व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल तत्काल प्रभाव से निलंबित, बीकेटीसी में अनुशासनहीनता पर बड़ी कार्रवाई

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने अनुशासन एवं प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

समिति द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नौटियाल के विरुद्ध पदीय दायित्वों के निर्वहन में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने पर 03 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। साथ ही मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया।

प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जांच समिति की प्रारंभिक आख्या का परीक्षण करने पर आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट पाए गए। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है। समिति ने यह भी माना कि कर्मचारी को वर्तमान पद पर बनाए रखने से जांच प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इन्हीं तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए जांच की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता देय होगा। साथ ही उन्हें बीकेटीसी कार्यालय, जोशीमठ (जनपद चमोली) से संबद्ध किया गया है। इस अवधि में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी तथा उन्हें जांच एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही में अपेक्षित सहयोग देना अनिवार्य होगा।

बीकेटीसी ने स्पष्ट किया है कि समिति प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं अनुशासन सर्वाेच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता के मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

किताब-कॉपी और कौशल से सशक्त होगा अल्पसंख्यक समाज, शिक्षा को बनाया विकास का आधारः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अल्पसंख्यक विद्यालयों के विद्यार्थियों को एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकें भी भेंट कीं और कहा कि गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा की दिशा में यह पहल विद्यार्थियों के भविष्य को मजबूत आधार प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि होने के साथ-साथ ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्म की समृद्ध परंपरा वाली भूमि रही है। इस पवित्र धरती ने सदियों से विश्व को ज्ञान और संस्कार का संदेश दिया है। ऐसे में राज्य की जिम्मेदारी है कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखण्ड देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य के साथ राज्य सरकार ने समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 1 जुलाई 2026 से उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की है। इसके साथ ही मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक संस्था की शुरुआत नहीं, बल्कि राज्य के प्रत्येक बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला निर्णय है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चे को समान अवसर मिले और वह आधुनिक शिक्षा, तकनीक एवं कौशल के माध्यम से आगे बढ़ सके।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय ज्ञान, नवाचार और तकनीक का युग है। एआई, मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और नए कौशल भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे में आवश्यक है कि उत्तराखण्ड का कोई भी बच्चा विकास की इस यात्रा से पीछे न छूटे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना किसी समुदाय की पहचान या परंपराओं को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। सरकार का प्रयास है कि बच्चे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, कौशल विकास और आधुनिक शिक्षा में दक्ष बनें।

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने का सबसे प्रभावी साधन है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से युवा न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाते हैं बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को समान अवसर प्रदान किए जाएंगे। पहले की व्यवस्थाओं में जिन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया, उन्हें भी अब शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। यह नीति केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि कौशल, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और रोजगार से जोड़ने पर बल देती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट कक्षाओं, कौशल विकास, स्टार्टअप और आधुनिक प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रही है ताकि राज्य का युवा भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सके।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिन संस्थानों को मान्यता प्रदान की जा रही है, वे केवल प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं कर रहे, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच और नई व्यवस्था के सहभागी बन रहे हैं। इन संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे ज्ञानवान, संस्कारित, संवेदनशील और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करें।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद भारतीयता सभी को जोड़ने वाली शक्ति है। राज्य सरकार इसी भावना के साथ सभी वर्गों के विकास के लिए कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह प्राधिकरण हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और उत्तराखण्ड को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगा। उन्होंने धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, शिक्षण संस्थाओं और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से इस पहल को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा, विधायक उमेश शर्मा काउ, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मगुरु, शिक्षाविद एवं शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधक उपस्थित रहे।

धामी कैबिनेट फैसला, उत्तराखंड को पूर्णतः साक्षर राज्य घोषित करने के प्रस्ताव पर मिली सहमति

1. गौ-वंशीय पशुओं में नस्ल सुधार हेतु भ्रूण प्रत्यारोपण कर शुद्ध पशुओं के उत्पादन व दुग्ध वृद्धि की पायलट परियोजना को मंत्रीमण्डल ने दी अनुमति।

पशुपालन विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हेतु उच्च आनुवंशिकी के पशु शीघ्रता से उत्पादित हो। इस दृष्टि से प्रदेश में गौ-वंशीय पशुओं में नस्ल सुधार हेतु भ्रूण प्रत्यारोपण कर शुद्ध पशुओं के उत्पादन व दुग्ध वृद्धि की पायलट परियोजना प्रस्तावित की गई, जिसे मंत्रीमण्डल द्वारा स्वीकृति दी गई।

2. चार धाम यात्रा में प्रयोग किये जाने वाले अश्ववंशीय पशुओं का बीमा प्रीमियम की 20 प्रतिशत धनराशि राज्य सैक्टर के अन्तर्गत वहन किये जाने पर कैबिनेट ने लगाई मोहर।

राज्य सरकार ने केदारनाथ, यमुनोत्री और हेमकुण्ड साहिब यात्रा मार्ग पर चलने वाले घोड़े-खच्चरों (अश्ववंशीय पशुओं) के स्वामियों को बड़ी राहत देते हुए बीमा प्रीमियम की 20 प्रतिशत धनराशि खुद वहन करने का निर्णय लिया है, जबकि शेष 80 प्रतिशत धनराशि पशु स्वामियों द्वारा दी जाएगी। इस योजना के तहत वर्ष 2026 की यात्रा के लिए अनुमानित 15,000 पंजीकृत घोड़े-खच्चरों को कवर किया जाएगा, जहां प्रति पशु ₹ 70,000 की कीमत पर 5 प्रतिशत बीमा दर के अनुसार कुल ₹525 लाख के प्रीमियम में से राज्य सरकार अपने हिस्से के ₹ 105 लाख का वित्तीय भार उठाएगी। इस पर मंत्रीमण्डल द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई।

3. उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान चिन्हित आन्दोलनकारियों तथा उनके आश्रितों को राज्याधीन सेवाओं में प्राप्त 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के तहत अधिसूचना संख्या 244 दिनांक 18.08. 2024 के प्रख्यापन तथा एतत् सम्बन्धी शासनादेश संख्या 139, दिनांक 24.11.2024 के जारी होने के मध्य उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा विज्ञाप्ति तीन भर्ती परीक्षाएं कनिष्ठ सहायक एवं अन्य पदों हेतु भर्ती परीक्षा, 2024, आरक्षी जनपदीय पुलिस (पुरूष) तथा आरक्षी पीएसी/आईआरबी (पुरूष) भर्ती परीक्षा, 2024 एवं अपर निजी सचिव, वैयक्तिक सहायक, आशुलिपिक एवं अन्य पदों की भर्ती परीक्षा, 2024 में आवेदन जमा किये जाने की अंतिम तिथि के पश्चात् निर्धारित प्रारूप पर राज्य आंदोलनकारी आरक्षण प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने वाले अभ्यर्थियों को सन्निरीक्षा (क्वबनउमदज टमतपपिबंजपवद) के दौरान एक बार के लिए अनुमन्य किये जाने का मंत्रीमण्डल द्वारा निर्णय लिया गया।

4. बिटुमिनस् की कीमतों में हुई अत्यधिक वृद्धि के दृष्टिगत बिटुमिनस् कार्यों हेतु अनुबंधों में मूल्य समायोजन किये जाने के संबंध में मंत्रिमण्डल ने दी सहमति।

मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत में पेट्रोलियम प्रोडेक्ट की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि से बिटुमिन की कीमतों में लगभग 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो जाने के फलस्वरूप मात्र बिटुमिनस् कार्यों हेतु कार्यहित में निर्धारित प्राविधानों के अनुसार उत्तराखण्ड लोक निर्माण विभाग में दिनांक 01-04-2026 से पूर्व गठित बिटुमिनस् कार्य के ऐसे सभी अनुबन्धों, जिनमें अनुबन्ध की समयावधि उपलब्ध है तथा बिटुमिनस् कार्य किये जाने शेष हैं, में संशोधन करते हुये, दिनांक 01-05-2026 से दिनांक 30-06-2026 तक की अवधि के लिये मात्र बिटुमिनस् कार्यों हेतु मूल्य समायोजन (चतपबम ंकरनेजउमदज) किये जाने के संबंध में दिशा-निर्देश निर्गत किये जाने पर मंत्रिमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गई है।

5. आबकारी नीति विषयक नियमावली, 2025-26, 2026-27 व 2027-28 (त्रिवर्षीय आबकारी नीति) से सम्बन्धित शासन की अधिसूचना संख्याः 112/दिनांक 31 मार्च, 2026 के परिशिष्ट ‘क‘ एवं ‘ख‘ में अंकित उपकर को वैट अधिनियम, 2005 के प्राविधानों के अन्तर्गत वैट गणना का भाग बनाए जाने एवं नियम 12.2 सम्बन्धी तालिका में होलोग्राम शुल्क के दोहराव की स्थिति उत्पन्न होने के दृष्टिगत उक्त अधिसूचना के परिशिष्ट ‘ख‘ के क्रमांक 4 में सम्मिलित किए गए होलोग्राम शुल्क को विलोपित करते हुए संशोधन/प्रतिस्थापन किए जाने पर मंत्रीमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गई।

6. ज्तंकम प्दतिंेजतनबजनतम वित म्Ûचवतज ैबीमउम (ज्प्म्ै) योजनान्तर्गत सगन्ध तेलों/उत्पादों में मिलावट की जांच हेतु सगन्ध पौधा केन्द्र, सेलाकुई में अत्याधुनिक ।बबमसमतंजवत डंेे ैचमबजतवउमजतल (।डै) डंबीपदम के संचालन के लिए पी.एम.यू. गठन किए जाने हेतु 05 पद सृजित किए जाने हेतु त्रीमण्डल ने दी स्वीकृति।

राज्य के प्राकृतिक उत्पादों यथा-ऑयल्स/एक्स्ट्रैक्ट एवं अन्य प्रकार के सगन्ध/हर्बल/ फार्मास्यूटिकल्स उत्पादों में मिलावट की जांच उपरान्त सिंथेटिक एवं प्राकृतिक उत्पादों के मध्य प्रमाणिकता को सिद्ध करते हुए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्यात को बढ़ावा दिए जाने के लिए सगन्ध पौधा केन्द्र, सेलाकुई में कृषकों/उद्योगों/संस्थानों से क्रय किये जाने वाले विभिन्न प्रकार के सगन्ध तेलों/उत्पादों में मिलावट की जांच ।बबमसमतंजवत डंेे ैचमबजतवउमजतल (।डै) डंबीपदम से की जानी है। इस मशीन संचालन के लिए पी.एम.यू. गठन किए जाने हेतु 05 विशेषज्ञ पद (च्तवरमबज ैबपमदजपेज-प्प्प्, ैमदपवत च्तवरमबज ।ेेवबपंजम, च्तवरमबज ।ेेवबपंजम-प्प्, 02 ज्मबीदपबंस ।ेेपेजंदज) सृजित किए जाने के प्रस्ताव पर मंत्रीमण्डल द्वारा दी गई स्वीकृति।

7. उत्तराखण्ड राज्य में पर्यटन को बढ़ावा दिये जाने के उददेश्य से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के आयोजन किया जाना अतिआवश्यक है, जिससे उत्तराखण्ड राज्य अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन की दृष्टिकोण से अपना स्थान बना सकें। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय हिमालयन कार रैली का आयोजन किया जा रहा है, जिस हेतु अनुभवी संस्था का चयन किया जाना अतिआवश्यक है। उक्त रैली में कुल 120 से अधिक एन्ट्री को शामिल किये जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 25 अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिभागी, 25 एशिया कॉस कन्ट्री रैली, 20 क्लासिक कार रैली, 50 भारतीय राष्ट्रीय रैली चौम्पियनशिप शामिल हैं। हिमालयन कार रैली के आयोजन हेतु संस्था का चयन एकल स्रोत के माध्यम से किये जाने को लेकर मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमति प्रदान की गई।

8. उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड नैनीताल द्वारा पारित आदेश दिनांक 20.04.2026 के क्रम में उपनल के माध्यम से योजित कार्मिकों को समान कार्य हेतु समान वेतन प्रदान किये जाने हेतु पूर्व में निर्धारित पात्रता की कट ऑफ डेट की तिथि (12.11.2018) को संशोधित कर सर्वाेच्च न्यायालय नई दिल्ली द्वारा पारित आदेश दिनांक 15.10.2024 तिथि निर्धारित किये जाने के प्रस्ताव पर मा. मंत्रिमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गई।

9. ‘उत्तराखण्ड कारागार (संशोधन) नियमावली, 2026‘ के प्रख्यापन को मंत्रीमण्डल द्वारा दी गई सहमति।

मा. सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 03.10.2024 के अनुपालन में उत्तराखण्ड कारागार नियमावली, 2023 में अभ्यस्त अपराधी, जिसे इस नियमावली के प्रारंभ होने से पूर्व या पश्चात् उत्तर प्रदेश अभ्यस्त अपराधी प्रतिरोध, अधिनियम, 1952 की अनुसूची में उल्लिखित किसी एक या अन्य अपराध के लिये कम से कम तीन पृथक-पृथक अवसरों पर मौलिक अवधि के कारावास का दण्ड दिया गया हो और ऐसा दण्डादेश अपील अथवा पुनरीक्षण में अपास्त न कर दिया गया हो, में संशोधन हेतु उत्तराखण्ड कारागार (संशोधन) नियमावली, 2026 प्रख्यापित किये जाने के प्रस्ताव पर मंत्रीमण्डल द्वारा दी गई सहमति प्रदान की गई।

10. उत्तराखण्ड कारागार कारापाल अधीनस्थ (राजपत्रित) सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को मंत्रीमण्डल द्वारा दी गई सहमति।

कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उत्तराखण्ड की संरचना में अधीनस्थ कारागारों हेतु कारापाल के कुल 14 पद सृजित हैं, जो स्थायी उप कारापालों से पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने वाले पद हैं। वर्तमान में कारागार विभाग में उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश जेल कारागार कार्यपालक अधीनस्थ (राजपत्रित) सेवा नियमावली, 1980) अनुकूलन उपान्तरण आदेश, 2002 लागू है। उत्तराखण्ड राज्य गठन के पश्चात कारागार विभाग में पृथक से कारापाल सेवा नियमावली को प्रख्यापित नहीं किया गया है। विभागीय एवं कर्मचारी हित में उत्तराखण्ड कारागार कारापाल अधीनस्थ (राजपत्रित) सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन के प्रस्ताव पर मंत्रीमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गयी।

11. उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा (संशोधन) विनियमावली, 2026 के प्रख्यापन को मंत्रीमण्डल की सहमति।

राज्य में संस्कृत विद्यालयों को मान्यता प्रदान करने, पाठ्यक्रम निर्धारण एवं परीक्षा संचालन हेतु उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा परिषद् को विधि द्वारा गठित संस्था के रूप में स्थापित करने के सम्बन्ध में उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा अधिनियम, 2014 प्रख्यापित किया गया। उक्त अधिसूचना के कार्यान्वयन हेतु उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा विनियमावली, 2023 प्रख्यापित की गयी, जिसमें कतिपय संशोधन/परिर्वतन के दृष्टिगत उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा (संशोधन) विनियमावली, 2026 प्रख्यापित किये जाने के प्रस्ताव पर मंत्रिमण्डल सहमति प्रदान की गई।

12. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप साक्षरता के मानकों के आधार पर उत्तराखण्ड राज्य को पूर्णतः साक्षर राज्य घोषित किये जाने के प्रस्ताव पर मंत्रीमण्डल ने सहमति प्रदान की।

13. राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (गोल्डन कार्ड) के तहत विभिन्न चिकित्सालयों में लम्बित बिलों के भुगतान के लिए राज्य सरकार स्वास्थ्य विभाग को वित्तीय सहायता उपलब्ध करायेगी।

वर्षों से लंबित‘किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना’ पर संबंधित राज्यों में सहमति बनाए जाने पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया।

देवभूमि के शिखर पर स्वास्थ्य का नया अध्याय की भावना से संचालित होगा अस्पतालः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री केदारनाथ धाम में भारत पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड हॉस्पिटल का विधिवत लोकार्पण किया। यह अस्पताल स्वामी विवेकानन्द हेल्थ मिशन सोसाइटी द्वारा संचालित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार श्री केदारनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर एवं त्वरित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस उच्च हिमालयी क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त अस्पताल का संचालन स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती प्रदान करेगा। यह अस्पताल यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा श्री केदारनाथ धाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित बनाए रखने हेतु स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। यात्रा मार्ग पर चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, स्वास्थ्य जांच केंद्रों, ऑक्सीजन सुविधाओं एवं आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार स्वस्थ उत्तराखंड समृद्ध उत्तराखंड के सपने को साकार करने के लिए प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार एवं सुधारीकरण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आयुष्मान योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 61 लाख आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं जिसके माध्यम से आज प्रदेश के अंदर लाखों मरीजों को निशुल्क उपचार मिल रहा है इसके साथ ही राज्य के प्रत्येक जनपद में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने बाबा केदार के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना भी की। उन्होंने कहा कि श्री केदारनाथ धाम केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सेवा एवं मानवता का भी प्रतीक है और इसी भावना के साथ सरकार देवभूमि में स्वास्थ्य एवं जनसुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रही है।

कार्यक्रम में उपस्थित विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल ने कहा कि यह अस्पताल सेवा, समर्पण एवं जनकल्याण का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो भविष्य में लाखों श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर भारत पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजय खन्ना, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी, विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश चंद्र, बद्री केदार मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, बद्री केदार उपाध्यक्ष विजय कप्रवान, श्री केदार सभा के अध्यक्ष पं. राजकुमार तिवारी, ब्लॉक प्रमुख ऊखीमठ पंकज शुक्ला, जिला पंचायत सदस्य अमित मेंखडी, महा मंत्री अकिंत सेमवाल, संजय तिवारी, , जिला पंचायत सदस्य सुबोध बगवाड़ी, केशव बहुगुणा, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक निहारिक तोमर, उप जिलाधिकारी कृष्णा त्रिपाठी, कर्नल अजय कोटियाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

ब्रिडकुल करेगा रोपवे के लिए रेगुलेटरी बॉडी का कार्यः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने प्रदेश में रोपवे निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभिन्न रोपवे प्रोजेक्ट्स की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने रोपवे प्रोजेक्ट के लिए नियामक प्राधिकरण के रूप में ब्रिडकुल को मजबूत किए जाने के निर्देश दिए। इसके रोल और रेस्पोंसिबिलिटी का ड्राफ्ट शीघ्र तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने जागेश्वर धाम योजना में रोपवे प्रोजेक्ट को शामिल किए जाने भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने रोपवे बनाने के लिए प्राथमिकता तय करने हेतु उपसमिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता में सचिव पर्यटन, सचिव आवास, सचिव लोक निर्माण विभाग एवं नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण को उपसमिति में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि यह उपसमिति प्रदेश में बनाए जाने वाले रोपवे की प्राथमिकता तय करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी शहर में बनने वाले रोपवे में किन स्थानों को शामिल किया जाना है, किनको नहीं, इसको लेकर शहर की आवश्यकता के अनुरूप पर्यटन विभाग एवं स्थानीय प्रशासन को तय करना होगा

मुख्य सचिव ने मसूरी रोपवे की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने मसूरी रोपवे के लोअर टर्मिनल के पास सार्वजनिक सड़क मार्ग से सम्बन्धित मामले को अगले तीन दिन में निस्तारण कर निर्धारित समय सीमा के अंदर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने हेमकुंड साहिब और केदारनाथ रोपवे की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा की केदारनाथ रोपवे के लिए लोजिस्टिक्स ड्राई रन करते हुए असुरक्षित स्थानों का चिन्हीकरण एवं सुधारीकरण कार्य तत्काल शुरू कराया जाए। उन्होंने कुंड ब्रिज और नई बाई पास को शीघ्र पूर्ण कराये जाने के निर्देश दिए। कहा कि जहाँ भी नए ब्रिज और बाई पास की आवश्यकता है उसका समय से सर्वे एवं निर्माण आदि का कार्य भी साथ साथ किया जाए।

मुख्य सचिव ने केदारनाथ रोपवे के लोअर टर्मिनल में पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पार्किंग के लिए भूमि चिन्हीकरण एवं भूमि हस्तांतरण आदि की प्रक्रिया को भी साथ -साथ शुरू किया जाए। उन्होंने हेमकुंड और केदारनाथ रोपवे निर्माण कार्य का पर्ट चार्ट तैयार कर उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कार्यों को समय से पूर्ण कराने के लिए पर्टचार्ट का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

बैठक के दौरान बताया गया कि केदारनाथ रोपवे का एग्रीमेंट साइन हो चुका है, एलओए जारी हो चुका है। बताया गया कि प्रोजेक्ट का लिडार सर्वे पूर्ण हो गया है, तकनीकी सर्वे गतिमान है। स्टेशन एवं टावर्स के लिए विस्तृत टोपोग्राफी सर्वे गतिमान है। हेमकुंट साहिब का एलओए जारी हो चुका है, भूमि सर्वेक्षण का कार्य गतिमान है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, सहित संबंधित विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

चार धाम यात्रा 2026ः अब तक चार लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

प्रदेश में चारधाम यात्रा सुचारु रूप से संचालित हो रही है। राज्य सरकार द्वारा यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि श्रद्धालु निश्चिंत होकर सुरक्षित एवं सुगम रूप से दर्शन कर सकें।

चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों, श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए चारधाम यात्रा मार्गों सहित प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पार्किंग एवं यातायात व्यवस्थाओं को सुदृढ़ एवं व्यवस्थित किया गया है।

राज्य सरकार ने यात्रा व्यवस्थाओं के संबंध में भ्रामक जानकारी प्रसारित करने वालों तथा गंदगी फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, ताकि यात्रा की पवित्रता एवं व्यवस्थाएं बनी रहें।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार चारधाम कपाट खुलने से 28 अप्रैल, 2026 की सांय 7रू00 बजे तक मात्र दस दिनों में कुल 04 लाख 08 हजार 401 श्रद्धालु चारधाम में दर्शन हेतु पहुंचे हैं।

धामवार विवरण इस प्रकार हैकृ

श्री बद्रीनाथ धामः कपाट उद्घाटन के छह दिनों में 84,942 श्रद्धालु पहुंचे।

श्री केदारनाथ धामः सात दिनों में 2,07,452 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

यमुनोत्री धामः दस दिनों में 57,794 श्रद्धालु पहुंचे।

गंगोत्री धामः दस दिनों में 57,863 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

इसके अतिरिक्त गौमुख में अब तक 440 यात्री पहुंचे हैं।

वर्तमान यात्रा सीजन में अब तक कुल 64,115 वाहन यात्रियों को लेकर चारधाम पहुंचे हैं।

राज्य सरकार द्वारा सभी संबंधित विभागों के समन्वय से यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

इस वर्ष चारधाम यात्रा पर ड्रोन से होगी कूड़ा और प्लास्टिक वेस्ट की मॉनिटरिंगः धामी

सीएम धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्लास्टिक बोतलों को हतोत्साहित करने के लिए यात्रा मार्ग पर जगह-जगह वाटर एटीएम एवं त्व् प्लांट स्थापित किए जाएं, कूड़ा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा प्लास्टिक वेस्ट के लिए “मनी बैक” योजना को पूरे प्रदेश में लागू किया जाए और हर दुकान पर प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट अनिवार्य किया जाए। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा 2026 को पूर्णतः प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री आवास में शहरी विकास विभाग, पर्यटन विभाग तथा वन विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।

चारधाम यात्रा रूट में पड़ने वाले ग्राम पंचायत तथा अन्य संस्थाएं कूड़े एवं प्लास्टिक वेस्ट की ड्रोन के माध्यम से लगातार मॉनिटरिंग करेंगी और इसके लिए एक अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।

यात्रा मार्ग पर स्थित 30 नगर निकायों को मजबूत किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। यात्रा के दौरान सफाई व्यवस्था को मजबूत करने हेतु बड़ी संख्या में पर्यावरण मित्रों की तैनाती की गई है तथा अतिरिक्त सफाई कर्मियों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, जिससे मार्ग, बाजार, घाट एवं सार्वजनिक स्थल निरंतर स्वच्छ बने रहें। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत 37 एमआरएफ केंद्र, 299 कम्पोस्ट पिट, 38 प्लास्टिक कम्पैक्टर/बेलिंग मशीनें तथा 266 कचरा परिवहन वाहन तैनात किए गए हैं, जिससे कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित हो सके।

श्रद्धालुओं की मूलभूत सुविधाओं के अंतर्गत सार्वजनिक शौचालयों का विस्तार किया गया है, जिसमें महिलाओं, पुरुषों एवं दिव्यांगजनों के लिए पृथक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं तथा 74 मोबाइल शौचालय इकाइयां भी संचालित की जाएंगी। यात्रा के दौरान वाहनों के दबाव को देखते हुए व्यापक पार्किंग व्यवस्था विकसित की गई है, जिसमें छोटे-बड़े वाहनों हेतु हजारों पार्किंग स्थल चिन्हित किए गए हैं और वैकल्पिक पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है। श्रद्धालुओं के ठहराव हेतु होटल, लॉज, धर्मशालाओं एवं आश्रमों में लगभग 28,395 कमरे तथा 67,278 बिस्तरों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। रात्रिकालीन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रमुख मार्गों पर 19,604 स्ट्रीट लाइटें स्थापित की गई हैं।

चारधाम यात्रा को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने पर विशेष फोकस किया गया है। वर्ष 2025 में प्लास्टिक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के बाद वर्ष 2026 में इसे जनभागीदारी के माध्यम से व्यापक अभियान का रूप दिया जाएगा। यह पहल माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के “स्वच्छ भारत” एवं “हरित, सतत विकास” के विजन से प्रेरित है और लक्ष्य है कि चारधाम यात्रा को पूर्णतः स्वच्छ, प्लास्टिक मुक्त एवं ठोस अपशिष्ट मुक्त बनाया जाए। इसके साथ ही फत् कोड आधारित फीडबैक प्रणाली, त्वरित सहायता केंद्र (फनपबा त्मेचवदेम ज्मंउ), कंट्रोल रूम तथा आधुनिक मशीनों के माध्यम से यात्रा को तकनीकी रूप से सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत चारधाम यात्रा को प्लास्टिक मुक्त बनाने हेतु सभी सक्षम अधिकारियों को प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं और प्लास्टिक बोतलों के प्रबंधन के लिए डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसे जिलाधिकारी एवं पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड क्रियान्वित करेंगे। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अंतर्गत चारधाम यात्रा मार्ग के सभी नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं को जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की लीद का वैल्यू एडिशन करते हुए पिरूल के साथ पैलेट तैयार कर एक इनोवेटिव व्यवस्था के तहत उसका प्रबंधन किया जाएगा। चारधाम यात्रा रूट पर सतत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें स्वयंसेवी संस्थाएं, एनसीसी कैडेट्स, महिला मंगल दल एवं ग्राम पंचायतों का सहयोग लिया जाएगा। इसके साथ ही पूरे यात्रा मार्ग पर कूड़ा प्रबंधन हेतु स्पेशलाइज्ड मैनपावर की तत्काल प्रभाव से तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।

“पहली बार केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं को 24 घंटे मुफ्त गर्म पानी”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने जानकारी दी कि केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को अब ठंडे पानी के स्थान पर शीघ्र ही 24 घंटे गर्म पानी उपलब्ध कराया जाएगा। यह व्यवस्था पिरूल (चीड़ की पत्तियां) और खच्चरों की लीद से तैयार बायोमास पैलेट्स के माध्यम से संचालित गीज़रों द्वारा की जाएगी। यह देश का पहला प्रयोग है, जहां इतनी ऊंचाई वाले क्षेत्र में चौबीसों घंटे गर्म पानी उपलब्ध कराया जाएगा। ये गीजर ळडटछ केदारनाथ एवं लिंचोली में लगाए जाएंगे। यह अभिनव प्रयोग केदारनाथ यात्रा मार्ग पर खच्चरों की लीद से होने वाली समस्या का समाधान करेगा, साथ ही जंगल की आग के प्रमुख कारण पिरूल से भी राहत दिलाएगा। इसके अतिरिक्त ट्रायल के तौर पर मार्ग में स्थित ढाबों को फायर पैलेट से चलने वाले चूल्हे भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जो ऊर्जा संकट के समय अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे और सफल परीक्षण के बाद इन्हें बड़े स्तर पर वितरित किया जाएगा।

चारधाम यात्रा के मद्देनजर ग्राउंड जीरो पर उतरे मुख्यमंत्री, रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी तक सड़क मार्ग से किया यात्रा मार्ग का निरीक्षण

आस्था और श्रद्धा के महान पर्व के रूप में प्रतिष्ठित श्री केदारनाथ धाम के कपाट वर्ष 2026 की यात्रा हेतु आगामी 22 अप्रैल 2026 को विधि-विधान एवं सनातन परंपराओं के अनुरूप श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इस अवसर पर राज्य सरकार द्वारा यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सुगम बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

इसी क्रम में आज मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जनपद रुद्रप्रयाग पहुंचे और ग्राउंड जीरो पर यात्रा व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के मद्देनजर राष्ट्रीय राजमार्ग-107 पर रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी तक कार द्वारा निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जवाड़ी बाईपास, निर्माणाधीन सुरंग, तिलवाड़ा में हटाए गए अतिक्रमण, बांसवाड़ा, कुंड-काकड़ागाड़ जैसे भूस्खलन संभावित संवेदनशील क्षेत्रों का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने सड़क के पेचवर्क, झाड़ी कटान, साइनेज, क्रैश बैरियर, सुरक्षा उपायों एवं सौंदर्यीकरण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी लंबित कार्यों को यात्रा शुरू होने से पूर्व हर हाल में पूर्ण किया जाए।

इसके उपरांत मुख्यमंत्री द्वारा गुप्तकाशी में चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर जनपदीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को श्रद्धालुओं के साथ सौम्य व्यवहार रखने के निर्देश दिए। साथ ही हेलीपैड पर यात्री शेड, लैंडस्लाइड प्रभावित क्षेत्रों के समीप पुलिस चौकियों में आवश्यक सुविधाएं जैसे दवाइयां, पेयजल एवं फूड पैकेट उपलब्ध रखने के निर्देश दिए, ताकि आपात स्थिति में त्वरित सहायता प्रदान की जा सके।

मुख्यमंत्री ने यात्रा को प्लास्टिक मुक्त बनाने पर विशेष जोर देते हुए “ग्रीन यात्रा” के उद्देश्य को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रामक खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यात्रा से जुड़े सभी हितधारकों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए।

गैस आपूर्ति के विषय में मुख्यमंत्री ने बताया कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद केंद्र सरकार से अतिरिक्त गैस आपूर्ति की मांग की गई है, जिससे यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को यात्रा से जोड़ते हुए “वोकल फॉर लोकल” के तहत स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए।

इसके अतिरिक्त पैदल मार्गों पर पेयजल, प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी समीक्षा की गई, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी, विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामप्रकाश, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष रावत, अधिशासी अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग ओंकार पांडे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

देहरादून डीएम ने 136 से अधिक बालिकाओं की शिक्षा को किया पुनर्जीवित

ऋषिपर्णा सभागार कलेक्ट्रेट में आज ‘‘ नंदा-सुनंदा’’ 14वें संस्करण का आयोजन किया गया। नवंरात्र के पावन अवसर पर जिलाधिकारी सविन बसंल ने नंदा-सुनंद देवी रूपी 10 बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित कर की देवियों की स्तुति। नंदा-सुनंदा देवी रूपी 10 बालिकाओं की शिक्षा 2.03 लाख के चैक वितरित किए गए। जिला प्रशासन का प्राजेक्ट ‘‘नंदा-सुनंदा’’ से जनपद अंतर्गत अब तक 136 से अधिक असहाय जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित किया जा चुका है। यह पहल समाज के कमजोर वर्गों की बेटियों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है तथा बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रभावी मॉडल के रूप में स्थापित हो रही है।

जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री का सकंल्प है कि जनमानस के विकास, शिक्षा आदि के लिए संचालित योजना के क्रियान्वयन में जिले स्तर पर यदि कहीं कोई गैप रह जाते हैं तो उनको भरते हुए जरूरममंदो को योजना से लाभान्वित किया जाना है।

मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशन में जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट ‘‘नंदा-सुनंदा’ का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि नंदा-सुनंदा देवी रूपी बालिकाओं को शिक्षित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करना है। इस योजना के माध्यम से ऐसी बालिकाओं को चिन्हित किया जा रहा है जिनके परिवार में किसी दुर्घटना/घटना से परिवार आर्थिक से शिक्षा बाधित हो गई है ऐसी होनहार बालिकाओं जिनमें शिक्षित होकर आगे बढने की ललक है उनकी शिक्षा को पुनर्जीवित कर सशक्त बनाना है।

जिलाधिकारी ने चयन समिति एंव ग्रांउड स्तर पर कार्य कर ही टीम के कार्यों की सराहना भी की। यदि हम किसी बेटी को सशक्त करते हैं तो पूरा कुल सशक्त होता है।

बनियावाला निवासी आराध्या सिंह जिनके पिता की मृत्यु होने के उपरान्त कक्षा 4की शिक्षा बाधित हो गई थी। ग्राम सुद्धोवाला निवासी मान्यता ठाकुर जिनके पिता लापता हैं तथा 05 भाई-बहन है तथा बड़ी बेटी विकलांग है परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है बेटी की 10वीं शिक्षा बाधित हो गई है। मोलाराम कालोनी सहस्त्रधारा निवासी माही चौहान जिनके पिता की मृत्यु 2021 में हो गई है परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। एमडीडीए कालोनी डालनवाला निवासी नियति वासुदेव जिनके पिता नशे के आदी है नशामुक्ति केन्द्र में भर्ती है परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है तथा कक्षा 06 की शिक्षा बाधित हो गई थी। नई बस्ती गुरूरोड पटेलनगर निवासी सोफिया अल्वी पिता की मृत्यु हो चुकी है परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय है।

झंडाबाजार निवासी अनुष्का शर्मा पिता की मृत्यु 2022 में हो गई चुकी माता कपड़े की दुकान काम करती है परिवार की आर्थिक स्थिति रूप से अत्यंत कमजोर होने से कक्षा 9 की शिक्षा बाधित हो गई है। ओगल भट्टा सुभाषनगर निवासी नंन्दनी व नंदिता जिनके पिता 01 वर्ष से अलग रह रहे है तथा माता घरों मे साफ-सफाई कर घर का खर्चा चलाती हैं, माता हार्ट पेंशेंट है तथा नंदनी की कक्षा 6 व नंदिता की कक्षा 4 की शिक्षा बाधित हो गई है। हरिपुर रायवाला निवासी हर्षिता की जिनके पिता की मृत्यु हो गई है परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बीकॉम की शिक्षा बाधित हो गई है। हर्रावाला निवासी त्रिशा जिनकी माता की कैंसर से मृत्यु हो गई है माता के उपचार पर अत्यधिक खर्चा होने के उपरान्त आर्थिक स्थिति खराब हो गई है पिता फीस देने में असमर्थ है तथा कक्षा 5 की शिक्षा बाधित हो गई थी सभी बालिकाओं की शिक्षा को प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा से पुनर्जीवित कर दिया है। पारिवारिक घटनाओं से आर्थिक संकट में फंसे परिवार की बेटियों को प्रोजेक्ट नंदा-सुनदां से शिक्षा पुनर्जीवित सशक्त बनाने बेड़ा उठाया है अब तक 136 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की गई है।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि बालिकाएं अपनी पढाई पर ध्यान दें प्रशासन आपकी आगे भी सहायता करता रहेगा। उन्होंने अपेक्षा की सफल होकर अपने जैसे अन्य जरूरतमंदो को आगे बढाएं। पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का यह प्रोजेक्ट सराहनीय है बालिकाओं एवं उनके परिजनों को पुलिस की सहायता की आवश्यकता है तो पुलिस सदैव तत्पर है।

कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों ने मुख्यमंत्री के निर्देशन में जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित करने पर राज्य सरकार का जिला प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस योजना को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने किया भवाली-रातिघाट बाईपास, श्री कैंचीधाम मंदिर में निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण

नैनीताल जिले के भ्रमण पर पहुंचे मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने जनपद नैनीताल के अंतर्गत कैंची धाम क्षेत्र में लगने वाले जाम की समस्या के स्थायी समाधान हेतु नव निर्मित भवाली बायपास, भवाली-रातिघाट बाईपास, श्री कैंचीधाम मंदिर में निर्माणाधीन विभिन्न निर्माण कार्यों सहित नैनीताल मालरोड में सड़क भू धसाव की रोकथाम हेतु कराए जा रहे सुरक्षात्मक कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया।

मुख्य सचिव ने अपने नैनीताल भ्रमण के दौरान नैनीताल जिले की प्रमुख परियोजना में शामिल कैंचीधाम बाईपास (सैनिटोरियम-रातीघाट) सड़क मार्ग का भी स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के उन्होंने इस महत्वपूर्ण सड़क मार्ग में किए जा रहे निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करते हुए कराए जा रहे कार्यों की जानकारी अधिकारियों से ली।

मुख्य सचिव ने लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को निर्देश दिए कि भवाली-रातिघाट बाईपास में कार्य तेजी से करते हुए इस मार्ग में पर्यटन सीजन से पूर्व यातायात सुचारू किया जाय। जबतक स्थाई मोटर पुल का निर्माण नहीं हो जाता है तबतक इसी सीजन में वैलिब्रिज स्थापित कर यातायात सुचारू कराया जाय।

मुख्य सचिव ने निर्माण कार्यों को तेजी से कराते हुए इस यात्रा सीजन जून मांह से पूर्व सभी कार्य पूर्ण करते हुए बाईपास मार्ग को संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्व प्रसिद्ध श्री कैंचीधाम मंदिर में लगातार श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, इस हेतु यातायात सुविधा भी महत्वपूर्ण है, ताकि पहाड़ को जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिले तथा जाम से निजात मिले। उन्होंने कहा कि यहॉं आने वाले पर्यटकों,श्रद्धालुओं, आम नागरिकों को सभी आवश्यक सुविधाऐं मोहैय्या कराना प्रशासन की प्राथमिकता व जिम्मेदारी है।

मुख्य सचिव ने कहा कि बाबा नीम करोरी के दर्शन हेतु देश-विदेश से श्रद्धालु यहां वर्ष भर आते जाते हैं आने वाले श्रद्धालुओं को समुचित व्यवस्था उपलब्ध हो, साथ ही ट्रैफिक जाम की स्थिति उत्पन्न ना हो इस लिए इस बाईपास का निर्माण प्राथमिकता से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मार्ग के निर्माण से विश्व प्रसिद्ध श्रीकैंचीधाम में लगने वाले जाम से निजात मिलेगी।

इस दौरान लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता पी एस बृजवाल ने मुख्य सचिव को अवगत कराया कि भवाली सेनीटोरियम से रातीघाट तक 18.15 किलोमीटर बाईपास में से 8 किलोमीटर मार्ग का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। जिसमें यातायात सुचारू है। इस कार्य हेतु 12 करोड़ रुपये विभाग को प्राप्त हुए थे। शेष भाग 10.15 किलोमीटर मार्ग में पहाड़ कटिंग कार्य हेतु शासन से 5 करोड़ 6 लाख रूपये की धनराशि प्राप्त हुई है, पहाड़ कटिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। उक्त मार्ग में वर्तमान में 9 करोड़ 81 लाख रूपये की धनराशि से कलमठ व सुरक्षा दीवारों का निर्माण एवं अन्य सुरक्षात्मक कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।

मुख्य अभियंता ने अवगत कराया कि इस बाईपास को रातिघाट स्थित भवाली- अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने हेतु 74.15 किलोमीटर स्पान का मोटर पुल का भी निर्माण किया जाना है इस हेतु शासन से 9 करोड़ 63 रुपये की धनराशि प्राप्त हो हुई है जिससे पुल का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
मुख्य सचिव ने कहा कि इस मार्ग के निर्माण से कैंचीधाम में लगने वाले जाम की स्थिति से भी निजात मिलेगी, साथ ही पहाड़ी जिलों को जाने वाले वाहनों हेतु यह वैकल्पिक मार्ग लाभप्रद होगा।

इस दौरान मुख्य सचिव ने 10 करोड़ रुपये की धनराशि से नव निर्मित सैनिटोरियम से भवाली अल्मोड़ा मार्ग तक भवाली बायपास सड़क निर्माण कार्य व इसी मार्ग में शिप्रा नदी पर नव निर्मित 30 मीटर स्पान डबल लेन मोटर पुल का भी निरीक्षण किया गया। यह मार्ग यातायात हेतु सुचारू हो गया है।
मुख्य सचिव ने कहा कि उक्त बाईपास के निर्माण से भवाली बाजार में लगने वाले जाम से निजाद मिलेगी, वहीं पर्यटन सीजन में पर्यटकों को आवागमन में किसी भी प्रकार की असुविधा भी नहीं होगी। निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने विश्व प्रसिद्ध श्री कैंचीधाम मंदिर परिसर में 40 करोड़ 81 लाख 39000 रुपये की लागत से मानस खंड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत संचालित पर्यटन विकास व सौंदर्यीकरण कार्यों, जिसमें बहु मंजिला कार पार्किंग निर्माण, मेडिटेशन सेंटर, पाथवे व पैदल सेतु का निर्माण कराया जा रहा है, के निरीक्षण के अतिरिक्त कैंचीधाम में ही पर्यटन विभाग अंतर्गत स्वदेश दर्शन योजना के तहत 17 करोड़ 59 तक 87000 रुपये की लागत से बनाए जा रहे फैसिलिटेशन सेंटर व अन्य कार्यों का भी स्थलीय निरीक्षण किया गया।

कैंचीधाम में कराए जा रहे विभिन्न विकास कार्यों के स्थलीय निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि यह विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, यहॉं आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों हेतु समुचित व्यवस्था हो विशेष रूप से पार्किंग की सही व्यस्था हो। उन्होंने कहा कि पार्किंग स्थल में वाहनों के प्रवेश एवं निकासी अलग अलग गेट से हो,ऐसी व्यवस्था हो इस सबन्ध में उन्होंने जिलाधिकारी को पुलिस एवं कार्यदाई संस्था के साथ बैठक कर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए।
इस दौरान मुख्य सचिव ने विश्व प्रसिद्ध श्री कैंचीधाम में पंहुचकर बाबा नीम करौली के भी दर्शन कर राज्य की सुख एवं शांति की कामनां की।

भ्रमण के दौरान मुख्य सचिव ने वर्ष 2018 में नैनीताल स्थित लोअर माल रोड में हुई क्षति के मरम्मत तथा झील की तरफ से हो रहे भू-धसाव की रोकथाम हेतु 3 करोड़ 48 लाख रुपए की लागत से सड़क के भू- भाग में कराए जा रहे सुरक्षात्मक एवं सुधारीकरण कार्यों का भी स्थलीय निरीक्षण भी किया गया तथा अधिकारियों से जानकारी ली। इस दौरान लोनिवि के मुख्य अभियंता ने अवगत कराया टीएचडीसी के द्वारा तैयार डीपीआर व डिजाईन एवं उनकी देखरेख में ही सुरक्षात्मक व सड़क सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। मुख्य सचिव ने विभाग को पूर्ण गुणवत्ता से निर्धारित समय पर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने सिंचाई विभाग को भी निर्देश दिए कि मालरोड में उनकी ओर से जो भी कार्य किए जाने हैं वह भी कार्य शीघ्रता से कराएं।

इस दौरान आयुक्त कुमाऊं व सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पाण्डे, मुख्य अभियंता सिंचाई संजय कुमार शुक्ला ,अधीक्षण अभियंता लोनिवि मनोहर सिंह धर्मशक्तू, उपजिलाधिकारी नवाजिश खलीक, मोनिका सहित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।