उत्तराखंड के मदरसों में स्कॉलरशिप वितरण में हुयी धांधली मामले पर सीएम धामी ने बैठाई जांच

सरस्वती शिशु मंदिर हाई स्कूल को कागजों में अल्पसंख्यक विद्यालय या मदरसा दर्शाकर केंद्रीय सरकार द्वारा पोषित विद्यालयों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति दिये जाने के प्रकरण की जानकारी होने पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गहनता से जांच करने के आदेश विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को दिए हैं। अब इस मामले की जांच विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण डॉ. पराग मधुकर धकाते द्वारा की जा रही है।

जानकारी के अनुसार उधम सिंह नगर जिले में 2021-2022 और 2022-2023 के राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर दर्ज किए अल्पसंख्यक छात्रवृति आवेदकों की प्रमाणिकता जांचने के लिए उधमसिंह नगर जिले के 796 बच्चों के दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई थी। इनमें से 6 मदरसों/शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले 456 बच्चों के बारे में जानकारी संदिग्ध पाई गई है। खास बात ये है कि इन स्कूलों में सरस्वती शिशु मंदिर हाईस्कूल किच्छा का नाम भी शामिल है।

यहीं से इस मामले में धांधली होने का मामला सामने आया है क्योंकि एक तो सरस्वती शिशु मंदिर अल्पसंख्यक विद्यालय नहीं होता दूसरा इसका संचालक मोहम्मद शारिक-अतीक बताया गया है। राष्ट्रीय छात्रवृति पोर्टल के अनुसार यहां 154 मुस्लिम बच्चों का पढ़ना बताया गया है। राष्ट्रीय छात्रवृति पोर्टल पर ये नाम देखकर सरकार भी चौंकी है जिसके बाद ही मुख्यमंत्री धामी ने गहनता से जांच करने के निर्देश दिए है। जानकारी के अनुसार काशीपुर के नेशनल अकादमी जेएमवाईआईएच एस में पढ़ने वाले 125 मुस्लिम छात्रों और इसके संचालक गुलशफा अंसारी, मदरसा अल जामिया उल मदरिया के 27 बच्चों का और उसके संचालक मोहम्मद फैजान का सत्यापन भी किए जाने के निर्देश जारी किए गए है।

इसके अलावा मदरसा अल्बिया रफीक उल उलूम घनसारा बाजपुर के संचालक जावेद अहमद और यहां के 39 बच्चों, संभवतः इसी जावेद अहमद के नाम से गदरपुर के मदरसा जामिया आलिया के 24 बच्चों के बारे में भी दस्तावेज जांचने और मदरसा जामिया रजा उल उलूम बाजपुर के 85 बच्चों और संचालक इरशाद अली के सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।

उधम सिंह नगर के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नंदिनी सिंह को इन सभी मामलों की गहनता से जांच पड़ताल करने के लिए सचिव अल्पसंख्यक कल्याण ने निर्देश दिए हैं।

मामला संज्ञान में आने के बाद मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल में दर्ज उत्तराखंड राज्य के ऐसे सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के बारे में आवेदकों के सत्यापन, भुगतान के विषय में बैंक खातों की जानकारी, संचालकों और विद्यार्थियों दोनों के जांचने के निर्देश देते हुए दो हफ्तों में रिपोर्ट देने को कहा है।

इस संबंध में विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि सरस्वती शिशु मंदिर के नाम से एक वर्ग विशेष द्वारा अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के मामले संज्ञान में आने साथ ही अन्य मदरसों के द्वारा राष्ट्रीय छात्रवृति में दर्ज आवेदनों को लेकर संदेह पैदा हुआ है, माननीय मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले की गहनता से जांच करने के निर्देश प्राप्त हुए हैं। इस पर पूरे राज्य में जांच की जा रही है साथ ही केंद्र सरकार के मंत्रालय से भी संवाद किया जा रहा है।
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राज्य में राष्ट्रीय छात्रवृति पोर्टल में दी गई आवेदकों की जानकारी संदेहजनक प्रतीत हुई है, जिसमें सरस्वती शिशु मंदिर के नाम से छात्रवृति का प्रकरण भी सामने आया है जिसकी जांच करने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव को निर्देशित किया गया है। देवभूमि में भ्रष्टाचार के मामलों को किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

भ्रष्ट अफसरों की 2021 में सिर्फ पांच गिरफ्तारी, 2024 में 38 तक पहुंची गिरफ्तारियों की संख्या

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजिलेंस को भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्यवाही के लिए खुली छूट प्रदान की हुई है। इसका असर, साल दर साल बढ़ते विजिलेंस ट्रैप और गिरफ्तारियों की संख्या में रूप में नजर आ रहा है। यही नहीं मजबूत साक्ष्य के आधार विजिलेंस गत साढ़े चार साल में 71 प्रतिशत मामलों में आरोपियों को कोर्ट से सजा दिलाने में कामयाब रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य का पदभार संभालते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर रुख साफ कर दिया था। इसका साफ असर विजिलेंस की कार्यवाही में नजर आ रहा है।

बीते चार साल में बडे से बड़े आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य में साल दर साल विजिलेंस ट्रैप और गिरफ्तारियों के साथ ही सजा के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। इस दौरान विजिलेंस ने कुल 82 ट्रैप में 94 गिरफ्तारियों को अंजाम दिया, जिसमें 13 राजपत्रित अधिकारी शामिल हैं। बीते साढ़े चार साल से विजिलेंस के पास कुल 125 शिकायतें प्राप्त हुई, जिसमें 18 में सामान्य जांच, 25 में खुली जांच के बाद 82 ट्रैप किए गए। गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस ठोस साक्ष्य और मजबूत पैरवी से कोर्ट में सजा की दर को भी 71 प्रतिशत तक ले जान में कामयाब रही है। इससे साफ है कि सरकार भ्रष्टाचार की समस्या को जड़ से खत्म करने के मिशन पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सतर्कता विभाग ने शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल फ्री नम्बर 1064 भी जारी किया है। यही नहीं मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को अंतिम फैसला आने तक आरोपियों को पूर्व के दायित्व या अहम जिम्मेदारी नहीं देने के साथ ही ट्रैप के मामलों में अभियोजन की प्रक्रिया में तेजी जाने के निर्देश दिए हैं।
भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार जारी
वर्ष गिरफ्तारी निर्णय सजा
2021 07 02 02
2022 15 03 01
2023 20 18 16
2024 38 13 07
2025 14 03 02
(नोट साल 2025 के आंकड़े जुलाई 15 तक के हैं)

बड़े बड़ों को किया गिरफ्तार

01-लोनिवि एई
नैनीताल जिले में लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता को ठेकेदार से ₹10 हजार रिश्वत मांगने पर रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया ।

02-यूपीसीएल जेई
देहरादून के हरबर्टपुर सब स्टेशन के एक जेई को विजिलेंस ने ₹15000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।

03-एलआईयू कर्मी
नैनीताल जिले के रामनगर में विजिलेंस की टीम ने एलआईयू के उप निरीक्षक और मुख्य आरक्षी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

04-रोडवेज एजीएम
काशीपुर में रोडवेज सहायक महाप्रबंधक को अनुबंधित बस संचालन के बदले 90 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।

05-खंड शिक्षा अधिकारी
हरिद्वार के खानपुर ब्लॉक में खंड शिक्षा अधिकारी को ₹10 हजार की घूस लेते गिरफ्तार किया गया।

06-जीएसटी सहायक आयुक्त
देहरादून में कार्यरत जीएसटी सहायक आयुक्त को 75 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।

07-जिला आबकारी अधिकारी
रुद्रपुर में तैनात जिला आबकारी अधिकारी को शराब कारोबारी से 10 लाख रुपए के माल के एवज में 10 फीसदी रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।

हम देवभूमि उत्तराखंड को भ्रष्टाचार मुक्त करते हुए, सुशासन की कार्य संस्कृति विकसित करना चाहते हैं। इसी क्रम में मुख्य सेवक के रूप में कार्यभार संभालने के दिन से ही विजिलेंस को भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ने के निर्देश दिए, जिसका असर अब नजर आ रहा है। भ्रष्टाचारियों को अंतिम अदालत सजा दिलाए जाने के लिए भी मजबूत पैरवी की जा रही है।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड।

सरकारी योजनाओं का गलत लाभ उठाने का मामला, सीएम धामी के निर्देश पर हुए मुकदमें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी योजनाओं का गलत तरीके से लाभ उठाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में मुख्यमंत्री के निर्देश पर कोतवाली नगर और थाना राजपुर में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि ऐसे अपात्र लोगों को कतई बख्शा न जाए और उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए।

मामले में जिला पूर्ति अधिकारी देहरादून और आयुष्मान विभाग की ओर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून को तहरीर दी गई। बताया गया कि सरकार की ओर से पांच लाख से कम सालाना आय वाले लोगों के राशन कार्ड बनाए जाते हैं। अपात्र लोगों की ओर से राशन कार्ड बनाए जाने की शिकायत मिलने पर पूर्ति विभाग ने राशन कार्डाे की जांच की तो कई लोगों के राशन कार्ड फर्जी पाए गए। इसी आधार पर यह लोग अपने आयुष्मान कार्ड बनाते हुए अनुचित रूप से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले रहे थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसएसपी देहरादून ने मामले में कोतवाली नगर तथा थाना राजपुर को तत्काल मुकदमे दर्ज करवाए हैं। दोनों मामलों में पुलिस गहनता से विवेचना कर रही है। ऐसे सभी लोगों को चिन्हित किया जा रहा है, जिन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी योजनाओं का लाभ लिया है।

रानीपोखरी में चोरी के मोबाइल के साथ एक गिरफ्तार

थानाध्यक्ष विकेंद्र चौधरी ने बताया कि 16 जून को अक्षय शर्मा निवासी रानीपोखरी ने तहरीर दी। बताया कि होटल फूड स्वैग भोगपुर से अज्ञात व्यक्ति द्वारा उनका मोबाइल चोरी कर लिया गया है। बताया कि पुलिस की टीम ने सीसीटीवी की फुटेज खंगालने के बाद नागाघेर पहुँची। वहां मुखबिर की सूचना के आधार पर एयरपोर्ट तिराहे की तरफ जाखन नदी पुल के पास से चोरी के मोबाइल के साथ आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

थानाध्यक्ष ने आरोपी की पहचान आलोक निवासी नागाघेर रानीपोखरी के रूप में कराई। पुलिस टीम में हरीश सती, शशिकांत उपस्थित रहे।

नगर निगम हरिद्वार भूमि घोटाला प्रकरण की होगी विजिलेंस जांच, सीएम धामी ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नगर निगम हरिद्वार में हुए जमीन घोटाले पर सख्त रुख अपनाते हुए, दो आईएएस, एक पीसीएस अधिकारी सहित सात अधिकारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए हैं, इस मामले में तीन अधिकारी पूर्व में निलंबित हो चुके हैं, जबकि दो की पूर्व में सेवा समाप्त की जा चुकी है। इस तरह इस प्रकरण में अब तक 10 अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं।

हरिद्वार नगर निगम द्यारा ग्राम सराय में कूड़े के ढेर के पास स्थित अनुपयुक्त 2.3070 हैक्टेयर भूमि को करोड़ों रुपये में खरीदने पर सवाल उठने के बाद, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रकरण की जांच के आदेश दिए थे। जिसके बाद सचिव रणवीर सिंह चौहान ने मामले की प्रारंभिक जांच कर, रिपोर्ट 29 मई को ही शासन को सौंपी थी। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री ने कार्मिक विभाग को दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जिस पर कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने मंगलवार को सभी सात आरोपित अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद, कार्मिक विभाग ने मंगलवार को हरिद्वार नगर निगम के तत्कालीन प्रशासक और मौजूदा डीएम कर्मेंद्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, हरिद्वार के तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह, वरिष्ठ वित्त अधिकारी निकिता बिष्ट, वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक विक्की, रजिस्ट्रार कानूनगो राजेश कुमार, हरिद्वार तहसील के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कमलदास को निलंबित कर दिया है।

अब तक हुई कार्रवाई

कर्मेन्द्र सिंह – जिलाधिकारी और तत्कालीन प्रशासक नगर निगम हरिद्वार (निलंबित)
वरुण चौधरी – तत्कालीन नगर आयुक्त, नगर निगम हरिद्वार (निलंबित)
अजयवीर सिंह- तत्कालीन, उप जिलाधिकारी हरिद्वार (निलंबित)
निकिता बिष्ट – वरिष्ठ वित्त अधिकारी, नगर निगम हरिद्वार (निलंबित)
विक्की – वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक (निलंबित)
राजेश कुमार – रजिस्ट्रार कानूनगो, तहसील हरिद्वार (निलंबित)
कमलदास – मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तहसील हरिद्वार (निलंबित)

पूर्व में हो चुकी कार्रवाई

रविंद्र कुमार दयाल- प्रभारी सहायक नगर आयुक्त (सेवा समाप्त)
आनंद सिंह मिश्रवाण- प्रभारी अधिशासी अभियंता (निलंबित)
लक्ष्मी कांत भट्ट्- कर एवं राजस्व अधीक्षक (निलंबित)
दिनेश चंद्र कांडपाल- अवर अभियंता (निलंबित)
वेदपाल- सम्पत्ति लिपिक (सेवा विस्तार समाप्त)

हमारी सरकार ने पहले ही दिन से स्पष्ट किया है कि लोकसेवा में “पद’ नहीं बल्कि ‘कर्तव्य’ और ‘जवाबदेही’ महत्वपूर्ण हैं। चाहे व्यक्ति कितना भी वरिष्ठ हो, अगर वह जनहित और नियमों की अवहेलना करेगा, तो कार्रवाई निश्चित है। हम उत्तराखंड में भ्रष्टाचार मुक्त नई कार्य संस्कृति विकसित करना चाहते हैं। सभी लोक सेवकों को इसके मानकों पर खरा उतरना होगा।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

अंकिता हत्याकांडः तीनों दोषियों की गिरफ्तारी के बाद एक भी दिन खुले में सांस नहीं ले पाए

अंकिता भंडारी हत्याकांड रैग्यूलर पुलिस के हवाले होने के 24 घंटे के अंदर पुलिस ने 22 सितंबर को ही इस मामले में तीनों आरोपित पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया। तब से तीनों एक भी दिन खुली हवा में सांस नहीं ले पाए। उनकी जमानत लेने की हर कोशिश को सरकारी वकीलों ने नाकाम कर दिया।

अंकिता भंडारी हत्याकांड में उत्तराखंड सरकार ने जिस संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ कदम उठाए हैं, वह एक उदाहरण बनकर सामने आया है। 22 सितंबर 2022 को गिरफ्तार किए जाने के बाद तीनों आरोपी एक भी दिन जमानत पर बाहर नहीं निकल पाए। न्यायिक इतिहास में ऐसे बहुत कम मामले होते हैं, जिसमें आरोपित को एक भी बार जमानत न मिले। आमतौर पर हमारी न्याय प्रणाली, ट्रायल के दौरान एक निश्चित अवधि के बाद, आरोपितों को जमानत देने के पक्ष में रही है। लेकिन इस मामले में ऐसा संभव नहीं हो पाया, अभियोजन ने मजबूत पैरवी से हर बार तीनों की जमानत की कोशिश को नाकाम कर दिया। अगर कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाए जाने से पहले तक तीनों को एक भी बार जमानत नहीं दी तो इससे साफ है कि अभियोजन ने पुलिस जांच के दौरान सामने आए अकाट्य सुबूत कोर्ट के सामने रखे। पुलिस ने चार्जशीट के साथ 100 से अधिक गवाहों के बयान और 500 पन्नों की विस्तारपूर्ण जानकारी कोर्ट के सामने पेश की। इस तरह यह मामला उत्तराखंड की न्यायिक प्रणाली और सरकार की इच्छाशक्ति का मजबूत उदाहरण बन गया है।

अंकिता भंडारी को मिला न्याय, दुष्प्रचार के मुंह पर जड़ा ताला

अंकिता भंडारी के गुनाहगारों को आजीवन कठोर कारावास और जुर्माना की सजा मिलने के साथ ही, इस संवेदनशील प्रकरण में दुष्प्रचार करने वालों को भी करार जवाब मिल गया है। इस प्रकरण में कथित वीआईपी को लेकर हाय तौबा करने वाले किसी भी पक्ष ने कभी भी कोर्ट में संबंधित तथ्य नहीं रखे। इससे यह स्पष्ट होता है कि इन मुद्दों को केवल राजनीतिक लाभ के लिए उछाला गया।

सरकार ने इस मामले में पहले ही दिन से ना सिर्फ निष्पक्ष जांच पर जोर दिया बल्कि ट्रायल के दौरान परिजनों की इच्छा के अनुसार तीन बार सरकारी वकील को बदलने का काम किया। इस घटना के बाद से ही तमाम लोग महज राजनैतिक लाभ के लिए कभी पुलिस जांच पर सवाल उठाते रहे तो कभी कथित वीआईपी को लेकर संदेह का जाल बुनते रहे। हालांकि आरोप लगाने वाले कोर्ट में कथित वीआईपी को लेकर कोई तथ्य नहीं रख पाए। दूसरी तरफ इससे प्रभावित हुए बिना एसआईटी प्रत्यक्ष गवाहों, सुबूतों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर केस को मजबूत बनाती रही, जिस के आधार पर आखिरकार तीनों आरोपितों को आजीवन कठोर कारावास की सजा मिल पाई। अब कोर्ट के फैसले ने इस मामले में किए जा रहे राजनैतिक दुष्प्रचार का भी जवाब दे दिया है। साथ ही सरकार की निष्पक्ष जांच पर मुहर लगाने का काम किया है। इससे पहले ट्रायल के दौरान सुप्रीम कोर्ट तक एसआईटी जांच को सही करार देते हुए, निष्पक्ष जांच जारी रखने पर मुहर लगा चुका है।

अंकिता हत्याकांडः तीन साल से कम समय में तीनों दोषियों को मिली आजीवन कठोर कारावास की सजा

18 सितंबर, 2022 की रात ऋषिकेश के समीप एक रिसॉर्ट में कार्यरत अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। इस मामले में कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को तीनों आरोपितों को कसूरवार ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुना दी है। घटना के पौने तीन साल मे भीतर तीनों को मिली सख्त सजा ने निष्पक्ष पुलिस जांच और सरकारी वकील की मजबूत पैरवी पर भी मुहर लगा दी है।

पुलिस ने 24 घंटे में की थी गिरफ्तारी
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 24 सितंबर को महिला आईपीएस अधिकारी पी रेणुका देवी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की थी। रैग्यूलर पुलिस को जांच मिलने के बाद 24 घंटे के अंदर ही पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार करते हुए, मामले में महत्वूपर्ण सुबूत अपने कब्जे में लेने का काम किया। विशेष जांच दल (ैप्ज्) ने गहराई से जांच करते हुए 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार की। इस चार्जशीट में 100 से अधिक गवाहों के बयान शामिल किए गए। इसी आधार पर अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में मामले की जोरदार पैरवी की, जिसके बाद पौने तीन साल के भीतर ही मामले में सजा का ऐलान संभव हो पाया। सरकार ने न सिर्फ आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज किया, बल्कि गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की।

परिजनों को आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में संवेदनशीलता का परिचय देते हुए, अंकिता भंडारी के परिजनों को ₹25 लाने की आर्थिक सहायता प्रदान की। साथ ही दिवंगत बेटी के पिता और भाई को सरकारी नौकरी देकर परिवार को सहारा प्रदान किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच को माना संतोषजनक
सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा भी सरकार की जांच प्रक्रिया को संतोषजनक माना गया है, जिससे यह साफ होता है कि अंकिता को न्याय दिलाने की दिशा में सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इस तरह बेटियों की सुरक्षा से जुड़े इस पूरे मामले हर मोर्चे पर सरकार की निष्पक्षता और सतर्कता काम आई।

आगे भी मजबूत पैरवी
इधर, सरकार ने साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर आगे भी इस मामले में मजबूत पैरवी की जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि अंकिता को न्याय दिलाना सरकार का संकल्प था, इसीलिए अंकिता के परिजनों को साथ लेकर कोर्ट में मजबूत पैरवी की गई। जिससे तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिल सकी। सरकार जरूरत पड़ने पर आगे भी मजबूत पैरवी करेगी, अंकिता को न्याय दिलाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

साइबर सुरक्षा में उत्तराखंड बना देश का मॉडल, 17 राज्यों में एक साथ कार्रवाई

उत्तराखंड की शांत वादियों से एक तेज़ संदेश पूरे देश में गूंजा है, अपराधी चाहे देश के किसी कोने में छिपा हो, उत्तराखंड पुलिस उसे ढूंढ निकालेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड पुलिस ने एक ऐतिहासिक अभियान चलाकर यह सन्देश न केवल प्रदेश, बल्कि पूरे राष्ट्र को दिया है। ‘ऑपरेशन प्रहार’, साइबर अपराधियों पर करारा प्रहार करने वाला यह अभियान अपने आप में एक मिसाल बन गया है। देश के इतिहास में पहली बार उत्तराखंड पुलिस के निर्देशन में एक साथ 17 राज्यों दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, केरल, गोवा आदि में बड़ी छापेमारी की गई। इस सघन और रणनीतिक कार्रवाई में 290 से अधिक साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।

यह कोई सामान्य पुलिसिया कार्रवाई नहीं थी। यह उस दूरदर्शिता और साहसिक निर्णय का परिणाम है, जिसकी नींव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साइबर हमले की एक बड़ी घटना के बाद रखी थी। कुछ माह पूर्व उत्तराखंड साइबर हमलों का शिकार बना था, तब मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट संदेश दिया था साइबर अपराधी अब सुरक्षित नहीं रहेंगे। उन्होंने पुलिस महकमे को टेक्नोलॉजिकल रूप से सशक्त करने के आदेश दिए, साइबर थानों की पुनर्रचना की और इंटेलिजेंस नेटवर्क को विस्तार दिया।

इसका प्रत्यक्ष परिणाम ‘ऑपरेशन प्रहार’ के रूप में सामने आया, जिसमें न केवल उत्तराखंड बल्कि अन्य राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से यह दिखाया गया कि उत्तराखंड अब केवल पर्यटन और तीर्थाटन का केन्द्र ही नहीं, बल्कि साइबर क्राइम से लड़ने में भी एक मॉडल स्टेट बन चुका है। मुख्यमंत्री धामी का गुड गवर्नेंस मॉडल सिर्फ योजनाओं या घोषणाओं तक सीमित नहीं है, यह उनके हर एक्शन में भी साफ नजर आता है। उनके नेतृत्व में शासन की सक्रियता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी तीनों ही स्तरों पर परिलक्षित होती है। इस सफल कार्रवाई ने जहां उत्तराखंड पुलिस की कार्यकुशलता को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है, वहीं मुख्यमंत्री धामी के मजबूत नेतृत्व और त्वरित निर्णय क्षमता को भी फिर से प्रमाणित किया है।
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नैनीताल में नाबालिग के साथ घटना पर अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये कि राज्य में कानून व्यवस्था का उल्लंघऩ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। नैनीताल में नाबालिक पीड़िता के साथ हुई घटना पर अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये। उन्होंने जिला प्रशासन नैनीताल को निर्देश दिये कि पीड़िता की देखभाल एवं उनके परिवार को पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पीड़िता और उसके परिवार के साथ मजबूती के साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये हैं कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से भ्रामक जानकारियां देने और अफ़वाह फैलाने वालों की तत्काल पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भूमि और राज्य की अस्मिता के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी व्यक्ति या संगठन देवभूमि की एकता को तोड़ने का दुस्साहस करेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा की दृष्टि से पूरी सतर्कता बरती जाए। सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। किरायेदारों के सत्यापन, रेहड़ी-पटरी, वालों, अवैध तरीके से भूमि पर कब्जा करने वालों और जिन लोगों के अवैध तरीके से प्रमाण पत्र बने हैं, उन पर की गई कार्रवाई की समस्त रिपोर्ट जिलाधिकारियों को तीन दिन में प्रस्तुत करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं।

बैठक में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, अपर पुलिस महानिदेशक वी. मुरूगेशन, ए.पी. अंशुमन, अपर सचिव गृह निवेदिता कुकरेती, वर्चुअल माध्यम से आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत, आईजी कुमांऊ रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी नैनीताल वंदना, जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर नितिन भदौरिया, एसएसपी नैनीताल पी.एन.मीणा और एसएसपी ऊधम सिंह नगर मणिकांत मिश्रा मौजूद थे।