बड़ी योजनाओं में पेंडिंग मुद्दों को निस्तारित करने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने सचिवालय में प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (पीएमजी) के तहत ऋषिकेश-कर्णप्रयाग न्यू रेलवे लाइन, देवबंद रुड़की न्यू रेल लाइन विष्णुगाड-तपोवन जल विद्युत परियोजना, विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना एवं टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट के प्रगति की समीक्षा की। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के संबंध में मुख्य सचिव ने रेलवे अधिकारियों एवं जिला प्रशासन को आपसी तालमेल के साथ सभी पेंडिंग मुद्दों को निस्तारित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रेलवे को पेंडिंग कंपनसेशन डिस्बर्समेंट को मामलों को शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव द्वारा टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट हेतु टीएचडीसी को माइनिंग प्लान शीघ्र उपलब्ध कराए जाने के निर्देश देते हुए जिलाधिकारी के साथ संयुक्त निरीक्षण किए जाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना में स्थानीय प्रतिरोध के हल के लिए ज्वाइंट विजिट कर निस्तारित किए जाने के निर्देश दिए। तपोवन विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना के संबंध में मुख्य सचिव ने एनटीपीसी को निर्देश दिए कि आपदा से परियोजना कार्यों में हुई क्षति का आंकलन शीघ्र कराया जाए।
इस अवसर पर सचिव अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार सहित सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारी एवं सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी साधु सिंह को प्रीतम सिंह ने किया सम्मानित

अगस्त क्रांति दिवस के उपलक्ष में कांग्रेस ने तिरंगा यात्रा निकाली। जिसका आयोजन कांग्रेस भवन से घंटाघर, दर्शनलाल चौक होते हुए वापस कांग्रेस भवन तक किया गया। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने यात्रा की अगुआई की। तिरंगा यात्रा में युवा कांग्रेस, एनएसयूआइ, महिला कांग्रेस, सेवादल, महानगर कांग्रेस, पूर्व सैनिक संगठन ने भाग लिया।

’स्वतंत्रता संग्राम सैनानी साधु सिंह बिष्ट को किया सम्‍मानित’
अगस्त क्राति दिवस पर डोईवाला में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने 102 साल के स्वतंत्रता सेनानी साधु सिंह को सम्मानित किया। साधु सिंह को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने साल 1972 में ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था। साधु सिंह ने आजाद हिंद फौज के नायक सुभाष चंद्र बोस के साथ भी काम किया है। बता दें, डोईवाला के बडोवाला स्थित 102 साल के स्वतंत्रता सेनानी साधू सिंह बिष्ट को नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस मौके पर प्रीतम सिंह ने कहा कि 9 अगस्त का दिन ऐतिहासिक दिन है। आज के ही दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन की नींव रखी थी। उनकी वजह से हमारे पुरखों ने आजादी की लड़ाई लड़ी, जिस वजह से आज हम चौन की सांस ले रहे हैं।
इस मौके पर प्रीतम सिंह ने कहा कि अब समय बदल रहा है और लोकतंत्र पर प्रहार हो रहा है। ऐसी ताकतों के खिलाफ लड़ने की लड़ने की आवश्यकता है, जो लोकतंत्र को समाप्त करने का काम कर रहे हैं।

तीरथ सिंह रावत ने वाई श्रेणी की सुरक्षा वापस लेने का किया आग्रह

गढ़वाल सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने उन्हें प्रदान की गई वाई श्रेणी की सुरक्षा वापस लेने का आग्रह किया है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजा है। प्रदेश की भाजपा सरकार में मार्च में हुए पहले नेतृत्व परिवर्तन में गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया था। इसके बाद उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई थी।

राज्य में उपचुनाव के लिए संवैधानिक संकट खड़ा होने के चलते जुलाई में सरकार में फिर नेतृत्व परिवर्तन कर तीरथ की मुख्यमंत्री पद से विदाई कर दी गई थी। अब सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा दी जा रही है। पत्र में तीरथ ने कहा कि है कि देवभूमि उत्तराखंड में इसकी आवश्यकता नहीं है। लिहाजा इसे वापस ले लिया जाए।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे पुरुषोत्तम को नई जिम्मेदारी
सरकार ने तीन आइएएस के दायित्वों में फेरबदल किया है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति खत्म होने के बाद वापस लौटे सचिव वीवीआरसी पुरुषोत्तम को नियोजन, तकनीकी शिक्षा, राजस्व और स्थानिक आयुक्त नई दिल्ली का दायित्व सौंपा गया है। केंद्र में डा रमेश पोखरियाल निशंक के केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनने पर आइएएस वीवीआरसी पुरुषोत्तम प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली गए थे।

लखेड़ा, गौचर और गैरसैण में विशेषज्ञ डाॅक्टरों की मांग को लेकर सीएम से मिले

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय मीडिया टीम के सदस्य सतीश लखेड़ा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंटकर गौचर और गैरसैण (जनपद चमोली) के अस्पतालों में चिकित्सकों की तैनाती के संबंध में मुलाकात की। मुख्यमंत्री धामी ने चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित करने हेतु सचिव स्वास्थ्य को निर्देश जारी किए।

उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गैरसैण एवं उप सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौचर अस्पतालों पर बहुत बड़ी आबादी के उपचार की जिम्मेदारी है उसके अनुरूप अस्पतालों की उपचार क्षमता नहीं है। गौचर अस्पताल में तो मात्र एक चिकित्सक की तैनाती है। गैरसैण और कर्णप्रयाग विकासखंड के दुर्गम क्षेत्रों के नागरिकों के यह निकटतम केंद्र हैं। चिकित्सक न होने से नागरिकों को उपचार के लिए अन्यत्र शहरों में जाना पड़ता है जो कि बहुत खर्चीला और असुविधाजनक है।अस्पतालों के मानकों के अनुसार दोनों स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों की तैनाती की अपेक्षा है।

मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि इन दोनों केंद्रों में शीघ्र ही चिकित्सकों की तैनाती की जायेगी ताकि नगर क्षेत्र के अतिरिक्त आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को बहुत सुविधा होगी विशेषकर गर्भवती महिलाओं, शिशुओं और बुजुर्गों को बड़ी राहत मिलेगी। लखेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी की कार्यशैली और अनुभव उनके कामकाज में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। वह प्रमाणिक रुप से कार्य करने वाले मुख्यमंत्री हैं और प्रदेश के हर क्षेत्र में उनके द्वारा विकास कार्यों की निगरानी और समयबद्धता प्रदेश की तस्वीर बदलेगी।

मुख्यमंत्री ने ड्रोन के माध्यम से केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ड्रोन के माध्यम से श्री केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट, प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजक्ट है। उन्होंने अधिकारियों को कार्यों में और तेजी लाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाय कि श्री केदारनाथ धाम में पुनर्निमाण कार्यों में और तेजी लाने के लिए मानव संसाधन के साथ पर्याप्त उपकरणों की व्यवस्था भी हो।

प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री केदारनाथ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केन्द्र है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में मास्टर प्लान के अनुरूप श्री केदारनाथ को भव्य बनाया जा रहा है।

समयबद्ध, गुणवत्तायुक्त और प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप कार्य पूरा करने के लिए निर्देश
प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप भव्य केदारपुरी के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री धामी कृतसंकल्प हैं। वे लगातार प्रोजेक्ट की मानिटरिंग कर रहे हैं। खराब मौसम के कारण केदारनाथ न जाने पर उन्होंने ड्रोन के माध्यम से केदारनाथ पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट का निरीक्षण और समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने प्रथम चरण में अवशेष आदिगुरू शंकराचार्य की समाधि स्थल एवं मंदाकिनी नदी पर बन रहे ब्रिज के निर्माण कार्य को जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि आने वाले दो-तीन माह में श्री केदारनाथ में कार्य करने के लिए अच्छा समय है, इस दौरान तेजी से कार्य किये जायेंगे।

द्वितीय चरण के कामों में तेजी लाने के मुख्यमंत्री ने दिये निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि श्री केदारनाथ में चल रहे द्वितीय चरण के जो कार्य स्वीकृत हो चुके हैं, उनमें भी तेजी लाई जाय। सरस्वती नदी पर घाट एवं आस्था पथ के निर्माण के कार्य जल्द पूर्ण किये जाय।

प्रथम चरण के कार्य लगभग पूर्ण
प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जानकारी दी गई की श्री केदारनाथ के पुनर्निर्माण कार्यों के तहत प्रथम चरण के कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं। शंकराचार्य सामधि एवं ब्रिज का कार्य भी जल्द पूर्ण हो जायेगा। द्वितीय चरण के कार्यों में 116 करोड़ रूपये के कार्यों की स्वीकृत हो चुकी है। 08 कार्यों पर कार्य शुरू हो गया है। द्वितीय चरण में संगम घाट का नव निर्माण, आस्था पथ में रेन शेटलर, वाटर एटीएम, कमांड एण्ड कंट्रोल रूम, हॉस्पिटल बिल्डिंग एवं अन्य कार्य किये जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री स्वयं केदारनाथ यात्रा के अनेक बार साथ-साथ ड्रोन के माध्यम से कर चुके हैं विकास कार्यों की समीक्षा
प्रधानमंत्री केदारनाथ आपदा के समय से केदार पुरी के पुनर्निर्माण के लिए चिंतित हैं। प्रधानमंत्री स्वयं केदारनाथ यात्रा के अनेक बार साथ-साथ ड्रोन के माध्यम से विकास कार्यों की समीक्षा कर चुके हैं। 2013 में केदारनाथ आपदा के समय मुख्यमंत्री गुजरात रहते हुए उत्तराखंड सरकार प्रस्ताव दिया था कि केदारनाथ के पुनर्निर्माण में सहयोग करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री बाबा केदार से आध्यात्मिक रूप से जुड़े हैं। स्वयं ध्यान गुफा में बैठकर प्रधानमंत्री जी ने बाबा केदार के प्रति अपनी आस्था सार्वजनिक रूप से प्रकट की।
इस अवसर पर मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु, अपर सचिव पर्यटन युगल किशोर पंत एवं वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग मनुज गोयल उपस्थित थे।

मनमानी का केन्द्र बना उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में हुईं भर्तियों की शासन ने जांच बैठा दी है। शासन ने कुलसचिव से बिंदुवार सभी भर्तियों पर रिपोर्ट तलब की है। अपर सचिव राजेंद्र सिंह की ओर से कुलसचिव को भेजे गए आदेश में पिछले वर्षों में हुईं भर्तियों में की गई अनियमितता की जांच रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने विवि में पीआरडी के माध्यम से की जा रहीं भर्तियों और पिछले दो माह में पीआरडी से हुईं भर्तियों की रिपोर्ट भी मांगी है।

इसके अलावा नर्सिंग भर्ती, प्रोफेसर पदों पर सीधी भर्ती, विवि द्वारा अपने स्तर से शासन द्वारा नियुक्त कुलसचिव को हटाते हुए नए कुलसचिव की नियुक्ति, लेखा अधिकारी, सहायक लेखा अधिकारी के पद प्रमोशन के पद एवं वित्त विभाग के पद विज्ञापन जारी करने की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।

शासन ने योग अनुदेशकों के पदों पर जारी रोस्टर को बदलने, माइक्रोबायोलॉजिस्ट के पदों पर भर्ती में नियमों का अनुपालन न करने, बायोमेडिकल संकाय व संस्कृत में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं पंचकर्म सहायक के पदों पर विज्ञप्ति प्रकाशित करने और फिर रद्द करने, विवि में पद न होते हुए भी संस्कृत शिक्षकों को प्रमोशन एवं एसीपी का भुगतान करने, बिना शासन की अनुमति बार-बार विवि द्वारा विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकालने और रोक लगाने, विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विवि द्वारा गठित समितियों के गठन की विस्तृत सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। विवि में पिछले दो माह में 60 से अधिक युवाओं पीआरडी जवानों को भर्ती कर दिया गया है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।

मनमानी का अड्डा बना आयुर्वेद विवि
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय मनमानी का अड्डा बन गया है। शासन से जिस अधिकारी को कुलसचिव बनाकर भेजा जाता है, उसे विवि प्रशासन की ओर से खुद ही हटाकर नए कुलसचिव की नियुक्ति की जाती है। भर्तियों में न रोस्टर का कुछ अता-पता है और न ही शासन का कोई संज्ञान। आखिरकार अब जांच के निशाने पर अब कई अधिकारी आ गए हैं।

आयुर्वेद विवि में वर्ष 2017 से लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही है। पूर्व कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों के बाद से भी यहां मनमानी का सिलसिला जारी है। शासन ने 2017 से अब तक की नियुक्तियों को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। फिर चाहे प्रोफेसर की भर्ती हो या नर्सिंग स्टाफ की। हद तो तब है कि जो पद विवि में हैं ही नहीं, उन पदों पर प्रमोशन और एसीपी का भुगतान किया जा रहा है।
नियमानुसार भर्तियों के लिए शासन की अनुमति जरूरी होती है लेकिन विवि के अधिकारी किसी की अनुमति की जरूरत ही महसूस नहीं कर रहे हैं। हालात यह हैं कि खुद ही विज्ञप्ति जारी की जाती है और खुद ही उसे रद्द कर दिया जाता है। युवा भटक रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

पीआरडी से भर्तियों की बरसात
आयुर्वेद विवि में ताजा मामला पीआरडी के माध्यम से होने वाली भर्तियों का है। यहां पिछले दो माह में ही बिना शासन की अनुमति, बिना नियमों का पालन किए 60 से अधिक नौजवानों को पीआरडी के माध्यम से भर्ती कर दिया गया है। सवाल उठ रहे हैं कि विवि के अधिकारी किसी शह पर यह भर्तियां कर रहे हैं।

मनमानी का आलम यह है कि एक अधिकारी को बुलाया, कार्यमुक्त किया फिर रख लिया गया। इसी तरह आयुर्वेद विवि में आयुष विभाग से एक अधिकारी को पहले बुलाया गया, फिर कार्यमुक्त किया गया और फिर वहीं रख लिया गया। इस पूरे प्रकरण में शासन को संज्ञान में ही नहीं लिया गया है। ऐसे तमाम प्रकरण हैं, जिसमें मनमानी खुलकर सामने आ रही है। 

15 विषयों में प्री पीएचडी के लिए 70 सीटें निर्धारित

श्रीदेव सुमन विवि इसी सत्र से पहली बार प्री पीएचडी शुरू करने जा रहा है। कोरोना संक्रमण की स्थिति सामान्य होते ही अक्तूबर-नवंबर तक प्रवेश परीक्षा आयोजित होगी। 15 विषयों में प्री पीएचडी के लिए 70 सीटें निर्धारित की गई हैं। प्री पीएचडी के छह माह का पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए विवि प्रशासन ने सभी 15 विषयों के लिए विशेषज्ञ शिक्षकों की कमेटियों का गठन कर लिया है। पहले बैच में सिर्फ विवि से संबद्ध राजकीय महाविद्यालयों में ही प्री पीएचडी होगी।
प्री पीएचडी में दाखिले के लिए विवि प्रशासन ने पहले जुलाई में प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की तैयारी की थी, लेकिन कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए विवि ने सेंट्रल हिमालयन एनवायरमेंट एसोसिएशन से 2019 में एमओयू भी कर लिया है, लेकिन विवि से संबद्ध महाविद्यालयों से सीटों और विषयों की संख्या की रिपोर्ट मिलने में हुए विलंब के चलते विवि सीटों की संख्या का सही निर्धारण नहीं कर पाया था। 
विवि के प्रभारी कुलसचिव डा. एमएस रावत ने बताया कि प्री पीएचडी के लिए 15 विषयों में 70 सीटें निर्धारित कर ली गई हैं। प्री पीएचडी में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेस टेस्ट के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए सभी विषयों में कमेटियों का गठन कर लिया गया है। जल्द ही कमेटियों की बैठक आयोजित कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिसर्च डिग्री कमेटी की रिपोर्ट मिलते ही प्री पीएचडी प्रवेश परीक्षा की तिथि घोषित की जाएगी। स्थानीय विषयों पर ही विवि का शोध कराने पर विशेष फोकस रहेगा। तभी विवि के शोध कार्यों का लाभ स्थानीय समुदाय को मिल सकता है।

इन विषयों में होगी प्री पीएचडी
हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, सैन्य विज्ञान, कामॅर्स, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान, भू-गर्भविज्ञान, गणित।

चार स्कूलों की लापरवाही छात्रों पर पड़ी भारी, रिजल्ट रोका गया

लंबे इंतजार के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं का रिजल्ट जारी किया। लेकिन देहरादून रीजन के चार स्कूलों को बोर्ड रिजल्ट के लिए अभी भी इंतजार करना होगा। दरअसल, सीबीएसई बोर्ड के पोर्टल पर गलत जानकारी अपलोड करने के चलते दून रीजन के चार स्कूलों का रिजल्ट रोक दिया गया है। 
कोरोनाकाल में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बार बोर्ड परिक्षाओं को रद्द किया गया था। जिसके बाद बोर्ड ने छात्रों का रिजल्ट पिछली कक्षाओं के आधार पर तैयार किया है्, लेकिन बोर्ड के पोर्टल पर छात्रों से जुड़ी जानकारी जैसे रोल नंबर, नाम, जन्म तिथि, जिला या राष्ट्रीय स्तर का डाटा या विषयवार नंबर गलत भरने पर बोर्ड की ओर से महाश्री विद्या मंदिर रामपुर, सेंट एजीएम स्कूल सहारनपुर, हैप्पी होम कोटद्वार और एस पब्लिक स्कूल रुड़की का रिजल्ट जारी नहीं किया गया।

छात्रों का रिजल्ट जारी न होने से परेशान स्कूल प्रबंधकों ने सीबीएसई के कार्यालय से संपर्क किया तो उन्हें बोर्ड की ओर से बताया गया कि आपकी ओर से जानकारी गलत देने के चलते छात्रों का रिजल्ट रोका गया है। बोर्ड की ओर से इन सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि पोर्टल पर सही डाटा उपलब्ध कराया जाए। जिसके बाद 10वीं का रिजल्ट जारी किया जाएगा। 

वहीं, सीबीएसई के क्षेत्रीय अधिकारी रणबीर सिंह ने बताया कि छोटी सी गलती को भी ऑनलाइन पोर्टल पर पकड़ लिया जाता है। ऐसे में छात्रों के हितों को देखते हुए ही रीजन के चार स्कूलों का रिजल्ट को रोका गया है। इस संबंध में छूटे हुए स्कूलों को सूचित कर दिया गया है। सही डाटा मिलने के बाद स्कूल का रिजल्ट सप्ताह भर में जारी किया जाएगा। 

योगनगरी में कांग्रेस के दिग्गज खोजेंगे जीत की राह, विधानसभा चुनाव को लेकर तय होगा एजेंडा

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के तीन दिवसीय विचार मंथन शिविर का शुभारंभ ऋषिकेश में हुआ। जिसमें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कांग्रेस कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ ही ब्लॉक व जिले के पदाधिकारियों से कांग्रेस की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी ली।

ऋषिकेश में उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विचार मंथन शिविर के प्रथम दिवस में भाग लेने पहुँचे नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह का कांग्रेस पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा सभी के असीम स्नेह से मैं अभिभूत हूं और सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। पहले दिन पार्टी के पदाधिकारियों से मुलाकात की और उनसे विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

लोकसभा चुनाव की दिशा भी तय करेगा 2022 का विधानसभा चुनाव

प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए पदाधिकारियों को अभी से जुटने के निर्देश दिए। गोदियाल ने पदाधिकारियों को जल्द वार्ड ईकाइयों को गठित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का विधानसभा चुनाव 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की दिशा भी तय करेगा। कांग्रेस हाईकमान की ओर से प्रदेश में किए गए संगठनात्मक बदलाव का असर उत्तराखंड के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नजर आना चाहिए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के दौरान प्रदेश में विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गया है कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सरकार में मुख्यमंत्री बदले जाने के अलावा कोई भी कार्य नहीं किया जा रहा है जिसे लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर राज्य की जनता को जागरूक किए जाने की आवश्यकता है।

योगनगरी ऋषिकेश में कांग्रेस के दिग्गज विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत का रोड मैप तैयार करेंगे। कांग्रेस के विचार मंथन शिविर में पार्टी के घोषणापत्र, जनता से जुड़े अहम मुद्दे, नाकामियों पर भाजपा सरकार को घेरने, जनसंपर्क अभियान और चुनावी प्रचार जैसे विषयों पर मंथन होगा। कांग्रेस विचार मंथन शिविर के साथ राज्य में चुनावी बिगुल फूंकने जा रही है। नेतृत्व परिवर्तन, आरटीपीसीआर जांच घोटाले और कोविड की अधूरी तैयारियों को लेकर कांग्रेस पहले ही सत्तारूढ़ दल भाजपा को घेरने का पूरा प्रयास कर रही है। ये कांग्रेस को भी पता है कि केवल सरकार की नाकामियों को चुनावी मुद्दा नहीं बनाया जा सकता है। इसलिए विचार मंथन शिविर में पार्टी के घोषणापत्र तैयार करने के लिए विभिन्न इकाइयों और कमेटियों के पदाधिकारियों से मिलने वाले सुझावों को तवज्जो दिया जाएगा।

आम जनता की नब्ज टोहने के लिए बूथ स्तर पर जनसंपर्क अभियान और नुक्कड़ बैठकों का रोस्टर तैयार करने को लेकर भी चर्चा होगी। वहीं चुनाव प्रचार की पूरी रणनीति भी शिविर में तय होगी। सबसे अहम शिविर में कांग्रेस की विभिन्न इकाइयों के पदाधिकारियों को कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का गुर बताए जाएंगे।

कांग्रेस के तीन दिवसीय मंथन शिविर के दौरान प्रत्येक दिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ तीन सत्रों में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर वार्ड स्तर तक के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक के प्रथम सत्र में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेपा प्रतिपक्ष अध्यक्ष प्रीतम सिंह ,राजेश धर्माणि, दीपिका पांडे, किशोर उपाध्याय प्रदीप टम्टा, काजी निजामुद्दीन, प्रोफेसर जीतराम भुवन चंद्र कापड़ी, तिलक राज बेहड़ ,रणजीत रावत, करण मेहरा, प्रकाश जोशी, नवप्भात,राजेंद्र भंडारी मयूख मेहर, विजय सारस्वत नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।

नई रोड धंसी, विस अध्यक्ष का चढ़ा पारा, मौके पर बुलाकर लगाई लताड़

एम्स रोड, ऋषिकेश में सामान से भरे ट्रक के रोड में धँस जाने की सूचना मिलते ही स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता विपुल सैनी को दूरभाष पर एम्स रोड में डामरीकरण में हुई अनियमिता के लिए खूब फटकार लगायी और कहा कि विभाग की इस घोर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देशित करते हुए कहा है कि शीघ्र एम्स रोड का निरीक्षण कर खामियों का पता लगाया जाए और जानकारी दी जाए ताकि दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।
निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता उपेंद्र गोयल को मौके पर बुलाया गया और स्पीकर ने ट्रक फंसने की वजह पूछी। उपेंद्र गोयल ने कहा है कि सड़क के नीचे पानी की पाइपलाइन की वजह से यह घटना हुई है जिस पर स्पीकर ने कहा कि मोटर मार्ग निर्माण से पूर्व तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए थी ताकि इस प्रकार की घटना ना होती। इस दौरान स्पीकर ने सड़क मार्ग निरीक्षण करते हुए दोनों तरफ पानी से भरे हुए गड्ढों पर भी नाराजगी व्यक्त की।
ज्ञात हो कि नवंबर माह मे एम्स रोड के डामरीकरण का कार्य पूर्ण हुआ था। उस दौरान निर्माणाधीन कार्य का विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बीच-बीच में निरीक्षण भी किया गया और साथ ही विभाग के अधिकारियों को कार्य में गुणवत्ता के सख्त निर्देश दिए थे। मौके पर लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता उपेंद्र गोयल सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह नेगी आदि उपस्थित थे।