विस अध्यक्ष ने राजकीय अस्पताल में कोरोना वारियर्स को किया सम्मानित

कोरोना टीकाकरण अभियान में भारत द्वारा आज 100 करोड़ डोज लगाने के आंकड़े को पार करने पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने ऋषिकेश के राजकीय चिकित्सालय में हेल्थ वर्कर्स को सम्मानित किया। विधानसभा अध्यक्ष ने अस्पताल में उपस्थित स्टाफ नर्स सहित अन्य कर्मियों का माल्यार्पण कर सम्मान किया।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस साल 16 जनवरी को शुरू हुए भारत में सबसे बड़े टीकाकरण अभियान में आज एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की है। जिसके लिए सभी देशवासी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हैं। विस अध्यक्ष अग्रवाल ने कहा की कोरोना महामारी के शुरू होने के बाद भारत को लेकर तमाम तरह की आशंकाएं जताई गई थीं। 130 करोड़ से ज्यादा की आबादी में सभी पात्र लोगों को टीका लगाने के मैराथन काम को लेकर भारत की क्षमता पर सवाल खड़े किए गए थे। टीके की उपलब्धता को लेकर भी आशंका जताई गई थी। गुजरते वक्त के साथ भारत ने न सिर्फ इन सभी आशंकाओं झुठलाते और सवालों को गलत ठहराते हुए अपने नागरिकों को टीके का सुरक्षा कवच उपलब्ध कराने की राह पर तेजी से आगे बढ़ता रहा बल्कि अब एक अरब डोज लगाने के मील के पत्थर को पार किया है। विधानसभा अध्यक्ष ने इस ऐतिहासिक सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार एवं सभी स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों का आभार व्यक्त किया है।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ विजयेश भारद्वाज, डॉ पन्त, डॉ यादव, स्टाफ नर्स राहुल सक्सेना, मण्डल अध्यक्ष ऋषिकेश दिनेश सती, सुमित पंवार, पार्षद शिव कुमार गौतम, पार्षद विपिन पन्त, पार्षद वीरेंद्र रमोला, जयंत किशोर शर्मा, नितिन सक्सेना, राकेश चन्द, तेज बहादुर यादव का सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

विश्व दृष्टि दिवस पर लोगों को नेत्र संबंधी विकार की जानकारी दी

विश्व दृष्टि दिवस के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में नेत्र विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने लोगों से आंखों से संबंधित विभिन्न रोगों के प्रति जागरुक रहने को कहा है। उन्होंने बताया कि जागरुक रहकर व किसी भी नेत्र संबंधी विकार होने पर समय पर उपचार से ही दृष्टिबाधिता की समस्या से बचा जा सकता है। उधर विभाग की ओर से त्रिवेणीघाट पर नेत्र संबंधी विकारों को लेकर जागरुक किया गया।
एम्स ऋषिकेश में नेत्र विभाग के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सकों ने आमजन को आंखों के विभिन्न रोगों, लक्षणों और उनसे बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजीव कुमार मित्तल ने बताया कि देश में लगभग 6 करोड़ लोग विघ्भिन्न तरह के दृष्टिबाधिता रोगों से ग्रसित हैं। उन्होंने बताया कि आम नागरिकों व मरीजों को यह समझना होगा कि शुगर बढ़ने से आंखों की बीमारियों को सीधा नुकसान होता है। इस अवसर पर उन्होंने विश्व दृष्टि दिवस के उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला।
ऑफिसिएटिंग डीन प्रोफेसर जया चतुर्वेदी ने कहा कि ’जान है तो जहान है’ तभी सार्थक है, जब हमारी आंखें निरोगी हों और हम संसार को अपनी आंखों से देख सकें। उन्होंने बताया कि वर्तमान भाग-दौड़भरे जीवन और प्रदूषण युक्त वातावरण के कारण जरूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी आंखों की स्वच्छता व उनकी बीमारियों के प्रति गंभीरता बरते व किसी भी प्रकार की नेत्र संबंधी दिक्कतें सामने आने पर तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें।
कार्यक्रम के दौरान नेत्र विभाग के विभिन्न चिकित्सकों ने प्रोजेक्टर के माध्यम से आंखों की विभिन्न बीमारियों उनके लक्षणों, बचाव और उपचार के बारे में आमजन को विस्तारपूर्वक समझाया। डॉ. हिमानी पाल ने दृष्टिदोष के लक्षण बारीकी से समझाए। बताया कि दृष्टिदोष की समस्या किसी भी उम्र के लोगों में हो सकती है। उन्होंने आंखों से धुंधला नजर आना, पढ़ते समय सिरदर्द होना, दूर व नजदीक का स्पष्ट नहीं दिखाई देना, किताबें पढ़ते समय आंखों से पानी आना आदि बीमारी के लक्षणों, कारण और उनके उपचार के बारे में बताया। डॉ. संध्या यादव ने कार्नियल अंधता के बाबत बताया कि बच्चों में विटामिन-ए की कमी से यह परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कार्निया खराब होने पर कार्निया प्रत्यारोपण की तकनीक विकसित हो चुकी है। उन्होंने जोर दिया कि कार्नियल अंधता से ग्रसित लोगों को इस तकनीक का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है।
डॉ. दिव्या सिन्धुजा ने सफेद मोतिया, डॉ. सुचरिता दास ने काला मोतिया, डॉ. श्री राम जे. ने रेटिना से संबंधित विभिन्न बीमारियों और डॉ. लक्ष्मी शंकर ने कम रोशनी के दौरान पढ़ाई-लिखाई करने व अन्य कार्य करने से आंखों में होने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कम रोशनी में किताबें पढ़ने से आंखों की रेटिना में जोर पड़ता है और उन्हें नुकसान हो सकता है। इसलिए हमेशा पढ़ते समय पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए।
विभाग की फैकल्टी सदस्य डा. रामानुज सामंता ने बताया कि आम लोगों को आंखों के प्रति जागरुक करने के लिए हम सभी को संचार और प्रचार के विभिन्न माध्यमों का उपयोग कर सामाजिक जागरुकता लानी होगी। कार्यक्रम में आई बैंक की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. नीति गुप्ता समेत विभाग के कई अन्य चिकित्सक, सीनियर रेजिडेंट्स और स्टाफ सदस्य मौजूद थे। उधर विभाग की ओर से सांयकाल त्रिवेणीघाट पर आयोजित कार्यक्रम में आम जन को नेत्र संबंधी बीमारियों के प्रति जागरुक किया गया।जिसमें विभागाध्यक्ष डा. संजीव मित्तल ने कार्नियल दृष्टिहीनता के मुख्य कारणों के बारे में बताया,जिसमें चोट से जख्म, कुपोषण संक्रमण, रसायनिक जलन, जन्मजात गड़बड़ी, ऑपरेशन के बाद जटिलताएं या संक्रमण संबंधी जानकारी दी। डा. अजय अग्रवाल ने बताया कि काला मोतिया बीमारी के कारणों पर प्रकाश डाला। बताया कि आंख की नस जो दिमाग से जुड़ी होती है उसके खराब होने से यह बीमारी होती है, इससे रोशनी को जितना नुकसान हो जाता है वह दोबारा ठीक नहीं की जा सकती। उन्होंने काला मोतिया के लक्षण आंख लाल होना, लगातार सिर दर्द होना, देखने का दायरा छोटा होना बताया। आई बैंक की निदेशक व कार्निया स्पेशलिस्ट डा. नीति गुप्ता ने कार्निया दृष्टिहीनता के बाबत विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया घ्कि इसका समाधान सिर्फ कार्निया प्रत्यारोपण ही है। बताया कि कार्निया आंख की पुतली होती है, बीमारी, जख्म अथवा अन्य किसी भी कारण से पुतली खराब हो जाए तो कार्निया प्रत्यारोपण ही इसका एकमात्र समाधान है। इस दौरान उन्होंने लोगों से नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील भी की, उन्होंने बताया कि नेत्रदान से ही कार्निया प्राप्त कर नेत्रहीनों का जीवन रोशन किया जा सकता है।

धामी का विजन सफल, सभी पात्र लोगों को वैक्सीन लगाने वाला राज्य बना उत्तराखंड

उत्तराखण्ड राज्य, पूर्ण रूप से पात्र लाभार्थियों को कोविड-19 वैक्सीन की प्रथम डोज लगाये जाने वाला राज्य बन गया है। मीडिया सेंटर सचिवालय में आयोजित प्रेसवार्ता में यह जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी प्रदेशवासियों को इसके लिये बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने राज्य को आवश्यकतानुसार वैक्सीन की पर्याप्त संख्या में डोज उपलब्ध कराए जाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नियत समय से पहले ही इस लक्ष्य को पूरा कर लिया गया है। इसमें स्वास्थ्य, पुलिस विभागों सहित अन्य विभागों के कार्मिकों, विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं, मीडिया, और सभी प्रदेशवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
मुख्यमंत्री ने पहली डोज लेने वाले लोगों से दूसरी डोज भी समय पर लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि जैसे ही 18 वर्ष से कम आयु वालों के लिए वैक्सीनैशन की अनुमति मिलेगी, राज्य सरकार इनका वैक्सीनैशन भी जल्द करवाने का प्रयास करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड भारत सरकार के मार्गदर्शन में 16 जनवरी 2021 से सफलतापूर्वक कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। टीकाकरण अभियान को बढ़ावा देने के लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
राज्य में 18 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 7729466 पात्र लाभार्थियों का कोविड-19 वैक्सीनेशन किया जाना था। जिसमें सबसे पहले हेल्थ केयर वकर्स का टीकाकरण प्रारम्भ किया गया जिसके पश्चात फ्रंटलाइन वर्कर्स फिर 60 से अधिक आयु और 45-59 आयु के गम्भीर रोगों से ग्रसित रोगियों का टीकाकरण प्रारम्भ किया गया, जिसके पश्चात 18 वर्ष से अधिक आयु के समस्त लाभार्थियों का टीकाकरण प्रारम्भ किया गया जिसमें गर्भवती महिलायें एवं दिव्यांग नागरिक भी सम्मिलित है।
राज्य में दिनांक 16 अक्टूबर, 2021 तक कुल 99.6 प्रतिशत हेल्थ केयर वर्कर्स, 99.2 प्रतिशत फ्रंटलाइन वर्कर्स और 18 वर्ष से अधिक आयु के 96.1 प्रतिशत लाभार्थियों को कोविड-19 वैक्सीनेशन की प्रथम डोज लगायी जा चुकी है तथा अन्य शेष लाभार्थियों में गर्भवती महिलाये (जिनको उचित परामर्श प्रदान कर जागरूक किया जा रहा है. और उनके द्वारा सहमति व्यक्त करने पर ही उन्हें वैक्सीन लगायी जा रही है)। इस प्रकार राज्य में लगभग समस्त इच्छुक लाभार्थियों को वैक्सीन की प्रथम डोज लगायी जा चुकी है।
वैक्सीनेशन के संबंध में प्रत्येक ग्राम सभा और वार्ड मेम्बर से उनके क्षेत्र में समस्त पात्र लाभार्थियों को कोविड-19 वैक्सीन की प्रथम डोज लगाये जाने का प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा रहा है। जिसके क्रम में उत्तराखण्ड राज्य में पूर्ण रूप से पात्र लाभार्थियों को कोविड-19 वैक्सीन की प्रथम डोज लगायी जा चुकी है। वर्तमान में राज्य में द्वितीय डोज, गर्भवती महिलाओं, दिव्यांग एवं मानसिक रोग से ग्रसित एवं अन्य लाभार्थियों का टीकाकरण यथावत चलता रहेगा।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, डॉ. धन सिंह रावत, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, अपर सचिव सोनिका, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉक्टर तृप्ति बहुगुणा उपस्थित थे।

टेली हेल्थ कंसल्टेशन से स्वास्थ्य सुविधाओं को बनाया जायेगा और बेहतर

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश के सोशल आउटरीच सेल एवं आईआईटी रुड़की के संयुक्त तत्वावधान में उड़ान एक आउटरीच “टेली हेल्थ कंसल्टेशन” बनाया गया है, जिसे शनिवार को लांच किया गया। बताया गया ​कि इसका उद्देश्य सुदूर क्षेत्रों में जरुरतमंद लोगों को टेलीमेडिसिन के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। गौरतलब है कि अभी कोविड-19 महामारी पूर्णरूप से खत्म नहीं हुई है, लिहाजा कोविड महामारी को ध्यान में रखते हुए निकट भविष्य में आने वाली स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के दृष्टिगत एम्स की ओर से इस ऐप को तैयार किया गया है,जिसके माध्यम से अति दुर्गम स्थानों के लोग एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञों से ​चिकित्सकीय परामर्श ले सकेंगे। इस ऐप की खाशियत यह है कि जिन सुदूरवर्ती क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा नहीं हो, ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी इस ऐप के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधा व चिकित्सकीय परामर्श ले सकते हैं।
शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर अजीत चतुर्वेदी व एम्स ऋषिकेश के संकायाध्यक्ष (शैक्षणिक) प्रो. मनोज गुप्ता ने उड़ान मॉडल का संयुक्तरूप से वर्चुअल उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन में सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य की चिंता एवं उसके निराकरण के लिए एम्स ऋषिकेश और आईआईटी रुड़की का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि बहुत जल्दी ही वह विशेषज्ञों के साथ इस विषय पर विस्तृत चर्चा करेंगे। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर अजीत चतुर्वेदी ने कहा कि स्वास्थ्य लाभ को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए तैयार उड़ान मॉडल आईआईटी रुड़की और एम्स ऋषिकेश की पहल सराहनीय है। उन्होंने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश के कोने-कोने तक जनमानस को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करना है और इसके लिए आईआईटी हर कदम पर एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों के साथ है।
एम्स के संकायाध्यक्ष अकादमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने कहा कि टेलीमेडिसिन ने स्वास्थ्य जगत में अनोखा आयाम प्रस्तुत किया है, उन्होंने उम्मीद जताई कि एम्स ऋषिकेश के सोशल आउटरीच सेल एवं आईआईटी रुड़की के संयुक्त तत्वावधान द्वारा तैयार किया गया यह मॉडल उत्तराखंड के दूरस्थ इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य को लेकर एक नया मोड़ लाएगा। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सोशल आउटरीच सेल उत्तराखंड के सुदूर क्षेत्रों में अब तक एक लाख से अधिक मरीजों के स्वास्थ्य की देखभाल करने के अलावा सैकड़ों स्वास्थ्य शिविर, जनजागरुक एवं अन्य सामाजिक विषयों पर शिविर आयोजित कर चुका है।
एम्स के सोशल आउटरीच सेल के नोडल ऑफिसर डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि कोविड-19 की दूसरी लहर के अनुभवों से यह ऐप बनने की प्रेरणा मिली है, अपने अनुभव साझा करते हुए डा. संतोष ने बताया कि जब उन्होंने देखा कि सुदूरवर्ती व दुर्गम क्षेत्रों में संपर्क साधना बहुत ही मुश्किल हो रहा है, जिससे कि ग्रामीणों को स्वास्थ के संबंध में समय पर उचित चिकित्सकीय परामर्श नहीं मिल पा रहा है, तो इसी के मद्देनजर इस मॉडल को तैयार करने का विचार आया है। उन्होंने बताया कि उड़ान मॉडल द्वारा हम ऐसे क्षेत्रों में पहुंच पाएंगे, जहां इंटरनेट नहीं है, यह ऐप 5 चरणों में कार्य करेगा। जिसमें सर्वाधिक बीमारी वाले गांवों को चिह्नित करके संस्थान के द्वारा उक्त गांवों में बीमारियों से बचाव के लिए ठोस रूपरेखा तैयार की जाएगी। उद्घाटन कार्यक्रम में संस्थान के डीएचए प्रोफेसर यूपी मिश्रा, सीएफएम विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वर्तिका सक्सेना, प्रोफेसर ब्रिजेंद्र सिंह, डा. मोहित ढींगरा, प्रो. डी. के. त्रिपाठी, डॉ. कुमार सतीश रवि, डॉ. योगेश के अलावा रजिस्ट्रार राजीव चौधरी, जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शशिकांत, वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष संदीप सिंह, विधि अधिकारी प्रदीप पांडेय आदि मौजूद थे।

प्रदेश में कोरोना के सक्रिय मामले अब 179

प्रदेशभर में बीते 24 घंटे में 10 नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। जबकि पांच मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया। सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर अब 179 पहुंच गई है। जबकि गुरुवार को प्रदेश में 175 सक्रिय मरीज थे। 
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, शुक्रवार को 11709 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। आठ जिलों अल्मोड़ा, बागेश्वर, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, टिहरी ,ऊधमसिंह नगर और उत्तरकाशी में एक भी संक्रमित मरीज नहीं मिला है। वहीं, चमोली व रुद्रप्रयाग में एक-एक, चंपावत में दो, देहरादून और पौड़ी में तीन-तीन संक्रमित मिले हैं। प्रदेश की रिकवरी दर 96.01 प्रतिशत और संक्रमण दर 0.09 प्रतिशत दर्ज की गई है। 

आज नैनीताल में 9 और देहरादून में 6 नए मरीज मिले

प्रदेश में कोरोना के 28 नए मरीज मिले है। आज प्रदेशभर में चार मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज किए गए है। नैनीताल जिले में सर्वाधिक नौ और देहरादून में छह नए मरीज मिले। जबकि देहरादून जिले में एक्टिव मरीजों का आंकड़ा एक बार फिर सौ के पार पहुंच गया है।
स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार गुरुवार को चमोली में एक, चम्पावत में चार, हरिद्वार में दो, पौड़ी में एक, पिथौरागढ़ में तीन, रुद्रप्रयाग में दो नए मरीज मिले। जबकि अल्मोड़ा, बागेश्वर, टिहरी, यूएस नगर और उत्तरकाशी जिले में एक भी नया मरीज नहीं मिला। गुरुवार को राज्य में संक्रमण की दर 0.18 प्रतिशत रही जबकि मरीजों के ठीक होने की दर 96 प्रतिशत से अधिक रही। राज्य भर के अस्पतालों से कुल 12 हजार के करीब सैंपल जांच के लिए भेजे गए जबकि 14 हजार से अधिक सैंपलों की रिपोर्ट आई। राज्य में अब कुल एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़कर 175 हो गई है। सर्वाधिक 101 एक्टिव मरीज देहरादून जिले में हैं। जबकि टिहरी और उत्तरकाशी में एक भी एक्टिव मरीज नहीं हैं। राज्य भर में गुरुवार को 29 हजार से अधिक लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली व दूसरी डोज दी गई है।

यूजेवीएनएल के चीला पावर हाउस पहुंचा एम्स का ट्रॉमा रथ

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश की ओर से आयोजित ट्रॉमा सप्ताह के तहत एम्स का ट्रॉमा रथ बुधवार को चीला पावर हाउस पहुंचा। यहां ट्रॉमा विशेषज्ञों ने यूजेवीएनएल के पावर हााउस में कार्य करने वाले कर्मचारियों को औद्योगिक दुर्घटनाओं के दौरान बचाव के तौर-तरीकों का प्रशिक्षण दिया।
एम्स ऋषिकेश का ट्रॉमा रथ बुधवार को उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड के चीला पावर हाउस पहुंचा। इस दौरान ट्रॉमा विशेषज्ञों ने विद्युत उत्पादन गृह चीला में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को आघात चिकित्सा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने पावर हाउस में कार्य करने वाले तकनीकि और मिनिस्ट्रियल स्टाफ को टरबाइनों के संचालन के दौरान संभावित दुर्घटनाओं से बचाव के तौर तरीके बताए। मशीनों में कार्य करते समय होने वाली दुर्घटनाओं के दौरान प्राथमिक उपचार और जीवन बचाने के बारे में उन्होंने बारीकी से जानकारी दी। प्रशिक्षण मे बताया गया कि मशीनों में कार्य करते हुए किसी तरह की दुर्घटना होने पर किस प्रकार के प्राथमिक उपचार के बाद घायल व्यक्ति को शीघ्रातिशीघ्र अस्पताल पहुंचाया जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि मशीनों में कार्य करते हुए कई बार व्यक्ति के हाथ-पैर अथवा शरीर के अन्य अंग चपेट में आ जाते हैं। इस दौरान अपनाई जाने वाली बचाव प्रक्रिया और अन्य मेडिकली सावधानियों को भी प्रशिक्षण में समझाया गया।
कार्यक्रम के दौरान नर्सिंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (एनडीपीए) एम्स के नर्सिंग स्टाफ ओमप्रकाश और स्वप्ना श्रुति के नेतृत्व में मॉक ड्रिल का आयोजन भी किया गया। ड्रिल में बताया गया कि जलाशयों में व्यक्ति के डूब जाने पर उसे किस विधि अथवा तकनीक से बचाया जा सकता है। उधर आघात चिकित्सा के प्रति आम लोगों को जागरुक करने के उद्देश्य से बुधवार की सुबह 6 बजे एम्स के गेट नंबर-तीन से साईकिल रैली निकाली गई। नर्सिंग ऑफिसर प्रकाश चंद मीणा के नेतृत्व में निकली रैली को ट्रॉमा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कमर आजम ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। साईकिल रैली बैराज मार्ग से होकर विभिन्न स्थानों से होकर निकली, इस ट्रॉमा जन-जागरुकता रैली का समापन ऋषिकेश बैराज में हुआ। इस अवसर पर यूजेवीएनएल के अधिशासी अभियंता ललित टम्टा, ट्रॉमा रथ के प्रभारी व ट्रॉमा सर्जन डॉ. मधुर उनियाल, डॉ. अजय कुमार, डॉ. भास्कर सरकार समेत विभाग के कई अन्य चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ मेंबर मौजूद रहे।

सीएम ने वायदा निभाया, 33297 आंगनवाड़ी कर्मियों को दी प्रोत्साहन राशि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय से आंगनवाड़ी कर्मियों को प्रदान की जा रही प्रोत्साहन राशि का डीबीटी के माध्यम से शुभारम्भ किया। इससे 33297 आंगनवाड़ी कर्मियों के खाते में डीबीटी के माध्यम से धनराशि भेजी गई। मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में 33297 आंगनवाड़ी कर्मियों को कुल 40 करोड़ रूपये की धनराशि दी जा रही है।
मुख्यमंत्री घोषणा के अनुसार 33297 आगनवाड़ी कर्मियों द्वारा समर्पित भाव में किये गए कर्तव्य पालन के लिए की गयी प्रोत्साहन राशि 1 हजार रूपये प्रति कर्मी, रक्षाबंधन के अवसर पर दी जाने वाली 1 हजार रूपये प्रति कर्मी डीबीटी के माध्यम से प्रदान की गई। इसके अलावा मुख्यमंत्री की घोषणा 5 माह तक 2 हजार रूपये प्रति कर्मी की प्रोत्साहन राशि के क्रम में सितम्बर की प्रोत्साहन राशि 2 हजार रूपए प्रति आंगनबाङी कर्मी को ट्रांसफर की गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कोविड-19 के दौरान आंगनवाड़ी की बहनों ने जान जोखिम में डालकर कार्य किया। कोविड के दौरान सराहनीय कार्यों के लिए उन्हें पारितोषिक दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के हितों के लिए बड़ा निर्णय लिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 100 दिन पूर्व मुझे प्रदेश के मुख्य सेवक की जिम्मेदारी मिली। इन 100 दिनों में 300 से अधिक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। अन्तिम पंक्ति के लोगों तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचे इसके लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 2025 तक उत्तराखण्ड को हर क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किये जायेंगे।
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपनी बहनों के साथ किया वायदा निभाया है। आज डीबीटी के माध्यम से आंगनवाड़ी बहनों के खाते में धनराशि भेजी जा रही है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास की दिशा में राज्य सरकार द्वारा अनेक कार्य किये जा रहे हैं।
इस अवसर पर सचिव महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास हरि चन्द्र सेमवाल, उप निदेशक डॉ एस के सिंह, राज्य परियोजना अधिकारी डॉ अखिलेश कुमार मिश्र, इंडसइंड बैंक के स्टेट हेड संदीप सेमवाल उपस्थित थे।

राज्यभर के मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में पहुंचेंगे एम्स ट्रामा के विशेषज्ञ

उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से एम्स ऋषिकेश द्वारा ट्रॉमा रथ को रवाना किया गया। यह रथ सप्ताहभर तक राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में जाकर हेल्थ केयर वर्करों को आघात चिकित्सा के प्रति जागरुक कर दुर्घटनाओं में घायल लोगों के उपचार को लेकर उन्हें प्रक्षिक्षित भी करेगा।
विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले पहाड़ी राज्य में आपदाओं के अलावा सड़क दुर्घटनाएं साल दर सल बढ़ रही हैं। इन सड़क दुर्घनाओं में प्रति वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती हैं। ट्रॉमा विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुर्घटना के दौरान घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए पहले 3 घंटे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आम लोगों सहित हेल्थ केयर वर्करों को दुर्घटना के दौरान घायल व्यक्ति की जान बचाने और समय रहते उपचार की गहन तकनीक का पर्याप्त अनुभव होना चाहिए। इन्हीं उद्देश्यों को लेकर एम्स ऋषिकेश ने सप्ताहभर का एक राज्यस्तरीय वृहद कार्यक्रम आयोजित किया है।
सप्ताहभर के इस राज्यस्तरीय अभियान के तहत एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर अश्वनी कुमार दलाल, ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम और गायनी विभाग की हेड प्रोफेसर जया चतुर्वेदी ने संयुक्तरूप से हरी झंडी दिखाकर एम्स के ’ट्रॉमा रथ’ को रवाना किया। गौरतलब है कि 17 अक्टूबर को ’वर्ल्ड ट्रॉमा डे’ है। प्रत्येक वर्ष विश्वस्तर पर मनाए जाने वाले इस दिवस पर दुर्घटनाओं को रोकने और आघात चिकित्सा के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है।
इस बाबत ट्रॉमा रथ के प्रभारी और एम्स के ट्रॉमा सर्जन डॉ. अजय कुमार एवं डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कि यह कार्यक्रम एम्स ऋषिकेश और राज्य सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्तरूप से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस दौरान ट्रॉमा रथ में मौजूद ट्रॉमा विशेषज्ञ व चिकित्सक राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में पहुंचकर हेल्थ केयर वर्करों तथा मेडिकल स्टूडेंट्स को ट्रॉमा के प्रति जागरुक कर उन्हें आघात चिकित्सा का प्रशिक्षण देंगे। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश की पहल पर इस विषय पर राज्यभर के मेडिकल कॉलेज और चिकित्सा संस्थान एक ही मंच पर आए हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली मृत्यु दर को कम करना है। ’डिस्बिलिटी एडजस्टेड लाइफ इयर’ (डेली) पर फोकस यह कार्यक्रम 17 अक्टूबर को वर्ल्ड ट्रॉमा डे पर समाप्त होगा।

एम्स के गायनी विभाग में स्थापित हुआ इन विट्रो फर्टिलाइजेशन सेंटर

एम्स ऋषिकेश में अब इन विट्रो फर्टिलाइजेशन सेंटर (आईवीएफ) सुविधा शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में इस नई उपलब्धि के शुरू होने से उन परिवारों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा, जिन दंपतियों के शारीरिक कमी की वजह से बच्चे नहीं हो पाते हैं। इस सुविधा के शुरू होने से अब बांझपन का दंश झेल रहे लोगों की समस्या का समाधान हो सकेगा। इसके साथ ही उत्तराखंड में एम्स, ऋषिकेश पहला सरकारी स्वास्थ्य संस्थान बन गया है जहां यह सुविधा शुरू की गई है।
गौरतलब है कि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) एक सहायक प्रजनन तकनीक है, जहां भ्रूण के उत्पादन के लिए एक प्रयोगशाला में एक अंडे को शुक्राणु के साथ जोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया में एक महिला रोगी के अंडाशय को हार्माेनल दवाओं के साथ उत्तेजित करना, अंडाशय (डिंब पिकअप) से अंडों को निकालना और शुक्राणु को एक प्रयोगशाला में एक विशेष तकनीक के माध्यम से उन्हें निषेचित करना शामिल है। निषेचित अंडे (जाइगोट) के 2 से 5 दिनों के लिए भ्रूण संवर्धन से गुजरने के बाद, इसे एक सफल गर्भावस्था की स्थापना के लिए उसी या किसी अन्य महिला के गर्भाशय में डाला जाता है। इस तकनीक का उपयोग महिलाओं में बांझपन के प्रमुख कारणों (ट्यूबल क्षति, एंडोमेट्रियोसिस, खराब डिम्बग्रंथि रिजर्व, पीसीओएस आदि) या पुरुष कारक (असामान्य वीर्य पैरामीटर आदि) या दोनों वाले जोड़ों में किया जाता है।
एम्स ऋषिकेश के निदेशक और सीईओ प्रोफेसर अरविंद रघुवंशी ने संस्थान के गायनी विभाग में आईवीएफ सेंटर का विधिवत उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश में कई दंपति बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं। जो महिलाएं बांझपन की समस्या से ग्रसित हैं, उन्हें सामाजिक कलंक, वर्जना और मानसिक प्रभावों का भी सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश में आईवीएफ केंद्र खुलने से उत्तराखंड और आसपास के शहरों में रहने वाले ऐसे सभी लोगों को लाभ मिल सकेगा जो संतान सुख से वंचित हैं और इस सुविधा से माता-पिता का सुख प्राप्त करना चाहते हैं।
डीन एकेडेमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने कहा कि इस सुविधा को शुरू करने वाला एम्स अस्पताल स्वास्थ्य क्षेत्र में राज्य का पहला सरकारी संस्थान है। उन्होंने कहा कि क्योंकि अभी तक यह बेहद जटिल और महंगा इलाज हुआ करता था, इसलिए अब एम्स ऋषिकेश में शुरू की गई इस सुविधा से मध्यम वर्ग के दंपति भी अपना उपचार करा सकेंगे।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर अश्वनी कुमार दलाल ने कहा कि आज के दौर में ऐसे मेरीड कपल्स की संख्या ज्यादा बढ़ रही है जिनकी अपनी कोई संतान नहीं है। इस सुविधा से पुरुष बांझपन और महिला बांझपन दोनों की समस्याओं का निदान संभव है।
प्रसूति और स्त्री रोग विभाग की प्रमुख तथा एम्स के आईवीएफ केंद्र की प्रभारी प्रोफेसर जया चतुर्वेदी ने इस बाबत बताया कि गायनी विभाग पिछले 4 वर्षों से बांझपन वाले जोड़ों का प्रबंधन कर रहा है। इसमें बांझ दंपति का काम, ओव्यूलेशन इंडक्शन, फॉलिक्युलर मॉनिटरिंग, बांझपन के लिए लेप्रोस्कोपिक और हिस्टेरोस्कोपिक सर्जरी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि यह विभाग इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की गाइडलाइन के अनुसार 45 वर्ष तक की महिलाओं और 50 वर्ष तक के पुरुषों के लिए यह सुविधा प्रदान करेगा।
आईवीएफ केन्द्र की नोडल अधिकारी डॉ.लतिका चावला ने केन्द्र में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में कहा कि आईवीएफ केंद्र में पुरूष शुक्राणुओं की जांच हेतु एंड्रोलॉजी लैब ने कार्य करना शुरू कर दिया है और केन्द्र में अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (आईयूआई) की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा इस केन्द्र में आईवीएफ प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। उन्होंने बताया कि निकट भविष्य में एम्स ऋषिकेश संतान से वंचित ऐसे माता-पिता का भी इलाज करेगा, जिनके शरीर में अण्डाणु या शुक्राणु नहीं बनते और जिन्हें स्पर्मदाता की आवश्यकता होती है।
कार्यक्रम के दौरान अस्पताल प्रशासन के प्रोफेसर यूबी मिश्रा, प्रशासनिक अधिकारी शशिकांत, वित्तीय सलाहकार कमांडेंट पीके मिश्रा, गायनी विभाग की प्रोफेसर शालिनी राजाराम, डॉ. अनुपमा बहादुर, डॉ. कविता खोईवाल, डॉ. अमृता गौरव सहित कई अन्य मौजूद थे।