खेल महाकुंभ चैपियनशिप का शुभारंभ कर बोले सीएम, राज्य को खेलभूमि बनाना हमारा लक्ष्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चम्पावत के स्व. कैलाश चन्द्र गहतोड़ी स्पोर्ट्स स्टेडियम, टनकपुर में ‘खेल महाकुम्भ-मुख्यमंत्री चौम्पियनशिप ट्रॉफी-2026’ का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट खिलाड़ी गहना महर को मशाल सौंपकर खेल महाकुम्भ का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर खिलाड़ियों ने पूर्ण अनुशासन, निष्पक्षता एवं खेल भावना के साथ प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने की शपथ ली। खिलाड़ियों द्वारा योगासन एवं उत्तराखंड के पारंपरिक खेल ‘मुर्गा झपट’ का प्रदर्शन भी किया गया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल महाकुम्भ प्रदेश की प्रतिभाओं को गांव की मिट्टी से राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि उचित मंच और संसाधनों के अभाव में प्रदेश की कोई भी प्रतिभाशाली खेल प्रतिभा पीछे न रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि खेल अनुशासन सिखाते हैं, आत्मविश्वास जगाते हैं, संघर्ष करना सिखाते हैं और गिरकर फिर उठने का साहस देते हैं। खेल स्वस्थ शरीर के साथ मजबूत चरित्र और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य सरकार खेलों को उत्तराखंड के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का महत्वपूर्ण आधार मानकर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में खेल महाकुम्भ की शुरुआत प्रदेश के गांव-गांव में छिपी खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। आज खेल महाकुम्भ अपने दसवें संस्करण में प्रवेश कर चुका है। पिछले वर्ष 2 लाख 20 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने खेल महाकुम्भ में प्रतिभाग किया था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वर्ष और अधिक संख्या में बच्चे एवं युवा इसमें प्रतिभाग करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष खेल महाकुम्भ को और अधिक व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया है। न्याय पंचायत स्तर से शुरू होकर विधानसभा, संसदीय एवं राज्य स्तर तक विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। सरकार का उद्देश्य गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक विजेता खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार प्रदान किए जा रहे हैं। इस वर्ष लगभग 11 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खिलाड़ियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष से खेल महाकुम्भ की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में 4 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह खिलाड़ियों के परिश्रम, प्रतिभा और उनके सपनों का सम्मान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का गौरव बढ़ाया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खेल महाकुम्भ के मंच से निकलने वाली प्रतिभाएं भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्तराखंड और देश का नाम रोशन करेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के प्रति सोच में व्यापक बदलाव आया है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसे अभियानों ने देश के गांवों एवं दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और प्रोत्साहन मिलने से भारत वैश्विक खेल मंच पर निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार भी उत्तराखंड में खेल और खिलाड़ियों के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य की नई खेल नीति के अंतर्गत राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी प्रदान की जा रही है। अब तक 29 खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में नियुक्ति दी जा चुकी है। साथ ही 38वें राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों में सेवायोजित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री खेल विकास निधि के माध्यम से खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश के आवासीय स्पोर्ट्स कॉलेजों एवं क्रीड़ा छात्रावासों में चयनित खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, आवास, भोजन, खेल उपकरण, खेल किट, शिक्षा एवं चिकित्सा जैसी सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चौंपियन की तैयारी बचपन से ही शुरू होती है। इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के अंतर्गत 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को मासिक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है, ताकि छोटी उम्र से ही उनकी खेल प्रतिभा को सही दिशा और प्रोत्साहन मिल सके।

उन्होंने कहा कि 14 से 23 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों के लिए मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के माध्यम से मासिक छात्रवृत्ति के साथ खेल उपकरण खरीदने के लिए भी आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। खिलाड़ियों के लिए प्रतियोगिता एवं प्रशिक्षण के दौरान दुर्घटना की स्थिति में बीमा संबंधी व्यवस्था भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेलों के लिए मजबूत एवं आधुनिक आधारभूत ढांचा विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। हाल ही में हल्द्वानी में उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय के प्रथम चरण के निर्माण कार्यों का शिलान्यास एवं प्रथम शैक्षणिक सत्र का शुभारम्भ किया गया है। इसके साथ ही खटीमा में आधुनिक खेल सुविधाओं से युक्त स्टेडियम के निर्माण की घोषणा भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘एक जनपद-एक खेल’ के माध्यम से विभिन्न खेल विधाओं और स्थानीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक जनपद की अपनी विशिष्ट खेल पहचान विकसित हो और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों का आह्वान किया कि वे पूरी ताकत, लगन, अनुशासन और निष्ठा के साथ मैदान में उतरें तथा अपने खेल के जुनून को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने, उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘खेल महाकुम्भ-2026’ उत्तराखंड के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प के बल पर उत्तराखंड को देश में ‘खेलभूमि’ के रूप में स्थापित करने का हमारा ‘विकल्प रहित संकल्प’ अवश्य सिद्ध होगा।

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने खिलाड़ियों को पूर्ण समर्पण एवं खेल भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि न्याय पंचायत स्तर की प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों के खेल जीवन की महत्वपूर्ण शुरुआती सीढ़ी हैं। यहां से खिलाड़ी अपनी प्रतिभा के बल पर विभिन्न स्तरों से आगे बढ़ते हुए राज्य स्तरीय मुख्यमंत्री चौम्पियनशिप ट्रॉफी तक पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपनी क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिले।

खेल मंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल सुविधाओं के विकास के साथ खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने खिलाड़ियों से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

खेल महाकुम्भ-2026 के अंतर्गत 01 से 10 सितम्बर तक न्याय पंचायत स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि खेलकूद प्रतियोगिताएं, 11 से 20 सितम्बर तक विधायक चौम्पियनशिप ट्रॉफी, 21 से 30 सितम्बर तक सांसद चौम्पियनशिप ट्रॉफी तथा 10 से 30 अक्टूबर तक राज्य स्तरीय मुख्यमंत्री चौम्पियनशिप ट्रॉफी का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिताओं में विभिन्न आयु वर्गों के बालक-बालिकाओं के साथ महिला ओपन एवं दिव्यांगजन महिला-पुरुष वर्ग के खिलाड़ियों को भी विभिन्न खेल विधाओं में प्रतिभाग करने का अवसर मिलेगा।

इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित कुमार सिन्हा, निदेशक खेल दीप्ति सिंह, जिलाधिकारी मनीष कुमार, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविन्द सामन्त, जिला पंचायत अध्यक्ष आनन्द सिंह अधिकारी सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, दायित्वधारी, अधिकारी, प्रशिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, शिकायत पर होगी त्वरित कार्रवाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सनातन धर्मशाला, खटीमा परिसर स्थित एक निजी विद्यालय के सोबन सिंह जीना सभागार में आयोजित ‘युवा समसामयिक संवाद’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों से आए विद्यार्थियों ने रोजगार, सेवायोजन, पर्यटन, विकास एवं पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आपदा प्रबंधन जैसे समसामयिक विषयों पर मुख्यमंत्री से सीधे सवाल किए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का सहज, स्पष्ट और बेबाकी से जवाब दिया।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर सरकार

युवाओं और छात्रों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने पारदर्शी, भ्रष्टाचार-मुक्त और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि यदि कोई व्यक्ति काम के बदले रिश्वत मांगता है अथवा अनुचित दबाव बनाता है, तो नागरिक निःसंकोच टोल-फ्री नंबर 1064 या संबंधित मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है तथा प्राप्त शिकायतों पर विशेष टीमों द्वारा त्वरित जांच की जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और देवभूमि की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार-मुक्त होनी चाहिए।

‘ विकल्प रहित संकल्प’ से बनेगा देश का अग्रणी राज्य

अपने विजन को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ऐसा उत्तराखंड देखना चाहते हैं, जहां युवाओं को बेहतर शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के लिए अपने राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े। राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं के साथ बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पास समृद्ध हिमालयी पर्वत श्रृंखलाएं, नदियां, वन संपदा, कृषि संसाधन और उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थान जैसी अपार प्राकृतिक एवं मानवीय संपदाएं हैं। इन संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ कार्य कर रही है।

सीमांत क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता

सीमांत क्षेत्रों के विकास को लेकर छात्रा आल्या के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के विकास और वहां के निवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सीमांत जिले, गांव और क्षेत्र देश के अंतिम छोर नहीं, बल्कि भारत के प्रथम गांव और प्रथम क्षेत्र हैं। इसी सोच के साथ इन क्षेत्रों में ढांचागत विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत बिजली, पेयजल, पक्की सड़कें, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सीमांत क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने के लिए सरकार का विशेष ध्यान रोजगार सृजन पर है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं को रोजगार की तलाश में दूर-दराज के क्षेत्रों में जाने के बजाय उनके गांव और घर के आसपास ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है। आने वाले समय में सीमांत क्षेत्रों के लिए विशेष प्रोत्साहन और नई योजनाएं भी लाई जाएंगी, जिससे नई पीढ़ी को अपने ही क्षेत्र में बेहतर भविष्य और आजीविका के अवसर मिल सकें।

विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच स्थापित होगा संतुलन

कक्षा 11 की छात्रा रेखा के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए राज्य को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाया जाएगा।

छात्रा रेखा द्वारा 5 अगस्त की आपदा के दौरान किए गए राहत एवं बचाव कार्यों की सराहना तथा विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा प्रदेश की सबसे बड़ी धरोहर है। विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है।

34 हजार युवाओं को दी सरकारी नौकरी

सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अनुशासित जीवन जीने और सकारात्मक सोच के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अब तक 34 हजार युवाओं को सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई हैं। आने वाले समय में भी युवाओं के लिए रोजगार एवं करियर के अवसर लगातार उपलब्ध होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की यह प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी।

पर्यटन को मिल रही नई गति, सालाना पर्यटकों की संख्या 7-8 करोड़ के पार

पर्यटकों की संख्या को लेकर छात्र अब्दुल के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़क कनेक्टिविटी, हवाई सेवाओं और होमस्टे जैसी सुविधाओं के विस्तार से उत्तराखंड में पर्यटन को नई गति मिली है।

उन्होंने कहा कि चंपावत, मुनस्यारी, कौसानी, बेरीनाग, चौकोड़ी, पंचाचूली और आदि कैलाश जैसे पर्यटन स्थलों में आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य सरकार पर्यटकों के बेहतर स्वागत, स्वच्छ एवं सुविधाजनक व्यवस्थाओं और आतिथ्य पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि उत्तराखंड आने वाले पर्यटक यहां की सुंदरता और आतिथ्य से प्रभावित होकर बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का ही परिणाम है कि प्रदेश में पर्यटकों की वार्षिक संख्या 7 से 8 करोड़ के पार पहुंच गई है।

18 विद्यालयों के लगभग 360 विद्यार्थियों ने लिया प्रतिभाग
संवाद कार्यक्रम में खुशबू हिंद पब्लिक स्कूल, अब्दुल आरपी स्कूल, सतवीर सिंह रोज पब्लिक स्कूल, देव विश्वास शिक्षा भारती स्कूल, आयुषी आईआईएचसीए, रिजवान जीआईसी, रुद्र प्रताप सिंह रोज पब्लिक स्कूल और शहीद हरि किशन इंटर कॉलेज सहित विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।

इस दौरान सोनू सिंह, हिमांशी, आलिदा, खुशी अवस्थी सहित अन्य विद्यार्थियों ने रोजगार, सेवायोजन, पर्यटन, विकास एवं पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल मुख्यमंत्री के समक्ष रखे।

कार्यक्रम में विभिन्न 18 विद्यालयों के लगभग 360 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, प्रेम सिंह टूरना, दर्जा मंत्री गंभीर सिंह धामी, किशन सिंह किन्ना, मोहिनी पोखरिया, पूर्व विधायक डॉ. प्रेम सिंह राणा, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, वीसी जय किशन, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी तथा अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

युवाओं से संवाद पर सीएम धामी ने किया संबोधित, बोले पारदर्शिता और निष्ठा ही युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनबसा में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान युवाओ से संवाद कर उनके सवालों के जवाब दिए।

मुख्यमंत्री ने चंपावत जिले के बनबसा में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, खेल, समाज सेवा, स्वरोजगार तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली स्थानीय युवा प्रतिभाओं को राजकीय सम्मान प्रदान कर प्रोत्साहित किया।

संवाद के दौरान छात्रा मिलन कलखुड़िया द्वारा मुख्यमंत्री के जीवन सफर पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने अपनी संक्षिप्त जीवनी, शिक्षा, युवावस्था और राजनीतिक यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से महान नहीं होता, बल्कि अपने दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी और मनोयोग से निर्वहन कर महान बनता है।छात्रा प्रीति पांडे द्वारा नकल विरोधी कानून की सराहना की एवं स्थानीय परीक्षा केंद्र को टनकपुर में बनाए जाने के अनुरोध किया इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि टनकपुर में परीक्षा केंद्र स्थापित करने के लिए उचित प्रयास किया जाएगा।

छात्र रोहित शर्मा द्वारा नशे के खिलाफ से संबंधी सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को रेखांकित करते हुए कहा कि श्ड्रग फ्री उत्तराखंडश् अभियान की चर्चा की और युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने व दूसरों को प्रेरित करने का आह्वान किया। छात्र सुमित सिंह नायक द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपावत में 56 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक साइंस सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे युवाओं को विज्ञान व तकनीक का ज्ञान प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि नकल विरोधी सख्त कानूनों से पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है और अब तक 34,000 से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियां प्राप्त हुई हैं।

छात्र नमन पुरी द्वारा युवा आयोग के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में युवा आयोग का गठन किया जा रहा है, जो प्रदेश की युवा प्रतिभाओं को सही दिशा, मार्गदर्शन, रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा निष्ठा और परिश्रम के बल पर साधारण व्यक्ति भी सर्वाेच्च पद तक पहुँच सकता है। हमने अपने जीवन को अनुशासित बनाना है। जीवन में अनुशासन का पालन ही हमें सफलता की ओर ले जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा देश की 65 प्रतिशत युवा आबादी को 21वीं सदी की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख किया और कहा कि सही मार्गदर्शन मिलने पर यही युवा शक्ति देश का परिदृश्य बदल सकती है। मुख्यमंत्री ने अपने विकल्प रहित संकल्प को दोहराते हुए कहा कि राज्य में पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए अल्मोड़ा, चमोली और पौड़ी जैसे जनपदों में औद्योगिक पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए श्युवा आयोगश् का गठन किया जा रहा है, जबकि देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानून के माध्यम से अब तक 34,000 से अधिक पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार मुक्त नियुक्तियाँ संपन्न कराई जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा सीमांत क्षेत्रों के विकास के अंतर्गत चम्पावत में आधुनिक पुस्तकालय, राजकीय पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज, साइंस सेंटर और राज्य के पहले बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज जैसी आधारभूत संरचनाओं को मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने समारोह में नीट परीक्षा में सफल बसटिया की हिमानी विश्वकर्मा, अमेजॉन में 47 लाख रुपये का सालाना पैकेज प्राप्त करने वाली बिचई की श्वेता चंद और राष्ट्रीय पैरा आर्म रैसलिंग के स्वर्ण पदक विजेता टनकपुर के पवन गढकोटी को सम्मानित किया गया। खेल व दिव्यांग कल्याण में राज्य स्तरीय दक्षता पुरस्कार विजेता बनबसा के संदीप रस्तोगी, निःशुल्क गौ सेवक पवन मेहता, नशा मुक्ति अभियान के संचालक मनीष सिंह तथा स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सेवारत अजंता विजय को भी मंच से सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने बागवानी से स्वरोजगार स्थापित करने वाले चंपावत के कमल गिरी, माउंट एवरेस्ट विजेता पर्वतारोही वीरेंद्र सिंह सामंत, लोक संस्कृति व मीडिया इंफ्लुएंसर तरुण भट्ट तथा युवतियों को सेना व पुलिस भर्ती की निःशुल्क ट्रेनिंग देने वाली बनबसा की अरुणिमा रावत को भी उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में अध्यक्ष जिला पंचायत अध्यक्ष आनन्द सिंह अधिकारी, जिलाध्यक्ष भाजपा गोविन्द सामन्त, जिला महामंत्री भाजपा मुकेश कलखुडिया, प्रभारी गुंजन सुखीजा, सह प्रभारी नितिन देउपा, श्याम नारायण पाण्डेय, मुकेश महराना, सुभाष बगौली, मनोज कालाकोटी, हेमा जोशी एवं किरन देवी, विधायक प्रतिनिधि चंपावत प्रकाश तिवारी, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

विदेशों में कुशल मानव संसाधन की मांग और रोजगार के अवसरों के लिए भारतीय मिशनों के साथ नियमित समन्वय रखें अधिकारीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जमैका में भारत के उच्चायुक्त मयंक जोशी, इथियोपिया में भारत के राजदूत देवेश उत्तम एवं जाम्बिया में भारत के उच्चायुक्त आलोक रंजन झा ने भेंट की। इस दौरान संबंधित देशों में रोजगार की संभावनाओं, कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता तथा उत्तराखंड के युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन देशों में जिन क्षेत्रों में रोजगार की अधिक संभावनाएं हैं और जहां कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता है, उनकी जानकारी प्राप्त करने के लिए संबंधित भारतीय मिशनों के साथ नियमित समन्वय रखा जाए। उन्होंने कहा कि विदेशों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों और वहां की आवश्यकता के अनुरूप राज्य के युवाओं को कौशल एवं आवश्यक भाषा प्रशिक्षण दिया जाए, जिससे उन्हें वैश्विक स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में होम स्टे के क्षेत्र में सराहनीय कार्य हुए हैं। विभिन्न देशों से आने वाले प्रतिनिधिमंडलों को राज्य के होम स्टे मॉडल से परिचित कराने के लिए होम स्टे का भ्रमण कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि फार्मा, उद्योग, आयुर्वेद और वेलनेस के क्षेत्र में उत्तराखंड में अनेक संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में राज्य की विशेषताओं और संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कमी नहीं है। उन्हें वैश्विक मांग के अनुरूप आवश्यक कौशल और प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार के बेहतर अवसरों से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को विभिन्न देशों में कुशल मानव संसाधन की मांग और रोजगार की संभावनाओं का आकलन करते हुए युवाओं के प्रशिक्षण के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

जाम्बिया में भारत के उच्चायुक्त आलोक रंजन झा ने कहा कि जाम्बिया में कुशल मानव संसाधन की व्यापक आवश्यकता है। शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में वहां कार्य करने की अनेक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि जाम्बिया में जिन क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता है, उनके संबंध में राज्य सरकार को विस्तृत नोट उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने इस दिशा में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

जमैका में भारत के उच्चायुक्त मयंक जोशी ने कहा कि जमैका में पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा और कृषि के क्षेत्र में कार्य करने की अनेक संभावनाएं हैं। विशेष रूप से नर्सिंग के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग है। इन क्षेत्रों की आवश्यकता के अनुरूप युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा सकता है।

इथियोपिया में भारत के राजदूत देवेश उत्तम ने कहा कि इथियोपिया में प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में कार्य करने की अनेक संभावनाएं हैं। फार्मास्युटिकल और फ्लोरीकल्चर के क्षेत्र में भी वहां बेहतर अवसर उपलब्ध हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विदेशों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों का लाभ उत्तराखंड के युवाओं को मिले, इसके लिए संबंधित देशों की आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय मिशनों के साथ समन्वय बनाकर विदेशों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों की जानकारी युवाओं तक पहुंचाने तथा उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए सुनियोजित तरीके से कार्य किया जाए। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु एवं सचिव विनय शंकर पांडेय उपस्थित थे।

सीएम ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के पदक विजेता खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय खेल दिवस-2026 के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, गौलापार, हल्द्वानी में उत्तराखण्ड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय, मानसखण्ड खेल परिसर के प्रथम चरण के ₹43.50 करोड़ के निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रथम शैक्षणिक सत्र का भी शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पदक विजेता खिलाड़ियों एवं उनके प्रशिक्षकों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया। उन्होंने देवभूमि उत्तराखण्ड खेल रत्न पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार, लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार एवं हिमालय रत्न पुरस्कार प्रदान किए। मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से खेल छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों एवं खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मेजर ध्यानचंद की जयंती पर हल्द्वानी से उत्तराखण्ड के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। क्रीड़ा विश्वविद्यालय के प्रथम चरण के निर्माण कार्यों का शिलान्यास और प्रथम शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देगा। राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखण्ड को खेलों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करते हुए ‘खेलभूमि’ के रूप में स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री ने हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की जीवंत मिसाल थे। उन्होंने अपने असाधारण खेल कौशल से पूरी दुनिया में भारत का गौरव बढ़ाया। मेजर ध्यानचंद का जीवन हमें प्रेरणा देता है कि प्रतिभा को महानता में बदलने के लिए कठोर परिश्रम, अनुशासन और समर्पण आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय की स्थापना प्रदेश के खेल क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अभी तक खेल शिक्षा और विशिष्ट प्रशिक्षण के लिए प्रदेश के खिलाड़ियों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें अपनी देवभूमि में ही उच्च स्तरीय खेल शिक्षा, आधुनिक प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे। आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार करने का प्रमुख केंद्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि देवभूमि और वीरभूमि उत्तराखण्ड अब ‘खेलभूमि’ के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा और परिश्रम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखण्ड का गौरव बढ़ाया है। खिलाड़ियों की उपलब्धियां राज्य के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के लाभार्थियों को खेल छात्रवृत्ति प्रदान करते हुए कहा कि यह छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि प्रदेश की उभरती खेल प्रतिभाओं के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों के प्रति एक नया वातावरण बना है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसे अभियानों के माध्यम से देश के कोने-कोने में छिपी प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। छोटे गांवों, दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों और सामान्य परिवारों से निकलकर युवा खिलाड़ी आज राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के विजन से प्रेरणा लेते हुए उत्तराखण्ड सरकार भी राज्य को खेलों का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ के पानी और पहाड़ की जवानी का सही दिशा में उपयोग करने के लिए खेल एक सशक्त माध्यम है। उत्तराखण्ड के युवाओं में अद्भुत ऊर्जा और प्रतिभा है। आवश्यकता उन्हें सही मंच, आधुनिक संसाधन, बेहतर प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में खेलों के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के अंतर्गत 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों को मासिक खेल छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के माध्यम से 14 से 23 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों को मासिक खेल छात्रवृत्ति के साथ खेल उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। खिलाड़ियों के लिए खेल इंजरी एवं आकस्मिक परिस्थितियों में बीमा और आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान, उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देने तथा स्थानीय एवं पारंपरिक खेलों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री खेल विकास निधि का गठन किया गया है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवायोजन की व्यवस्था की गई है। इसके तहत अब तक 29 खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में नियुक्ति दी जा चुकी है। 38वें राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को भी विभिन्न विभागों में सेवायोजित करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेलों के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश का पहला बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज लोहाघाट में संचालित किया जा रहा है। भविष्य की खेल चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड खेल नीति-2026 का ड्राफ्ट तैयार किया जा चुका है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ‘एक जनपद-एक खेल’ योजना के माध्यम से प्रत्येक जनपद की विशिष्ट खेल पहचान विकसित करने और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग खेल विधाओं के लिए 23 नई हाईटेक खेल अकादमियों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय खेलों में अधिक से अधिक पदक जीतने और ओलंपिक-2036 में उत्तराखण्ड के खिलाड़ियों की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार अभी से विशेष रोडमैप पर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक खेलों के विकास और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी सोच के साथ ‘मौली एआई एप्लीकेशन’ विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से उदीयमान खिलाड़ियों की फिटनेस का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। भविष्य में आधुनिक खेल तकनीकों के अधिकाधिक प्रयोग के माध्यम से खिलाड़ियों के कौशल और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे मैदान में उतरकर पूरी मेहनत और समर्पण के साथ अपना शत-प्रतिशत दें। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि साधनों की कमी, आर्थिक कठिनाई अथवा अवसरों का अभाव किसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी के सपनों की राह में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का प्रत्येक खिलाड़ी हिमालय की तरह अडिग रहकर न केवल प्रदेश, बल्कि पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन करे।

देवभूमि खेल पुरस्कार से खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक सम्मानित
वर्ष 2024 के लिए एथलेटिक्स की अंकिता को देवभूमि उत्तराखण्ड खेल रत्न पुरस्कार तथा एथलेटिक्स के ही लोकेश चौधरी को द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
वर्ष 2025 के लिए शूटिंग के अभिनव देशवाल को खेल रत्न पुरस्कार, क्याकिंग एंड कैनोइंग के मुकेश शर्मा को द्रोणाचार्य पुरस्कार तथा बॉक्सिंग के मुकेश चन्द्र बेलवाल को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान किया गया। दिव्यांग श्रेणी में शूटिंग के शौर्य सैनी को हिमालय रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया। मॉडर्न पैंटाथलॉन में टीम श्रेणी में सक्षम प्रताप सिंह एवं ममता खाती तथा बॉक्सिंग में एकल श्रेणी में खुशी चंद को हिमालय खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सभी पुरस्कार विजेताओं को नकद धनराशि के साथ प्रशस्ति पत्र, ब्लेजर एवं शॉल प्रदान किए गए।

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी और प्रशिक्षक भी पुरस्कृत
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और उनके प्रशिक्षकों को नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। सम्मानित खिलाड़ियों में एथलेटिक्स की अंकिता, बॉक्सिंग की खुशी चंद, हॉकी की मनीषा चौहान, वॉलीबॉल के रफीक अहमद, कबड्डी की भूमिका एवं राहुल सिंह, बैडमिंटन के चिराग बरेठा, मनोज सरकार एवं मनदीप कौर, मॉडर्न पैंटाथलॉन के सक्षम प्रताप सिंह, ब्लाइंड फुटबॉल की शेफाली रावत, पैरा लॉन बॉल की निलिमा राय तथा शूटिंग के आर्यावंश त्यागी एवं भूमि शामिल रहे।

उत्कृष्ट प्रशिक्षकों में एथलेटिक्स कोच लोकेश कुमार, बॉक्सिंग कोच बिजेन्द्र मल्ल, शूटिंग कोच अमित, वॉलीबॉल कोच गिरीश कुमार एवं कबड्डी कोच नितिन कुमार को भी पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर खेल मंत्री रेखा आर्या, सांसद अजय भट्ट तथा विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में खेल मंत्री रेखा आर्या, विधायक राम सिंह कैड़ा, सांसद अजय भट्ट, विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, विधायक सरिता आर्या, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, मेयर हल्द्वानी गजराज सिंह बिष्ट, दायित्वधारी डॉ. अनिल कपूर डब्बू, दिनेश आर्या, शंकर कोरंगा सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, खिलाड़ी एवं खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने मेरे सपनों का उत्तराखंड पर विद्यार्थियों से किया संवाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नेरुद्रपुर स्थित निजी विद्यालय में मेरे सपनों का उत्तराखंड पर आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान युवा विद्यार्थियों से संवाद कर उनके विचारों, सुझावों और भविष्य के उत्तराखंड को लेकर उनकी परिकल्पनाओं को जाना। मुख्यमंत्री ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उनका मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा विद्यार्थियों की ऊर्जा, सोच और विकसित उत्तराखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उत्साहवर्धक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की भावी पीढ़ी, सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बने, यही हमारी प्राथमिकता है। युवाओं के विचार और सुझाव उत्तराखंड के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को रोजगार, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को साकार करने के लिए शिक्षा, रोजगार, नवाचार, कौशल विकास, पर्यटन, कृषि, खेल और तकनीक सहित प्रत्येक क्षेत्र को सशक्त बनाया जा रहा है। युवा शक्ति उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत है और उनके सपनों, विचारों एवं प्रतिभा को अवसर देकर हम एक आत्मनिर्भर, सक्षम और विकसित उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा केवल आज का नहीं बल्कि कल के भविष्य भी हैं। मेरे सपनों का उत्तराखंड विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य पर्यटन, विकास, नवाचार तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। और इन क्षेत्रों के लिए सरकार ने नई नीतियां लागू की हैं।

विज्ञान के क्षेत्र में युवाओं को बढ़ावा देने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में देश की 5वीं सबसे बड़ी साइंस सिटी का निर्माण किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के होनहार विद्यार्थियों को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश और दुनिया पर नेतृत्व करने का अवसर प्रदान करना है।

मुख्यमंत्री ने लीडरशिप के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नेतृत्व क्षमता केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। बल्कि खेल, चिकित्सा, विज्ञान, मीडिया और उद्योगकृहर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में सच्चे लीडर होते हैं। उन्होंने युवाओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प से जुड़कर देश व राज्य के विकास में अपना योगदान देने का भी आह्वान किया। उन्होंने सभी को राखी त्यौहार की बधाईयां व शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ प्रतियोगिता को प्रदेश के विद्यार्थियों का व्यापक समर्थन मिला है। अभियान के तहत प्रदेशभर के 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने निबंध एवं विचार भेजे हैं। विद्यार्थियों द्वारा व्यक्त किए गए विचार उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनकी सोच और संकल्प को दर्शाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की युवा पीढ़ी राज्य के भविष्य को लेकर सजग और जागरूक है। विद्यार्थियों के सपनों, सुझावों और नवाचारपूर्ण विचारों को विकास की दिशा से जोड़ते हुए एक ऐसे उत्तराखंड के निर्माण किया जाएगा, जो सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित हो।

कार्यक्रम में विभिन्न विधालयों के लगभग 800 छात्र-छात्राएं, शिक्षक सहित महापौर विकास शर्मा, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, रामपाल सिंह, दिनेश मानसेरा, उत्तम दत्ता, फरजाना बेगम, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, जिलाध्यक्ष कमल जिन्दल, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

मेरे सपनों का उत्तराखंड अभियान में आए पर्यटन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक पर्यावरण सहित आठ प्रमुख विषयों पर सुझाव

‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को प्रदेश के युवा विद्यार्थियों का उत्साहपूर्ण समर्थन मिला है। राज्य की कक्षा 11वीं और 12वीं के 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने विचार एवं विजन साझा करते हुए निबंध मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को प्रेषित किए हैं। मुख्यमंत्री धामी ने 10 अगस्त को आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों का आह्वान किया था कि वे 24 अगस्त तक अपने विचार साझा कर उन्हें पोर्टल पर अपलोड करें।

पोर्टल पर प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य में कक्षा 11वीं और 12वीं में कुल 2,96,426 विद्यार्थी सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। इनमें से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने इस अभियान में प्रतिभाग कर उत्तराखंड के भविष्य को लेकर अपने विचार और सुझाव साझा किए हैं।

विद्यार्थियों ने पर्यटन, रोजगार, सामाजिक विकास, वन एवं पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक सहित आठ प्रमुख विषयों पर अपने सुझाव और नए विचार प्रस्तुत किए हैं। खास बात यह है कि ये निबंध केवल लेखन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्तराखंड की नई पीढ़ी की आकांक्षाओं और भविष्य के प्रदेश को लेकर उनकी सोच का दस्तावेज भी हैं।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और चमोली जिलों में कक्षा 11वीं और 12वीं के शत-प्रतिशत विद्यार्थियों ने अपने निबंध पोर्टल पर अपलोड किए हैं। वहीं पौड़ी में 98.82 प्रतिशत, अल्मोड़ा में 97.46 प्रतिशत, हरिद्वार में 91.77 प्रतिशत, टिहरी में 91.57 प्रतिशत, बागेश्वर में 89.26 प्रतिशत, नैनीताल में 85.89 प्रतिशत तथा उत्तरकाशी में 84.93 प्रतिशत विद्यार्थियों ने इस अभियान में भागीदारी की है। देहरादून जिले में कक्षा 11वीं और 12वीं के कुल 63,666 विद्यार्थियों में से 47,358 विद्यार्थियों ने अपने निबंध प्रस्तुत किए हैं।

अब प्राप्त निबंधों एवं विचारों का मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के साथ विशेषज्ञों की टीम द्वारा अवलोकन एवं मूल्यांकन किया जा रहा है। चयनित श्रेष्ठ विचारों के परिणाम 16 सितंबर को घोषित किए जाएंगे।

पहली बार विद्यार्थियों से विकास के विजन पर वैचारिक मंथन
‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के युवा विद्यार्थियों को सीधे राज्य के विकास और नीति निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने की अभिनव पहल की है। राज्य के 2.67 लाख से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी इस अभियान की व्यापकता और विद्यार्थियों के उत्साह को दर्शाती है।

अभियान के अंतर्गत श्रेष्ठ 140 विचारों का चयन किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को शासन के वरिष्ठ अधिकारियों एवं सचिवों के साथ अपने विचारों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं भी इन विद्यार्थियों से संवाद कर उनके विजन, अनुभवों और सुझावों को सुनेंगे।

इसके साथ ही श्रेष्ठ विचार प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों को करियर एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग सहित अन्य प्रोत्साहन एवं पुरस्कार प्रदान किए जाने की व्यवस्था की गई है।

प्रत्येक सहभागी को मिला डिजिटल प्रमाण पत्र
पोर्टल पर निबंध जमा करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को डिजिटल प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है। अभियान के तहत राज्य के प्रत्येक ब्लॉक, विद्यालय और विद्यार्थी से संबंधित विवरण का डेटा संकलित किया गया है, जिससे अभियान की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाया गया है।

अभियान के संयोजक डॉ. राहुल अग्रवाल ने बताया कि नई पीढ़ी को सीधे राज्य की विकास प्रक्रिया और नीति निर्माण की सोच से जोड़ने की यह एक अभिनव पहल है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपने विचार साझा किए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “हमारे विद्यार्थी केवल उत्तराखंड का भविष्य नहीं हैं, बल्कि उनके विचार आज के उत्तराखंड को भी नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ के माध्यम से हम नई पीढ़ी की सोच को सुन रहे हैं। युवाओं के अच्छे और व्यावहारिक सुझावों को प्रदेश के विकास में स्थान दिया जाएगा। हमारा संकल्प है कि युवा जिस उत्तराखंड का सपना देख रहे हैं, उसे साकार करने में उन्हें भी सहभागी बनाया जाए।”

वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन एवं उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक अजीता लौंगजाम सहित भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं परिवीक्षार्थी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन सादगी, समर्पण, परिश्रम और राष्ट्रसेवा की भावना का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कर देश के द्वितीय सर्वाेच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उपराष्ट्रपति जी की यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। राज्यसभा के सभापति के रूप में भी उन्होंने संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय वन सेवा में चयनित सभी परिवीक्षार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां के पर्वत, नदियां, वन एवं समृद्ध जैव विविधता प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे में वनों का संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा दायित्व भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती के दौर में वन अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने परिवीक्षार्थियों का आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीक एवं प्रशासनिक दक्षता का उपयोग करते हुए वन संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों को भी प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि ‘प्रकृति के प्रहरी’ हैं और उन्हें अपने अधिकारों के साथ अपनी जिम्मेदारियों तथा अपने ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को भी सर्वाेच्च स्थान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जा रहा है। ‘मिशन स्पथ्म्’ और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करते हुए कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में देश के सबसे बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियानों में से एक के माध्यम से लगभग 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समर्पित फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स का गठन किया गया है। चारधाम यात्रा मार्ग पर डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया गया है, जिसे शीघ्र ही प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि विकास परियोजनाएं पर्यावरण की कीमत पर न हों। राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरने वाले दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर लगभग 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना आधुनिक बुनियादी ढांचे और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का प्रभावी उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वन उपज के परिवहन को सुगम बनाने के लिए राज्य में नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू किया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में होने वाली जनहानि के मामलों में अनुग्रह राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है। वन पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए उत्तराखंड वन पंचायती नियमावली में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। साथ ही, वनाग्नि से निपटने वाले फायर वॉचर्स के लिए जीवन बीमा की व्यवस्था तथा पिरुल एकत्रीकरण के माध्यम से ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बायोफेंसिंग, त्वरित प्रतिक्रिया दल तथा 24 घंटे सक्रिय वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य वन संरक्षण के साथ-साथ इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच ऐसा संतुलन स्थापित करना है, जिसमें प्रकृति और वन्यजीव सुरक्षित रहें तथा वनों पर निर्भर स्थानीय समुदायों की आजीविका और समृद्धि भी सुनिश्चित हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय वन सेवा के युवा अधिकारी भी इसी संतुलित दृष्टिकोण को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाकर देश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकल्प रहित संकल्प’ के अनुरूप देश में वनों और पर्यावरण के व्यापक संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में युवा वन अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी परिवीक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे जहां भी अपनी सेवाएं दें, राष्ट्रहित, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें।

दून विवि में सीएम धामी ने युवाओं से किया संवाद, कहा बदलती तकनीक के अनुरूप फ्यूचर के लिये रेडी हो युवा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं से संवाद किया। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने पलायन रोकने, युवाओं को रोजगार से जोड़ने, उत्तराखंड को उच्च शिक्षा का हब बनाने, विज्ञान, तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में रोजगार की नई संभावनाओं तथा देहरादून में यातायात जाम की समस्या के समाधान को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल पूछे।

पलायन रोकने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने से संबंधित सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब रिवर्स माइग्रेशन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं सौर स्वरोजगार योजना सहित पर्यटन, उद्योग और फिल्म नीति के माध्यम से युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने और उनके माध्यम से स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए भी राज्य सरकार द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है।

उच्च शिक्षा को मजबूत करने के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों के आधुनिकीकरण और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध होंगे तथा युवाओं को आधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

विज्ञान, तकनीक एवं एआई के दौर में रोजगार की संभावनाओं से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीकी बदलावों के साथ रोजगार के स्वरूप में परिवर्तन हो रहा है और नई संभावनाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें बदलती तकनीक के अनुरूप अपने कौशल को विकसित करते हुए ‘फ्यूचर रेडी’ बनना होगा। सरकार भी युवाओं को आधुनिक कौशल एवं नई तकनीकों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

देहरादून में यातायात जाम की समस्या के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इसके स्थायी समाधान की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। बिंदाल और रिस्पना नदी के ऊपर एलिवेटेड रोड के निर्माण की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से देहरादून शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और जाम की समस्या के समाधान में मदद मिलेगी।

सीएम सौर स्वरोजगार योजना के तहत राज्य में हो रहा 1132 सौर ऊर्जा संयंत्रों के जरिए 210 मेगावाट क्षमता सौर उर्जा का उत्पादन

देहरादून। उत्तराखंड के मूल निवासियों को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना (एमएसएसवाई) राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के साथ ही हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन रही है। योजना के तहत जून माह तक 210 मेगावाट क्षमता के प्लांट स्थापित हो चुके हैं, जिससे 3500 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभाग को मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य प्रदान किया है। योजना के अंतर्गत स्थानीय निवासियों द्वारा 20, 25, 50, 100 और 200 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसके लिए आवेदकों को एमएसएमई नीति-2023 के तहत सभी लाभ दिए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जून 2026 तक राज्य में कुल 1132 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 2,10,420 किलोवाट यानी करीब 210 मेगावाट है। शेष परियोजनाओं पर स्थापना का कार्य चल रहा है।

टिहरी जिले ने बनाई बढ़त
जिलेवार आंकड़ों में टिहरी सबसे आगे है। यहां 369 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 69,050 किलोवाट है। उत्तरकाशी में 227 संयंत्रों से 43,660 किलोवाट और चंपावत में 144 संयंत्रों से 28,200 किलोवाट क्षमता स्थापित हुई है। इसी तरह हरिद्वार में 86 संयंत्रों की क्षमता 16,900 किलोवाट, पौड़ी में 88 संयंत्रों की 15,440 किलोवाट, चमोली में 72 संयंत्रों की 11,725 किलोवाट और अल्मोड़ा में 32 संयंत्रों की 5,600 किलोवाट क्षमता दर्ज की गई है। देहरादून, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर में भी योजना के तहत सौर परियोजनाएं स्थापित की गई हैं।

3500 लोगों को रोजगार
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना केवल सौर ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने के माध्यम के रूप में भी देखा जा रहा है। योजना के तहत स्थापित परियोजनाओं से करीब 3500 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों भी तेज हो रही हैं। जिससे पलायन में भी कमी आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना उत्तराखंड के युवाओं और राज्य के निवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। हमारा प्रयास है कि सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उद्यमिता और रोजगार के अवसर बढ़ें। इससे हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूती और पलायन को रोकने में भी मदद मिल रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड