राष्ट्रपति पुरस्कार हासिल करना प्रत्येक शिक्षक का होता है सपना

शिक्षक दिवस पर उत्तराखंड की एक महिला सहित दो शिक्षकों को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसमें महिला शिक्षिका सुधा पैंयूली को देहरादून और पुरूष शिक्षक डा. केवलानंद कांडपाल को बागेश्वर में जिलाधिकारी ने पुरस्कार दिया।

शिक्षक दिवस पर कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी सभागार में ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रपति पुरस्कार हासिल करना प्रत्येक शिक्षक का सपना होता है। देहरादून से प्रत्येक वर्ष राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए शिक्षक चुने जाते हैं, यह वाकई में बड़ी उपलब्धि है। 

बता दें कि सुधा पैन्यूली 30 वर्षों से शिक्षा विभाग में शिक्षिका के रूप में अपनी सेवा दे रही हैं। वर्तमान में वह कालसी ब्लाक स्थित एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल में उप प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं।

वहंी, राजकीय हाईस्कूल पुड़कुनी (कपकोट) के प्रधानाचार्य डॉ. केवलानंद कांडपाल को डीएम विनीत कुमार ने मेडल और प्रशस्ति पत्र दिया। डीएम विनीत कुमार ने कहा कि हमें ऐसे शिक्षकों की जरूरत है, जो विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए कार्य करें। उन्होंने डॉ. कांडपाल प्रेरणा लेने की अपील की।

रिटायरमेंट के बाद भी पूर्व फौजी युवाओं को कर रहे देश सेवा के लिए प्रेरित

कहते हैं कि, फौंजी कभी रिटायर नहीं होता है, चाहे वो ऑन ड्यूटी हो या ऑफ ड्यूटी। उत्तराखंड में ऐसे कई पूर्व फौंजी हैं जो रिटायरमेंट के बाद समाज की तस्वीर बदलने में जुटे पड़े हैं और इनकी मेहनत के अच्छे नतीजे भी सामने आने लगे हैं। इन्हीं में से हैं बागेश्वर जिले के रूनीखेत निवासी पूर्व कैप्टन नारायण सिंह उन्यूड़ी। जिनकी तीन साल की मेहनत से 17 युवा फौंज में भर्ती हो चुके हैं। कैप्टन के कदम अभी थमे नहीं हैं उनका मुकाम नशे की गिरफत से युवाओं को मुक्त करा उन्हें देश सेवा से जोड़ना है।

उत्तराखंड के लोगों में देशसेवा का जज्बा कूट-कूटकर भरा है। पहाड़ के हर घर में फौजी हैं, और ये फौजी रिटायरमेंट के बाद भी देशकृसमाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते आ रहे हैं। वर्ष 2017 में 12 कुमाउं में तैनात सुबेदार मेजर नारायण सिंह को रिटायर के वक्त सेना ने ऑनरी कैप्टन की उपाधी से नवाजा। घर आने पर उन्होंने देखा कि गांव के ज्यादातर युवाकृबुजुर्ग नशे की गिरफ्त में हैं। इस पर उन्हें बहुत पीड़ा पहुंची तो उन्होंने युवाओं को देश सेवा का जज्बा भरने के लिए गांव के ही एक युवक को लेकर ग्राम पंचायत खोली के तोक घाटबगड़ रुनीखेत मैदान में निरूशुल्क ट्रैनिंग देनी शुरू कर दी। उनके जज्बे को देख कुछ ही महीनों में हल्द्वानी, सोमेश्वर, चौंरा, कपकोट, दफौट के दूरस्थ क्षेत्रों से युवा उनके पास ट्रैनिंग के लिए आने शुरू हो गए। ट्रैनिंग में जरूरत के सामानों के लिए कैप्टन की मदद के लिए कुछेक लोगों ने मदद की तो मैदान में बारिश से बचने के लिए जिला पंचायत उपाध्यक्ष नवीन परिहार ने भी अपने खर्चे पर डेढ़ लाख रुपये से वहां एक व्यायामशाला बना दी।

भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए जो मानक बने हैं उन सारे मानकों की वो निरूशुल्क ट्रैनिंग दे रहे हैं। सुबह पांच से सात बजे तक फिजिकल ट्रैनिंग के सांथ ही रिटर्न टैस्ट की भी ट्रैनिंग युवाओं को दी जा रही है। इसके सांथ ही हर रविवार को युवाओं की फिजिकल प्रोग्रस को आंका जाता है। विगत तीन सालों में उनसे ट्रैनिंग लिए 17 युवा स्पेशल फोर्स, लद्वाख स्कॉट, पैरा कंमाडो सहित अन्य बटालियनों में भर्ती हो चुके हैं।

इस मुहिम में कैप्टन नारायण सिंह अकेले नहीं हैं। उनके साथ प्रिंसिपल चंदन सिंह परिहार भी जुड़ गए हैं, जो कि ट्रैनिंग ले रहे युवाओं का लेखाकृजोखा रखने में मदद करते हैं। रूनीखेत मे चल रहे कैंप मे इस वक्त चालीस युवा निशुल्क ट्रेनिंग ले रहे हैं।

आज के वक्त में जब ज्यादातरों ने अपने हुनर को बिजनस बना लिया है वहीं कैप्टन नारायण सिंह रिटायर होने के बाद भी निस्वार्थ हो अपना कीमती वक्त युवा पीड़ी में देश सेवा का जज्बा भरने में जुटे पड़े हैं। देश सेवा के उनके जुनुन को युवा पीड़ी भी समझ उनके कदम से कदम मिला अपने भविष्य को संवारने में लगी है।

मानव अस्तित्व के लिए सरला बहन ने दिया था प्रकृति संरक्षण का मंत्र

केशव भट्ट (वरिष्ठ पत्रकार)
जंगल में जानवरों को भेजने की जगह खेतों में चारा लगाओ। छोटे पेड़ बचाओ। पत्तियां न तोड़ो ,पेड़ों से प्रेम करो, प्रकृति की चाल के साथ चलो। पर्यावरण संरक्षण शब्द की रचियता और जिन्होंने अपना पूरा जीवन प्रकृति में आत्मसात करके जिया और प्रकृति पर आने वाले संकट के प्रति सचेत किया और दर्शन भी विश्व को प्रदान किया। शोर से दूर हिमालय के आगोश में शांत वातावरण में विश्व पर्यावरण के संरक्षण पर गहन चिंतन और मनन करने वाली सरला बहन के जन्मदिन 5 अप्रैल को उनकी कहीं और लिखी एक एक बात मार्ग दर्शक की तरह विकास की सही दिशा की ओर आज ही इशारा करती है।
गांधी जी ने कुछ सोच कर सरला बहन को कौसानी भेजा होगा। उनको सरला बहन में एक बड़ी संभावना दिखी होगी। सरला बहन ने कौसानी से ही स्त्री शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जय जगत को सिद्ध करने के लिए अपना जीवन आहूत किया।
प्रथम विश्व युद्ध की विभीषिका और पागलपन को देख उन्होंने शांति और अहिंसा का मार्ग खोजने की अपनी यात्रा में गांधी जी को एक अडिग पड़ाव ही नही मंजिल के रूप में पाया। युद्ध और विकास के उफनते उन्मांद और युद्ध रोमांस से दुनिया विनाश की उस नाव में बैठी हुई है, जिसका चप्पू उनके हाथ के नियंत्रण से बेकाबू होने के कगार पर होता जा रहा है। प्रकृति की अपनी एक चाल होती है। सतत और निरंतर, कोई जल्दबाजी नही, उतावलापन नही जीत और हार की रेस से परे केवल चलते जाना ही है। गांधी ने इस चाल को अनुभव किया और उसकी चाल और उससे निकल रहे संगीत को समझा और उसकी चाल में कदम मिलाकर ग्राम स्वराज्य का मॉडल निर्मित किया। शिक्षा की नई तालीम में इन सब को पिरो दिया। प्रकृति ने जो दिया है, उसकी चाल के साथ सतत चला जा सकता है। प्रकृति के इर्द गिर्द ही मानव अपना विकास कर सकता है। मानव अस्तित्व के लिए प्रकृति का विनाश नही अपितु संरक्षण ही मंत्र हो सकता है। शिक्षा प्रकृति के अनुसार होनी चाहिए, उसके विरुद्ध नही। प्रकृति के परे कोई मार्ग हो ही नही सकता।
गांधी के जीवन दर्शन और जीवन ने ये सब एक सूत्र में सरला बहन ने विश्व को प्रदान किया। विश्व युद्ध की विभीषिका को देख कैथरीन, उनका असली नाम, संमझा की युद्ध जीतने वाला और युद्ध हारने वाला दोनों ही हारते है। केवल मानव के भीतर दम्भ और दूसरे को हराने का उन्माद जो विनाश का पर्याय है, ही जीतता है। आज ये सब हमारे सामने चरितार्थ हो रहा है।
सरला बहन के जन्मदिन पर उनकी हिमदर्शन की धार पर बैठना और प्रकृति के संरक्षण की गहन चिंतन करना मानव को एक दिशा प्रदान करता है। लक्ष्मी आश्रम का सतत परिवेश आज ही एक आशा प्रदान तो करता ही है। हालांकि विश्व में बेतरतीव भागता विकास सब कुछ लील लेने को अंधी दौड़ में चारो ओर भाग रहा है। उसकी अंधी दौड़ को रोक पाना संभव नही है। लेकिन गांधी के ग्राम स्वराज्य में अभी भी गांव को गांव बनाने की दिशा और मार्ग संरक्षित है। पुरखों की सतत और मेहनत के परिचायक खेत और गांव आज भी मानव सभ्यता को अमरता प्रदान करने की असीम क्षमता है।

सरला बहन ने लक्ष्मी आश्रम को एक मॉडल के रूप में विकसित किया। ये गांधी का ही जीवित मॉडल है। दूसरी और हिमदर्शन कुटीर को चिंतन स्थली के रूप में सरला बहन ने विश्व को प्रदान किया।
आज विकास के बेतरतीव मॉडल को मानव ही नही वन्य प्राणियों की सहज और नीरव जीवन शैली को भी प्रभावित किया है। विकास की तुरत गति ने सतत गति को बाधित ही किया है। वन्य प्राणियों का जंगल से बाहर आना इसका संकेत है। पर्यावरण संरक्षण ही इसका एक मात्र समाधान हो सकता है।
विश्व में जल संकट का गहराता भयावह रूप प्रकृति की चाल को बाधित करने वाले तुरत विकास का ही परिणाम है। मुट्ठी भर लोग दुनियां को तेजी से भागना चाहते है, इस भागमभाग में वो न जाने किस मंजिल को छूना चाहते है और पूरी मानव जाति को इस चाल में अपने अंधकूप में झोंकना चाह रहे है। ये आज प्रकृति के विनाश से संमझा जा सकता है। जब महानगर की चकाचैंध में सांस लेना कठिन हो जाती है, उस वक्त सब बेमानी लगता है। खाने के स्वाद में तेजी से आये बदलाव, विश्व में पिघलते ग्लेशियर, भारत में गंगा नदी समेत सारी नदियों को नालों में परिवर्तित होते देख प्रकृति की सतत चाल को समझना भी कहाँ रह गया है, संभव।
ये सब सहसा सरला बहन के जन्मदिन पर याद हो चला। कृत्रिम शोर से दूर प्रकृति के संगीत के साथ कैसे सुरताल मिल कर चला जा सकता है। ये सरला बहन के जीवन दर्शन और उनकी यादों में आज भी कौसानी के लक्ष्मी आश्रम और उनकी चिंतन स्थली हिमदर्शन में खोजा जा सकता है, बस प्रकृति की चाल के संग चलने मात्र से, जंगल के संगीत में सराबोर हुए, आज भी तमाम कोलाहल के बावजूद भी पक्षियों का कलरव ध्यान खींच ही लेता है। हिमालय की बर्फानी चोटियां अपनी ओर आकर्षित आज भी करती है। घाटियों से आती हवा एक संगीत ही तो है। घने जंगल में अनहद का संगीत तनिक एकाग्र होने से सुना जा सकता है। आज भी सूर्यास्त की लालिमा, रात का सन्नाटा, चन्द्रमा का प्रकाश अपने होने का अहसास छोड़ ही जाता है। ये सब सतत और निरंतर ही है। तुरत विकास की अवधारणा से ये कब तक रहेगा, इस पर चिंतन तो करना ही होगा, ये तय है।

यूटयूब में वेस्ट मेटिरियल से उपयोगी वस्तुएं बनाना सीखा और जीत लिया राष्ट्रीय पुरस्कार

केशव भट्ट (वरिष्ठ पत्रकार)
आज के वक्त में कोई भी चीज बेकार नहीं होती हैं, घर के पुराने वेस्ट मेटिरियल हों या पुराने अखबार। इनसे भी घर को नया लुक दिया जा सकता है, बशर्ते उसका बखूबी इस्तेमाल करने का हुनर आपके पास हो। इस बात को सच साबित करने में लगी है बागेश्वर जिले के मेलाडुंगरी गांव की अर्चना भंडारी। लॉकडाउन में ऑनलाइन शिल्पकला के अपने हुनर से अर्चना ने न केवल राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय शिल्पकला प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया, बल्कि अब वो स्वयं शिल्पकला में अभिनव प्रयोग करने के साथ 20 अन्य बालिकाओं को भी पुराने अखबार, गत्ते व अन्य वैस्ट मैटीरियल का सदुपयोग कर उपयोगी सामान बनाने का प्रशिक्षण देने में जुटी पड़ी है।
कोरोना काल के लॉकडाउन में अर्चना की प्रतिभा निखर कर सामने आई। शुरूआत में उसने कोरोना वायरस से बचाव के लिए घर में ही मॉस्क बनाकर बांटने शुरू कर दिए। समय था तो उसने यूटयूब से वेस्ट मेटिरियल से उपयोगी वस्तुएं बनाना भी सीखना शुरू कर दिया और ऑनलाइन शिल्पकला में राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में द्वितीय पुरूष्कार भी हांसिल कर लिया। इससे उसके सांथियों ने भी शिल्पकला सीखने की बात कही तो अब वो 20 बालिकाओं को भी पुराने अखबार, गत्ते व अन्य वैस्ट मैटीरियल का सदुपयोग कर उपयोगी सामान बनाने का प्रशिक्षण देने में लगी है। अर्चना, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के सांथ ही स्वरोजगार अभियान को लेकर काफी जागरूक है। कई नुक्कड़ नाटकों में प्रतिभाग कर वो इसका संदेश भी दे चुकी हैं। अभी रक्षाबंधन के त्यौहार पर उन्हें पांच सौ राखियों की डिमांड मिली है तो वो सभी राखियां बनाने में जुटी पड़ी हैं।

हर दिन सुबह आठ से दस बजे तक के प्रशिक्षण में हाईस्कूल, ग्रेजुएशन कर रहे छात्राओं के सांथ ही नौकरीपेशा भी अर्चना से कलमदान, पेन स्टैंड, न्यूज पेपर होल्डर, फोटो फ्रेम, ज्यूलरी बॉक्स समेत राखी बनाना सीख रहे हैं। लगातार अभ्यास से वो अब पारंगत होते जा रहे हैं और अभी तक उन्होंने तीन हजार से भी ज्यादा सजावटी सामान बना दिए हैं। गुजरात सूरत के एक स्कूल में सुपरवाईजर पोस्ट पर तैनात भावना नयाल लॉकडाउन में स्कूल बंद होने पर गांव आ गई और अब वो भी यहां शिल्पकला का प्रशिक्षण ले खुश हैं।
अर्चना की इस पाठशाला में हर कोई अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए पूरी मेहनत से जुटे हैं। वहीं अर्चना भी उनका उत्साहवर्धन कर बेटियों की प्रतिभा को सामने लाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को सच साबित कर समाज को नया संदेश देने में लगी है।

पंत के सपनों को अब कौन लगायेगा पंख!

उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत की मौत के साथ ही उनकी ये दिली इच्छा भी अधूरी रह गई। प्रकाश पंत उत्तराखंड के जागेश्वर और बागेश्वर को एक ट्रैक रूट में जोड़कर पांचवां धाम बनाने की ख्वाहिश रखते थे। वित्त मंत्री प्रकाश पंत आखिरी बार 14 जनवरी को उत्तरायणी मेले का शुभारंभ करने के लिए बागेश्वर आए थे। यहां की जनता और जन प्रतिनिधियों ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए योजना बनाने की मांग की थी। इस पर उन्होंने आश्वासन दिया था कि अल्मोड़ा के प्रसिद्ध जागेश्वर और कुमाऊं की काशी के बागनाथ मंदिर तक सैलानियों की आमद बढ़ाने के लिए एक रूट बनाएंगे।

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ठीक होकर आने का वादा किया था, लेकिन साथ छोड़ दिया- मुख्यमंत्री

इसको नाम दिया जाएगा पांचवां धाम। उन्होंने कहा था कि उनकी ख्वाहिश भी है कि उत्तराखंड में चार धाम के साथ एक और पांचवां धाम बनाया जाए। पंत के आश्वासन के बाद बागनाथ नगरी में पर्यटन की उम्मीदें बढ़ीं थीं, लेकिन उनके निधन के साथ ही यह ख्वाहिश भी अधूरी रह गई है।नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने वित्त मंत्री प्रकाश पंत के निधन पर शोक जताते हुए बताया कि, पर्यटन के लिहाज से पिछड़े जिलों में टूरिज्म को बढ़ाने का उनका लक्ष्य था। इस वजह से उन्होंने देश और दुनिया में मशहूर उत्तरायणी मेले के लिए बागेश्वर को पांचवां धाम बनाने का आश्वासन दिया था। पालिकाध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने बताया कि जनता लंबे समय से उत्तरायणी मेले को राजकीय बनाने की मांग कर रही थी। इस पर पंत ने उत्तरायणी मेले को राजकीय मेला घोषित करने के लिए हर मदद का आश्वासन दिया था।

आशाओं की हुई मांग पूरी, वेतन में ₹1000 की वृद्धि

आशा कार्यकत्रियों के मानदेय में एक हजार रूपये की वृद्धि की जायेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बागेश्वर ने गरूड़ में अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के शुभारम्भ के अवसर पर यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आशा कार्यकत्रियों को वर्ष 2012-13 से रूकी हुई वार्षिक प्रोत्साहन धनराशि हेतु 33 करोड़ रूपये जारी किये गये। वर्ष 2012 से आशा कार्यकत्रियों को 5 हजार रूपये प्रतिवर्ष प्रोत्साहन राशि देने की योजना शुरू की गयी थी, जिसका कभी भी नियमित रूप से भुगतान नहीं हो पाया। आशा कार्यकत्रियों द्वारा इसकी लगातार मांग की जा रही थी। आशा कार्यकत्रियों की मांग का संज्ञान लेते हुए लम्बित पूर्ण 33 करोड़ की धनराशि जारी की गयी। इससे प्रदेश की 12 हजार आशा कार्यकत्रियों को फायदा हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बागेश्वर जनपद की लगभग 65 करोड़ से निर्मित विभिन्न 36 योजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने जनपद बागेश्वर में अटल आयुष्मान योजना का शुभारम्भ किया तथा लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड वितरित किये। उन्होंने कहा कि सभी लोग जल्द से जल्द इस योजना के अन्र्तगत अपना कार्ड बनवायें। जिसके लिए जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों को दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने जनता से अपील की कि कुछ लोगों द्वारा इस महत्वकांक्षी योजना के बंद होने की अफवाह फैलाई जा रही है जो बिलकुल निराधार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारम्भ की गयी आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत बीपीएल एवं अन्त्योदय परिवारों को सम्मिलित किया गया था।

राज्य के सभी परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिले इसके लिये प्रदेश में अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना शुरू की गयी। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी 23 लाख परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है। एक माह में तीन हजार से अधिक लोगों ने इस योजना का लाभ लिया है। उन्होंने कहा उत्तराखण्ड सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए दिल्ली के प्रसिद्ध अस्पतालों द्वारा भी उत्तराखण्ड सरकार से एमओयू हेतु प्रस्ताव किये जा रहे है जिनमें वेदान्ता अस्पताल दिल्ली भी शामिल है।
बागेश्वर की प्रभारी मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा चलाई गयी आयुष्मान भारत योजना के वास्तविक लक्ष्यों को पाने हेतु राज्य में मुख्यमंत्री द्वारा अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना का शुभारम्भ किया गया है। जिससे प्रत्येक लाभार्थी चयनित अस्पतालों में अपना एवं अपने परिवार का निःशुल्क उपचार करा सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य समाज के अन्तिम व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा में जोड़ना है जिसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर विधायक चन्दन राम दास, विधायक बलवंत सिंह भौर्याल, जिला पंचायत सदस्य शिव सिंह बिष्ट, जिलाधिकारी रंजना राजगुरू आदि उपस्थित थे।

अव्यवस्था देख नाराज हुई डीएम, ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश

बागेश्वर में जिलाधिकारी रंजना ने राजकीय बद्रीदत्त पांडे स्नातकोत्तर महाविद्यालय का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने बीएससी भवन को ठीक करने के निर्देश दिए। नौ साल पहले यह भवन अभी तक महाविद्यालय को हैंडओवर नहीं हुआ है। उन्होंने संबंधित ठेकेदार के खिलाफ विभाग को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए।
डीएम रंजना ने शनिवार को पीजी कालेज का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने नौ साल पहले बने बीएसएसी भवन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्लास्टर गिर रहा है। छत की ढाल ठीक नहीं है। अभी तक महाविद्यालय को भवन हैंडओवर भी नहीं हुआ है। उन्होंने कार्यदायी संस्था जल निगम को भवन की मरम्मत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि ठेकेदार मरम्मत नहीं करता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। उन्होंने पुस्तकालय देखा तो कंप्यूटर कक्ष धूल से सना मिला। एक साल से कक्ष बंद था। उन्होंने बीएसएनएल को कालेज में वाईफाई सेवा जोड़ने के निर्देश दिए। ई-लर्निंग कक्षाओं का संचालन नहीं होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। छात्रावास में गंदगी मिली। कूड़ा और खाली बोतल फेंक हुए मिले। उन्होंने स्वच्छता के प्रति कालेज प्रशासन को सावधान किया। डीएम ने कालेज में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने लैब को अपडेट रखने को कहा। उन्होंने कहा कि कालेज को ग्रॉंड दिलाने के लिए शासन स्तर पर बात करने का भरोसा दिलाया। डीएम ने कहा कि कालेज स्तर की समस्याओं को स्वयं ठीक किया जा सकता है। जिला प्रशासन भी इसमें मदद करेगा। उन्होंने पानी टंकी आदि का भी निरीक्षण किया।

ताकुला मोटर मार्ग में केएमओयू की बस मलबे की चपेट आई

बागेश्वर जिले में बारिश से जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। कांडा में एक छात्र गधेरे में बह गया है। एक चरवाहा भी नाले की चपेट में आने से बह गया है। वहीं बागेश्वर-अल्मोड़ा वाया ताकुला मोटर मार्ग में केएमओयू की बस मलबे की चपेट में आने से 50 मीटर खाई में गिर गई है। बारिश से 24 सड़कें आवागमन के लिए बंद हो गई हैं। सरयू व गोमती नदियों का जलस्तर भी बढ़ गया है।


बागेश्वर से हल्द्वानी को जा रही केएमओयू की बस रेखोली के पास भूस्खलन के चपेट में आ गई। मलबे ने बस को करीब 50 मीटर नीचे खाई में धकेल दिया। बस चीड़ के पेड़ पर अटक गई। ड्राइवर ने सूझबूझ का परिचय दिया। गाड़ी में बैठी 20 सवारियां पहले उतार दी। जिससे बड़ा हादसा टल गया। वहीं बीते दिन कांडा में प्राथमिक विद्यालय पंक्चौड़ा से लौट रहा पांचवीं का छात्र स्थानीय नाले में बह गया है। बनेगांव में मवेशियों को चूंगाने जंगल गया युवक भी गधेरे में बह गया है। जिसका शव पिथौरागढ़ जिले के सिमखेत में रेस्क्यू टीम को मिला। वहीं जिले में 24 सड़कों पर मलबा भर गया है। जिससे आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। देवतोली में भारी भूस्खलन से गांव को खतरा पैदा हो गया है। बारिश से सरयू व गोमती नदियों का जलस्तर भी बढ़ गया है।

पीड़ित परिवार को सीएम ने दी आर्थिक सहायता

बागेश्वर।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने काण्डा तहसील के ग्राम भेंटा करड़िया में मृतक सोहन राम के घर पहुचकर मृतक के माता-पिता एवं उसकी पत्नी से मुलाकात कर मृतक सोहन लाल की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने शोक संतप्त परिवार केा इस दुःख की घडी में शक्ति प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस अवसर पर उन्होंने दुःखी परिवार के प्रति सान्त्वना व्यक्त कर उन्हें सरकार से हर सम्भव सहायता देने क आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने मृतक के परिवार को समाज कल्याण विभाग की ओर से अनुसूचित जाति उत्पीड़न योजना के तहत 5 लाख 62 हजार 500 का चैंक तथा राज्य सरकार की ओर से 5 लाख का चैंक मृतक परिवार को सौंपते हुए जिलाधिकारी को इसमें से ढाई लाख का चैक मृतक के माता-पिता का संयुक्त खाता खोलकर उनके खाते में जमा करने तथा ढाई लाख का चैंक मृतक के बच्चों के नाम के खाते में जमा करने के निर्देश दिये। उन्होंने गांव में मिनी ऑंगनबाडी केन्द्र खोलने तथा मृतक की पत्नी की तैनाती इस केन्द्र में करने की घोषणा की। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय का आह्वान करते हुए कहा कि यह परिवार सभी का है हम सभी को मिलकर इस परिवार के साथ खडा होना है।

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कहा कि इस बेटी के ऊपर दुःख का पहाड टूट कर आया है मैं मृतक के मॉ-बाप से क्षमा मांगने आया हू इस परिवार की सहायता करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने मृतक की पत्नी को हिम्मत दिलाते हुए कहा कि उनके बच्चों की शिक्षा-दीक्षा का भी पूरा-पूरा ध्यान रखा जायेगा। कहा कि उन्हें बेटा बनकर हिम्मत जुटानी है हम सब उनके साथ है उन्हें किसी प्रकार की परेषानी नहीं होने दी जायेगी। इस मौके पर विधायक कपकोट ललित फर्स्वाण, जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी, राजेन्द्र सिंह टंगडिया, जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवेन्द्र परिहार, पूर्व मंत्री रामप्रसाद टम्टा, जिलाधिकारी भूपाल सिंह मनराल, मुख्य विकास अधिकारी एसएसएस पांगती, उपजिलाधिकारी फिंचाराम चौहान, उपजिलाधिकारी गरूड रविन्द्र सिंह बिष्ट आदि लोग मौजूद रहे।

पिण्डारी, कफनी व सुंदरढुंगा ट्रैक रूट की वर्तमान स्थिति खराब

बागेश्वर।
राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने विकासखण्ड कपकोट के सुदूरवर्ती क्षेत्रों का भ्रमण करने के पष्चात विकास भवन सभागार में आयोजित अधिकारियों की बैठक में उक्त स्थानों में पायी गयी विभिन्न कमियों के बारे में अधिकारियों को जानकारी दी तथा इन कमियों को शीघ्र दूर करने के निर्देष दिये।
सांसद ने बताया कि पिण्डारी, कफनी व सुंदरढुंगा ट्रैक रूट की वर्तमान स्थिति काफी खराब है लिहाजा उसे शीघ्रातिषीघ्र दु्रुस्त किया जाय ताकि उस रूट में चलने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की परेषानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016-17 में ट्रैक रूट में आये ट्रैकरों की संख्या लगभग 1467 है। उन्होंने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से भी इन मार्गों की मरम्मत किया जाना नितांत आवष्यक है क्योंकि ये पर्यटक क्षेत्र होने के कारण यहॉं की अर्थव्यवस्था से सीधे तौर से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पर्यटकों के रात्रि विश्राम हेतु बनाये गये फाइबर हट्स, गैस्ट हाउसों, डाक बंगलों और शौचालयों की स्थिति पर भी चर्चा की तथा सम्बन्धित अधिकारियों से मार्गों सहित इन सब का निरीक्षण करने के पष्चात् कमियों को दूर करते हुए उन्हें अधिक से अधिक लाभकारी व सुविधाजनक बनाने के निर्देष दिये।

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उन्होंने इस वर्ष वर्षाकाल में क्षतिग्रस्त सार्वजनिक मार्गों, भवनों, विद्यालयों, पेयजल, सिंचाई, विद्युत, आदि योजनाओं एवं परिसम्पत्तियों का ब्यौरा तैयार रखने के निर्देष अधिकारियों को दिये ताकि भ्रमण व जॉंच हेतु आ रहे केन्द्र सरकार के दल को वास्तविक वस्तुस्थिति से अवगत कराने में आसानी हो सके।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष हरीष ऐठानी, विधायक कपकोट ललित फर्स्वाण, सीडीओ एस.एस.एस. पॉंगती, उप जिलाधिकारी कपकोट कैलाष टोलिया, डीडीओ केएन तिवारी, डीएफओ एमबी सिंह, सीएमओ डा. संजय साह, पर्यटन अधिकारी लता बिष्ट, मुख्य पषुचिकित्साधिकारी डा0 उदय शंकर, कु0मं0 वि0नि0 के सहायक अभियन्ता दीपचन्द्र लोहनी सहित सभी विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।