उप जिला चिकित्सालयों के लिए अधिकारियों को कैबिनेट में प्रस्ताव लाने के दिये निर्देश

राज्य सरकार ने सूबे में हेल्थ नेटवर्क मजबूत करने और आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से प्रदेश के डेढ़ दर्जन छोटे अस्पतालों को उप जिला चिकित्सालय में उच्चीकृत करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को शीघ्र प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट बैठक में प्रस्तुत करने को कहा गया है। विशेषकर कैलाश मानसरोवर यात्रा व चार धाम यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर करने की योजना है।

सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के सभागार में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की। जिसमें सूबे के चार धाम यात्रा मार्गों एवं कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग व दूरस्थ क्षेत्रों के डेढ़ दर्जन चिकित्सा इकाईयों को उच्चीकृत कर उप जिला चिकित्सालय बनाने का निर्णय लिया है। जिनमें चमोली जनपद में जोशीमठ, थराली, गैरसैंण शामिल है। जबकि रूद्रप्रयाग जनपद में गुप्तकाशी, पौड़ी में थलीसैण, उत्तरकाशी में भटवाड़ी, पुरोला, बड़कोट तथा टिहरी में नैनबाग, हरिद्वार में खानपुर, पिथौरागढ़ में डीडीहाट, बागेश्वर में बैजनाथ, अल्मोड़ा में सोमेश्वर, नैनीताल में ओखलकांडा तथा ऊधमसिंह नगर में सितारगंज व गदरपुर शामिल है। जबकि रूद्रप्रयाग जनपद के अंतर्गत त्रिजुगीनारायण में श्रद्धालुओं की बढ़ती तादाद को देखते हुये वहां पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोलने का निर्णय लिया गया है। विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि उपरोक्त सभी चिकित्सा इकाईयों के उच्चीकरण संबंधी प्रस्ताव मानकों के अनुसार तैयार कर शासन को उपलब्ध कराया जाय ताकि सभी प्रस्तावों पर कैबिनेट में विचार किया जा सके।

विभागीय मंत्री डा. रावत ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के स्वीकृत विभागीय बजट के आय-व्यय की समीक्षा करते हुये अधिकारियों को निर्देश दिये कि मार्च से पहले सभी मदों में स्वीकृत शतप्रतिशत बजट को खर्च कर लिया जाय जो जनपद समय पर आवंटित बजट खर्च नहीं कर पायेंगे उनके जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जायेगा। विभागीय अधिकारियों की पदोन्नति में हो रही देर पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुये सभी कार्मिकों की पदोन्नति समय पर करने के निर्देश दिये। स्वास्थ्य विभाग एवं चिकित्सा शिक्षा में रिक्त पदों का विवरण तलब करते हुये डा. रावत ने विभगाय अधिकारियों को विभिन्न श्रेणी के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर एएनएम के 391 पदों को भरने हेतु अधियाचन चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेजने के भी निर्देश दिये। साथ ही उन्होंने विभाग में चिकित्साधिकारियों के रिक्त पदो ंके बैकलॉक पदों को भरने संबंधी प्रक्रिया भी शुरू करने को कहा। उन्होंने कहा कि विभाग के अंतर्गत जनपद स्तर पर चल रहे निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिये महानिदेशालय स्तर पर प्रत्येक सप्ताह मॉनिटिरिंग की जाय ताकि समय पर बजट खर्च किया जा सके।
बैठक में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य एवं अनुश्रवण परिषद उत्तराखंड के उपाध्यक्ष सुरेश भट्ट, एमडी एनएचएम स्वाती एस भदौरिया, अपर सचिव स्वास्थ्य आनंद श्रीवास्तव, नमामि बंसल, अमनदीप कौर, अपर सचिव वित्त अमीता जोशी महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. विनीता शाह, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक स्वास्थ्य सुनीता टम्टा, अपर निदेशक भागीरथ जंगपांगी, मीतू शाह, ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी, संयुक्त निदेशक खाद्य डॉ. आर.के. सिंह, उपायुक्त एफडीए जी.सी. कंडवाल सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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उत्तराखंडः 18 हजार लोगों ने दी टीबी को मात

टीबी मुक्त उत्तराखंड के लिये राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास धरातल पर नजर आने लगे हैं। टीबी रोगियों की सेवा के लिये प्रदेश में हजारों ने लोगों ने आगे आ कर सामुदायिक भागीदारी निभाई है। इन निःक्षय मित्रों की मदद से सूबे में 18 हजार से अधिक लोग टीबी को मात देकर स्वस्थ हो चुके हैं।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत राज्य में अबतक 9630 लोगों ने निःक्षय मित्र के तौर पर अपना पंजीकरण कराया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को वर्ष 2024 तक टीबी मुक्त करने के उद्देश्य से प्रदेश के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान को व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है। जिसमें नि-क्षय मित्र चिन्हित टीबी रोगियों को गोद लेकर टीबी मुक्त अभियान में अहम भूमिक निभा रहे हैं। जिसमें हरिद्वार जनपद में सर्वाधिक 2148 नि-क्षय मित्र पंजीकृत हैं जबकि ऊधमसिंह नगर में 2173, नैनीताल 1288, देहरादून 1470, अल्मोड़ा 497, पौड़ी गढ़वाल 467, टिहरी 387, पिथौरागढ़ 245, रूद्रप्रयाग 221, चमोली 205, उत्तरकाशी 197, चम्पावत 179 तथा बागेश्वर में 153 नि-क्षय मित्रों का पंजीकरण किया गया है।

डॉ. रावत ने बताया कि सूबे में अबतक 15070 टीबी मरीजों का चिन्हिकरण किया जा चुका है, जिसमें से 10521 मरीजों ने नि-क्षय मित्रों से सामुदायिक सहयोग के लिये हामी भरी है जबकि प्रदेश में 9814 रोगी नि-क्षय मित्रों के सहयोग से लाभान्वित हो रहे हैं। जिसमें अल्मोड़ा जनपद में 313, बागेश्वर 99, चमोली 146, चम्पावत 148, देहरादून 1508, पौडी गढ़वाल 223, हरिद्वार 3375, नैनीताल 984, पिथौरागढ़ 245, रूद्रप्रयाग 161, टिहरी गढ़वाल 264, ऊधम सिंह नगर 2109 तथा उत्तरकाशी में 239 शामिल हैं। डॉ. रावत ने बताया कि टीबी उन्मूलन की ओर सकारात्मक अग्रसर होने के दृष्टिगत भारत सरकार ने राज्य के सात जनपदों का चयन सर्टिफिकेशन प्रक्रिया के लिये किया। जिनमें से देहरादून जनपद को गोल्ड जबकि चम्पावत, पौड़ी व टिहरी गढ़वाल को ब्रॉंन्ज मेंडल प्रदान किये गये, जोकि प्रदेश के लिये टीबी उन्मूलन की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।

’सूबे में 18 हजार टीबी रोगी हुये स्वस्थ’
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित क्षय रोग उन्मूलन अभियान के तहत प्रदेशभर में टीबी रोगियों का लगातार चिन्हिकरण किया जा रहा है। विभाग द्वारा रोगियों को दिये जा रहे बेहतर उपचार व सामुदायिक सहयोग का नतीजा है कि राज्य में 18 हजार 785 लोगों ने टीबी को मात दे दी है, जोकि विभाग के लिये बड़ी उपलब्धि है। टीबी रोग से अब तक अल्मोड़ा जनपद में 723, बागेश्वर में 246, चमोली 875, चम्पावत 489, देहरादून 2424, पौड़ी गढ़वाल 417, हरिद्वार 5613, नैनीताल 2543, पिथौरागढ़ 609, रूद्रप्रयाग 507, टिहरी 729, ऊधमसिंहनगर 3133 तथा उत्तरकाशी में 477 लोग स्वस्थ हो चुके हैं।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अधिकारियों को दिये आयुष्मान भव के विशेष अभियान चलाने के निर्देश

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तत्वाधान में प्रदेशभर में चलाया जा रहा आयुष्मान भव अभियान अब सभी शिक्षण संस्थानों में भी विशेष रूप से चलाया जायेगा। इसके लिये सभी सम्बंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। जनपद स्तर एवं विकासखण्ड स्तर पर तैनात अधिकारी अभियान नोडल अधिकारी रहेंगे। यह अभियान आगामी 23 सितम्बर से 30 सितम्बर तक सप्ताहभर चलाया जायेगा। जिनका शुभारम्भ देहरादून से प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा किया जायेगा।

शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉॅ. धन सिंह रावत ने आज राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण देहरादून के सभागार में प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के शत-प्रतिशत आयुष्मान कार्ड, आभा आईडी बनाने के साथ ही स्वैच्छिक रक्तदान व नशामुक्ति को लेकर जनजागरूता कार्यक्रम आयोजित करने को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की। डॉ. रावत ने बताया कि आयुष्मान भव अभियान के तहत प्रदेश के समस्त शिक्षण संस्थानों उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, जनजातीय आवसीय विद्यालयों व मदरसों में 23 सितम्बर से 30 सितम्बर तक विशेष अभियान चलाये जायेंगे। जिसमें शत-प्रतिशत छात्र-छात्राओं के आयुष्मान कार्ड, आभा आईडी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जिन शिक्षण संस्थानों में शत-प्रतिशत आयुष्मान कार्ड एवं आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउण्ट (आभा आईडी) बनाई जायेगी उनको आयुष्मान विद्यालय का दर्जा दिया जायेगा। इसके लिये संबंधित विद्यालयों के शिक्षकों का सहयोग लिया जायेगा। इसके अतिरिक्त समस्त शिक्षण संस्थानों में एक सप्ताह तक प्रतिदिन प्रार्थना सभा के दौरान छात्र-छात्राओं को नशा मुक्त अभियान, स्वैच्छिक रक्तदान, नेत्रदान एवं अंगदान तथा टीबी मुक्त अभियान के प्रति जागरूक किया जायेगा।

बैठक में राज्य स्वास्थ्य प्रधिकरण के सीईओ आनंद श्रीवास्तव, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. विनीता शाह, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, निदेशक यूसर्क प्रो. अनीता रावत, निदेशक विद्यालयी शिक्षा सीमा जौनसारी, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. ए.एस. उनियाल, यूसैक के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. उपाध्याय, सहित तकनीकी शिक्षा, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक विभाग, जनजाति कल्याण विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

यूकॉस्ट, यूसर्क एवं यूसेक शिक्षण संस्थानों को देंगे सहयोग
प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में विज्ञान प्रयोगशाल व वर्चुअल लैब की स्थापना के साथ ही विज्ञान शिक्षकों के विशेष प्रशिक्षण एवं छात्र-छात्राओं को विज्ञान प्रदर्शनी हेतु विज्ञान एवं तकनीकी से जुडे तीनों संस्थान उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट), उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (यूसर्क) एवं उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) सहयोग करेंगे। यही नहीं विज्ञान विषयों से जुड़े विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राएं अपने शैक्षणिक भ्रमण के दौरान यूकॉस्ट के अंतर्गत झाझरा देहरादून में स्थित विज्ञान धाम जाकर विज्ञान एवं तकनीकी की बारीकियां समझेंगे। इस संबंध में संबंधित संस्थानों के शीर्ष अधिकारियों व शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों के बीच आपसी सहमती बनी है।

जनजातीय क्षेत्र के बच्चों में होगी सिकल सेल की जांच
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण देहरादून के सभागार में आयोजित बैठक में स्वास्थ्य विभाग एवं जनजाति कल्याण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से प्रदेशभर के जनजाति क्षेत्रों के शिक्षण संस्थानों में सिकल सेल उन्मूलन अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। इस अभियान के अंतर्गत जनजाति क्षेत्र के बच्चों को सिकल सेल के प्रति जागरूक करने के साथ ही स्कूल एवं महाविद्यालय स्तर पर मेडिकल कैम्प लगाकर स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जायेगा। इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग के साथ ही अल्पसंख्यक एवं जनजाति कल्याण विभाग शामिल रहेंगे।

स्वास्थ्य मंत्री ने जनपदों में जिलाधिकारियों को सौंपी अभियान के नोडल की जिम्मेदारी

स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार के तत्वाधान में आयोजित होने जा रहे आयुष्मान भवः अभियान की तैयारियों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में शासन-प्रशासन के साथ ही सभी रेखीय विभागों की समीक्षा बैठक ली। जिसमें 17 सितम्बर से 02 अक्टूबर तक प्रदेशभर में आयोजित होने वाले सेवा पखवाडे को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अभियान को सफल बनाने के लिये जनपद स्तर पर जिलाधिकारियों को नोडल की जिम्मेदारी सौंपते हुये विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिये गये हैं।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि आगामी 13 सितम्बर को स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार की महत्वकांक्षी योजना ‘आयुष्मान भवः’ अभियान का विधिवत शुभारम्भ देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के द्वारा किया जायेगा। जिसका क्रियान्वयन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन 17 सितम्बर से लेकर गांधी जयंती 02 अक्टूबत तक देशभर में किया जायेगा। इसी क्रम में उत्तराखंड में इस अभियान को सफल बनाने के लिये शासन-प्रशासन एवं विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर प्रदेश एवं जनपद स्तर पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये गये हैं। इस महत्वकांक्षी अभियान में आयुष्मान आपके द्वार कार्यक्रम के तहत सभी लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड एवं आभा आईडी बनाई जायेगी। जबकि आयुष्मान हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तथा सीएचसी लेवल पर साप्ताहिक आयुष्मान मेले आयोजित किये जायेंगे साथ ही ग्राम पंचायत एवं शहरी वार्डों में आयुष्मान सभा का आयोजन कर गैर संचारी रोगों की जांच के साथ ही लोगों को स्वास्थ्य की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जायेगी। आयुष्मान सभा में सांसद, क्षेत्रीय विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, मेयर, नगर पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। जबकि अभियान को सफल बनाने में स्वास्थ्य विभाग के साथ ही रेखीय विभागों पंचायतीराज, समाज कल्याण, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास, आवास एवं शहरी विकास तथा शिक्षा विभाग के अधिकारी सहयोग करेंगे। विभागीय मंत्री ने बताया कि प्रदेश में अभियान के सफल आयोजन को लेकर सभी जनपदों के जिलाधिकारियों को नोडल की जिम्मेदारी सौंपी गई और उन्हें इसके लिये विस्तृत कार्य योजना बनाने को कहा गया है जबकि मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी सहित तहसील एवं विकासखंड स्तर के अधिकारी भी अपने-अपने क्षेत्रों में अभियान को सफल बनाने के लिये जिम्मेदारी निभायेंगे।

बैठक में सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास एच. सी. सेमवाल, अपर सचिव एवं मिशन निदेशक एनएचएम स्वाती भदौरिया, अपर सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राज्य स्वास्थ्य प्राधिकारण डॉ. आनंद श्रीवास्तव, अपर सचिव प्रशांत आर्य, अमनदीप कौर, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ विनीता शाह, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ आशुतोष सायना, निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा, अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. भागीरथी जंगपांगी, मीतू शाह, सीएमओ देहरादून डॉ. संजय जैन, संयुक्त निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. एम.के. पंत सहित रेखीय विभाग समाज कल्याण, ग्राम विकास एवं महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में सभी जनपदों के जिलाधिकारियों एवं मुख्य चिकित्साधिकारियों ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया।

स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिये निर्देश, आप भी जानिए…

नशीली एवं नकली दवाओं की रोकथाम के लिये प्रदेशभर में मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण किया जायेगा। इसके साथ ही प्रत्येक मेडिकल स्टोर पर एक पंजीकृत फार्मासिस्ट की तैनाती का भी सत्यापन अभियान चलाया जायेगा। इसके लिये स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि प्रदेश में नकली एवं नशीली दवाओं की बिक्री को रोकने के लिये राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। जिसके तहत प्रदेशभर में फुटकर दवा बिक्री के लिये पंजीकृत 12500 से अधिक मेडिकल स्टोरों के निरीक्षण के साथ ही वहां पर तैनात फार्मासिस्टों का भी भौतिक सत्यापन किया जायेगा। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को पूरे अप्रैल माह में विशेष अभियान के निर्देश दे दिये गये हैं। डा. रावत ने कहा कि औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम-1940 एवं 1945 की नियमावली के नियम 65(2) के अंतर्गत प्रत्येक मेडिकल स्टोर का लाइसेंस होने के साथ ही स्टोर पर दवा बिक्री के लिये पंजीकृत फार्मासिस्ट की तैनाती अनिवार्य रूप से होनी चाहिये। इसी प्रकार थोक दवा विक्रय के लिये भी नियम 64 के तहत अनुभवी व्यक्ति को ही लाइसेंस दिये जाने का प्राविधान है। इन्हीं नियमों का सख्ती से पालन करने के लिये खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को सभी पंजीकृत मेडिकल स्टोरों का मुआयना करने के निर्देश दिये गये हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 22 हजार फार्मासिस्ट पंजीकृत है, जिनमें से साढ़े बारह हजार से अधिक फार्मासिस्टों के नाम पर मेडिकल स्टोर के लाइसेंस जारी किये गये हैं, जबकि एक हजार के करीब फार्मासिस्ट राजकीय सेवा में तैनात हैं। उन्होंने कहा कि समय-समय पर यह भी शिकायत मिलती रही है कि एक लाइसेंस पर एक से अधिक मेडिकल स्टोर संचालित किये जा रहे हैं तथा उन पर पंजीकृत फार्मासिस्ट तैनात नहीं किये गये हैं, जो कि नियमों का सीधा-सीधा उल्लंघन है। इन्हीं तथ्यों को मध्यनजर रखते हुये विभागीय अधिकारियों को प्रदेश के सभी मेडिकल स्टोरों का भौतिक सत्यापन कर वहां पर पंजीकृत फार्मासिस्टों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि सूबे के बेरोजगार डिप्लोमा फार्मासिस्टों को मेडिकल स्टरों पर रोजगार मिल सके।

स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, गेट पर महिला के प्रसव का है मामला

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत के कड़े निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाह नर्सिंग अधिकारी एवं चिकित्साधिकारी निलम्बित कर दी है। राजकीय महिला चिकित्सालय हल्द्वानी में गर्भवती महिला का अस्पताल गेट के बाहर प्रसव होने की घटना पर स्वास्थ्य मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को तत्काल जांच कर दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिये थे। जिस पर विभाग ने निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कुमाऊं मंडल की अध्यक्षता में विशेषज्ञ चिकित्सकों की चार सदस्यीय समिति गठित की। विशेषज्ञ समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने तत्काल प्रभाव से नर्सिंग अधिकारी दीप्ति रानी का निलंबन कर दिया जबकि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ0 दिशा बिष्ट के निलंबन की संस्तुति शासन को की गई है। प्रकरण में नागरिक चिकित्सालय खटीमा के सीएमएस को भी तलब कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने बताया कि राजकीय महिला चिकित्सालय हल्द्वानी में गर्भवती महिला के प्रकरण में लापरवाह डॉक्टर एवं नर्सिंग अधिकारी को निलम्बित कर दिया है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर का तत्काल संज्ञान लेते हुये विभागीय अधिकारियों को प्रकरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये थे। जिस पर महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कुमाऊं मंडल की अध्यक्षता में विशेषज्ञ चिकित्सकों की चार सदस्यीय समिति गठित की। जिसमें डॉ0 भागीरथी जोशी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल, डॉ0 वी0के0 पुनेरा, प्रमुख अधीक्षक, बी0डी0 पाण्डे, जिला चिकित्सालय नैनीताल, डॉ0 ऊषा जंगपांगी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, महिला चिकित्सालय, हल्द्वानी एवं डॉ0 द्रौपदी गर्ब्याल, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला महिला चिकित्सालय नैनीताल शामिल है। डॉ0 रावत ने बताया कि विशेषज्ञ समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में राजकीय महिला चिकित्सालय, हल्द्वानी में रात्रि ड्यूटी पर तैनात डॉ0 दिशा बिष्ट एवं नर्सिंग अधिकारी दीप्ति रानी को दोषी पाया। गर्भवती महिला के अस्पताल गेट पर प्रसव को लेकर गठित विशेषज्ञ समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण शैलजा भट्ट द्वारा तत्काल प्रभाव से नर्सिंग अधिकारी दीप्ति रानी को निलम्बित कर सीएमओ ऑफिस नैनीताल सम्बद्ध कर दिया जबकि डॉ0 दिशा बिष्ट के निलंबन की संस्तुति शासन को भेज दी है।

डॉ0 रावत ने बताया कि प्रकरण में नागरिक चिकित्सालय खटीमा के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को तलब कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ पर्याप्त मात्रा में होने के बावजूद गर्भवती महिला को दूसरे अस्पताल में रैफर किया जाना बड़ी लापरवाही भरा कदम है। डॉ0 रावत ने कहा कि प्रकरण में जितने भी दोषी पाये जायेंगे उनके खिलाफ उचित कार्रवाही अमल में लाई जायेगी और भविष्य में भी ऐसी लापरवाही कतई बर्दास्त नहीं की जायेगी।

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