आतंकवाद निरोधी नीति प्रहार के धरातल पर क्रियान्वित करने पर बल दिया जाएः दीपम सेठ

उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने अभिसूचना एवं सुरक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान महानिदेशक अभिसूचना व सुरक्षा अभिनव कुमार, आईजी एसटीएफ नीलेश आनन्द भरणे, आईजी कार्मिक सुनील कुमार मीणा, आईजी मुख्यालय बरिंदरजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक, अभिसूचना मणिकांत मिश्रा, पुलिस अधीक्षक एटीएस सरिता डोबाल, अपर पुलिस अधीक्षक क्राइम लोकजीत सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक अभिसूचना व सुरक्षा अंकुश मिश्रा, पुलिस उपाधीक्षक सुरक्षा जी.डी. जोशी, पुलिस उपाधीक्षक अभिसूचना मनोज केएस असवाल आदि मौजूद रहे।

डीजीपी दीपम सेठ ने बैठक के दौरान निर्देश देते हुए कहा कि आंतकवाद नियंत्रण के दृष्टिगत राष्ट्रीय स्तर पर संचालित भारत की पहली आंतकवाद निरोधी नीति “प्रहार” को धऱातल पर क्रियान्वित किये जाने पर बल दें।

कहा कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को कट्टर बनाने के इनपुट्स एवं उसके साथियों की देशभर में गिरफ्तारियों के दृष्टिगत जनपदों में विशेष सर्तक दृष्टि रखी जाये। कहा कि देश के बडे राज्यों की कार्यप्रणाली और सफल ऑपरेशनों के मॉडल का अध्ययन कर राज्य एटीएस के ऑपरेशनों को उसी उच्च पेशेवर स्तर पर अपग्रेड किया जाए।

कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव एवं बढ़ती सुरक्षा संवेदनशीलता के दृष्टिगत माव मुख्यमंत्री उत्तराखंड महोदय की सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ की जाए।

कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं (चीन एवं नेपाल सीमा) से सटे जनपदों में संदिग्ध गतिविधियों, सीमा पार से घुसपैठ तथा राष्ट्रविरोधी तत्वों की आवाजाही पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु आईटीबीपी, एसएसबी, सेना, आईबी, राज्य पुलिस एवं एटीएस के शीर्ष अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय श्इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन बैठकश् आयोजित करने के निर्देश दिए गए।

कहा कि राज्य में लगातार बढ़ रही पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं की संख्या तथा वर्तमान में गतिमान चारधाम यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के निर्देश दिए गए।

कहा कि आगामी कुम्भ मेला तथा अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों के निर्बाध एवं सकुशल संचालन हेतु ठोस सुरक्षा कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।

कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों तथा विशिष्ट महानुभावों के प्रस्तावित कार्यक्रमों के दृष्टिगत कानून-व्यवस्था एवं सुरक्षा के कड़े इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा गया। कहा कि सभी महत्वपूर्ण आयोजनों व व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए आवश्यक जनशक्ति, तकनीकी उपकरणों और संसाधनों का प्रबंधन समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति, रणनीति के अन्तर्गत विभिन्न रूपों में सामने आ रही आंतकवाद की चुनौतियों हेतु विशेष प्रयास पर बल दिया गया। कहा कि आगामी राज्य स्थापना दिवस, नवरात्र, दशहरा, दीपावली आदि महत्वपूर्ण पर्वों के दृष्टिगत व्याप्त संवेदनशीलता पर सतर्कता बरतने के निर्देश दिये।

कहा कि राष्ट्रपति द्वारा उत्तराखण्ड पुलिस को प्रदत्त विशिष्ट प्रतीक चिह्न प्रदान करने हेतु प्रेसिडेंट पुलिस कलर सेरेमनी की तैयारियों के दृष्टिगत आवश्यक निर्देश दिये। कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों, कुंभ मेले और धार्मिक आयोजनों के दृष्टिगत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप ग्रुप्स) पर 24 घंटे सघन निगरानी रखी जाए, ताकि किसी भी भड़काऊ सामग्री या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों को समय रहते चिह्नित कर लिया जाये ।

कहा कि संवेदनशील मामलों व सांप्रदायिक मुद्दों को लेकर फैलने वाली भ्रामक खबरों, छेड़छाड़ किए गए वीडियो/डीपफेक और अफवाहों का तत्काल आधिकारिक खंडन जारी किया जाए।

हिंदी दिवस पर सीएम ने किया हिमालयन संस्कृति पत्रिका का विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिन्दी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में हिमालयी संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन को समर्पित पत्रिका ‘हिमालयन संस्कृति‘ के प्रवेशांक का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘हिमालयन संस्कृति’ पत्रिका के माध्यम से हिमालयी राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक आस्थाओं, रीति-रिवाजों, लोक कला, लोक साहित्य, इतिहास, विरासत तथा पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े विविध आयामों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही हिमालय की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान से युवा पीढ़ी को परिचित कराने के प्रयास सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार है। हिमालयी लोक परंपराओं और विरासत का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह विशेषांक हिमालयी समाज की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का संदर्भ-स्रोत बनने के साथ संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ हिमालयी पर्यावरण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता को भी नई दिशा प्रदान करने में भी सहायक होगा।

पत्रिका के संपादक रजनीश कौंसवाल ने कहा कि इस विशेषांक में हिमालयी संस्कृति के विविध पक्षों को एक मंच पर लाने तथा हिमालय की लोक स्मृतियों, परंपरागत ज्ञान, लोक कलाओं, सामाजिक जनसरोकारों और पर्यावरणीय चेतना को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किया है।

इस अवसर पर उपस्थित रायपुर विधायक उमेश शर्मा (काऊ), भाजपा महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल, विनोद खंडूरी, बद्री केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष प्रसाद सती, सदस्य राजपाल जड़धारी, विपिन, वरिष्ठ पत्रकार हरीश कोठारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों एवं संस्कृति प्रेमियों ने संपादक रजनीश कौंसवाल को इस अभिनव एवं सराहनीय पहल के लिए शुभकामनाएं दी।

सीएम ने किए हिंदी दिवस पर साहित्यिक एवं रचनात्मक लेखन प्रतियोगिताओं के 126 विजेता विद्यार्थी सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में साहित्यकारों, लेखकों, भाषाविदों, छात्र-छात्राओं और हिंदी प्रेमियों को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी दिवस हमारी संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रीय चेतना के गौरव को संजोने तथा उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है। हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी ने देश के विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं, बोलियों और संस्कृतियों के बीच संवाद का सेतु बनकर ‘विविधता में एकता’ की भावना को मजबूत किया है। हिंदी के इसी महत्व को देखते हुए 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस अपनी भाषा, राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक गौरव पर गर्व करने का अवसर है। मुख्यमंत्री ने भारतेंदु हरिश्चंद्र की पंक्तियों “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय के सूल।” का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति का आधार भी होती है। जो समाज अपनी भाषा को सहेजता है, वह अपनी संस्कृति और पहचान को भी सुरक्षित रखता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय संस्कृति और भाषाओं को वैश्विक मंचों पर नई प्रतिष्ठा मिली है। प्रधानमंत्री विश्व के विभिन्न मंचों पर भारतीयता और अपनी सांस्कृतिक पहचान को आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि जब हम अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों पर गर्व करते हैं, तो विश्व भी हमारी समृद्ध विरासत का सम्मान करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक का है। ऐसे में हिंदी को केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित न रखकर विज्ञान, तकनीक, शोध और डिजिटल दुनिया की भी मजबूत भाषा बनाना होगा। उन्होंने युवाओं से नई तकनीक और अन्य भाषाओं को सीखने के साथ अपनी हिंदी और मातृभाषा पर गर्व बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग हिंदी को दुनिया के हर मंच तक पहुंचाने के लिए किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा और साहित्य का संबंध अत्यंत गहरा है। भाषा यदि शरीर है तो साहित्य उसकी आत्मा है। उत्तराखण्ड ने हिंदी और भारतीय साहित्य को अनेक महान विभूतियां दी हैं। राष्ट्रकवि सुमित्रानंदन पंत ने हिमालय और प्रकृति को अपनी कविताओं में अमर स्वर दिया। गौरा पंत ‘शिवानी’ ने उत्तराखण्ड के लोकजीवन और स्त्री चेतना को अपनी लेखनी के माध्यम से देशभर तक पहुंचाया। कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल ने हिमालय की संवेदनाओं को शब्द दिए, जबकि प्रसून जोशी जैसे रचनाकार इस समृद्ध साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की पहचान हिंदी के साथ-साथ उसकी समृद्ध लोकभाषाओं और बोलियों से भी है। गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी, भोटिया, थारू, बंगाणी सहित प्रदेश की अनेक लोकभाषाएं और बोलियां हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। राज्य सरकार हिंदी के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं, साहित्य और साहित्यकारों के संरक्षण एवं सम्मान के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ के माध्यम से जीवनभर साहित्य साधना करने वाले साहित्यकारों को पांच लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जा रही है। ‘उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान’ के अंतर्गत हिंदी, गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी, पंजाबी और उर्दू सहित विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है। वहीं ‘साहित्य भूषण’ पुरस्कार के माध्यम से उत्कृष्ट साहित्यकारों को 5 लाख 51 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि हिंदी और स्थानीय भाषाओं को डिजिटल माध्यमों से जोड़ने, ‘बुके नहीं, बुक देंगे’ जैसी पहल से पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने तथा रचनाकारों को पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान देने का कार्य किया जा रहा है। भाषा संस्थान के माध्यम से उत्तराखण्ड के अप्रकाशित और बिखरे साहित्य के संग्रह, संरक्षण और प्रकाशन की दिशा में भी कार्य हो रहा है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, प्रो. जगत सिंह बिष्ट, सचिव भाषा विभाग उमेश नारायण पांडे, निदेशक भाषा मायावती ढकरियाल एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

15 अक्टूबर के बाद मुख्यमंत्री धामी सड़क मार्ग से यात्रा कर स्वयं लेंगे जायजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में विभिन्न जनहित से जुड़े विषयों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी सड़कों को जल्द गड्ढामुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि मानसून के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत एवं सुधारीकरण के कार्यों में तेजी लाई जाए। जिलाधिकारी भी अपने-अपने जनपदों में सड़कों की स्थिति की नियमित समीक्षा करें और संबंधित विभागों एवं कार्यदायी संस्थाओं के कार्यों की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अक्टूबर के बाद वे कभी भी सड़क मार्ग से यात्रा कर औचक निरीक्षण करेंगे।

मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि यात्रा से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखा जाए। श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा मार्गों पर यातायात, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए। संबंधित जिलाधिकारी और विभाग आपसी समन्वय से यात्रा व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखें।

मुख्यमंत्री ने ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तीसरे चरण को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिविरों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए तथा जनसमस्याओं का यथासंभव मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इन शिविरों का उद्देश्य शासन और प्रशासन को जनता के और निकट लाकर लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है।

मुख्यमंत्री ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। जनसेवा, जनभागीदारी और जनकल्याण को केंद्र में रखते हुए अधिक से अधिक लोगों को सरकार की योजनाओं एवं सेवाओं से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने स्वाइन फ्लू सहित विभिन्न संक्रामक एवं जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण करें तथा साफ-सफाई व्यवस्था, आवश्यक दवाइयों एवं अन्य चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता का जायजा लें। स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन आपसी समन्वय से रोगों की रोकथाम, उपचार एवं प्रभावी नियंत्रण के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें और स्थिति की नियमित निगरानी की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनकल्याण से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर शिथिलता नहीं होनी चाहिए। शासन और प्रशासन के अधिकारी आपसी समन्वय से कार्य करते हुए सरकार की योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ पात्र लोगों तक समयबद्ध रूप से पहुंचाना सुनिश्चित करें।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, एल. फैनई, डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगोली, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख वन संरक्षक हॉफ कपिल लाल, सचिवगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

जिन जनपदों में जिस प्रकृति की शिकायतें अधिक, जिलाधिकारी संबंधित विभागों के साथ समीक्षा कर शीघ्र समाधान करेंः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जन शिकायतों का त्वरित, समयबद्ध एवं संतोषजनक निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन आमजन की समस्याओं के समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम है। शिकायतों का निस्तारण केवल पोर्टल पर औपचारिक रूप से बंद करने तक सीमित न रहे, बल्कि शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक समाधान सुनिश्चित होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन जनपदों में जिस प्रकृति की शिकायतें सबसे अधिक प्राप्त हो रही हैं, संबंधित जिलाधिकारी उन शिकायतों की विभागवार समीक्षा कर उनका यथाशीघ्र समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि एक ही प्रकृति की शिकायतें बार-बार आने के कारणों का भी विश्लेषण किया जाए और ऐसी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कार्यवाही की जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को तहसीलों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान यह विशेष रूप से देखा जाए कि दाखिल-खारिज से संबंधित प्रकरणों का निस्तारण निर्धारित समयसीमा के भीतर हो रहा है या नहीं। भूमि धोखाधड़ी से संबंधित जन समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व संबंधी मामलों में आमजन को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और निर्धारित सेवाएं उन्हें समयबद्ध रूप से उपलब्ध हों।

मुख्यमंत्री ने स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता को शीर्ष प्राथमिकता में रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेयजल से संबंधित शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को पाइपलाइन एवं सीवर लाइनों का 15 दिन के भीतर ऑडिट कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। पेयजल आपूर्ति में व्यवधान, लीकेज और अन्य समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 30 दिन से अधिक समय से लंबित शिकायतों के निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जाए। सचिव, विभागाध्यक्ष और जिलाधिकारी अपने स्तर पर नियमित रूप से लंबित शिकायतों की समीक्षा करें। जिन शिकायतों का निर्धारित समयावधि के भीतर निस्तारण नहीं किया जा रहा है, उनमें संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

मुख्यमंत्री ने लंबे समय से लंबित शिकायतों को सर्वाेच्च प्राथमिकता पर निस्तारित करने के निर्देश दिए। बैठक में 180 दिनों से अधिक समय से लंबित शिकायतों की विभागवार स्थिति भी प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के पुराने प्रकरणों की विभागीय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की जाए और उनके लंबित रहने के कारणों की भी समीक्षा की जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों को अनावश्यक रूप से ‘स्पेशल क्लोज’ अथवा ‘फोर्स क्लोज’ न किया जाए। शिकायतों के निस्तारण में शिकायतकर्ता की संतुष्टि को विशेष महत्व दिया जाए। उन्होंने कहा कि किसी शिकायत को बंद करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित स्तर पर समस्या के समाधान के लिए अपेक्षित कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों पर फीडबैक की व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए। शिकायतकर्ता से प्राप्त फीडबैक के आधार पर निस्तारण की गुणवत्ता का आकलन किया जाए। पोर्टल पर जनसामान्य से फीडबैक तथा विभिन्न विभागों और नोडल अधिकारियों द्वारा की जा रही कार्रवाई की मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जन शिकायतों के प्रभावी निस्तारण में अच्छा कार्य करने वाले अधिकारियों और कार्मिकों को प्रोत्साहित किया जाए। वहीं शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित की जाए। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन का मूल उद्देश्य शासन और आमजन के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करते हुए नागरिकों की समस्याओं का वास्तविक, समयबद्ध और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान शिकायतकर्ताओं से दूरभाष पर वार्ता कर उनकी समस्याओं और शिकायतों के निस्तारण की वास्तविक स्थिति की भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अनुचित रूप से बंद की गई एक शिकायत के संबंध में संजय कुमार रावत से दूरभाष पर वार्ता की। रावत ने बताया कि उनके दिवंगत पिता के उपचार से संबंधित चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिलों का भुगतान नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लंबित प्रकरण में तत्काल आवश्यक कार्रवाई कर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में लोगों को अनावश्यक परेशान न किया जाए। भविष्य में इस प्रकार की शिकायत सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने पौड़ी गढ़वाल निवासी बेबी कोटनाला से दूरभाष पर वार्ता कर परित्यक्ता पेंशन से संबंधित समस्या की जानकारी ली। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि लंबे समय से शिकायत दर्ज होने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल को प्रकरण में तत्काल उचित कार्रवाई करते हुए समस्या का समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने हरिद्वार निवासी गीता से भी दूरभाष पर वार्ता की। उन्होंने बताया कि उनके घर के समीप लगभग तीन माह पूर्व पानी की टंकी बन चुकी है, लेकिन उससे पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं हुई है। मुख्यमंत्री ने मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार को मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करने और तत्काल पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने देहरादून निवासी शिल्पी सक्सेना से दूरभाष पर वार्ता की। उन्होंने बताया कि सीएम हेल्पलाइन पर स्ट्रीट लाइट से संबंधित शिकायत दर्ज कराने के बाद समयबद्ध रूप से क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट लगा दी गई। उन्होंने समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। वहीं, अल्मोड़ा निवासी आयुष बिष्ट ने मुख्यमंत्री को बताया कि छात्रवृत्ति से संबंधित उनकी शिकायत का विभाग द्वारा समाधान कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने छात्रवृत्ति मिलने में हुई देरी के कारणों की जांच करने के निर्देश देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ निर्धारित समय पर मिलना सुनिश्चित किया जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, एल. फैनई, डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगोली, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख वन संरक्षक हॉफ कपिल लाल, सचिवगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

धामी सरकार के विजन को जमीन पर उतारने में जुटा आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग

उत्तराखंड की विकास यात्रा अब केवल सड़कों, भवनों और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में विकास की तस्वीर में प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक विरासत, पर्यटन संभावनाओं और युवा शक्ति को भी समान महत्व दिया जा रहा है। इसी व्यापक विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने राज्य सचिवालय में महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में दो अलग-अलग शहरों से जुड़ी दो बड़ी परियोजनाएं केंद्र में रहीं। अयोध्याधाम में करीब 67.83 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से उत्तराखंड का भव्य राज्य अतिथि गृह प्रस्तावित है, जबकि उधमसिंहनगर के रुद्रपुर स्थित मोदी मैदान में 2332.05 लाख रुपये की संशोधित लागत से इंडोर एवं आउटडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित करने की तैयारी है। दोनों परियोजनाओं का स्वरूप अलग है, लेकिन उद्देश्य एक, उत्तराखंड की पहचान और संभावनाओं को नई ऊंचाई देना।

अयोध्याधाम में बनने वाला उत्तराखंड का राज्य अतिथि गृह केवल सरकारी आवासीय सुविधा के रूप में विकसित नहीं किया जाएगा। इसकी कल्पना ऐसे भवन के रूप में की गई है, जहां प्रवेश करते ही उत्तराखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता की झलक दिखाई दे। करीब 6783.33 लाख रुपये के विस्तृत आगणन वाले इस भवन की डिजाइन में पारंपरिक पहाड़ी वास्तुशैली को प्रमुखता देने के निर्देश दिए गए हैं। भवन की आंतरिक सज्जा में भी उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान को प्रमुखता मिलेगी। सबसे खास बात यह है कि भवन के अलग-अलग तल अलग-अलग थीम पर आधारित होंगे। ओम पर्वत, ग्लेशियर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क और पंचाचूली पर्वत शिखर जैसे उत्तराखंड के प्रमुख प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक प्रतीकों को भवन की थीम का हिस्सा बनाने की योजना है। इसका मकसद साफ है-अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को केवल उत्तराखंड के अतिथि गृह में ठहरने का अनुभव न मिले, बल्कि उन्हें देवभूमि की संस्कृति, प्रकृति और स्थापत्य से भी परिचित होने का अवसर मिले।

बारात घर की जगह बनेगा बेहतर अतिथि गृह

प्रस्तावित भवन की मूल योजना में शामिल ‘बारात घर’ को हटाने का निर्णय भी लिया गया। इसके स्थान पर भवन को पूरी तरह अतिथि गृह के निर्धारित मानकों और आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। भवन की गुणवत्ता, उपयोगिता और आकर्षक स्वरूप पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। यानी योजना में केवल निर्माण नहीं, बल्कि ‘उत्तराखंड की ब्रांडिंग’ का पहलू भी दिखाई देता है। बैठक में अपर सचिव/राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रुहेला, उप सचिव हनुमान प्रसाद तिवारी तथा कार्यदायी संस्था उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम, निर्माण इकाई देहरादून के परियोजना प्रबंधक राकेश चंद्र तिवारी मौजूद रहे।

मोदी मैदान में खेलों का नया हब

जहां अयोध्या में उत्तराखंड की संस्कृति अपनी पहचान दर्ज कराने की तैयारी में है, वहीं रुद्रपुर में प्रदेश की युवा प्रतिभाओं को आधुनिक सुविधाएं देने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया जा रहा है। रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के मोदी मैदान में प्रस्तावित इंडोर एवं आउटडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के संशोधित प्रस्ताव को विभागीय व्यय समिति की प्रक्रिया में आगे बढ़ाया गया है। परियोजना का पूर्व आगणन 2374.56 लाख रुपये था, जिसे संशोधित कर 2332.05 लाख रुपये किया गया है।परियोजना में खेल सुविधाओं का दायरा भी व्यापक रखा गया है। इंडोर परिसर में पहले प्रस्तावित स्क्वैश और बिलियर्ड्स को हटाकर जिम, टेबल टेनिस और बैडमिंटन को शामिल किया गया है। वहीं आउटडोर परिसर में वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, फुटबॉल, पिकलबॉल और टेनिस की सुविधाएं प्रस्तावित हैं। इसके साथ करीब एक किलोमीटर लंबा साइकिलिंग रूट और ट्रैक पाथ भी बनाया जाएगा। खिलाड़ियों और आगंतुकों की सुविधा के लिए पर्याप्त टॉयलेट एवं चेंजिंग रूम की व्यवस्था का भी प्रावधान किया गया है।

लागत में संतुलन, सुविधाओं में विस्तार

संशोधित योजना में लागत को नियंत्रित करने के साथ सुविधाओं को अधिक उपयोगी बनाने पर जोर दिया गया है। बाउंड्रीवाल की ऊंचाई कम कर उसके स्थान पर लोहे की ग्रिल लगाने का प्रावधान किया गया है। इससे परियोजना की लागत में कमी आई है। टीएसी और नियोजन विभाग द्वारा आगणन के परीक्षण के बाद 14 अगस्त 2026 को हुई विभागीय व्यय समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुरूप संशोधन किए गए। कार्यदायी संस्था उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम, उधमसिंहनगर की ओर से संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। समिति ने संशोधित आगणन पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान करते हुए प्रस्ताव को व्यय वित्त समिति के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने का निर्णय लिया।

फाइल से फील्ड तक-विकास का एक साझा सूत्र

इन दोनों परियोजनाओं में एक महत्वपूर्ण समानता दिखाई देती है। अयोध्या का अतिथि गृह उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को प्रदेश से बाहर मजबूत करने का माध्यम बनेगा, तो रुद्रपुर का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स प्रदेश के भीतर युवा प्रतिभाओं को आधुनिक अवसर देने का आधार तैयार करेगा। एक परियोजना में पहाड़ की संस्कृति और प्राकृतिक विरासत की झलक होगी, दूसरी में मैदान पर पसीना बहाते युवाओं के सपनों को नई दिशा मिलेगी। यही वह व्यापक दृष्टिकोण है जिसमें विकास को केवल निर्माण कार्य के आंकड़ों से नहीं, बल्कि उसके सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव से भी देखा जा रहा है। अयोध्या में देवभूमि की पहचान और रुद्रपुर में युवा शक्ति, दोनों को एक साथ साधने वाली ये परियोजनाएं उत्तराखंड के बदलते विकास मॉडल की तस्वीर पेश करती हैं।

सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा परियोजना बने तो ऐसी, जो दिखे भी और काम भी आए। सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य की विकास परियोजनाओं को गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और जनोपयोगी बनाने पर हमारा विशेष फोकस है। अयोध्या में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। वहीं रुद्रपुर में प्रस्तावित इंडोर एवं आउटडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स युवाओं और खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दोनों परियोजनाओं की समीक्षा में गुणवत्ता, लागत का संतुलन, उपयोगिता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। हमारा प्रयास है कि स्वीकृत परियोजनाएं धरातल पर बेहतर परिणाम देने वाली साबित हों।

देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के 68 मेधावी विद्यार्थियों का दल 16 सितंबर को भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण पर होगा रवाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कीर्तिनगर विकासखंड अंतर्गत स्वामी मनमथन प्रेक्षागृह में देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण के 10वें संस्करण के तहत भ्रमण पर जाने वाले 68 मेधावी विद्यार्थियों के दल से भेंट की।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी यात्रा एवं तैयारियों की जानकारी ली तथा उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों को देश की विविधता, इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, तकनीक और विकास को करीब से समझने का अवसर प्रदान करता है। ऐसे अनुभव विद्यार्थियों के ज्ञान को कक्षा की सीमाओं से बाहर ले जाकर उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में सहायक होते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थी भ्रमण के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों की विशेषताओं को समझें, वहां की उपलब्धियों से सीखें और अपने अनुभवों को अपने साथियों के साथ साझा करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को देश के बड़े एवं प्रतिष्ठित संस्थानों का भ्रमण करने का अवसर मिलना उनके भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में उद्देश्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करने तथा गुरुजनों और माता-पिता के प्रति श्रद्धाभाव बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इतिहास बनाया है, उन्होंने सामान्य से असामान्य बनने के लिए निरंतर प्रयास किया है। यदि संकल्प दृढ़ हो और प्रयास सच्चे मन से किया जाए तो कोई भी ताकत सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है। इस दिशा में उत्तराखण्ड को विकास के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्यों की सूची में उत्तराखण्ड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना है। प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून भी लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लिए गए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण की पहल के लिए विधायक श्री विनोद कंडारी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लगातार 10 वर्षों तक इस प्रकार के कार्यक्रम को संचालित करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस पहल से विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ी है और वे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

विधायक विनोद कंडारी ने कहा कि आज का दिन उनके लिए गर्व और ऐतिहासिक दिन है। उन्होंने कहा कि दूर-दराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों का सीधे मुख्यमंत्री से संवाद करना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के विकास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का हमेशा सहयोग रहा है और क्षेत्र से जुड़ी आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण की शुरुआत में अनेक कठिनाइयां आईं, लेकिन आज इसके सकारात्मक परिणाम सामने हैं। इस पहल से विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित हुई है और बच्चे बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई विद्यार्थी अब 96 प्रतिशत तक अंक प्राप्त कर रहे हैं।

सीएम धामी ने विद्यार्थियों से किया सीधा संवाद, कहा युवा ही देश और प्रदेश के भविष्य के निर्माता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित प्रेक्षागृह में ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ विषय पर आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशभर से जुड़े विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद किया और विकसित उत्तराखंड को लेकर उनके विचारों, सुझावों, सपनों तथा भविष्य की परिकल्पनाओं को जाना। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उनका मार्गदर्शन भी किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विद्यार्थियों की ऊर्जा, उनकी सोच और विकसित उत्तराखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उत्साहवर्धक है। प्रदेश की भावी पीढ़ी को सशक्त, आत्मनिर्भर, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि युवाओं के विचार और सुझाव उत्तराखंड के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आज के विद्यार्थी ही कल के उत्तराखंड और भारत का नेतृत्व करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को प्रदेश के विद्यार्थियों का व्यापक समर्थन मिला है। अभियान के तहत प्रदेशभर से 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने निबंध एवं विचार भेजे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा व्यक्त किए गए विचार उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनकी सोच, संवेदनशीलता और संकल्प को दर्शाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा लिखे गए निबंधों की सराहना करते हुए कहा कि सभी ने इतनी अच्छी तरह अपने विचार व्यक्त किए हैं कि यह निर्णय करना कठिन है कि किसने अच्छा लिखा और किसने बहुत अच्छा लिखा।

संवाद के दौरान रुद्रप्रयाग की कक्षा 11 की छात्रा सीमा सेमवाल ने पलायन विषय पर लिखे अपने निबंध के बारे में मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने इसे दो-तीन दिनों में लिखा है और पलायन को विषय इसलिए चुना, क्योंकि उन्होंने इसे स्वयं महसूस किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में मुख्य रूप से दो प्रकार का पलायन देखा जाता है—स्थायी और अस्थायी। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के लिए घर से बाहर जाना हमेशा नकारात्मक नहीं होता। बाहर जाकर पढ़ने, सीखने और अनुभव प्राप्त करने से युवाओं को बेहतर एक्सपोजर मिलता है। हालांकि, पहाड़ों में माताओं-बहनों को अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वे कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिवार और समाज को संभालते हुए स्वयं कार्य कर रही हैं तथा दूसरों को भी प्रेरित कर रही हैं।

देवप्रयाग की छात्रा श्रेया सेमवाल ने ‘पहाड़ रहें, अपने रहें, मेरे सपने रहें’ विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने पहाड़ों में रोजगार और अवसरों के विस्तार के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने की आवश्यकता पर विचार रखे। वहीं जीईसी पौड़ी की छात्रा प्रिया ने विकसित उत्तराखंड को लेकर अपने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है, जब देश का प्रत्येक गांव, प्रत्येक जिला और प्रत्येक राज्य विकास की मुख्यधारा से जुड़े और विकसित हो।

छात्रा तमन्ना ने पलायन और खेती से होने वाली कम आय की समस्या को रेखांकित करते हुए कहा—‘मेरा पहाड़, मेरा रोजगार, पत्थर की छाती पर बनेगा रोजगार।’ मुख्यमंत्री ने उनके विचार की सराहना करते हुए कहा कि यह सकारात्मक सोच का परिचायक है। परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन हमारा संकल्प मजबूत होना चाहिए कि जीवन में हमें कुछ बेहतर करना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं को अपनी परिस्थितियों को अवसर में बदलने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

छात्रा सृष्टि ने सरकारी स्कूलों और अस्पतालों के प्रति लोगों के भरोसे से जुड़े सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे व्यक्तित्व साधारण परिवारों से निकलकर देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज की पीढ़ी अच्छे और बेहतर की समझ रखती है। युवाओं को अपने जनपद और प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों तथा विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी रखनी चाहिए और सकारात्मक बदलाव के लिए अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

रुद्रप्रयाग की छात्रा अनुष्का ने पलायन रोकने से जुड़े अपने विचार साझा किए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, इसके बावजूद सरकार द्वारा गांव-गांव तक बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है और सरकार निरंतर इस दिशा में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 500 से अधिक स्मार्ट क्लास संचालित किए जा रहे हैं तथा रिवर्स माइग्रेशन भी हो रहा है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने का लक्ष्य रखें।

इशिका नेगी और गौरव बिष्ट ने पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण तथा चारधाम यात्रा से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव साझा किए। विद्यार्थियों ने उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखते हुए पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर भी अपने विचार रखे।

छात्र मुकेश कुशवाहा ने स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए छोटे-छोटे गांवों तक हेलीकॉप्टर एंबुलेंस जैसी सुविधा पहुंचाने तथा विद्यालय स्तर पर कौशल विकास की ट्रेनिंग उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने इसे महत्वपूर्ण सुझाव बताते हुए कहा कि सरकार का प्रयास है कि युवाओं को अपनी प्रतिभा और क्षमता का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा रखे गए सभी विचारों और सुझावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड के निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन उनके लिए विशेष है, क्योंकि उन्हें विद्यार्थियों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला। विद्यार्थियों के विचारों से उनकी परिकल्पना, ज्ञान, संवेदनशीलता और भविष्य को लेकर उनकी सोच का पता चलता है। उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थियों के भीतर आगे बढ़ने और कुछ बेहतर करने की तीव्र इच्छा दिखाई देती है। यही ऊर्जा विकसित उत्तराखंड के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवा हैं और भविष्य का उत्तराखंड एवं भारत युवाओं के सपनों, संकल्प और मेहनत से बनेगा। वर्ष 2047 में भारत कैसा हो, उसमें युवाओं का क्या योगदान हो, उनकी क्या भूमिका हो और व्यवस्थाएं कैसी होनी चाहिए—इन सभी विषयों पर युवाओं की सोच और सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विकास की इस यात्रा में प्रत्येक युवा की भूमिका अहम है और युवाओं को अपने सपनों को लक्ष्य में बदलकर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवा विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में युवाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री युवा योजना जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की प्रतिभा और मेहनत के साथ खिलवाड़ करने वाले नकल माफियाओं के विरुद्ध भी राज्य सरकार ने सख्त कानून बनाए हैं, ताकि योग्य युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष अवसर मिल सकें।

कार्यक्रम के दौरान छात्रा अदिति गौतम ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उनके द्वारा बनाई गई एक चित्रकृति भेंट की। बेहतर सहभागिता के लिए नोडल अधिकारी शिक्षक अंकुश को सम्मानित किया गया। वहीं रुद्रप्रयाग जनपद से निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग श्री विशाल मिश्रा को भी सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने सपनों को अपना लक्ष्य बनाएं, निरंतर मेहनत करें और अपनी प्रतिभा एवं ऊर्जा का उपयोग प्रदेश तथा देश के निर्माण में करें। उन्होंने कहा कि आने वाला उत्तराखंड युवाओं के सपनों का उत्तराखंड होगा और इसके निर्माण में प्रदेश के प्रत्येक युवा की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

सरकारी भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा: मीनाक्षी सुंदरम

राज्य में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा उपलब्ध सरकारी भूमि एवं संसाधनों के सुनियोजित एवं आर्थिक उपयोग के उद्देश्य से गठित उत्तराखंड इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) की कार्यप्रणाली को लेकर हाल के दिनों में विभिन्न माध्यमों से सामने आई सूचनाओं के संबंध में राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। सरकार की ओर से कहा गया है कि यूआईडीबी को 7,000 बीघा भूमि उपलब्ध कराए जाने संबंधी जानकारी तथ्यात्मक नहीं है। वर्तमान में यूआईआईडीबी को चिन्हित भूमि में से मात्र 45 एकड़ भूमि ही उपलब्ध हो पाई है। न तो 7,000 बीघा भूमि यूआईआईडीबी को दी गई है और न ही इतनी भूमि प्राप्त करने की कोई प्रक्रिया संचालित है।

प्रमुख सचिव नियोजन एवं प्रबंध निदेशक यूआईआईडीबी श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि हाल ही में कुछ स्वतंत्र मीडिया संस्थानों तथा विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर यूआईआईडीबी की परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों को लेकर प्रश्न उठाए गए हैं। ऐसे में आवश्यक है कि इससे संबंधित सही और तथ्यात्मक जानकारी जनता के समक्ष रखी जाए, ताकि किसी प्रकार की भ्रांति अथवा भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूआईआईडीबी को 7,000 बीघा भूमि मिलने की बात सही नहीं है। यूआईआईडीबी को इतनी भूमि न तो प्राप्त हुई है और न ही इतनी भूमि प्राप्त करने का कोई प्रयास गया है। उन्होंने कहा कि अब तक चिन्हित भूमि में से केवल 45 एकड़ भूमि ही यूआईडीबी को उपलब्ध हुई है।

यूआईआईडीबी के गठन का उद्देश्य सेवा क्षेत्र में पूंजी निवेश को बढ़ावा देना

सुंदरम ने कहा कि यूआईआईडीबी के गठन के पीछे राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक विकास से जुड़े स्पष्ट उद्देश्य हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य आगामी पांच वर्षों में प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) को दोगुना करना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य में पूंजी निवेश को बढ़ावा देना, रोजगार के अवसर सृजित करना तथा निवेश परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक आधारभूत संसाधन उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि राज्य में आयोजित इन्वेस्टर समिट के दौरान बड़ी संख्या में निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए निवेशकों को आवश्यक सुविधाओं के साथ उपयुक्त भूमि एवं अन्य आधारभूत संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। यूआईआईडीबी का गठन इसी व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए किया गया है, ताकि विशेष रूप से सेवा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध हो सके।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक एवं विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में सिडकुल जैसी संस्थागत व्यवस्था पहले से कार्य कर रही है। इसी प्रकार यूआईडीबी के माध्यम से पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण एवं बड़े स्तर के पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में निवेश के लिए उपयुक्त भूमि की आवश्यकता होती है। ऐसे में यूआईडीबी का उद्देश्य निवेशकों के लिए उपलब्ध संसाधनों को व्यवस्थित रूप से चिन्हित करना और नियमानुसार उपलब्ध कराते हुए निवेश की प्रक्रिया को सुगम बनाना है।

सुंदरम ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखंड के निर्माण का लक्ष्य भी राज्य की विकास नीति का महत्वपूर्ण आधार है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूंजी निवेश, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार आवश्यक है। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और पर्यटन राज्य होने के कारण पर्यटन, आतिथ्य, वेलनेस, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण निवेश को बढ़ावा देना आवश्यक है।

पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी एवं वेलनेस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास

प्रमुख सचिव नियोजन ने कहा कि उत्तराखंड को एक प्रमुख पर्यटन एवं वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले होटल, रिसॉर्ट, वेलनेस सेंटर तथा अन्य पर्यटन सुविधाओं में पूंजी निवेश आवश्यक है। यूआईडीबी का उद्देश्य ऐसे निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक भूमि एवं आधारभूत संसाधनों की उपलब्धता को सुगम बनाना है, ताकि राज्य में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो सके और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हों।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को एक प्रमुख वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की भी व्यापक संभावनाएं हैं। देश में जयपुर और उदयपुर जैसे शहर वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी व्यापक लाभ मिला है। इसी प्रकार उत्तराखंड में भी उच्च गुणवत्ता वाले होटल एवं आतिथ्य सुविधाओं के विकास के लिए पूंजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है। यूआईआईडीबी इसी प्रकार के सेवा क्षेत्र के निवेश के लिए आवश्यक भूमि एवं संसाधनों की उपलब्धता को आसान बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप उत्तराखंड को देश के प्रमुख पर्यटन एवं वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके लिए राज्य में आवश्यक बुनियादी एवं आतिथ्य सुविधाओं के विकास में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। इससे पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय व्यवसाय, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और अन्य संबद्ध सेवा क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा।

शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश के लिए भी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर*

श्री सुंदरम ने कहा कि उत्तराखंड देश के महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्रों में से एक है। प्रदेश में अनेक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान कार्यरत हैं, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि शिक्षा के क्षेत्र में बड़े एवं गुणवत्तापूर्ण पूंजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि उच्च शिक्षा एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में हो सके।

उन्होंने कहा कि यूआईआईडीबी के गठन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ऐसे सेवा क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करना भी है, जिनसे राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश के लिए उपयुक्त भूमि एवं आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता होती है। यूआईआईडीबी ऐसी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए निवेश के लिए उपलब्ध सरकारी संसाधनों को नियमानुसार चिन्हित एवं व्यवस्थित करने की दिशा में कार्य कर रहा है, ताकि निवेशकों के लिए प्रक्रिया सुगम हो और राज्य में गुणवत्तापूर्ण संस्थानों का विस्तार हो सके।

उन्होंने कहा कि इससे उत्तराखंड के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली, बेंगलुरु और देश के अन्य बड़े शहरों की ओर जाने के बजाय राज्य में ही बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में निवेश से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। इसी प्रकार स्वास्थ्य, वेलनेस, पर्यटन और आतिथ्य जैसे सेवा क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करने से राज्य के आर्थिक विकास को नई गति दी जा सकती है।

सेवा क्षेत्र में निवेश के लिए व्यवस्थित लैंड बैंक की आवश्यकता

प्रमुख सचिव नियोजन ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में निवेश के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराना अपने आप में एक महत्वपूर्ण चुनौती है। राज्य में निजी स्तर पर भूमि खरीद की प्रक्रिया विभिन्न कारणों से जटिल है। ऐसे में सेवा क्षेत्र की निवेश परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकारी भूमि का एक व्यवस्थित लैंड बैंक तैयार करना आवश्यक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य सरकारी भूमि का अनियोजित हस्तांतरण अथवा विक्रय नहीं है, बल्कि ऐसी भूमि का चिन्हीकरण एवं नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित करना है, जो वर्तमान में अनुपयोगी या आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोग में नहीं आ रही है। यूआईडीबी के माध्यम से ऐसी भूमि को नियमानुसार उपयोग में लाकर पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध सरकारी भूमि का उपयोग निर्धारित नियमों, प्रचलित कानूनों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ही किया जाएगा। इसका उद्देश्य निवेशकों के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता को सुगम बनाना है, ताकि राज्य में निवेश की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और व्यवस्थित हो सके।

यूआईआईडीबी की भूमिका सर्विस सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहित करना

श्री सुंदरम ने कहा कि औद्योगिक एवं विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में सिडकुल जैसी संस्थागत व्यवस्था कार्य कर रही है। इसी प्रकार सेवा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने तथा उत्तराखंड में बड़े और गुणवत्तापूर्ण निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से यूआईआईडीबी का गठन किया गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में निवेश के लिए भूमि एवं अन्य संसाधनों की आवश्यकता होती है। यूआईडीबी का उद्देश्य इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध सरकारी संसाधनों का व्यवस्थित चिन्हीकरण, नियोजन और नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित करना तथा निवेशकों के लिए निवेश प्रक्रिया को सुगम बनाना है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड से पहले पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में भी इसी प्रकार की संस्थागत व्यवस्था विकसित की जा चुकी है। उत्तराखंड देश का ऐसा तीसरा राज्य है, जहां सेवा क्षेत्र में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने तथा उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से इस प्रकार के बोर्ड का गठन किया गया है।

ऑप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमेटी और यूआईआईडीबी अलग-अलग व्यवस्थाएं

प्रमुख सचिव नियोजन ने यह भी स्पष्ट किया कि यूआईआईडीबी को ऑप्टिमल लैंड एक्विजिशन कमेटी के साथ जोड़कर देखा जाना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि ऑप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमेटी का गठन यूआईआईडीबी से पहले वर्ष 2022 में किया गया था। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से विभिन्न विभागों के बीच भूमि हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रियागत कठिनाइयों को दूर करना था, क्योंकि एक विभाग से दूसरे विभाग को सरकारी भूमि हस्तांतरित करने में कई बार व्यावहारिक एवं प्रशासनिक समस्याएं सामने आती थीं।

उन्होंने कहा कि दोनों व्यवस्थाओं की भूमिका एवं उद्देश्य अलग-अलग हैं और इन्हें एक ही व्यवस्था के रूप में देखना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूआईआईडीबी के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहित करने का अर्थ सरकारी भूमि का विक्रय नहीं है। भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा। निवेश परियोजनाओं के लिए भूमि का उपयोग निर्धारित नियमों एवं शर्तों के तहत लीज मॉडल के माध्यम से किया जाएगा। संबंधित परियोजनाओं में लागू पर्यावरणीय एवं अन्य वैधानिक मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य अनुपयोगी सरकारी भूमि को किसी व्यक्ति अथवा निजी संस्था के पक्ष में स्थायी रूप से हस्तांतरित करना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का नियोजित तरीके से उपयोग करते हुए राज्य में आर्थिक गतिविधियों और सेवा क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देना है। कुछ लोगों द्वारा यह भ्रांति फैलाई जा रही है की भूमि लीज पर 90 वर्ष के लिए दी जा रही है जबकि लीज की अवधि अवधि 60 वर्ष है |

स्थानीय रोजगार एवं अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

यूआईआई डीबी के माध्यम से पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित किए जाने से राज्य में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। निवेश से स्थानीय स्तर पर परिवहन, होटल, होम स्टे, खान-पान, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद तथा अन्य संबद्ध गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

राज्य सरकार का मानना है कि उत्तराखंड की प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधन क्षमता का बेहतर उपयोग करते हुए नियोजित एवं पर्यावरणीय रूप से संतुलित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

सरकार ने कहा कि यूआईआईडीबी से संबंधित सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों, पारदर्शिता और नियोजित विकास की अवधारणा के अनुरूप संचालित की जा रही हैं। 7,000 बीघा भूमि यूआईडीबी को उपलब्ध कराए जाने संबंधी तथ्य सही नहीं हैं। वर्तमान में बोर्ड को मात्र 45 एकड़ भूमि उपलब्ध हुई है। इसलिए इस संबंध में किसी भी प्रकार की भ्रांति से बचने के लिए आधिकारिक एवं तथ्यात्मक जानकारी को ही आधार बनाया जाना आवश्यक है।

राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को निवेश, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, वेलनेस एवं अन्य सेवा क्षेत्रों का प्रमुख केंद्र बनाते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करना है। यूआईआईडीबी इसी उद्देश्य से सेवा क्षेत्र में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने, निवेश परियोजनाओं के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता को सुगम बनाने तथा सरकारी संसाधनों के नियमानुसार एवं सुनियोजित उपयोग की दिशा में कार्य कर रहा है।

आवास विभाग की 63 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण

देहरादून। प्रदेश में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की साल दर साल बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रदेश सरकार आधारभूत सुविधाओं के विस्तार में जुट गई है। ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने और चारधाम यात्रा को और सुगम बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम हो रहा है। आवास विभाग उत्तराखण्ड पार्किंग सुविधाओं के विकास में जुटा है। चार वर्षों में आवास विभाग ने 63 पार्किंग परियोजनाओं के तहत 4202 वाहनों की क्षमता की पार्किंग का निर्माण कराया है। धामी सरकार के इस कदम से जहां पर्वतीय जिलों में आम लोगों और पर्यटकों को जाम से राहत मिली है, वहीं स्थानीय लोगों की राह भी आसान हुई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड में पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पार्किंग सुविधाओं के विकास पर विशेष फोकस किया गया है। मुख्यमंत्री के दिशानिर्देश पर उत्तराखण्ड का आवास विभाग पर्वतीय जनपदों के प्रमुख शहरों, तीर्थ स्थलों और पर्यटन केंद्रों में पार्किंग नेटवर्क के विस्तार में जुटा है। स्थान की उपलब्धता के अनुसार सरफेस पार्किग, बहुमंजिला (मल्टीलेवल) पार्किंग और ऑटोमेटेड पार्किंग का निर्माण किया गया है।

आवास विभाग की विकसित पार्किंग एक नजर में

जनपद वाहन क्षमता
अल्मोड़ा 1087
नैनीताल 679
चंपावत 600
उत्तरकाशी 477
पिथौरागढ़ 309
रुद्रप्रयाग 304
पौड़ी 256
चमोली 201
टिहरी 163
बागेश्वर 126

हल होगी नैनीताल की पार्किंग समस्या
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर अब सरोवर नगरी नैनीताल में पार्किंग की समस्या हल हो सकेगी। प्रदेश सरकार मेट्रोपोल होटल परिसर क्षेत्र में पार्किंग का निर्माण कर रही है। इस पार्किंग के तैयार होने पर लगभग 700 वाहन यहां पार्क किए जा सकेंगे।

कैंची धाम में बहुमंजिला पार्किंग
सुप्रसिद्ध कैंची धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बहुमंजिला (मल्टी लेवल) पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है। इस पार्किंग में एक बार में पांच सौ से अधिक वाहन पार्क किए जा सकेंगे।

हल हुई पार्किंग की समस्या : डॉ राजेश
उत्तराखण्ड सरकार के के सचिव, आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग डॉ आर राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के दिशानिर्देशों के क्रम में प्रदेश में पार्किंग सुविधाओं के विकास पर जोर दिया गया है। पर्वतीय जनपदों में 63 पार्किंग परियोजनाओं का कार्य पूर्ण होने के बाद पार्किंग की समस्या काफी हद तक हल हो गई है। इससे पर्यटकों और श्रद्धालुओं के साथ ही स्थानीय नागरिकों को भी राहत मिली है।

कोट———

उत्तराखण्ड देश-दुनिया के पर्यटकों और श्रद्धालुओं का पसंदीदा गंतव्य बन गया है। पिछले वर्ष ही छह करोड़ से अधिक लोग यहां पहुंचे हैं। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार लगातार यात्री सुविधाओं का विस्तार कर रही है। जाम की समस्या से निपटने के लिए सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों और चार धाम यात्रा मार्गों पर पार्किंग सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। आवास विभाग और अन्य एजेंसियां इस काम में जुटी हैं।

-पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड