आदि रंगोत्सव में दिखी उत्तराखंड समेत देशभर की समृद्ध जनजातीय विरासत, संस्कृति और परंपराओं की झलक

खटीमा में आयोजित तीन दिवसीय उत्तराखंड आदि रंगोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्ज्वलित कर रंगोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, लोकसंगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से जनजातीय विरासत की समृद्ध झलक प्रस्तुत की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तथा केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम को पौधा एवं महाराणा प्रताप की प्रतिमा भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया। मुख्यमंत्री ने फिल्म ‘हनुमान अंश’ के कलाकारों को भी मंच पर शुभकामनाएं देते हुए पौधा, भगवान हनुमान की गदा एवं नीम करौली बाबा की तस्वीर भेंट कर सम्मानित किया।

आदि रंगोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं भी पारंपरिक सांस्कृतिक रंग में नजर आए। उन्होंने कलाकारों के साथ थिरकते हुए उनका उत्साहवर्धन किया तथा ढोल बजाकर जनजातीय संस्कृति के प्रति अपना जुड़ाव और सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री के इस सहज अंदाज ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों और कलाकारों का विशेष उत्साह बढ़ाया।

जनजातीय संस्कृति और गौरव का प्रतीक है आदि रंगोत्सवः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड आदि रंगोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर लोगों के बीच उपस्थित होना उनके लिए गौरव का क्षण है। यह रंगोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जनजातीय समाज के गौरव का उत्सव है। ऐसे आयोजन विभिन्न जनजातीय समुदायों की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को देश और दुनिया के सामने रखने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम का आवासीय एकलव्य विद्यालयों के विकास में सहयोग तथा खटीमा स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय के आधुनिकीकरण एवं विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपये की घोषणा के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू एवं जुएल ओराम से पिथौरागढ़ क्षेत्र में एक आवासीय एकलव्य विद्यालय स्थापित किए जाने का भी अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जुएल ओराम लंबे समय से जनजातीय समाज के हितों एवं कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में देश के जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, विकास और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज रोड शो के दौरान खटीमा में उन्हें विविध संस्कृतियों और परंपराओं के अनेक रंग देखने को मिले। खटीमा अपने आप में एक मिनी इंडिया है, जहां विभिन्न समुदायों की संस्कृति और परंपराएं एक साथ दिखाई देती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जोड़कर उन्हें सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

जनजातीय परिवारों को आवास एवं मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अटल आवास योजना में आय सीमा को व्यावहारिक बनाया है तथा आवास निर्माण की लागत में भी वृद्धि की है, ताकि अधिक से अधिक पात्र परिवारों को इसका लाभ मिल सके। ऊधम सिंह नगर जनपद में इस योजना के अंतर्गत 3 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत भी बड़ी संख्या में जनजातीय परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष आवास के लिए प्राप्त आवेदनों में लगभग 28 प्रतिशत आवेदन जनजातीय समाज के परिवारों के हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत प्रथम चरण में 824 तथा द्वितीय चरण में 101 आवासों का निर्माण किया जा चुका है।

शिक्षा के क्षेत्र में जनजातीय समाज के लिए किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य सरकार जनजातीय समाज के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। आश्रम पद्धति विद्यालयों, छात्रावासों एवं आईटीआई संस्थानों के विकास के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है।

उन्होंने कहा कि बाजपुर में 100 बेड के बालक छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है। 16 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विद्यालय का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जबकि बालिका छात्रावास के लिए भी 4 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसके साथ ही थारू राजकीय इंटर कॉलेज के सौंदर्यीकरण एवं आधुनिकीकरण का कार्य भी किया जा रहा है।

एवरेस्ट फतह करने वाले मोहन सिंह राणा और टीला सेन को दी बधाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा के अंजनिया गांव निवासी बीएसएफ जवान मोहन सिंह राणा तथा चारूबेटा की बेटी टीला सेन को माउंट एवरेस्ट फतह करने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दोनों ने अपनी उपलब्धि से न केवल थारू समाज, बल्कि पूरे उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। उनकी उपलब्धियां युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से जनजातीय समाज को रोजगार एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का कार्य कर रही है। जनजातीय समुदायों द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार से जोड़ने तथा उनके विपणन को बढ़ावा देने के साथ ही रिवॉल्विंग फंड एवं निवेश सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2020 से 2025 तक 10 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न योजनाएं धरातल पर उतारी जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य करती है। सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं को बीच में नहीं छोड़ा जाता, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर निरंतर ध्यान दिया जाता है।

खटीमा एकलव्य विद्यालय के लिए 10 करोड़ रुपये की घोषणा रू जुएल ओराम

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल को याद किया और जनजातीय समाज के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जनजातीय मामलों के लिए पृथक मंत्रालय का गठन किया गया। इसका उद्देश्य थारू, बोक्सा, जौनसारी सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के सर्वांगीण विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना था। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन वर्ष 1999 में हुआ था।

केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों के साझा प्रयासों से खटीमा में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल का निर्माण संभव हुआ है। उन्होंने घोषणा की कि खटीमा स्थित एकलव्य विद्यालय के विस्तार एवं सुविधाओं के लिए भारत सरकार लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

उन्होंने बताया कि लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले हॉस्टल का टेंडर पूरा हो चुका है और निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किया जाएगा। विद्यालय में 240 बालकों और 240 बालिकाओं सहित कुल 480 विद्यार्थियों के अध्ययन की क्षमता होगी। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की निर्धारित क्षमता भी 480 विद्यार्थियों की है।

केंद्रीय मंत्री ने खटीमा के एकलव्य विद्यालय के शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के अन्य स्थानों, जिनमें बाजपुर, चकराता तथा देहरादून का कालसी क्षेत्र शामिल हैं, में भी ऐसे विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

जुएल ओराम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय कल्याण के लिए संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि क्षेत्र की जनजातीय समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

जनजातीय संस्कृति और मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व की सराहना रू किरेन रिजिजू

केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने उत्तराखंड की जनजातीय विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में थारू, बोक्सा, जौनसारी और राजी सहित विभिन्न जनजातीय समुदाय निवास करते हैं, जिनकी विशिष्ट संस्कृति और परंपराएं राज्य की पहचान को समृद्ध बनाती हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, सुरंग दुर्घटनाओं, भूस्खलन और अन्य विपरीत परिस्थितियों के दौरान उन्होंने विभिन्न चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा जनसेवक सदियों में मिलता है।

रिजिजू ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में जनजातीय समाज के कल्याण और उनकी पहचान को नई प्राथमिकता मिली है। स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान को सम्मान देते हुए भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की गई। उन्होंने कहा कि पीएम-जनमन जैसी योजनाओं के माध्यम से विकास की पहुंच दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों तक सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और मिजोरम सहित विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय प्रतिनिधियों एवं कलाकारों का अभिनंदन किया। उन्होंने सभी समुदायों से अपनी सांस्कृतिक विरासत, पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखने का आह्वान करते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में जनजातीय समाज की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।

विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने प्रस्तुत कीं सांस्कृतिक झलकियां

उत्तराखंड आदि रंगोत्सव में राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मिजोरम और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने अपनी-अपनी लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, संगीत एवं कला की प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों की रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा और लोक प्रस्तुतियां दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहीं।

कैबिनेट मंत्री खजान दास ने उत्तराखंड आदि रंगोत्सव में पधारे सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए आयोजन के लिए सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, कलाकारों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सुबोध उनियाल, प्रदीप बत्रा, खजान दास, राम सिंह कैड़ा, भरत सिंह चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार, विधायक सरिता आर्या, दर्जा राज्यमंत्री गीता राम गौड़, रणजीत सिंह नामधारी बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

सीएम धामी ने चंपावत जनपद के लिए की जनहित से जुड़ी चार महत्वपूर्ण घोषणाएं

देहरादून/चम्पावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चम्पावत के बनबसा में क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास के साथ ही स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में बनबसा और टनकपुर क्षेत्र के लिए चार महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में श्रेणी-1 ‘ख’ के पट्टे एवं तराई-भाभर स्टेट के पट्टे की भूमि के पट्टेदारों के विनियमितीकरण की कार्यवाही यथाशीघ्र की जाएगी। इससे संबंधित पट्टेदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शारदा कॉरिडोर एवं कैनाल कॉरिडोर के अंतर्गत बनबसा एवं टनकपुर के प्राचीन एवं पौराणिक मंदिरों का सौंदर्यीकरण एवं विस्तारीकरण किया जाएगा। इससे क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण मिलने के साथ ही धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, टनकपुर के विस्तारीकरण के लिए 2.01 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने की भी घोषणा की। इससे संस्थान के विस्तार तथा विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक सुविधाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

मुख्यमंत्री ने बनबसा एवं टनकपुर शहरी निकायों के अंतर्गत प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत सरकारी भूमि पर लंबे समय से कच्चे एवं अस्थायी भवनों में निवास कर रहे नागरिकों के लिए स्थायी एवं पक्के आवास उपलब्ध कराने की घोषणा की। इससे लंबे समय से अस्थायी आवासों में रह रहे परिवारों को सुरक्षित एवं बेहतर आवासीय सुविधा मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। बनबसा और टनकपुर जैसे सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास, शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार और आवासीय समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार सीमांत क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए क्षेत्र के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उत्तराखंडः सीमांत क्षेत्रों तक धामी सरकार, विकास को नई रफ्तार

देहरादून/चम्पावत। उत्तराखण्ड में शासन को प्रदेश के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक नई पहल की है। इसी क्रम में आज भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे चम्पावत जनपद के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की जा रही है। चम्पावत जिले में पहली बार कैबिनेट बैठक आयोजित हो रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कैबिनेट बैठकें अब केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में भी आयोजित की जाएंगी। इससे स्थानीय स्तर की समस्याओं, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सीधे शासन के समक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र केवल राज्य की भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि हमारी सुरक्षा, संस्कृति और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को और मजबूत किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शासन को जनता के और करीब ले जाना है। जब कैबिनेट की बैठकें प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में होंगी, तो वहां की स्थानीय परिस्थितियों, जन अपेक्षाओं और विकास की आवश्यकताओं को समझने तथा उन पर त्वरित निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड के हर क्षेत्र का संतुलित विकास राज्य सरकार की प्रतिबद्धता है। सीमांत गांवों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक विकास की गति को समान रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।

नेपाल भारत सीमा पर स्थापित शहीद स्मारक देश सेवा, त्याग और बलिदान का प्रतीकः धामी

भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा बनबसा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्धारित कार्यक्रम के तहत सैनिक स्मारक एवं झंडा पार्क का विधिवत पूजा-अर्चना के साथ लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

एसएसबी जवानों द्वारा बिगुल वादन के बीच मुख्यमंत्री सहित उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन धारण कर देश की रक्षा के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन किया। कार्यक्रम के दौरान नेपाल-भारत सीमा के इस प्रमुख सीमांत क्षेत्र में नवनिर्मित शहीद स्मारक का लोकार्पण किया गया तथा विशाल राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया गया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सीमांत क्षेत्र में शहीद स्मारक और विशाल तिरंगे का लोकार्पण अत्यंत गौरव एवं सम्मान का क्षण है। यह स्मारक देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान की स्मृतियों को सदैव जीवंत रखेगा।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व में देश के अंतिम गांव या अंतिम क्षेत्र के रूप में देखे जाने वाले सीमावर्ती क्षेत्रों को अब देश के ‘पहले क्षेत्र’ के रूप में पहचान दी जा रही है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश के सैनिकों, उनके परिवारों के कल्याण तथा वीर शहीदों की स्मृतियों को सम्मान देने को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं स्वयं एक सैनिक का पुत्र हूं। इसलिए सैनिकों के सम्मान से जुड़े इस पावन कार्य में सहभागी बनना मेरे लिए अत्यंत भावुक और गर्व का विषय है।” उन्होंने कहा कि यह शहीद स्मारक आने वाली पीढ़ियों को सदैव यह प्रेरणा देता रहेगा कि हमारे वीर जवान किन विषम और कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा के लिए डटे रहते हैं।

उन्होंने कहा कि यह स्मारक युवाओं को देश सेवा, त्याग और समर्पण के लिए निरंतर प्रेरित करेगा। उत्तराखंड की सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड वीर सैनिकों की भूमि है। प्रदेश के लगभग हर परिवार का किसी न किसी रूप में सेना अथवा अर्धसैनिक बलों से जुड़ाव रहा है और यहां के वीर जवान राष्ट्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

वीर नारियों एवं वीरता पदक विजेता सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वीर नारियों एवं वीरता पदक विजेता को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। उन्होंने वीर नारी सरस्वती देवी, पत्नी स्व. सिपाही उत्तम चन्द; लक्ष्मी देवी, पत्नी स्व. हवलदार किशन सिंह; कमला देवी, पत्नी स्व. गार्डसमैन दुर्गादत्त; खीमा देवी, पत्नी स्व. नायक हयात सिंह; माया चन्द, पत्नी स्व. सिपाही ललित मोहन; सरस्वती देवी, पत्नी स्व. ला. ना. जय बहादुर चन्द; ललिता चन्द, पत्नी स्व. सिपाही प्रेम चन्द; गीता देवी, पत्नी स्व. नायक जगदीश सिंह तथा पिंकी रैसवाल, पत्नी स्व. सिपाही राहुल रैसवाल को सम्मानित किया।

इसके साथ ही वीर माता लक्ष्मी देवी, माता स्व. नायक खीम सिंह तथा वीरता पदक विजेता सूबेदार गोपाल दत्त शर्मा (सेना मेडल) को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने वीर नारियों एवं भूतपूर्व सैनिकों से संवाद किया तथा एसएसबी जवानों के साथ फोटो खिंचवाकर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा में सैनिकों का योगदान सर्वाेपरि है। सैनिकों, वीर नारियों, भूतपूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर जिलाधिकारी मनीष कुमार, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल उमेद सिंह (से.नि.), एसएसबी कमांडेंट सुरेंद्र विक्रम सहित अन्य अधिकारी, सेवानिवृत्त सैनिक, वीर माताएं एवं वीर नारियां उपस्थित रहे।

खेल महाकुंभ चैपियनशिप का शुभारंभ कर बोले सीएम, राज्य को खेलभूमि बनाना हमारा लक्ष्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चम्पावत के स्व. कैलाश चन्द्र गहतोड़ी स्पोर्ट्स स्टेडियम, टनकपुर में ‘खेल महाकुम्भ-मुख्यमंत्री चौम्पियनशिप ट्रॉफी-2026’ का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट खिलाड़ी गहना महर को मशाल सौंपकर खेल महाकुम्भ का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर खिलाड़ियों ने पूर्ण अनुशासन, निष्पक्षता एवं खेल भावना के साथ प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने की शपथ ली। खिलाड़ियों द्वारा योगासन एवं उत्तराखंड के पारंपरिक खेल ‘मुर्गा झपट’ का प्रदर्शन भी किया गया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल महाकुम्भ प्रदेश की प्रतिभाओं को गांव की मिट्टी से राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि उचित मंच और संसाधनों के अभाव में प्रदेश की कोई भी प्रतिभाशाली खेल प्रतिभा पीछे न रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि खेल अनुशासन सिखाते हैं, आत्मविश्वास जगाते हैं, संघर्ष करना सिखाते हैं और गिरकर फिर उठने का साहस देते हैं। खेल स्वस्थ शरीर के साथ मजबूत चरित्र और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य सरकार खेलों को उत्तराखंड के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का महत्वपूर्ण आधार मानकर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में खेल महाकुम्भ की शुरुआत प्रदेश के गांव-गांव में छिपी खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। आज खेल महाकुम्भ अपने दसवें संस्करण में प्रवेश कर चुका है। पिछले वर्ष 2 लाख 20 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने खेल महाकुम्भ में प्रतिभाग किया था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष और अधिक संख्या में बच्चे एवं युवा इसमें प्रतिभाग करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष खेल महाकुम्भ को और अधिक व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया है। न्याय पंचायत स्तर से शुरू होकर विधानसभा, संसदीय एवं राज्य स्तर तक विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। सरकार का उद्देश्य गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक विजेता खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार प्रदान किए जा रहे हैं। इस वर्ष लगभग 11 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खिलाड़ियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष से खेल महाकुम्भ की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में 4 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह खिलाड़ियों के परिश्रम, प्रतिभा और उनके सपनों का सम्मान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का गौरव बढ़ाया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खेल महाकुम्भ के मंच से निकलने वाली प्रतिभाएं भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्तराखंड और देश का नाम रोशन करेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के प्रति सोच में व्यापक बदलाव आया है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसे अभियानों ने देश के गांवों एवं दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और प्रोत्साहन मिलने से भारत वैश्विक खेल मंच पर निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार भी उत्तराखंड में खेल और खिलाड़ियों के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य की नई खेल नीति के अंतर्गत राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी प्रदान की जा रही है। अब तक 29 खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में नियुक्ति दी जा चुकी है। साथ ही 38वें राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों में सेवायोजित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री खेल विकास निधि के माध्यम से खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश के आवासीय स्पोर्ट्स कॉलेजों एवं क्रीड़ा छात्रावासों में चयनित खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, आवास, भोजन, खेल उपकरण, खेल किट, शिक्षा एवं चिकित्सा जैसी सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चौंपियन की तैयारी बचपन से ही शुरू होती है। इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के अंतर्गत 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को मासिक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है, ताकि छोटी उम्र से ही उनकी खेल प्रतिभा को सही दिशा और प्रोत्साहन मिल सके।

उन्होंने कहा कि 14 से 23 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों के लिए मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के माध्यम से मासिक छात्रवृत्ति के साथ खेल उपकरण खरीदने के लिए भी आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। खिलाड़ियों के लिए प्रतियोगिता एवं प्रशिक्षण के दौरान दुर्घटना की स्थिति में बीमा संबंधी व्यवस्था भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेलों के लिए मजबूत एवं आधुनिक आधारभूत ढांचा विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। हाल ही में हल्द्वानी में उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय के प्रथम चरण के निर्माण कार्यों का शिलान्यास एवं प्रथम शैक्षणिक सत्र का शुभारम्भ किया गया है। इसके साथ ही खटीमा में आधुनिक खेल सुविधाओं से युक्त स्टेडियम के निर्माण की घोषणा भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘एक जनपद-एक खेल’ के माध्यम से विभिन्न खेल विधाओं और स्थानीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक जनपद की अपनी विशिष्ट खेल पहचान विकसित हो और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों का आह्वान किया कि वे पूरी ताकत, लगन, अनुशासन और निष्ठा के साथ मैदान में उतरें तथा अपने खेल के जुनून को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने, उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘खेल महाकुम्भ-2026’ उत्तराखंड के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प के बल पर उत्तराखंड को देश में ‘खेलभूमि’ के रूप में स्थापित करने का हमारा ‘विकल्प रहित संकल्प’ अवश्य सिद्ध होगा।

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने खिलाड़ियों को पूर्ण समर्पण एवं खेल भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि न्याय पंचायत स्तर की प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों के खेल जीवन की महत्वपूर्ण शुरुआती सीढ़ी हैं। यहां से खिलाड़ी अपनी प्रतिभा के बल पर विभिन्न स्तरों से आगे बढ़ते हुए राज्य स्तरीय मुख्यमंत्री चौम्पियनशिप ट्रॉफी तक पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपनी क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिले।

खेल मंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल सुविधाओं के विकास के साथ खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने खिलाड़ियों से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

खेल महाकुम्भ-2026 के अंतर्गत 01 से 10 सितम्बर तक न्याय पंचायत स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि खेलकूद प्रतियोगिताएं, 11 से 20 सितम्बर तक विधायक चौम्पियनशिप ट्रॉफी, 21 से 30 सितम्बर तक सांसद चौम्पियनशिप ट्रॉफी तथा 10 से 30 अक्टूबर तक राज्य स्तरीय मुख्यमंत्री चौम्पियनशिप ट्रॉफी का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिताओं में विभिन्न आयु वर्गों के बालक-बालिकाओं के साथ महिला ओपन एवं दिव्यांगजन महिला-पुरुष वर्ग के खिलाड़ियों को भी विभिन्न खेल विधाओं में प्रतिभाग करने का अवसर मिलेगा।

इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित कुमार सिन्हा, निदेशक खेल दीप्ति सिंह, जिलाधिकारी मनीष कुमार, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविन्द सामन्त, जिला पंचायत अध्यक्ष आनन्द सिंह अधिकारी सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, दायित्वधारी, अधिकारी, प्रशिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने बनबसा में प्रबुद्धजनों से किया संवाद, योजनाओं पर की चर्चा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनबसा में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम के उपरांत प्रबुद्धजनों से संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने सभी प्रबुद्धजनों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए कहा कि प्रबुद्धजन समाज के दर्पण होते हैं। उनके विचार और चिंतन समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रबुद्धजनों से मिलने वाली ऊर्जा, सुझाव और आशीर्वाद विकास कार्यों को नई गति प्रदान करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चम्पावत के प्रबुद्धजनों से मिलने वाला मार्गदर्शन और आशीर्वाद सरकार को और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता और सामूहिक प्रयासों के साथ उत्तराखंड को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का अभियान निरंतर जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद चम्पावत को आदर्श चम्पावत बनाने के संकल्प के साथ उत्तराखंड को आदर्श उत्तराखंड बनाने के लिए भी निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टनकपुर में आईएसबीटी और शारदा कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्र में पर्यटन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर सृजित होंगे।

उन्होंने कहा कि मां पूर्णागिरि धाम को वर्षभर तीर्थयात्रियों के लिए सुगम बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। ककराली गेट से मां पूर्णागिरि धाम तक स्थायी प्रकाश व्यवस्था के साथ ही रोपवे एवं हेलीपैड के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के दृष्टिगत टनकपुर पर्यटन एवं तीर्थाटन का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद में पार्किंग, एपीजे अब्दुल कलाम संस्थान, अत्याधुनिक साइंस सेंटर सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विकास कार्यों को गति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देवभूमि उत्तराखंड सतत विकास, कानून-व्यवस्था, निवेश और पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहा है। राज्य की जीएसडीपी पिछले पांच वर्षों में दोगुनी हुई है तथा पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि कर्तव्य पथ पर मानसखंड की झांकी को प्रथम स्थान मिलना भी उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का गौरव है।

कार्यक्रम के दौरान प्रबुद्धजन बंशीधर उपाध्याय ने मुख्यमंत्री द्वारा अपने व्यस्ततम कार्यक्रम के बीच समय निकालकर संवाद करने के लिए आभार व्यक्त किया। पूर्व सैनिक पुष्कर कापड़ी, पूर्व कैप्टन भानी चंद एवं अर्जुन सिंह ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चम्पावत सहित पूरा उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने खेल, पर्यटन, मंदिरों के सौंदर्यीकरण, महिला सशक्तिकरण, साइंस सेंटर, टनकपुर में रेल सुविधाओं, शारदा कॉरिडोर एवं आईएसबीटी टनकपुर जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर बनबसा की प्रथम महिला ग्राम प्रधान एवं दिव्यांग कमला देवी जो मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए आगे आना चाह रही थी, उन्हे देखकर मुख्यमंत्री स्वयं उनके पास पहुंचे और पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री के इस आत्मीय व्यवहार ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया।

युवाओं से संवाद पर सीएम धामी ने किया संबोधित, बोले पारदर्शिता और निष्ठा ही युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनबसा में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान युवाओ से संवाद कर उनके सवालों के जवाब दिए।

मुख्यमंत्री ने चंपावत जिले के बनबसा में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, खेल, समाज सेवा, स्वरोजगार तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली स्थानीय युवा प्रतिभाओं को राजकीय सम्मान प्रदान कर प्रोत्साहित किया।

संवाद के दौरान छात्रा मिलन कलखुड़िया द्वारा मुख्यमंत्री के जीवन सफर पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने अपनी संक्षिप्त जीवनी, शिक्षा, युवावस्था और राजनीतिक यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से महान नहीं होता, बल्कि अपने दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी और मनोयोग से निर्वहन कर महान बनता है।छात्रा प्रीति पांडे द्वारा नकल विरोधी कानून की सराहना की एवं स्थानीय परीक्षा केंद्र को टनकपुर में बनाए जाने के अनुरोध किया इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि टनकपुर में परीक्षा केंद्र स्थापित करने के लिए उचित प्रयास किया जाएगा।

छात्र रोहित शर्मा द्वारा नशे के खिलाफ से संबंधी सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को रेखांकित करते हुए कहा कि श्ड्रग फ्री उत्तराखंडश् अभियान की चर्चा की और युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने व दूसरों को प्रेरित करने का आह्वान किया। छात्र सुमित सिंह नायक द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपावत में 56 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक साइंस सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे युवाओं को विज्ञान व तकनीक का ज्ञान प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि नकल विरोधी सख्त कानूनों से पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है और अब तक 34,000 से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियां प्राप्त हुई हैं।

छात्र नमन पुरी द्वारा युवा आयोग के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में युवा आयोग का गठन किया जा रहा है, जो प्रदेश की युवा प्रतिभाओं को सही दिशा, मार्गदर्शन, रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा निष्ठा और परिश्रम के बल पर साधारण व्यक्ति भी सर्वाेच्च पद तक पहुँच सकता है। हमने अपने जीवन को अनुशासित बनाना है। जीवन में अनुशासन का पालन ही हमें सफलता की ओर ले जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा देश की 65 प्रतिशत युवा आबादी को 21वीं सदी की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख किया और कहा कि सही मार्गदर्शन मिलने पर यही युवा शक्ति देश का परिदृश्य बदल सकती है। मुख्यमंत्री ने अपने विकल्प रहित संकल्प को दोहराते हुए कहा कि राज्य में पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए अल्मोड़ा, चमोली और पौड़ी जैसे जनपदों में औद्योगिक पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए श्युवा आयोगश् का गठन किया जा रहा है, जबकि देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानून के माध्यम से अब तक 34,000 से अधिक पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार मुक्त नियुक्तियाँ संपन्न कराई जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा सीमांत क्षेत्रों के विकास के अंतर्गत चम्पावत में आधुनिक पुस्तकालय, राजकीय पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज, साइंस सेंटर और राज्य के पहले बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज जैसी आधारभूत संरचनाओं को मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने समारोह में नीट परीक्षा में सफल बसटिया की हिमानी विश्वकर्मा, अमेजॉन में 47 लाख रुपये का सालाना पैकेज प्राप्त करने वाली बिचई की श्वेता चंद और राष्ट्रीय पैरा आर्म रैसलिंग के स्वर्ण पदक विजेता टनकपुर के पवन गढकोटी को सम्मानित किया गया। खेल व दिव्यांग कल्याण में राज्य स्तरीय दक्षता पुरस्कार विजेता बनबसा के संदीप रस्तोगी, निःशुल्क गौ सेवक पवन मेहता, नशा मुक्ति अभियान के संचालक मनीष सिंह तथा स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सेवारत अजंता विजय को भी मंच से सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने बागवानी से स्वरोजगार स्थापित करने वाले चंपावत के कमल गिरी, माउंट एवरेस्ट विजेता पर्वतारोही वीरेंद्र सिंह सामंत, लोक संस्कृति व मीडिया इंफ्लुएंसर तरुण भट्ट तथा युवतियों को सेना व पुलिस भर्ती की निःशुल्क ट्रेनिंग देने वाली बनबसा की अरुणिमा रावत को भी उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में अध्यक्ष जिला पंचायत अध्यक्ष आनन्द सिंह अधिकारी, जिलाध्यक्ष भाजपा गोविन्द सामन्त, जिला महामंत्री भाजपा मुकेश कलखुडिया, प्रभारी गुंजन सुखीजा, सह प्रभारी नितिन देउपा, श्याम नारायण पाण्डेय, मुकेश महराना, सुभाष बगौली, मनोज कालाकोटी, हेमा जोशी एवं किरन देवी, विधायक प्रतिनिधि चंपावत प्रकाश तिवारी, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

देवीधुरा में आठ मिनट तक चले अनूठे ऐतिहासिक युद्ध में फल और फूलों का किया गया प्रयोग

चम्पावत के विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम देवीधुरा में ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर आयोजित इस प्रसिद्ध मेले में आस्था, परंपरा, संस्कृति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। मेले में प्रतिभाग करने के लिए मा. मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी हेलीकॉप्टर से देवीधुरा हेलीपैड पहुंचे। हेलीपैड पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। हेलीपैड पर पारंपरिक लोकनृत्य छोलिया की मनमोहक प्रस्तुति के साथ मा. मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया।

मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ माँ वाराही देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माँ वाराही मइया सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवीधुरा की पावन भूमि और विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बग्वाल मेले को उत्तराखंड की अगाध आस्था, समृद्ध लोक-संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विकास को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रखते हुए ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के अंतर्गत कुमाऊँ क्षेत्र के प्रमुख पौराणिक एवं धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। देवीधुरा मंदिर परिसर में 4.27 करोड़ रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन तथा 4.57 करोड़ रुपये की लागत से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। इसके अतिरिक्त घटोत्कच मंदिर का सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर का निर्माण, सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट तथा लधौनधुरा मेला स्थल का सौंदर्यीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि घटोत्कच से झालिमाली मंदिर मार्ग के डामरीकरण पर 1.95 करोड़ रुपये, विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए 4.70 करोड़ रुपये तथा पूर्णागिरि मार्ग पर 5 करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट परियोजना के कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पाताल रुद्रेश्वर, खेतीखान सूर्य मंदिर, भूमिया देव मंदिर, भिगराड़ा मंदिर एवं डुंगरी-फत्याल शिव मंदिर से संबंधित विकास कार्य भी गतिमान हैं। विगत पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना एवं सौंदर्यीकरण के तहत 68.58 करोड़ रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण कार्य शीघ्र कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि बग्वाल मेले को ‘राजकीय मेला’ घोषित कर इसकी गरिमा बढ़ाने के साथ ही व्यवस्थाओं को भी और अधिक सुदृढ़ किया गया है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन का मूल उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना तथा रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। उन्होंने प्रदेशवासियों और विशेष रूप से युवा पीढ़ी से अपनी समृद्ध लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता का आह्वान करते हुए ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प को दोहराया।

चार खाम-सात थोक के बीच खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल
मुख्यमंत्री ने चार खामदृसात थोक के बीच खेले जाने वाले इस अनोखे प्राचीन पाषाण युद्ध का भी अवलोकन किया। रक्षाबंधन के अवसर पर मेले में बच्चियों एवं महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधकर रक्षाबंधन पर्व मनाया।

पाटी विकासखंड में स्थित माँ वाराही धाम में प्रधान पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ बग्वाल की शुरुआत हुई। इसके बाद चारों खामकृवालिक (सफेद), चम्याल (गुलाबी), गहड़वाल (भगवा) और लमगड़िया (पीला)कृके बग्वालियों का प्रवेश हुआ। अलग-अलग रंगों के पारंपरिक वस्त्रों एवं पगड़ियों में सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं। शंखनाद और माँ वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल का शुभारंभ हुआ।

फलों और फूलों की बरसात के बीच पूरा बग्वाल मैदान मां के जयकारों से गूंज उठा। इस वर्ष बग्वाल दोपहर 1रू48 बजे शुरू होकर 1रू55 बजे समाप्त हुई। 8 मिनट तक चले इस अनूठे ऐतिहासिक युद्ध में फल और फूलों का प्रयोग कर सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत रखा गया। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार, फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है।खामों के आगमन एवं बग्वाल के संचालन की जिम्मेदारी पीठाचार्य श्री कीर्तिबल्लभ जोशी ने निभाई।

मुख्यमंत्री ने कहा, “माँ वाराही मइया सबकी चिंता करती हैं। यह अनोखी विरासत केवल देवीधुरा के बग्वाल मैदान में देखने को मिलती है। यहां की परंपरा अनुशासन और भाईचारे की मिसाल है, जहां बग्वाल के बाद सभी योद्धा गले मिलते हैं।”

मातृशक्ति के सम्मान, स्वावलंबन और बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धः धामी

रक्षाबंधन के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रामलीला मैदान धूरा चंपावत में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव-2026’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत के सर्वांगीण विकास के लिए कुल ₹62.97 करोड़ की 50 महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इनमें ₹11.08 करोड़ की 20 योजनाओं का लोकार्पण तथा ₹51.89 करोड़ की 30 नई विकास योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। इन योजनाओं से जनपद में सड़क, पेयजल, सिंचाई, बाढ़ सुरक्षा एवं धार्मिक पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की घोषणा की। इनमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के स्थान धूरा में पेयजल योजना, धूरा से सेतीचौड़ ब्याला तक संपर्क मोटर मार्ग, ग्राम पंचायत ककनई के तोक बूंगा दुर्गापीपल तक सड़क, भागिना भंडारी में मुख्य सड़क से राजकीय इंटर कॉलेज एवं राजकीय प्राथमिक विद्यालय दयारतोली तक सीसी मार्ग व इंटरलॉकिंग टाइल्स, धन एवं बस्तियागूंठ के विभिन्न मंदिरों का सौंदर्यीकरण शामिल है।

इसके साथ ही अमोड़ी, भलुवागाड़ी, डोलाकांडा, फुरकियाझाला, छतकोट, बेलखेत, खिरद्वारी , बुडम, झालाकुड़ी, नौलापानी एवं बस्तियागूंठ के मास्वाड तोक सहित विभिन्न क्षेत्रों में भूकटाव एवं बाढ़ सुरक्षा हेतु वायरक्रेट कार्य, ग्राम पंचायत पोथ के लदिया नदी में झूला पुल, दियूरी से चौड़ा तक सड़क का सुधारीकरण एवं डामरीकरण, डांडा ककनई में सिंचाई हेतु नलकूप, सुखीढांग-डांडा-मीनार मोटर मार्ग में हॉटमिक्स तथा बुडम के कठोल में झूला पुल निर्माण कार्य किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अपनी बहनों, माताओं, बेटियों और भांजियों के बीच अपने घर आए हैं। चम्पावत से मिलने वाला प्रेम और अपनापन उन्हें हमेशा ऊर्जा देता है। मुख्यमंत्री ने कुमाऊंनी भाषा में मातृशक्ति से संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति से रक्षा सूत्र बंधवाकर सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि राज्य की प्रत्येक मातृशक्ति को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा चम्पावत के विकास के लिए क्षेत्र में निरंतर विकास कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल हिमालयी चोटियों और प्राकृतिक सौंदर्य से नहीं, बल्कि यहां की मेहनती, साहसी और आत्मनिर्भर मातृशक्ति से भी है। महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल सरकारी योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि महिलाओं को शिक्षित, स्वस्थ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाकर परिवार एवं समाज के निर्णयों में भागीदार बनाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वावलंबन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। चम्पावत में बेटियों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए कॉलेज हॉस्टल, आईटीआई लैब, ₹256.97 करोड़ की लागत से महिला स्पोर्ट्स कॉलेज, इंटीग्रेटेड नर्सिंग संस्थान तथा महिला प्रौद्योगिकी पार्क जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है, ताकि बेटियों को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए गांव या जनपद से बाहर न जाना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि लखपति दीदी बनने के बाद प्रदेश की माताएं-बहनें आगे बढ़कर करोड़पति बनें। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि इन उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए वोकल फॉर लोकल, हाउस ऑफ हिमालयाज, हिलांस आउटलेट, फूड वैन और ई-रिक्शा जैसे माध्यम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे महिलाओं को रोजगार तलाशने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली बनने के अवसर मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब एक महिला आत्मनिर्भर होती है तो पूरा परिवार आत्मनिर्भर होता है। परिवार से गांव, गांव से समाज और समाज के सशक्त होने से पूरा उत्तराखंड सशक्त एवं समृद्ध बनता है। सरकार का उद्देश्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां किसी बेटी को अवसरों की कमी के कारण पलायन न करना पड़े और चम्पावत की मातृशक्ति विकास की मुख्यधारा में नेतृत्वकर्ता बनकर उभरे।

कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया। बाल विकास विभाग के स्टॉल में उन्होंने छोटी बच्चियों के साथ केक काटकर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश दिया। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री की ओर से उपहार भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य अजय टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, जिलाध्यक्ष भाजपा गोविन्द सामन्त, जिला महामंत्री भाजपा मुकेश कलखुड़िया, दायित्वधारी श्याम नारायण पाण्डेय, मुकेश महराना, सुभाष बगौली, मनोज कालाकोटी, हेमा जोशी जिला अधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

चंपावत में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का लोकार्पण कर बोले सीएम धामी, चंपावत को आदर्श जिला बनाने में अहम कार्य

जिला चिकित्सालय चंपावत में लगभग 50 लाख रुपये की लागत से स्थापित ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपावत को आदर्श जिला बनाने के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपावत उनके लिए केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि कर्मभूमि है। उन्होंने कहा कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की स्थापना से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिलेगी। इस सुविधा के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को आवश्यक जीवनरक्षक रक्त घटक समय पर उपलब्ध हो सकेंगे। चंपावत जिले में पहली बार यह सुविधा उपलब्ध हुई है। इससे पहले कुमाऊं मंडल के जिला चिकित्सालयों में यह सुविधा रुद्रपुर और पिथौरागढ़ में उपलब्ध थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला चिकित्सालय चंपावत में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से 50 बेड का अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही सीटी स्कैन, एमआरआई और डायलिसिस यूनिट जैसी सुविधाएं स्थापित की जा चुकी हैं। जिला चिकित्सालय में लगभग 11.71 करोड़ रुपये की लागत से लोअर ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग तथा प्रथम एवं द्वितीय तल पर डायग्नोस्टिक विंग और ऑपरेशन थिएटर का निर्माण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। राज्य सरकार ने चंपावत को आदर्श जिला बनाने का संकल्प लिया है और इस दिशा में विभिन्न क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले में विभिन्न मोटर मार्गों के निर्माण एवं चौड़ीकरण के कार्यों के साथ ही जाम की समस्या के समाधान के लिए आधुनिक पार्किंग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। चंपावत रोडवेज स्टेशन में 62 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से आधुनिक बहुमंजिला पार्किंग एवं शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य शुरू होने वाला है। मां पूर्णागिरि धाम, रीठा साहिब और पर्यटन आवास गृह में भी पार्किंग सुविधाओं का विकास किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपावत में भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मजबूत आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। जिले में 66 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से आधुनिक सिटी ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जा रहा है। भूमिगत विद्युत लाइनों का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही 240 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से जिले की पेयजल व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। साइंस सेंटर, महिला स्पोर्ट्स कॉलेज और आधुनिक आईएसबीटी जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी चंपावत के विकास को नई दिशा प्रदान कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपावत को विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में उत्तराखंड का आदर्श मॉडल बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि चंपावत के विकास का कोई भी सपना अधूरा नहीं रहने दिया जाएगा और जिले के प्रत्येक गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और जन-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। जिला चिकित्सालय चंपावत में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की स्थापना से गंभीर एवं आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को आवश्यक रक्त घटक स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगे। इससे मरीजों को समय पर उपचार मिलने के साथ ही उन्हें अन्य जिलों के अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी।

इस अवसर पर सचिव स्वास्थ्य विनय शंकर पाण्डेय, दायित्वधारी सुभाष बगौली, विधायक प्रतिनिधि चंपावत प्रकाश चन्द्र तिवारी मौजूद थे।