सीएम के प्रयासों से गैरसैंण की पेयजल आपूर्ति को मिलेगा सुदृढ़ आधार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने तथा आमजन को बेहतर पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत चमोली जनपद के गैरसैंण नगर एवं आसपास की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रामगंगा नदी पर बांध निर्माण की महत्वाकांक्षी परियोजना को महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के लिए कुल ₹122.6891 करोड़ की लागत पर प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए प्रथम किश्त के रूप में ₹2.454 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है।

यह परियोजना गैरसैंण नगर तथा उससे लगी आबादी की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ती आबादी और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन तथा पेयजल आपूर्ति के लिए आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का विकास राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। रामगंगा नदी पर प्रस्तावित बांध निर्माण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री घोषणा के अनुरूप परियोजना को मिली स्वीकृति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के अंतर्गत प्रस्तावित Construction of Dam across Ramganga River for drinking water supply of Gairsain town and adjoining population in District Chamoli परियोजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में धनराशि की व्यवस्था की गई है। शासन स्तर से जारी आदेश के अनुसार परियोजना की कुल लागत ₹12,268.91 लाख अर्थात ₹122.6891 करोड़ निर्धारित है। इसमें प्रथम चरण के लिए पूर्व में स्वीकृत ₹24.76 लाख की धनराशि भी सम्मिलित है।

परियोजना के लिए प्रथम किश्त के रूप में कुल स्वीकृत लागत के लगभग 2 प्रतिशत के बराबर ₹2.454 करोड़ की धनराशि राज्य आकस्मिकता निधि से अग्रिम आहरित कर उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गई है। यह धनराशि परियोजना के कार्यों को प्रारंभ करने के लिए टोकन धनराशि के रूप में प्रदान की गई है।

SASCI योजना के अंतर्गत होगी धनराशि की व्यवस्था

शासनादेश के अनुसार परियोजना के लिए स्वीकृत प्रारंभिक धनराशि का समायोजन भारत सरकार से Scheme for Special Assistance to States for Capital Investment for 2026-27 (SASCI) के अंतर्गत धनराशि प्राप्त होने पर राज्य सेक्टर से किया जाएगा। परियोजना के लिए आगे की धनराशि भी इसी योजना के अंतर्गत उपलब्ध कराई जाएगी।

इस व्यवस्था से परियोजना के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया गया है। स्वीकृत धनराशि का उपयोग वास्तविक आवश्यकता के अनुसार किस्तों में किया जाएगा तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान उपलब्ध कराई गई धनराशि का निर्धारित समयसीमा में उपयोग सुनिश्चित करना होगा।

गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीकी मानकों पर विशेष जोर

राज्य सरकार ने परियोजना के क्रियान्वयन में निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी उपयुक्तता और वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी है। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि बांध एवं बैराज के निर्माण से संबंधित संरचनात्मक डिजाइन और ड्राइंग किसी मान्यता प्राप्त संस्था से जांच एवं सत्यापन कराने के बाद ही अंतिम रूप से अपनाई जाए। सिंचाई विभाग को बांध एवं बैराज के संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पहले क्षेत्रीय मुख्य अभियंता द्वारा कार्यस्थल का निरीक्षण किया जाएगा। पेयजल योजना के लिए सबसे मितव्ययी एवं तकनीकी रूप से व्यवहार्य विकल्प का चयन करते हुए यह प्रमाणित करना होगा कि इससे अधिक किफायती विकल्प उपलब्ध नहीं है। आवश्यकतानुसार मृदा परीक्षण तथा भूगर्भीय उपयुक्तता से संबंधित आख्या प्राप्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

निर्माण में उपयोग होने वाली रेत, बजरी, ईंट, सीमेंट, स्टील पाइप तथा अन्य सामग्रियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित भारतीय मानकों के अनुरूप NABL से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण कराने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही निर्माण कार्य का तृतीय पक्ष गुणवत्ता परीक्षण भी अनिवार्य किया गया है।

पेयजल उपलब्धता और प्रभावित क्षेत्रों के हितों का रखा जाएगा ध्यान

परियोजना के निर्माण के दौरान जल स्रोत में डिजाइन अवधि तक आवश्यक न्यूनतम जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बांध निर्माण के कारण डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में प्रभावित होने वाले गांवों को निर्माण कार्य के दौरान तथा निर्माण पूर्ण होने के बाद भी निर्बाध रूप से जल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

निर्माण कार्यों की योजना इस प्रकार तैयार करने पर जोर दिया गया है कि परियोजना के विभिन्न घटकों का चरणबद्ध एवं जोनवार निर्माण हो और निर्मित संरचनाओं का समुचित उपयोग किया जा सके। यदि अपरिहार्य परिस्थितियों में बजट की अनुपलब्धता के कारण कार्य रोकना पड़े, तो उसे तकनीकी सुरक्षा एवं उपयोगिता की दृष्टि से उपयुक्त चरण पर ही रोका जाएगा।

मितव्ययता और वित्तीय अनुशासन के लिए कड़े प्रावधान

परियोजना की लागत के प्रभावी प्रबंधन के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। कार्यदायी संस्था को तकनीकी स्वीकृति देते समय केवल अपरिहार्य कार्यों एवं मदों को ही आगणन में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। निविदा स्वीकृत होने पर यदि स्वीकृत लागत की तुलना में बचत होती है, तो बची हुई धनराशि शासन को वापस करनी होगी। अपरिहार्य परिस्थितियों में अतिरिक्त कार्य कराने से पहले सक्षम अधिकारी का अनुमोदन प्राप्त करना भी अनिवार्य होगा।

निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, निर्धारित दरों, श्रम घटक और कार्य की गुणवत्ता के अनुरूप व्यय सुनिश्चित किया जाएगा। उपकरणों की खरीद में लागत प्रभावशीलता एवं ऊर्जा दक्षता को ध्यान में रखने तथा जहां तक संभव हो, निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदेश में निर्मित स्थानीय सामग्री के उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और राज्य को राजस्व प्राप्ति को बढ़ावा देने में सहायता मिल सकती है।

इसके अतिरिक्त, परियोजना में किसी प्रकार का अनधिकृत वित्तीय विचलन नहीं किया जा सकेगा। प्रत्येक मद पर उसी सीमा तक व्यय किया जाएगा, जितनी धनराशि स्वीकृत की गई है। प्राक्कलन का पुनरीक्षण स्वीकार न किए जाने का प्रावधान भी किया गया है। योजना के अंतर्गत खरीद एवं निर्माण संबंधी कार्यों में उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली, 2025 सहित लागू नियमों और शासनादेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।

पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होगा क्रियान्वयन

परियोजना के प्रभावी अनुश्रवण के लिए कार्यस्थल पर सूचना पट्ट लगाया जाएगा, जिसमें स्वीकृत कार्य का नाम, स्वीकृति वर्ष, स्वीकृत लागत, कार्य प्रारंभ एवं पूर्ण होने की तिथि, कार्यदायी संस्था और ठेकेदार का नाम अंकित किया जाएगा। कार्य प्रारंभ होने से पहले, निर्माण के दौरान तथा कार्य समाप्त होने के बाद की तस्वीरें और वीडियो भी सुरक्षित रखे जाएंगे।

कार्यदायी संस्था के साथ निर्धारित प्रारूप में समझौता ज्ञापन (MOU) हस्ताक्षरित करना, परियोजना को पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर अपलोड करना तथा वित्तीय एवं भौतिक प्रगति का विवरण शासन को उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। संबंधित अधिशासी अभियंता को परियोजना के औचित्य, आगणन की लागत एवं दरों की उपयुक्तता तथा कार्य की समयबद्धता और गुणवत्ता के लिए उत्तरदायी बनाया गया है।

स्वीकृत धनराशि का उपयोग 31 मार्च, 2027 तक सुनिश्चित करना होगा। परियोजना के क्रियान्वयन में बजट मैनुअल, वित्तीय हस्तपुस्तिका, अधिप्राप्ति नियमावली तथा मितव्ययता से संबंधित शासनादेशों के प्रावधानों का पालन भी अनिवार्य होगा।

पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप आधारभूत संरचनाओं के विकास, पेयजल सुविधाओं के विस्तार और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। गैरसैंण नगर एवं आसपास की आबादी के लिए रामगंगा नदी पर बांध निर्माण परियोजना को मिली प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

परियोजना के पूर्ण होने पर गैरसैंण और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे क्षेत्र की दीर्घकालिक पेयजल आवश्यकताओं की योजना बनाने तथा भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी आधार तैयार होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्वतीय क्षेत्रों में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विकास योजनाबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से हो, ताकि विकास का लाभ आमजन तक पहुंचे।

अनुपूरक बजट में विकास योजनाओं को गति देने के साथ जनकल्याण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यानः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि राज्य सरकार का संकल्प उत्तराखंड को वर्ष 2047 तक विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाना है। इसी दिशा में सरकार विकास कार्यों को गति देने के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट भी इसी सोच के साथ तैयार किया गया है, जिसमें प्रदेश की वर्तमान आवश्यकताओं के साथ भविष्य की जरूरतों का ध्यान रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के लगभग 26 वर्षों में उत्तराखंड ने विकास की लंबी यात्रा तय की है। यह उपलब्धि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष, प्रदेशवासियों की मेहनत और जनभागीदारी का परिणाम है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प में उत्तराखंड अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था और विकास से जुड़े आंकड़े उत्साहजनक हैं। वर्ष 2022 में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद लगभग 2.55 लाख करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर लगभग 3.82 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इस अवधि में प्रति व्यक्ति आय लगभग 1.95 लाख रुपये से बढ़कर 2.74 लाख रुपये तक पहुंची है। बहुआयामी गरीबी में कमी आई है। राज्य में स्टार्टअप की संख्या 702 से बढ़कर 1,978 तथा एमएसएमई इकाइयों की संख्या लगभग 60 हजार से बढ़कर एक लाख तक पहुंची है। सौर ऊर्जा क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड ने 79 अंकों के साथ संयुक्त रूप से देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। निवेश अनुकूलता और वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में भी उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। सरकार का प्रयास है कि राज्य की आर्थिक प्रगति का लाभ गांवों, किसानों, महिलाओं और युवाओं तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में 7,844.18 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें 4,164.32 करोड़ रुपये पूंजीगत तथा 3,679.86 करोड़ रुपये राजस्व मद में रखे गए हैं। छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार स्थानीय निकायों की राज्य के कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे ग्रामीण और शहरी निकायों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्नपूर्ति योजना के अंतर्गत किसानों से धान और गेहूं की खरीद के लिए 1,100 करोड़ रुपये, आधारभूत ढांचे के विकास के लिए विशेष सहायता योजना के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये तथा जल जीवन मिशन के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना के लिए 122 करोड़ रुपये तथा आगामी दिव्य कुंभ की व्यवस्थाओं और अवस्थापना सुविधाओं के लिए लगभग 290 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। नंदा राजजात यात्रा और हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर से जुड़े कार्यों का भी बजट में ध्यान रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए अटल आयुष्मान योजना में 100 करोड़ रुपये तथा कर्मचारियों की गोल्डन कार्ड योजना के लिए 125 करोड़ रुपये का प्रावधान है। पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज सहित चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए लगभग 160 करोड़ रुपये तथा विद्यालयी एवं उच्च शिक्षा में डिजिटल लर्निंग के लिए 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग देने के लिए मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना, खेल विश्वविद्यालय, महिला स्पोर्ट्स कॉलेज, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण तथा छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। महिला एवं बाल कल्याण, पोषण अभियान, भोजन माताओं के मानदेय, किसान पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी प्राथमिकता दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का ध्यान केवल नई योजनाएं शुरू करने पर नहीं, बल्कि उनका लाभ समय पर जनता तक पहुंचाने पर भी है। इसी उद्देश्य से बजट निर्माण में जनभागीदारी को बढ़ावा दिया गया है। पिछले पांच वर्षों में बजट पूर्व संवाद आयोजित कर किसानों, महिलाओं, युवाओं, उद्यमियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्त किए गए। सरकार ने राजस्व अधिशेष की स्थिति बनाए रखते हुए वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग पर जोर दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन और सुरक्षित अवस्थापना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जोशीमठ सहित भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों, आपदा रोधी निर्माण, सड़क और हेली सेवाओं की आधारभूत सुविधाओं पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार देहरादून में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया का परिसर भी स्थापित किया गया है, जिससे आईटी और स्टार्टअप क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी प्राथमिकता विकास के साथ विरासत और संस्कृति का संरक्षण भी है। वर्ष 2035 तक समृद्ध उत्तराखंड के निर्माण के लिए गुणवत्तापूर्ण निवेश, स्थानीय रोजगार, बेहतर सेवाओं और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की उपलब्धियां प्रदेशवासियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं। हमारा लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना है। विकसित उत्तराखंड का निर्माण जनभागीदारी, सुशासन और निरंतर विकास से ही संभव होगा।

उत्तराखंड विधानसभा सत्रः गैरसैंण में 7844 करोड़ रूपये का अनुपूरक बजट पेश

उत्तराखंड की धामी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधनों का प्रस्ताव किया है। गैरसैंण के भराड़ीसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के लिए तैयार 7,844.18 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट में सड़क, पेयजल, ऊर्जा, शहरी विकास और स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

अनुपूरक बजट में 4,164.32 करोड़ रुपये पूंजीगत मद तथा 3,679.86 करोड़ रुपये राजस्व मद में प्रस्तावित हैं। इस प्रकार अनुपूरक बजट की आधे से अधिक धनराशि पूंजीगत मद में रखी गई है। मूल बजट के 1,11,703.21 करोड़ रुपये में अनुपूरक बजट जुड़ने के बाद कुल बजट का आकार 1,19,547.39 करोड़ रुपये हो जाएगा।

अनुपूरक बजट का एक महत्वपूर्ण प्रावधान ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों से जुड़ा है। छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों को स्वीकार करते हुए स्थानीय निकायों के लिए राज्य के कर राजस्व का हिस्सा 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इससे ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों को विकास कार्यों तथा स्थानीय आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए विशेष सहायता योजना के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये का पूंजीगत प्रावधान किया गया है। ऊर्जा क्षेत्र में खुरपिया फार्म परियोजना सहित पारेषण और वितरण व्यवस्थाओं के लिए विभिन्न मदों में लगभग 270 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

शहरी विकास विभाग की एशियाई विकास बैंक से पोषित योजनाओं के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये तथा पुलिस विभाग के आवासीय एवं अनावासीय भवनों के निर्माण के लिए लगभग 55 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। न्यायिक अवसंरचना सुविधाओं के लिए लगभग 22 करोड़ रुपये और पंचायत भवनों के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़कों के अनुरक्षण सहित लोक निर्माण विभाग के लिए 31 करोड़ रुपये तथा ग्राम्य विकास विभाग के लिए 30 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

अनुपूरक बजट में इन प्रावधानों के माध्यम से प्रदेश में पहले से संचालित विकास योजनाओं को अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार करने का लक्ष्य रखा गया है।

अनुपूरक बजट के हाईलाइट्स-
– अन्नदाता को प्राथमिकता, धान-गेहूं खरीद के लिए 1,100 करोड़ रुपये का प्रावधान
– पर्वतीय कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सहकारिता और मत्स्य पालन को भी अनुपूरक बजट में मिली जगह
– आयुष्मान और गोल्डन कार्ड के लिए 225 करोड़, शिक्षा और युवा कल्याण की योजनाओं को भी बजट में जगह
– डिजिटल लर्निंग के लिए 200 करोड़, मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेजों के लिए लगभग 160 करोड़ रुपये का प्रावधान
– दिव्य कुंभ की तैयारियों के लिए लगभग 290 करोड़, नंदा राजजात यात्रा के लिए भी बजट में प्रावधान
– गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना को 122 करोड़, हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर के लिए 30 करोड़ रुपये

पहली बारः गैरसैंण में एक साल में दो विधानसभा सत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मंगलवार से भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में
विधानसभा सत्र शुरु हो गया है। इसके साथ ही राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में पहली बार एक साल के भीतर दो विधानसभा सत्र आयोजित होने का नया अध्याय जुड़ गया है। इससे पहले इसी साल मार्च में भराड़ीसैंण में बजट सत्र आयोजित किया गया था।

गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। इसके बाद से यहां समय-समय पर विधानसभा की कार्यवाही संचालित होती रही है। हालांकि, कुछ वर्षों में यहां कोई सत्र आयोजित नहीं हुआ, जबकि कुछ वर्षों में एक बार विधानसभा सत्र आयोजित किया गया।

वर्ष 2014 में गैरसैंण में पहली बार तीन दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किया गया। वर्ष 2015 और 2016 में दो-दो दिन तथा वर्ष 2017 में दो दिवसीय सत्र हुआ। वर्ष 2018 में विधानसभा की कार्यवाही छह दिन तक चली। वर्ष 2019 में यहां कोई सत्र आयोजित नहीं हुआ। वर्ष 2020 में पांच दिवसीय सत्र आयोजित किया गया, जबकि वर्ष 2021 में एक से छह मार्च तक भराड़ीसैंण में छह दिवसीय बजट सत्र चला।

वर्ष 2022 में गैरसैंण में विधानसभा सत्र नहीं हुआ। इसके बाद वर्ष 2023 में चार दिन और वर्ष 2024 में तीन दिवसीय सत्र आयोजित किया गया। वर्ष 2025 में यहां बजट सत्र और मानसून सत्र आयोजित किए गए। वहीं, वर्ष 2026 में मार्च के बजट सत्र के बाद अक्टूबर में दूसरी बार विधानसभा सत्र आयोजित किया जा रहा है।

गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का यह क्रम राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में इसकी भूमिका को महत्वपूर्ण बनाता है। पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, विकास की जरूरतों और स्थानीय जनभावनाओं से जुड़े मुद्दों को विधानसभा के माध्यम से उठाने के लिहाज से भी भराड़ीसैंण में सत्रों का आयोजन अहम है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में एक ही वर्ष में दो बार सत्र का आयोजन गैरसैंण को राज्य की विधायी गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं और हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। हमारी सरकार का प्रयास है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्रों के आयोजन के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, जनअपेक्षाओं और विकास से जुड़े विषयों को प्राथमिकता मिले। गैरसैंण की भूमिका को सशक्त बनाना और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास को गति देना हमारी प्रतिबद्धता है। राज्य सरकार जनभावनाओं के अनुरूप विकास और सुशासन के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है।
पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

विधानसभा सत्र के लिए गैरसैंण आगमन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भव्य स्वागत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विधानसभा सत्र में प्रतिभाग करने के लिए भराड़ीसैंण (गैरसैंण) आगमन के दौरान रुद्रप्रयाग एवं चमोली जनपद में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने भव्य स्वागत किया।

मुख्यमंत्री के रुद्रप्रयाग जनपद आगमन पर कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी एवं अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया।

चमोली जनपद आगमन पर विधायक अनिल नौटियाल, विधायक भूपाल राम टम्टा, जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार तथा मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

इस दौरान गौचर, कर्णप्रयाग, खेती सहित विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर मुख्यमंत्री का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री ने आदिबद्री में स्थानीय दुकानों पर पहुंचकर लोगों और बच्चों से मुलाकात की तथा उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से आत्मीय संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्थानों पर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए उनके स्नेह और आत्मीय स्वागत के लिए सभी का हार्दिक आभार व्यक्त किया।

प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत सफाई कर्मचारियों का मानदेय जल्द बढ़ाया जाएगाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नगर निगम, देहरादून में महर्षि बाल्मिकी प्रकटोत्सव के अवसर पर आयोजित शोभा यात्रा कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जल्द ही प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत सफाई कर्मचारियों के मानदेय को बढ़ाए जाने की बात कही, उन्होंने कहा इसके लिए यथाशीघ्र बैठक भी आयोजित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने अपने महाकाव्य रामायण से पूरे विश्व को भगवान श्रीराम के जीवन से परिचित कराया। महर्षि वाल्मीकि का जीवन हमें सिखाता है कि अच्छे विचारों और कर्मों से व्यक्ति, अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। उन्होंने कहा वाल्मीकि जी के जीवन से संदेश मिलता है कि व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके ज्ञान, कर्म और समाज के प्रति उसके योगदान से होती है। उन्होंने कहा वाल्मीकि जी ने ऐसे समाज के निर्माण की प्रेरणा दी, जहां भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा रामायण में सत्य, धर्म, त्याग, कर्तव्य जैसे मानवीय मूल्यों का संदेश है। रामायण हमें धर्म के मार्ग पर चलने के साथ प्रेम, समानता, बंधुत्व और मानवीय गरिमा का सम्मान करना भी सिखाती है। उन्होंने कहा रामायण ने हमें सिखाया है कि व्यक्ति की पहचान उसकी जाति या सामाजिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके विचारों, कर्मों और समर्पण से होती है। उन्होंने कहा सनातन संस्कृति ने हमेशा सम्मान करने और समाज में प्रेम, सद्भाव एवं समरसता बनाए रखने का संदेश दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश, सांस्कृतिक विरासत के साथ विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में अपनी जड़ों से जुड़ने, इतिहास को पहचानने और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का नया वातावरण बना है। उन्हीं के नेतृत्व में अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा श्रीराम मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि जी, निषादराज और माता शबरी को स्थान दिया जाना, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपरा के स्वरूप को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में गरीबों, वंचितों, अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़े वर्गों को निरंतर मुख्य धारा से जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं से करोड़ों परिवारों को बेहतर जीवन का अवसर मिला है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के अधिकारों की रक्षा और अत्याचारों के विरुद्ध कानूनी प्रावधानों को भी मजबूत किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वंचित, शोषित, पीड़ित समाज के उत्थान के लिए अनेकों कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री का स्पष्ट ध्येय है कि सबको समान अवसर और सम्मान देकर ही देश को विकसित और सशक्त बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार भी समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को कक्षा 1 से 12 तक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। वहीं इन विद्यार्थियों के लिए 15 निःशुल्क छात्रावास, 5 आवासीय विद्यालय और 3 आईटीआई भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था भी की गई है, ताकि युवा शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा सरकार ने अटल आवास योजना को पुनः प्रारंभ कर आवासहीन अनुसूचित वर्ग के परिवारों को घर बनाने के लिए ₹ 1 लाख 20 हजार की सहायता देने की व्यवस्था भी की है। सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अनुसूचित जाति के युवक या युवती से अंतरजातीय विवाह करने पर ₹ 50 हजार की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए भी ₹ 50 हजार की सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा हमारा स्पष्ट ध्येय है कि समाज का कोई भी वर्ग विकास की दौड़ में पीछे न रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड, ऋषि-मुनियों की तपस्या, देवस्थलों की आस्था और प्राचीन परंपराओं से समृद्ध देवभूमि है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत भी मजबूत हो, प्राचीन परंपराएं नई पीढ़ी तक पहुंचें और समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों से प्रेरणा लेकर हम विकसित उत्तराखंड के निर्माण को अवश्य साकार करेंगे।

156 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पुल-सुरंग मार्ग पर ट्रायल के आधार पर आवागमन शुरू, जल्द होगा लोकार्पणः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रुद्रप्रयाग में चारधाम सड़क परियोजना के अंतर्गत निर्मित पुल एवं सुरंग परियोजना का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना की जानकारी प्राप्त करते हुए कहा कि जल्द ही इसका विधिवत लोकार्पण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘एक पुस्तक दान करें, ज्ञान का वृक्ष लगाएं’ अभियान के अंतर्गत संगम लाइब्रेरी का भी अवलोकन किया।

चारधाम सड़क परियोजना के अंतर्गत रुद्रप्रयाग में लगभग 156 करोड़ रुपये की लागत से अलकनंदा नदी पर 200 मीटर लंबे पुल और 900.30 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया गया है। पुल, सुरंग और संपर्क मार्ग सहित इस परियोजना की कुल लंबाई लगभग 1.18 किलोमीटर है। यह महत्वपूर्ण परियोजना केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-107) को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-07) से सीधे जोड़ेगी।

पुल-सुरंग मार्ग पर सोमवार से ट्रायल के आधार पर आवागमन शुरू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही इस महत्वपूर्ण परियोजना का विधिवत लोकार्पण किया जाएगा। मार्ग पर नियमित यातायात शुरू होने के बाद केदारनाथ और बदरीनाथ धाम जाने वाले तीर्थयात्रियों को रुद्रप्रयाग बाजार से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे चारधाम यात्रा के दौरान नगर में यातायात का दबाव कम होगा तथा स्थानीय निवासियों और तीर्थयात्रियों को जाम की समस्या से राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा को अधिक सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। बेहतर सड़क संपर्क और आधुनिक अवसंरचना के विकास से श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलने के साथ ही स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में किए जा रहे ढलान सुरक्षा एवं स्थिरीकरण कार्यों की भी जानकारी ली। इन कार्यों का उद्देश्य भूस्खलन से होने वाले जोखिम को कम करना तथा यात्रा मार्ग को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाना है।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘एक पुस्तक दान करें, ज्ञान का वृक्ष लगाएं’ अभियान के अंतर्गत संगम लाइब्रेरी का अवलोकन करते हुए इस अभिनव पहल की सराहना की। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की पहल पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि विकसित करना, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध कराना तथा पुस्तकालयों को समृद्ध बनाना है।

अभियान को जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं आम नागरिकों का उत्साहजनक सहयोग मिल रहा है। अभियान के अंतर्गत संगम पुस्तकालय को 2,500 से अधिक पुस्तकें प्राप्त हो चुकी हैं। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं, सामान्य ज्ञान, साहित्य तथा विभिन्न विषयों की उपयोगी पुस्तकें शामिल हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस अभियान में 150 पुस्तकें उपलब्ध कराकर अपना योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तकें ज्ञान अर्जित करने और व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। पुस्तक दान जैसे अभियान विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हैं, जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अध्ययन सामग्री की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग से पुस्तकालयों को समृद्ध बनाने की यह पहल युवाओं में पढ़ने और सीखने की संस्कृति को प्रोत्साहित करेगी।

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि अभियान के माध्यम से प्राप्त पुस्तकों को विद्यार्थियों और पाठकों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता के माध्यम से पुस्तकालयों को अध्ययन और ज्ञानवर्धन के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं सांस्कृतिक आयोजन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज हल्द्वानी में आयोजित ‘कुमाऊं द्वार महोत्सव’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महोत्सव में उपस्थित लोगों का स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हल्द्वानी कुमाऊं का प्रवेश द्वार होने के साथ ही पर्वतीय समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। यह क्षेत्र कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक जीवनशैली और लोक कलाओं की विशिष्ट पहचान को व्यापक मंच प्रदान करता है। महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि प्रदेशवासी अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने ‘वैदेही कल्चरल एजुकेशन एंड आर्ट फाउंडेशन’ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था लोकगायन और लोकनृत्य के माध्यम से विशेष रूप से युवा पीढ़ी को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं को नई पहचान देने के साथ ही इन्हें देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। यहां के लोकगीतों और लोकनृत्यों में पर्वतीय जीवन, प्राकृतिक सौंदर्य, ऋतु परिवर्तन, लोक आस्थाओं और गौरवशाली इतिहास की झलक देखने को मिलती है। छोलिया नृत्य, झोड़ा, चांचरी, बरदा नाटी और न्योली जैसी लोक विधाएं प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं। इसी प्रकार बेड़ा गीत, मांगल गीत और चौती गीत जैसी पारंपरिक गायन शैलियां उत्तराखंड के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग हैं।

उन्होंने कहा कि ढोल, दमाऊ, तुर्री, भंकोरा और रणसिंहा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र उत्तराखंड की लोक संस्कृति को विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। इनकी धुनों में पहाड़ के जनजीवन, लोक आस्थाओं और परंपराओं की झलक मिलती है। डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के विस्तार से उत्तराखंड का लोक संगीत प्रदेश की सीमाओं से बाहर निकलकर देश-विदेश में पहचान बना रहा है। यह प्रसन्नता का विषय है कि युवा पीढ़ी भी लोक संगीत में रुचि ले रही है और इसे आगे बढ़ाने में योगदान दे रही है।

देवभूमि की अस्मिता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध राज्य सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश के भविष्य, जनहित और देवभूमि की विशिष्ट पहचान को ध्यान में रखते हुए समान नागरिक संहिता लागू करने, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने, दंगारोधी कानून लागू करने और सशक्त भू-कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल एक भौगोलिक प्रदेश नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। देवभूमि की अस्मिता की रक्षा करना राज्य सरकार के लिए राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि संकल्प है। इसी उद्देश्य से सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों और अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि कानून के शासन को सुनिश्चित करना और प्रदेश के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।

पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से युवाओं को मिल रहे रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के साथ-साथ युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। नकल माफिया पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इसके परिणामस्वरूप भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरी प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के हित में बड़े और आवश्यक निर्णय लेने से सरकार पीछे नहीं हटेगी। उनके अनुसार, प्रदेश का हित सत्ता से, जनहित राजनीति से और राष्ट्रहित वोटबैंक की राजनीति से ऊपर है।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा गोलीकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान को प्रदेश की जनता आज भी याद करती है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों ने अनेक कठिनाइयों का सामना किया और उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए संघर्ष किया। ऐसे ऐतिहासिक संदर्भों के बीच प्रदेश के लोगों के सम्मान से जुड़ी टिप्पणियां और भी संवेदनशील हो जाती हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील विषयों पर जिम्मेदार संवाद जरूरी
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए समर्पित व्यक्तित्वों के संबंध में राजनीतिक बयान देते समय राष्ट्रहित और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के सम्मान से जुड़े विषयों को भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखना उचित है।

अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय को सर्वाेपरि रखने पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी बेटी को न्याय दिलाना समाज और व्यवस्था की गंभीर जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील मामले में न्यायिक प्रक्रिया, तथ्यों और प्रमाणों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने प्रकरण में न्यायालय द्वारा दोषियों को सुनाई गई सजा और जमानत याचिकाओं से संबंधित न्यायिक कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून के अनुसार चलने वाली प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बहन अंकिता को न्याय मिलना सर्वाेपरि है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी संवेदनशील मामले को राजनीतिक लाभ का माध्यम बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर संवाद किया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि किसी बेटी के दुख को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना और बिना प्रमाण के आरोप लगाना कितना उचित है।

अंतिम छोर तक विकास पहुंचाना सरकार का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प विकास की यात्रा को प्रदेश के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें, प्रत्येक बहन-बेटी सशक्त बने और प्रत्येक परिवार के जीवन में खुशहाली आए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश की जनता के सहयोग, विश्वास और आशीर्वाद से उत्तराखंड विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और जनकल्याण के लक्ष्यों की दिशा में निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।

पिथौरागढः 33 विकास कार्यों का लोकार्पण और 34 का शिलान्यास, जनपद के विकास के लिए नौ महत्वपूर्ण घोषणाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिथौरागढ़ में आयोजित कार्यक्रम में जनपदवासियों को 284 करोड़ रुपये से अधिक की 67 विकास योजनाओं की सौगात दी। इनमें 105.30 करोड़ रुपये की लागत के 33 कार्यों का लोकार्पण तथा 178.76 करोड़ रुपये की लागत के 34 कार्यों का शिलान्यास शामिल है। मुख्यमंत्री ने जनपद के विकास से संबंधित नौ महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। कार्यक्रम में उद्योग, कृषि, उद्यान, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग की विभिन्न स्वरोजगारपरक योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के चेक वितरित किए गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई ने मुख्यमंत्री को हस्तशिल्प से निर्मित ‘सत्यमेव जयते’ की कलाकृति तथा बाबा नीम करौली की तस्वीर भेंट की।

मुख्यमंत्री ने जनसमूह के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देखा और सुना। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम जनभागीदारी और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है।

जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ये योजनाएं सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करेंगी। राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के विकास और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के आदि कैलाश भ्रमण के बाद क्षेत्र के प्रति श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आकर्षण बढ़ा है। इस वर्ष यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या एक लाख से अधिक पहुंचने की संभावना है। इससे होमस्टे, परिवहन, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिथौरागढ़ में 750 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किए जा रहे मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इससे सीमांत जनपद के युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अवसर मिलेंगे। पिथौरागढ़दृबांसदृआंवलाघाट सड़क एवं पुल से गंगोलीहाट की दूरी कम होगी और हाट कालिका मंदिर तक पहुंचना आसान होगा।

उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ से मुनस्यारी, हल्द्वानी, दिल्ली और देहरादून तक हवाई संपर्क को बढ़ावा दिया गया है। नैनीसैनी हवाई अड्डे को लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती व्यवस्था देने के लिए प्रतिबद्ध है। कठोर नकल विरोधी कानून के अंतर्गत नकल माफियाओं पर कार्रवाई की गई है और 100 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया है। प्रदेश में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लखपति दीदी सहित अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। समान नागरिक संहिता, सख्त भू-कानून तथा दंगा विरोधी कानून जैसे निर्णय राज्यहित में लिए गए हैं। ऑपरेशन कालनेमि के तहत फर्जी पहचान से लोगों को भ्रमित करने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैयादूज, जौलजीबी तथा आठगांव शिलिंग मेले की शुभकामनाएं दीं।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से गुंजी और आदि कैलाश की यात्रा सुगम हुई है। उन्होंने इस क्षेत्र में धार्मिक एवं साहसिक पर्यटन तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख किया।

कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री ने सीमांत सेवा फाउंडेशन द्वारा संचालित सीमांत नेत्र चिकित्सालय में ऑप्टिकल बायोमीटर का शुभारंभ किया। इससे मरीजों को बेहतर नेत्र चिकित्सा सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री की नौ प्रमुख घोषणाएं

1. नैनीसैनी देवत से कनारी पाभैं तक मोटर मार्ग का सुधारीकरण एवं डामरीकरण किया जाएगा।
2. कैलीगाड़ पुल से बेस अस्पताल तक सड़क का सुधारीकरण एवं हॉटमिक्स कार्य किया जाएगा।
3. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डीडीहाट को उप जिला चिकित्सालय के रूप में उच्चीकृत किया जाएगा।
4. अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र मवानी को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उच्चीकृत किया जाएगा।
5. मूनाकोट (रियांसी) में राजकीय महाविद्यालय की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की जाएगी।
6. अस्कोट लिफ्ट पेयजल योजना का कार्य किया जाएगा।
7. ज्याला मंदिर, छाना पाण्डेय में सीसी मार्ग का निर्माण किया जाएगा।
8. ग्राम चिमुशी में गाड़ देवी मंदिर का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
9. चण्डाकदृछेड़ा दिगतोली सड़क का सुधारीकरण एवं चौड़ीकरण किया जाएगा।

पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में इसी शैक्षणिक सत्र से 50 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू

पिथौरागढ़। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंडाक स्थित बाबू जगजीवन राम मेडिकल कॉलेज का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने छात्र-छात्राओं से संवाद कर उनके अनुभव एवं सुझाव जाने। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को सभी निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी शैक्षणिक सत्र से मेडिकल कॉलेज में 50 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। मेडिकल कॉलेज के संचालन से पिथौरागढ़ सहित आसपास के सीमांत क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ होंगी और स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दूरस्थ एवं सीमांत क्षेत्रों तक आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, विधायक बिशन सिंह चुफाल एवं फकीर राम टम्टा उपस्थित रहे।