वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण की सौगात


हर माह चन्द्रेश्वर नगर स्थित हिमालयन अस्पताल के सेंटर में आयोजित होगा स्वास्थ्य शिविर

मुख्य अतिथि एसआरएसयू के कुलपति डा. विजय धस्माना ने हिमालयन अस्पताल में अलग कांउटर व इलाज में छूट देने का भरोसा भी दिलाया
वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन ने 28वां स्थापना दिवस मनाया
ऋषिकेश।
वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन ऋषिकेश की ओर से 28वें स्थापना दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसआएसयू के कुलपति डा. विजय धस्माना ने हर माह वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य परीक्षण करने, हिमालयन अस्पताल में अलग काउंटर खोलने व इलाज में छूट प्रदान करने की संगठन की मांग को स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव की समाज को आवश्यकता है। सामाजिक जीवन के मूल्यों में हो रहे ह्रासमेंट को वरिष्ठ नागरिक ही रोक सकते है।
कार्यक्रम में विधायक प्रेमचन्द अग्रवाल ने वरिष्ठ नागरिकों से समाज को दिशा देने की अपील की। कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज का महत्वपूर्ण अंग है।105

नगर पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा ने संगठन की मांग पर गंगानगर के पार्क को वरिष्ठ नागरिकों को सौंपने की बात कही। कहा कि इसके लिए वह नगर पालिका बोर्ड में प्रस्ताव लायेंगे। कांग्रेस प्रदेश महासचिव राजपाल खरोला ने वरिष्ठ नागरिकों को समाज का अभिन्न अंग बताते हुए धरोहर बताया। कहाकि वरिष्ठ नागरिक सेवानिवृति के बाद सामाजिक मुद्दों पर कार्य करें, जिससे कि समाज में नवक्रांति का सृजन हो सकें। उन्होंने संगठन को पांच हजार रुपये की अनुग्रह धनराशि भी दी।
उत्तराखंड बोर्ड में नगर के 11 विद्यालयों के मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड क्वींज प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा अदिती धस्माना को भी संगठन ने सम्मानित किया। इससे पूर्व सन साइन स्कूल व संस्कार एकेडमी के बच्चों ने स्वागत गीत व सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संगठन के अध्यक्ष कमला प्रसाद भट्ट ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने संगठन के विस्तार की आवश्यकता करने पर जोर दिया। कहा कि पूर्व सैनिकों को भी संगठन से जोड़ने के लिए मुहिम चलाई जायेगी। संचालन महाचिव सतेन्द्र कुमार ने की।

 

 

पालिका में नगर स्वास्थ्य अधिकारी का पद ही सृजित नहीं


एक लाख आबादी फिर भी नगर स्वास्थ्य अधिकारी नहीं
ऋषिकेश नगर पालिका ए ग्रेड की होने के बाद भी अनदेखी

अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय से नगर पालिका ऋषिकेश ए ग्रेड का दर्जा मिला हुआ है। पालिका क्षेत्र की आबादी पर नजर डालें तो यहां की जनसंख्या एक लाख से ऊपर पहुंच गई है। सिस्टम की अनदेखी देखिए ऋषिकेश में नगर स्वास्थ्य अधिकारी का पद तक सृजित नहीं है।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी नगर निकाय में एक महत्वपूर्ण और जिम्मेदार अधिकारी होते हैं। सरकारी सेवा में कार्यरत वरिष्ठ चिकित्सक को यह पद दिया जाता है। पालिका और आसपास के क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी स्वास्थ्य अधिकारी की रहती है। कोई बीमारी या महामारी फैलने की स्थिति में नगर स्वास्थ्य अधिकारी की भूमिका अहम रहती है। कैंप लगवाना, कीटनाशक दवाओं का छिड़काव, मरीजों की जांच और रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराना होता है। इनदिनों में कुछ इलाकों में वायरल फीवर और टाइफाइड फैल रहा है। नगर पालिका के ही 55 कर्मचारी बीमार हैं। ऐसी स्थिति में नगर स्वास्थ्य अधिकारी का न होना बेहद खल रहा है। इस विषय पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

 

नगर स्वास्थ्य अधिकारी का पद सृजित न होना गंभीर विषय है। शासन स्तर पर मामले को देखा जाएगा। दो माह से चारधाम यात्रा के सीजनल सफाई कर्मचारियों के वेतन नहीं मिलने का मामला भी गंभीर है। इस मामले में पालिका ने मुझसे कभी संपर्क नहीं किया। पालिका को कर्मचारी नहीं हटाने चाहिए थे, अपने स्तर पर व्यवस्था करनी चाहिए थी। कभी-कभी शासन से बजट मिलने में देरी हो जाती है।
– सीएस नपल्चयाल, गढ़वाल कमिश्नर101

रेटिनोपैथी की जांच डायबिटीज मरीज के लिए फायदेमंद

मधुमेह (डायबिटीज) के ज्यादातर मरीजों में रेटिनोपैथी की आखिरी स्टेज आने तक भी पता नहीं चलता और तब तक उचित इलाज की संभावना भी कम रह जाती है। बीमारी फैलने की रफ्तार तेज हो सकती है, इसलिए रेटिनल रोग का ध्यान रखने के लिए मधुमेह रोगियों की नियमित जांच होती रहनी चाहिए। एचसीएफआई के प्रेसीडेंट और आईएमए के मानद महासचिव पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि आखों, दिल के रोगों, छोटी रक्त शिराओं के क्षतिग्रस्त होने के बेहद शुरुआती संकेत अन्य लक्षणों के नजर आने से पहले ही देती हैं।
रेटिनोपैथी वाले मधुमेह रोगियों की इस रोग के बिना वाले लोगों की तुलना में अगले बारह सालों में मौत होने की संभावना होती है। ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी और यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबोर्न व नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के अध्ययनों के मुताबिक, इस रोग से जो लोग पीड़ित नहीं है, उनकी तुलना में रेटिनोपैथी वाले रोगियों की दिल की बीमारी से मौत होने की संभावना करीब दोगुनी होती है।
आंखों में बदलाव से पीड़ितों को यह चेतावनी मिल सकती है कि उनकी रक्त धमनियों को क्षति पहुंच रही है और उनके लोअर कोलेस्ट्रॉल और लोअर ब्लडप्रेशर पर असर हो रहा है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इस बीमारी से रहित रोगियों की तुलना में रेटिनोपैथी वाले रोगियों को दिल के दौरे स्ट्रोक, रिव्सकुलराइजेशन व दिल के रोग से मौत होने की आशंका ज्यादा रहती है।

भाजपा का नमामि गंगे अभियान नौ से

राज्य ब्यूरो, देहरादून: भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड में नौ मई से नमामि गंगे अभियान का शुभारंभ करेगी। पार्टी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर संचालित होने वाले इस अभियान के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने पूर्व राष्ट्रीय सचिव व झारखंड प्रभारी त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में नमामि गंगे समिति गठित की है।

यह समिति गंगा संरक्षण व गंगा स्वच्छता के लिए देश में जागरूकता अभियान चलाएगी। मंगलवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में अभियान की तैयारी के संबंध में बैठक आयोजित की गई। नौ मई को महानगर कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत व नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट अभियान के प्रमुख त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ताओं को त्रिवेणीघाट ऋषिकेश के लिए रवाना करेंगे, जहां वे साधू-संतों व कार्यकर्ताओं के साथ गंगा आरती में शामिल होंगे। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष धन सिंह रावत, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुनील उनियाल, जितेंद्र नेगी, अमित कपूर आदि मौजूद थे।

अच्छी नींद के लिए सोने से पूर्व कुछ घंटे लगाएं नारंगी चश्मे

मुंबई। एक नए अध्ययन में पता चला है कि यदि आपको रात में अच्छी नींद लेनी है तो सोने से पहले कुछ घंटे नारंगी चश्मे लगा कर रखें। अध्ययन के मुताबिक नारंगी चश्मा इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन से उत्र्सिजत कुछ चुिंनदा तरंगधैर्य वाली प्रकाश किरणों (वेवलैंथ) को अवरुद्ध कर देता है, जिससे हमारे नींद चक्र में लचीलापन आता है और नींद में मदद मिलती है। १३ किशोरों द्वारा किए गए ाqस्वस अध्ययन में पता चला कि जब किशोरों ने नारंगी चश्मे लगाए तो इससे मेलाटोनिन किरणों के प्रवाह रुक गए, जिससे उन्हें रात में नीद में मदद मिली। अध्ययन में शामिल लड़कों ने रात में सोने से पहले औसत रूप से कुछ घंटों तक नारंगी चश्मे पहने। नारंगी चश्मे पहनने के उनके इस कदम की जांच की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि वयस्क लोगों पर नीली किरणों का प्रभाव कम पड़ता है।