एस्केप टनल को समानांतर सड़कों (पैरेलल रोड्स) के रूप में किया जाए विकसित: धामी

राज्य में प्रस्तावित रेल परियोजनाओं में टनल के साथ बनने वाले एस्केप टनल को समानांतर सड़कों (पैरेलल रोड्स) के रूप में विकसित किया जा सके, इसकी व्यवस्था बनाई जाए। ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना में बनी एस्केप टनल का भविष्य में किस प्रकार इस्तेमाल किया जा सकता है, इसपर भी कार्य योजना तैयार जाए साथ ही कर्णप्रयाग से बागेश्वर तक रेल लाइन के विस्तार की संभावना पर भी कार्य किया जाए।

यह निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में राज्य में निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित रेल परियोजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान दिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को टनकपुर – बागेश्वर रेल लाइन परियोजना पर भी तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा उक्त परियोजना के अंतर्गत विभिन्न वैकल्पिक मार्गों पर भी विचार किया जाए। उन्होंने कहा परियोजना के निर्माण कार्य से अधिकांश क्षेत्र एवं जनता लाभान्वित हो सके इसके लिए अल्मोड़ा एवं सोमेश्वर क्षेत्र को भी जोड़ने की संभावनाओं पर कार्य किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा केंद्र सरकार से टनकपुर बागेश्वर रेल लाइन परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किए जाने का आग्रह किया जाए, जिससे इसके निर्माण कार्य को गति मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऋषिकेश कर्णप्रयाग परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों के लिए इंटीग्रेटेड प्लान बनाया जाए। जिससे इन रेलवे स्टेशनों के आसपास स्थानीय लोगों के लिए बाजार विकसित हो सके। उन्होंने कहा सभी निर्माणाधीन रेलवे स्टेशनों में स्वयं सहायता समूहों, राज्य की स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए भी विशेष व्यवस्था की जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित रेलवे स्टेशन के आसपास के क्षेत्र में अभी से लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाए उन्हें होमस्टे एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में जन जागरूकता पर ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माणाधीन रेलवे स्टेशनों के आसपास स्थित विभिन्न गांव, कस्बों, धार्मिक स्थलों एवं अन्य पर्यटन स्थलों के विकास के लिए भी रोड मैप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों के आसपास के स्थानों का समुचित पुनरविकासर किया जाए। ताकि रेल परियोजनाओं के निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भविष्य में बड़ी संख्या में उत्तराखंड आने वाले लोगों के आवागम को सुविधाजनक बनाया जाए।

बैठक में बताया गया कि ऋषिकेश करणप्रयाग रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत 72.5 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है साथ ही टनल निर्माण का 95.30% कार्य पूरा हो गया है। इस परियोजना के अंतर्गत कुछ कल 28 टनलों का निर्माण किया है जिनमें से 16 मुख्य टनल एवं 12 एस्केप टनल हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों का निर्माण अलग-अलग थीम के आधार पर किया जा रहा है। जिसमें शिवपुरी स्टेशन को नीलकंठ महादेव, ब्यासी को महर्षि वेदव्यास, देवप्रयाग को समुद्र मंथन, जनासु को उत्तराखंड कल्चर, मलेथा को वीर माधो सिंह भंडारी, श्रीनगर को मां राज राजेश्वरी देवी, धारी देवी को मां धारी देवी, तिलनी को केदारनाथ, घोलतीर को पांच महादेव, गौचर को बाल गोविंद कृष्ण एवं कर्णप्रयाग को बद्रीनाथ मंदिर,राधा कृष्ण थीम पर आधारित निर्माण किया जा रहा है।

टनकपुर बागेश्वर रेल लाइन परियोजना के बारे में बताया गया कि परियोजना के अंतर्गत रेलवे द्वारा तीन सर्वेक्षण विकल्प प्रस्तावित किए गए हैं। साथ ही अन्य वैकल्पिक मार्गो एवं अल्मोड़ा और सोमेश्वर क्षेत्र को भी इस रेल मार्ग से जोड़ने की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है।

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव ब्रजेश कुमार संत, पंकज पांडे, मुख्य परियोजना प्रबंधक हिमांशु बडोनी, विजय, ओम प्रकाश, सुमन सिंह, कल्याण सिंह भंडारी, सनत कुमार सिंह एवं वर्चुअल माध्यम से रेलवे के अधिकारी मौजूद रहे।

जिला प्रशासन ने सरकारी नाले-नौले पर अवैध प्लाटिंग ध्वस्त की

जिला प्रशासन को ग्राम गल्ज्वाड़ी, तहसील देहरादून में अवैध प्लाटिंग एवं सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के संबंध में प्राप्त शिकायत के क्रम में जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशों के अनुपालन में आज जिला प्रशासन की टीम द्वारा मौके बरसाती नाले को पाटकर बनाई गई दीवार को ध्वस्त कर दिया गया है।
जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी के नेतृत्व में जिला प्रशासन की टीम द्वारा मौके पर की जा रही अवैध प्लाटिंग एवं निर्माण गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से रोकते हुए नाले पर निर्मित पक्की सुरक्षा दीवार को ध्वस्त किया गया तथा सरकारी भूमि/बरसाती नाले की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।
गढ़ी कैंट घंघोड़ा, निवासियों द्वारा अवगत कराया गया था कि जितेन्द्र मलिक पुत्र ब्रजपाल (मूल निवासी मुजफ्फरनगर, वर्तमान निवासी विजय पार्क, पॉकेट नं. 3, कांवली, देहरादून), जो पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त सिपाही हैं, द्वारा ग्राम गल्जवाड़ी में लगभग 77 बीघा भूमि में अवैध प्लाटिंग की जा रही है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित व्यक्ति एवं उसके परिजनों के नाम पर भूमि दर्ज कर अवैध रूप से भू-विक्रय किया जा रहा है। साथ ही ग्राम यदुवाला में 18 बीघा सरकारी भूमि तथा ग्राम पंचायत गल्जवाड़ी के मजरे खाबड़वाला स्थित लगभग 80 बीघा जलमग्न भूमि पर कब्जे के प्रयास का भी आरोप लगाया गया।
जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में राजस्व विभाग द्वारा स्थलीय एवं अभिलेखीय निरीक्षण किया गया। भू-अभिलेखों के अनुसार खाता खतौनी संख्या 123 के अंतर्गत खसरा संख्या 1164, 1165, 1166, 1167, 1168, 1169, 1179, 1180, 1184, 1185 एवं 931क सहित कुल रकबा संबंधित सहखातेदारों कुनाल सिंह मलिक पुत्र जितेन्द्र मलिक एवं प्रिंस आनंद पुत्र देवेन्द्र आनंद के नाम दर्ज है। इसके अतिरिक्त खाता खतौनी संख्या 65 के अंतर्गत खसरा संख्या 933क रकबा 0.4490 हेक्टेयर भूमि धीरज भाटिया आदि के नाम भूमिधरी के रूप में दर्ज पाई गई।
टीम ने स्थलीय निरीक्षण में पाया गया कि खसरा संख्या 933 एवं 1185 के मध्य खसरा संख्या 962क के रूप में दर्ज बरसाती नाला स्थित है। संबंधित व्यक्तियों द्वारा नाले की लगभग 8 मीटर भूमि पर पक्की सुरक्षा दीवार निर्मित कर बरसाती जल के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित किया गया था। साथ ही खसरा संख्या 1185, 1166 एवं 933 के मध्य दर्ज नाले की मूल प्रकृति में परिवर्तन पाया गया।
निरीक्षण में यह भी पाया गया कि उक्त खसरों में साल के वृक्ष विद्यमान हैं। वृक्ष पातन के साक्ष्य मौके पर उपलब्ध नहीं मिले। वृक्षों के सूखने अथवा सुखाने के संबंध में वन विभाग द्वारा पृथक जांच की जा रही है। राजस्व निरीक्षण में पाया कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा अपनी दर्ज भूमि पर प्लाटिंग का कार्य किया जा रहा था, किंतु बरसाती नाले की भूमि पर अतिक्रमण कर अवैध निर्माण किया गया था, जो पूर्णतः अवैध पाया गया, जिस पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
जिला प्रशासन ने अवगत कराया है कि प्राकृतिक जलस्रोतों, नालों एवं सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, अवैध प्लाटिंग एवं भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों में कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

उत्तराखंड के दोनों मंडलों में बनेगा अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण बहुउद्देशीय भवन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में उत्तराखण्ड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्यों की समीक्षा की।

बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के दोनों मंडलों में उत्तराखण्ड अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण बहुउद्देशीय भवन/सामुदायिक भवन का निर्माण किया जाए। उन्होंने कहा इन भवनों के निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रस्तावित भवनों में बैंकट हॉल, गेस्ट हाउस, सभागार, प्रशिक्षण कक्ष, बैठक कक्ष एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं, ताकि विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को बहुउद्देशीय भवन की डीपीआर शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओबीसी बाहुल्य क्षेत्रों में राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तथा पात्र लाभार्थियों को योजनाओं जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ओबीसी बाहुल्य क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाए तथा नियमित समीक्षा के माध्यम से प्रगति की निगरानी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि लाभार्थियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर योजनाओं में आवश्यक सुधार किए जाएं, जिससे योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी रूप से आमजन तक पहुंच सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा ओबीसी वर्ग के उत्थान हेतु शिक्षा, कौशल विकास, स्वरोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

इस अवसर पर उत्तराखंड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष संजय नेगी, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव श्रीधर बाबू अदांकी, अपर सचिव नवनीत पांडे, अपर सचिव संदीप तिवारी एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने योजना का शुभारंभ करते हुए प्रथम चरण में जनपद बागेश्वर ( 42 लाभार्थी) , देहरादून (191), नैनीताल (75), पौड़ी (66), टिहरी ( 23) एवं उधमसिंहनगर ( 87) के कुल 484 लाभार्थियों को प्रथम किश्त के रूप में ₹ 3 करोड़ 45 लाख 34,500 की धनराशि डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में भेजी। इसके साथ मुख्यमंत्री ने विभागीय कैलेंडर का भी विमोचन किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी और उन्हें सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा राज्य की लाखों महिलाओं के संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास को नई दिशा दी जा रही है। महिलाओं के बिना किसी भी राष्ट्र और समाज की उन्नति संभव नहीं है। महिला के सशक्त होने से परिवार के साथ पूरा समाज सशक्त होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत कुल 484 लाभार्थियों को प्रथम किश्त के रूप में ₹ 3 करोड़ 45 लाख 34,500 की धनराशि दी जा रही है। शेष 7 जनपदों की 540 महिलाओं को भी लगभग ₹ 4 करोड़, महीने के अंत तक डीबीटी के माध्यम से भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा इस योजना में हमने विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा या किसी भी कारण से अकेले जीवन का भार उठाने वाली महिलाओं के साथ एसिड अटैक, आपराधिक घटना की पीड़िता, ट्रांसजेंडर्स को भी शामिल किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा इस योजना के शुरू होने से राज्य की नारी शक्ति अब नेतृत्व की भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मातृशक्ति के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए निरन्तर कार्य किए जा रहे हैं । महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी, बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं अभियान, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी योजना के साथ ही ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त करने जैसे कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, राज्य की मातृशक्ति के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यमिता, नौकरियों में प्रदेश की महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। राज्य सरकार द्वारा उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के माध्यम से राज्य की मातृशक्ति को नए अवसर प्रदान किए जा रहें हैं। साथ ही मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के अंतर्गत महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में लगभग 5 लाख महिलाएँ 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह बनाकर अपना व्यवसाय कर रही हैं। 7 हजार से अधिक ग्राम्य संगठन और 500 से अधिक क्लस्टर संगठनों के माध्यम से राज्य की महिलाएँ सामूहिक नेतृत्व की एक अद्वितीय मिसाल भी पेश कर रही हैं। प्रदेश की 1 लाख 68 हजार से अधिक बहनों ने लखपति दीदी’ बनकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नया इतिहास रचा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य में उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बिक्री के लिए एक सशक्त इकोसिस्टम विकसित करने का काम किया है। उन्होंने कहा राज्य सरकार ने सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है। महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा हेतु राज्य में सर्वप्रथम समान नागरिक संहिता को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य भी किया है।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अब महिलाओं को किसी और के ऊपर निर्भर न रखकर खुद आत्मनिर्भर बनेंगी साथ ही अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ेगी। उन्होंने कहा निश्चित ही यह योजना एकल महिलाओं की तस्वीर बदलने का काम करेंगी।

सचिव चंद्रेश यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना एक सशक्त महिला उद्यमी योजना है। उन्होंने बताया योजना के अंतर्गत अधिकतम धनराशि ₹ 2.00 लाख तक के कार्य / परियोजना स्वीकृत किए जा रहे हैं। लाभार्थी द्वारा स्वयं के श्रोतों / लोन के रूप में ली गयी धनराशि के सापेक्ष 75 प्रतिशत अथवा ₹1.50 लाख (जो भी अधिकतम हो) धनराशि की सब्सिडी प्रदान की जायेगी। उन्होंने बताया योजना के अंतर्गत परियोजना हेतु महिला को विभागीय अनुदान धनराशि 75% देय होगी एवं महिला का स्वयं का अंशदान 25% अनिवार्य रूप से देय होगा।

इस अवसर पर डायरेक्टर बी एल राणा, विक्रम, आरती, मोहित चौधरी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

पैराग्लाइडिंग चैंपियनशिप ने कपकोट को दिलाई पर्यटन मानचित्र पर खास जगह

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के विज़न के अनुरूप, सुदूर पर्वतीय क्षेत्र कपकोट अब एडवेंचर टूरिज्म के राष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से उभर रहा है।

फरवरी 5 से प्रारंभ बागेश्वर जनपद में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय एक्युरेसी पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता ने इस शांत ग्रामीण अंचल को देशभर के रोमांच प्रेमियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना दिया है।

जालेख की पहाड़ियों से उड़ान भरते रंग-बिरंगे पैराग्लाइडरों से सजा कपकोट का आसमान पूरे आयोजन के दौरान उत्सव का अहसास कराता रहा। देश के विभिन्न राज्यों से आए 92 पायलटों ने इस प्रतियोगिता में पंजीकरण कराया, जिनमें से 78 प्रतिभागियों ने अपने कौशल का प्रदर्शन किया। हजारों स्थानीय दर्शकों और पर्यटकों की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि कपकोट में साहसिक खेलों के प्रति जबरदस्त उत्साह है।

प्रतियोगिता का शुभारंभ जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे और क्षेत्रीय विधायक सुरेश गड़िया द्वारा किया गया। जिलाधिकारी ने इसे बागेश्वर के लिए ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था सशक्त होती है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं।

पहले दिन से लेकर समापन तक प्रतियोगिता का रोमांच चरम पर रहा। विशेषज्ञों के अनुसार कपकोट का भौगोलिक परिवेश पैराग्लाइडिंग, ट्रैकिंग और अन्य साहसिक खेलों के लिए अत्यंत अनुकूल है। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और सुरक्षा संबंधी सत्र भी आयोजित किए गए, जिससे प्रतियोगिता का स्तर और अधिक पेशेवर बना।

समापन समारोह में जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने स्वयं जालेख से उड़ान भरकर इस रोमांच का अनुभव लिया और कहा कि “कपकोट–बागेश्वर अब एडवेंचर टूरिज्म के नए गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुका है। भविष्य में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।”

प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रहे मनीष उप्रेती को ₹1,00,000, द्वितीय स्थान पर रहे मनीष भंडारी को ₹50,000 तथा तृतीय स्थान पर पंकज कुमार को ₹30,000 की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। महिला पायलटों को भी विशेष प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया।

इस आयोजन की सफलता ने स्पष्ट संदेश दिया है—कभी शांत समझा जाने वाला कपकोट अब केवल एक ग्रामीण इलाका नहीं, बल्कि देश का उभरता हुआ साहसिक पर्यटन केंद्र बन चुका है। प्राकृतिक सुंदरता, अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय पहल इसे भविष्य का प्रमुख एडवेंचर डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।

कपकोट ने सचमुच नई उड़ान भर ली है—पर्यटन की, पहचान की और संभावनाओं की।

दून डीएम ने भूतपूर्व सैनिक राजेश कुमार को दिलाया भूमि कब्जा, डीएम ने थाने से हटवाई निराधार प्राथमिकी

जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जनता दरबार का आयोजन कर जनसमस्याओं का निस्तारण किया गया। जनता दरबार में उपस्थित फरियादियों ने भूमि विवाद, निजी भूमि का सीमांकन, अवैध कब्जा, आपसी विवाद, आर्थिक सहायता, रोजगार, शिक्षा, एडीए, नगर निगम से संबंधित कुल 195 शिकायतें एवं समस्याएँ जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कीं। जिलाधिकारी ने सभी जनशिकायतों एवं समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

जिलाधिकारी के समक्ष आयोजित जनसुनवाई में समाज के कमजोर, बुजुर्ग और पीड़ित वर्ग की समस्याएँ स्पष्ट रूप से सामने आईं। जिलाधिकारी ने प्रत्येक शिकायत को संवेदनशीलता से सुना और संबंधित अधिकारियों को त्वरित तथा प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के सम्मान एवं सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

अम्बीवाला निवासी नेशनल पैरा ओलंपिक खिलाड़ी विजय चौधरी ने बताया कि उनकी माता कलावती के नाम दर्ज भूमि पर विवाद न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद पड़ोसी महिला द्वारा उनकी भूमि पर लगे हरे-भरे पेड़ों को काटा जा रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने मौके पर ही एसडीएम को निर्देश दिए कि न्यायालय के अग्रिम आदेशों तक भूमि में यथास्थिति बनाए रखी जाए।

भूतपूर्व सैनिक राजेश कुमार ने शिकायत की कि वर्ष 2016 में खरीदी गई उनकी भूमि पर मूल खातेदारों में से एक ने अवैध कब्जा कर रखा है और भ्रामक जानकारी देकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। जिलाधिकारी ने मौके पर ही एसडीएम एवं तहसीलदार से रिपोर्ट तलब की। रिपोर्ट में विपक्षी की कार्रवाई को निराधार पाया गया। इसके बाद जिलाधिकारी ने एसडीएम विकासनगर को शिकायतकर्ता को भूमि पर कब्जा दिलाने के निर्देश दिए।

डोईवाला निवासी मीना क्षेत्री ने अपने पुत्र व पुत्रवधू से जान-माल का खतरा बताते हुए शिकायत दर्ज कराई। मामला तहसील में लंबित होने पर जिलाधिकारी ने इसे तत्काल जिला कार्यालय में स्थानांतरित कर फास्ट ट्रैक सुनवाई कराने के निर्देश दिए।

जौलीग्रांट निवासी बुजुर्ग विधवा लक्ष्मी तोमर ने बताया कि उनके दिवंगत पति शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त थे। उपचार के दौरान दिए गए ₹1.37 लाख के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। जिलाधिकारी ने शिक्षा अधिकारी से आज ही स्पष्ट आख्या तलब की।
एटनबाग के काश्तकारों ने सिंचाई नहर पर अवैध निर्माण के कारण खेतों की सिंचाई में आ रही कठिनाई से अवगत कराया। इस पर अधिशासी अभियंता को दो दिन के भीतर जांच कर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए गए।

डालनवाला क्षेत्र में एक प्रॉपर्टी डीलर द्वारा फर्जी जमीन दिखाकर ₹8 लाख की ठगी की शिकायत पर क्षेत्राधिकारी पुलिस को त्वरित व कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। ऋषिकेश निवासी बुजुर्ग छज्जू राम ने पुत्रवधू द्वारा मारपीट और घर से निकालने के दबाव की शिकायत की, जिस पर क्षेत्राधिकारी पुलिस को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

हरिपुर कलां निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी निजी भूमि व सरकारी सड़क पर अवैध कब्जे की शिकायत की। जिलाधिकारी ने एसडीएम को जांच कर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

कारगी चौक, कुंज विहार निवासी ममता नौटियाल ने बताया कि उनकी गली में सीवर लाइन बिछाई गई, लेकिन उनका घर छोड़ दिया गया। जिलाधिकारी ने संबंधित संस्था को तत्काल कार्रवाई कर समस्या का निस्तारण करने के निर्देश दिए। डोईवाला निवासी दीपा द्वारा कानूनी सलाह एवं मुकदमे में सहायता हेतु निःशुल्क अधिवक्ता की मांग पर मामला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रेषित किया गया।

जनता दरबार में अपर जिलाधिकारी (वि.रा) केके मिश्रा, एसडीएम अपूर्वा सिंह, एसडीएम कुमकुम जोशी, एसडीएम विनोद कुमार, उप नगर आयुक्त संतोष कुमार पांडेय, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार सहित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

कुंभ से संबंधित सभी तैयारियां, अक्टूबर माह तक पूरी हो: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में कुम्भ मेला-2027, हरिद्वार की तैयारियों के सम्बन्ध में समीक्षा बैठक की।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कुंभ से संबंधित सभी तैयारियों को अक्टूबर माह तक पूरा किया जाए। साथ ही कुंभ की आवश्यकताओं को देखते हुए सभी प्रकार के निर्माण कार्य तय समय के अंदर पूरे हों। सभी निर्माण कार्य की गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान रखा जाए। शासन स्तर पर कुंभ से संबंधित कोई भी कार्य/फाइल लंबित न रहे। किसी भी कार्य को लंबित रखने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार की प्राथमिकता है की कुंभ मेले का भव्य दिव्य और सफल आयोजन हो।

मुख्यमंत्री ने सचिव, पीडब्ल्यूडी को अगले 24 घंटे के अंदर कुंभ मेले के लिए टेक्निकल पद के अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुंभ क्षेत्र में बने सभी पुलों का ऑडिट किया जाए। साथ ही कुंभ क्षेत्र में स्थित सभी घाटो का सौंदर्यकरण और आवश्यकता अनुसार पुनर्निर्माण कार्य भी किया जाए। उन्होंने कहा श्रद्धालुओं के लिए हर की पैड़ी के साथ ही अन्य सभी घाटों में भी स्नान की व्यवस्था की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेला क्षेत्र की स्वच्छता के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाए। सभी प्रमुख स्थानों पर शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था हो। पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा बलों, जल पुलिस की तैनाती हो। साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर ड्रोन, सीसीटीवी , एवं अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग भी हो। उन्होंने कहा मेले के दौरान कानून व्यवस्था, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन की विस्तृत कार्य योजना अलग से बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ मेला क्षेत्र में विभिन्न अखाड़ों को भूमि आवंटन तय समय पर किया जाए। इसकी मेलाधिकारी स्वयं मॉनिटरिंग करें। साथ ही सभी अखाड़ों, मठों ,संत समाज, संस्थाओं, समितियां एवं स्थानीय लोगों से परस्पर्म समन्वय किया जाए। साथ ही उनके सुझावों के अनुरूप मेले की तैयारी हो। मुख्यमंत्री ने कहा कुंभ के दौरान लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसके लिए कुंभ क्षेत्र में व्यापक स्तर पर अतिक्रमण की खिलाफ अभियान चलाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन संबंधित मामलों पर जल्द अनुमति ली जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अन्य प्रदेशों से भी परस्पर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिया। उन्होंने कहा मेले से संबंधित सभी विकास कार्य कागजों के साथ धरातल में भी दिखाई देने चाहिए। मुख्यमंत्री ने आवास व टेंट सिटी की तैयारी समय से पूरी करने एवं मेला क्षेत्र में अस्थायी अस्पताल, एम्बुलेंस व मोबाइल चिकित्सा दल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कुंभ मेला हमारी संस्कृति, आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा धार्मिक आयोजन है। इस आयोजन को सफल बनाना हम सभी का कर्तव्य है। जो भी श्रद्धालु राज्य में आए वह अच्छा अनुभव यहां से लेकर जाएं।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक मदन कौशिक, विधायक आदेश चौहान, विधायक रेनू बिष्ट, विधायक अनुपमा रावत, विधायक रवि बहादुर, उत्तराखण्ड अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, प्रमुख सचिव एल. फैनई, आरके सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, सचिव नितेश झा, कुंभ मेलाधिकारी सोनिका सिंह एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

डॉ. नित्यानंद का पूरा जीवन हिमालय, प्रकृति, समाज और राष्ट्र को रहा समर्पित: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने दून विश्वविद्यालय, देहरादून में डॉ. नित्यानंद की जन्मशताब्दी वर्ष समारोह के उपलक्ष्य पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सत्तत हिमालयी पर्यावरण पुरस्कार 2025 -26 से जयेंद्र सिंह राणा एवं संजय सत्यवली को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. नित्यानंद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन हिमालय, प्रकृति, समाज और राष्ट्र को समर्पित किया। उनकी सोच, हिमालय की शिखरों जैसी ऊँची और उनका सेवा-भाव हिमालय की घाटियों से भी गहरा था। उनका मानना था कि हिमालय की रक्षा करना, भारतीय सभ्यता और राष्ट्र के भविष्य के लिए भी आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. नित्यानंद ने विज्ञान को अध्यात्म से, शोध को लोक-जीवन से और चिंतन को राष्ट्रहित से जोड़ने का कार्य किया। वो समाज के प्रत्येक वर्ग में राष्ट्रभाव और सामाजिक चेतना का संचार करते रहे। उन्होंने गांवों के सशक्तिकरण के लिए भी आजीवन कार्य किया। वे प्रतिवर्ष अपनी आय से लगभग 40 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान किया करते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1991 में उत्तरकाशी और 1999 में चमोली की आपदा के बाद डॉ. नित्यानंद ने बिना किसी विलंब के स्वयंसेवकों के साथ मिलकर राहत एवं पुनर्वास कार्यों का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया, जो आज भी श्रेष्ठ माना जाता है। उन्होंने मनेरी गाँव को अपना केंद्र बनाकर वहाँ 400 से अधिक भूकंप रोधी मकानों के निर्माण का कार्य भी कराया। उन्होंने उस क्षेत्र के 50 से अधिक गाँवों को मॉडल गाँवों के रूप में विकसित करने का कार्य भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा डॉ. नित्यानंद ने ‘उत्तरांचल दैवीय आपदा पीड़ित सहायता समिति’ का गठन कर उन्होंने सेवा को संस्थागत स्वरूप दिया, जो आज भी देशभर में आपदाओं के समय मानवता की सेवा का सबसे बेहतर उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। उन्होंने कहा देहरादून में संचालित डॉ. नित्यानंद हिमालय शोध एवं अध्ययन केंद्र उनके विचारों को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन चुका है। यह केंद्र हिमालयी अध्ययन, सतत विकास, आपदा प्रबंधन और नीति-निर्माण के क्षेत्र में नई दिशा दे रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हिमालय संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हम डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, जल स्रोत संरक्षण अभियान जैसे विभिन्न माध्यम से हिमालय के दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा राज्य सरकार ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया है। राज्य में प्लास्टिक वेस्ट के प्रबंधन के लिए डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम के माध्यम से अब तक हिमालयी क्षेत्र में 72 टन कार्बन उत्सर्जन को कम किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए पौधारोपण अभियान, जल संरक्षण अभियान और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों चलाए जा रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए सौर ऊर्जा सहित अन्य हरित ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं प्रारंभ की गई हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश के नौले, धारे एवं वर्षा आधारित नदियों जैसे परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण हेतु ‘स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA) का गठन किया है।

मुख्यमंत्री ने सभी से आह्वान करते हुए कहा कि हम सभी जीवन के प्रत्येक प्रमुख अवसर पर जैसे जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या कोई अन्य स्मरणीय दिन पर एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी नियमित देखभाल भी करें। जिससे हम सभी देवभूमि में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे पाएंगे।

इस अवसर पर आर.एस.एस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ दिनेश, आर.एस.एस प्रान्त प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र, विधायक विनोद चमोली, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, विधायक बृजभूषण गैरोला, डॉ. कमलेश कुमार, उत्तरांचल उत्थान परिषद के संरक्षक प्रेम बड़ाकोटी, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, रविदेवानंद, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

प्रत्येक विभाग अपने सभी कार्यों को लेकर वार्षिक कैलेण्डर तैयार कर कार्य करें: बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में सचिव समिति की बैठक सम्पन्न हुयी। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सचिवगणों के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा कर दिशानिर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि अगले वित्तीय वर्ष में कराए जाने वाले नए कार्यों के लिए 15 फरवरी तक स्वीकृतियां ले ली जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग अपने सभी कार्यों को लेकर वार्षिक कैलेण्डर तैयार कर, उसके अनुसार अपनी सभी गतिविधियों को संचालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कुम्भ मेला – 2027 से सम्बन्धित कार्यों को भी प्राथमिकता पर लेते हुए सभी प्रकार की स्वीकृतियां और प्रक्रियाएं समय पर पूर्ण करते हुए निर्धारित प्रक्रिया समय पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने खाद्य सुरक्षा के मापदण्डों का प्रवर्तन एवं निगरानी को और मजबूत किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसके लिए टेस्टिंग लैब आदि बढ़ाए जाने एवं इससे सम्बन्धित मामलों के निस्तारण में तेजी लाए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने पूंजी निवेश के लिए राज्यों को दी जाने वाली विशेष सहायता के तहत् सभी प्रोजेक्ट्स को गतिशक्ति पोर्टल पर अपलोड किए जाने एवं निर्धारित समय सीमा पर कार्य पूर्ण किए जाने हेतु लगातार निगरानी किए जाने के निर्देश दिए।

जन-जन की सरकार कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए मुख्य सचिव ने तहसील एवं थाना दिवसों को वर्षभर नियमित आयोजन किए जाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने इसके लिए कार्ययोजना तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस को मुख्यालयों एवं जनपद स्तरीय कार्यालयों में लागू किए जाने को लेकर अब तक हुयी प्रगति पर सभी विभागीय सचिवों और जिलाधिकारियों से प्रत्येक सचिव समिति की बैठक में चर्चा की जाएगी।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि नक्शा पास करने वाली सभी ऑथॉरिटीज नक्शा पास करने के उपरान्त सम्बन्धित स्थानीय निकाय के साथ उक्त नक्शा और जानकारियां भी साझा करें ताकि स्थानीय निकाय उक्त प्रॉपर्टी के सम्बन्ध में अपना डाटाबेस अपडेट कर सकें। उन्होंने कहा कि कुछ विभागों में श्रमिकों के लिए लेबर कंप्लायंस टूल (Labour Compliance Tool) का प्रयोग किया जा रहा है, यह एक अच्छा प्रयोग है, और इसे प्रदेशभर में लागू किया जाना चाहिए, ताकि श्रमिकों की विभिन्न समस्याओं का निस्तारण इसी से हो सकेगा।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल. फैनाई, धनंजय चुतर्वेदी, सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, सचिन कुर्वे, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, चंद्रेश कुमार यादव, बृजेश कुमार संत, डॉ. वी. षणमुगम, डॉ. सुरेन्द्र नारायण पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, सी. रवि शंकर, रणवीर सिंह चौहान एवं धीराज सिंह गर्ब्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सिंचाई विभाग की खुली नहर में बुजुर्ग हुए चोटिल, अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज

जनपद में विभिन्न माध्यमों से प्राप्त हो रही सड़क दुर्घटना संबंधी शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन की क्यूआरटी ने निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। लापरवाही पर सिंचाई विभाग के संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।

अपर तुनवाला प्रकरण के संबंध में घटना कैनाल रोड, अपर तुनवाला क्षेत्र की नहर की सफाई के दौरान पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध न किए जाने एवं असुरक्षित स्थिति में कार्य किए जाने के दृष्टिगत जिला प्रशासन द्वारा सिंचाई विभाग के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने की कार्रवाई की जा रही है।प्राप्त जानकारी के अनुसार एक बुजुर्ग व्यक्ति मॉर्निंग वॉक के दौरान पूर्वनिर्मित सिंचाई नहर (कैनाल) के खुले भाग में गिर गए। यह नहर सिंचाई विभाग की पुरानी संरचना है, जो सड़क से लगभग डेढ़ फीट ऊंचाई पर पेवमेंट के रूप में स्थित है। नहर की नियमित सफाई के उद्देश्य से सिंचाई विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर स्लैब हटाए गए थे।

कोहरे की स्थिति के कारण बुजुर्ग व्यक्ति खुले स्लैब को देख नहीं पाए और नहर में गिर गए। प्रथम दृष्टया यह घटना सीवर निर्माण कार्य से संबंधित नहीं पाई गई है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने समस्त कार्यवाही संस्थाओं एवं ठेकेदारों को चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्यों के दौरान कटिंग की गई सड़कों अथवा कार्यस्थलों पर किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो संबंधित विभागों एवं कार्यदायी संस्थाओं/ठेकेदारों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज किये जाएंगे। सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी स्तर पर अनदेखी स्वीकार्य नहीं की जाएगी।

जिला प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि किसी भी प्रकार के निर्माण/सफाई कार्य के दौरान पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक, रात्रिकालीन रिफ्लेक्टर एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आमजन की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

अवगत कराया गया है कि कैनाल रोड, अपर तुनवाला प्रकरण के संबंध में घटना कैनाल रोड, अपर तुनवाला क्षेत्र की है, जहां सीवर पाइपलाइन डाले जाने के उपरांत मार्ग के रेस्टोरेशन का कार्य प्रगति पर है। वर्तमान में उक्त स्थल पर रोड कटिंग से संबंधित कोई कार्य संचालित नहीं हो रहा है तथा सड़क का प्राथमिक रेस्टोरेशन कार्य पूर्ण किया जा चुका है।