मुख्यमंत्री ने 300 बेड के कोविड अस्पताल में 320 लाख रुपये की योजनाओं को लोकार्पण किया

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रूद्रपुर में पंडित राम सुमेर शुक्ल राजकीय मेडिकल कालेज में 1012.33 लाख लागत के 300 बेड के कोविड-19 हॅास्पिटल भवन का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही राजकीय मेडिकल कालेज रूद्रपुर के अन्तर्गत 299.76 लाख की लागत से रेस्पिरेटरी एण्ड स्किन डिजीज ब्लाक, 537.23 लाख की लागत से रेडियोलॉजी ब्लॉक तथा विश्व बैंक पोषित 90.35 लाख की लागत से ऑक्सीजन सप्लाई पाइप लाइन कार्य का भी लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सीएसआर के तहत टाटा प्रोजेक्टस लि0 के वित्तीय सहयोग से 320 लाख की लागत से 300 बेड कोविड हॉस्पिटल रूद्रपुर मे मेडिकल उपकरण की आपूर्ति एवं अधिष्ठान कार्यो का लोकार्पण के साथ ही प्लान इंडिया व रैकिट बैंकाइजर (इंडिया) प्रा0लि0 के सौजन्य से 50 लाख की लागत से सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र किच्छा के आधुनिकीकरण कार्य, पालीप्लेक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड बाजपुर वित्तीय सहयोग से 60 लाख की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बाजपुर के आधुनिकीकरण कार्य, पालीप्लेक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड खटीमा के वित्तीय सहयोग से 125 लाख की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खटीमा के आधुनिकीकरण कार्य, बालाजी एक्शन बिल्डवेल सितारगंज के वित्तीय सहयोग से 200 लाख की लागत से सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र के आधुनिकीकरण कार्य, बजाज ऑटो लिमिटेड पंतनगर एवं जानकी देवी बजाज ग्राम विकास संस्था के वित्तीय सहयोग से 300 लाख की लागत से पं0ज0ला0ने0 जिला चिकित्सालय, रूद्रपुर के आधुनिकीकरण कार्य, नैनी पेपर्स मिल काशीपुर मे वित्तीय सहयोग से 200 लाख की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र काशीपुर के आधुनिकीकरण कार्यों का शिलान्यास किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य योजना के अन्तर्गत विधानसभा क्षेत्र रूद्रपुर मे लोनिवि की 684.44 लाख लागत की विभिन्न सीसी मार्गां का लोकार्पण तथा 385.47 लाख की लागत से विभिन्न सडको के पुनर्निर्माण कार्यों के शिलान्यास के साथ ही नगर निगम रूद्रपुर के वार्ड नम्बर 25 फाजलपुर महरौला में स्थित 08 एकड भूमि मे जैविक ठोस अपशिष्ट से 50 मिट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता के कम्पोस्ट बायोगैस प्लान्ट का शिलान्यास के साथ ही ग्राम्य विकास विभाग द्वारा संचालित 28 लाख लागत के सरस मार्केट सेंटर रूद्रपुर एवं 194.39 लाख की लागत से क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिये प्रदेश में स्थापित किये जा रहे ग्रोथ सेन्टरों के अंतर्गत 65.84 लाख लागत के विकास खण्ड रूद्रपुर मे बेकरी ग्रोथ सेंटर, 48 लाख लागत के मत्स्य ग्रोथ सेंटर काशीपुर, 18 लाख लागत के गोविन्दपुर मसाला ग्रोथ सेंटर गदरपुर, 24.10 लाख लागत के मेघावाला दुग्ध ग्रोथ सेंटर जसपुर एवं 20 लाख लागत के पहेनिया हस्तशिल्प ग्रोथ सेंटर खटीमा का लोकार्पण किया।
इस अवसर पर अध्यक्ष जिला पंचायत रेनू गंगवार, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, विधायक राजकुमार ठुकराल, हरभजन सिंह चीमा, पुष्कर सिंह धामी, राजेश शुक्ला, मेयर रामपाल सिंह, अरविन्द सिंह हयांकी, आईजी कुमायूं अजय रौतेला, प्रभारी सचिव स्वास्थ्य, पंकज कुमार पाण्डेय, जिलाधिकारी डाॅ. नीरज खैरवाल आदि उपस्थित थे।

राजकीय अस्पताल ऋषिकेश में एमआर के साथ दिखने पर चिकित्साधिकारी पर दर्ज होगा मुकदमा

एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में अब दवा प्रतिनिधि (एमआर) प्रवेश पर प्रतिबंध लग गया है। इन दवा प्रतिनिधियों के साथ यदि कोई डॉक्टर दिखाई देता है, तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ आपदा एक्ट में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। यह आदेश मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. एनएस तोमर अस्पताल में महिला एमआर के कोरोना पॉजीटिव आने के बाद दिए हैं।

मुख्य चिकित्साधीक्षक (सीएसएस) डा. एनएस तोमर ने अस्पताल में तैनात सभी डॉक्टर्स को पत्र भेजा है। आदेश दिया है कि कोविड-19 का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। इसके लिए सभी को अस्पताल में सामाजिक दूरी बनाने पर ध्यान देना होगा। साथ ही इससे संबंधित सभी गाइडलाइन का पालन भी करना है। उन्होंने पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि किसी भी परिस्थिति में किसी भी दवा प्रतिनिधि (एमआर) को अपने कक्ष में प्रवेश न करने दें और न ही अपने साथ बैठने दें। यदि इस आदेश के बावजूद कोई भी चिकित्साधिकारी एमआर के संपर्क में दिखाई दिया तो चिकित्साधिकारी पर आपदा एक्ट में दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।

इस मामला के बाद दिया आदेश

ऋषिकेश। भरत विहार की एक महिला दवा प्रतिनिधि (एमआर) और उसके पिता की कोविड रिपोर्ट एक साथ पिछले 17 जुलाई को पॉजीटिव आई थी। वह 16 जुलाई को एम्स अस्पताल में गले में खरांश और बुखार होने की शिकायत लेकर पहुंची थी। हैरान करने वाली बात यह है कि उक्त महिला एमआर राजकीय चिकित्सालय में 15 जुलाई तक लगातार आ रही थी।

किसी भी पंजीकृत अस्पताल में बिना रेफर के असीमित खर्चे पर इलाज की सुविधा

उत्तराखंड के तीन लाख राजकीय कर्मचारी-पेंशनरों को एक सितंबर से असीमित खर्चे पर कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने अटल आयुष्मान योजना के तहत अगस्त में इनके गोल्डन कार्ड बनाने की तैयारी कर ली है। अगस्त के वेतन और पेंशन से उनके अंशदान की कटौती होगी, जो राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के खाते में जमा होगी।
कोरोना महामारी के बीच अगर सब कुछ सामान्य रहा तो प्रदेश के कर्मचारी-पेंशनरों को एक सितंबर से अटल आयुष्मान योजना में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। इस योजना का लाभ कर्मचारी-पेंशनरों के परिवार के सदस्यों को भी मिलेगा।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने 31 जुलाई 2020 तक सभी कर्मचारी-पेंशनरों से गोल्डन कार्ड बनाने के लिए परिवार के सदस्यों का ब्योरा मांगा गया है। इसके बाद अगस्त में गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे। कार्ड बनाने के लिए प्राधिकरण की ओर से गाइडलाइन जारी की जाएगी। प्राधिकरण की ओर कार्ड बनाने के लिए निजी कंपनी को भी अधिकृत किया जाएगा, जिससे कर्मचारी-पेंशनरों के कार्ड आसानी से बन सकें।
योजना के तहत कर्मचारी, पेंशनर और उनके परिजनों को किसी भी पंजीकृत अस्पताल में बिना रेफर के असीमित खर्चे पर इलाज की सुविधा मिलेगी। इलाज पर व्यय होने वाली राशि के लिए कोई सीमा तय नहीं है। ओपीडी और आईपीडी दोनों में इलाज उपलब्ध होगा।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष डीके कोटिया ने बताया कि अटल आयुष्मान योजना में कर्मचारी-पेंशनरों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा शुरू करने को एक सितंबर की तारीख प्रस्तावित की गई है। अगस्त में कार्ड बनाए जाएंगे और अगस्त के वेतन से ही अंशदान लिया जाएगा।

कोविड-19 के साथ हमें डेंगू से भी रहना होगा सजगः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सीएम आवास और आवासीय कार्यालय परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने गमलों, नालियों आदि को चेक किया कि कहीं पानी तो इकट्ठा नहीं हो रखा है। जिन गमलों में पानी था, उन्हें खाली किया। मुख्यमंत्री ने पानी की टंकियों में भी देखा कि डेंगू के लार्वा तो नहीं पनप रहे हैं।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने डेंगू पर वार करने के लिए आमजन से हर रविवार को 15 मिनट का समय निकालकर घर और घर के आस पास एकत्र पानी को हटाने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के साथ-साथ हमें डेंगू को लेकर भी बहुत सजग रहना है। साफ पानी में ही डेंगू पनपता है। हमें डेंगू को पनपने नहीं देना है। इसके लिए अपने घर और घर के आस पास पानी इकट्ठा न होने दें। हम हर सप्ताह रविवार को केवल 15 मिनट का समय निकालें और डेंगू पर वार करें। आमजन का योगदान बहुत जरूरी है।

रिकवरी रेट में उत्तराखण्ड देश में दूसरे नम्बर पर: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम तथा बचाव के लिए किये जा रहे कार्यों की वीडियों कांफ्रेंस के माध्यम से समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि होम क्वारंटीन पर रखे गये लोगों की नियमित मॉनिटरिंग की जाय। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारियों को नोडल ऑफिसर बनाया जाय। होम क्वारंटीन एवं पर्यटन स्थलों पर सतत निगरानी के लिए पीआरडी, होमगार्ड एवं अन्य लोगों की ड्यूटी लगाई जाय। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कारवाई की जाय। हाई रिस्क मामलों एवं आरोग्य सेतु एप पर भी नियमित निगरानी रखी जाय। सर्विलांस सिस्टम को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चार मैदानी जनपदों देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर एवं नैनीताल में विशेष सतर्कता की आवश्यकता है। इन जनपदों में सैनिटाइजेशन पर विशेष ध्यान दिया जाय। अभी प्रदेश में 558 कोविड के सक्रिय मामलों में से 473 इन चार जनपदों में हैं। शेष 9 जनपदों में 85 एक्टिव केस हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि सब्जी मण्डियों एवं पर्यटक स्थलों पर फिजिकल डिस्टेंसिंग एवं कोविड-19 के अन्य मानकों का पूरा अनुपालन किया जाय। मानकों का अनुपालन न करने वालों पर कारवाई की जाय। कन्टेंटमेंट जोन माइक्रो लेबल पर बनाये जाय, ताकि उनकी निगरानी भी सही तरीके से हो एवं लोगों को अनावश्यक परेशानियां न हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोविड सैंपल टेस्टिंग की संख्या बढ़ाई गई है। जल्द ही कुछ और ट्रू-नेट मशीन राज्य को मिलने वाली हैं, जिससे सैंपलिंग में और तेजी आयेगी। उन्होंने जिलाधिकारी नैनीताल को निर्देश दिये कि एसडीआरएफ के सहयोग से नैनीताल में 500 बैड का कोविड केयर सेंटर बनाया जाय। अभी उत्तराखण्ड रिकवरी रेट में देश में लद्दाख के बाद दूसरे नम्बर पर है। उन्होंने कहा कि कोविड पर प्रभावी नियंत्रण हेतु जिन जनपदों की सीमाएं अन्य प्रदेशों के जनपदों की सीमाओं से लगी हैं, सतर्कता के दृष्टिगत उस जनपद के प्रशासन से समन्वय रखा जाय। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये दिये की मानसून के दृष्टिगत सभी व्यवस्थाएं सुचारू रखी जाय, रिस्पांस सिस्टम कम से कम किया जाय। डेंगू से बचाव हेतु सभी तैयारियां पूर्ण कर ली जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड के दौरान सभी जिलाधिकारी एवं उनकी टीम अच्छा कार्य कर रहे हैं। लेकिन अभी हमको पूरी सतर्कता के साथ कार्य करने होंगे। जनता का भी सकारात्मक सहयोग मिला है।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि सर्विलांस सिंस्टम को प्राथमिकता पर रखा जाय। सभी जिलों में सैंपल टेस्टिंग टारगेटेड हो। हमें कोरोना से बचाव के साथ ही आर्थिक गतिविधियों पर भी ध्यान देना होगा। प्रधानमंत्री जी के जान और जहान दोनों कांसेप्ट पर काम करना होगा। कान्टेक्ट ट्रेसिंग पर विशेष ध्यान दिया जाय। राज्य में स्थिति नियंत्रण में हैं, आगे भी हमारे प्रयास इसी तरह के होने चाहिए। बैठक में बताया गया कि काशीपुर में अधिक एक्टिव केस के दृष्टिगत काशीपुर में लॉकडाउन किया गया है।

बिना मास्क और सोशल डिस्टेसिंग का पालन नही करने पर दो बसे सीज

(एनएन सर्विस)
ऋषिकेश के रायवाला थानाक्षेत्र में अवैध तरीके से 70 और 69 सवारियों को लेकर आ रही यूपी नंबर की दो बसों को सीज किया है। साथ ही दोनों बस के मालिक और चालकों पर मुकदमा भी दर्ज किया है।
थानाध्यक्ष रायवाला हेमंत खंडूरी ने बताया कि सप्त ऋषि बैरियर पर चेकिंग के दौरान मंगलवार को बस संख्या यूपी53ईटी-9901 और यूपी95टी-4135 को रोककर जांचा गया। जांच के दौरान बस के अंदर सामाजिक दूरी का उल्लंघन मिला, अधिकांश यात्री बिना मास्क के बैठे मिले। थानाध्यक्ष ने बताया कि दोनों बसे देहरादून आ रही थी। दोनों ही बसों में 32-32 यात्रियों के बैठने की अनुमति हैं, मगर, बस में 70 और 69 यात्री भरे हुए मिले। बताया कि बस चालक पर सक्षम अधिकारी द्वारा निर्मित पास भी नहीं मिला।
थानाध्यक्ष ने यूपी53ईटी-9901 बस के चालक जयराम पुत्र भगरासन निवासी ग्राम कहला थाना बढ़ोली जिला गोपालगंज बिहार एवं वाहन स्वामी अभिषेक निवासी गोरखपुर उत्तर प्रदेश तथा बस संख्या यूपी95टी-4135 के चालक अजय पाण्डे पुत्र चन्द्रिका पाण्डे निवासी ग्राम तेलियां बसोली थाना बसंतपुर जिला सीवान बिहार एवं वाहन स्वामी केसी जैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही दोनों बसों को सीज किया है।

राहतः चिकित्सकों के 763 पदों पर सीधी भर्ती करने की प्रक्रिया

(एनएन सर्विस)
रिक्त पदों को भरने के लिए शासन द्वारा उत्तराखण्ड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को अध्याचन भेजा गया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर राज्य में साधारण ग्रेड चिकित्साधिकारियों के 763 रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गई है। उत्तराखण्ड प्रान्तीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के तहत साधारण ग्रेड चिकित्साधिकारियों के रिक्त पदों को भरने के लिए शासन द्वारा उत्तराखण्ड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को अध्याचन भेजा गया है। बोर्ड से रिक्त 763 पदों पर सीधी भर्ती के लिए तत्काल विज्ञप्ति प्रकाशित कर चयन की कार्यवाही प्राथमिकता से करने की अपेक्षा की गई है।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि 763 चिकित्सकों की भर्ती से राज्य के हेल्थ सिस्टम को मजबूती मिलेगी। प्रदेश के हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर में काफी सुधार किया गया है। आज हर जिले में आईसीयू की सुविधा है। चिकित्सकों की संख्या पहले की तुलना में दोगुनी की गई है। टेली रेडियोलोजी और टेली मेडिसिन शुरू की गई। हम कोविड-19 के संक्रमण को नियंत्रित करने में सफल रहे है। उत्तराखण्ड सर्वाधिक रिकवरी रेट वाला राज्य है। हमारे यहां मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। कोरोना काल में 400 नए डाक्टरों की भर्ती की गई, 273 आईसीयू बेड, 165 वेंटिलेटर और 33 बाईपेप मशीनों की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही 13 जिला अस्पतालों/बेस अस्पतालों में आक्सीजन सप्लाई पाईप लाईन का निर्माण किया जा रहा है।

कोरोना को हराने के लिए सर्तकता और बचाव जरुरीः मुख्यमंत्री

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि कोविड-19 को लेकर सर्विलांस, कान्टेक्ट ट्रेसिंग, सैम्पल टेस्टिंग, क्लिनिकल मैनेजमेंट और जन जागरूकता, इन पांच बातों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कोविंड-19 से लड़ाई के लिये हर प्रकार की तैयारी की गई है। स्थिति काफी कुछ नियंत्रण में होने पर भी हम पूरी तरह सतर्क हैं। राज्य में कोविड के दृष्टिगत हैल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को काफी मजबूत किया गया है। टेस्टिंग लैब, आईसीयू, वेंटिलेटर, पीपीई किट, एन 95 मास्क, आक्सीजन सपोर्ट की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। नियमित सर्विलांस सुनिश्चित किया जा रहा है। घर-घर जाकर कोरोना जैसे संदिग्ध लक्षणों वाले लोगों का पता लगाया जा रहा है। इसमें आशा और आंगनबाङी कार्यकत्रियों द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। लगभग सभी जिलों में सर्विलांस का एक राउंड पूरा किया जा चुका है। कई जिलों में दूसरा तो कुछ में तीसरा राउंड चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेम्पल टेस्टिंग में पहले की तुलना में काफी सुधार किया गया है। कोरोना संक्रमण के शुरूआत में राज्य में एक भी टेस्टिंग लेब नहीं थी जबकि अब उत्तराखंड में 5 सरकारी और 2 प्राईवेट लेब में कोविड-19 संक्रमण के सैम्पल की जांच की जा रही है। इसके अतिरिक्त एनसीडीसी दिल्ली व पीजीआई चंडीगढ़ में भी सेम्पल टेस्टिंग के लिए भेजे जा रहे हैं। सेम्पल टेस्टिंग की सुविधा जिला स्तर पर कराने के लिए सभी जिलों को ट्रूनेट मशीनें उपलब्ध करा दी गई हैं। प्रदेश के चिकित्सालयों में फ्लू क्लिनिक के माध्यम से आ रहे समस्त श्वास व इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षणों वाले मरीजों का कोविड-19 संक्रमण जांच के लिए सेम्पल लिए जा रहे हैं। सेम्पल टेस्टिंग की संख्या बढाने के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। प्रति मिलियन जनसंख्या पर 6408 सेम्पल लिए जा रहे हैं। जल्द ही इसे देश के औसत के बराबर कर लिया जाएगा। देहरादून व नैनीताल दो जिलों में प्रति मिलियन सेम्पल राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं। देहरादून जिले का औसत तो राष्ट्रीय औसत से दोगुना है। अन्य जिलों को भी सेम्पल टेस्टिंग बढाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जरूरी संसाधन बढाए जा रहे हैं।
प्रदेश में बनाए गए डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर में हर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। वर्तमान में राज्य में 325 कोविड केयर सेंटर स्थापित हैं। इनमें कुल बेड क्षमता 22890 है जिनमें से 289 बेड उपयोगरत हैं जबकि 22601 बेड रिक्त हैं। इस प्रकार कोविड केयर सेंटर में पर्याप्त संख्या में बेड की उपलब्धता है।
राज्य में कोविड फेसिलिटी में आक्सीजन सपोर्ट बेड की संख्या 15 मई को 673 थी जो कि अब बढ़कर 1126 हो गई है। कोविड फेसिलिटी में आईसीयू बेड की संख्या 15 मई को 216 से बढाकर 247 और वेंटिलेटर की संख्या 116 से बढाकर 159 कर दी गई है। कोविड केयर सेंटर में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एक तरफ सैम्पल टेस्टिंग में लगातार वृद्धि हो रही है वहीं रिकवरी रेट और डबलिंग रेट भी राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है और इनमें लगातार सुधार हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह से राज्य में सतर्कता बरती जा रही, उम्मीद है कि हम जल्द ही हालात पर नियंत्रण पा लेंगे। सभी जिलों में अधिकारी और कर्मचारी अपनी पूरी सजगता के साथ मिशनरी मोड में काम कर रहे हैं। उच्च स्तर से भी लगातार मानिटरिंग की जा रही है। जहां कमियां पाई जाती हैं उन्हें तत्काल दूर किया जाता है। इन लगभग चार माह में प्राप्त अनुभव से प्रशासनिक क्षमता में वृद्धि हुई है।

एक्टिव मामलों में कमी लेकिन हम और सतर्क रहना होगाः मुख्यमंत्री

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि कोविड-19 के एक्टीव मामलों में कमी होने पर भी लगातार सावधान रहने की जरूरत है। प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की शिथिलता न हो। शनिवार को मुख्यमंत्री ने कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम तथा बचाव के लिए किए जा रहे कार्यों की सचिवालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि हमारी रिकवरी रेट 81 प्रतिशत से अधिक हो गई है। मृत्यु दर को कम करने पर विशेष ध्यान देना होगा। गम्भीर मामलों पर जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्वयं लगातार नजर रखें। ऐसे मामलों में अविलम्ब रेस्पोंस सुनिश्चित किया जाए। लगातार सर्विलांस किया जाए और संदिग्ध मामलों में सेम्पलिंग जरूर की जाए।

एक्टीव मामलों में कमी आई, पर किसी तरह की ढ़िलाई न आए
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले लगभग 4 माह में कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए काफी काम किया गया है। इसी का परिणाम है कि वर्तमान में प्रदेश में कोरोना का रिकवरी रेट 81 प्रतिशत से अधिक है और यह निरंतर बढ़ रहा है। हमारे यहां एक्टीव मामलों की संख्या 500 से भी कम हो गई है। परंतु अभी आराम का समय नहीं है। सतत सतर्कता बनाए रखनी है। कान्टेक्ट ट्रेसिंग और क्वारेंटाईन सेंटरों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। डेथ ऑडिट रिपोर्ट में कोरोना संक्रमित की मृत्यु के कारणों का विश्लेषण कर देखा जाए कि कहां-कहां सुधार किए जाने की जरूरत है। क्लिनिकल मैनेजमेंट में गम्भीरतम मामलों पर उच्च स्तर से मॉनिटरिंग की जाए।

आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को समय पर मिले मानदेय
आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्री आदि फ्रंटलाईन वर्कर कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में हमारे प्रमुख योद्धा हैं। इनके मानदेय के भुगतान में किसी प्रकार का विलम्ब नहीं होना चाहिए। साथ ही इन्हें फेस शील्ड, सेनेटाईजर आदि उपलब्घ करवाना सुनिश्चित किया जाए।

मास्क व फिजीकल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रदेश में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है। आई.सी.यू., वेंटिलेटर, टेस्टिंग मशीन व लेब आदि सुविधाओं में भी काफी वृद्धि हुई है। लोगों को लगातार जागरूक करने की जरूरत है। सार्वजनिक स्थानों पर मास्क व फिजीकल डिस्टेंसिंग का पालन सख्ती से कराया जाए। कोविड-19 को लेकर भ्रामक व गलत समाचार प्रसारित करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। कोराना से ठीक हुए लोगों के अनुभवों के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में साझा किया जाए ताकि आम जन में इसके प्रति जागरूकता आए।

बुजुर्गो और गम्भीर बीमार व्यक्तियों के हेल्थ स्टेटस की लगतार मॉनिटरिंग
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि कोविड-19 को लेकर किसी भी प्रकार का निर्णय बहुत सोच समझकर लिया जाता है। प्रदेश में स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है। अन्य बहुत से प्रदेशों से हमारी स्थिति बेहतर है। परंतु अभी भी हमारे प्रयासों में किसी प्रकार की ढ़िलाई नहीं आनी चाहिए। कान्टेक्ट ट्रेसिंग में कमी न रहे। कोविड-19 के प्रति संवेदनशील बुजुर्गो, छोटे बच्चों और बीमार व्यक्तियों को टार्गेट करते हुए उनके हेल्थ स्टेटस को लगातार मॉनिटर किया जाए। जो भी डाटा प्राप्त होता है, जिलाधिकारी भी उसका विश्लेषण कर देखें कि उनके जिले में कहां कमियां रही हैं। उनमें सुधार किया जाए। कोविड-19 के साथ ही डेंगू पर भी ध्यान देना है। बरसात के सीजन को देखते हुए भी सभी तैयारियां कर ली जाएं।

विभिन्न मानकों पर राज्य की स्थिति बेहतर
सचिव अमित नेगी ने बताया कि राज्य में कोविड-19 के कुल एक्टीव केस 500 से भी कम रह गए हैं। पिछले सात दिन में कोरोना की वृद्धि दर 0.56 प्रतिशत है जबकि भारत में यह 1.28 प्रतिशत है। उत्तराखण्ड में पॉजिटीविटी रेट 4.68 प्रतिशत है और देश में औसत पॉजिटीविटी रेट 6.73 प्रतिशत है। राज्य में कुल पॉजिटिव मामलों में से 89 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में और 11 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में पाए गए हैं। सेम्पलिंग में भी पहले की तुलना में लगातार बढ़ोतरी हुई है। राज्य की डबलिंग रेट 57.39 दिन है जबकि देश की डबलिंग रेट 23.52 दिन है।

आईसीयू, वेंटीलेटर व आक्सीजन सपोर्ट की पर्याप्त उपलब्धता
कोविड केयर सेंटरों में वर्तमान में 22601 रिक्त बेड उपलब्ध हैं। कोविड फेसिलिटी में 1126 आक्सीजन सपोर्ट बेड, 247 आईसीयू बेड और 159 वेंटीलेटर उपलब्ध हैं। जिलों को सेम्पलिंग के लिए 16 ट्रू-नेट मशीन उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं। जिलों की आवश्यकता के अनुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

कान्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए तीन राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम कार्यरत
आईजी संजय गुन्ज्याल ने बताया कि प्रदेश में कान्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए तीन कंट्रोल रूम काम कर रहे हैं। देहरादून, उत्तरकाशी व टिहरी के लिए देहरादून कंट्रोल रूम, हरिद्वार, पौड़ी, चमोली और रूद्रप्रयाग के लिए हरिद्वार कंट्रोल रूम और कुमायूं मण्डल के सभी जिलों के लिए रामनगर कंट्रोल रूम कार्य कर रहा है। सभी 13 जिलों में कांटेक्ट ट्रेसिंग के लिए बीआरटी और सीआरटी सक्रिय हैं। हर जिले में इसके लिए एक नोडल अधिकारी भी तैनात है।

बैठक में आयुक्त गढ़वाल रविनाथ रमन, आयुक्त कुमायूं अरविंद सिंह ह्यांकि, सचिव डा. पंकज कुमार पाण्डेय, अपर सचिव युगल किशोर पंत, महानिदेशक स्वास्थ्य डा. अमिता उप्रेती सहित सभी जिलाधिकारी व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

80 करोड़ लोगों को अगले पांच माह तक और मिलेगा निःशुल्क राशनः पीएम मोदी

(एनएन सर्विस)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर में 80 करोड जरूरतमंद लोगों को अगले पांच महीने तक मुफ्त राशन देने की घोषणा की। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का इस साल नवम्घ्बर के अंत तक विस्तार कर दिया गया है।
कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बाद घोषित इस योजना के अंतर्गत गरीब परिवारों के हर सदस्य को हर महीने पांच किलोग्राम गेहूं या चावल और एक किलोग्राम साबुत चना मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना को नवम्बर तक बढ़ाने पर सरकार को 90 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च करनी होगी।
राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछले तीन महीनों में करीब बीस करोड़ गरीब लोगों के जनधन खातों में 31 हजार करोड रुपए अंतरित किए गए हैं। इसी तरह नौ करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18 हजार करोड़ रुपए भेजे गए हैं। गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए चलाए जा रहे प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान पर 50 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज देश एक-राष्ट्र, एक-राशन कार्ड की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे रोजगार के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाले गरीब मजदूरों को बड़ा फायदा होगा।

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आर्थिक र्मोचे पर घिरा चीन तो अंतरराष्ट्रीय कानून की याद आई

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोरोना महामारी की वजह से मृत्युदर पर नजर डाली जाए तो यह बात स्पष्ट हो जाती है कि अन्य देशों के मुकाबले भारत, इस महामारी से निपटने में बड़ी मजबूत स्थिति में रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि समय पर लॉकडाउन लागू करने के फैसले से कई जानें बचाई जा सकीं। उन्होंने कहा कि जब से देश में अनलॉक-वन शुरू हुआ है, कुछ लोग अपने व्यक्तिगत और सामाजिक व्यवहार में लापरवाही बरत रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनलॉकडाउन के दौरान भी नियमों पर उसी तरह से अमल किया जाना चाहिए जिस तरह लॉकडाउन के दौरान किया गया था। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि लोगों को अनुशासन बनाए रखना चाहिए और जो लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं उन्हें रोका जाना चाहिए, उन्हें जागरूक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।