मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो अग्निवीरों के 40वीं वाहिनी पीएसी में समायोजन को दी मंजूरी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय सेना से नवंबर 2026 में सेवानिवृत्त होने जा रहे अग्निवीरों के पहले बैच के दो अग्निवीरों को 40वीं वाहिनी पीएसी में उपलब्ध रिक्त पदों के सापेक्ष समायोजित किए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदन प्रदान किया है।

संयुक्त सचिव, भारत सरकार द्वारा प्रेषित पत्र में अवगत कराया गया था कि भारतीय सेना में अग्निवीर योजना के अंतर्गत भर्ती हुए अग्निवीरों का पहला बैच नवंबर 2026 में सशस्त्र बलों से सेवामुक्त होने जा रहा है। इस क्रम में उत्तराखंड के दो अग्निवीरों के समायोजन की अपेक्षा की गई थी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रस्ताव पर सहमति प्रदान करते हुए 40वीं वाहिनी पीएसी में उपलब्ध रिक्त पदों के सापेक्ष दो अग्निवीरों के समायोजन को मंजूरी दी है। राज्य सरकार के इस निर्णय से सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों को आगे भी सेवा का अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू की गई अग्निपथ योजना देश के युवाओं में अनुशासन, राष्ट्रसेवा और कर्तव्यनिष्ठा की भावना को सशक्त कर रही है। अग्निवीर भारतीय सेना में सेवा के दौरान जो कौशल, अनुभव और अनुशासन अर्जित करते हैं, वह राष्ट्र की अमूल्य पूंजी है। हमारी सरकार अग्निवीरों के योगदान और उनकी क्षमताओं का सम्मान करती है। हमारा प्रयास है कि देश की सेवा कर चुके इन युवाओं को आगे भी प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिले और उनके सैन्य अनुभव, अनुशासन एवं दक्षता का लाभ राज्य को प्राप्त हो। उत्तराखंड सरकार युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्रसेवा के उनके संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

निर्माण कार्यों में कक्षाओं के साथ प्रयोगशालाओं के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न विभागों के प्रस्तावों पर सहमति प्रदान की गई। मुख्य सचिव ने विभागों के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की एवं दिशा निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने उच्च शिक्षा विभाग के डिग्री कॉलेजों के निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान कार्यदायी संस्था मंडी परिषद द्वारा विभिन्न विभागों के निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सम्बन्धित अधिकारियों को कार्यों की समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी कार्यों की समय-सीमा निर्धारित करते हुए प्रगति की कार्ययोजना प्रस्तुत किये जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं एवं कक्षाओं के साथ प्रयोगशालाओं के निर्माण को प्राथमिकता दी जाए, ताकि विद्यार्थियों की तात्कालिक आवश्यकताओं को समय पर पूरा किया जा सके। उन्होंने आवश्यकतानुसार परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करते हुए चरणबद्ध तरीके से कार्यों को पूरा किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने डिग्री कॉलेजों में परीक्षा भवन निर्माण में परीक्षा हॉल को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) के अनुकूल बनाने की संभावनाएं तलाशने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद में कम से कम एक ऐसा परीक्षा केंद्र विकसित किया जाना चाहिए, जहां कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) एवं उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की प्रतियोगी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित प्रणाली से आयोजित की जा सकें। इससे प्रदेश में परीक्षा आयोजन की क्षमता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि आईटीआई भवनों के निर्माण में सभी आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रशिक्षुओं को गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध हो सके।

अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच व कार्यवाही को लेकर पुलिस ने की प्रेसवार्ता

अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था), उत्तराखंड डॉ. वी. मुरुगेशन ने पुलिस मुख्यालय, देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच एवं न्यायिक कार्यवाही के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।

डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि वर्ष 2022 में ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में कार्यरत युवती स्व. अंकिता भंडारी के साथ हुई दुखद घटना में उत्तराखंड पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई की। पुलिस टीमों ने आपसी समन्वय से घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया था।

अपर पुलिस महानिदेशक ने बताया कि घटना की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। डीआईजी स्तर की महिला आईपीएस अधिकारी को एसआईटी का अध्यक्ष बनाया गया, ताकि प्रकरण की गहन एवं प्रभावी जांच सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने बताया कि एसआईटी ने प्रकरण की जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक एवं भौतिक साक्ष्यों का गहनता से संकलन किया। इसके अतिरिक्त अभियुक्तों से विस्तृत पूछताछ, फॉरेंसिक रिपोर्टों एवं गवाहों के बयानों सहित सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया गया। एसआईटी ने 88 दिनों में जांच पूरी कर लगभग 500 पृष्ठों का विस्तृत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।

डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि उत्तराखंड शासन द्वारा प्रकरण की त्वरित सुनवाई एवं प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रयास किए गए। एसआईटी द्वारा संकलित ठोस साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप 30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर एवं अंकित गुप्ता को दोषी करार देते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। तीनों दोषी वर्तमान में जेल में बंद हैं और आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।

सतत विकास की पहलों में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी जरूरीः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने दून विश्वविद्यालय में “बदलती जलवायु में हिमालयः आपदाएं, सतत विकास एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में उत्पन्न हो रही चुनौतियों के समाधान, आपदाओं के प्रभावी आंकलन और जोखिमों को कम करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। इसके लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग करने के साथ ही सतत विकास की योजनाओं में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।

मुख्य सचिव ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता और यहां की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आपदाओं के आंकलन, उनके संभावित प्रभावों का पूर्वानुमान लगाने तथा प्रभावी योजना निर्माण में नवीन तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित समाधान स्थानीय आवश्यकताओं और परिस्थितियों के अनुरूप होने चाहिए, ताकि उनका लाभ आमजन तक पहुंच सके।

संगोष्ठी में दक्षिण कैरोलिना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं आईएआईआरओ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा संस्थापक निदेशक प्रो. अमित शेठ ने एआई की उभरती तकनीक ‘स्मॉल एआई’ की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कम संसाधनों में सुलभ एवं प्रभावी तकनीकी समाधान विकसित कर भारत की विशिष्ट विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है। हिमालयी क्षेत्र में एक के बाद एक उत्पन्न होने वाली आपदाओं की चुनौतियों से निपटने में भी इन तकनीकों का उपयोग महत्वपूर्ण हो सकता है।

अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के संयुक्त सचिव डॉ. निशांत वर्मा ने दून विश्वविद्यालय में विकसित हो रहे शोध एवं अनुसंधान के वातावरण की सराहना की। उन्होंने देश में अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा शोध के लिए अनुकूल वातावरण विकसित करने में एएनआरएफ की भूमिका पर प्रकाश डाला।

दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध संबंधी उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों एवं शोधार्थियों के प्रयासों से अनुसंधान गतिविधियों को निरंतर सशक्त किया जा रहा है।

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में उत्पन्न हो रहे खतरों, आपदा आकलन एवं जोखिम न्यूनीकरण, सतत विकास की संभावनाओं तथा शोध, नियोजन एवं निर्णय प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान एवं परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी। संगोष्ठी में दिल्ली विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं दून विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। संगोष्ठी के संयोजक एवं भूविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार सहित अन्य उपस्थित रहे।

सीएम ने किया दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह में 63 मेधावियों व प्रधानाचार्यों को सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित पं. दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार वितरण समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं में शीर्ष 10 स्थान प्राप्त करने वाले 63 मेधावी छात्र-छात्राओं तथा उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले छह विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया।

समारोह में हाईस्कूल के 38 और इंटरमीडिएट के 25 मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। हाईस्कूल परीक्षा में अक्षत गोपाल ने 98.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि इंटरमीडिएट परीक्षा में गीतिका पंत एवं सुशीला मेहंदीरत्ता ने संयुक्त रूप से 98 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। इसके साथ ही हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट स्तर पर उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले तीन-तीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को प्रशस्ति पत्र एवं मुख्यमंत्री ट्रॉफी से सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित मेधावी छात्र-छात्राओं एवं प्रधानाचार्यों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। इसमें शिक्षकों और अभिभावकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 में प्रदेश का हाईस्कूल परीक्षाफल 92.10 प्रतिशत तथा इंटरमीडिएट का परीक्षाफल 85.11 प्रतिशत रहा, जो सराहनीय उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के विद्यार्थी भविष्य में भी अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बल पर राज्य एवं देश का नाम रोशन करेंगे।

मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय का स्मरण करते हुए कहा कि वे एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता होने के साथ ही महान विचारक, शिक्षाविद् और समाजसेवी थे। उनका मानना था कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसमें राष्ट्रप्रेम, नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और व्यावहारिक ज्ञान का भी समावेश होना चाहिए। उनके विचार आज भी एक शिक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उत्तराखंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार शिक्षा में नवाचार, डिजिटल लर्निंग और भारतीय जीवन मूल्यों को बढ़ावा देने के साथ ही विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दे रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा नंदा गौरा योजना के अंतर्गत 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाली पात्र छात्राओं को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम एवं सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित किए गए हैं तथा सरकारी विद्यालयों में एनसीईआरटी की पुस्तकों को अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही विद्यालयों की प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान और नई तकनीकों की समझ विकसित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के माध्यम से अनाथ बच्चों की निःशुल्क शिक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अपनी प्रतिभा को निखारने के समान अवसर प्राप्त हों।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के पूर्ण साक्षर राज्य बनने की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने इस अभियान से जुड़े शिक्षकों, अधिकारियों, स्वयंसेवकों और प्रदेशवासियों के योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि हमारी मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अब प्रत्येक नागरिक को डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और जीवनोपयोगी कौशल से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक नई तकनीकों का उपयोग अपने जीवन को बेहतर बनाने, आजीविका को मजबूत करने और समाज की प्रगति में योगदान देने के लिए कर सके, इसके लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। इस संकल्प को साकार करने में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के मेधावी विद्यार्थी अपने ज्ञान, कौशल और परिश्रम के बल पर सफलता के नए आयाम स्थापित करेंगे तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक सविता कपूर, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव शिक्षा नमामि बंसल एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंडः किसानों को आपदा राहत मानकों के अतिरिक्त समान राशि की सहायता देने के निर्देश

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके तहत कृषि, औद्यानिकी एवं गन्ने की फसलों को हुए नुकसान के लिए निर्धारित आपदा राहत मानकों के अतिरिक्त समान राशि की सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही प्रभावित किसानों के बिजली बिलों के भुगतान को स्थगित करने और किसान क्रेडिट कार्ड (ज्ञब्ब्) ऋण की अदायगी में राहत दिलाने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को निर्धारित आपदा राहत मानकों के अंतर्गत मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त समान राशि की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। इससे फसलों को हुए नुकसान के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे किसानों को राहत मिलेगी और उन्हें आगामी कृषि एवं औद्यानिकी गतिविधियों को जारी रखने में मदद मिलेगी।

तीन माह के बिजली बिलों का भुगतान रहेगा स्थगित

प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक राहत देने के उद्देश्य से अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर माह के विद्युत बिलों का भुगतान स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है। इससे प्रभावित किसानों पर तत्काल वित्तीय बोझ कम होगा और उन्हें फसल क्षति से उबरने के लिए कुछ राहत मिल सकेगी।

ज्ञब्ब् ऋण की अदायगी स्थगित करने के लिए केंद्र से अनुरोध

राज्य सरकार ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को ऋण भुगतान में राहत दिलाने के लिए भी प्रयासरत है। इसके तहत किसान क्रेडिट कार्ड (ज्ञब्ब्) ऋण की अदायगी तीन माह तक स्थगित करने का अनुरोध करते हुए भारत सरकार के वित्त मंत्रालय को पत्र भेजा जाएगा। इससे प्रभावित किसानों को ऋण चुकाने के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा और उन्हें प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न कठिनाइयों से उबारने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसानों की आजीविका और कृषि गतिविधियों को सुरक्षित बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे।

राज्य सरकार के इन निर्णयों से ओलावृष्टि के कारण फसल क्षति झेल रहे किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, उनकी तात्कालिक वित्तीय परेशानियों को कम करने और आगामी कृषि कार्यों को सुचारु रूप से जारी रखने में मदद मिलेगी।

उत्तराखंड दिवस सम्मेलन में प्रवासी उत्तराखण्ड वासियों से हो सार्थक संवादः सुधांशु

प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु की अध्यक्षता में सचिवालय में प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन-2026 की तैयारियों के संबंध में गठित समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सम्मेलन के सफल आयोजन, व्यापक प्रचार-प्रसार तथा प्रवासी उत्तराखण्डियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।

प्रमुख सचिव ने इस सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप, युवा-केंद्रित एवं नवाचारपूर्ण स्वरूप में आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि यह आयोजन अपनी विशिष्ट पहचान बना सके। उन्होंने देश के विभिन्न प्रांतों एवं शहरों में रहकर अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे प्रवासी उत्तराखण्डियों को चिह्नित कर सम्मेलन में आमंत्रित करने पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से प्रवासी उत्तराखण्डियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करने तथा राज्य के विकास में उनके अनुभवों, सुझावों एवं योगदान का लाभ लेने के प्रयास किये जाएं।

बैठक में अवगत कराया गया कि तृतीय प्रवासी उत्तराखण्डी दिवस के लिए पंजीकरण प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। सम्मेलन का आयोजन देहरादून स्थित दून विश्वविद्यालय के नित्यानंद ऑडिटोरियम में किया जाएगा। प्रमुख सचिव ने संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर सम्मेलन की विस्तृत रूपरेखा अंतिम रूप से तैयार करने तथा तैयारियों की प्रगति के संबंध में तीन-चार दिन में अपडेट देने के निर्देश दिए।

प्रमुख सचिव ने सम्मेलन के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए मीडिया, विज्ञापन, होर्डिंग्स एवं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रभावी अभियान चलाने को कहा। उन्होंने स्थानीय स्तर पर आमंत्रित अतिथियों को चिह्नित करने के साथ ही उनके आवागमन, परिवहन, वाहनों, ठहरने एवं भोजन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने उद्घाटन सत्र से लेकर विभिन्न सत्रों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों आदि के आयोजन की व्यवस्थाओं को भी समयबद्ध रूप से पूरा करने को कहा।

उन्होंने आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, पहुंच मार्गों को व्यवस्थित रखने तथा परिवहन व्यवस्था को सुचारु बनाने के निर्देश दिए। सम्मेलन के दौरान राज्य सरकार के विकास कार्यों, विभिन्न योजनाओं एवं नीतियों पर आधारित लघु फिल्मों का प्रसारण भी किया जाएगा, जिससे प्रवासी उत्तराखण्डियों को राज्य में हो रहे विकास कार्यों एवं विभिन्न क्षेत्रों में संचालित पहलों की जानकारी मिल सके। प्रमुख सचिव ने इन सभी व्यवस्थाओं के लिए संबंधित विभागों को पत्र प्रेषित कर आपसी समन्वय के साथ सभी आवश्यक तैयारियां समय से पूर्ण करने के भी निर्देश दिए।

उत्तराखंड में शिक्षा विभाग विदेशी भाषाओं के लिए करेगा कार्ययोजना तैयार

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में प्रदेश के युवाओं को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण प्रदान करने तथा उनके लिए रोजगार के नए अवसर विकसित करने के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि विदेशी भाषा प्रशिक्षण को व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम के रूप में विकसित किया जाए, ताकि स्कूली विद्यार्थियों, आईटीआई विद्यार्थियों, चिकित्सा एवं नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े युवाओं के साथ ही अन्य इच्छुक व्यक्तियों को इसका लाभ मिल सके।

मुख्य सचिव ने कार्मिक एवं वित्त विभाग को सम्बन्धित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए एक समग्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को वैश्विक रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित कर उनके लिए रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि विदेशी भाषाओं के प्रशिक्षण के लिए गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम तैयार किया जाए, जिसे प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से संचालित किया जा सके। उन्होंने शिक्षा विभाग को प्रदेश के सभी अटल उत्कृष्ट विद्यालयों एवं राजीव नवोदय विद्यालयों में अंग्रेजी के अतिरिक्त अन्य विदेशी भाषाओं के प्रशिक्षण के लिए योजना तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि कौशल विकास एवं सेवायोजन कार्यालय द्वारा वर्तमान में देहरादून, अल्मोड़ा एवं बागेश्वर में संचालित विदेशी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रमों को विस्तारित करते हुए प्रदेशभर में शुरू किया जाए। उन्होंने प्रत्येक जनपद में विदेशी भाषा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करते हुए, कौशल विकास विभाग के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में संचालित हो रहे केन्द्रों को भी इसमें शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण कार्यक्रमों को रोजगार की वास्तविक मांग के अनुरूप विदेशी भाषा में दक्ष युवाओं को देश-विदेश में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए सम्बन्धित एजेंसियों के साथ निरन्तर समन्वय किया जाए। उन्होंने प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ ही युवाओं को मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किए जाने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए दून विश्वविद्यालय से विदेशी भाषाओं की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की सेवाएं लेने की बात कही। कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें शैक्षणिक क्रेडिट अथवा अन्य प्रोत्साहन देने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने नर्सिंग पाठ्यक्रम में विदेशी भाषाओं को शामिल करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में लगभग 600 युवा नर्सिंग प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, इन नर्सिंग विद्यार्थियों को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण उपलब्ध कराना इन के लिए उपयोगी होगा।

सीएम धामी का दोटूक संदेश, सड़कें गड्ढामुक्त हों, विकास कार्यों में गुणवत्ता से समझौता हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में देर रात्रि तक प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (डीएम) एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) के साथ लगभग चार घंटे लंबी मैराथन उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में प्रदेश में विकास कार्यों की प्रगति, जनसुविधाओं, कानून-व्यवस्था, आगामी त्योहारों की तैयारियों, आपदा प्रबंधन, निर्वाचन संबंधी कार्यों, जिला योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा हरिद्वार कुंभ-2027 की तैयारियों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में गृह सचिव, गढ़वाल एवं कुमाऊँ मंडल के आयुक्तों तथा दोनों पुलिस परिक्षेत्रों के पुलिस महानिरीक्षकों सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप सभी कार्य समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुखी तरीके से पूरे किए जाएं। जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनावश्यक विलंब अथवा जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना, उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना और प्रदेश में सुशासन की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना है। अधिकारियों को केवल कार्यालयों तक सीमित न रहकर नियमित रूप से फील्ड में जाने, जमीनी स्थिति का आकलन करने तथा समस्याओं का मौके पर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने में लापरवाही पर होगी जवाबदेही तय

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सड़कों की स्थिति की समीक्षा करते हुए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने-अपने जनपदों में सड़कों का स्थलीय निरीक्षण कर लंबित मरम्मत कार्यों को तत्काल शुरू कराया जाए। सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने के अभियान में तेजी लाते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं स्वयं भी बहुत जल्द पूरे प्रदेश का दौरा सड़क मार्ग से करूंगा। यदि कहीं भी सड़क टूटी हुई मिली या मरम्मत कार्य में लापरवाही सामने आई, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि केवल कागजों पर प्रगति दिखाने के बजाय धरातल पर कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। जिलाधिकारी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर लंबित कार्यों की नियमित समीक्षा करें और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराएं।

एक नवंबर तक पूरे हों सीवर और पेयजल पाइपलाइन के अधूरे कार्य

मुख्यमंत्री ने सीवर एवं पेयजल पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधूरे कार्यों को ’एक नवंबर तक पूर्ण कर खोदी गई सड़कों की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित की जाए’, ताकि आम नागरिकों, व्यापारियों और यात्रियों को आवागमन में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के साथ समन्वय बैठक कर कार्यों की नियमित समीक्षा करें। आगामी त्योहारों को देखते हुए बाजारों, आवासीय क्षेत्रों और प्रमुख मार्गों पर विशेष ध्यान दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी विभाग की लापरवाही के कारण जनसामान्य को असुविधा न हो।

नगर निकायों में स्वच्छता व्यवस्था हो प्रभावी, कहीं भी जमा न हो कूड़ा-कचरा

मुख्यमंत्री ने सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और अन्य नगरीय निकायों में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहरों और कस्बों में नियमित सफाई होनी चाहिए तथा कहीं भी कूड़ा-कचरा एकत्रित नहीं होने दिया जाए। सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, प्रमुख मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता केवल अभियान तक सीमित न रहे, बल्कि इसे नियमित प्रशासनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया जाए। संबंधित अधिकारी सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करें और जहां भी कमी मिले, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

राजस्व मामलों का समयबद्ध निस्तारण, जनता को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें

मुख्यमंत्री ने राजस्व से संबंधित मामलों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब पर रोक लगाने के निर्देश देते हुए कहा कि पटवारी और तहसीलदार अपने स्तर पर मामलों का नियमानुसार एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। आम नागरिकों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्यप्रणाली जनसुविधा केंद्रित होनी चाहिए। राजस्व मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सुनिश्चित की जाए। जिलाधिकारी लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें तथा जिन मामलों में अनावश्यक देरी हो रही है, उनके कारणों का पता लगाकर जिम्मेदारी तय करें।

ैप्त् के अंतर्गत पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने और निर्वाचन आयोग के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें

मुख्यमंत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण (ैप्त्) के अंतर्गत मतदाता सूची से संबंधित कार्यों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने तथा अपात्र प्रविष्टियों के नियमानुसार निस्तारण की प्रक्रिया में पूरी सावधानी और पारदर्शिता बरती जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मतदाताओं को आवश्यक जानकारी एवं सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया से अनावश्यक रूप से वंचित न रहे। संबंधित अधिकारी निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें और पुनरीक्षण से संबंधित कार्यों की नियमित निगरानी करें।

जिला योजना के कार्य समयबद्ध पूरे हों, स्वीकृत धनराशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए

मुख्यमंत्री ने जिला योजना के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराए जाएं तथा अवमुक्त धनराशि का प्रभावी और नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने जिलाधिकारियों को विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश देते हुए कहा कि कार्यों की गुणवत्ता, वास्तविक प्रगति और योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए। केवल धनराशि व्यय करना ही लक्ष्य न हो, बल्कि योजनाओं का लाभ धरातल पर दिखाई देना चाहिए। विकास कार्यों में अनावश्यक देरी अथवा गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।

पुलिस के पास शिकायत लेकर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की बात गंभीरता से सुनी जाए, संज्ञेय अपराधों में तत्काल थ्प्त् दर्ज हो

मुख्यमंत्री ने पुलिस व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, संवेदनशील और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास शिकायत लेकर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की बात गंभीरता से सुनी जाए तथा उसकी शिकायत पर नियमानुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि संज्ञेय अपराधों के मामलों में नियमानुसार तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और उसके बाद शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसी भी पीड़ित को शिकायत दर्ज कराने अथवा न्याय पाने के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

उन्होंने थाना एवं चौकी स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा करने, जनशिकायतों के निस्तारण में तेजी लाने तथा अपराध नियंत्रण के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सतत निगरानी के निर्देश

मुख्यमंत्री ने सभी जनपदों में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों, सांप्रदायिक सौहार्द, यातायात व्यवस्था और अपराध नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाए।

उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी अप्रिय घटना की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। संवेदनशील परिस्थितियों में पुलिस एवं प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखते हुए शांति, सुरक्षा और कानून के शासन को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए।

मुख्यमंत्री ने थाना एवं चौकी प्रभारियों के कार्यों की नियमित समीक्षा करने और अपराध नियंत्रण, रात्रि गश्त, जनशिकायतों के निस्तारण तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने में लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।

त्योहारों पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में किसी प्रकार की चूक न हो

मुख्यमंत्री ने आगामी नवरात्र और दीपावली के दृष्टिगत प्रदेशभर में सुरक्षा एवं यातायात की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाजारों, मंदिरों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जाए। पार्किंग, यातायात डायवर्जन, वैकल्पिक मार्गों और आपातकालीन सेवाओं की समुचित व्यवस्था पहले से सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री ने महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा। पुलिस अधिकारी संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण करें और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी कार्ययोजना तैयार करें। त्योहारों के दौरान यातायात सुचारु रहे और आम नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध हो।

ऑपरेशन कालनेमि और सत्यापन अभियान में लाई जाए तेजी

मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन कालनेमि एवं सत्यापन अभियान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि आगामी त्योहारों तथा हरिद्वार कुंभ-2027 को ध्यान में रखते हुए इन अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। धार्मिक स्थलों, पर्यटन क्षेत्रों, भीड़भाड़ वाले स्थानों और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाए।

उन्होंने संदिग्ध गतिविधियों और आपराधिक तत्वों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सत्यापन अभियान प्रभावी तरीके से संचालित किया जाए तथा थाना एवं चौकी स्तर पर पुलिस की सक्रियता बढ़ाई जाए।

मसूरी, नैनीताल, हरिद्वार और ऋषिकेश के लिए पहले से तैयार हो ट्रैफिक प्लान

मुख्यमंत्री ने शीतकालीन पर्यटन एवं यात्रा सीजन को देखते हुए मसूरी, नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश सहित प्रदेश के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों के लिए अग्रिम यातायात योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त पुलिस बल, पार्किंग स्थलों, वैकल्पिक मार्गों और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने यातायात संबंधी सूचनाएं समय पर जारी करने तथा प्रमुख मार्गों पर अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के विरुद्ध संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश दिए। अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा कब्जा न हो, इसके लिए नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

कुंभ-2027 की तैयारियों की हर सप्ताह होगी समीक्षा

मुख्यमंत्री ने हरिद्वार कुंभ-2027 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण करें। सड़कों, पुलों, घाटों, पेयजल, सीवरेज, स्वास्थ्य सुविधाओं, पार्किंग और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं की साप्ताहिक समीक्षा सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि कुंभ जैसे महत्वपूर्ण आयोजन की तैयारियों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। प्रत्येक परियोजना के लिए समयसीमा निर्धारित की जाए और कार्यों की प्रगति की नियमित निगरानी हो। किसी परियोजना में देरी होने पर उसके कारणों का तत्काल समाधान किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को कुंभ क्षेत्र में पूर्ण हो चुके घाटों, सड़कों, पार्किंग स्थलों, अस्पतालों तथा अन्य सुविधाओं का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों को तत्काल दूर किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सुगम आवागमन सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कुंभ के अंतर्गत पूर्ण हो चुके विकास कार्यों और उपलब्ध कराई गई सुविधाओं की जानकारी फोटो, वीडियो तथा तथ्यात्मक विवरण के साथ मीडिया एवं डिजिटल माध्यमों से साझा करने के निर्देश भी दिए।

आपदा प्रभावितों को तत्काल राहत और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराएं

मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत एवं सहायता उपलब्ध कराई जाए। प्रभावितों के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं तथा सुरक्षित आवास की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित हो।

उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण है। प्रभावित परिवारों को सहायता के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े। अधिकारी स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करें और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की नियमित निगरानी करें।

दुर्गम क्षेत्रों में डॉक्टरों और एएनएम की उपलब्धता सुनिश्चित करें

मुख्यमंत्री ने पर्वतीय, दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और एएनएम की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा स्वास्थ्य वैन को पूरी तरह दुरुस्त रखते हुए निर्धारित रोस्टर के अनुसार संचालित किया जाए।

उन्होंने कहा कि भौगोलिक कठिनाइयों के कारण किसी भी नागरिक को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा से वंचित नहीं रहना चाहिए। संबंधित अधिकारी स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित समीक्षा करें और जहां भी संसाधनों या कार्मिकों की कमी हो, उसके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए बने प्रभावी कार्ययोजना

मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों और आबादी से सटे इलाकों में भालू, तेंदुए सहित अन्य वन्यजीवों के कारण होने वाली घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय से त्वरित कार्रवाई करें।

प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, जनजागरूकता और आवश्यक सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाया जाए। वन्यजीवों के हमलों में प्रभावित परिवारों को नियमानुसार शीघ्र मुआवजा उपलब्ध कराया जाए तथा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

प्रभारी सचिव प्रत्येक 15 दिन में करेंगे जनपदों का भ्रमण, विकासखंडवार होगी समीक्षा

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संबंधित जनपदों के प्रभारी सचिव प्रत्येक 15 दिन में आवंटित जनपद का भ्रमण करें। भ्रमण के दौरान जनपदवार और विकासखंडवार समीक्षा करते हुए विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं, जनसुविधाओं, कानून-व्यवस्था तथा बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की प्रगति का आकलन किया जाए।

उन्होंने कहा कि समीक्षा केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए। जहां भी कोई समस्या, बाधा या अनावश्यक विलंब सामने आए, वहां संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर उसका समाधान सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि वे इस व्यवस्था की प्रभावी मॉनिटरिंग करें। सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि शासन के निर्देशों का धरातल पर समयबद्ध क्रियान्वयन हो और आम जनता को उसका प्रत्यक्ष लाभ मिले।

अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही होगी तय

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से फील्ड में जाकर कार्यों की प्रगति का निरीक्षण करें। जनहित से जुड़े कार्यों में समन्वय की कमी, लापरवाही या अनावश्यक विलंब को गंभीरता से लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। जनता को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराना, शिकायतों का समाधान करना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना, विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना प्रशासन की कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शासन की मंशा के अनुरूप काम करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लापरवाही बरतने और जिम्मेदारी से बचने वाले अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों से जनहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी प्रतिबद्धता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करने की अपेक्षा की।

उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों को सड़क सुविधा से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (च्डळैल्) के अंतर्गत ग्रामीण सड़क संपर्क के विस्तार, पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत सड़क एवं सेतु निर्माण के प्रस्तावों की स्वीकृति के संबंध में विस्तृत चर्चा की। इस दौरान प्रदेश में ग्रामीण कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण (च्डळैल्-प्ट) के अंतर्गत प्रस्तुत प्रस्तावों पर सकारात्मक सहमति बनी। केंद्रीय मंत्री ने राज्य के प्रस्तावों पर शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-4 के तहत ₹2,708 करोड़ के कार्यों को शीघ्र स्वीकृति देने पर सहमति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों, पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन की चुनौतियों तथा ग्रामीण आबादी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के अंतर्गत राज्य द्वारा व्यापक स्तर पर सड़क एवं सेतु निर्माण के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-4 के अंतर्गत उत्तराखंड के लिए ’315 मोटर मार्गों, जिनकी कुल लंबाई 1,777 किलोमीटर है, के निर्माण हेतु ₹2,526 करोड़ की लागत के प्रस्ताव’ प्रस्तुत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, इन प्रस्तावों के अंतर्गत ’32 सेतुओं के निर्माण के लिए ₹182 करोड़’ की लागत प्रस्तावित है। इस प्रकार सड़क एवं सेतु निर्माण से संबंधित इन कार्यों की कुल प्रस्तावित लागत ’₹2,708 करोड़’ है।

बैठक में इन 315 मोटर मार्गों तथा 32 सेतुओं से संबंधित कार्यों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की गई। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से प्रदेश के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विस्तार होगा और लंबे समय से बेहतर आवागमन की आवश्यकता महसूस कर रहे क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।

610 बसावटों को सड़क संपर्क से जोड़ने का लक्ष्य, ग्रामीण विकास को मिलेगी मजबूती

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने का महत्वपूर्ण आधार है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विशेष महत्व है। ऐसे में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़क नेटवर्क का विस्तार राज्य की विकास प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश की 610 बसावटों को सड़क संपर्क से जोड़ने का लक्ष्य है। इन क्षेत्रों में सड़क सुविधा उपलब्ध होने से स्थानीय निवासियों को दैनिक आवागमन में सहूलियत मिलेगी। विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने, मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने तथा ग्रामीणों को रोजगार एवं आजीविका के अवसरों से जुड़ने में मदद मिलेगी।

सड़क संपर्क बेहतर होने से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार एवं उद्यमिता की संभावनाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इसके साथ ही पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय पर्यटन गतिविधियों और उनसे जुड़े व्यवसायों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार राज्य के संतुलित एवं समावेशी विकास के लिए आवश्यक है। सड़क संपर्क के माध्यम से गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी तथा दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।

213 अतिरिक्त सड़क प्रस्तावों पर भी शीघ्र स्वीकृति के लिए विचार करने का आश्वासन

बैठक के दौरान उत्तराखंड में ग्रामीण सड़क नेटवर्क के विस्तार से संबंधित अतिरिक्त प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय मंत्री को राज्य की आवश्यकताओं से अवगत कराते हुए बताया कि प्रदेश में ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए आगे भी व्यापक स्तर पर कार्य किए जाने की आवश्यकता है।

इस क्रम में 213 अतिरिक्त सड़क कार्यों के प्रस्ताव, जिनकी कुल लंबाई 1,360 किलोमीटर है, पर भी चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इन प्रस्तावों पर भी शीघ्र स्वीकृति के लिए विचार करने का आश्वासन दिया। इन अतिरिक्त प्रस्तावों पर सकारात्मक निर्णय होने से राज्य में ग्रामीण सड़क संपर्क के विस्तार को और गति मिलने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सड़क परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। सड़क सुविधाओं का विस्तार न केवल गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ेगा, बल्कि स्थानीय आबादी के लिए आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता को भी अधिक सुगम बनाएगा। राज्य सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से ग्रामीण आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पर्वतीय एवं सीमांत क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड के अनेक गांव प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत, कृषि एवं स्थानीय उत्पादों की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। बेहतर सड़क संपर्क इन क्षेत्रों की क्षमताओं को विकसित करने में सहायक होगा। सड़क सुविधा मजबूत होने से स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसरों से जोड़ने, ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में सड़क संपर्क की उपलब्धता आपातकालीन परिस्थितियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बेहतर मार्गों से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होती है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति अधिक सुगम बनती है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और जनकल्याणकारी सुविधाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने में भी सहायता मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचे और भौगोलिक कठिनाइयों के कारण कोई भी गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगी।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का जताया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के सड़क एवं सेतु निर्माण प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख अपनाने तथा उन्हें शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की दिशा में सहयोग का आश्वासन देने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में आधारभूत सुविधाओं के विकास को निरंतर गति मिल रही है। राज्य सरकार पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप सड़क नेटवर्क के विस्तार के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से उत्तराखंड में विकास कार्यों को नई गति मिल रही है। ग्रामीण सड़क संपर्क का विस्तार प्रदेश के समग्र विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती तथा आम नागरिकों के जीवन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रस्तावित सड़क एवं सेतु परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति मिलने से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा, दूरस्थ बसावटों की मुख्यधारा से कनेक्टिविटी मजबूत होगी और उत्तराखंड के समावेशी विकास के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।