तक सैलानियों की आमद बढ़ाने के लिए एक रूट बनाएंगे।

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ठीक होकर आने का वादा किया था, लेकिन साथ छोड़ दिया- मुख्यमंत्री

इसको नाम दिया जाएगा पांचवां धाम। उन्होंने कहा था कि उनकी ख्वाहिश भी है कि उत्तराखंड में चार धाम के साथ एक और पांचवां धाम बनाया जाए। पंत के आश्वासन के बाद बागनाथ नगरी में पर्यटन की उम्मीदें बढ़ीं थीं, लेकिन उनके निधन के साथ ही यह ख्वाहिश भी अधूरी रह गई है।नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने वित्त मंत्री प्रकाश पंत के निधन पर शोक जताते हुए बताया कि, पर्यटन के लिहाज से पिछड़े जिलों में टूरिज्म को बढ़ाने का उनका लक्ष्य था। इस वजह से उन्होंने देश और दुनिया में मशहूर उत्तरायणी मेले के लिए बागेश्वर को पांचवां धाम बनाने का आश्वासन दिया था। पालिकाध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने बताया कि जनता लंबे समय से उत्तरायणी मेले को राजकीय बनाने की मांग कर रही थी। इस पर पंत ने उत्तरायणी मेले को राजकीय मेला घोषित करने के लिए हर मदद का आश्वासन दिया था।

आशाओं की हुई मांग पूरी, वेतन में ₹1000 की वृद्धि

आशा कार्यकत्रियों के मानदेय में एक हजार रूपये की वृद्धि की जायेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बागेश्वर ने गरूड़ में अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के शुभारम्भ के अवसर पर यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आशा कार्यकत्रियों को वर्ष 2012-13 से रूकी हुई वार्षिक प्रोत्साहन धनराशि हेतु 33 करोड़ रूपये जारी किये गये। वर्ष 2012 से आशा कार्यकत्रियों को 5 हजार रूपये प्रतिवर्ष प्रोत्साहन राशि देने की योजना शुरू की गयी थी, जिसका कभी भी नियमित रूप से भुगतान नहीं हो पाया। आशा कार्यकत्रियों द्वारा इसकी लगातार मांग की जा रही थी। आशा कार्यकत्रियों की मांग का संज्ञान लेते हुए लम्बित पूर्ण 33 करोड़ की धनराशि जारी की गयी। इससे प्रदेश की 12 हजार आशा कार्यकत्रियों को फायदा हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बागेश्वर जनपद की लगभग 65 करोड़ से निर्मित विभिन्न 36 योजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने जनपद बागेश्वर में अटल आयुष्मान योजना का शुभारम्भ किया तथा लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड वितरित किये। उन्होंने कहा कि सभी लोग जल्द से जल्द इस योजना के अन्र्तगत अपना कार्ड बनवायें। जिसके लिए जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों को दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने जनता से अपील की कि कुछ लोगों द्वारा इस महत्वकांक्षी योजना के बंद होने की अफवाह फैलाई जा रही है जो बिलकुल निराधार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारम्भ की गयी आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत बीपीएल एवं अन्त्योदय परिवारों को सम्मिलित किया गया था।

राज्य के सभी परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिले इसके लिये प्रदेश में अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना शुरू की गयी। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी 23 लाख परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है। एक माह में तीन हजार से अधिक लोगों ने इस योजना का लाभ लिया है। उन्होंने कहा उत्तराखण्ड सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए दिल्ली के प्रसिद्ध अस्पतालों द्वारा भी उत्तराखण्ड सरकार से एमओयू हेतु प्रस्ताव किये जा रहे है जिनमें वेदान्ता अस्पताल दिल्ली भी शामिल है।
बागेश्वर की प्रभारी मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा चलाई गयी आयुष्मान भारत योजना के वास्तविक लक्ष्यों को पाने हेतु राज्य में मुख्यमंत्री द्वारा अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना का शुभारम्भ किया गया है। जिससे प्रत्येक लाभार्थी चयनित अस्पतालों में अपना एवं अपने परिवार का निःशुल्क उपचार करा सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य समाज के अन्तिम व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा में जोड़ना है जिसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर विधायक चन्दन राम दास, विधायक बलवंत सिंह भौर्याल, जिला पंचायत सदस्य शिव सिंह बिष्ट, जिलाधिकारी रंजना राजगुरू आदि उपस्थित थे।