बाजपुर परगना क्षेत्र में प्रशासन की कार्रवाई तेज, चार मदरसे सील

उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में लागू नई व्यवस्था के तहत प्रशासन ने बिना आवश्यक मान्यता एवं दस्तावेजों के संचालित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर परगना क्षेत्र में चार मदरसों को सील किया गया है।

जिला प्रशासन के निर्देश पर एसडीएम बाजपुर ऋचा सिंह और कोतवाली निरीक्षक नरेश चौहान के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ सीलिंग की कार्रवाई की गई। प्रशासन के अनुसार, संबंधित मदरसा संचालक निरीक्षण के दौरान आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।

प्रशासन द्वारा सील किए गए मदरसों में मदरसा जामिया हनफिया रजाउत उलूम, बाजपुर; मदरसा गुलशने इस्लाम, कनोरा; मदरसा जामिया फातिमा, बाजपुर; तथा मदरसा मोइनुल उलूम, मोहल्ला गांधीनगर, केलाखेड़ा-बाजपुर शामिल हैं।

एसडीएम ऋचा सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर क्षेत्र में संचालित मदरसों का निरीक्षण किया जा रहा है। जिन संस्थानों के पास निर्धारित मान्यता अथवा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अन्य मदरसों की भी जांच-पड़ताल जारी है।

नई व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट में याचिका

वहीं, राज्य में लागू नई मदरसा शिक्षा व्यवस्था और मान्यता संबंधी प्रावधानों के खिलाफ कुछ मदरसा संचालकों की ओर से नैनीताल हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण तथा शिक्षा बोर्ड से मान्यता की अनिवार्यता के चलते कई मदरसों के सामने संचालन संबंधी कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को प्रस्तावित है।

डीएम ने कहा—मान्यता के मानकों का पालन अनिवार्य
ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने कहा कि शासन के निर्देशों के तहत जिले में मदरसों का निरीक्षण अभियान जारी है। जिन संस्थानों ने निर्धारित प्राधिकरण से मान्यता नहीं ली है अथवा आवश्यक मानकों और नियमों का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर सरकार का जोर
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि नई व्यवस्था की मूल भावना बच्चों को उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जोड़े रखते हुए उन्हें आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराना और शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा आधुनिक पाठ्यक्रम को सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत मदरसों को भी निर्धारित शैक्षणिक मानकों और नियमों का पालन करना होगा। जो संस्थान निर्धारित मानकों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री धामी ने भी स्पष्ट की सरकार की नीति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि प्रदेश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था को प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा, जो बच्चों को आधुनिक एवं मुख्यधारा की शिक्षा से दूर रखे। उन्होंने कहा है कि राज्य के सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी उद्देश्य से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की नई व्यवस्था लागू की गई है। सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत बच्चों को उनकी सांस्कृतिक एवं धार्मिक जड़ों से जुड़े रहने के साथ-साथ विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, कौशल विकास और अन्य आधुनिक विषयों की शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि प्रदेश में संचालित होने वाले सभी शिक्षण संस्थानों को निर्धारित नियमों और कानूनों का पालन करना होगा। सरकार का स्पष्ट मत है कि जो संस्थान नियमों के अनुरूप संचालित होंगे, उन्हें व्यवस्था के तहत कार्य करने का अवसर मिलेगा, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, शिकायत पर होगी त्वरित कार्रवाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सनातन धर्मशाला, खटीमा परिसर स्थित एक निजी विद्यालय के सोबन सिंह जीना सभागार में आयोजित ‘युवा समसामयिक संवाद’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों से आए विद्यार्थियों ने रोजगार, सेवायोजन, पर्यटन, विकास एवं पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आपदा प्रबंधन जैसे समसामयिक विषयों पर मुख्यमंत्री से सीधे सवाल किए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का सहज, स्पष्ट और बेबाकी से जवाब दिया।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर सरकार

युवाओं और छात्रों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने पारदर्शी, भ्रष्टाचार-मुक्त और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि यदि कोई व्यक्ति काम के बदले रिश्वत मांगता है अथवा अनुचित दबाव बनाता है, तो नागरिक निःसंकोच टोल-फ्री नंबर 1064 या संबंधित मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है तथा प्राप्त शिकायतों पर विशेष टीमों द्वारा त्वरित जांच की जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और देवभूमि की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार-मुक्त होनी चाहिए।

‘ विकल्प रहित संकल्प’ से बनेगा देश का अग्रणी राज्य

अपने विजन को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ऐसा उत्तराखंड देखना चाहते हैं, जहां युवाओं को बेहतर शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के लिए अपने राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े। राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं के साथ बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पास समृद्ध हिमालयी पर्वत श्रृंखलाएं, नदियां, वन संपदा, कृषि संसाधन और उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थान जैसी अपार प्राकृतिक एवं मानवीय संपदाएं हैं। इन संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ कार्य कर रही है।

सीमांत क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता

सीमांत क्षेत्रों के विकास को लेकर छात्रा आल्या के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के विकास और वहां के निवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सीमांत जिले, गांव और क्षेत्र देश के अंतिम छोर नहीं, बल्कि भारत के प्रथम गांव और प्रथम क्षेत्र हैं। इसी सोच के साथ इन क्षेत्रों में ढांचागत विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत बिजली, पेयजल, पक्की सड़कें, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सीमांत क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने के लिए सरकार का विशेष ध्यान रोजगार सृजन पर है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं को रोजगार की तलाश में दूर-दराज के क्षेत्रों में जाने के बजाय उनके गांव और घर के आसपास ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है। आने वाले समय में सीमांत क्षेत्रों के लिए विशेष प्रोत्साहन और नई योजनाएं भी लाई जाएंगी, जिससे नई पीढ़ी को अपने ही क्षेत्र में बेहतर भविष्य और आजीविका के अवसर मिल सकें।

विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच स्थापित होगा संतुलन

कक्षा 11 की छात्रा रेखा के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए राज्य को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाया जाएगा।

छात्रा रेखा द्वारा 5 अगस्त की आपदा के दौरान किए गए राहत एवं बचाव कार्यों की सराहना तथा विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा प्रदेश की सबसे बड़ी धरोहर है। विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है।

34 हजार युवाओं को दी सरकारी नौकरी

सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अनुशासित जीवन जीने और सकारात्मक सोच के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अब तक 34 हजार युवाओं को सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई हैं। आने वाले समय में भी युवाओं के लिए रोजगार एवं करियर के अवसर लगातार उपलब्ध होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की यह प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी।

पर्यटन को मिल रही नई गति, सालाना पर्यटकों की संख्या 7-8 करोड़ के पार

पर्यटकों की संख्या को लेकर छात्र अब्दुल के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़क कनेक्टिविटी, हवाई सेवाओं और होमस्टे जैसी सुविधाओं के विस्तार से उत्तराखंड में पर्यटन को नई गति मिली है।

उन्होंने कहा कि चंपावत, मुनस्यारी, कौसानी, बेरीनाग, चौकोड़ी, पंचाचूली और आदि कैलाश जैसे पर्यटन स्थलों में आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य सरकार पर्यटकों के बेहतर स्वागत, स्वच्छ एवं सुविधाजनक व्यवस्थाओं और आतिथ्य पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि उत्तराखंड आने वाले पर्यटक यहां की सुंदरता और आतिथ्य से प्रभावित होकर बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का ही परिणाम है कि प्रदेश में पर्यटकों की वार्षिक संख्या 7 से 8 करोड़ के पार पहुंच गई है।

18 विद्यालयों के लगभग 360 विद्यार्थियों ने लिया प्रतिभाग
संवाद कार्यक्रम में खुशबू हिंद पब्लिक स्कूल, अब्दुल आरपी स्कूल, सतवीर सिंह रोज पब्लिक स्कूल, देव विश्वास शिक्षा भारती स्कूल, आयुषी आईआईएचसीए, रिजवान जीआईसी, रुद्र प्रताप सिंह रोज पब्लिक स्कूल और शहीद हरि किशन इंटर कॉलेज सहित विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।

इस दौरान सोनू सिंह, हिमांशी, आलिदा, खुशी अवस्थी सहित अन्य विद्यार्थियों ने रोजगार, सेवायोजन, पर्यटन, विकास एवं पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल मुख्यमंत्री के समक्ष रखे।

कार्यक्रम में विभिन्न 18 विद्यालयों के लगभग 360 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, प्रेम सिंह टूरना, दर्जा मंत्री गंभीर सिंह धामी, किशन सिंह किन्ना, मोहिनी पोखरिया, पूर्व विधायक डॉ. प्रेम सिंह राणा, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, वीसी जय किशन, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी तथा अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम धामी की सादगी ने दिया ‘लोकल फॉर वोकल’ का संदेश, मेलाघाट रोड पर पैदल चलकर मिलन डेरी में पी चाय

‘लोकल फॉर वोकल’ को केवल अभियान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम मानने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा में अपनी सादगी और सहजता से एक बार फिर लोगों का दिल जीत लिया।

मुख्यमंत्री धामी मेलाघाट रोड पर पैदल चलते हुए अचानक मिलन डेरी पहुंचे और वहां चाय की चुस्की लेकर स्थानीय कारोबारियों का उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री को अपने बीच इस तरह सहज भाव से देखकर आसपास मौजूद दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों में भी खासा उत्साह दिखाई दिया।

मिलन डेरी में चाय का आनंद लेते हुए मुख्यमंत्री ने दुकानदारों और वहां मौजूद लोगों से आत्मीयता से बातचीत की और उनके कारोबार तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री का यह सहज अंदाज स्थानीय छोटे व्यवसायियों के लिए प्रोत्साहन और सम्मान का संदेश लेकर आया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों, स्थानीय दुकानों और छोटे कारोबारियों को बढ़ावा देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘लोकल फॉर वोकल’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत नींव है।

उन्होंने कहा कि जब हम अपने आसपास के स्थानीय दुकानदारों, कारीगरों, उद्यमियों और उत्पादों को प्राथमिकता देंगे, तो उसका सीधा लाभ हमारे स्थानीय बाजार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा। इससे न केवल छोटे कारोबारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान यहां के स्थानीय उत्पादों, हुनर और उद्यमिता से भी जुड़ी है। सरकार लगातार स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री का मेलाघाट रोड पर पैदल चलकर स्थानीय डेरी में चाय पीना इसी भावना का सहज और प्रभावी उदाहरण बना। उनकी इस पहल ने यह संदेश दिया कि स्थानीय को अपनाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी से ही ‘लोकल फॉर वोकल’ का संकल्प मजबूत होगा।

सीएम धामी ने एनडीआरएफ बटालियन गदरपुर का किया भ्रमण, जवानों से संवाद कर आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं की ली जानकारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने एक दिवसीय गदरपुर-रुद्रपुर भ्रमण कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) बटालियन, गदरपुर का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने एनडीआरएफ के अधिकारियों एवं जवानों से संवाद कर उनकी कार्यप्रणाली, आपदा प्रबंधन की तैयारियों तथा राहत एवं बचाव कार्यों से संबंधित व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। ऐसे में एनडीआरएफ जैसी संस्थाओं की भूमिका जनजीवन की सुरक्षा और आपदा के समय त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक आधुनिक, सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में शीघ्र और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

मुख्यमंत्री धामी ने एनडीआरएफ के अधिकारियों एवं जवानों के साहस, समर्पण और सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी एनडीआरएफ के जवान पूरी निष्ठा और तत्परता के साथ मानव जीवन की रक्षा के लिए कार्य करते हैं। उनका अनुशासन, दक्षता और सेवा भाव पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने एनडीआरएफ परिसर में पौधरोपण भी किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला भी है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, नियमित प्रशिक्षण और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी जाए, जिससे किसी भी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकें।

इस अवसर पर एनडीआरएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बटालियन की कार्यप्रणाली, उपलब्ध संसाधनों, प्रशिक्षण गतिविधियों तथा आपदा राहत एवं बचाव अभियानों की जानकारी दी।

इस अवसर पर प्रभारी मंत्री प्रदीप बत्रा, विधायक अरविंद पाण्डे, शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा, मेयर दीपक बाली, विकास शर्मा, जिलाध्यक्ष भाजपा मनोज पाल, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, कमांडेंट संतोष कुमार, सीएमओ परमिंदर सिंह, डिप्टी कमांडेंट दीपक भट्ट, राजेंद्र जोशी, अवनीश पुरोहित, मनोज जोशी, जवान आदि उपस्थित थे।

सीएम धामी ने रूद्रपुर कलेक्ट्रेट परिसर पर किया 40 लाख की लागत से स्थापित 9 फीट ऊँची कांस्य प्रतिमा का विधिवत अनावरण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने जनपद भ्रमण के दौरान रुद्रपुर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में महान क्रांतिकारी शहीद ऊधम सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर ₹40 लाख की लागत से स्थापित 9 फीट ऊँची कांस्य प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर अमर शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और सर्वाेच्च बलिदान को नमन किया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि शहीद ऊधम सिंह का जीवन देशभक्ति, आत्मसम्मान और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का अमर प्रतीक है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रहित के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनसुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का भी लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने ₹120.18 लाख की लागत से कलेक्ट्रेट परिसर में निर्मित पार्किंग, लैंडस्केपिंग एवं ड्रेन निर्माण कार्य का लोकार्पण किया। इस परियोजना से परिसर में पार्किंग व्यवस्था बेहतर होने के साथ-साथ सौंदर्यीकरण एवं जल निकासी की सुविधाएं भी सुदृढ़ होंगी।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने रुद्रपुर स्थित कैनाल कॉलोनी में ₹264.97 लाख की लागत से बनने वाली सरफेस पार्किंग का शिलान्यास भी किया। इस परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र में यातायात प्रबंधन को मजबूती मिलेगी तथा नागरिकों को सुव्यवस्थित पार्किंग सुविधा उपलब्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ-साथ जनसुविधाओं के विस्तार और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में प्रत्येक विकास कार्य गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूर्ण किए जा रहे हैं, ताकि आमजन को उनका सीधा लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री धामी ने वर्चुअल माध्यम से पंजाब में निवासरत शहीद ऊधम सिंह के परिजनों से भी वार्ता की। उन्होंने कहा कि शहीद ऊधम सिंह के बलिदान और साहस को वे दिल से सलाम करते हैं तथा प्रदेश उनके सर्वाेच्च बलिदान को सदैव स्मरण रखेगा। इस दौरान उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी रोपा।

इस अवसर पर विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा, भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, मनोज पाल, मेयर विकास शर्मा, दीपक बाली, दर्जा राज्य मंत्री अनिल कपूर डब्बू, मंजीत सिंह, सुरेंद्र सिंह नामधारी, फरजाना बेगम, रणजीत सिंह नामधारी, उत्तम दत्ता, रामपाल सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

लोहियाहेड वाटर बाईपास को प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करेंगेः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज जनपद ऊधम सिंह नगर के खटीमा क्षेत्र में स्थित उभरते हुए पर्यटक स्थल लोहियाहेड वाटर बाईपास का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता एवं पर्यटन की संभावनाओं का अवलोकन करते हुए अधिकारियों से स्थल के विकास से संबंधित जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लोहियाहेड वाटर बाईपास क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र को एक आकर्षक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शारदा कॉरिडोर एवं शारदा रिवर फ्रंट जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के अंतर्गत भी इस क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही स्थानीय व्यवसायों, स्वरोजगार एवं लोगों की आय में वृद्धि होगी। सरकार का प्रयास है कि राज्य के प्रत्येक क्षेत्र की पर्यटन क्षमता का उपयोग कर स्थानीय लोगों को इसका सीधा लाभ मिले।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को लोहियाहेड वाटर बाईपास के विकास के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण एवं स्थानीय आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए।

इस अवसर पर जिलाधिकारी सहित जनपद स्तरीय अधिकारी एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

रूद्रपुर में 369.66 करोड़ रूपए की विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास, किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं

गांधी मैदान, रुद्रपुर में कृषि विभाग द्वारा आयोजित खेत बचाओ अभियान कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कृषि एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी तथा जनपद प्रभारी मंत्री एवं परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर पर ₹46.32 करोड़ की लागत से निर्मित 9 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा ₹323.34 करोड़ की लागत के 32 विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। इस प्रकार कुल ₹369.66 करोड़ की विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब खेत बचेंगे तो जमीन बचेगी, जमीन बचेगी तो पृथ्वी बचेगी और पृथ्वी बचेगी तो जीवन सुरक्षित रहेगा। उन्होंने किसानों से मृदा संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि भूमि केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी धरती माता है, जिसका संरक्षण हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री का दायित्व किसानों के प्रथम सेवक के रूप में कार्य करना है तथा किसानों की सेवा ही उनकी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज चावल उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर है तथा कृषि क्षेत्र में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, किंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश प्रत्येक चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और निकट भविष्य में हॉर्टिकल्चर हब के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा। इस दिशा में भारत सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।

केंद्रीय मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि सेब, अखरोट एवं बादाम सहित उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधों के उत्पादन हेतु मुक्तेश्वर में ₹100 करोड़ की लागत से क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किया जाएगा। बड़ी नर्सरी स्थापित करने वालों को ₹4 करोड़ तथा छोटी नर्सरी स्थापित करने वालों को ₹2 करोड़ तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि चौबटिया (अल्मोड़ा) में ₹15 करोड़ की लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त न्यूजीलैंड के सहयोग से उत्तराखंड में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ₹15 करोड़ की विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ (फेंसिंग) कार्य हेतु ₹65 करोड़ उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही प्रदेश में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित करने के लिए ₹104 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की जा रही है, जिससे किसानों को मौसम की सटीक जानकारी समय पर उपलब्ध हो सकेगी तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ और अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का अधिकाधिक लाभ लेने तथा मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देकर भूमि की उर्वरा शक्ति को संरक्षित किया जा सकता है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि सुरक्षित रखी जा सकती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वस्थ किसान, स्वस्थ मिट्टी तथा स्वस्थ कृषि व्यवस्था ही विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि ष्खेत बचाओ अभियानष् केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का जनआंदोलन है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्राकृतिक खेती, कृषि अवसंरचना तथा डिजिटल कृषि मिशन जैसी योजनाओं से किसानों को व्यापक लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान देश की खाद्य सुरक्षा एवं अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। यदि मिट्टी का स्वास्थ्य प्रभावित होगा तो कृषि उत्पादन के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए किसानों को नियमित मृदा परीक्षण कराकर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को ₹3 लाख तक का ब्याजमुक्त कृषि ऋण उपलब्ध करा रही है। नहरों से सिंचाई की सुविधा निःशुल्क प्रदान की जा रही है तथा फार्म मशीनरी बैंक योजना के अंतर्गत कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को सशक्त बनाने के लिए रेनफेड फार्मिंग परियोजना भी स्वीकृत की गई है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार फल, सब्जी एवं बागवानी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। पॉलीहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कोल्ड चेन, सीए स्टोरेज तथा मेगा फूड पार्क जैसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके। स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार योजनाएं एवं संसाधन उपलब्ध करा सकती है, किंतु कृषि क्षेत्र में स्थायी परिवर्तन किसानों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने किसानों से मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करने, प्राकृतिक खेती अपनाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि का संरक्षण करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सभी अतिथियों एवं किसानों का स्वागत करते हुए घेरबाड़ के लिए ₹65 करोड़, जैविक खेती के लिए ₹10 करोड़ की सहायता उपलब्ध कराने तथा मंडुवा एवं झंगोरा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करने का अनुरोध किया।

कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा, बंशीधर भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, मेयर विकास शर्मा, दीपक बाली, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, हुकम सिंह कुंवर, रणजीत सिंह नामधारी, उत्तम दत्ता, जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, मनोज पाल, सचिव डॉ. एस.एन. पांडे, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा, पंकज उपाध्याय सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कृषक एवं आमजन उपस्थित रहे।

पंतनगर विश्वविद्यालय परंपरा, आधुनिकता और अनुसंधान का त्रिवेणी संगमः शिवराज चौहान

पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में आयोजित दो दिवसीय पूर्व छात्र सम्मेलन का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वे हरित क्रांति की पावन भूमि पंतनगर में आकर धन्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय भारतीय कृषि के इतिहास का गौरवशाली केंद्र है, जिसने देश को वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, कृषि उद्यमी तथा उत्कृष्ट मानव संसाधन प्रदान कर कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश ही नहीं, बल्कि विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर है।

चौहान ने पंतनगर विश्वविद्यालय को परंपरा, आधुनिकता और अनुसंधान का त्रिवेणी संगम बताते हुए कहा कि देश आज लगभग 377 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन कर रहा है। देश के अन्न भंडार पूरी तरह भरे हुए हैं तथा चावल उत्पादन में भारत, चीन को पीछे छोड़कर विश्व में प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि गेहूं का उत्पादन भी अधिशेष है तथा भारतीय गेहूं एवं बासमती चावल की मांग विश्वभर में लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में पंतनगर विश्वविद्यालय का योगदान अतुलनीय है और इसलिए वे इस पावन भूमि को बार-बार नमन करते हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि मंत्री के रूप में धरातल से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है और उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ कि उन्होंने पंतनगर में विद्यार्थियों एवं विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल विद्यार्थियों से नहीं, बल्कि भारतीय कृषि के भविष्य से संवाद किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी देश और दुनिया में भारत का नाम रोशन करेंगे।

उन्होंने कहा कि वे पंतनगर सिखाने नहीं, बल्कि सीखने आए हैं। पंतनगर विश्वविद्यालय ने केवल डिग्रियां नहीं बांटीं, बल्कि देश को वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के नेतृत्वकर्ता तथा कृषि उद्यमी दिए हैं, जिन्होंने भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय कृषि जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। बढ़ता तापमान, गिरता भूजल स्तर, बदलता मौसम, मिट्टी का बिगड़ता स्वास्थ्य तथा रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग जैसी समस्याओं का समाधान वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार से ही संभव है। उन्होंने कहा कि उत्पादन के क्षेत्र में देश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, लेकिन भविष्य की चुनौतियों का समाधान खोजने में कृषि वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कृषि उत्पादों से संबंधित जितने भी अंतरराष्ट्रीय समझौते किए गए हैं, वे किसानों और राष्ट्रहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता में रखकर किए गए हैं। उन्होंने दोहराया कि विकसित भारत के निर्माण का संकल्प तभी साकार होगा, जब कृषि विकसित होगी और किसान समृद्ध होंगे।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए केन्द्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि वे प्रतिदिन एक पौधा लगाते हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि यदि प्रतिदिन पौधा लगाना संभव न हो, तो कम से कम अपने जन्मदिन पर अवश्य एक पौधा लगाएं, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पारंपरिक फसलों के संरक्षण पर बल देते हुए फल एवं विविध कृषि उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने कृषि उत्पादन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों एवं विशेषज्ञों की समिति बनाकर ठोस सुझाव देने का आह्वान किया, ताकि उन पर गंभीरता से विचार किया जा सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित उत्तराखंड के निर्माण में विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पूर्व छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, अनुभव और विशेषज्ञता को राज्य के विकास से जोड़ते हुए कृषि, अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप और युवाओं के मार्गदर्शन में सक्रिय योगदान दें।

मुख्यमंत्री ने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में आयोजित पूर्व छात्र कार्यशाला ब्रेन 3.0 (बूस्टिंग रिसर्च, एकेडमिक, इनोवेशन एंड नेटवर्किंग) को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित उत्तराखंड के निर्माण में विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारत की हरित क्रांति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इस विश्वविद्यालय ने देश को ऐसे वैज्ञानिक, प्रशासक, उद्यमी और कृषि विशेषज्ञ दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि ष्ब्रेन 3.0ष् केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुभव, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं को जोड़ने वाला प्रभावी मंच है।
उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की वास्तविक पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि वहां से निकले विद्यार्थियों की उपलब्धियों से होती है। पूर्व छात्र विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी शक्ति और उसकी गौरवशाली परंपरा के सशक्त प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है उस सफलता और अनुभव को समाज तथा आने वाली पीढ़ियों के साथ साझा करना।

मुख्यमंत्री ने पूर्व छात्रों से युवाओं के लिए मेंटरशिप कार्यक्रम चलाने, अनुसंधान कार्यों में सहयोग देने, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने तथा शिक्षा जगत और उद्योगों के बीच मजबूत सेतु बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से परिवर्तन का नेतृत्व करने वाला युवा है। ऐसे में अनुभवी पूर्व छात्रों का मार्गदर्शन युवाओं को नई दिशा और नई ऊंचाइयां प्रदान कर सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन तकनीक, डेटा एनालिटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल कृषि जैसी आधुनिक तकनीकों का युग है। इन क्षेत्रों में तेजी से हो रहे बदलावों के अनुरूप विश्वविद्यालयों और पूर्व छात्रों को भी अपनी भूमिका और अधिक प्रभावी बनानी होगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पर्वतीय कृषि आज छोटे एवं बिखरे खेतों, जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान, युवाओं के पलायन, सीमित बाजार पहुंच तथा जलवायु परिवर्तन जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और सामूहिक सहभागिता से संभव है। उन्होंने पूर्व छात्रों से आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, कृषि प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, डिजिटल मार्केटिंग तथा कृषि उद्यमिता के क्षेत्र में किसानों और युवाओं का मार्गदर्शन करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड समग्र एवं संतुलित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि ऐसा समावेशी विकास है, जिसमें गांव, गरीब, किसान, महिलाएं और युवा सभी समान रूप से सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नई स्टार्टअप नीति, कौशल विकास कार्यक्रमों और नवाचार आधारित पहलों के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान कर रही है। विशेष रूप से कृषि, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, जैविक खेती, ड्रोन तकनीक और कृषि आधारित स्टार्टअप के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। युवाओं को स्थानीय समस्याओं के समाधान खोजकर अपने नवाचारों को वैश्विक मंच तक पहुंचाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ष्विकल्प रहित संकल्पष् के मंत्र के साथ विकसित उत्तराखंड के निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पंतनगर विश्वविद्यालय और उसके पूर्व छात्रों का सहयोग इस अभियान को और अधिक गति देगा।

उन्होंने पूर्व छात्रों से आग्रह किया कि वे उत्तराखंड को केवल अपनी जन्मभूमि या कर्मभूमि के रूप में न देखें, बल्कि उसके विकास के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझें और जहां भी कार्यरत हों, अपने ज्ञान एवं अनुभव का एक हिस्सा उत्तराखंड के विकास के लिए अवश्य समर्पित करें।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि पंतनगर विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र परिवार आने वाले वर्षों में न केवल विश्वविद्यालय के विकास, बल्कि उत्तराखंड और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इससे पहले, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंतनगर संग्रहालय एवं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया तथा कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ धान की फसल की रोपाई भी की। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने पंतनगर विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने हरित क्रांति की जननी पंतनगर विश्वविद्यालय में उपस्थित सभी अतिथियों एवं पूर्व छात्रों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि राज्य गठन के बाद हमारी कृषि भूमि अवश्य कम हुई है, लेकिन कृषि उत्पादन में 3 लाख टन की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश का चहुंमुखी विकास हो रहा है। उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय को हेरिटेज विश्वविद्यालय घोषित किए जाने का अनुरोध किया।

पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. के. कश्यप ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा, बंशीधर भगत, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, हुकम सिंह कुंवर, रणजीत सिंह नामधारी, सचिव डॉ. एस. एन. पांडे, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, कुलसचिव दीपा विनय सहित अनेक अधिकारी एवं पूर्व छात्र उपस्थित रहे।

पीएम आवास शहरी के तहत रूद्रपुर में साकार हो रहा 1872 परिवारों का आशियाने का सपना, जल्द सौंपी जाएंगी चाबियां

गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने के संकल्प के साथ उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार मिलकर एक ऐसी आवासीय परियोजना को अंतिम रूप दे रही हैं, जो हजारों लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाली है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रुद्रपुर के ग्राम बागवाला में 1872 ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की सतत निगरानी में विकसित यह परियोजना राज्य में गरीब परिवारों के लिए सुरक्षित और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण (उधमसिंह नगर) द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को अपना घर उपलब्ध कराना है, जिनके पास अब तक पक्का मकान नहीं है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद हजारों लोगों का वर्षों पुराना सपना साकार होने जा रहा है।

गरीब परिवारों के लिए उम्मीद की नई बस्ती
‘अपना घर, अपना स्वाभिमान’ की भावना के साथ तैयार की गई इस परियोजना में कुल 1872 आवासों का निर्माण किया गया है। इनमें से 832 फ्लैट पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, जबकि 512 अतिरिक्त फ्लैटों में अंतिम चरण के छोटे-मोटे कार्य तेजी से चल रहे हैं। सरकार की योजना शीघ्र ही परियोजना का लोकार्पण कर लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपने की है। सबसे बड़ी बात यह है कि छह लाख रुपये लागत वाले इन आधुनिक फ्लैटों के लिए लाभार्थी को मात्र तीन लाख रुपये ही देने होंगे। शेष राशि भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार द्वारा डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की सब्सिडी के रूप में वहन की जाएगी। इससे सीमित आय वाले परिवारों को भी सम्मानजनक आवास प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

आधुनिक सुविधाओं से लैस आवासीय परिसर
करीब 6.0281 हेक्टेयर भूमि पर विकसित इस आवासीय परियोजना का निर्माण क्षेत्रफल लगभग 39,220 वर्ग मीटर है। योजना में कुल 23 बहुमंजिला आवासीय ब्लॉक बनाए गए हैं, जिनमें आधुनिक शहरी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रत्येक फ्लैट में एक बेडरूम, ड्राइंग रूम, किचन, टॉयलेट, बाथरूम और बरामदा उपलब्ध कराया गया है। लगभग 28 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले इन आवासों को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि छोटे परिवारों को पर्याप्त सुविधा और बेहतर जीवन स्तर मिल सके। परियोजना की विशेषता यह है कि सभी भवन भूकंपरोधी तकनीक से निर्मित किए गए हैं। इसके साथ ही चौड़ी सड़कों, पर्याप्त पार्किंग, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और स्वच्छ वातावरण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर विशेष जोर
बागवाला आवासीय परियोजना को केवल मकानों का समूह नहीं, बल्कि एक आधुनिक और टिकाऊ आवासीय परिसर के रूप में विकसित किया गया है। परिसर में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), सीवरेज सिस्टम और अत्याधुनिक एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) की व्यवस्था की गई है।परियोजना में हरे-भरे पार्क, बच्चों के लिए सुरक्षित खेल क्षेत्र और सौंदर्यीकरण के व्यापक कार्य भी पूरे किए जा चुके हैं। हॉर्टिकल्चर का कार्य पूर्ण होने से परिसर का वातावरण आकर्षक और पर्यावरण अनुकूल बन गया है।

बेहतर कनेक्टिविटी से बढ़ेगी सुविधा
आवासीय परिसर का स्थान भी इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल है। बागवाला स्थित यह परियोजना मुख्य बाजार और प्रमुख मार्ग से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर है। बस स्टेशन छह किलोमीटर और रेलवे स्टेशन आठ किलोमीटर दूर स्थित है। बेहतर सड़क संपर्क और शहर के प्रमुख क्षेत्रों से नजदीकी के कारण यहां रहने वाले परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी।

पारदर्शी होगी आवंटन प्रक्रिया
सरकार ने आवास आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। पात्र लाभार्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित रैंडमाइजेशन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। आवेदन के लिए आवेदक का प्रधानमंत्री आवास योजना के एमआईएस पोर्टल पर पंजीकृत होना आवश्यक है। साथ ही आवेदक को 17 जून 2015 से पूर्व का उत्तराखंड निवासी होना चाहिए तथा उसकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। मात्र पांच हजार रुपये जमा कर आवेदन प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। शेष राशि के भुगतान के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों पर खरा परिसर
परियोजना में सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। परिसर में आरसीसी बाउंड्री वॉल और मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण पूरा हो चुका है। सभी ब्लॉकों में विद्युत कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं तथा यूपीसीएल द्वारा इलेक्ट्रिकल सेफ्टी जांच भी पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा फायर डिपार्टमेंट द्वारा फायर फाइटिंग सिस्टम का सफल परीक्षण किया जा चुका है। जलापूर्ति व्यवस्था के लिए अंडरग्राउंड टैंक और ओवरहेड टैंक स्थापित किए गए हैं, जबकि एसटीपी भी परीक्षण चरण में पहुंच चुका है।

धामी सरकार की समावेशी विकास सोच का उदाहरण
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विकसित बागवाला परियोजना उत्तराखंड में समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार ऐसी योजनाओं को गति दे रही है, जिनका सीधा लाभ आम नागरिकों और विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मिल रहा है। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की निगरानी में तेजी से आगे बढ़ी यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। आने वाले दिनों में जब हजारों परिवार अपने नए घरों में प्रवेश करेंगे, तब यह केवल मकानों का हस्तांतरण नहीं होगा, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की एक नई शुरुआत होगी। बागवाला की यह आवासीय बस्ती उत्तराखंड में गरीब परिवारों के जीवन स्तर को बदलने वाली एक नई पहचान बनने जा रही है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
सचिव आवास एवं आवास आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रुद्रपुर के बागवाला में विकसित की गई यह परियोजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। परियोजना में गुणवत्ता, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरे किए गए हैं। शीघ्र ही पात्र लाभार्थियों को आवासों का आवंटन कर चाबियां सौंपी जाएंगी, जिससे हजारों परिवारों का अपने घर का सपना साकार होगा।

खटीमा में उत्साह के साथ निकली प्रगति पथ यात्रा, सीएम धामी ने किया नेतृत्व

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने खटीमा प्रवास के दौरान भव्य “प्रगति पथ यात्रा” में प्रतिभाग किया। खटीमा मुख्य मार्ग पर आयोजित इस यात्रा में हजारों की संख्या में युवा, मातृशक्ति, पार्टी कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक तिरंगा लेकर शामिल हुए। पूरे मार्ग में देशभक्ति, विकास और जनसमर्थन का उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला।

प्रगति पथ यात्रा मुख्य चौराहे से होते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क पहुंची, जहां मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत यात्रा का समापन शहीद स्थल पर शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के लिए महान विभूतियों एवं शहीदों का योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री का विभिन्न स्थानों पर स्थानीय नागरिकों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

इस अवसर पर दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, रणजीत सिंह नामधारी, किशन सिंह किन्ना, दर्जा राज्य मंत्री हुकम सिंह कुंवर, मोहन पाठक, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद जोशी, जिला पंचायत सदस्य सागर सिंह धामी, पूर्व विधायक प्रेम सिंह राणा, अध्यक्ष नगर पंचायत नानकमत्ता प्रेम सिंह टुरना, सांसद प्रतिनिधि रविंद्र राणा, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्र, अपर पुलिस अधीक्षक उत्तम सिंह नेगी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं जनता उपस्थित रहे।