नवरात्रि के प्रथम दिवस पर नौ दिवसीय कुंजापुरी मेले का ध्वजारोहण कर हुआ उद्घाटन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नरेंद्रनगर में 50वें सिद्धपीठ श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले का ध्वजारोहण कर शुभारंभ किया। उन्होंने सांस्कृतिक झांकियों का अवलोकन तथा विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन कर विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने शहीद स्थल पर अमर शहीदों की प्रतिमाओं एवं स्वतंत्रता संग्राम शहीद स्मारक पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने मां कुंजापुरी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर पूजा-अर्चना भी की।

मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि और मेले की स्वर्ण जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नवरात्रि पर मेले का शुभारंभ सुखद संयोग है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में कन्याओं को मां भगवती का स्वरूप माना गया है। उन्होंने कहा कि 50वां श्री कुंजापुरी मेला लोक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली परंपराओं का प्रतीक है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने और व्यापार, पर्यटन को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने मेले के संस्थापक सुरेंद्र सिंह पांगती और आयोजन समिति के योगदान की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का संवर्धन हो रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और केदारनाथ-बदरीनाथ धाम में विकास कार्य इसके उदाहरण हैं। राज्य सरकार केदारखंड और मानसखंड के प्रमुख मंदिरों में सुविधाओं के विस्तार के लिए कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पलायन रोकना और युवाओं को स्थानीय रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को देश-विदेश में बाजार मिल रहे हैं। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड की बिक्री 6 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, फार्म मशीनरी बैंक, होमस्टे, पर्यटन एवं फिल्म नीति तथा ‘वेड इन उत्तराखंड’ जैसी पहलों से स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने समान नागरिक संहिता, सशक्त भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा रोधी कानून और नकल विरोधी कानून का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई गई है। उन्होंने ऑपरेशन कालनेमि और अवैध मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं से 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां दी गई हैं।

मुख्यमंत्री ने टिहरी के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि टिहरी झील के चारों ओर रिंग रोड और पर्यटन मार्ग विकसित किए जा रहे हैं। झील क्षेत्र में जलक्रीड़ा, साहसिक पर्यटन और होमस्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे रोजगार बढ़ रहा है। उन्होंने नरेंद्रनगर में राजकीय पॉलिटेक्निक के उच्चीकरण, केंद्रीय विद्यालय, विधि महाविद्यालय, सभागार निर्माण, गजा अस्पताल के उच्चीकरण तथा लगभग 50 करोड़ रुपये की सीवर लाइन परियोजना का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है।

मेले में छोलिया नृत्य, गाडू घड़ा (तेल कलश) की परंपरा, महिषासुर मर्दिनी, प्रह्लाद की भक्ति पर आधारित नरसिंह अवतार, मां कुंजापुरी, भारत की गौरवशाली बेटियां तथा बदलता एवं बढ़ता नरेंद्रनगर सहित विषयों पर आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं। इनमें विद्यार्थियों और सांस्कृतिक दलों ने भाग लिया।

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने मेले की स्वर्ण जयंती की बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन लोक संस्कृति के संरक्षण के साथ खेल, पर्यटन और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करता है। उन्होंने पॉलिटेक्निक के उच्चीकरण, विधि महाविद्यालय के लिए बजट एवं पदों के सृजन और सीवर लाइन सहित विभिन्न विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। संस्थापक सुरेंद्र सिंह पांगती ने अनुभव साझा किए। नगर पालिका परिषद नरेंद्रनगर के अध्यक्ष राजेंद्र विक्रम पंवार ने भी शुभकामनाएं दीं।

11 से 19 अक्टूबर तक चलने वाले इस राज्यस्तरीय मेले में खेलकूद एवं विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिताओं के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। पद्मश्री डॉ. बसंती बिष्ट, नरेंद्र सिंह नेगी, मीना राणा, संगीता ढौंडियाल, किशन महिपाल, पांडवाज बैंड तथा अन्य कलाकार प्रस्तुतियां देंगे। मेले का समापन पद्मश्री जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण के जागर गायन के साथ होगा।

इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख नरेंद्रनगर दीक्षा राणा, नगर पंचायत अध्यक्ष तपोवन विनीता बिष्ट, ऋषिकेश के महापौर शंभू पासवान, नगर पंचायत अध्यक्ष गजा कुंवर सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष उदय रावत, जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे, मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल, अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह नेगी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

लोक संवर्धन पर्व के आयोजन में केंद्र के साथ साझेदारी करने वाला उत्तराखंड बना देश का पहला राज्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की उपस्थिति में परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित छठे लोक संवर्धन पर्व का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत पौधरोपण भी किया। 11 से 15 जुलाई तक आयोजित होने वाले इस महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकार, हस्तशिल्पी, लोक कलाकार, उद्यमी एवं पाक कला विशेषज्ञ अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। महोत्सव में 150 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें उत्तराखंड की पारंपरिक कला एवं उत्पादों को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि लोक संवर्धन पर्व के आयोजन में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ साझेदारी करने वाला वह देश का पहला राज्य बना है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक समन्वय का परिणाम नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड राष्ट्रीय विकास और जनकल्याणकारी पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन में सदैव अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस आयोजन के लिए केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की विविध भाषाएँ, लोक परंपराएँ, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। ऐसे आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनते हैं, बल्कि कारीगरों, शिल्पकारों और लोक कलाकारों को नए बाजार, नए अवसर और नई पहचान भी प्रदान करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह महोत्सव उत्तराखंड सहित पूरे देश के शिल्पकारों और युवा उद्यमियों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी मंच सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार श्सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयासश् के मंत्र पर कार्य करते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक समाज के शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की हैं। छात्रवृत्ति, मेधावी बालिका प्रोत्साहन, कौशल विकास, स्वरोजगार, शिक्षा ऋण, मुख्यमंत्री हुनर योजना तथा अल्पसंख्यक क्षेत्रों के विकास जैसी पहलें समाज के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साथ ही मदरसों में आधुनिक तकनीक एवं आईटी आधारित शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हाउस ऑफ हिमालयाज तथा एक जनपद दो उत्पाद जैसी पहलों के माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों और देवभूमि आने वाले पर्यटकों से लोक संवर्धन पर्व में अधिकाधिक संख्या में पहुंचकर स्थानीय उत्पादों की खरीद के माध्यम से शिल्पकारों और कारीगरों का उत्साहवर्धन करने का आह्वान किया।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक कौशल और कारीगरों के सम्मान का राष्ट्रीय उत्सव है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत सरकार पारंपरिक शिल्प, हस्तकला, लोक संस्कृति और अल्पसंख्यक समुदायों के कारीगरों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास) योजना के अंतर्गत आयोजित यह महोत्सव शिल्पकारों को विपणन, ब्रांडिंग और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड इस आयोजन में साझेदारी करने वाला देश का पहला राज्य बना है, जो राज्य की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता और विकासोन्मुखी सोच का परिचायक है।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय भारत सरकार डॉ. श्रीवत्स कृष्णा, संयुक्त सचिव एस.पी. रॉय, विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण उत्तराखंड डॉ. पराग मधुकर धकाते, देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकार, लोक कलाकार, हस्तशिल्पी, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

जौनसार भाबर प्राकृतिक सुंदरता के साथ अपनी मेहनतकश, सरल और स्वाभिमानी जनता के लिए जाना जाता हैः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी केदार सिंह स्टेडियम, नागथात, देहरादून में आयोजित जौनसार बावर लोक सांस्कृतिक महोत्सव एवं क्रीड़ा समारोह-2026 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. केदार सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान समरजेंस मोटर मार्ग का चौड़ीकरण और डामरीकरण का कार्य किए जाने, प्राथमिक विद्यालय नागथात को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किए जाने, वि.ख. चकराता के बागी -खेड़ा -कोटा- तपलाड मार्ग में यमुना नदी पर 60 मी. स्पैन पुल का निर्माण कार्य किए जाने, चकराता के क्यारापुल – डामटा – म्यूँडा मोटर मार्ग के कि.मी. 22 से छामरी एवं जाखणी तक मोटर मार्ग का निर्माण कार्य, विकासखंड कालसी के अंतर्गत ग्राम सकरोल से ग्राम भोड़ा-भालनू एवं उटेल होते हुए द्वितीय सिद्ध पीठ श्री महासू महाराज थैना तक मोटर मार्ग का निर्माण कार्य , वि.ख. चकराता के अंतर्गत ग्राम खबऊ के अन्तर्गत खेड़ा रमारका- कुन्ना – बुराष्टी में यमुना नदी से पम्पिंग पेयजल योजना बनाए जाने, वि.ख चकराता के जगथान बुरायला मार्ग से ग्राम उदांवा तक सडक निर्माण को च्डळैल् में प्रस्तावित किए जाने एवं क्षेत्र की कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए द्वीना से बिसोई खुना अलमान तक नए संपर्क मार्ग का निर्माण कार्य किए जाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने महासू देवता को नमन करते हुए कहा कि जौनसार बावर सांस्कृतिक पुनरूत्थान समिति पिछले 33 वर्षों से इस उत्सव के माध्यम से धरोहर को बचाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा जौनसार भाबर प्राकृतिक सुंदरता के साथ अपनी मेहनतकश, सरल और स्वाभिमानी जनता के लिए जाना जाता है। यहां की लोक संस्कृति, एकता की भावना को बढ़ावा एवं भविष्य की पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा जौनसार- बावर में उन्हें उत्तराखण्ड की मूल आत्मा के साक्षात दर्शन होते हैं। जौनसार की संस्कृति, परंपराएँ, सरलता, आत्मीयता और प्रकृति के प्रति सम्मान, राज्य की समृद्ध विरासत है।

मुख्यमंत्री ने कहा जौनसार के रासो की थाप, हारूल की गूंज और बौंद जैसी महान परंपराएं उत्तराखंड, के साथ पूरे देश का गौरव हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जनजातीय समाज के सम्मान, शिक्षा और समग्र विकास के लिए कई ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। देश में जनजातीय समुदायों के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान, वन धन योजना, प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन जैसी अनेक योजनाएँ लागू की गईं हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आदिवासी समाज की नीतियां और नियति दोनों बदली हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड जनजातीय महोत्सव के माध्यम से संस्कृति व विरासत को एक मंच देने का प्रयास किया है। सरकार ने प्रतिवर्ष जनजातीय खेल महोत्सव आयोजित करने का भी निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के अंतर्गत प्रदेश के 128 जनजातीय गांवों को चिन्हित किया है। जिसके तहत इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी और इंटरनेट जैसी हर बुनियादी सुविधा पहुंचाकर इनका कायाकल्प करने का काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कालसी, मेहरावना, बाजपुर और खटीमा में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। जिसके माध्यम से जनजातीय बच्चों को निःशुल्क विश्वस्तरीय आवासीय शिक्षा की सुविधा मिल रही है। बाजपुर और चकराता में भी नए एकलव्य आवासीय विद्यालयों का निर्माण कार्य जारी है। जनजातीय समाज के बच्चों को पढ़ाई के लिए सरकार, प्राथमिक स्तर से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक छात्रवृत्ति भी प्रदान कर रही है। शैक्षिक विकास के लिए वर्तमान में 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा जनजातीय समुदाय की बेटियों के विवाह के लिए ₹ 50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। जनजातीय शोध संस्थान के लिए 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड की स्थापित की गई है जौनसार बावर क्षेत्र में सड़कों, पानी और बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए लगातार काम कर रही है। चकराता के विकास के लिए राज्य सरकार ने लगभग 39 करोड़ रुपये की 56 योजनाओं को मंजूरी दी थी। इनमें से 51 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। शेष 5 योजनाओ को भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। पूरे क्षेत्र की सड़कों को मजबूत करने के लिए 1,300 करोड़ रुपये से ज्यादा की योजनाओं पर काम चल रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 707 और 707। का चौड़ीकरण युद्धस्तर पर जारी है। कालसी-चकराता मार्ग पर जजरेड के पास भूस्खलन की समस्या का स्थायी समाधान किया जा रहा है। न्यू चकराता टाउनशिप हय्यो डांडा पंपिंग योजना पर लगभग 229 करोड़ रुपये की लागत से काम चल रहा है। जिससे भविष्य में पानी की कभी कमी नहीं होगी। श्री महासू देवता मंदिर परिसर के भव्य विकास के लिए 120 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक मास्टर प्लान पर विकास कार्य भी गतिमान है।

इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान, दायित्वधारी गीता राम गौड़, मेला समिति के अध्यक्ष नरेश चौहान, महासचिव मेला समिति नरेन्द्र तोमर, खुशीराम जोशी, जयपाल सिंह तोमर, शूरवीर सिंह तोमर, बलवीर सिंह नेगी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सीएम ने कन्याओं के साथ मनाया फूलदेई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में सपरिवार लोकपर्व फूलदेई मनाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश वासियों को फूलदेई की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री आवास में लोकपर्व फूलदेई, हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। पारंपरिक परिधान पहनकर आए बच्चों ने घर की देहरी पर फूल व चावल अर्पित किए और सभी के सुख-समृद्धि की कामना की। बच्चों ने “फूल देई-छम्मा देई, जतुके दियाला- उतुके सई” जैसे लोकगीत गाए। मुख्यमंत्री ने बच्चों का स्वागत करते हुए उन्हें उपहार भेंट किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकपर्व फूलदेई राज्य की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के प्रति सम्मान के भाव को बनाए रखने का त्योहार है। उन्होंने कहा यह त्योहार बसंत ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति की सुंदरता और जीवन में नई ऊर्जा का संदेश देता है। यह त्योहार दर्शाता है कि जीवन में हमेशा प्रकृति का आभार व्यक्त करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड की लोक संस्कृति और लोकपर्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा हमने अपने लोक त्योहारों को धूमधाम से मनाना चाहिए जिससे कि यह त्यौहार आने वाली पीढ़ी तक पहुंचे और हमारी लोक संस्कृति हमेशा अमर रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, बसंत के स्वागत और हमारी लोकसंस्कृति के संरक्षण का संदेश देने वाला फूलदेई पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और आने वाली पीढ़ियों को इन अमूल्य परंपराओं से परिचित कराने की प्रेरणा देता है।

इस अवसर पर गीता पुष्कर धामी भी मौजूद रहीं।

पैंली-पैंली बार उत्तराखण्डी गीत का हुआ विमोचन, सीएम धामी रहे मौजूद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास पैंली-पैंली बार उत्तराखण्डी गीत का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने सभी लोक गायकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह गीत जन-जन तक सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों को पहुंचाएगा। उन्होंने कहा इन गीतों के माध्यम से समाज में जागरूकता आएगी एवं उत्तराखंड में पहली बार हुए कार्यों से बड़ी संख्या में लोग अवगत हो सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णय अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन रहे हैं। उन्होंने लोक कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति, भाषा और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा हमारा राज्य, विकास के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। ऐतिहासिक फैसलों और योजनाओं के माध्यम से आम जन को सहूलियत पहुंचाई जा रही है। विभिन्न चुनौतियों के बाद भी राज्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, स्टार्टअप, कृषि, रिवर्स पलायन , बागवानी, हर क्षेत्र में नया इतिहास रच रहा है।

“पैली-पैली बार” गीत में उत्तराखण्ड राज्य के इतिहास में पहली बार हुये विकास कार्यों का उल्लेख किया गया है। गीत में नकल विरोधी कानून, वृहद स्तर पर सरकारी जमीनों पर हुये अतिक्रमण को हटाने, धर्मान्तरण और यूसीसी , शीतकालीन यात्रा, पर्यटन व तीर्थाटन को बढावा, आदि कैलाश यात्रा, रिवर्स पलायन, राजस्व वृद्धि, किसानों को प्रदान की जा सुविधाओं, सरकारी सेवाओं में हुई नियुक्तियों जैसे महत्वपूर्ण और विकासपरक योजनाओं का उल्लेख किया गया है।

इस गीत के बोल उत्तराखण्ड के विकास कार्यों को प्रमुखता से उजागर करते हैं और कैसे राज्य का समग्र विकास किया जा रहा है, को भी परिभाषित करते हैं। साथ ही सरकार द्वारा वर्तमान मे चलाए जा रहे अभियान “जन जन की सरकार, जन जन के द्वार” की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

इस गीत में उत्तराखण्ड के प्रमुख लोकगायक सौरभ मैठाणी, गोविन्द दिगारी, राकेश खनवाल, ललित गित्यार, भूपेन्द्र बसेडा, मनोज सामन्त, चन्द्रप्रकाश एवं लोकगायिका खुशी जोशी व सोनम ने सम्मिलित रूप से स्वर प्रदान किया गया है। साथ ही इसकी धुन व गीत भूपेन्द्र बसेड़ा द्वारा एवं संगीत ललित गित्यार द्वारा तैयार किया गया है। विभिन्न गायकों/गायिकाओं द्वारा रचित यह उत्तराखण्डी लोकधुन पर आधारित गीत सुनने में अत्यधिक कर्णप्रिय लग रहा है और सरकार की विकास योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने, विकास कार्यों के प्रति समझ को बढ़ाने तथा जन-जन को विकास योजनाओं के बारे में सुगमता से जानकारी प्रदान करने का भरसक प्रयास किया गया है।

इस अवसर पर दायित्वधारी कैलाश पंत, लोकगायक सौरभ मैठाणी, गोविन्द दिगारी (वर्चुअल), खुशी जोशी दिगारी ( वर्चुअल ) , भूपेन्द्र बसेडा, ललित गित्यार, राकेश खनवाल, चन्द्रप्रकाश, सोनम, कुंदन कोरंगा, बसंत तिवारी, नवीन जोशी, पूरन नगरकोटी, भागीरथी नगरकोटी, मीनाक्षी जोशी, मोहित जोशी, संगीतकार सुरेन्द्र बिष्ट एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

गौचर मेले जैसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने का प्रभावी माध्यमः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 73वॉं राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले का उद्घाटन किया। गौचर मेले में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह मेला उत्तराखंड के प्रमुख मेलों में से एक है। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने का प्रभावी माध्यम होने के साथ-साथ स्थानीय आर्थिकी को भी सशक्त बनाता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जहां एक ओर हमारी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया जा रहा है,वहीं लोकल फॉर वोकल, मेड इन इंडिया जैसी योजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश में कई योजनाओं और नीतियों को सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जिससे राज्य का चहुमुखी विकास सुनिश्चित हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा आज तमाम परेशानियों और चुनौतियों के बाद भी हमारी मातृशक्ति द्वारा तैयार किये जा रहे उत्पाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी पीछे छोड़ रही है। उन्होंने आमजन से स्वदेशी अपनाने की अपील करते हुए कहा यदि हम स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देंगे तो हमारा यह कदम आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा हमारी सरकार के प्रयासों से आज उत्तराखंड फिल्म शूटिंग का बेस्ट डेस्टिनेशन बन रहा है। अब उत्तराखंड तेजी से वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

मुख्यमंत्री ने गौचर में पिथौरागढ़ की तर्ज पर 18-सीटर हेलीसेवा प्रारम्भ किये जाने, नगर क्षेत्र के चार प्रमुख स्थलों पर पार्किंग सुविधाओं का विकास किये जाने और साकेत नगर – रघुनाथ मंदिर -चटवापीपल मोटर मार्ग निर्माण की घोषणा की। उन्होंने बताया की गौचर में स्टेडियम निर्माण हेतु धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है शीघ्र ही इसका कार्य शुरू करवाया जायेगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वरिष्ठ पत्रकार हरीश मैखुरी को गोविन्द प्रसाद नौटियाल पत्रकार सम्मान और शिक्षा के क्षेत्र में वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद डॉ. नन्द किशोर हटवाल को पंडित महेशानंद नौटियाल शिक्षा और साहित्य प्रसार सम्मान से सम्मानित किया।

क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल एवं मेला उपाध्यक्ष संदीप नेगी ने गौचर मेले का शुभारंभ करने पर मुख्यमंत्री का हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत किया और मुख्यमंत्री को क्षेत्र की समस्या से अवगत कराते हुए समस्याओं के निदान के लिए मांग पत्र भी सौंपा।

प्रसिद्ध गौचर मेले में पहले दिन ईष्ट रावल देवता की पूजा के बाद प्रातः स्कूली बच्चों ने प्रभात फेरी निकाली। मेलाध्यक्ष द्वारा झंडारोहण कर मार्चपास की सलामी ली गई। गौचर मेला मुख्य द्वार से चटवापीपल पुल तक एवं वापसी उसी रूट से होते हुये मुख्य मेला द्वार तक क्रास कण्ट्री दौड़ का आयोजन किया गया। खेल मैदान में बालक एवं बालिकाओं की दौड़, नेहरू चित्रकला प्रतियोगिता, शिशु प्रदर्शनी और शिक्षण संस्थाओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या पर रात्रि को डॉ. पम्मी नवल लोक गायिका द्वारा जागर संध्या की प्रस्तुति दी जाएगी। गौचर मेले में पारंपरिक पहाड़ी संस्कृति से सजा पांडाल मेलार्थियों के बीच खासे आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

इस अवसर पर थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, रुद्रप्रयाग विधायक भरत चौधरी, राज्य मंत्री हरक सिंह नेगी, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, जिला पंचायत उपाध्यक्ष लक्ष्मण खत्री, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल बर्तवाल, महामंत्री अरुण मैठाणी, सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीय जनता उपस्थित रहे।

जौलजीबी पिथौरागढ़ में मेले का शुभारंभ कर सीएम ने की कई घोषणाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जौलजीबी, पिथौरागढ़ में भारत-नेपाल सीमा पर काली और गोरी नदी के संगम पर आयोजित होने वाले ऐतिहासिक जौलजीबी मेला का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न घोषणाएं की। विकासखण्ड मुनस्यारी अन्तर्गत ग्राम हूपली में झलूड़ी से पल्याती तक मार्ग निर्माण किया जायेगा। बगीचा से धारचूला कोट ट्रैकिंग मार्ग एवं मेला स्थल का विकास कार्य कराया जायेगा। ग्राम पय्या पौड़ी से नालालेख शिव मंदिर तक ट्रैक रूट निर्माण कराया जायेगा। विकासखण्ड मुनस्यारी अन्तर्गत कालापानी से दशरथ पर्वत कुण्ड तक सम्पर्क मार्ग का निर्माण कार्य कराया जायेगा। विकासखण्ड मुनस्यारी के अन्तर्गत ग्राम सुरिंग में आन्तरिक सी०सी० मार्ग का निर्माण किया जायेगा। सिमगड़ नदी भैंसकोट में आर०सी०सी० पुलिया एंव सम्पर्क मार्ग का निर्माण कराया जायेगा एवं धारचूला में सैनिक विश्राम भवन बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेला सदियों से भारत और नेपाल की सांस्कृतिक, आर्थिक और पारंपरिक मित्रता का प्रतीक है। जौलजीबी मेला केवल आयोजन नहीं, भारत-नेपाल की पारंपरिक मित्रता और आर्थिक-सामाजिक एकरूपता का प्रतिबिंब है। मुख्यमंत्री ने कहा वो स्वयं भी बचपन में इस मेले में आते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत नेपाल की मित्रता और अधिक सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखंड की रजत जयंती के अवसर पर कहा था कि उत्तराखंड की आत्मा उसके मेलों और त्योहारों में बसती है और उन्होंने आह्वान किया कि राज्य में एक जिला-एक मेला कार्यक्रम प्रारंभ किया जाए। जिसमें जिले के एक प्रमुख मेले को विशेष सहयोग दिया जाएगा जिससे उस मेले के सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व को बल मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से पिथौरागढ़ जनपद सहित इस क्षेत्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करने हेतु पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। आज पिथौरगढ़ में साढ़े सात सौ करोड़ रूपए से अधिक की लागत से मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। 34 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से स्पोर्ट्स कॉलेज में आधुनिक मल्टीपर्पज हॉल का निर्माण कार्य भी कराया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा विकासखंड बेरीनाग में शीघ्र ही लगभग 28 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य स्टेडियम का निर्माण कार्य भी प्रारंभ होने जा रहा है। पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में लगभग 21 करोड़ रुपये की लागत से 50-बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक का भी निर्माण करा रहे हैं। जिले में 25 करोड़ रुपए की लागत से अस्कोट, गंगोलीहाट और धारचूला में नए बस स्टेशनों के निर्माण के साथ ही, पिथौरागढ़ में रोडवेज वर्कशॉप का निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 327 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विभिन्न सड़कों का निर्माण कार्य भी गतिमान है। पिथौरागढ़ में कनेक्टिवी को बढ़ावा देने के लिए नैनी सैनी एयरपोर्ट के विस्तारीकरण का कार्य तेज गति से आगे चल रहा है। जिसके लिए 450 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी गतिमान है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, रोजगार एवं स्वरोजगार के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ा रही है। प्रदेश में आज रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। अब प्रदेश में सरकारी भर्तियां पारदर्शी तरीके से हो रहीं हैं। जो प्रदेश के युवा प्रतिभा और परिश्रम के आधार पर सरकारी नौकरियां प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने इससे पहले राष्ट्रीय एकता पद यात्रा में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर विधायक हरीश धामी, विधायक बिशन सिंह चुफाल, भाजपा जिला अध्यक्ष गिरीश बिष्ट एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

पहाड़ी बोली और टोपी पहन पीएम मोदी ने जनता से किया सीधा संवाद, उत्तराखंड रजतोत्सव कार्यक्रम में पहुंचे पीएम

सिर पर पहाड़ी टोपी और भाषण में जगह-जगह गढ़वाली कुमाऊनी बोली। उत्तराखंड के रजत जयंती के मुख्य कार्यक्रम में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर अंदाज पहाड़ीपन से घुला-मिला दिखा। उन्होंने गढ़वाली कुमाऊनी के कई-कई वाक्य बोले। वो भी कई बार। अक्सर प्रधानमंत्री उत्तराखंड के कार्यक्रमों में पहाड़ी बोली-भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं, मगर आज के भाषण में उन्होंने जितनी गढ़वाली कुमाऊनी बोली, उतनी कभी नहीं बोली थी। ये ही वजह रही, कि उत्तराखंड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस बार और भी गहरा कनेक्ट महसूस किया।

प्रधानमंत्री ने अपने चिर-परिचित अंदाज में भाषण की शुरूआत की और कहा-देवभूमि उत्तराखंड का मेरा भै बंधु, दीदी, भुलियों, दाना सयानो, आप सबू तई म्यारू नमस्कार। पैलाग, सैंवा सौंली। अपने भाषण के बीच में प्रधानमंत्री ने जब फिर से गढ़वाली में बोलना शुरू किया, तो इसने लोगों को और रोमांचित कर दिया। प्रधानमंत्री बोले-पैली पहाडू कू चढ़ाई, विकास की बाट कैल रोक दी छै। अब वखि बटि नई बाट खुलण लग ली।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण मे पहाड़ के लोक पर्वों, लोक परंपराओं और महत्वपूर्ण आयोजनों को भी शामिल किया। इस क्रम में उन्होंने हरेला, फुलदेई, भिटोली, नंदादेवी, जौलजीबी, देवीधुरा मेले से लेकर दयारा बुग्याल के बटर फेस्टिवल तक का जिक्र किया।

उत्तराखंड रजतोत्सव वर्षः देशभर के संतों ने धामी सरकार के विकास कार्यो व सांस्कृतिक संरक्षण की सराहना की

उत्तराखंड की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आज मुख्यमंत्री आवास आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक सौहार्द का केंद्र बन गया, जब देशभर के प्रमुख संतों एवं धर्माचार्यों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर राज्य की प्रगति, सांस्कृतिक संरक्षण और अध्यात्मिक समृद्धि के प्रति उनके प्रयासों की सराहना की।

संत समाज ने प्रदेश के लिए सकारात्मक बदलाव, विरासत संरक्षण और धार्मिक-सांस्कृतिक मानकों को सुदृढ़ करने वाले निर्णयों की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री को आशीर्वाद प्रदान किया और उन्हें “देवभूमि का धर्म-संरक्षक” बताया। संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विकास की नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है।


मुख्यमंत्री आवास में आध्यात्मिक संगम में आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी महाराज, जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष स्वामी रविंद्रपुरी महाराज, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण, प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी, चिंतक और लेखक डॉ. कुमार विश्वास सहित अनेकों प्रतिष्ठित संत-महात्मा एवं धर्माचार्य भेंट करने वाले प्रमुख संत-महात्माओं में शामिल रहे।

सभी संतों ने मुख्यमंत्री को रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए राज्य के सांस्कृतिक सम्मान और अध्यात्मिक धरोहर संरक्षण को लेकर उनके समर्पण की सराहना की।

संत समाज ने की सीएम धामी की प्रशंसा
संतों ने कहा कि “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने वाला नेतृत्व प्रदान किया है। उनके प्रयासों से देवभूमि की मूल आत्मा और सनातन विरासत सुरक्षित और सुदृढ़ हुई है।”

उन्होंने राज्य सरकार की उन नीतियों की भी सराहना की जिनसे सामाजिक-सांस्कृतिक अनुशासन, धार्मिक स्थलों का संरक्षण, आध्यात्मिक पर्यटन विकास तथा परंपरा-संरक्षण को नया आयाम मिला है।

कुम्भ-2027 को भव्य, दिव्य और विश्व-स्तरीय आयोजन के रूप में स्थापित करने के लिए संत समाज तथा सरकार मिलकर कार्य करेंगे
संत समाज ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि हरिद्वार कुम्भ-2027 को भव्य, दिव्य और विश्व-स्तरीय आयोजन के रूप में स्थापित करने के लिए वे सरकार के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर कार्य करेंगे। संतों ने कहा कि कुम्भ केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, भारतीय संस्कृति और वैश्विक आध्यात्मिक चेतना का महासंगम है, जिसे ऐतिहासिक स्वरूप देना हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।


संतों ने यह भी कहा कि कुम्भ की तैयारी के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। यातायात, अधोसंरचना, घाटों का सौंदर्यीकरण, सुरक्षा व्यवस्थाएँ, स्वच्छता और तीर्थ विकास जैसे क्षेत्रों में जो योजनाएँ बन रही हैं, वे आने वाले वर्षों में हरिद्वार को विश्व आध्यात्मिक धरोहर केंद्र के रूप में और अधिक प्रतिष्ठित करेंगी।

उन्होंने मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि
“देवभूमि उत्तराखंड को कुम्भ-2027 में एक नए आयाम तक पहुँचाने की जो दूरदृष्टि मुख्यमंत्री ने प्रस्तुत की है, वह प्रेरणादायक है। सरकार द्वारा किए जा रहे त्वरित निर्णय, पारदर्शिता और धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान से हमें पूर्ण विश्वास है कि यह कुम्भ इतिहास में अपना स्वर्णिम अध्याय लिखेगा।”

संत समाज ने आश्वस्त किया कि
“हम सभी संत-महात्मा, अखाड़े और धर्म संस्थान एक परिवार की तरह एकजुट होकर कुम्भ की सफलता के लिए निरंतर योगदान देंगे। कुम्भ के आयोजन में चाहे आध्यात्मिक मार्गदर्शन हो या जन-आस्था का प्रबंधन, हर मोर्चे पर हमारा सहयोग निरंतर रहेगा।”

सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विकास का केंद्र बन रहा उत्तराखंड
संत समाज ने यह भी कहा कि उत्तराखंड आज तेजी से वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र और शांति-स्थल के रूप में उभर रहा है, जिसका श्रेय राज्य सरकार की सांस्कृतिक दृष्टि और दूरदर्शी नेतृत्व को है।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी संतों और आध्यात्मिक गुरुओं ने प्रदेश वासियों के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं और उत्तराखंड की रजत जयंती को आध्यात्मिक रूप से ऐतिहासिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री को आशीर्वाद दिया।

उत्तराखंड के लोकपर्व हमारा गर्व, हमारी आत्माः धामी

मुख्यमंत्री आवास में आज इगास पर्व बड़े हर्ष उल्लास, पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव के साथ भव्य रूप से मनाया गया। देवभूमि की लोक परंपराओं को समर्पित इस विशेष अवसर पर राजयपाल ले. ज. गुरमीत सिंह (से नि) की उपस्थिति में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इगास हमारी सांस्कृतिक अस्मिता, लोक आस्था और सामूहिक भावना का प्रतीक है।

कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोक कलाकारों, गायकों और विभिन्न क्षेत्रों से आए सांस्कृतिक दलों ने पारंपरिक लोकगीत व लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। हारुल, झूमेंलो, चांचरी, थड़िया, जागर और अन्य पारंपरिक नृत्यद गायन ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया और पूरा परिसर लोकधुनों की गूंज से सराबोर हो उठा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं भी कलाकारों के बीच उपस्थित होकर उनकी प्रस्तुति का आनंद लिया एवं उन्हें प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी लोक संस्कृति और परंपराएँ हमारी सबसे बड़ी धरोहर हैं, उन्हें बचाना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हमारा सामूहिक दायित्व है।

कार्यक्रम में शामिल सभी आमंत्रित अतिथियों, वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, प्रवासी उत्तराखंडियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और प्रदेश के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों को मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से शुभकामनाएँ दीं और उनसे भेंट की।

इगास उत्सव के पारंपरिक क्रम में मुख्यमंत्री ने लोक मान्यताओं के अनुसार परंपरागत रूप से ‘‘भेलों’’ भी खेला, जिससे वहां मौजूद बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया। पूरा वातावरण पर्वतीय संस्कृति की खुशियों, लोकगीतों और लोकनृत्य से भर गया।

कार्यक्रम में सभी कलाकारों व प्रतिभागियों को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया और कहा कि उत्तराखंड सरकार लोक कलाकारों के उत्थान, लोक परंपराओं को बढ़ावा देने और कल्चर बेस्ड रोजगार को प्रोत्साहित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

इगास, बूढ़ी दीवाली और देव दीपावली के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराएँ, वेश-भूषा और व्यंजन हमारी अनमोल धरोहर हैं और इन्हें संरक्षित करना हम सभी का दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इगास लोक पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी सामूहिकता, प्रकृति के प्रति आभार और सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक है। उन्होंने लोकगीत, ढोल-दमाऊ की थाप और पारंपरिक मांडणे का उल्लेख करते हुए कहा कि जब घर-आंगन में लोक संस्कृति प्रफुल्लित होती है, तो ऐसा लगता है जैसे स्वयं देवभूमि मुस्कुरा रही हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्रवासी उत्तराखंडियों का सक्रिय योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने खुशी व्यक्त की कि प्रवासी उत्तराखंडी अब इगास पर अपने पैतृक गांवों का रुख कर रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने विश्वभर में बसे उत्तराखंडियों से अपील की कि वे भी अपने गांवों और परिवारों के साथ लोक पर्व मनाएं और अपनी जड़ों से जुड़े रहें।

मुख्यमंत्री ने सभी से आह्वान किया कि हम सब मिलकर न सिर्फ अपनी संस्कृति को समृद्ध करें, बल्कि “विकल्प रहित संकल्प” के साथ उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने में योगदान दें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए इस संकल्प-वाक्य को याद करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “तीसरा दशक उत्तराखंड का होगा” यह केवल घोषणा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की इस पवित्र भूमि के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प है। प्रधानमंत्री ने जो विश्वास उत्तराखंड पर जताया है, उसे साकार करना हम सभी का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दशक उत्तराखंड के समग्र विकास, रोजगार-सृजन, पर्यटन और आध्यात्मिक-पर्यटन विस्तार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा युवा शक्ति के सशक्तिकरण का दशक होगा। हम सभी को मिलकर ‘विकल्प रहित संकल्प’ की भावना के साथ कार्य करते हुए इस विज़न को धरातल पर उतारना है, ताकि उत्तराखंड विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश-दुनिया में अपने स्थान को और अधिक मजबूत कर सके।

मुख्यमंत्री ने अंत में कहा “इस इगास पर संकल्प लें कि न केवल अपने घरों में दीप जलाएं, बल्कि अपने मन में भी अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का दीप प्रज्ज्वलित रखें।”

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोशियारी, रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, मुख्य सचिव एवं अन्य अधिकारी सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि व विभिन्न क्षेत्रों के लोग उपस्थित रहे।