जिला कारागार हरिद्वार से दो बन्दियों के भाग जाने पर छह कार्मिक निलंबित, जांच के निर्देश

जिला कारागार, हरिद्वार से दो बंदियों के भाग जाने की घटना पर 6 कार्मिकों को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। उप महानिरीक्षक कारागार इसकी जांच कर रिपोर्ट देंगे।

बताया गया कि निरूद्ध सिद्धदोष बंदी पंकज पुत्र मगन लाल एवं विचाराधीन बंदी रामकुमार पुत्र रक्षाराम दिनांक 11 अक्टूबर, 2024 की सायंकाल को कारागार से निकल गए। उक्त घटना में संबंधित के विरूद्ध सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कराया गया है तथा इस घटना के लिए 06 कार्मिकों 1. प्यारे लाल आर्य, प्रभारी अधीक्षक/कारापाल, 2. कुंवर पाल सिंह, उप कारापाल सर्किल जेलर / चक्राधिकारी 3. प्रेमशंकर यादव, दिन हेड वार्डर, 4. विजय पाल सिंह, हेड वार्डर-प्रभारी गिर्दा हेड 5. ओमपाल सिंह, बंदीरक्षक प्रभारी निर्माण स्थल, 6. नीलेश कुमार, हेड वार्डर प्रभारी गेटकीपर को उनके द्वारा ड्यूटी के प्रति बरती गयी लापरवाही एवं उदासीनता के निमित्त प्रथम दृष्टया उत्तरदायी पाते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। घटना की विस्तृत जांच हेतु उप महानिरीक्षक कारागार को निर्देशित किया गया है। विस्तृत जांच में पाये गये तथ्यों के आधार पर अग्रिम कार्यवाही संपादित की जायेगी।

जेल में सजा काट रहे कैदी ने की आत्महत्या की कोशिश, बंदीरक्षकों ने बचाया

हरिद्वार की जिला जेल में बंद आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी ने दूसरे कैदियों के उत्पीड़न से परेशान होकर आत्महत्या करने की कोशिश की। मगर, यह कोशिश नाकाम रही। बंदीरक्षकों ने समय रहते उसे देख लिया और बचाने में कामयाब रहे। कैदी को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है।

बृहस्पतिवार को हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी सुशील गुर्जर (50) पुत्र महेंद्र निवासी हरिद्वार ने जेल परिसर में पेड़ पर रस्सी के फंदे के सहारे लटककर आत्महत्या करनी चाही, लेकिन एक कैदी की उस पर निगाह पड़ गई।

कैदी ने तुरंत बंदीरक्षकों को इस बारे में जानकारी दी। आनन फानन में बंदीरक्षकों ने कैदी को उतारा और जिला अस्पताल में भर्ती कराया। कैदी ने अस्पताल में मीडिया कर्मियों को बताया कि उसको जेल में बंद कैदी परेशान करते हैं, जिसके चलते वह आत्महत्या करना चाह रहा था।

जिला अस्पताल में भर्ती कैदी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। जेल अधीक्षक अशोक कुमार से जब इस बाबत पूछा गया तो उनका कहना था कि कैदी अक्सर इस तरह के काम करता रहता है।