विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अल्मोड़ा में 327 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान और शोध संस्थान (मेडिकल कालेज) का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मेडिकल कालेज के अवशेष निर्माण कार्यों को यथाशीध्र पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि एमसीआई की टीम द्वारा मेडिकल कालेज के निरीक्षण से पूर्व जो अवशेष कार्य एवं उपकरण आदि क्रय किये जाने हैं उन्हें यथाशीघ्र क्रय करना सुनिश्चित किया जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही मेडिकल कालेज में फैकल्टी की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान मेडिकल कालेज के फिजियोलॉजी कक्ष, एनाटोमी कक्ष, सर्वर कक्ष, हिस्ट्री कक्ष सहित अन्य कक्षों का निरीक्षण कर इससे जुड़े अधिकारियां एवं कार्यदायी संस्थओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।
चिकित्सा शिक्षा निदेशक डाॅ. वाईके पंत ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि इस परियोजना की कुल लागत 327 करोड़ रू0 स्वीकृत है जिसमे प्रथम एलओपी के निर्माण हेतु स्वीकृत धनराशि कुल 216.77 करोड़ रू0 है। वर्तमान तक कार्यदायी संस्था को 215 करोड़ रू0 अवमुक्त किये जा चुके हैं तथा निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनपद अल्मोड़ा के लिये कुल 9902.52 लाख रू0 की विकास योजनाओं का शिलान्यास एवं लोकापर्ण भी किया। जिसमें 6181.73 लाख रू0 की विकास योजनाओं का लोकार्पण तथा 3720.79 लाख रू0 की विकास योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। इन योजनाओं में प्रमुख रूप से शिक्षा, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, चिकित्सा, रेशम विभाग की योजनायें सम्मलित हैं।
इस अवसर पर प्रभारी मंत्री डाॅ. हरक सिहं रावत, सांसद अजय टम्टा, विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चैहान, कापरैटिव बैंक के अध्यक्ष ललित सिंह लटवाल, आयुक्त कुमाऊ मण्डल राजीव रौतेला, डीआईजी जगत राम जोशी आदि उपस्थित थे।

23 विकास योजनाओं की मुख्यमंत्री ने की घोषणा
वहीं, अल्मोड़ा में सम्पन्न हुई कैबिनेट बैठक के उपरान्त मुख्यमंत्री ने मीडिया को सम्बोधित करते हुए अल्मोड़ा जनपद के विकास से सम्बन्धित 23 विकास योजनाओं की घोषणा की। इन सभी योजनाओं का निर्माण मुख्यमंत्री घोषणा के तहत किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की, कि पवित्र जागेश्वर धाम में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान्ट (एसटीपी) का निर्माण किया जायेगा।
मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं में अल्मोडा पेयजल योजना के भाग-1 का सुदृृढीकरण कार्य, कटारमल पम्पिंग पेयजल योजना का निर्माण किया जायेगा, अल्मोड़ा सीवरेज जोन-3 योजना का निर्माण का निर्माण कार्य किया जायेगा, अल्मोड़ा शहर मंे बाजार का सौन्दर्यीकरण किया जायेगा, होटल मैनेजमैन्ट संस्थान अल्मोड़ा का सुदृृढीकरण एवं आधुनीकीकरण किया जायेगा, सिमतौला ईकों पार्क में ईकों टूरिज्म की गीत विधियों को बढ़ावा दिया जायेगा, जनपद अल्मोड़ा के अन्तर्गत डयोलीडाना में बैडमिन्टन हाॅल का निर्माण किया जायेगा, स्पोर्टस स्टेडियम में अवस्थापना सुविधाओं को सुदृृढ किया जायेगा, जनपद के 100 विद्यालयांे में ई लर्निंग सुविधा हेतु रू0 1.00 लाख प्रति विद्यालय की दर से धनराशि दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने ताड़ीखेत में स्थापित गांधी कुटीर के जीर्णोद्वार एवं हाल का निर्माण, नगर पालिका परिषद रानीखेत चिलियानौला के कार्यालय भवन की स्थापना, ताड़ीखेत में मिनी स्टेडियम की स्थापना, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लमगड़ा में भवन का निर्माण, कसारदेवी में स्प्रिीचुअल इकोनाॅमी जोन बनाये जाने, 200 आंगनवाडी केन्द्रों की स्थापना, शीतलाखेत महाविद्यालय एवं लमगड़ा महाविद्यालय के भवनों का निर्माण कार्य किये जाने की घोषणा शामिल है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा जनपद चम्पावत के विकास से सम्बन्धित 51, पिथौरागढ़ के लिये 22, बागेश्वर के लिये 7, नैनीताल के लिये 25 जबकि उधम सिंह नगर से सम्बन्धित 9 घोषणाये की गई।

पलायन आयोग की रिपोर्ट में खुलासा, अल्मोड़ा की रिपोर्ट से पलायन का सच आया सामने

उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव से लोग पलायन कर रहे हैं। अल्मोड़ा जनपद में वर्ष 2001 से 2011 तक दस सालों में करीब 70 हजार लोग पैतृक गांव से पलायन कर गए। 646 पंचायतों से 16207 लोगों ने स्थायी रूप से गांव छोड़ दिया है। इसका खुलासा पलायन आयोग की रिपोर्ट में हुआ है।
सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सीएम आवास पर पलायन आयोग की दूसरी बैठक आयोजित की गई। इसमें मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा जनपद की पलायन रिपोर्ट का विमोचन किया। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दस सालों में सल्ट, भिकियासैंण, चैखुटिया, स्याल्दे विकासखंड से सबसे ज्यादा लोगों ने पलायन किया है। इन ब्लाकों के कई गांवों में सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और आजीविका के साधन नहीं है, जिससे लोग जनपद मुख्यालय और प्रदेश के अन्य शहरी क्षेत्रों में जाकर बस गए हैं।
वर्ष 2001 से 2011 तक जनपद के 1022 ग्राम पंचायतों में 53611 लोगों ने पूर्ण रूप से पलायन नहीं किया है। ये लोग समय-समय पर अपने पैतृक गांव आते हैं। जबकि 646 पंचायतों में 16207 लोगों ने स्थायी रूप से पलायन किया है। अब इन लोगों के दोबारा वापस गांव लौटने की संभावनाएं नहीं हैं। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि जनपद की 11 विकासखंडों से 7.13 प्रतिशत लोगों ने गांव के नजदीकी शहरी क्षेत्रों में पलायन किया है।
जबकि 13 प्रतिशत ने जनपद मुख्यालय, 32.37 प्रतिशत ने प्रदेश के अन्य जनपदों में, 47.08 प्रतिशत लोग राज्य से बाहर पलायन कर चुके हैं। देश से बाहर पलायन करने वाले की संख्या 0.43 प्रतिशत है। 2011 के बाद जनपद के 80 गांवों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में 50 प्रतिशत आबादी कम हुई है। वहीं, 63 गांवों में सड़क, 11 गांवों में बिजली, 34 गांवों में एक किलोमीटर के दायरे में पेयजल और 71 गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा न होने से 50 प्रतिशत आबादी घटी है।

रिपोर्ट पर एक नजर ….

– 2011 की जनगणना के अनुसार अल्मोड़ा की 6 लाख 22 हजार 506 आबादी
– 89 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।
– 3189 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है अल्मोड़ा जनपद
– जनपद में रहने वाले परिवारों की संख्या एक लाख 40 हजार 577
– दस वर्षों में शहरी क्षेत्रों की आबादी में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी

जागेश्वर को पांचवें धाम के रुप में विकसित किया जा रहाः मुख्यमंत्री

अल्मोडा।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य देवभूमि के नाम से जाना जाता है यहॉ पर पुरातन काल से ही योग विद्या को महत्व दिया गया है और राज्य गठन के बाद अब शासन ने इसे प्राथमिक शिक्षा से उच्च शिक्षा तक पाठयक्रम के रूप में लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने जागेश्वर धाम के समीप हरित शवदाह गृह का भी शुभारम्भ करते हुए कहा कि इससे जहॉ एक ओर पर्यावरण शुद्ध रहेगा वहीं दूसरी ओर इस शवदाह गृह के बन जाने से लकड़ी की खपत कम होगी। इस योग महोत्सव में बाहरी देशो के आये लोगो का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास रहेगा कि आने जाने अधिक कठिनाई न हो इसके लिए हवाई सेवा की सुविधा देने के साथ ही अन्य सुविधा जो सम्भव हो सके उसे दिलाये जाने का प्रयास किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के उददेश्य से जागेश्वर को पाचवें धाम के रूप में विकसित करने के साथ ही इस क्षेत्र को अन्य सुविधाओं से विकसित करने के लिए ठोस योजना बनायी जा रही है ताकि शीघ्र ही यह क्षेत्र विश्व के मानचित्र में अपना अलग स्थान बना सके। इसके साथ ही शासन द्वारा पर्यटको की संख्या में निरन्तर वृद्वि हो उसके लिए अनेक कार्य किये जा रहे है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जागेश्वर क्षेत्र के विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जायेगी। जागेश्वर के साथ ही झॉकर सैम, वद्ध जागेश्वर सहित अन्य धार्मिक पर्यटन स्थलों को विकसित किया जायेगा। उन्होंने इस अवसर पर जटागगां में आरती घाट के निर्माण हेतु तुरन्त आगणन भेजने के निर्देश जिलाधिकारी को दिये साथ ही कहा कि गगां आरती हेतु एक वार्षिक कलैण्डर भी तैयार कर लिया जाय ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को इसकी जानकारी मिल सके। उन्होंने जन प्रतिनिधियों से इस आरती में अधिकाधिक सम्मलित होने की बात कही।
विधानसभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल ने कहा कि प्रदेश में जिस तरह पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा देने के कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है निःसन्देह आगामी वर्षो में इसके परिणाम सार्थक होंगे और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी।

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परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि जागेश्वर के युवाओं हेतु यहॉ पर एक कम्प्यूटर सेन्टर की स्थापना के साथ ही यहॉ पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जायेगा और यहॉ पर मन्दिर पुजारियों के बच्चों कर्मकाण्ड आदि की शिक्षा दिलाये जाने का प्रयास किया जायेगा।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती मेहरा, विधायक मनोज तिवारी, सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष एके सिकन्दर पवॉर, पालिकाध्यक्ष प्रकाश चन्द्र जोशी, डीआईजी कुमाऊॅ अजय रौतेला, एसएसपी दलीप सिंह कुॅवर, एसडीएम एनएस नगन्याल, रजा अब्बास, डीडीओ मोहम्मद असलम, केएमवीएन के महाप्रबन्धक टीएस मर्तोलिया, डीके शर्मा, पर्यटक विकास परिषद के विवेक चौहान, उप निदेशक पर्यटन जेसी बेरी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन सिंह मेहरा, दिनेश कुंजवाल, कौपरेटिव बैंक के अध्यक्ष प्रशान्त भैसोड़ा, उपाध्यक्ष अनुसूचित जाति आयोग राजेन्द्र बाराकोटी, रेणुका रावत आदि उपस्थित थे।