हमारा लक्ष्य समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करनाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने को राजपुर रोड, देहरादून स्थित एक निजी होटल में शाइन अवी लर्निंग समावेशी शिक्षा मिशन-2030 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विशेष बच्चों के लिए विजुअल लर्निंग करिकुलम पर आधारित विभिन्न पुस्तकों एवं शिक्षण सामग्री का भी विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा शाइन अवी लर्निंग की पहल, शिक्षा को और अधिक सरल, प्रभावी और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा केंद्र एवं राज्य सरकार ने हमेशा शिक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू की है। जिसका उद्देश्य बच्चों को पढ़ाने के साथ समझने, सोचने, नवाचार और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ने योग्य बनाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, पीएम श्री विद्यालय, अटल उत्कृष्ट विद्यालय, डिजिटल शिक्षण सामग्री और विज्ञान एवं नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। समावेशी शिक्षा को हर बच्चे तक पहुँचाने के लिए सरकार विद्यालयों में रैम्प, रेलिंग, सुगम शौचालय, अनुकूलित फर्नीचर, स्वच्छ पेयजल जैसी सुविधाओं को सुदृढ़ किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लगभग 5,800 विशेष आवश्यकता वाले बच्चे विभिन्न स्तरों पर विद्यालयों में पंजीकृत हैं। सरकार द्वारा संचालित 11 विशेष विद्यालयों के माध्यम से 1,300 से अधिक बच्चों को विशेष शिक्षण एवं पुनर्वास संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा प्रारम्भिक एवं माध्यमिक स्तर पर 300 से अधिक विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की है और शेष रिक्त पदों पर भी भर्ती की प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है, जिसमें राज्य का प्रत्येक बच्चा, अपनी पूर्ण क्षमता के साथ आगे बढ़ सके और नए भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सके। हमें अपने बच्चों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करना है।

मुख्यमंत्री ने शिक्षाविद अनीता शर्मा और शाइन अवी लर्निंग की पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अनीता ने विदेश से रिवर्स पलायन कर उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार किया है। उन्होंने कहा यह कदम अन्य प्रवासियों के लिए भी एक उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते सालों में कई प्रवासियों ने अपने गांव घर लौटकर काम करने की इच्छा जताई है और कई लोग ऐसा कर भी रहे हैं। उन्होंने हम सब ने अपनी विरासत को संरक्षित करना है और अपनी सभ्यता को आगे बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड राज्य, पूरे भारत के लोगों को आत्मसात करता है। हमारे राज्य के लोग व्यक्ति की सोच और उसके कामों को देखते है। तमाम चुनौतियों के बाद भी राज्य, निरंतर विकास के पथ पर आगे चला है। उत्तराखंड की जनता ने हमेशा सरकार को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा हमारा राज्य पूरे देश के लिए कई मामलों में उदाहरण बन कर रहा है। राज्य में सर्वप्रथम समान नागरिक संहिता लागू हुआ। सतत विकास लक्ष्यों की सूची में उत्तराखंड में प्रथम स्थान हासिल किया। साथ ही सख्त नकल विरोधी कानून, जैसे कड़े फैसले भी राज्य सरकार ने लिए हैं।

इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष धीरेंद्र पंवार, अनीता शर्मा, रमेश भट्ट, सुधीर नौटियाल, पीसी नैनवाल, मनोज पंत, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

जलभराव, डेंगू नियंत्रण और आपदा प्रबंधन को सभी विभागों को प्रभावी कार्ययोजना के साथ कार्य करने के निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0आशीष चौहान ने मानसून अवधि में संभावित आपदाओं, डेंगू एवं मलेरिया की रोकथाम, जलभराव की समस्या तथा स्वच्छता व्यवस्था की प्रभावी मॉनिटरिंग को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट सभागार से वर्चुअल बैठक कर व्यापक समीक्षा की।

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने कहा कि मानसून अवधि में सभी विभाग अलर्ट मोड पर कार्य करें तथा प्रतिदिन अपने-अपने क्षेत्रों की निगरानी करते हुए समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी विभाग समन्वय के साथ पूर्व तैयारी सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने संभावित बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए जनपद के नदी किनारे स्थित लो-लाइन क्षेत्रों में जीपीएस युक्त जेसीबी मशीनें पूर्व से ही तैनात रखने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया कि सभी आपदा संचालन केंद्रों (डीओसी) पर आवश्यक चिकित्सा संसाधनों के साथ एम्बुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों को तत्काल चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

जिलाधिकारी ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पर्वतीय, दुर्गम एवं वन क्षेत्रों में संभावित आपदा की त्वरित सूचना उपलब्ध कराने हेतु प्रभावी सूचना तंत्र विकसित किया जाए, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन, स्वच्छता, जलभराव निस्तारण, डेंगू एवं मलेरिया नियंत्रण तथा जनजागरूकता अभियान को पूरी गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ संचालित किया जाए, ताकि जनपदवासियों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की प्रभावी रूप से रक्षा की जा सके।

जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं सभी नगर निकायों को निर्देशित किया कि डेंगू, मलेरिया, जलभराव तथा संभावित आपदा की रोकथाम के लिए विस्तृत कार्ययोजना के साथ कार्य करें तथा और अधिक फागिंग मशीन क्रय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव, नालियों की सफाई तथा जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

स्वास्थ्य विभाग को निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर सर्वे अभियान में तेजी लाई जाए। प्रत्येक घर में संभावित डेंगू लार्वा की जांच, बुखार से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान तथा आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराया जाए। संदिग्ध मामलों की तत्काल जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए।

शिक्षण संस्थानों में डेंगू से बचाव को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी, नगर निगम एवं नगर निकायों को निर्देश दिए कि अपने-अपने क्षेत्र के सभी विद्यालयों का निरीक्षण कर यह प्रमाणित किया जाए कि विद्यालय परिसर डेंगू की दृष्टि से सुरक्षित हैं। विद्यालयों में कहीं भी जलभराव, गंदगी अथवा मच्छरों के पनपने की स्थिति नहीं होनी चाहिए।

मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि जनपद के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों में यह सुनिश्चित कराया जाए कि छात्र-छात्राएं पूर्ण बाजू (फुल स्लीव) की वर्दी अथवा वस्त्र पहनकर विद्यालय आएं, जिससे मच्छरों के काटने से बचाव हो सके। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस संबंध में निर्देशों का पालन न करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध एपिडेमिक एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी विद्यालयों एवं कार्यालय परिसरों में नियमित साफ-सफाई, फॉगिंग एवं डेंगू निरोधक उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

जनपद में कूड़ा उठान की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नए बने गार्बेज प्वाइंटों का चिन्हीकरण कर तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में नगर निगम एवं नगर निकायों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान चलाया जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि किसी क्षेत्र में कूड़े के ढेर अथवा नए गार्बेज प्वाइंट पाए जाते हैं तो संबंधित उप जिलाधिकारी एवं नगर निकाय के अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में कलेक्ट्रेट सभागार अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के के मिश्रा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार, सिंचाई विभाग लोक निर्माण के विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे तथा समस्त उप जिलाधिकारी नगर निगम, नगर निकाय एवं समस्त संबंधित विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े रहे।

जिले में दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बच्चों के चिन्हीकरण एवं उपचार की डीएम ने की समीक्षा, हर संभव सहायता के निर्देश

जनपद देहरादून में दुर्लभ (रेयर) बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समयबद्ध एवं बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत चिन्हित बच्चों के उपचार, आर्थिक सहायता, रेफरल प्रक्रिया तथा उपचार की प्रगति का विस्तृत परीक्षण किया गया।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा ने अवगत कराया कि भारत सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में अब तक 16 बच्चों का चिन्हीकरण किया गया है, जो विभिन्न दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित हैं। इन बच्चों का उपचार देश के विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों में प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि इन बीमारियों के उपचार में अत्यधिक व्यय होता है तथा कई मामलों में उपचार की अवधि भी लंबी होती है, जिसके कारण निरंतर आर्थिक सहयोग की आवश्यकता रहती है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र बच्चे के उपचार की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न होने पाए। उन्होंने कहा कि आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति, अनुमोदन, रेफरल एवं वित्तीय सहायता से संबंधित समस्त औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूरी की जाएं ताकि बच्चों का उपचार बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि आरबीएसके योजना के अंतर्गत उपलब्ध सहायता के उपरांत भी उपचार पर अतिरिक्त धनराशि व्यय होती है, तो ऐसे मामलों में जिला प्रशासन द्वारा राइफल क्लब फंड से आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक संसाधनों के अभाव में किसी भी बच्चे का उपचार प्रभावित नहीं होना चाहिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि गंभीर एवं दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, अभिभावकों के साथ सतत संपर्क बनाए रखा जाए तथा शासन स्तर पर आवश्यक स्वीकृतियां एवं सहायता समयबद्ध रूप से सुनिश्चित कराई जाए।
बैठक में प्रत्येक बच्चे के उपचार की वर्तमान स्थिति, आर्थिक सहायता की उपलब्धता, रेफरल प्रक्रिया, चिकित्सकीय प्रगति तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय, संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि किसी भी बच्चे के उपचार में किसी प्रकार की प्रशासनिक अथवा वित्तीय बाधा उत्पन्न न हो।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी (बाल विकास) जितेंद्र कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, विकसित भारत के संकल्प को नई गति देंगे आधुनिक रेलवे स्टेशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देशभर में अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत पुनर्विकसित 75 रेलवे स्टेशनों का लोकार्पण किया। इसी क्रम में देहरादून स्थित पुनर्विकसित हर्रावाला रेलवे स्टेशन भी राष्ट्र को समर्पित किया गया। इस अवसर पर उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का उत्तराखण्ड की जनता की ओर से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हर्रावाला रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि लगभग 19 करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह स्टेशन दून घाटी की प्राकृतिक सुंदरता और उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत को प्रतिबिंबित करता है। स्टेशन परिसर में पारंपरिक ऐपण कला को स्थान देकर आधुनिकता और संस्कृति का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया गया है, जबकि अत्याधुनिक यात्री सुविधाएं यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुगम और आरामदायक बनाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण, सुरक्षा, गति और तकनीकी दक्षता में निरंतर वृद्धि हुई है तथा वंदे भारत और नमो भारत जैसी आधुनिक, स्वदेशी ट्रेनें आत्मनिर्भर भारत की नई पहचान बनकर उभरी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों तक रेल संपर्क पहुंचाने का सपना भी तेजी से साकार हो रहा है। उन्होंने बताया कि ऋषिकेशदृकर्णप्रयाग रेल परियोजना का 75 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है। यह परियोजना राज्य के सामाजिक, आर्थिक और पर्यटन विकास को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को मिली दो वंदे भारत ट्रेनों से प्रदेश आने वाले यात्रियों और पर्यटकों को विशेष सुविधा मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा इस वर्ष उत्तराखण्ड को रेलवे अवसंरचना विकास के लिए रिकॉर्ड 4,769 करोड़ रुपये का रेल बजट प्रदान किया गया है तथा प्रदेश में लगभग 39,491 करोड़ रुपये से अधिक की रेलवे परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखण्ड के प्रति विशेष स्नेह और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि पुनर्विकसित हर्रावाला रेलवे स्टेशन उत्तराखण्ड की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा तथा विकसित भारत के संकल्प के साथ विकसित उत्तराखण्ड के ष्विकल्प रहित संकल्पष् को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), जनप्रतिनिधिगण, भारतीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सरकार के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

देहरादून में धार्मिक स्थलों से हटवाए गए निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि में बजने वाले लाउडस्पीकर

सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण एवं सार्वजनिक शांति व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने हेतु एसएसपी देहरादून के निर्देशों पर दून पुलिस द्वारा विशेष अभियान चलाया गया।

अभियान के दौरान जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस टीमों द्वारा पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड की टीम के साथ धार्मिक स्थलों पर लगाए गए ध्वनि विस्तारक यंत्रों का निरीक्षण किया गया तथा निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में संचालित होने वाले लाउडस्पीकरों को 43 धार्मिक स्थलों से हटवाया गया तथा भविष्य में बिना सक्षम अनुमति एवं निर्धारित ध्वनि मानको का पालन किए बिना लाउडस्पीकर संचालित न करने के निर्देश दिए गए।

इस दौरान संबंधित व्यक्तियों को ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियमों, न्यायालय के आदेशों तथा शासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने हेतु जागरूक किया गया। साथ ही स्पष्ट किया गया कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अधिनियमों एवं नियमों के अंतर्गत विधिक कार्यवाही की जाएगी।

हरेला पर पूरे प्रदेश में 10 लाख पौधे लगाने का संकल्प, सीएम ने किया एक पेड़ माँ के नाम अभियान से जुड़ने का आह्वान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित लोक संवर्धन पर्व के अंतर्गत हरेला उत्सव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश ही नहीं देता, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भी प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला उत्तराखंड की लोक परंपराओं का ऐसा महापर्व है, जो समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में जोड़ता है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रदेश का अल्पसंख्यक समाज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस पर्व में सहभागी बन रहा है। उन्होंने कहा कि यही उत्तराखंड की साझा सांस्कृतिक विरासत और ष्विविधता में एकताष् की भावना का सबसे सशक्त उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व के माध्यम से राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को नई पहचान मिल रही है। उन्होंने प्रसिद्ध लोकगायक एवं श्गढ़ रत्नश् श्री नरेंद्र सिंह नेगी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति, लोकजीवन, पर्यावरण, महिलाओं के संघर्ष और सामाजिक सरोकारों को देश-दुनिया तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का संकल्प है। हमारे पूर्वजों ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के महत्व को बहुत पहले समझ लिया था। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है, तब उत्तराखंड का हरेला पर्व पर्यावरण संरक्षण का वैश्विक संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि इसी भावना के अनुरूप राज्य सरकार ने इस वर्ष हरेला पर्व के अवसर पर पूरे प्रदेश में 10 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया है। उनका कहना था कि प्रत्येक पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का प्रतीक है और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के संतुलन को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलित विकास के मॉडल पर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे श्एक पेड़ माँ के नामश् अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी माता के सम्मान में एक पौधा अवश्य लगाए और उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प ले। उन्होंने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत उत्तराखंड में दो करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें अब तक लगभग 1 करोड़ 15 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। यह उपलब्धि जनभागीदारी और पर्यावरण के प्रति प्रदेशवासियों की जागरूकता का परिचायक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व राज्य के लोक कलाकारों, शिल्पकारों, बुनकरों, हस्तशिल्प विशेषज्ञों तथा पारंपरिक व्यंजनों से जुड़े कारीगरों को प्रोत्साहन देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उनके अनुसार स्थानीय उत्पादों की खरीद केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और हजारों परिवारों की आजीविका को मजबूत करने का भी प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन लोक कलाकारों और उद्यमियों के लिए नए अवसरों का सृजन करेगा तथा उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अवसर का उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और हरेला पर्व की खुशियों को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपने परिवारों के साथ लोक संवर्धन पर्व में सहभागी बनने तथा उत्तराखंड की लोक कला, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित एवं आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, लोक कलाकार, शिल्पकार, विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में मातृशक्ति, युवा और आमजन उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने देहरादून में किया साइंस सिटी के निर्माण कार्यों का निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) में साइंस सिटी परियोजना के निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने के साथ ही विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति परिसंवाद कार्यक्रम में भी प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देहरादून साइंस सिटी का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में ये साइंस सिटी केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान का अग्रणी केंद्र बनकर उभरेगी। उन्होंने कहा कि इस साइंस सिटी में हमारे युवाओं को अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जो उनके सपनों और विचारों को नई उड़ान देने का कार्य करेंगी। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में विज्ञान सेतु परिकल्पना के अंतर्गत सामुदायिक विज्ञान रेडियो श्विज्ञान वाणी (88.8 मेगाहर्ट्ज), विज्ञान दृश्यम तथा विज्ञान धारा का लोकार्पण करते हुए कहा कि इन प्रयासों से प्रयोगशालाओं के जटिल ज्ञान को उत्तराखंड के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

तकनीकी में नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय प्रदेश में हरेला सप्ताह मनाया जा रहा है। हरेला केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारे दायित्व का ष्प्रतीक पर्वष् भी है। उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय संकट की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में हरेला पर्व पूरी दुनिया को ये संदेश देता है कि विकास और प्रकृति साथ-साथ चल सकते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज पूरी दुनिया एक अभूतपूर्व तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। अब रोबोट्स कारखानों से लेकर अस्पतालों तक में काम कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानी क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है। वहीं, डेटा साइंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और बायो-टेक्नोलॉजी जैसी उभरती हुई प्रौद्योगिकियां आज दुनिया की दिशा और दशा तय कर रही हैं। ऐसे समय में, हमें इस बदलाव को न केवल स्वीकार करना है, बल्कि इसका नेतृत्व भी करना है।

उत्तराखंड की बेस्ट प्रैक्टिस को मिल रही सराहना
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज देश के कई राज्य उत्तराखंड को कई क्षेत्रों में बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में देख रहे हैं। सिलल्यारा टनल में फंसे श्रमिकों का सुरक्षित निकालने का अभियान इसमें शामिल है। जिसे ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में पेश किया गया। इसीलिए सरकार ने अब से हर वर्ष 28 नवंबर को आपदा प्रबंधन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में अद्भुत प्रतिभा और मेधा है। इसलिए अब हमें प्रदेश में ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है जहाँ हमारी इस युवा प्रतिभा को सही दिशा मिले ताकि वे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।

विकसित भारत का आधार- विज्ञान, अनुसंधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने विकसित भारत 2047 का जो अमृत संकल्प रखा है, उसकी सबसे मजबूत आधारशिला विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान ही है। इसीलिए प्रधानमंत्री ने जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान के नारे में जय अनुसंधान जोड़कर देश के वैज्ञानिकों और युवाओं को एक नया मंत्र दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और नेशनल क्वांटम मिशन जैसे बड़े अभियानों के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के प्रयासों से भारत में अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। वहीं, सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर होने की राह पर है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी उत्तराखंड को विज्ञान, तकनीक और आधुनिक अनुसंधान का एक वैश्विक हब बनाने के लिए पूरी तरह संकल्पित होकर कार्य कर रही है। इसी दिशा में राज्य की पहली श्विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीतिश् लागू हो चुकी है। इस नीति का उद्देश्य एक ऐसा आत्मनिर्भर इकोसिस्टम विकसित करना है जहाँ हमारा युवा केवल रोजगार खोजने वाला न रहे, बल्कि अपने इनोवेटिव आइडियाज के दम पर जॉब क्रिएटर बने। ये नीति विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं की सीमाओं तक नहीं रखेगी, बल्कि उसे आम जनजीवन से जोड़ते हुए जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनेगी।

चुनौतियों का स्थानीय समाधान तलाशने का प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां हमारे सामने कई कठिन चुनौतियां खड़ी करती हैं। लेकिन हमारा हिमालय ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और हमारी जैव-विविधता, अमूल्य औषधीय वनस्पतियां, बारहमासी जल स्रोत, जैविक कृषि और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर हमारी असली पूंजी हैं। इसलिए यदि हम अपनी स्थानीय समस्याओं के स्थानीय और वैज्ञानिक समाधान विकसित कर लें, तो उत्तराखंड पूरे देश के लिए विकास का एक आदर्श मॉडल बन सकता है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने नई पॉलिसी तैयार की है। साथ ही सरकार प्रदेश में तकनीक, डिजिटल गवर्नेंस, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने वाला एक मजबूत इकोसिस्टम भी विकसित कर रही है। इसी तरह वैज्ञानिक अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देते हुए उत्तराखंड को श्साइंस बेस्ड नॉलेज इकॉनॉमीश् के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी निरंतर कार्य किया जा रहा है।

स्टार्टअप सेंटर विकसित करने की घोषणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश में साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट सूचना केंद्र, स्टेम लैब्स और जीआईएस आधारित आधुनिक तकनीकी प्रणालियों का भी विस्तार कर रही है। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर तथा प्री-इन्क्यूबेशन लैब जैसी भविष्य की तकनीकों को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इस मौके पर उन्होंने यूकॉस्ट परिसर में स्टार्टअप सेंटर विकसित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने की भी घोषणा की। मुख्यमत्री ने इस अवसर पर पौधारोपण भी किया।

इस मौके पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, सहसपुर विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, सचिव नितेश झा, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविन्द सिंह, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित हुए।

जनसेवा कार्यक्रम में सीएम को ज्ञापन भेंट कर की सिलाई मशीन की मांग, शाम को मिली

सहसपुर में आयोजित सेवा, सुशासन एवं समर्पण ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ बहुउद्देशीय शिविर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनसमस्याओं को सुनते हुए अधिकारियों को उनका त्वरित एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

शिविर में स्थानीय निवासी बबली गुप्ता ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि वे जूट बैग बनाकर अपनी आजीविका चलाना चाहती हैं, जिसके लिए उन्हें सिलाई मशीन की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को सिलाई मशीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी के समन्वय से उन्हें शाम को ही सिलाई मशीन उपलब्ध करा दी गई। इससे बबली गुप्ता को जूट बैग निर्माण के माध्यम से अपनी आजीविका सुदृढ़ करने और स्वरोजगार से जुड़ने में सहायता मिलेगी।

सिलाई मशीन प्राप्त होने पर बबली गुप्ता ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की त्वरित कार्रवाई से उनके स्वरोजगार की राह आसान हुई है।

लोक संवर्धन पर्व के आयोजन में केंद्र के साथ साझेदारी करने वाला उत्तराखंड बना देश का पहला राज्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की उपस्थिति में परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित छठे लोक संवर्धन पर्व का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत पौधरोपण भी किया। 11 से 15 जुलाई तक आयोजित होने वाले इस महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकार, हस्तशिल्पी, लोक कलाकार, उद्यमी एवं पाक कला विशेषज्ञ अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। महोत्सव में 150 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें उत्तराखंड की पारंपरिक कला एवं उत्पादों को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि लोक संवर्धन पर्व के आयोजन में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ साझेदारी करने वाला वह देश का पहला राज्य बना है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक समन्वय का परिणाम नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड राष्ट्रीय विकास और जनकल्याणकारी पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन में सदैव अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस आयोजन के लिए केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की विविध भाषाएँ, लोक परंपराएँ, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। ऐसे आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं, बल्कि कारीगरों, शिल्पकारों और लोक कलाकारों को नए बाजार, नए अवसर और नई पहचान भी प्रदान करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह महोत्सव उत्तराखंड सहित पूरे देश के शिल्पकारों और युवा उद्यमियों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी मंच सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार श्सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयासश् के मंत्र पर कार्य करते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक समाज के शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की हैं। छात्रवृत्ति, मेधावी बालिका प्रोत्साहन, कौशल विकास, स्वरोजगार, शिक्षा ऋण, मुख्यमंत्री हुनर योजना तथा अल्पसंख्यक क्षेत्रों के विकास जैसी पहलें समाज के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साथ ही मदरसों में आधुनिक तकनीक एवं आईटी आधारित शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हाउस ऑफ हिमालयाज तथा एक जनपद दो उत्पाद जैसी पहलों के माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों और देवभूमि आने वाले पर्यटकों से लोक संवर्धन पर्व में अधिकाधिक संख्या में पहुंचकर स्थानीय उत्पादों की खरीद के माध्यम से शिल्पकारों और कारीगरों का उत्साहवर्धन करने का आह्वान किया।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक कौशल और कारीगरों के सम्मान का राष्ट्रीय उत्सव है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत सरकार पारंपरिक शिल्प, हस्तकला, लोक संस्कृति और अल्पसंख्यक समुदायों के कारीगरों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास) योजना के अंतर्गत आयोजित यह महोत्सव शिल्पकारों को विपणन, ब्रांडिंग और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड इस आयोजन में साझेदारी करने वाला देश का पहला राज्य बना है, जो राज्य की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता और विकासोन्मुखी सोच का परिचायक है।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय भारत सरकार डॉ. श्रीवत्स कृष्णा, संयुक्त सचिव एस.पी. रॉय, विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण उत्तराखंड डॉ. पराग मधुकर धकाते, देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकार, लोक कलाकार, हस्तशिल्पी, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान से शासन और जनता के बीच बढ़ा विश्वासः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री गुरु रामराय पब्लिक स्कूल, सहसपुर में सेवा, सुशासन एवं समर्पण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार जनसेवा शिविर में प्रतिभाग करते हुए कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य शासन-प्रशासन को जनता के और अधिक निकट लाना है। सरकार की प्राथमिकता है कि आमजन को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, बल्कि सरकार स्वयं उनके द्वार तक पहुंचकर सेवाएं उपलब्ध कराए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वाेपरि है और सुशासन का वास्तविक अर्थ संवेदनशील, जवाबदेह एवं जनकेंद्रित प्रशासन है। उन्होंने कहा कि जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान ने शासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत किया है तथा सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में प्रभावी माध्यम सिद्ध हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के प्रथम चरण में प्रदेशभर में 65 दिनों के दौरान लगभग 700 जनसेवा शिविर आयोजित किए गए, जिनमें पांच लाख से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया। देहरादून जनपद में आयोजित 46 शिविरों में 60 हजार से अधिक नागरिकों ने सहभागिता की तथा लगभग 39 हजार लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ मौके पर ही उपलब्ध कराया गया।

उन्होंने कहा कि सेवा, सुशासन एवं समर्पण के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित सेवा पखवाड़े के तहत प्रदेशभर में जनसेवा शिविर लगाए जा रहे हैं। 4 जुलाई से प्रारंभ हुए सेवा पखवाड़े में अब तक 64 हजार से अधिक नागरिकों ने प्रतिभाग किया है। इस दौरान प्राप्त 5,567 जनसमस्याओं में से 4,951 का समाधान सुनिश्चित किया गया है तथा 2,522 नागरिकों को विभिन्न प्रमाण-पत्रों एवं सेवाओं से लाभान्वित किए जाने की प्रक्रिया संचालित की गई है।

मुख्यमंत्री की उपस्थिति में आयोजित शिविर में 01 हजार से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित भी किया गया। इस अवसर पर पात्र लाभार्थियों को विभिन्न विभागों की योजनाओं के अंतर्गत प्रमाण-पत्र एवं अन्य सहायता वितरित की गई। साथ ही विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से आमजन को योजनाओं की जानकारी देने के साथ मौके पर ही आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा का विजन आज तेजी से साकार हो रहा है। राज्य में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, पर्यटन, उद्योग, निवेश एवं हवाई संपर्क सहित प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पहली बार जी-20 बैठकों, राष्ट्रीय खेलों, शीतकालीन यात्रा तथा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे ऐतिहासिक आयोजनों का सफल आयोजन हुआ। राज्य की अर्थव्यवस्था निरंतर सुदृढ़ हो रही है तथा निवेश, उद्योग, स्टार्टअप और पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखण्ड नई पहचान बना रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू कर सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। युवाओं के हितों की रक्षा के लिए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां मिली हैं। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सहसपुर विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा, सड़क, सिंचाई, बाढ़ सुरक्षा तथा कृषि के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण विकास कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्विकसित भारत के लिए विकसित उत्तराखण्डश् के संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा प्रत्येक नागरिक तक विकास और जनकल्याण का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मौके पर ही दिए जन समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण के निर्देश
सहसपुर में आयोजित सेवा, सुशासन, सम्पर्ण ‘जन जन की सरकार, जन जन के द्वार’ बहुउद्देशीय शिविर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ना सिर्फ जन समस्याओं को सुना बल्कि मौके पर ही अधिकारियों को जन समस्याओं का समयबद्ध तरीके से निस्तारण करने के निर्देश दिए।

कारबारी ग्रांट निवासी सुमन बासकंडी ने मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में साईलोक कारबारी ग्रांट में 30 सोलर लाइट लगाने की मांग की, जिस पर मुख्यमंत्री ने एमडीडीए को 2 माह के भीतर सोलर लाइट लगाने के लिए निर्देशित किया। इसी तरह स्थानीय निवासी बबली गुप्ता ने मुख्यमंत्री को जूट बैग बनाने के लिए सिलाई मशीन उपलब्ध कराने के लिए मांगपत्र सौंपा, जिस पर मुख्यमंत्री ने उन्हें आज ही सिलाई मशीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। इसी तरह सेलाकुईं नगर पंचायत के सभासद अनिल नौटियाल ने आंतरिक मार्ग, नालियां, जल निकासी व्यवस्था, इंटरलॉकिंग सीसी मार्ग सहित अन्य विकास कार्यों की मांग की थी, जिस पर मुख्यमंत्री ने शहरी विकास निदेशालय को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। गोकुल फाउंडेशन चौरिटेबल ट्रस्ट की मांग पर मुख्यमंत्री ने ट्रस्ट की सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसी तरह नंदन संह कंडारी ने भाऊवाला पुल किनारे श्मशान घाट निर्माण की मांग उठाई, जिस पर मुख्यमंत्री ने एमडीएम को दो माह में श्मशान निर्माण के निर्देश दिए। यशपाल सिंह नेगी ने अटकफार्म और सेंट्रल होपटाउन में बंदोबस्त कार्य पूरा न होने के कारण, पेश आ रही दिक्कतों को दूर करने की मांग की, मुख्यमंत्री ने सचिव राजस्व को इस समस्या का 15 दिन में समाधान करने के निर्देश दिए। शिविर में शांति विहार सुधार एवं विकास समिति ने भगवानपुर बहुगुणा मार्ग में डॉ श्याम प्रसाद मुखर्जी के नाम पर पार्क और ओपन जिम निर्माण की मांग की, मुख्यमंत्री ने एमडीडीए को कार्रवाई को कहा है। इसी तरह उन्होंने ग्राम बडोवाला में डिस्पेंसरी और एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग पर भी स्वास्थ्य विभाग को एक माह में जरूरी कार्रवाई के लिए कहा।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक सहसपुर सहदेव सिंह पुण्डीर, दायित्वधारी विनय रोहिला, पुनीत मित्तल, ओमवीर सिंह, भुवन विक्रम डबराल, भाजपा के जिलाध्यक्ष मीता सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष नीरू देवी, अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोभाल, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह एवं जिलास्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।