एम्स में स्थापित विश्व का पहला रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी विभाग चलाएगा स्त्री वरदान अभियान

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में एम्स ऋषिकेश के रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी विभाग की ओर से संस्थान में स्त्री वरदान अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। एम्स ऋषिकेश की पहल पर आयोजित विश्वव्यापी इस अभियान का ध्येय वाक्य है चुप्पी तोड़ो, स्त्रीत्व से नाता जोड़ो। ​

स्त्रियों की समस्याओं पर आधारित एम्स की इस पहल पर आयोजित कार्यक्रम में देश और उत्तराखंड राज्य की कई लब्ध प्रतिष्ठित हस्तियां प्रतिभाग करेंगी। एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी महाराज, स्वामी देवानंद सरस्वती महाराज, स्वामी विजय कौशल महाराज, हंस फाउंडेशन प्रमुख माता मंगला, राष्ट्रीय महिला आयोग, भारत सरकार की चेयरपर्सन रेखा शर्मा, यमकेश्वर क्षेत्र की विधायक ऋतु खंडूड़ी, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ. चिन्मय पांड्या, दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक आशीष गौतम प्रमुखरूप से शामिल होंगे।

गौरतलब है कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश की ओर से अपनी तरह के अनूठे स्त्री वरदान कार्यक्रम की शुरुआत गतवर्ष 31 अक्टूबर 2020 को रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी विभाग के डॉक्टर नवनीत मग्गो के मार्गदर्शन में की गई थी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की निजी समस्याओं का निवारण करना है।
ऋ​षिकेश एम्स के स्त्री वरदान कार्यक्रम के निदेशक डॉ. नवनीत मग्गो का कहना है कि यह कार्यक्रम उन अंतर्मुखी महिलाओं की आवाज बनेगा, जो अपनी निहायत निजी स्वास्थ्य समस्याओं को चुपचाप सहती रहती हैं।

एम्स में ओरिएंटेशन कार्यक्रमः हेल्थ केयर प्रोफेशनल बनने के लिए कड़ी मेहनत करें नर्सिंग छा़त्राएं

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में बीएससी नर्सिंग छात्राओं का ओरिएंटेशन कार्यक्रम बृहस्पतिवार को शुरू हो गया। विद्यार्थियों को बेहतर हेल्थ केयर प्रोफेशनल बनने के लिए कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही उन्हें मरीजों के प्रति कुशल व्यवहार अपनाने पर जोर दिया गया।
एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कॉलेज ऑफ नर्सिंग में बीएससी नर्सिंग बैच-2020 के ओरिएंटेशन प्रोग्राम का विधिवत शुभारंभ किया। निदेशक एम्स ने कहा कि नर्सिंग की छात्राओं में नेतृत्व क्षमता के गुण होने चाहिए, साथ ही उनमें नर्सिंग प्रोफेशन को लेकर को जुनून होना चाहिए।

निदेशक ने बताया कि नर्सिंग विद्यार्थियों को संचार कौशल तथा ज्ञानपूर्वक होना चाहिए, ताकि वह मरीजों के साथ-साथ अपने सहकर्मियों को भी त्रुटियों से रोक सकें। डीन (एकेडमिक) प्रो. मनोज गुप्ता ने विद्याघ्र्थियों को पढाई में उत्पन्न होने वाले मानसिक तनाव को कम करने के लिए कैपस में होने वाली खेल गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि नर्सेज मरीज के सबसे ज्यादा करीब होती हैं व उनकी देखरेख करती हैं लिहाजा उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट होनी चाहिए, उनका रोगी के प्रति विनम्र व्यवहार होना चाहिए।

कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्य डा. वसंता कल्याणी ने ऋषिकेश एम्स के लिए चयनित नर्सिंग विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर कॉलेज की गतिविधियों को लेकर वृत्तचित्र प्रस्तुति भी दी गई। साथ ही उन्होंने नर्सिंग विद्यार्थियों को हमेशा सीखने के लिए तत्पर रहने को कहा।

इस अवसर पर डीन एलुमिनाई प्रोफेसर बीना रवि, प्रोक्टर प्रो. बीके बस्तिया, डीन प्लानिंग प्रो.लतिका मोहन, डीन कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) प्रो.ब्रिजेंद्र सिंह, डीन स्टूडेंट्स वैलफेयर प्रो. नवनीत भट्ट, डीन एग्जामिनेशन प्रो. प्रशांत एम.पाटिल, डीन रिसर्च प्रो. वर्तिका सक्सेना, डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा, विभागाध्यक्ष बायोकेमेस्ट्री डा. अनीसा आसिफ मिर्जा, रजिस्ट्रार राजीव चैधरी, नर्सिंग कॉलेज की असिस्टेंट प्रो. राखी मिश्रा, जेवियर बैल्सियाल, प्रसन्ना जैली, रूपिंदर देयोल, डा. राजेश कुमार, मलार कोडी, डा. राज राजेश्वरी, मनीष शर्मा, रुचिका रानी, डा. राकेश शर्मा, रश्मि रावत, हेमलता, लीसा, दिव्या, बेट्सी, विश्वास, सोनिया आदि मौजूद थे।

एम्स ऋषिकेश में रोगी को किया गया सीआरटी-डी मशीन का सफल प्रत्यारोपण

हार्ट फेलियर की समस्या से जूझ रहे नैनीताल निवासी एक व्यक्ति के उपचार में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने मरीज को बिना बेहोश किए सफलतापूर्वक सीआरटी-डी मशीन प्रत्यारोपित की है। उत्तराखंड राज्य का यह पहला मामला है, जिसमें एम्स में हुए इलाज पर किसी गोल्डन कार्ड धारक को 6 लाख रुपए का लाभ मिला है। मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे एम्स अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

पुलिस लाइन, नैनीताल निवासी 62 वर्षीय मोहम्मद हासिम पिछले एक साल से हार्ट फेलियर की समस्या से ग्रसित थे। रोगी को सांस फूलने और हृदय की पम्पिंग एक समान नहीं होने से उसे अक्सर बेहोशी आने की शिकायत थी। यहां तक कि कभी-कभी उसके दिल की धड़कन भी कुछ समय के लिए रुक जाती थी।

मरीज का सफलतापूर्वक उपचार करने वाले एम्स के काॅर्डियोलाॅजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. बरुण कुमार ने बताया कि रोगी का जीवन बचाने के लिए उसके शरीर में स्पेशल पेसमेकर की तरह कार्य करने वाली एक सीआरटी-डी डिवाइस लगाई जानी बेहद जरूरी थी। रोगी को लंबे समय से बार-बार सांस फूलने की तकलीफ भी थी। जांच में पाया गया कि उसका हार्ट फंक्शन सही ढंग से कार्य नहीं कर रहा है और हार्ट का साइज भी बड़ा हो चुका है। ऐसे में मरीज का जीवन बचाने के लिए सीआरटी-डी डिवाइस लगाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि सीआरटी-डी डिवाइस लगाने की प्रक्रिया में ढाई घंटे का समय लगा है।

डा. बरुण ने बताया कि डिवाइस लगाने की यह प्रक्रिया उच्च तकनीक के आधार पर मरीज को बिना बेहोश किए संपन्न कराई गई है। उन्होंने बताया कि पेशेंट के इलाज का खर्च गोल्डन कार्ड योजना द्वारा वहन किया गया है। उन्होंने बताया कि मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। सीआरटी-डी प्रत्यारोपित करने वाले चिकित्सकों की टीम में डा. बरुण के अलावा सीनियर रेजिडेंट डा. शिशिर, स्टाफ नर्सिंग ऑफिसर हंसराज, इन्दू, विपिन, हरिमोहन, अंकित आदि शामिल थे।

एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने मरीज को डिवाइस प्रत्यारोपण की जटिल प्रक्रिया को सकुशल अंजाम देने वाले चिकित्सकों की टीम के कार्य की सराहना की है। उन्होंने बताया कि संस्थान में मरीजों को वर्ल्ड क्लास स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी ने बताया कि जटिल से जटिल बीमारी के इलाज के लिए भी एम्स, ऋषिकेश में उच्च अनुभवी चिकित्सक और आधुनिक मेडिकल तकनीकें उपलब्ध कराई गई हैं। इस बाबत आयुष्मान भारत योजना के उत्तराखंड राज्य समन्वयक अतुल जोशी ने एम्स में हुए इस उपचार के बारे में बताया कि गोल्डन कार्ड धारक किसी भी व्यक्ति के उपचार में 5 लाख से अधिक धनराशि खर्च होने वाला यह राज्य में पहला मामला है।

क्या है हार्ट फेलियर
हार्ट फेलियर (दिल की विफलता) एक गंभीर बीमारी है। डा. बरुण ने बताया कि कुछ लोगों का हृदय शरीर के अन्य अंगों का सहयोग करने के लिए पर्याप्त स्तर पर पम्प नहीं करता है। ऐसे में हृदय की मांसपेशियां कठोर हो जाने के कारण हृदय से रक्त का प्रवाह कम या अवरुद्ध हो जाता है। यदि मरीज का समय पर इलाज नहीं हुआ तो उसके जीवन को क्षति पहुंच सकती है।

सीआरटी-डी
जिन लोगों को हार्ट फेलियर की समस्या होती है, उनके लिए सीआरटी-डी (कार्डियक रीसिंक्रोनाइजेशन थैरेपी डिफिब्रिलेटजिन) आधुनिक तकनीक आधारित यह विशेष पेसमेकर बहुत लाभकारी है। सीआरटी-डी एक विशेष प्रकार का पेसमेकर है, जिसे शरीर में हृदय और कंधे के मध्य भाग में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह मशीन माचिस की डिब्बी के आकार की होती है। यह हार्ट की पम्पिंग को बढ़ाने का काम करती है।

नीरजा देवभूमि चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित हुआ निशुल्क न्यूरो थैरेपी शिविर

नीरजा देवभूमि चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आज दो दिवसीय न्यूरो थेरेपी शिविर का गन्ना एवं चीनी उद्योग बोर्ड के अध्यक्ष (राज्यमंत्री) भगतराम कोठारी, ट्रस्ट संस्थापक नीरजा गोयल, श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य, पूर्व प्रधानाचार्य डीबीपीएस रावत ने संयुक्तरुप से शुभारंभ हुआ।

लक्ष्मण झूला रोड स्थित कबीर चैरा में आयोजित शिविर में मायाकुंड, चंद्रेश्वर नगर, शीशम झाड़ी 14 बीघा आदि जगहों से 75 लोगो ने रजिस्ट्रेशन कराया। जिनकी निशुल्क न्यूरो थेरेपी और रक्त जांच की गई।

राज्यमंत्री भगतराम कोठारी ने कहा कि ट्रस्ट सामाजिक कार्यो को बड़ी तन्मयता के साथ कर रहा है। वास्तव में जरूरतमंदों को ट्रस्ट की ओर से लाभ मिल रहा है। उन्होंने ट्रस्ट को हर संभव मदद का आश्वासन भी किया।महंत वत्सल शर्मा ने कहा कि ट्रस्ट ने पहली बार मेडिकल कैम्प आयोजित किया है, जो सराहनीय है।

ट्रस्ट के संस्थापक नीरजा गोयल ने बताया कि समाज में आए दिन उच्च रक्तचाप और विभिन्न प्रकार की समस्याओं से लोग जूझ रहे हैं। यहां तक कि कई लोगों को अपने ब्लड ग्रुप तक की जानकारी नहीं है, ट्रस्ट की ओर से निर्धन और जरूरतमंद लोगों के लिए यह शिविर आयोजित किया गया है उन्होंने बताया कि शिविर रविवार को भी आयोजित रहेगा। उन्होंने लोगों से शिविर का लाभ उठाने की अपील की।

न्यूरो थैरेपिस्ट देवेंद्र आहूजा ने शिविर में पहुंचे लाभार्थियों को आवश्यक सुझाव दिए। बताया कि एक स्वस्थ आदमी के लिए दिन में करीब 2 लीटर पानी अवश्य लेना चाहिए। उन्होंने जोड़ों के दर्द से पीड़ित लोगों को खट्टी वस्तुएं ना खाने की सलाह दी। उन्होंने खाने के बाद करीब 1 घंटे के भीतर पानी का उपयोग ना करने तथा सीधे होकर लेटने की सलाह दी। वही न्यूरो थेरेपी कराने पहुंचे लाभार्थियों को उन्होंने मांसाहार का उपयोग खाने में ना करने को कहा।

डॉक्टर सुनील थपलियाल के संचालन में आयोजित शिविर में ट्रस्ट सह संस्थापक नूपुर गोयल, डीपी रतूड़ी, समाज सेविका सीमा खुराना, निर्मला उनियाल, रीना जोशी, कुसुम जोशी, बलराम शाह, मनोज गुप्ता, हरीश आनंद, संतोष व्यास, कमल चतुर्वेदी, सुभाष, आशु, ध्रुव, दिवाकर मिश्रा, रंजन अंथवाल, पूनम अरोड़ा आदि मौजूद रहे।

एम्स के चिकित्सकों की टीम की सफलता, दो बच्चों की सफल सर्जरी को दिया अंजाम

अ​खिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के कॉर्डियक थोरसिक सर्जरी विभाग ने हाल ही में दो बच्चों की जन्मजात टैट्रोलोजी ऑफ फैलोट (टीओएफ) बीमारी की सफलतापूर्वक सर्जरी को अंजाम दिया गया। बताया गया कि दोनों बच्चे तीन साल से इस बीमारी से ग्रसित थे। इस सफलता के लिए एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने चिकित्सकीय टीम की सराहना की है।
उन्होंने बताया कि संस्थान में पीडियाट्रिक कॉर्डियक सर्जरी प्रोग्राम सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं। यह मेडिकल विभाग की सबसे जटिल ब्रांच है, जिसमें किसी भी केस को करते समय आधुनिक मशीनों के साथ साथ संपूर्ण टीम का सहयोग जरुरी होता है। इससे जुड़े ऑपरेशन काफी जटिल एवं नाजुक होते हैं तथा आपरेशन के दौरान पेशेंट की जान जाने का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके दिल की अनेक जन्मजात बीमारियां हैं जो कि जानलेवा हैं, सर्जरी के बिना इनका इलाज असंभव होता है, मगर सर्जरी के पश्चात अच्छा जीवन संभव हो जाता है। सीटीवीएस विभाग के कॉर्डियक थोरेसिक सर्जन डा. अनीश गुप्ता के अनुसार एम्स में पिछले डेढ़ वर्ष में लगभग 100 से अधिक मरीज अपनी जन्मजात हृदय की बीमारियों से निजात पा चुके हैं,जिसमें शिशु, किशोर व युवा भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि टैट्रोलॉजी ऑफ फैलोट एक गंभीर बीमारी है,जिसमें धीरे धीरे हार्ट फेल हो जाता है। हाल में संस्थान में 3 साल के दो बच्चों का सफल टीओएफ रिपेयर किया गया है, जिसमें एक चकराता, देहरादून निवासी बच्ची व रुड़की हरिद्वार का एक बच्चा शामिल हैं।
डा. अनीश के मुताबिक कई बार इस ऑपरेशन में फेफड़े की नली का रास्ता खोलते वक्त पल्मोनी वाल्व काटना पड़ता है, जिससे ऑपरेशन की जटिलता बढ़ जाती है। साथ ही कुछ दशकों बाद मरीज को वाल्व बदलने की आवश्यकता प आवश्यकता पड़ती है। जटिलतम शल्य क्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देने पर दोनों बच्चों के परिजनों ने इसके लिए एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत का धन्यवाद ज्ञापित किया। साथ ही उन्होंने बतया कि संस्थान निदेशक प्रो. रवि कांत के सतत प्रयासों से ही उत्तराखंड में पीडियाट्रिक कॉर्डियक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध हो पाई है, जिससे उनके बच्चों को नवजीवन मिल सका है।
क्या है टेट्रोलोजी ऑफ फैलोट (टीओएफ) 1- हृदय की जन्मजात बीमारी जिसमें दिल में छेद होने के साथ साथ फेफड़े में खून ले जाने वाला रास्ता सिकुड़ा होता है। 2-गंदा खून दिल के छेद से होते हुए साफ खून में मिल जाता है,जिससे मरीज का शरीर नीला पड़ जाता है। 3- इस जन्मजात बीमारी के कारण सांस फूलना, बलगम में खून आना, दिमाग में मवाद भरना, दौरा पड़ना, लकवा आदि भी हो सकता है।

एम्स में हैलीपैड मरीजों के लिए हो रहा मददगार साबित

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश का हैलीपैड ट्रामा एवं इमरजेंसी मरीजों की आपात चिकित्सा के के लिए वरदान साबित हो रहा है। बीते 5 महीने में एयर एम्बुलेंस के माध्यम से आपात उपचार के लिए 11 मरीजों को एम्स ऋषिकेश पहुंचाया जा चुका है। समय रहते अस्पताल पहुंचने से आपात स्थिति वाले इन मरीजों का जीवन बचाने में संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई गई हैलीपैड की सुविधा मददगार सिद्ध हुई है।

विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पहाड़ी राज्य में सबसे बड़ी समस्या आपदाओं व दुर्घटनाओं के दौरान गंभीर घायल होने वाले और अत्यधिक अस्वस्थ लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की रहती है, जिससे तत्काल चिकित्सा से उनका जीवन बचाया जा सके। ऐसे में एम्स ऋषिकेश का हैलीपैड हैली एम्बुलैंस के माध्यम से यहां पहुंचाए जाने वाले उत्तराखंड के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है।

गौरतलब है कि एम्स ऋषिकेश को एयर एम्बुलैंस की सुविधा से जोड़ने के उद्देश्य से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बीते वर्ष 11 अगस्त-2020 को एम्स के हैलीपैड का उद्घाटन किया था। उद्घाटन के बाद से ही पहाड़वासियों को इस सुविधा का लाभ मिलने लगा है।

इस सुविधा के शुरू होने से एयर एम्बुलैंस के माध्यम से उत्तराखंड के सुदूरवर्ती इलाकों से समय-समय पर गंभीर किस्म के मरीजों और दुर्घटनाओं में घायल होने वाले मरीजों को एम्स ऋषिकेश पहुंचाया जा रहा है।

निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने कहा कि उत्तराखंड और देश के किसी भी कोने से एयर एम्बुलैंस द्वारा मरीज को आपात चिकित्सा के लिए एम्स ऋषिकेश लाया जा सकता है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा की दृष्टि से उन्होंने इसे राज्य के लिए विशेष लाभकारी बताया। निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि प्रसव अवस्था, दुर्घटनाओं और आपदा के दौरान घायल लोगों के अलावा ब्रेन अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मरीजों का जीवन बचाने के लिए यह सुविधा संजीवनी से कम लाभकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि आपात स्थिति के दौरान एम्स ऋषिकेश के हैलीपैड में एक ही समय में 3 हैलीकाॅप्टर लैंड कर सकते हैं।

संस्थान के हैली एविएशन इंचार्ज और ट्रामा विशेषज्ञ डाॅ. मधुर उनियाल ने बताया कि एम्स में हैली एम्बुलैंस लैंडिंग की सुविधा शुरू होने से राज्य के दुर्गम क्षेत्रों से एम्स ऋषिकेश की दूरी कम हो गई है। उन्होंने बताया कि किसी भी आघात के दौरान जीवन बचाने के लिए मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना बहुत जरूरी होता है। ऐसे में हवाई दूरी कम होने से अब पहाड़ के किसी भी कोने से मरीज को तत्काल एम्स लाया जा सकता है। डाॅ. उनियाल ने बताया कि नेशनल हेल्थ मिशन द्वारा भी योजना में रूचि ली जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस पहाड़ी राज्य में आपदाओं के दौरान गंभीररूप से घायल होने वाले लोगों के तत्काल उपचार में इस सुविधा से विशेष लाभ होगा और अधिकाधिक लोगों का जीवन बचाया जा सकेगा।

2 अक्टूबर 2020 से 20 फरवरी 2021 तक हैली एम्बुलैंस से एम्स पहुंचे मरीज

1- 2 अक्टूबर- पौड़ी से 55 वर्षीय ब्रेन स्ट्रोक का 1 रोगी
2- 15 अक्टूबर- पौड़ी से वाया देहरादून 44 वर्षीय पेन्क्रियाज का 1 रोगी
3- 9 दिसंबर- चमोली से कोविड पाॅजिटिव 3 रोगी
4- 10 दिसंबर – कर्णप्रयाग से 1 कोविड मरीज
5- 4 जनवरी- सहस्त्रधारा, देहरादून से गले के टाॅन्सिल से ग्रसित 5 वर्षीय बालक
6- 29 जनवरी- पौड़ी से 55 वर्षीय मुहं में सूजन का रोगी
7- 19 फरवरी- टिहरी से 28 साल की 1 गर्भवती महिला
8- 20 फरवरी- देवाल चमोली से सड़क दुर्घटना के 2 घायल मरीज

यूपी की किशोरी की एम्स ऋषिकेश में हुई सफल हार्ट सर्जरी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के सीटीवीएस विभाग के चिकित्सकों ने मुरादाबाद, उत्तरप्रदेश निवासी एक 12 वर्षीय किशोरी के दिल की जन्मजात गंभीर बीमारी का सफल ऑपरेशन कर उत्तराखंड में चिकित्सा क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है।

बताया गया है कि इस किशोरी के दिल में जन्म से छेद था, जिससे उसका शरीर अक्सर नीला पड़ जाता था। अपने शहर के आसपास उच्च चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव के चलते अब तक किशोरी के माता-पिता उसका उपचार नहीं करा पा रहे थे, लिहाजा इस किशोरी को उम्र बढ़ने के साथ साथ दिल की जन्मजात बीमारी के कारण सांस लेने में कठिनाई होने लगी।

इसके बाद किशोरी के परिजनों ने उसके समुचित उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश की ओर रुख किया। एम्स अस्पताल में किए गए सीटी स्कैन से पता चला कि किशोरी को डीओआरवी, पीएस नामक हृदय की बीमारी है,जिसके लिए ऑपरेशन की आवश्यकता है। इसके साथ ही उसके शरीर में कुछ ऐसी नसें भी थी, जिन्हें ऑपरेशन से पहले एन्जियोग्राफी से बंद करना था।

संस्थान की हृदय रोग विभागाध्यक्ष डा. भानु दुग्गल एवं डा. यश श्रीवास्तव ने एन्जियोग्राफी के माध्यम से किशोरी की इन नसों में छल्ला डाला, जिसके बाद सीटीवीएस विभाग के पीडियाट्रिक कॉर्डियक सर्जन डा. अनीश गुप्ता ने उसकी जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

चिकित्सकीय टीम की इस सफलता के लिए एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने उन्हें प्रोत्साहित किया, साथ ही निदेशक प्रो. रवि कांत ने चिकित्सकों को भविष्य में भी इसी तरह मरीजों की मदद करने के साथ साथ सुपरस्पेशलिटी सुविधाओं के सुचारू संचालन का भरोसा दिलाया। डा. अनीश ने बताया ​कि​ सर्जरी के बाद एनेस्थेटिस्ट डा. अजेय मिश्रा की टीम ने किशोरी का भली प्रकार से खयाल रखा। किशोरी को अब पूर्णरूप से स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

क्या है डीओआरवी एवं पीएस बीमारी यह एक जन्मजात हृदय की बीमारी है,जिसमें स्वच्छ व गंदे खून की नसें एक साथ एक ही खाने भाग से निकलती हैं तथा फेफड़े की नस में रुकावट रहती है। जिसके कारण बच्चे का शरीर नीला पड़ता है, साथ ही उसे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। इस बीमारी से बच्चा कभी कभी बेहोश भी हो सकता है। इस बीमारी का पता इको और सीटी स्कैन से चल पाता है। जिसका उपचार ऑपरेशन से ही संभव है। इस बीमारी की जटिलता के हिसाब से बीमारी से संबंधित कई तरह से सर्जरी की जाती है। इस बीमारी के प्रति लापरवाही व बिना इलाज के जान जाने का खतरा होता है।

एम्स में दूसरे चरण का टीकाकरण शुरू, निदेशक सहित डीन एकेडमिक ने लगाया टीका

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में कोविड-19 टीकाकरण अभियान का दूसरा चरण सोमवार को शुरू हो गया। दूसरे चरण के अभियान के पहले दिन एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत, डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता समेत कई अन्य लोगों ने कोरोना टीकाकरण कराया।
निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि टीकाकरण के तहत दूसरी डोज लगने के बाद भी कोरोना का खतरा अभी अगले 2 महीने तक और रह सकता है। लिहाजा किसी को भी इसको लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।

रविवार को भारत सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन के बाद सोमवार से एम्स, ऋषिकेश में कोविड वैक्सीन टीकाकरण का दूसरा चरण शुरू कर दिया गया। संस्थान के आयुष भवन स्थित कोविड वैक्सीनेशन सेंटर में सोमवार को अन्य लोगों के साथ साथ एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत और डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने भी कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाई।

बताया कि दूसरी डोज लगाने के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने बताया कि वैक्सीन लगने पर कुछ सामान्य दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन यह वैक्सीन लगने के बाद के सामान्य लक्षण होते हैं। लिहाजा इनसे घबराना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरी डोज लगने के बाद भी हमें कोरोना से बचाव के नियमों को नहीं भूलना है। उन्होंने कोविड संक्रमण से बचाव के लिए 5 बातों को विशेष ध्यान रखने और अनिवार्यरूप से इनका पालन करने की बात कही। कहा कि अगले 2 महीने तक दूसरी डोज लग जाने के बाद भी हमें सही ढंग से मास्क का दैनिक तौर से उपयोग करना होगा। इसके अलावा हाथों को साबुन से ठीक तरह से धोना, एक-दूसरे से 2 गज की दूरी बनाए रखना, किसी प्रकार के लक्षण दिखने पर स्वयं को अन्य लोगों से अलग करना तथा लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराना बहुत जरूरी है।

दूसरी डोज लगने के बाद संस्थान के डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने कहा कि टीकाकरण ही कोरोना से बचाव का एकमात्र उपाय है। उन्होंने कहा कि यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और लोगों को चाहिए कि किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। उन्होंने कहा कि देश से कोरोना के खात्मे के लिए वैक्सीन लगवाना ही एकमात्र उपाय है। इस अवसर पर डीएमएस डा. अनुभा अग्रवाल, डा. रूवी गुप्ता, डा. मधुर उनियाल, डा. शैलेश, डा. देवेंद्र त्रिपाठी आदि फैकल्टी सदस्यों ने टीके लगवाए।

महाकुंभ के दौरान आपात स्थिति के लिए एम्स ऋषिकेश का ट्राॅमा सेंटर रिजर्व

कुंभ मेले में श्रद्धालुओं को मेडिकल सुविधा प्रदान करने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश पूरी तरह से तैयार है। संस्थान की ओर से चिकित्सकों की टीम भी हरिद्वार में तैनात की जाएगी। इसके अलावा आपात स्थिति से निपटने के लिए एम्स के ट्राॅमा सेंटर को आरक्षित रखा गया है। जिसमें श्रद्धालुओं के उपचार के लिए ट्राॅमा सेंटर में 24 घंटे मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

निदेशक प्रो. रवि कांत की देखरेख में महाकुंभ में स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संस्थान की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आगामी 27 फरवरी को माघ पूर्णिमा और उसके बाद के प्रमुख स्नान पर्वों पर हरिद्वार कुंभ मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की संभावना है। लिहाजा इसके मद्देनजर एम्स ऋषिकेश अस्पताल प्रशासन ने संपूर्ण कुंभमेला अवधि तक हरिद्वार में ही चिकित्सकों की टीम तैनात करने का निर्णय लिया है। जिसके लिए संस्थान के चि​कित्सकीय दल हरिद्वार स्थित बैरागी कैंप में बनाए जा रहे मेला अस्पताल में तैनात रहेंगे।
मेलाकाल में किसी प्रकार की अप्रिय घटना, भगदड़ व श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य संबंधी अन्य आपात स्थितियों के दौरान चिकित्सकीय दल द्वारा मौके पर ही पेशेंट का प्राथमिक उपचार कर ग्रीन काॅरीडोर के माध्यम से उन्हें अविलंब एम्स ऋषिकेश के ट्राॅमा सेंटर भेजा जाएगा।

उन्होंने बताया कि कुंभ मेले में देश-दुनिया से शिरकत करने वाले श्रद्धालुओं को वर्ल्डक्लास स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एम्स ऋषिकेश पूरी तरह से राज्य सरकार का सहयोग करेगा। मेले के दृष्टिगत की गई तमाम तैयारियों के बाबत संस्थान के डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रोफेसर यूबी मिश्रा ने बताया कि कुंभ मेले के मद्देनजर एम्स के ट्राॅमा सेंटर में 12 बेड का आईसीयू तैयार किया गया है। साथ ही किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से निपटने के लिए ट्राॅमा सेंटर में एक डिजास्टर वार्ड भी बनाया गया है। इस वार्ड में कुंभ मेले के श्रद्धालुओं के उपचार केलिए 22 बेड रिजर्व रखे गए हैं।

उन्होंने बताया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो ट्राॅमा सेंटर में बनाए गए डिजास्टर वार्ड के अलावा ट्राॅमा सेंटर के अतिरिक्त आईसीयू को भी उपयोग में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुंभ के लिए विशेषतौर से चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की कई टीमें गठित की जा चुकी हैं। जो कि कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए हर समय हरिद्वार मेलाक्षेत्र में उपलब्ध रहेंगी।

एवीएसडी नामक बीमारी की एम्स में हुई सफल सर्जरी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के सीटीवीएस विभाग के चिकित्सक इन दिनों छोटे बच्चों व युवाओं के दिल के जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक अंजाम दे रहे हैं। विभाग में ए.वी.एस.डी नामक गंभीर बीमारी से ग्रसित तीन मरीजों की सफल सर्जरी पर एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने चिकित्सकों की प्रशंसा की और उन्हें और मरीजों की सेवा और बेहतर ढंग से करने के लिए प्रोत्साहित किया। निदेशक एम्स ने कहा कि संस्थान में मरीजों को वर्ल्डक्लास स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें किसी भी मर्ज के इलाज के लिए उत्तराखंड से बाहर के अस्पतालों में अपने उपचार के लिए परेशान नहीं होना पड़े।
एम्स ऋषिकेश में सहारनपुर, उत्तरप्रदेश निवासी एक 20 वर्षीय युवक जो कि 20 साल से दिल की जन्मजात गंभीर बीमारी ए.वी.एस.डी से जूझ रहा था, मगर आसपास उच्चतम मेडिकल सुविधाओं के अभाव के चलते इलाज नहीं करा पा रहा था। उक्त मरीज की ए.वी.एस.डी नामक बीमारी का एम्स के सीटीवीएस विभाग में सफलतापूर्वक हार्ट सर्जरी की गई।

इस जटिल शल्य चिकित्सा को अंजाम देने वाले पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जन डा. अनीश गुप्ता ने बताया ​कि इस 20 वर्षीय युवक के दिल में छेद होने के साथ ही दो वाल्व लीक कर रहे थे, इसकी वजह इन वाल्व का जन्म से ही पूर्णरूप से विकसित नहीं होना था। इस ऑपरेशन में हार्ट के ब्लॉक होने एवं पेसमेकर डालने का भी खतरा होता है। मगर डा. अनीश ने चिकित्सकीय टीम के सहयोग से इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।
इससे कुछ समय पूर्व पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जन डा. अनीश हरिद्वार निवासी एक अन्य 20 वर्षीय युवक और हल्द्वानी के एक 4 साल के बच्चे का भी ए.वी.एस.डी का सफल ऑपरेशन कर चुके हैं। निदेशक प्रो. रविकांत ने इस जटिल सर्जरी के लिए चिकित्सकीय टीम की सराहना की है, साथ ही काॅर्डियक एनिस्थीसिया के डा. अजेय मिश्रा व पीडियाट्रिक काॅर्डियोलॉजिस्ट डा. यश श्रीवास्तव की भी पीठ थपथपाई।
क्या है ए.वी.एस.डी बीमारी यह एक जन्मजात दिल की बीमारी है। जिसमें दिल के अंदर की बनावट पूरी नहीं होती है। यह दो प्रकार से होता है। पार्शियल या कम्प्लीट। इस बीमारी में मनुष्य के दिल में एक या दो छेद होने के साथ ही दो वाल्व भी अधूरे विकसित होते हैं, जो कि लीक करने लगते हैं। इस स्थिति में दिल में दो छेद वाले बच्चों का जन्म से पहले साल में ही ऑपरेशन करना होता है अन्यथा यह बीमारी लाइलाज हो जाती है। मगर दिल में एक छेद वाले (प्राइमम एएसडी) रोग से ग्रसित बच्चे जब कुछ बड़े हो जाते हैं, उन्हें इसके बाद इस बीमारी से दिक्कत बढ़ने लगती है।