सचिवालय में हुई कौशल विकास एवं रोजगार से संबंधित योजनाओं की समीक्षा बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में कौशल विकास एवं रोजगार से संबंधित योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कौशल विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, रोजगार एवं प्लेसमेंट की स्थिति तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योगों की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाए। साथ ही युवाओं की रुचि एवं स्थानीय रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने तथा प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने को कहा गया।

मुख्य सचिव ने कहा कि कौशल विकास से संबंधित सभी विभाग एक प्लेटफॉर्म पर काम करें, ताकि युवाओं को सुविधा मिल सके। उन्होंने प्रदेश को स्किल हब बनाने के लिए सचिव, कौशल विकास को सेतु आयोग की राय लेते हुए तथा सभी स्टैक होल्डर को शामिल करते हुए एक डैशबोर्ड तैयार किए जाने के निर्देश दिये।

सचिव कौशल विकास एवं सेवायोजन सी. रविशंकर ने बताया कि समग्र कौशल विकास के लिए स्कूल, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा के सहयोग से उद्योगों के मानकों के अनुसार आईटीआई को अपग्रेड किया जाना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 119 आईटीआई क्रियाशील है। नब्बे आईटीआई को पोर्टल पर मैप किया जा चुका है। टाटा टेक्नोलॉजीज, आईटीआई में शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग कोर्स के लिए शुरू कर दिया है।

सचिव ने बताया कि युवाओं को विदेश में नौकरी पाने के लिए स्कील इण्डिया इंटरनेशनल सेंटर में वैश्विक मानकों के अनुसार प्रशिक्षण, भाषा ज्ञान और अन्य जरूरी दक्षता प्रदान करने के लिए तीन एजेंसियों से बात की गई है। उन्होंने बताया कि रोजगार प्रयाग पोर्टल पर निजी नियोक्ताओं का भी पंजीकरण किया जा रहा है। अब तक कुल 162 नियोक्ताओं को पोर्टल पर जोड़ा जा चुका है, युवाओं को रोजगार दिया जा

बैठक में सेवायोजन विभाग के उच्चाधिकारी भी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में यात्रियों की सुविधा और ट्रैफिक प्रबंधन मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप चारधाम यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार आधारभूत सुविधाओं का विस्तार कर रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को आवास विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में कर्णप्रयाग एवं सिमली पार्किंग परियोजनाओं की विस्तृत वित्तीय समिति (डीएफसी) की बैठक आयोजित हुई। बैठक में दोनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं के वित्तीय, तकनीकी और निर्माण संबंधी पहलुओं की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी औपचारिकताएं पूरी कर निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने के निर्देश दिए गए। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से चारधाम यात्रा के दौरान बढ़ते यातायात दबाव को नियंत्रित करने के साथ स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

चारधाम यात्रा के लिए तैयार होगा मजबूत पार्किंग नेटवर्क
आवास विभाग के सभागार में आयोजित बैठक में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण चमोली के अधिकारियों ने परियोजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपर जिलाधिकारी एवं सचिव जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, अधिशासी अभियंता सहित अन्य अधिकारी भी जुड़े। बैठक में परियोजनाओं के उद्देश्य, स्थल चयन, यातायात सर्वेक्षण, पार्किंग क्षमता, निर्माण लागत, डिजाइन और तकनीकी मानकों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि दोनों परियोजनाएं भविष्य में चारधाम यात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

कर्णप्रयाग में बाजार को मिलेगी बड़ी राहत
बैठक में बताया गया कि कर्णप्रयाग पार्किंग परियोजना की अनुमानित लागत 373.75 लाख रुपये निर्धारित की गई है। परियोजना के पूरा होने पर यहां 22 चारपहिया वाहनों की पार्किंग सुविधा उपलब्ध होगी। पार्किंग के प्रथम तल पर एक आधुनिक कमर्शियल हॉल भी प्रस्तावित किया गया है, जिससे स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा तथा परियोजना के संचालन से राजस्व सृजन भी होगा। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में कर्णप्रयाग मुख्य बाजार में सड़क किनारे अनियोजित पार्किंग के कारण अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। विशेषकर चारधाम यात्रा के दौरान वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ जाता है। नई पार्किंग सुविधा बनने से बाजार क्षेत्र में यातायात अधिक व्यवस्थित होगा और यात्रियों को भी सुविधाजनक पार्किंग उपलब्ध हो सकेगी।

सिमली बनेगा ट्रैफिक प्रबंधन का नया केंद्र
बैठक में सिमली पार्किंग परियोजना की भी विस्तार से समीक्षा की गई। इस परियोजना की अनुमानित लागत 398.85 लाख रुपये है तथा इसमें 30 चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग क्षमता विकसित की जाएगी। सिमली राष्ट्रीय राजमार्ग-07 पर स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण जंक्शन है, जहां से चारधाम यात्रा मार्ग, श्री नंदा देवी राजजात यात्रा तथा गैरसैंण की ओर जाने वाला मार्ग जुड़ता है। यात्रा सीजन और विशेष अवसरों पर यहां भारी संख्या में वाहनों का आवागमन होता है, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। नई पार्किंग सुविधा विकसित होने के बाद सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग में कमी आएगी तथा यातायात संचालन अधिक सुचारु और सुरक्षित हो सकेगा।

समयबद्ध निर्माण पर रहेगा विशेष फोकस
बैठक के दौरान सचिव आवास ने परियोजनाओं के वित्तीय एवं तकनीकी पहलुओं पर आवश्यक सुझाव दिए और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी प्रशासनिक एवं तकनीकी औपचारिकताओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता और समयबद्धता दोनों सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि यात्रियों और स्थानीय लोगों को जल्द से जल्द बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इन पार्किंग परियोजनाओं को राज्य सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत चारधाम यात्रा मार्गों पर ट्रैफिक प्रबंधन, यात्री सुविधाओं और शहरी आधारभूत ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार चारधाम यात्रा मार्गों पर आधुनिक एवं टिकाऊ आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। कर्णप्रयाग और सिमली पार्किंग परियोजनाएं केवल पार्किंग निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये बेहतर यातायात प्रबंधन, यात्रियों की सुविधा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परियोजनाओं से जुड़ी वित्तीय, तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाएं समयबद्ध ढंग से पूरी करें। गुणवत्ता के साथ शीघ्र निर्माण सुनिश्चित करना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

पुलिस विभाग मादक पदार्थों की सप्लाई चैन तोड़े जाने के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाएंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य स्तरीय नेशनल कोआर्डिनेशन सेंटर फॉर ड्रग लॉ एनफोर्समेंट की 12वीं बैठक संपन्न हुयी। बैठक के दौरान उन्होंने जनपद स्तरीय एनकॉर्ड बैठकों का निर्धारित समय सीमा पर नियमित रूप से आयोजित किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने मादक पदार्थों से सम्बन्धित सभी मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि व्यवसायिक मात्रा में पकड़े गए मादक पदार्थों के मामलों को गंभीरता से लेते हुए लगातार फॉलोअप किया जाए, ताकि दोषियों पर यथोचित कार्रवाई की जा सके। उन्होंने पुलिस विभाग को मादक पदार्थों की सप्लाई चौन तोड़े जाने के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाये जाने की बात कही। उन्होंने नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध व्यापार को रोके जाने को लेकर जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों से बात कर जनपदों की स्थिति की जानकारी भी ली।

मुख्य सचिव ने ड्रग डिटेक्शन किट्स के लिए पैरामीटर्स बनाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रदेश में डी एडिक्शन सेंटर्स की स्थिति की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग एवं समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत ऐसे डी एडिक्शन सेंटर्स जो किसी कारण से ऑपरेशनल नहीं हैं, को उनकी समस्याओं का निस्तारण करते हुए सक्रिय किया जाए। उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों में डी एडिक्शन सेंटर्स के लिए बेड डेडिकेट किए जाएँ
साथ ही, सभी मेडिकल कॉलेज और उप जिला अस्पतालों में भी डेडिकेटेड बेड्स की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी डी एडिक्शन सेंटर खोले जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहाँ विकसित करने हैं करें फंडिंग की कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने ज़िलाधिकारियों को प्राइवेट डी एडिक्शन सेंटर्स का निरीक्षण कर मानकों को पूरा करने वाले प्राइवेट डी एडिक्शन सेंटर का रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेशन अनिवार्य रूप से कराए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने आमजन विशेषकर स्कूली बच्चों में ड्रग्स के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग क्लब बनाने और शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में गुटखा-तम्बाकू आदि की बिक्री पर रोक को प्रभावी रूप से लागू किए जाने की बात कही। उन्होंने प्रदेश में मादक पदार्थाे के उपयोग पर एक सर्वे कराए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि मादक पदार्थों के जाल को जड़ से उखाड़ा जा सके।

इस अवसर पर डीजी इंटेलीजेंस अभिनव कुमार, सचिव शैलेष बगौली, आईजी डॉ. नीलेश आनन्द भारणे, अपर सचिव गृह तृप्ति भट्ट, एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह सहित जनपदों से जिलाधिकारी एवं एसएसपी उपस्थित थे।

रेल मंत्री ने बनबसा स्टेशन पर अछनेरा-टनकपुर एक्सप्रेस रूकने की दी स्वीकृति

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री के अनुरोध पर बनबसा रेलवे स्टेशन पर गाड़ी संख्या 15093/15094 अछनेरा-टनकपुर एक्सप्रेस के ठहराव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस संबंध में रेल मंत्री ने मुख्यमंत्री को आधिकारिक पत्र भेजकर जानकारी दी है।

रेल मंत्री ने जनसुविधा के दृष्टिगत बनबसा रेलवे के संबंध में मुख्यमंत्री के सिफारिश पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए रेलवे ने बनबसा स्टेशन पर अछनेरा-टनकपुर एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को मंजूरी दे दी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे सीमांत क्षेत्र के लोगों, व्यापारियों, विद्यार्थियों, सैनिक परिवारों तथा श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी।

बनबसा रेलवे स्टेशन पर इस ट्रेन के ठहराव से कुमाऊँ क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत होगी तथा स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा होगी।

बारिश के कारण उत्पन्न स्थिति की समीक्षा कर सीएस ने दिए बंद सड़कों को शीघ्र खोलने के निर्देश

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा तथा बारिश के कारण उत्पन्न स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनजीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ 24×7 अलर्ट मोड पर कार्य करें।

मुख्य सचिव ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन से राज्यभर में वर्षा की स्थिति, नदियों के जलस्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों, राहत एवं बचाव कार्यों, विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति, संचार व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न जिलों में हुई वर्षा, संभावित मौसम पूर्वानुमान तथा आगामी दिनों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए और किसी भी आपात परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र को सभी जनपदों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान उन्होंने विभिन्न जिलाधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता कर उनके जनपदों की स्थिति की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र खोला जाए तथा भूस्खलन संभावित एवं संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त मशीनरी पहले से तैनात रखी जाए। जलभराव वाले क्षेत्रों में जलनिकासी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ-साथ पंप एवं अन्य आवश्यक उपकरण भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध रहें।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार मानसून की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। सभी जिलाधिकारी नियमित रूप से फील्ड भ्रमण करें, संवेदनशील क्षेत्रों का स्वयं निरीक्षण करें तथा राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं की निरंतर मॉनिटरिंग करें। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा की व्यवस्थाओं की भी विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने चारधाम यात्रा मार्गों की स्थिति, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, यात्रियों की संख्या, विभिन्न धामों में उपलब्ध सुविधाओं तथा यातायात व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा राज्य की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों से जुड़ी हुई है, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा, सुगम आवागमन, चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल, स्वच्छता तथा यातायात प्रबंधन में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिए कि मौसम की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा का संचालन किया जाए। यदि अत्यधिक वर्षा अथवा मार्ग अवरुद्ध होने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं तो यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा परिस्थितियां सामान्य होने के बाद ही उन्हें आगे भेजा जाए। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय के साथ पूरी सतर्कता एवं संवेदनशीलता से कार्य करें, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में एससीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, ड्यूटी आफिसर कलम सिंह चौहान, श्री भवानी राम आर्या आदि उपस्थित रहे।

पानी छोड़ने पर सीमावर्ती राज्यों को भी भेजें अलर्ट
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने नदियों के जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लगातार जागरूक किया जाए तथा खतरे की आशंका होने पर उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि डैम एवं बैराजों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पूर्व सूचना देकर सतर्क किया जाए। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर सीमावर्ती राज्यों को भी समय रहते अलर्ट किया जाए, ताकि किसी भी संभावित जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।

संचार, बिजली, पेयजल सेवाओं की त्वरित बहाली सुनिश्चित हो
देहरादून। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि यदि किसी भी क्षेत्र में भारी वर्षा अथवा भूस्खलन के कारण संचार व्यवस्था बाधित होती है तो वैकल्पिक संचार प्रणाली तत्काल सक्रिय की जाए। उन्होंने सभी सैटेलाइट फोन को हर समय क्रियाशील स्थिति में रखने तथा प्रतिदिन उनके माध्यम से एसईओसी एवं डीईओसी के बीच संपर्क सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली, पेयजल एवं संचार सेवाओं की बहाली सर्वाेच्च प्राथमिकता पर की जाए। यदि कहीं भी ये सेवाएं प्रभावित होती हैं तो अतिरिक्त टीमें तत्काल भेजी जाएं और वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू कर आमजन को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। किसी भी परिस्थिति में नागरिकों को लंबे समय तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।

अंतिम छोर तक समय पर पहुंचे मौसम संबंधी अलर्ट
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने निर्देश दिए कि मौसम संबंधी सभी चेतावनियां और अलर्ट अंतिम छोर पर रहने वाले व्यक्ति तक भी समय पर पहुंचना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि समय पर सूचना ही लोगों को सुरक्षित निर्णय लेने का अवसर देती है, इसलिए सूचना प्रसारण में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने राज्य स्तर से लेकर जनपद, ब्लॉक, तहसील और ग्राम स्तर तक सूचना प्रसारण तंत्र को और अधिक मजबूत एवं सक्रिय बनाने के निर्देश दिए, ताकि प्रत्येक नागरिक तक समयबद्ध एवं विश्वसनीय चेतावनी पहुंच सके और संभावित आपदाओं के दौरान जनहानि को न्यूनतम किया जा सके।

उत्तराखण्ड में एनसीसी के विस्तार एवं आधुनिक आधारभूत संरचना के विकास पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेन्द्र वत्स, YSM, SM, VSM ने नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड निवास में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय कैडेट कोर के विस्तार, सीमांत एवं दुर्गम क्षेत्रों तक एनसीसी की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने तथा संगठन की आधुनिक एवं सुदृढ़ आधारभूत संरचना के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

बैठक के दौरान महानिदेशक एनसीसी ने राज्य के अधिकाधिक युवाओं को एनसीसी से जोड़ने के उद्देश्य से सीमावर्ती एवं दूरस्थ क्षेत्रों में नई एनसीसी इकाइयों के गठन एवं विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्य में आधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना के विकास, प्रशिक्षण सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा प्रस्तावित एनसीसी अकादमी की स्थापना सहित विभिन्न भावी योजनाओं की रूपरेखा से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता तथा सेवा-भाव को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं में राष्ट्रीय चरित्र, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने वाला देश का एक प्रतिष्ठित संगठन है, जिसकी राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री ने राज्य में एनसीसी के विस्तार तथा प्रस्तावित आधारभूत संरचना विकास से संबंधित सभी पहलों के लिए राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से राज्य के युवाओं को व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व प्रशिक्षण एवं राष्ट्र सेवा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।

सचिव आवास की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, निर्माण एजेंसियों को गुणवत्ता और समय से कार्य पूरा करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत राज्य में निर्माणाधीन आवासीय परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा के लिए बुधवार को सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने की। इसमें विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं, विकासकों, आवास विभाग तथा संबंधित अधिकारियों ने योजनाओं की वर्तमान स्थिति, निर्माण की प्रगति और लंबित कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत संचालित सभी परियोजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। सचिव आवास ने कहा कि यह योजना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने का माध्यम है। इसलिए प्रत्येक परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने सभी कार्यदायी संस्थाओं और विकासकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 30 सितंबर 2026 तक सभी लंबित आवासीय परियोजनाओं का निर्माण हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी, लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी एजेंसियां निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य करें और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा तकनीकी मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें।

6,464 आवासों का निर्माण पूरा

समीक्षा बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत राज्य में अब तक 6,464 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इन आवासों के कब्जा हस्तांतरण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि पात्र लाभार्थियों को जल्द से जल्द अपने पक्के घरों की सौगात मिल सके। विभाग का लक्ष्य है कि सभी पूर्ण हो चुके आवासों का आवंटन और हस्तांतरण निर्धारित समय के भीतर संपन्न कराया जाए।

नियमित होगी परियोजनाओं की मॉनिटरिंग

बैठक में लंबित परियोजनाओं की प्रगति पर विशेष चर्चा की गई। सचिव आवास ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं में कार्य अपेक्षित गति से नहीं चल रहा है, वहां निर्माण में तेजी लाई जाए और नियमित रूप से स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परियोजना की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी तथा जहां भी किसी प्रकार की बाधा सामने आएगी, उसका तत्काल समाधान किया जाएगा ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि लाभार्थियों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निर्माण की गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाए। सरकार का उद्देश्य केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, ष्हमारा लक्ष्य केवल निर्धारित संख्या में आवासों का निर्माण करना नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र परिवार को समय पर गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। सभी कार्यदायी संस्थाओं एवं विकासकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि 30 सितंबर तक लंबित परियोजनाओं को हर हाल में पूरा करें। विभाग प्रत्येक परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग करेगा और किसी भी प्रकार की देरी या गुणवत्ता में कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि पात्र लाभार्थियों को शीघ्र उनके सपनों का अपना घर मिले और केंद्र एवं राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।ष्

बैठक में रहे उपस्थित

बैठक में संयुक्त मुख्य प्रशासक दिनेश प्रताप सिंह, उप सचिव आवास रजनीश जैन, अधिशासी अभियंता विनोद कुमार चौहान, सहायक अभियंता आकाश चौहान, आवास विशेषज्ञ रोहित रंजन, विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं एवं विकासकों के प्रतिनिधि तथा एचआरडीए और डीएलडीए के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में सभी अधिकारियों ने निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने और योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए समन्वित रूप से कार्य करने का भरोसा दिलाया।

नजरियाः उत्तराखण्ड ने वैश्विक स्तर पर संस्कृत के प्रसार को दिया नया आयाम

सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार ने नई दिल्ली में इंडोनेशिया गणराज्य के दूतावास में कार्यवाहक राजदूत युधो सासोंगको से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान संस्कृत तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के वैश्विक प्रसार हेतु उत्तराखण्ड और इंडोनेशिया के मध्य शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करने पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संस्कृत को अपनी द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान करने, संस्कृत के संवर्धन एवं प्रचार के लिए किए जा रहे अभिनव प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं देववाणी संस्कृत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में विश्व की सबसे प्राचीन एवं प्रभावशाली भाषा संस्कृत अब भारत की सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक शिक्षाविदों के बीच अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रतिष्ठा निरंतर बढ़ रही है। राज्य के प्रत्येक जनपद में एक-एक संस्कृत ग्राम की स्थापना की गई है। मात्र एक वर्ष की अल्प अवधि में इन संस्कृत ग्रामों ने, स्थानीय समुदायों में संस्कृत सीखने तथा भारत की दार्शनिक, सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत विरासत से पुनः जुड़ने में उल्लेखनीय पहल की है।

सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार ने बताया कि राज्य में संस्कृत आयोग के गठन की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। इस संबंध में देशभर से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, जिन्हें विश्व संस्कृत दिवस से पूर्व 10 अगस्त तक उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय को प्रेषित किये जाने की योजना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इंडोनेशिया के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों के साथ सहयोग स्थापित होने से संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परम्परा का व्यापक प्रसार होगा तथा दोनों देशों के युवा अपनी साझा सांस्कृतिक विरासत, नैतिक मूल्यों और प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को और अधिक गहराई से समझ सकेंगे।

उन्होंने बताया कि इंडोनेशियाई भाषा में संस्कृत मूल के अनेक शब्द आज भी प्रचलित हैं, जो दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों का सशक्त प्रमाण हैं। विगत माह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति श्री प्रबोवो सुबियांतो ने उल्लेख किया था कि इंडोनेशियाई भाषा का लगभग 50 प्रतिशत भाग संस्कृत से प्रभावित है। यह तथ्य भारत और इंडोनेशिया के बीच विद्यमान गहरे सांस्कृतिक संबंधों का सशक्त प्रतीक है।

सचिव दीपक कुमार ने प्रस्ताव रखा कि इंडोनेशिया गणराज्य के दूतावास के सहयोग से हरिद्वार स्थित उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय एवं उत्तराखण्ड संस्कृत संस्थानम, इंडोनेशिया के विश्वविद्यालयों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के साथ संस्कृत, भारतीय ज्ञान प्रणाली तथा सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन संपादित कर सकता है।

सीएस बर्द्धन ने की प्रदेश में वाह्य सहायतित परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने वाह्य सहायतित परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने इसके तहत् पूर्ण हो चुकी, गतिमान एवं भावी परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी ली एवं दिशा निर्देश दिए। उन्होंने वाह्य सहायतित परियोजनाओं के अंतर्गत प्रदेश में आधारभूत संरचनाओं के विकास पर फोकस किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं की क्लोजर रिपोर्ट फंडिंग एजेंसी, आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय भारत सरकार एवं भारत सरकार में अपने लाइन डिपार्टमेंट को अनिवार्य रूप से प्रेषित किया जाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि धीमी गति से चल रहे सभी प्रोजेक्ट्स की लगातार निगरानी करते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएँ। उन्होंने प्रोजेक्ट्स को समय से पूर्ण किए जाने हेतु मैनपावर और मशीन बढ़ाते हुए सभी आवश्यक कदम उठाये जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने ऊर्जा विभाग के अंतर्गत मसूरी एवं नैनीताल के लिए अंडरग्राउंड विद्युत लाइन परियोजना का प्रस्ताव तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने उत्तराखंड इंटीग्रेटेड हॉर्टिकल्चर प्रोजेक्ट में तेजी लाए जाने के लिए डेडिकेटेड पीएमयू स्थापित किए जाने की बात कही। कहा कि डेडिकेटेड पीएमओ और लगातार निगरानी करते हुए प्रोजेक्ट को समय से पूर्ण किया जाए।

मुख्य सचिव ने शिक्षा के क्षेत्र में विशेषकर तकनीकी शिक्षा में सिस्टम को मजबूत किए जाने की दिशा में कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा के में इंजीनियरिंग कॉलेज पॉलिटेक्निक और आईटीआई में आधारभूत संरचना विकास पर कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा इसके लिए ईएपी वित्तपोषित प्रोजेक्ट्स तैयार किए जाएं, साथ ही रिवर रेज्युविनेशन, पशुपालन, डेरी और फिशरीज के उन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट्स पर फोकस किया जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश कुमार झा, दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, रणजीत सिंह चौहान, विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव विनीत कुमार एवं हिमांशु खुराना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

अल्मोड़ा के राजस्व पुलिस एवं भूलेख सर्वेक्षण संस्थान का होगा आधुनिकीकरण

राजस्व परिषद देहरादून उत्तराखण्ड के सभागार में आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद रंजना राजगुरु की अध्यक्षता में राजस्व पुलिस एवं भूलेख सर्वेक्षण संस्थान, अल्मोड़ा के सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण के संबंध में बैठक आयोजित की गई। बैठक में उन्होंने संस्थान को भविष्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने तथा प्रशिक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।

आयुक्त एवं सचिव ने कहा कि राजस्व पुलिस एवं भूलेख सर्वेक्षण संस्थान, राजस्व विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों, विशेषकर नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक तथा राजस्व उप निरीक्षक (पटवारी/लेखपाल) के प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है। इसलिए यहां का प्रशिक्षण ढांचा ऐसा विकसित किया जाए जिससे प्रशिक्षु आधुनिक प्रशासनिक आवश्यकताओं, सुशासन, पारदर्शिता तथा भू-अभिलेखों के प्रभावी प्रबंधन में दक्ष बन सकें और आमजन को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

बैठक में संस्थान में आधुनिक भू-सर्वेक्षण तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण को प्राथमिकता देने, अनुभवी प्रशिक्षकों की समय-समय पर नियुक्ति सुनिश्चित करने तथा डीजीपीएस रोवर, ईटीएस सहित आधुनिक सर्वेक्षण उपकरणों एवं नवीन सॉफ्टवेयर का व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही उन्होंने डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (क्प्स्त्डच्) के अंतर्गत उपलब्ध बजट का शत-प्रतिशत एवं समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने, संस्थान में आधुनिक प्रशिक्षण लैब स्थापित करने तथा जीआईएस एवं ई-गवर्नेंस से संबंधित विभागीय सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए । प्रशिक्षण सामग्री अथवा अन्य आवश्यक संसाधनों की आवश्यकता होने पर तत्काल प्रस्ताव राजस्व परिषद को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।

बैठक में संस्थान के आवासीय एवं गैर-आवासीय भवनों, छात्रावास, प्रशिक्षण मैदान तथा पुस्तकालय की वर्तमान स्थिति की भी समीक्षा की गई। जर्जर भवनों की मरम्मत, आवश्यक निर्माण कार्यों एवं प्रशिक्षण मैदान के उन्नयन हेतु बजट आवंटन तथा शासन स्तर से शीघ्र स्वीकृति प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के सचिव एवं आयुक्त राजस्व ने निर्देश दिए ।इसके अतिरिक्त संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त करने आने वाले प्रशिक्षुओं के लिए छात्रावास एवं मेस की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने, स्वच्छ वातावरण तथा गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।