मुख्यमंत्री धामी से प्रदेश प्रधान संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने की शिष्टाचार भेंट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में प्रदेश प्रधान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष योगिता केंतुरा रावत के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से ग्रामीण विकास, ग्राम पंचायतों की भूमिका तथा प्रदेश में संचालित विकास योजनाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि ग्राम पंचायतें लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण और मजबूत इकाइयों में से एक हैं। गांवों के समग्र विकास, स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं के समाधान तथा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में ग्राम प्रधानों एवं पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ग्राम प्रधान ग्रामीण क्षेत्रों में जनता और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में निरंतर सुधार हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की वास्तविक शक्ति उसके गांवों, स्थानीय परंपराओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निहित है। गांवों को सशक्त बनाकर ही आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को साकार किया जा सकता है। इस दिशा में पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता, जनभागीदारी और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों का क्रियान्वयन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनहित से जुड़े विषयों पर पंचायत प्रतिनिधियों के सुझावों और अनुभवों को महत्व देती है। ग्राम पंचायतों को विकास की योजनाओं में प्रभावी भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को और बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश प्रधान संगठन और ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाकर ग्रामीण विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे।

इस अवसर पर प्रदेश प्रधान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष योगिता केंतुरा रावत, पंकज पोखरियाल (प्रदेश प्रभारी), ठाकुर कृपाल सिंह (जिलाध्यक्ष, उत्तरकाशी), शुभम मल (संगठन महामंत्री), सुधीर रतूड़ी (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), सुरेंद्र सिंह चौहान (प्रदेश महामंत्री), जसपाल सिंह जस्सी (कुमाऊं मंडल अध्यक्ष), शौर्य लखेड़ा (प्रभारी, कुमाऊं मंडल), नयन कुमार (प्रदेश प्रवक्ता), सुभाष खत्री (ग्राम प्रधान, लासी) एवं संजय राणा (प्रदेश सचिव) उपस्थित रहे।

राम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक जनआंदोलन बनाने में अशोक सिंघल की भूमिका अविस्मरणीयः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज राजकीय दून मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम, पटेलनगर, देहरादून में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विश्व हिंदू परिषद की पत्रिका ‘विश्व हिंदू’ के अशोक सिंघल जी पर प्रकशित विशेषांक का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अशोक सिंघल को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और समाज को संगठित करने की प्रेरणादायी मिसाल है। इतिहास में ऐसे व्यक्तित्व विरले ही होते हैं, जिनके विचार और कार्य उनके जीवनकाल के बाद भी समाज को दिशा देते रहते हैं। अशोक सिंघल जी ने अपने संपूर्ण जीवन को भारतीय सांस्कृतिक चेतना के जागरण और राष्ट्रहित के कार्यों के लिए समर्पित कर इस आदर्श को स्थापित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े दायित्वों का निर्वहन करने के बावजूद अशोक सिंघल जी का जीवन सादगी, सहजता और सेवाभाव से परिपूर्ण रहा। उनका व्यक्तित्व इस बात का उदाहरण है कि किसी व्यक्ति का वास्तविक मूल्य उसके पद अथवा प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसके विचारों, आचरण और समाज के लिए किए गए कार्यों से आंका जाता है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता रहेगा।

’राम जन्मभूमि आंदोलन में अशोक सिंघल जी की भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी’

मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल ने राम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित पहली धर्म संसद से लेकर इस आंदोलन को देशव्यापी स्वरूप प्रदान करने तक उनके प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण रहे। उन्होंने देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रवास कर संतों, धर्माचार्यों और समाज के अनेक वर्गों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ने का कार्य किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल भगवान श्रीराम के आदर्शों को भारतीय समाज के जीवन-मूल्यों का आधार मानते थे। मर्यादा, सेवा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुणों को अपनाकर ही एक सशक्त, संस्कारित और समरस समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण देश की आस्था और सांस्कृतिक चेतना के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह कल्पना करना भी भावुक कर देने वाला है कि यदि अशोक सिंघल जी आज हमारे बीच होते, तो श्रीराम मंदिर के भव्य स्वरूप को देखकर उन्हें कितनी प्रसन्नता और आत्मिक संतुष्टि होती।

’सामाजिक समरसता और समान अधिकारों की भावना को सशक्त कर रही राज्य सरकार’

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र और समाज की मजबूती के लिए सामाजिक समरसता, समानता तथा सभी नागरिकों के अधिकारों का सम्मान आवश्यक है। इसी भावना के अनुरूप उत्तराखंड सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की है। इसका उद्देश्य नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था को सुदृढ़ करना और समाज में समान अधिकारों की भावना को आगे बढ़ाना है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सामाजिक सौहार्द को सुरक्षित रखने के लिए धर्मांतरण विरोधी कानून एवं दंगा रोधी कानून लागू किए गए हैं। सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि किसी भी प्रकार के छल, दबाव अथवा प्रलोभन से होने वाले धर्मांतरण तथा शांति व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के मामलों में कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने, गौवंश के संरक्षण और संवर्धन तथा प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा, कानून का प्रभावी अनुपालन और प्रदेश में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

’युवाओं को राष्ट्रनिर्माण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने पर विशेष जोर’

मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल की कल्पना ऐसे भारत की थी, जहां युवा आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ अपने संस्कारों, परंपराओं और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति भी सजग हों। युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है। इसलिए राज्य सरकार युवाओं को नशे से दूर रखने और उनकी प्रतिभा को शिक्षा, खेल, रोजगार तथा सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने के लिए प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र की स्थापना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के अध्ययन को प्रोत्साहन मिल रहा है। हमारी युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत को समझे, उनके महत्व को पहचाने तथा उन्हें भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने में योगदान दे, यह अत्यंत आवश्यक है।

’देवभूमि की धार्मिक विरासत के संरक्षण के साथ तीर्थस्थलों का हो रहा विकास’

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी आध्यात्मिक परंपराओं, प्राचीन मंदिरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। राज्य सरकार इस विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने के उद्देश्य से कार्य कर रही है। केदारखंड मंदिर माला मिशन के साथ मानसखंड मंदिर माला मिशन को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और गोल्ज्यू कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं से न केवल तीर्थस्थलों पर सुविधाओं का विस्तार होगा, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को भी नई मजबूती मिलेगी। इसी क्रम में हरिपुर-कालसी में मां यमुना के तट पर यमुना स्नान घाट का लोकार्पण किया गया है और वहां मां यमुना की 21 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। इस क्षेत्र में मां यमुना मंदिर और भगवान श्रीकृष्ण मंदिर के निर्माण की योजना को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

’कुंभ को दिव्यता, भव्यता और सुरक्षा के नए मानकों के अनुरूप आयोजित करने की तैयारी’

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाला कुंभ सनातन संस्कृति, भारतीय आस्था और प्राचीन धार्मिक परंपराओं का भव्य उत्सव होगा। कुंभ का महत्व केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक विरासत का भी प्रतीक है। राज्य सरकार कुंभ के सफल आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत करने तथा इसे दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों और वह एक सुखद, सुरक्षित एवं आध्यात्मिक अनुभव के साथ वापस लौटे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अशोक सिंघल का जीवन हमें राष्ट्रहित को सर्वाेपरि रखने, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की प्रेरणा देता है। उनके विचारों और आदर्शों को व्यवहार में उतारना ही उनके जन्म शताब्दी वर्ष को सार्थक बनाने का माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल ने जिस अखंड, सुरक्षित और स्वाभिमानी भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपने स्तर पर योगदान देना चाहिए। राज्य सरकार भी उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने, प्रदेशवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और श्रेष्ठ राज्य के निर्माण के लिए अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ निरंतर कार्य करती रहेगी।

इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज, पूज्य संत-महात्मा, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

नवरात्रि के प्रथम दिवस पर नौ दिवसीय कुंजापुरी मेले का ध्वजारोहण कर हुआ उद्घाटन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नरेंद्रनगर में 50वें सिद्धपीठ श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले का ध्वजारोहण कर शुभारंभ किया। उन्होंने सांस्कृतिक झांकियों का अवलोकन तथा विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन कर विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने शहीद स्थल पर अमर शहीदों की प्रतिमाओं एवं स्वतंत्रता संग्राम शहीद स्मारक पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने मां कुंजापुरी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर पूजा-अर्चना भी की।

मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि और मेले की स्वर्ण जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नवरात्रि पर मेले का शुभारंभ सुखद संयोग है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में कन्याओं को मां भगवती का स्वरूप माना गया है। उन्होंने कहा कि 50वां श्री कुंजापुरी मेला लोक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली परंपराओं का प्रतीक है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने और व्यापार, पर्यटन को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने मेले के संस्थापक सुरेंद्र सिंह पांगती और आयोजन समिति के योगदान की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का संवर्धन हो रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और केदारनाथ-बदरीनाथ धाम में विकास कार्य इसके उदाहरण हैं। राज्य सरकार केदारखंड और मानसखंड के प्रमुख मंदिरों में सुविधाओं के विस्तार के लिए कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पलायन रोकना और युवाओं को स्थानीय रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को देश-विदेश में बाजार मिल रहे हैं। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड की बिक्री 6 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, फार्म मशीनरी बैंक, होमस्टे, पर्यटन एवं फिल्म नीति तथा ‘वेड इन उत्तराखंड’ जैसी पहलों से स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने समान नागरिक संहिता, सशक्त भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा रोधी कानून और नकल विरोधी कानून का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई गई है। उन्होंने ऑपरेशन कालनेमि और अवैध मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं से 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां दी गई हैं।

मुख्यमंत्री ने टिहरी के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि टिहरी झील के चारों ओर रिंग रोड और पर्यटन मार्ग विकसित किए जा रहे हैं। झील क्षेत्र में जलक्रीड़ा, साहसिक पर्यटन और होमस्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे रोजगार बढ़ रहा है। उन्होंने नरेंद्रनगर में राजकीय पॉलिटेक्निक के उच्चीकरण, केंद्रीय विद्यालय, विधि महाविद्यालय, सभागार निर्माण, गजा अस्पताल के उच्चीकरण तथा लगभग 50 करोड़ रुपये की सीवर लाइन परियोजना का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है।

मेले में छोलिया नृत्य, गाडू घड़ा (तेल कलश) की परंपरा, महिषासुर मर्दिनी, प्रह्लाद की भक्ति पर आधारित नरसिंह अवतार, मां कुंजापुरी, भारत की गौरवशाली बेटियां तथा बदलता एवं बढ़ता नरेंद्रनगर सहित विषयों पर आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं। इनमें विद्यार्थियों और सांस्कृतिक दलों ने भाग लिया।

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने मेले की स्वर्ण जयंती की बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन लोक संस्कृति के संरक्षण के साथ खेल, पर्यटन और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करता है। उन्होंने पॉलिटेक्निक के उच्चीकरण, विधि महाविद्यालय के लिए बजट एवं पदों के सृजन और सीवर लाइन सहित विभिन्न विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। संस्थापक सुरेंद्र सिंह पांगती ने अनुभव साझा किए। नगर पालिका परिषद नरेंद्रनगर के अध्यक्ष राजेंद्र विक्रम पंवार ने भी शुभकामनाएं दीं।

11 से 19 अक्टूबर तक चलने वाले इस राज्यस्तरीय मेले में खेलकूद एवं विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिताओं के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। पद्मश्री डॉ. बसंती बिष्ट, नरेंद्र सिंह नेगी, मीना राणा, संगीता ढौंडियाल, किशन महिपाल, पांडवाज बैंड तथा अन्य कलाकार प्रस्तुतियां देंगे। मेले का समापन पद्मश्री जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण के जागर गायन के साथ होगा।

इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख नरेंद्रनगर दीक्षा राणा, नगर पंचायत अध्यक्ष तपोवन विनीता बिष्ट, ऋषिकेश के महापौर शंभू पासवान, नगर पंचायत अध्यक्ष गजा कुंवर सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष उदय रावत, जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे, मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल, अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह नेगी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर सीएम ने 149 मेधावी बालिकाओं को स्मार्टफोन प्रदान कर किया सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित आईआरटीडी प्रेक्षागार में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर आयोजित ‘बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 149 मेधावी बालिकाओं को स्मार्टफोन प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सभी मेधावी बालिकाओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस और शारदीय नवरात्रि का प्रथम दिवस एक साथ होना विशेष संयोग है। भारतीय संस्कृति में सदियों से कन्याओं को शक्ति का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि कन्या पूजन की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब हम बेटियों को सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करें। बेटियां केवल परिवार की खुशियां ही नहीं, बल्कि समाज की शक्ति और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला भी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तीकरण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, नारी शक्ति वंदन अधिनियम और लखपति दीदी जैसी पहलों से महिलाओं एवं बेटियों को आगे बढ़ने के नए अवसर मिल रहे हैं। राज्य सरकार भी बेटियों के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार तक प्रत्येक स्तर पर सहयोग प्रदान कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है। नंदा गौरा योजना के अंतर्गत बेटी के जन्म पर 11 हजार रुपये तथा 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने पर 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना से अब तक चार लाख से अधिक बेटियां लाभान्वित हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना के माध्यम से माताओं एवं नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के माध्यम से कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन करने वाले बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि कोई भी बेटी आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा एक से 12वीं तक निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना और गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। निःशुल्क साइकिल योजना तथा महिला छात्रावासों के निर्माण जैसी पहलों से भी बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल शिक्षा और आधुनिक तकनीक का विशेष महत्व है। बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम के अंतर्गत मेधावी बालिकाओं को स्मार्टफोन उपलब्ध कराने का उद्देश्य उन्हें तकनीक से जोड़कर ज्ञान और कौशल विकास के नए अवसर प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं को टैबलेट उपलब्ध कराने के लिए डीबीटी के माध्यम से धनराशि देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों को शिक्षा के साथ कौशल विकास, नवाचार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ड्रोन दीदी योजना के माध्यम से ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आलम्बन आर्ट, आलम्बन गांव और आलम्बन कैफे जैसी पहलों से जरूरतमंद महिलाओं और किशोरियों को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही नव्या 2.0 के माध्यम से हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर की किशोरियों एवं युवतियों को कौशल विकास तथा उद्यमिता का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की शिक्षा के साथ उनकी सुरक्षा भी राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। बाल विवाह और अन्य सामाजिक बुराइयों की रोकथाम के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। अनाथ बच्चों के लिए राजकीय सेवाओं में पांच प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण तथा पॉक्सो पीड़ित बच्चों को कानूनी सहायता एवं मानसिक देखभाल उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक जनपद में सपोर्ट पर्सन की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बेटी को भयमुक्त वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की मेहनत और प्रतिभा के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो, इसके लिए राज्य में कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्राप्त हुई हैं। मुख्यमंत्री ने बालिकाओं से बड़े सपने देखने, निरंतर परिश्रम करने और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प के साथ राज्य सरकार प्रत्येक बेटी को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम के माध्यम से मेधावी बालिकाओं को सम्मानित करने का उद्देश्य उनकी उपलब्धियों को प्रोत्साहन देने के साथ अन्य बेटियों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि बेटियों को समान अवसर प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना समाज के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने सभी सम्मानित बालिकाओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, अपर सचिव कर्मेंद्र सिंह, निदेशक महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास बंशीलाल राणा एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम धामी ने किया दिवंगत खिलाड़ी जसपाल राणा के जीवन पर बनी पुस्तक का विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में प्रसिद्ध निशानेबाज एवं खेल जगत की प्रतिष्ठित हस्ती स्वर्गीय जसपाल राणा के परिवारजनों ने भेंट की। इस अवसर पर जसपाल राणा की पत्नी श्रीमती रीना राणा, पुत्र युवराज राणा और पुत्री देवांशी राणा उपस्थित रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री को जसपाल राणा के जीवन और उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक *‘Maverick Jaspal: The Man Who Changed Indian Shooting’* भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस पुस्तक का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जसपाल राणा की खेल उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी प्रतिभा, मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी उपलब्धियां देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और यह संदेश देती हैं कि निरंतर अभ्यास, समर्पण तथा आत्मविश्वास के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जसपाल राणा ने निशानेबाजी के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने के साथ ही उत्तराखंड का गौरव भी बढ़ाया है। उनका जीवन और खेल सफर युवा खिलाड़ियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘Maverick Jaspal: The Man Who Changed Indian Shooting’ पुस्तक पाठकों, विशेषकर युवा खिलाड़ियों को जसपाल राणा के अनुभवों, संघर्ष और उपलब्धियों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने इस प्रयास के लिए जसपाल राणा के परिवारजनों को शुभकामनाएं दीं।

शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखंड-2026 में युवाओं के बीच आत्मीयता से घुले-मिले धामी, क्रिएटर्स के सवालों का बेबाकी और सहजता से दिया जवाब

सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, विशिष्ट खानपान, प्राकृतिक सौंदर्य, अनछुए पर्यटन स्थलों और स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया तक पहुंचाने में सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुंच और युवाओं की रचनात्मक क्षमता के माध्यम से उत्तराखंड की पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखंड-2026’ कार्यक्रम में राज्य प्रमुख सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर से संवाद कर रहे थे ।

कार्यक्रम में उत्तराखंड से जुड़े देश-विदेश में लोकप्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स, कंटेंट क्रिएटर्स, अभिनेता, गायक तथा फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े कलाकारों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने युवाओं और कलाकारों के बीच पहुंचकर उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने उनके अनुभव सुने, विभिन्न विषयों पर पूछे गए सवालों के सहजता और विस्तार से जवाब दिए तथा उनकी रचनात्मकता, उपलब्धियों और प्रदेश के प्रति जुड़ाव की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण मुख्यमंत्री का युवाओं के साथ सहज, जीवंत और ऊर्जावान संवाद रहा। मुख्यमंत्री ने केवल सरकार की योजनाओं और नीतियों की जानकारी ही नहीं दी, बल्कि अपने व्यक्तिगत अनुभवों, राजनीतिक निर्णयों के पीछे की सोच, उत्तराखंड के विकास की संभावनाओं और भविष्य के विजन को भी साझा किया। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स को प्रदेश की विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया और कहा कि उनकी पहुंच, रचनात्मकता तथा डिजिटल माध्यमों पर लोगों के विश्वास का उपयोग उत्तराखंड की सकारात्मक पहचान को मजबूत करने में किया जा सकता है।

स्थानीय उत्पादों से लेकर पहाड़ के अनछुए पर्यटन स्थलों तक, कंटेंट क्रिएटर्स बन सकते हैं उत्तराखंड के ब्रांड एंबेसडर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की विशेषताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए कंटेंट क्रिएटर्स के पास एक सशक्त मंच है। राज्य की संस्कृति, सभ्यता, रीति-रिवाज, लोककलाएं, पारंपरिक खानपान, प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक स्थल और ग्रामीण जीवन की विशिष्टताओं को रोचक एवं तथ्यपरक कंटेंट के माध्यम से करोड़ों लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन की संभावनाएं केवल मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे प्रसिद्ध स्थलों तक सीमित नहीं हैं। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक ऐसे प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन स्थल हैं, जिनके बारे में देश-दुनिया के बहुत से लोग अभी पर्याप्त जानकारी नहीं रखते। मिलम और पिंडारी ग्लेशियर, चकराता, माणा, मलारी तथा अनेक दूसरे अनूठे स्थलों को डिजिटल माध्यमों से पहचान दिलाकर पर्यटन के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स की एक प्रभावशाली वीडियो, रील या यात्रा-कथा किसी ऐसे गांव अथवा पर्यटन स्थल को नई पहचान दे सकती है, जिसकी संभावनाओं से अभी बहुत कम लोग परिचित हैं। इससे पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे उत्तराखंड की वास्तविक सुंदरता, स्थानीय लोगों की जीवनशैली, सांस्कृतिक विविधता और प्रदेश की सकारात्मक उपलब्धियों को अपनी रचनात्मकता के माध्यम से प्रस्तुत करें। उन्होंने यह भी कहा कि कंटेंट बनाते समय तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें। केवल कुछ समय के लिए अधिक व्यूज प्राप्त करने के उद्देश्य से भ्रामक अथवा विवादित जानकारी प्रसारित करने से बचना चाहिए। दीर्घकालीन सफलता का आधार विश्वसनीयता, तथ्यपरकता और दर्शकों का विश्वास है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत आधार पर खड़ी पहचान ही व्यक्ति को लंबे समय तक आगे बढ़ने की शक्ति देती है। इसलिए कंटेंट क्रिएटर्स को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखते हुए ऐसा काम करना चाहिए, जो समाज और प्रदेश के लिए सकारात्मक योगदान दे।

सोशल मीडिया से महिलाओं के उत्पादों को मिलेगा नया बाजार, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ को वैश्विक पहचान दिलाने में करें सहयोग

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उत्तराखंड की महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय शिल्पकारों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि सोशल मीडिया इनके लिए बाजार तक पहुंचने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाएं कठिन परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट उत्पाद तैयार कर रही हैं। वे अपने परिवार और कृषि कार्यों की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। आज अनेक महिलाएं अपने समूहों के जरिए न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने गांवों में भी आर्थिक बदलाव का माध्यम बन रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने, उनकी गुणवत्ता और पैकेजिंग को बेहतर बनाने तथा उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ‘वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट्स’ जैसी पहल भी स्थानीय विशिष्टताओं को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से कहा कि वे अपने वीडियो, रील और अन्य डिजिटल सामग्री में स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक शिल्प, हस्तनिर्मित वस्तुओं, पहाड़ी व्यंजनों और महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को भी स्थान दें। किसी स्थानीय उत्पाद की विशेषताओं, उसे बनाने वाले कारीगर की मेहनत और उससे जुड़े पारंपरिक ज्ञान को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना उस उत्पाद के लिए नए ग्राहक और बाजार तैयार कर सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय कुम्हारों, शिल्पकारों, पारंपरिक धातु के बर्तन बनाने वाले कारीगरों और ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को व्यापक पहचान मिल सकती है। इससे उनकी आय बढ़ाने, पारंपरिक हुनर को संरक्षित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

राज्यहित और भावी पीढ़ियों का कल्याण बड़े निर्णयों का आधाररू मुख्यमंत्री

कार्यक्रम के दौरान एक कंटेंट क्रिएटर ने मुख्यमंत्री से पूछा कि नकल विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता और मदरसा बोर्ड से संबंधित निर्णयों जैसे महत्वपूर्ण फैसले लेते समय उनका दृष्टिकोण क्या रहता है तथा वे संभावित प्रतिक्रियाओं और चुनौतियों का सामना किस प्रकार करते हैं।

इस प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री का दायित्व किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पूरे राज्य और उसकी जनता के प्रति होता है। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय पर विचार करते समय वे सबसे पहले यह देखते हैं कि उससे प्रदेश के लोगों का क्या हित होगा और आने वाले 25 से 50 वर्षों में उसका भावी पीढ़ियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि जब किसी निर्णय का उद्देश्य राज्य के भविष्य को बेहतर बनाना, समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत व्यवस्था तैयार करना हो, तो दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना आवश्यक होता है। जनता का विश्वास और राज्यहित के प्रति प्रतिबद्धता कठिन निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करते हैं।

मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने इस दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। उन्होंने बताया कि कानून तैयार करने की प्रक्रिया में व्यापक जनसुझाव लिए गए और लगभग तीन लाख लोगों के विचारों को संकलित कर प्रारूप तैयार किया गया। इसके बाद परीक्षण और विचार-विमर्श के माध्यम से इसे कानून का रूप दिया गया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों और समानता को मजबूत करना इस पहल के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में शामिल है।

नकल विरोधी कानून के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं से मेहनत करने वाले युवाओं का विश्वास प्रभावित होता था। गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चे सीमित संसाधनों में तैयारी करते हैं, इसलिए उनकी मेहनत और भविष्य की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पारदर्शी भर्ती व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों के परिणामस्वरूप हजारों युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर मिले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनकी मेहनत, योग्यता और प्रतिभा का सम्मान होगा।

उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक विरासत और जनहित से जुड़े विषयों पर सरकार निरंतर काम कर रही है। महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय उनका मूल उद्देश्य उत्तराखंड के हितों की रक्षा करना और राज्य को सुरक्षित, व्यवस्थित तथा विकसित भविष्य की ओर ले जाना है।

रिवर्स माइग्रेशन से लेकर होमस्टे तक, पहाड़ में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं पर की चर्चा

कार्यक्रम में एक कंटेंट क्रिएटर ने रिवर्स माइग्रेशन अर्थात गांवों की ओर वापस लौटने की प्रक्रिया के संबंध में सवाल किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन, धार्मिक यात्राओं, स्थानीय उत्पादों और स्वरोजगार के बढ़ते अवसरों से लोगों के लिए अपने गांवों में रहकर आजीविका अर्जित करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने इस संदर्भ में रिवर्स माइग्रेशन से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए लगभग 44 प्रतिशत रिवर्स माइग्रेशन का आंकड़ा साझा किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि होमस्टे, स्वयं सहायता समूह, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और विभिन्न सरकारी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हैं। पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय युवाओं को गाइड, टैक्सी सेवा, भोजनालय, होमस्टे और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ने के अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहले पर्यटन का आर्थिक लाभ अनेक क्षेत्रों में सीमित अवधि तक रहता था, लेकिन नए पर्यटन उत्पादों, शीतकालीन पर्यटन और अन्य गतिविधियों को प्रोत्साहित करने से पर्यटन आधारित आजीविका को अधिक समय तक जारी रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यदि इन संभावनाओं को उचित सुविधाओं, बेहतर कनेक्टिविटी, स्थानीय उद्यमिता और प्रभावी प्रचार के साथ जोड़ा जाए, तो पलायन की चुनौती को कम करने और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के लोगों को अपने क्षेत्र में ही आगे बढ़ने के अवसर मिलें और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से उनकी आजीविका मजबूत हो।

‘वेडिंग डेस्टिनेशन उत्तराखंड’ को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए क्रिएटर्स से मांगे सुझाव

कार्यक्रम में एक महिला कंटेंट क्रिएटर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश में विवाह समारोह आयोजित करने के आह्वान का उल्लेख करते हुए पूछा कि उत्तराखंड को वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए सरकार की क्या योजनाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने उत्तर देते हुए कहा कि उत्तराखंड में विवाह पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं और राज्य सरकार इस दिशा में पहले से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड का आध्यात्मिक और प्राकृतिक परिवेश विवाह जैसे मांगलिक अवसर के लिए विशेष आकर्षण रखता है।

मुख्यमंत्री ने त्रियुगीनारायण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशिष्ट महत्व रखता है। इसके अतिरिक्त मसूरी, देहरादून, ऋषिकेश, रामनगर, मुक्तेश्वर और अन्य क्षेत्रों में भी विवाह समारोहों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। राज्य में नए वेडिंग डेस्टिनेशन विकसित करने और संबंधित सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बेहतर होटल सुविधाएं, सड़क संपर्क, हवाई सेवाएं और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अन्य व्यवस्थाएं विवाह पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक होंगी। मुख्यमंत्री ने कंटेंट क्रिएटर्स से आग्रह किया कि वे उत्तराखंड के प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिवेश को विवाह पर्यटन के लिए उपयुक्त गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करें। साथ ही उन्होंने इस नीति को और प्रभावी बनाने के लिए उनके सुझावों का स्वागत किया।

फिल्म शूटिंग और फिल्म सिटी की संभावनाओं पर कलाकारों से किया संवाद

कार्यक्रम में मुंबई सहित फिल्म जगत से जुड़े उत्तराखंड के कलाकारों ने प्रदेश में फिल्म सिटी स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण की सुविधाएं विकसित करने का सुझाव दिया। कलाकारों ने कहा कि उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग के लिए अनुकूल प्राकृतिक स्थल उपलब्ध हैं। यदि प्रदेश में फिल्म निर्माण से जुड़ी सुविधाएं बढ़ाई जाएं, तो स्थानीय प्रतिभाओं को अपने गृह प्रदेश में ही काम करने के अवसर मिल सकते हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कलाकारों की बात ध्यानपूर्वक सुनी और कहा कि उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग तथा मनोरंजन उद्योग से जुड़ी गतिविधियों की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कलाकारों के सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए इस दिशा में संभावनाओं पर काम करने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक विविधता, पर्वतीय दृश्य, नदियां, जंगल, पारंपरिक गांव और सांस्कृतिक परिवेश फिल्म निर्माण के लिए विशिष्ट अवसर उपलब्ध कराते हैं। फिल्म और मनोरंजन उद्योग से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, युवाओं, होटल व्यवसायियों और अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

बेहतर कनेक्टिविटी और नए पर्यटन स्थलों से उत्तराखंड को मिलेगी नई गति

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सड़क, हवाई और हेलीकॉप्टर सेवाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केवल किसी स्थल का प्रचार पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां तक पहुंचने की सुविधा और पर्यटकों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून मार्ग पर बेहतर कनेक्टिविटी, हवाई सेवाओं का विस्तार, पंतनगर एयरपोर्ट के विकास की दिशा में प्रयास और पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीपैड तथा हेली सेवाओं को बढ़ाने की पहल से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माणा जैसे सीमावर्ती गांवों को नई पहचान देने, चकराता और हनोल जैसे क्षेत्रों की पर्यटन संभावनाओं को विकसित करने तथा नए गंतव्यों को सामने लाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बुनियादी सुविधाओं, संपर्क मार्गों और पर्यटन संबंधी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से कहा कि वे इन प्रयासों के साथ-साथ उत्तराखंड की उन विशिष्टताओं को भी सामने लाएं, जो अभी व्यापक रूप से लोगों तक नहीं पहुंची हैं। इससे राज्य के पर्यटन को विविधता मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री ने साझा किया अपनी जीवन यात्रा का अनुभव, युवाओं को मेहनत और आत्मनिर्भरता का संदेश

कार्यक्रम के दौरान एक कंटेंट क्रिएटर ने मुख्यमंत्री से उनकी व्यक्तिगत जीवन यात्रा, सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि से प्रदेश के नेतृत्व तक पहुंचने के अनुभव और व्यस्त दिनचर्या के बीच ऊर्जा बनाए रखने के बारे में सवाल किया।

मुख्यमंत्री ने सहजता से अपनी जीवन यात्रा के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनका बचपन एक सामान्य ग्रामीण परिवेश में बीता। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की और आगे की पढ़ाई विभिन्न स्थानों पर पूरी की। छात्र जीवन में उन्होंने हॉस्टल में रहते हुए भी अनेक अनुभव प्राप्त किए। उन्होंने कहा कि जीवन की शुरुआती चुनौतियां व्यक्ति को परिस्थितियों का सामना करना सिखाती हैं और कठिन समय में भी आगे बढ़ने का आत्मविश्वास देती हैं।

मुख्यमंत्री ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में छोटे-बड़े सभी काम सीखने चाहिए। खाना बनाना, अपने दैनिक कार्य स्वयं करना, मेहनत करना और जिम्मेदारियों को समझना आत्मनिर्भरता के महत्वपूर्ण गुण हैं। उन्होंने अपने ग्रामीण जीवन के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने खेतों में काम किया है और खेती-किसानी से जुड़े विभिन्न कार्यों को नजदीक से समझा है।

उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों से सीखने की क्षमता जरूरी है। युवाओं को अपनी पृष्ठभूमि या संसाधनों की सीमाओं को बाधा मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाना चाहिए।

अनुशासित जीवनशैली और जनता का विश्वास है ऊर्जा का आधार

मुख्यमंत्री ने अपनी व्यस्त दिनचर्या और ऊर्जा बनाए रखने के संबंध में पूछे गए सवाल पर कहा कि जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन करने के लिए अनुशासित जीवनशैली आवश्यक है। योग, ध्यान, शारीरिक गतिविधि, संतुलित खानपान और नियमित दिनचर्या व्यक्ति को सक्रिय बनाए रखने में मदद करते हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में दिनभर बैठकों, विभिन्न क्षेत्रों के भ्रमण और जनसमस्याओं के समाधान से जुड़े कार्यों के बीच समय का प्रबंधन महत्वपूर्ण है। हालांकि, उनके लिए ऊर्जा और प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत जनता के बीच जाना, लोगों का स्नेह प्राप्त करना और उनका विश्वास महसूस करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास उन्हें निरंतर काम करने और प्रदेश के विकास के लिए अधिक समर्पण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्य करने के प्रति समर्पण और सक्रियता से प्रेरणा मिलने की बात भी कही।

हरिद्वार कुंभ की व्यवस्थाओं में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान

कार्यक्रम में हरिद्वार की एक युवा कंटेंट क्रिएटर ने आगामी कुंभ की तैयारियों, व्यवस्थाओं और स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं के संबंध में सवाल किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। हरिद्वार में मां गंगा के तट पर आयोजित होने वाले कुंभ का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इसलिए सरकार का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने कहा कि कुंभ की तैयारियों में घाटों के विकास, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, आवागमन, सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाओं को ध्यान में रखा जा रहा है। साधु-संतों और संबंधित पक्षों के साथ संवाद एवं समन्वय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुंभ की सफलता सामूहिक सहभागिता और सहयोग से ही सुनिश्चित होती है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं और कंटेंट क्रिएटर्स को कुंभ की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्ता को सकारात्मक ढंग से प्रस्तुत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से पर्यटन, स्थानीय व्यापार और सेवा क्षेत्र को भी प्रोत्साहन मिलता है।

युवाओं से आत्मीय संवाद के साथ मुख्यमंत्री ने दिया सकारात्मक और जिम्मेदार कंटेंट का संदेश

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया केवल मनोरंजन या लोकप्रियता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, जानकारी पहुंचाने, स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने और विकास की संभावनाओं को विस्तार देने का सशक्त साधन है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की नई पीढ़ी तकनीक और डिजिटल माध्यमों से गहराई से जुड़ी हुई है। कंटेंट क्रिएटर्स अपनी रचनात्मकता के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक संपदा, पर्यटन, स्थानीय उद्यमिता और विकास की कहानियों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा और डिजिटल पहुंच प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण संपत्ति है। आवश्यकता इस बात की है कि वे अपनी क्षमता का उपयोग सकारात्मक, तथ्यपरक और रचनात्मक कार्यों में करें। इससे उत्तराखंड की पहचान मजबूत होगी और स्थानीय समाज को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

‘शाइनिंग स्टार्स ऑफ उत्तराखंड-2026’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित भी किया। उन्होंने उनकी उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक पवनदीप राजन, यूट्यूबर सौरव जोशी, अवंतिका भट्ट, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर तनु रावत, आरजे काव्या, प्रियंका कंडवाल और आशा नेगी सहित उत्तराखंड के विभिन्न प्रमुख कंटेंट क्रिएटर्स, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स, गायक, अभिनेता तथा फिल्म जगत से जुड़ी अन्य प्रतिभाएं उपस्थित रहीं।

सेवा संकल्प अभियान के तहत दून में हुआ बहुउद्देशीय शिविर, मुख्यमंत्री ने प्रतिभाग कर विभागीय स्टॉलों का किया अवलोकन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के तपोवन रोड स्थित क्षत्रिय चेतना मंच में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने लाभार्थियों को कृषि यंत्र, मशरूम मिनीकिट तथा बाल विकास विभाग की महालक्ष्मी एवं किशोरी किट का वितरण भी किया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविरों में प्राप्त जनसमस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। जिन समस्याओं के समाधान में समय लगना आवश्यक हो, उनके संबंध में शिकायतकर्ता को स्पष्ट जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि आम जनता को अपने कार्यों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से प्रदेश में सेवा संकल्प अभियान संचालित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर अनेक नई उपलब्धियां हासिल की हैं। आज देश विकास के नए आयाम स्थापित करते हुए विकसित भारत के संकल्प की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी भावना के अनुरूप राज्य सरकार सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जनसेवा और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के साथ ही लोगों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पूर्व में संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के दो चरणों में 6.5 लाख से अधिक लोगों ने भागीदारी की। इस अभियान के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों की समस्याओं का समाधान करने के साथ ही पात्र नागरिकों को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि शासन-प्रशासन स्वयं जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझे और उनका समाधान सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुउद्देशीय शिविरों का उद्देश्य केवल विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाना नहीं, बल्कि सरकार की योजनाओं, सेवाओं और सुविधाओं को सीधे जनता तक पहुंचाना है। इन शिविरों के माध्यम से लोगों की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान के लिए मौके पर ही आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। सरकार की प्राथमिकता है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे और कोई भी पात्र व्यक्ति जानकारी के अभाव अथवा प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण योजनाओं से वंचित न रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार जनसेवाओं को अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि लोगों को प्रमाणपत्र, पेंशन, राशन कार्ड, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य सरकारी कार्यों के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर ही आवश्यक सेवाओं का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनसमस्याओं का समाधान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनसेवा का महत्वपूर्ण दायित्व है। प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और उसके समाधान के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन और जनता के बीच की दूरी कम करने तथा आपसी संवाद बढ़ाने में इस प्रकार के शिविरों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन शिविरों के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि बीमारियों की समय पर पहचान हो सके और जरूरतमंद लोगों को उचित उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आयुष्मान भारत और अटल आयुष्मान उत्तराखंड जैसी योजनाओं के माध्यम से पात्र लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवासियों से बहुउद्देशीय शिविरों का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग अपनी समस्याएं संबंधित विभागों के अधिकारियों के समक्ष रखें और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर पात्रता के अनुसार उनका लाभ लें। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों से भी जनसेवा की भावना के साथ इन शिविरों को सफल बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान जनता के प्रति सरकार की जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जनभागीदारी और सुशासन के माध्यम से ही विकसित उत्तराखण्ड के संकल्प को साकार करते हुए विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री धामी ने SDRF उत्तराखंड को ISO 9001:2015 प्रमाणपत्र प्राप्त होने पर दी बधाई एवं शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) उत्तराखंड को ISO 9001:2015 प्रमाणपत्र प्राप्त होने पर बल के समस्त अधिकारियों एवं जवानों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि यह SDRF की कार्यकुशलता, अनुशासन, समर्पण और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में गुणवत्ता एवं उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य में SDRF की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक आपदाओं एवं अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों के माध्यम से SDRF के जवान लोगों की जान बचाने और प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। कठिन परिस्थितियों में साहस, तत्परता और सेवाभाव के साथ कार्य करना SDRF की विशिष्ट पहचान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ISO 9001:2015 प्रमाणपत्र प्राप्त होना संगठन में प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था, निर्धारित प्रक्रियाओं, कार्यों की गुणवत्ता और निरंतर सुधार के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह उपलब्धि SDRF के अधिकारियों एवं जवानों की मेहनत, समर्पण और टीम भावना का परिणाम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि SDRF भविष्य में भी आपदा प्रबंधन एवं राहत-बचाव कार्यों में दक्षता और उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करता रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन तंत्र को आधुनिक, सक्षम और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। सरकार का उद्देश्य आपदाओं के दौरान जन-धन की हानि को न्यूनतम करना तथा प्रभावित लोगों तक समय पर राहत एवं सहायता पहुंचाना है। उन्होंने SDRF के सभी अधिकारियों और जवानों से इसी सेवाभाव, तत्परता एवं समर्पण के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए सेनानायक SDRF अर्पण यदुवंशी सहित समस्त अधिकारियों, जवानों एवं संबंधित कार्मिकों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

भीषण ओलावृष्टि की सूचना, खराब मौसम के बावजूद मुख्यमंत्री ने हेलीकॉप्टर का रुख बाजपुर की ओर कराया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाजपुर क्षेत्र में हुई भीषण ओलावृष्टि की सूचना मिलते ही प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण एवं स्थलीय निरीक्षण कर फसलों को हुए नुकसान का जायजा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रभावित किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।

शुक्रवार को दोपहर लगभग 12 बजे बाजपुर क्षेत्र में अचानक भीषण ओलावृष्टि हुई, जिससे किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा। इसी दौरान मुख्यमंत्री श्री धामी हल्द्वानी से देहरादून लौट रहे थे। जैसे ही उन्हें ओलावृष्टि और फसलों को हुए नुकसान की जानकारी मिली, उन्होंने खराब मौसम के बावजूद पायलट को हेलीकॉप्टर बाजपुर की ओर ले जाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने पहले हेलीकॉप्टर से ओलावृष्टि प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद बाजपुर में उतरकर प्रभावित खेतों का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने किसानों से सीधे संवाद कर फसलों को हुए नुकसान, उनकी समस्याओं और कठिनाइयों की जानकारी प्राप्त की तथा उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।

मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का विस्तृत सर्वेक्षण एवं नुकसान का आकलन प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ किसानों के साथ खड़ी है। किसानों के हितों की रक्षा और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित किसानों की समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो और नुकसान के आकलन से लेकर राहत संबंधी कार्रवाई तक पूरी तत्परता एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाए।

प्रांतीय व्यापारी सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कीं व्यापारी हितों से जुड़ी आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी के राजकीय मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित प्रांतीय व्यापारी सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर व्यापारियों के हितों से जुड़ी आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। व्यापारियों की सुरक्षा, सम्मान और हितों की रक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर से आए व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि व्यापारी केवल वस्तुओं के क्रय-विक्रय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रोजगार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने और प्रदेश की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बड़े उद्योगों से लेकर छोटे दुकानदारों तक, प्रत्येक व्यापारी राज्य के विकास में योगदान दे रहा है। कोविड-19 जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी व्यापारियों ने आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार व्यापारियों को केवल करदाता नहीं, बल्कि विकास का महत्वपूर्ण भागीदार मानती है। सरकार का प्रयास है कि व्यापारियों को भयमुक्त, सुरक्षित और पारदर्शी वातावरण मिले तथा उन्हें अनावश्यक प्रक्रियाओं और कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। व्यापारियों की समस्याओं के समयबद्ध समाधान और उनके साथ निरंतर संवाद पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने व्यापारी हितों से जुड़ी आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं कींकृ

1. प्राकृतिक आपदा अथवा अन्य आपदाओं से प्रभावित व्यापारियों को नियमानुसार उचित राहत उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

2. व्यापारियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर उद्योग मित्र समितियों का पुनर्गठन कर नियमित बैठकें आयोजित कराई जाएंगी।

3. जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों के दुर्घटना बीमा से संबंधित जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि पात्र व्यापारियों के आश्रित समय पर बीमा दावे की प्रक्रिया पूरी कर सकें।

4. पर्यटन व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए पंजीकरण प्रक्रिया सरल बनाई जाएगी तथा सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की जाएगी।

5. पर्यटन बहुल क्षेत्रों और जिला मुख्यालयों में होमस्टे सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार एवं अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकें।

6. चारधाम यात्रा मार्ग पर आवश्यक स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे यात्रियों और व्यापारियों को सुविधा मिल सके।

7. राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य मार्गों तथा अन्य प्रमुख मार्गों से जुड़े बाजारों में सड़कों एवं नालियों के निर्माण और मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता से कराया जाएगा।

8. व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिकों को कर्मकार कल्याण बोर्ड की योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ दिलाया जाएगा।

व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में व्यापार, उद्यमिता, डिजिटल लेन-देन और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है। उत्तराखण्ड में भी व्यापार और निवेश से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से 26 प्रमुख विभागों की 206 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। निवेशकों और उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिए श्निवेश मित्रश् व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तराखण्ड स्टार्टअप नीति तथा 200 करोड़ रुपये के वेंचर फंड की व्यवस्था की गई है। सरकार औद्योगिक विकास को केवल मैदानी क्षेत्रों तक सीमित न रखकर पर्वतीय क्षेत्रों में भी उद्यमिता और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष औद्योगिक पार्कों के लिए भूमि चिह्नित की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में स्थानीय व्यापार, पर्यटन, लघु उद्योग और स्वरोजगार की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के व्यापारियों को स्थानीय बाजारों के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान स्थापित करने के अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को आध्यात्मिक शक्ति के साथ आर्थिक शक्ति का भी प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने व्यापारियों से प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि उनके सहयोग से विकसित, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त उत्तराखण्ड का संकल्प साकार होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की स्मारिका का विमोचन किया तथा व्यापार मंडल की विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया।

इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक बंशीधर भगत एवं सरिता आर्या, महापौर गजराज सिंह बिष्ट, प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश अध्यक्ष नवीन वर्मा, प्रदेश महामंत्री प्रकाश मिश्रा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, दर्जाधारी राज्यमंत्री डॉ. अनिल कपूर डब्बू, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी., मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी विवेक राय सहित व्यापारी संगठनों के पदाधिकारी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।