महाराष्ट्र सरकार का अभाविप ने फूंका पुतला, पत्रकार अर्णब को रिहा करने की मांग


पत्रकार व संपादक अर्णब गोस्वामी को बिना वारंट हिरासत में लेने की घटना का विरोध एबीवीपी की स्वर्गाश्रम व लक्ष्मणझूला इकाई ने किया। कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र सरकार का पुतला दहन कर प्रदर्शन किया और अर्णब गोस्वामी को जल्द ही रिहा कर निष्पक्ष जांच करने की मांग भी की। विद्यार्थी परिषद महाराष्ट्र सरकार और उसके पुलिस द्वारा प्रेस फ्रीडम की धांधली की निंदा करता है।

नगर मंत्री राहुल बडोनी ने कहा जो लोग भारत तो अघोषित आपातकाल के तहत होने की बात करते हैं उसके पास आज की पेशकश के लिए मुक बधिरता है जब महाराष्ट्र में राजनीति के लिए प्रेस स्वतंत्रता को बंधक बना लिया गया था। लोकतंत्र का चैथा स्तंभ महाराष्ट्र खतरे में है और हम लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए खड़े हैं।

प्रदर्शन के दौरान विभाग संयोजक विनोद चैहान, पूर्व नगर मंत्री शुभम झा, नगर सह मंत्री सुमित भंडारी, कॉलेज इकाई अध्यक्ष अनिरुद्ध शर्मा, अरुण, विवेक भारती, अंकित, उमेश यादव आदि उपस्थित रहे

केदारनाथ स्थित ईशानेश्वर मंदिर के नव निर्माण में मुंबई के दानी मनोज सोलंकी ने जताई इच्छा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड की बैठक हुई। बैठक में बोर्ड के संचालन से सम्बन्धित विषयों के साथ ही बोर्ड द्वारा तैयार किये विभिन्न ड्राफ्ट रूल को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसे शासन को उपलब्ध कराया जायेगा। इसमें पुजारियों, न्यासी, तीर्थ पुरोहितो, पण्डो व हक हकूक धारियों के अधिकारों का विनिश्चय एवं संरक्षण से सम्बन्धित नियमावली भी शामिल है। इस अवसर पर देवस्थानम बोर्ड के लोगो (प्रतीक चिन्ह्) की डिजाइनों पर भी चर्चा हुई। जिनमें कतिपय संशोधन के पश्चात अन्तिम निर्णय लिया जायेगा।
बैठक में श्री बद्रीनाथ धाम में मन्दिर एवं समीपवर्ती स्थलों के विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण के सम्बन्ध में निर्णय लिया गया कि बद्रीनाथ धाम में यात्रियों की संख्या में प्रतिवर्ष हो रही वृद्धि के कारण इस क्षेत्र का विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण आवश्यक है ताकि भविष्य में यात्रियों को दर्शन, यातायात एवं ठहरने की समुचित व्यवस्था हो सके इसके लिए देवस्थानम बोर्ड को इसकी व्यवस्था सौंपे जाने पर विचार किया गया। बोर्ड के स्तर पर इससे सम्बन्धित कार्यवाही सुनिश्चित कर शीघ्र प्रस्ताव तैयार कर शासन को प्रेषित करने पर सहमति बनी। बोर्ड अपने स्तर पर इसके लिये तकनीकि एवं विषय विशेषज्ञों की व्यवस्था भी कर सकेगा। इसके साथ ही बैठक में तृतीय केदार श्री तुंगनाथ मन्दिर एवं सभा मण्डप आदि के जीर्णोद्धार पर भी सहमति बनी इसके लिये यू.एस.ए. के दानी पंकज कुमार द्वारा धनराशि व्यय करने की इच्छा जतायी है।
केदारनाथ स्थित ईशानेश्वर मन्दिर के नव निर्माण के लिये भी स्वीकृति प्रदान की गई इस मन्दिर के निर्माण के लिये मुम्बई के दानी मनोज सोलंकी ने इच्छा व्यक्त की है। श्री केदारनाथ मन्दिर के पूरब द्वार की मरम्मत पर भी सहमति बनी जिसके लिये धनराशि दानी हरियाणा के श्री यतिन घई ने दान की सहमति दी है।

बैठक में केदारनाथ मे रावल पुजारी आदि के कक्षों की मरम्मत भविष्य में ऊखीमठ मन्दिर के जीर्णोद्वार, बहुमूल्य पाण्डुलिपियों को डिजिटाइल किये जाने, कार्तिक स्वामी मन्दिर को देवस्थानम बोर्ड के अधीन लाये जाने तथा थैलीसैण्ड स्थित विन्देश्वर मन्दिर के जीर्णोद्वार किये जाने पर सहमति प्रदान की गई।
बैठक में मुख्यमंत्री एवं अध्यक्ष, उत्तराखण्ड देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड त्रिवेन्द्र ने यात्रा मार्गो सहित मन्दिर परिसरो में देवस्थानम बोर्ड के साइनेज होर्डिंग आदि लगाये जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ, केदारनाथ मन्दिरों के पुजारियों, पण्डों, पुरोहितों, वाद्य यंत्र वादको आदि का विवरण तैयार किया जाय ताकि जरूरत पड़ने पर इन लोगों को भी आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जा सके। उन्होंने कहा कि ये लोग हमारी संस्कृति के संवाहक हैं।
उत्तराखण्ड देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने बताया कि 25 अक्टूबर तक चारधाम में 1.72 लाख यात्री दर्शनार्थ आये हैं तथा 2 लाख द्वारा रजिस्ट्रेशन किया गया है, जबकि बद्रीनाथ मन्दिर को 7.55 करोड़ तथा केदारनाथ मन्दिर को 75 लाख की आय हुई है।
बैठक में कैबिनेट मंत्री एवं उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड सतपाल महाराज, विधायक महेन्द्र भट्ट, गोपाल रावत, सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, सचिव वित्त श्रीमती सौजन्या, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीडी सिंह, देवस्थानम बोर्ड के अनिल ध्यानी, प्रमोद नोटियाल, डॉ0 हरीश गौड आदि उपस्थित थे।

अभिनेत्री कंगना के दफ्तर तोड़फोड़ मामले में संजय राउत को पार्टी बनाने पर कोर्ट से मिली सहमति

अभिनेत्री कंगना रौनत के दफ्तर में तोड़फोड़ के मामले के बांबे हाईकोर्ट ने शिवसेना प्रवक्ता व सामना के संपादक संजय राउत को अभियोजित पार्टी बनाने की इजाजत दी हैं। अभिनेत्री को कोर्ट ने बीएमसी के अधिकारी भाग्यवंत लाते को भी पार्टी बनाने के लिए सहमति दी है।

बता दें कि संजय राउत ने कथित तौर पर अभिनेत्री को उखाड़ के रख दूंगा और उखाड़ दिया जैसे वाक्य कहे थे और कंगना ने इसे उन्हें धमकाने की कोशिश बताया था। पिछले नौ सितंबर को बीएमसी ने कंगना के बांद्रा स्थित ऑफिस के कुछ हिस्सों को अवैध बताकर तोड़ दिया था। हाई कोर्ट में कंगना ने बीएमसी की कार्रवाई को रोकने की मांग की थी, लेकिन यथास्थिति बनाए रखने का फैसला आने से पहले ही उनके ऑफिस में तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी गई। इसलिए कंगना ने अपनी याचिका में संशोधन करके बीएमसी से 2 करोड़ रुपये के मुआवजा की मांग की। इसके बाद बीएमसी ने अपने जवाब में दावा किया कि कंगना की याचिका कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है, इसीलिए अभिनेत्री की याचिका खारिज करके उन पर जुर्माना लगाना चाहिए।

हाई कोर्ट की डिविजन बेंच में सुनवाई के दौरान मंगलवार को बीएमसी के वकीलों ने कहा कि अभिनेत्री ने बीएमसी के हलफनामे के जवाब में जो प्रत्यत्तर (रिजॉइन्डर) दिया है, उसका जवाब देने की हमें मोहलत दी जाए। बीएमसी की वकीलों की अपील को जस्टिस एस जे कथावाला और जस्टिस आर आई चागला की बेंच ने स्वीकार कर लिया। कंगना के वकील रिजवान सिद्दीकी और बीरेंद्र सराफ ने हालांकि बीएमसी के वकीलों द्वारा अतिरिक्त समय मांगे जाने का विरोध किया। सराफ ने कहा कि तोड़फोड़ में शामिल अधिकारियों ने कथित अवैध निर्माण की कुछ और फोटो मंगलवार को कोर्ट में जमा किए हैं, यह केस को लटकाने की रणनीति है।

अपने रिजॉइन्डर में कंगना ने कहा कि नोटिस में बीएमसी ने उनके बंगले में चल रहे हुए कथित अवैध निर्माण की एक ही तस्वीर दी थी, जिससे साफ है कि बीएमसी का आरोप झूठा है। संजय राउत द्वारा मौखिक रूप से श्धमकानेश् के सबूत जो कंगना ने कोर्ट में जमा किए थे, उसकी ओर इशारा करते हुए जस्टिस कथावाला ने पूछा कि क्या वह शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता को भी अभियोजित करना चाहती हैं?

शुरू में सराफ, संजय राउत को अभियोजित करने को लेकर इच्छुक नहीं दिखे और कहा कि वह चाहते हैं कि शिवसेना प्रवक्ता को आरोपों पर खुद को डिफेंड करने का मौका मिलना चाहिए, पर बाद में उन्होंने सहमति दे दी। इसके बाद कोर्ट ने बीएमसी अधिकारी भाग्यनवंत लाते को भी पार्टी बनाने की इजाजत दे दी, जिन्होंने बीएमसी की तरफ से हलफनामा दाखिल किया था। कोर्ट ने बीएमसी से यह भी पूछा कि तोड़फोड़ के लिए वर्ष 2012 का सर्कुलर लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी। इस सर्कुलर के मुताबिक, 24 घंटे में किसी अवैध निर्माण में तोड़फोड़ तभी की जा सकती है, जब इसमें रहने वाले या किसी अन्य की जिंदगी खतरे में हो।

हाई कोर्ट ने पूछा कि इस मामले में किसकी जिंदगी खतरे में थी, जो 8 सितंबर को नोटिस भेजने के बाद बीएमसी के अधिकारियों ने 9 सितबंर को तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी। कोर्ट ने बीएमसी से पूछा कि डिजायनर मनीष मल्होत्रा को भी उसी दिन मुंबई नगरपालिका कानून के 354(ए) के तहत नोटिस भेजा गया था, उस मामले की क्या स्थिति है। दरअसल, कंगना ने अपने रिजॉइन्डर में कहा था कि मनीष मल्होत्रा को जवाब देने के लिए सात दिनों की मोहलत दी गई, जबकि उनके साथ ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि बीएमसी की कार्रवाई दुर्भावना से ग्रसित थी।

आखिर एसएसआर को किस बॉलीवुड अभिनेता ने कॅरियर खत्म करने की दी थी धमकी

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच देश की तीन बड़ी एजेंसियां कर रही है। इस मामले में सभी जांच एजेंसी हर पहलू से छानबीन भी कर रही हैं। वहीं सुशांत सिंह राजपूत को लेकर हर दिन कई लोग खुलासे भी करते रहते हैं। इस बार बॉलीवुड के मशहूर निर्माता-निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने दिवंगत अभिनेता को लेकर हैरान कर देने वाली बात का खुलासा किया है। 
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद कई बार यह बात निकलकर सामने आई है कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में अपने भविष्य को लेकर चिंता थी और वह नेपोटिज्म का शिकार थे। ऐसे में विवेक अग्निहोत्री ने खुलासा किया है कि सुशांत सिंह राजपूत को एक स्टार ने उनका करियर खत्म करने की धमकी दी थी। साथ ही कहा है कि रिया चक्रवर्ती को इस मामले में केवल मुखौटा बनाया जा रहा है। इस बात का खुलासा विवेक अग्निहोत्री ने अपने ट्विटर हैंड पर किया है। 
विवेक अग्निहोत्री सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। वह कई मुद्दों पर अपनी राय भी देते रहते हैं। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर एक घटना का जिक्र किया है, जिसमें उन्होंने एक स्टार द्वारा सुशांत सिंह राजपूत का करियर खत्म करने की धमकी का जिक्र किया है। विवेक अग्निहोत्री ने अपने ट्वीट में लिखा, एक बार फार्म हाउस में सुशांत सिंह राजपूत की एक स्टार के साथ बहस हो गई थी, जिसने उन्हें लांच किया था। 
अपने ट्वीट में किसी का नाम लिए बिना विवेक अग्निहोत्री ने आगे लिखा, इस बहस में उस स्टार ने अपना आपा खो दिया था और गुस्से में सुशांत सिंह राजपूत को कहा था कि वह उसका करियर वैसे ही खत्म कर देगा जैसे बाकी लोगों का किया है। विवेक अग्निहोत्री ने ट्वीट के आखिरी में लिखा, रिया चक्रवर्ती तो केवल एक मुखौटा हैं। मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार कुछ बेहद पावरफुल लोगों को बचा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर विवेक अग्निहोत्री का यह ट्वीट अब तेजी से वायरल हो रहा है। सुशांत सिंह राजपूत के फैंस भी उनके इस ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे है। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच मामले सीबीआई, ईडी और एनसीबी लगातार कर रही हैं। इस मामले में कई लोगों पर दिवंगत अभिनेता को आत्महत्या के लिए उकसाने, उनके पैसे हड़पने और ड्रग्स का लेन-देन करने जैसे गंभीर आरोप हैं। 

क्या सुशांत के दोस्तों को धमकी मिल रही, जानिए पूरी खबर

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के कथित आत्महत्या मामले ने एक नया ही मोड़ ले लिया है। मामले को लेकर कई लोग अलग-अलग तरह की बातें कर रहे हैं। सुशांत से जुड़े लोग मामले में सुशांत का समर्थन कर रहे हैं। उनके दोस्तों और करीबी लोगों का मानना है कि सुशांत आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकते हैं। वहीं इस मामले में अपने आप को अहम गवाह मान रहे गणेश हिवारकर और अंकित आचार्य को जान से मारने की धमकी मिल रही है।
अंकित आचार्य सुशांत सिंह राजपूत के पूर्व मैनेजर हैं और गणेश हिवारकर सुशांत के दोस्त। दोनों ने ही एक न्यूज चैनल से बात करते हुए खुलासा किया था कि सुशांत दिमागी तौर पर एकदम स्वस्थ थे। अंकित ने कहा था कि सुशांत का मर्डर हुआ है, वो भी उनके डॉगी फज के बेल्ट से। तो वहीं गणेश ने दावा किया था कि सुशांत के निधन के एक दिन पहले यानी 13 जून को पांच से छह लोग सुशांत के फ्लैट पर आए थे। अब हाल ही में अंकित आचार्य ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया है कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। अंकित ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए एक स्टोरी साझा की। जिसके जरिए उन्होंने बताया कि उन पर पुलिस और मीडिया से दूर रहने का दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही अपना मुंह बंद रखने की धमकी भी दी जा रही है। जिसके चलते अंकित ने अपने लिए प्रोटेक्शन की मांग की है।
अंकित ही नहीं बल्कि गणेश के साथ भी ऐसा ही कुछ हो रहा है। हाल ही में गणेश हिवारकर ने ट्विटर पर इस बात की जानकारी देते हुए अपनी जान को खतरा बताया है। इसके साथ ही उन्होंने सुरक्षा की भी मांग की। गणेश ने अपने ट्वीट में लिखा- श्मेरे और अंकित के लिए सुरक्षा की आवश्यकता है।श् अपने ट्वीट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत, अंकिता लोखंडे और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित अन्य कई लोगों को टैग किया है।
हालांकि बाद में गणेश ने एक अन्य ट्वीट और किया। जिसके जरिए उन्होंने लोगों की प्रतिक्रिया के लिए उन्हें धन्यवाद दिया है। इस ट्वीट में गणेश ने लिखा, श्आप सभी को आपके शानदार समर्थन के लिए धन्यवाद। आपकी दुआओं की वजह से ही हम सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हम आखिरी सांस तक सुशांत के लिए लड़ेंगे। पिछले दो दिन से अंकित मेरे साथ हैं। हम साथ में सुशांत के न्याय के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। बहुत शुक्रिया।

ऐतिहासिक उत्तराखंडी फिल्म बनाने वाले अशोक मल्ल का निधन

प्रसिद्ध समाजसेवी अभिनेता अशोक मल्ल के निधन से मुंबई से लेकर उत्तराखंड तक शोक की लहर दौड़ गई है। उत्तराखंडी फिल्म जगत के आधार स्तंभ के रूप में अनेक फिल्मों से पहाड़ में फिल्म उद्योग को सींचने वाले अशोक मल्ल जी ने गढवाली फिल्म कौथिग, गोपीभीना, बंटवारू, मेरी गंगा होली त मैमा आली, चक्रचाल जैसी हिट फिल्में दी हैं।
अभिनेता अशोक मल्ल ने उत्तराखंडी फिल्म गोपीभीना में खुद डायरेक्टर की भूमिका में पहाड़ की खूबसूरत वादियों में फिल्मांकन की संभावनाओं की मजबूत बुनियाद बनाई।उत्तराखंड के सुपर स्टार एक महान समाजसेवक और एक अच्छे इंसान के असमय चले जाने से मुंबई के तमाम लोगों ने संवेदना व्यक्त करते हुए गहरा दुख जताया है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी शोक संवेदना व्यक्त की।मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंण्ड की आंचलिक फिल्मों के अभिनेता, नामी रंगकर्मी अशोक मल्ल के निधन का समाचार सुनकर अत्यंत दु:ख हुआ। परमपिता परमेश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं शोक संतप्त परिजनों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना करता हूँ। कलाकार कभी नहीं मरते, उनकी यादें सदैव जिंदा रहती हैं। भावभीनी श्रद्धांजलि।

उत्तराखंडी फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता व उनके साथ काम कर चुके बलराज राणा ने कहा अशोक मल्ल जी उत्तराखंड फिल्मों म एक बेहतरीन अभिनेता थे। जो 1986 सी लगातार 2020 आज तक बतौर अभिनेता, लेखक, निर्देशक का रुप म उत्तराखंड को गौरव बढ़णा छिन।
भाई अशोक मल्ल द्वारा फिल्म व रंगमंच मा अभिनीत/ निर्देशित/ नृत्य निर्देशक को विवरण,

1- कौथिग (मुख्य अभिनेता)
1987 गढ़वाली फिल्म
2- मेघा आ (मुख्य खलनायक)
1987 कुमाऊंनी फिल्म
3- बंटवारू (नायक का बड़ा भाई)
1992 गढ़वाली फिल्म
4- चक्रचाल (नायक का बड़ा भाई)
1997 गढ़वाली फिल्म
5- मेरी गंगा होलि त मीमू आली (मुख्य नायक)
2004 उत्तराखंडी फिल्म
6- गोपी भैना (निर्देशक)
2016 उत्तराखंडी फिल्म

उत्तराखंडी रंगमंच मुंबई

1- रामलीला मुंबई (स्थान -चेंबूर)
1984 से 1986 तक हनुमानजी कि भूमिका निभाई।

पर्वतीय नाटक मंच के अंतर्गत अभिनित व नृत्य निर्देशित
2- प्यारी जन्मभूमि उत्तराखंड
17 नवंबर 1994 मुंबई दामोदर हाल
नृत्य निर्देशक
3 – वीरभड़ माधोसिंह भंडारी
11 सितंबर 1995 मुंबई दीनानाथ मंगेशकर हाल
नृत्य निर्देशक
4- सत्यवान सावित्री
10 जनवरी 1996 मुंबई कर्नाटक संघ हॉल
नृत्य निर्देशक
5- सिमन्या समधी
9 फरवरी 1997 मुंबई दीनानाथ मंगेशकर हाल
मुख्य नायक
6- चला कौथिग देखी ओला
9 फरवरी 999 मुंबई कर्नाटक संघ हॉल
नृत्य निर्देशक
7- कख बोली मेरी डांडी कांठी
14 दिसंबर 1999 मुंबई कर्नाटक संघ हॉल
नृत्य निर्देशक
8- सरूली मेरु जिया लगीगे
13 जनवरी 2004 मुंबई षणमुखानंद हॉल
मुख्य नायक

9- मुंबई कौथिग प्रथम बार नवी मुंबई में स्थापना
2009 तीन दिवसीय भव्य आयोजन,
प्रथम बार उत्तराखंड संस्कृति विभाग की टीम मुंबई में
आयोजक /निर्देशक

इसके अलावा अनेक हिंदी धारावाहिक और पृथ्वी थिएटर मुंबई में कई हिंदी नाटकों में अभिनय व कई उत्तराखंडी नाटकों में भाई अशोक मल्ल ने कार्य किया।

श्रमिक स्पेशल ट्रेन से पहुंचे प्रवासियों ने केन्द्र और राज्य सरकार का आभार जताया

(एनएन सर्विस)
महाराष्ट्र के ठाणे स्टेशन से श्रमिक स्पेशल ट्रेन राज्य के 992 प्रवासियों को लेकर लगभग रात डेढ़ बजे लालकुआं जंक्शन पहुंच गई। यहां थर्मल स्क्रीनिंग के बाद सभी यात्रियों को रोडवेज की 35 बसों के माध्यम से उनको घरों के लिए रवाना किया गया। करीब 27 घंटे का सफर कर पहुंची ट्रेन में 900 वयस्क और 92 यात्री 5 साल से कम उम्र के है। वहीं, ट्रेन पहुंचने पर प्रशासनिक अफसरों ने प्रवासियों का उत्तराखण्ड पहुंचने पर स्वागत किया। अधिकारियों ने यात्रियों को सोशल डिस्टेंस मेटेंन करवाया। स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वारों पर पर्याप्त सिविल और रेलवे पुलिस के जवान मुश्तैदी के साथ तैनात रहे। कुल 1400 प्रवासियों ने प्रदेश वापसी के लिए रिजर्वेशन कराया था। इसमें 992 यात्री ट्रेन से लौट आए। यात्रियों के मुताबिक उनसे 670 रुपए प्रति व्यक्ति किराया लिया गया। ट्रेन ठाणे स्टेशन से करीब 31 मिनट विलंब से चली। स्पेशल ट्रेन में कुल 24 कोच थे। 27 घंटे में ट्रेन से 1553 किमी का सफर तय किया।

सरकार का आभार जताया
प्रवासियों ने उनके लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाए जाने पर केंद्र और राज्य सरकार का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के उन्हें काफी दिक्कतों का समाना करना पड़ा। उन्होंने सरकार से गुजारिश की थी। आज घर वापसी होने पर वह सरकार का धन्यवाद देते है।

देना होगा बाजार मूल्य पर किराया, राज्य सरकार का अधिनियम अंसवैधानिक

हाईकोर्ट नैनीताल ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में पूर्व मुख्यमंत्रियों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधा देने वाले अधिनियम-2019 को अंसवैधानिक घोषित करते हुए उसे निरस्त कर दिया है। सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को अब बाजार भाव के हिसाब से किराया चुकाना होगा।
अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने बताया कि न्यायालय ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन मानते हुए यह निर्णय दिया। अधिवक्ता कोर्ट ने कहा कि अधिनियम के प्रावधान स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हैं। न्यायालय ने अधिनियम को भारत के संविधान के अनुच्छेद 202 से 207 के उल्लंघन में पाया है। अब सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को बाजार मूल्य से किराए का भुगतान करना होगा।
कोर्ट ने कहा कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों के रूप में उन्हें दी गई अन्य सभी सुविधाओं के लिए खर्च किए गए धन की गणना करने और उसकी वसूली के लिए राज्य उत्तरदायी होगा। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम के प्रावधान शक्तियों को अलग करने के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने 23 मार्च को मामले में सभी पक्षकारों को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद मंगलवार को निर्णय सुनाया गया है।
मामले के अनुसार, देहरादून की रुलक संस्था ने राज्य सरकार के उस अध्यादेश को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी, जिसके द्वारा राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के किराए को बाजार रेट के आधार पर भुगतान करने से छूट दे दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सभी पूर्व सीएम पर करीब 15 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा, किराया करीब पौने तीन करोड़ है, जिसकी वसूली के आदेश कोर्ट ने पिछले वर्ष छह माह में करने के आदेश दिए थे।

क्या है अधिनियम
रूलक सामाजिक संस्था के चेयरपर्सन अवधेश कौशल की ओर से हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस पर कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से बकाया वसूलने के आदेश जारी किए थे। इस आदेश के खिलाफ पूर्व सीएम व महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा ने हाईकोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल की लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी नहीं सुनी और उन्हें पुराना बकाया चुकाने का आदेश जारी रखा।
इसमें भगत सिंह कोश्यारी ने बकाया चुकाने की हैसियत न होने की बात कही तो फिर कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि क्यों न उनकी संपत्ति की जांच करा ली जाए। हाईकोर्ट में जब सरकार तथ्यों और तर्कों के आधार पर कुछ न कर पाई तो भगत सिंह कोश्यारी के लिए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों का बकाया माफ करने और सुविधाएं जारी रखने के लिए अध्यादेश ले आए। अधिवक्ता की ओर से बताया गया कि कैबिनेट में गुपचुप निर्णय करके अध्यादेश को मंजूरी के लिए राजभवन भेज दिया गया था। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला सहित अन्य सुविधाएं देने के मामले में सरकार ने राज्य का एक्ट नहीं बनाया।
सरकार ने उत्तर प्रदेश का एक्ट लागू करना स्वीकार किया लेकिन उसे संशोधित नहीं किया। पिछले वर्ष कोर्ट में दिए गए हलफनामे में लागू एक्ट में लखनऊ का उल्लेख कर दिया, जबकि उत्तर प्रदेश के अधिनियम में साफ तौर पर अंकित था कि सुविधा सिर्फ लखनऊ में दी जा सकती है। इसलिए राज्य सरकार को यह स्वीकार करना पड़ा कि उत्तराखंड में इस संबंध में कोई अधिनियम प्रभावी नहीं है।
वहीं, अधिवक्ता ने बताया कि 1981 में यूपी में बने अधिनियम में साफ उल्लेख था कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों को पद पर बने रहने तक सरकारी आवास मुफ्त मिलेगा। पद से हटने के 15 दिन में उन्हें आवास खाली करना होगा। 1997 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस नियम में बदलाव कर कहा कि अब पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास आवंटित किया जाएगा।
एक्ट में यह भी उल्लेख था कि आवास सिर्फ लखनऊ में ही दिया जाएगा, बाहर नहीं। 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड बनने के बाद यह नियम यहां निष्प्रभावी हो गया। राज्य सरकार ने यूपी के एक्ट को उत्तराखंड के लिए मोडिफाई नहीं किया लेकिन कोर्ट में बताया कि सरकार ने 2004 में लोकसेवकों को प्रतिमाह एक हजार रुपये किराये पर आवास देने के रूल्स बनाए थे। इसमें कहा गया कि ट्रांसफर होने के बाद अधिकतम तीन माह तक लोकसेवक आवंटित आवास में रह सकते हैं, फिर हर हाल में खाली करना होगा। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने बताया कि रूल्स सरकारी लोक सेवकों के लिए है, यह पूर्व मुख्यमंत्रियों पर लागू नहीं हो सकता।

टिकटॉक को आ गया बाय-बाय करने का समय, स्वदेशी एप मित्रों हो रहा पॉपुलर

भारत में टिकटॉक का बाय-बाय करने का वक्त आ गया है। भारत के युवाओं की जुबां पर अब टिकटॉक नहीं बल्कि स्वदेशी निर्मित एप मित्रों का नाम है। अभी तक इस एप को 50 लाख से ज्यादा युवा गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर चुके है। इसे आईआईटी रूड़की के पूर्व छात्रों ने बनाया है। इसे टिकटॉक का क्लोन भी कहा जा रहा है।

आईआईटी के पूर्व छात्रों का कहना है कि एप लांच करते समय हमें ऐसे ट्रैफिक की उम्मीद नहीं थी। इसे बनाने के पीछे लोगों को सिर्फ भारतीय विकल्प देना था। आईआईटी रुड़की में वर्ष 2011 में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ब्रांच से पासआउट छात्र शिवांक अग्रवाल ने अपने चार साथियों के साथ मित्रों एप बनाया है।

11 अप्रैल को हुआ था मित्रों एप लांच
पेटीएम के पूर्व सीनियर वाइस प्रेजिडेंट दीपक के ट्वीट के बाद इसकी चर्चा हर किसी की जुबान पर है। अचानक बड़ी संख्या में लोगों के एप डाउनलोड करने से नेटवर्क ट्रैफिक भी प्रभावित होने लगा। टीम मेंबर ने बताया कि वास्तव में 11 अप्रैल को एप लांच करते समय यह नहीं सोचा था कि इसे इतनी सफलता मिलेगी। टिकटॉक को पीछे छोड़ना जैसी कोई बात नहीं है। हमारा उद्देश्य लोगों को सिर्फ एक भारतीय विकल्प देना था। लोग इसका इस्तेमाल करना चाहेंगे या नहीं यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हमें लोगों से जो आशीर्वाद मिला, उससे हम बहुत खुश हैं। उन्होंने बताया कि हमें किसी ने फंड नहीं दिया है, उनका फंड लोगों का प्यार ही है।

मित्रों स्वदेशी नाम, इसलिए देना उचित
टीम मेंबर ने बताया कि मित्रों का अर्थ मित्र ही है। एक तो यह भारतीय उपभोक्ताओं को भारतीय मंच के जरिए सेवा देने के लिए है। हम स्वदेशी नाम देकर भारतीय नामों के खिलाफ पूर्वाग्रहों को भी दूर करना चाहते हैं।

महाराष्ट्र का सियासी संग्राम पर बनी है सबकी नजर, गेंद राज्यपाल के पाले में

महाराष्ट्र में कोरोना संकट के बीच नया संवैधानिक संकट खड़ा होने के आसार बन रहे है। राज्यपाल कोटे से एमएलसी मनोनीत होने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इंतजार कर रहे हैं। लेकिन महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की ओर से फैसला नहीं लिया गया है। हालांकि महाराष्ट्र के सियासी अतीत पर नजर डालें तो पहले भी मंत्री बनने के बाद मनोनीत कोटे से एमएलसी बनते आ रहे है।
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को राज्यपाल के मनोनीत कोटे से एमएलसी बनाने के लिए कैबिनेट ने प्रस्ताव भेजा है। राज्य में इससे पहले दत्ता मेघे और दयानंद महास्के को भी मंत्री बनने के बाद राज्यपाल विधान परिषद के लिए मनोनीत कर चुके हैं। आम तौर पर राज्यपाल कोटे से एमएलसी मनोनीत करने के लिए कुछ योग्यताएं होनी जरूरी हैं। महाराष्ट्र विधान परिषद की बात करें तो यहां कुल 78 सीटें हैं। इनमें से 66 सीटों पर निर्वाचन होता है, जबकि 12 सीटों के लिए राज्यपाल कोटे से मनोनीत किया जा सकता है।
30 सदस्यों को विधानसभा के सदस्य यानी एमएलए चुनते हैं। 7-7 सदस्य स्नातक निर्वाचन और शिक्षक कोटे के तहत चुने जाते हैं। इनमें राज्य के सात डिविजन मुंबई, अमरावती, नासिक, औरंगाबाद, कोंकण, नागपुर और पुणे डिविजन से एक-एक सीट होती है। इसके अलावा 22 सदस्य स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र के तहत चुने जाते हैं।
अब बात करते है राज्यपाल के मनोनीत कोटे की। इस कोटे के तहत विधान परिषद के 12 सदस्य चुने जाते हैं। इनमें साहित्य, विज्ञान, कला या कोऑपरेटिव आंदोलन और समाज सेवा का काम करने वाले विशिष्ट लोग आते हैं। संविधान के मुताबिक उद्धव ठाकरे को कला के आधार पर महाराष्ट्र विधान परिषद के लिए राज्यपाल की ओर से मनोनीत किया जा सकता है, क्योंकि वह एक वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर रह चुके हैं।
राजनीति से इतर उद्धव की पहचान एक फोटोग्राफर के रूप में भी रही है। उन्होंने चैरंग नाम की एक विज्ञापन एजेंसी भी स्थापित की। उन्हें फोटोग्राफी का शौक है और उनके द्वारा महाराष्ट्र के कई किलों की खींची गई तस्वीरों का संकलन जहांगीर आर्ट गैलरी में है। उन्होंने महाराष्ट्र देश और पहावा विट्ठल नाम से चित्र-पुस्तकें भी प्रकाशित की हैं।
उद्धव फिलहाल विधानमंडल के किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। 28 नवंबर 2019 को उन्होंने सीएम की शपथ ली थी। लिहाजा उन्हें शपथ ग्रहण के छह महीने के भीतर यानी 28 मई से पहले विधानसभा या विधानपरिषद के सदस्य के रूप में निर्वाचित होना जरूरी है। अब देखना है कि उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत करने पर राज्यपाल जल्द फैसला लेते हैं या 27 मई के बाद उन्हें कुर्सी छोड़नी होगी?