एम्स का गड़बड़झालाः ऑटोमेटेड रोड स्वीपिंग मशीन की खरीद और केमिस्ट शॉप खोलने के मामले में सीबीआई ने दर्ज कराई दो एफआईआर

ऋषिकेश एम्स में खरीददारी घोटाले पर सीबीआई के एक्शन से हड़कंप मच गया है। सीबीआई ने आज को एम्स में ताबड़तोड़ छापेमारी की और फिर दो मामलों में एफआईआर दर्ज कर दी। इन मामलों में 11 अधिकारियों/डॉक्टरों और फर्मों के खिलाफ अलग-अलग आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस घोटाले के मामले में आरोपियों के 24 अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी चल रही है।

जिन दो मामलों में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है उनमें ऑटोमेटेड रोड स्वीपिंग मशीन की खरीद और एम्स परिसर में केमिस्ट शॉप खोलने के टेंडर के मामले हैं। 2 फरवरी से 7 फरवरी के बीच एम्स में सीबीआई की छापेमारी में कई अनियमितताएं सामने आई थी। जिन पर एक्शन लिया गया है। इन मामलों में धारा 120बी-, धारा 420 के तहत 11 अफसरों, डॉक्टरों व फर्मों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं। सीबीआई की जांच में सामने आया है कि एम्स में उपकरणों की खऱीद में भारी धांधली की गई। बिडिंग प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां की गई ।

दोगुनी कीमत पर खरीदी खराब मशीन

सीबीआई की जांच के मुताबिक एम्स में ऑटोमेटेड रोड स्वीपिंग मशीन की खरीद के लिए डर निकाले गए। इसमें यूरेका फोर्ब्स जैसी कंपनी ने भी हिस्सा लिया। लेकिन तकनीकी खामियां बताते हुए यूरेका को टेंडरिंग से बाहर कर दिया गया। जबकि प्रो मेडिक डिवाइसेस नाम की कंपनी को मशीन खरीद की टेंडरिंग में वॉक ओवर दिया गया। जिस मशीन की कीमत यूरेका ने महज 1 करोड़ बताई थी, एम्स ने उस मशीन को प्रो मेडक कंपनी से दो करोड़ की कीमत पर खरीदा। यही नहीं जो मशीन खरीदी गई वो ठीक से काम भी नही कर पाई। औऱ 124 घंटे चलने के बाद इसकी मेंटिनेंस पर ही करीब साढ़े चार लाख रुपए खर्च किए गए। दावों के बिल्कुल उलट इस मशीन की जांच में इसमें जीपीएस इंस्टॉल भी नहीं था। जांच में ये बात भी निकलकर सामने आई कि इस कंपनी ने एम्स को 2018 में मानव कंकाल उपलब्ध कराए, जिसके लिए तीन महीने में करीब 3 करोड़ वसूले।

कपड़े की फर्म को केमिस्ट शॉप का ठेका

सीबीआई की दूसरी एफआईआर में एम्स में गड़बड़ियों की पोल खुली है। यह मामला एम्स के अंदर केमिस्ट शॉप के संचालन का है। इसके लिए करीब 7 फर्मों ने आवेदन किया। लेकिन इसमें से अनुभव रखने वाली 4 फर्मों को यह कहकर टेंडर से बाहर कर दिया कि उनके पैन कार्ड में इशू है। इसके बाद त्रिवेणीसेवा फार्मेसी नाम की कंपनी कोमेडकल शॉप का टेंडर मिल गया। जांच में यह निकला कि इस क्षेत्र की अनुभवी कंपनी वेंकटेश फार्मा ने केमिस्ट शॉप के लिए करीब 2.5 करोड़ की बिड लगाई थी। लेकिन उसको दरकिनार करके त्रिवेणी फार्मा को महज 50 लाख 40 हजार की बिड पर ठेका मिल गया। सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि त्रिवेणी सेवा फार्मेसी को केमिस्ट क कोई अनुभव नहीं था। यह कंपनी कपड़े बेचने का कारोबार करती थी। लेकिन टेंडर प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों ने भारी धांधली करते हुए इस कंपनी को टेंडर दिला दिया।

भारत सरकार ने राज्य के दो प्रमुख अस्पतालों की सेवाओं को किया प्रमाणीकृत

भारत सरकार द्वारा उत्तराखण्ड के दो प्रमुख अस्पतालों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्रमाणीकृत (Cetrification) किया गया है। स्वास्थ्य सचिव डा० पंकज कुमार पाण्डेय ने बताया कि एस०पी०एस चिकित्सालय ऋषिकेश तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रायपुर में प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं का भारत सरकार की टीम द्वारा आंकलन पश्चात इन दोनो अस्पतालों की विशिष्ट सेवाओं को प्रमाणीकृत किया गया है।

ज्ञातव्य है कि सरकारी अस्पतालों में खराब स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत Quality Assurance कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकारी अस्पतालों की सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि समान्य जनमानस का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास हो सके और उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए अस्पताल प्रतियोगिता की भावना के साथ कार्य कर सकें।

Quality Assurance कार्यक्रम के माध्यम से अस्पताल द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न सुविधाओं का मूल्यांकन स्वय अस्पताल के स्टॉफ, जनपद एवं राज्य की टीम द्वारा किया जाता है। मूल्यकान उपरान्त सुविधाओं की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की कमी के होने पर उसमे तुरन्त सुधार कर सुविधाओं में गुणात्मक सुधार लाने की पहल की जाती है।

स्वास्थ्य सचिव उत्तराखण्ड को भारत सरकार द्वारा प्रेषित पत्र में उल्लेख किया गया है कि एस0पी0एस0 चिकित्सालय ऋषिकेश में संचालित 6 विभागों द्वारा गुणवत्ता के सभी मानकों को पूर्ण किया गया है जिसके क्रम में इन विभागों को 90% स्कोर के साथ NQAS Certification (National Quality Assurance Standards) किया गया है।

इसी क्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रायुपर तथा एस०पी०एस० चिकित्सालय ऋषिकेश के लेबर रूम की सुविधाओं को LaQshya Certification प्रदान किया गया है। LaQshya Certification के तहत एस०पी०एस० चिकित्सालय ऋषिकेश में संचालित प्रसूति विभाग की ओ0टी0 (Maternity OT) को भी गुणवत्ता के लगभग सभी मानक पूर्ण करने पर LaQshya Certification निर्धारित शर्तों के अन्तर्गत दिया गया है।

राज्य की दो प्रमुख चिकित्सा ईकाईयों को भारत सरकार द्वारा NQAS & LaQshya Certification दिए जाने के लिए स्वास्थ्य सचिव डा० पंकज कुमार पाण्डेय ने संबंधित अस्पतालों के चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टॉफ तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की स्टेट टीम को बधाई दी है।

एम्स के प्रो. संतोष कुमार और आईआईटी दिल्ली ने तैयार की ‘‘कोरोना से बचाव एक सजग पहल’’ पुस्तक, हुआ लोकार्पण

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार और उनकी टीम द्वारा उन्नत भारत अभियान, व आई.आई.टी. दिल्ली के तत्वावधान में तैयार की गई ‘कोरोना से बचाव एक सजग पहल’ नामक पुस्तक का विधिवत लोकार्पण किया गया। आयोजित कार्यक्रम में अभियान के राष्ट्रीय संयोजक मुख्य अतिथि प्रो. वीरेंद्र के. विजय व विशिष्ट अतिथि आर.सी.आई. समन्वयक आई.आई.टी. रुड़की प्रो.आशीष पाण्डेय,एम्स के संकायाध्यक्ष अकादमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता व सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो.वर्तिका सक्सेना व पुस्तक के लेखक डा.संतोष कुमार ने संयुक्तरूप से विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर उन्नत भारत अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. वी.के. विजय ने प्रकाशित पुस्तक की सराहना की और इसे वृहद जनउपयोगी दस्तावेज बताया। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक कोरोना से लड़ने के लिए मील का पत्थर साबित होगी और देशभर में अधिकांश लोग व शिक्षण संस्थान, ग्रामीण परिवेश में रहने वाले लोग जिन्हें कुछ अनुभव या सुझाव, कोविड के बारे में जानकारी व कोरोना ग्रसित होने की स्थिति में क्या करें,किस तरह से अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें आदि समग्र जानकारियां इस पुस्तक के माध्यम से मिल सकेगी।
आई.आई.टी. रुड़की के आरसीआई समन्वयक प्रो.आशीष पांडेय ने बताया कि उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिसमें शिक्षा, जल, कृषि और स्वास्थ्य में सहभागिता से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने कोरोना काल में बेहतर चिकित्सा सेवाएं देने के लिए पुस्तक के लेखक डा. संतोष कुमार की प्रशंसा की। बताया कि इसी कड़ी में आज उनकी यह पुस्तक जनसामान्य को समर्पित की जा रही है,जिससे लोग कोरोना वायरस से जुड़ी विस्तृत जानकारियां प्राप्त कर सकें।
एम्स के सीएफएम विभागाध्यक्ष डॉ. वर्तिका सक्सेना ने बताया कि इस पुस्तक के लेखन की डॉ. संतोष कुमार की महत्वपूर्ण पहल है, इस पुनीत कार्य में विषयवस्तु, लेखन, प्रकाशन आदि मामलों में उन्होंने अहम योगदान दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि दूरदराज क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों में बसे लोगों तक इस पुस्तक की जानकारी पहुंचेगी और यह कोरोना जनजागरुकता के लिए महत्वपूर्ण कार्य होगा, जिससे कोविड 19 के नए-नए वैरिएंट से लोगों को स्वयं के बचाव में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि पुस्तक में कोविड के नए वैरिएंटों से बचाव से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी समाहित हैं। जिसमें मानसिक स्थिति से उबरने आदि सभी अहम बिंदु दिए गए हैं।
बताया कि पुस्तक की खासियत यह है कि इसके लेखक व एम्स के सह आचार्य डॉ. संतोष कुमार ने इसे सामान्य हिंदी भाषा में तैयार किया है, जिससे सभी लोग इसका लाभ उठा सकें। साथ ही इसमें तीसरी लहर का मुकाबला करने के लिए स्वयं की तैयारियों के बाबत भी अहम जानकारियां दी गई हैं। लोगों में महामारी को लेकर उत्पन्न भ्रांतियां व भय के वातावरण को दूर करने की कोशिश की गई है। लेखक डा. संतोष कुमार ने बताया कि “कोरोना एक सजग पहल” पुस्तक के प्रकाशन का मुख्य उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को कोविड की संपूर्ण जानकारी मुहैया कराना है जिससे कि कठिन समय पर कोई भी व्यक्ति बीमारी को लेकर अनावश्यकरूप से परेशान नहीं हो। बताया कि पुस्तक में कोरोना से बचाव के उपाय, उसके इलाज को लेकर सरल एवं व्यवहारिक उपायों का वर्णन किया गया है, जिससे कि किसी भी व्यक्ति के कोविड पॉजिटिव होने की स्थिति में उसे क्या करना चाहिए, कौन सी मेडिसिन का उपयोग नहीं करना चाहिए, कौन-कौन सी महत्वपूर्ण जांच करानी चाहिए, जिससे कि कठिन समय में व्यक्ति सूझबूझ के साथ काम ले सके व पैनिक होने से बच सके। साथ ही पुस्तक में कोविड के बचाव व उपचार के अलावा योग एवं मेडिटेशन के वैज्ञानिक तथ्यों को भी प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक के आकर्षक बिंदु इस प्रकार हैं-
ऽ कोविड पॉजिटिव होने पर क्या करें ?
ऽ कोविड-19 होने से कैसे बचें ?
ऽ पोस्ट कोविड समस्याओं का समाधान में योग एवं व्यायाम की भूमिका।
ऽ पोस्ट कोविड लक्षण-व्यवहारिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का समाधान।
ऽ कोविड-19 और बच्चे।
ऽ कोविड-19 से शरीर के अंगों पर पड़ने वाले प्रभाव।
ऽ कोरोना की तीसरी लहर से बचने की तैयारी।

18 से 23 अप्रैल तक लगेंगे वृहद स्वास्थ्य मेले-धन सिंह रावत

राज्य के जिला मुख्यालयों, नगर निकायों एवं ब्लॉकों में आगामी 18 अप्रैल से 23 अप्रैल तक वृहद स्वास्थ्य मेलों का आयोजन किया जायेगा। सूबे में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं सुलभ बनाने के लिए छह माह के भीतर जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउण्ड, एक्स-रे मशीन, पैथौलॉजी जांचें एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये गये, जबकि दूसरे चरण में उप जिला अस्पतालों एवं ब्लॉक स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की व्यवस्था सुधारने को कहा गया है। इसी क्रम में 16 एवं 17 अप्रैल को राज्यभर के हेल्थ एवं वेलनेस सेन्टरों में योग एवं टेली कन्सल्टेशन कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
सूबे के सहकारिता, विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय के सभागार में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक ली। डॉ0 रावत ने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को चाकचौबंद करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि आगामी 18 अप्रैल से 23 अप्रैल तक प्रदेश के सभी 95 ब्लॉकों सहित जिला मुख्यालयों एवं नगर निकायों में वृहद स्तर पर स्वास्थ्य मेलों का आयोजन किया जायेगा। जिसमें सांसद, स्थानीय विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, मेयर, नगर निकायों के अध्यक्ष एवं ब्लॉक प्रमुख अपनी सुविधानुसार बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग करेंगे। डॉ0 रावत ने कहा कि स्वास्थ्य मेलों में स्थानीय लोगों का चिकित्सकीय परीक्षण एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ टेली कान्सल्टेशन, आयुष्मान भारत डिजीटल हेल्थ मिशन के तहत यूनिक हेल्थ आईडी उपलब्ध कराये जाने के साथ ही आयुष्मान कार्ड भी बनाये जायेंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य मेलों में रक्तदान कार्यक्रम, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता सहित केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी आम लोगों को दी जायेगी। इसी क्रम में 16 एवं 17 अप्रैल को राज्यभर के हेल्थ एवं वेलनेस सेन्टरों में योग एवं टेली कन्सल्टेशन कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। विभागीय मंत्री ने कहा कि जिला एवं ब्लॉक स्तर के अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से और अधिक सुदृढ़ एवं सुलभ बनाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिए गये हैं। जिसके तहत छह माह के भीतर जिला अस्पतालों एवं अगामी एक वर्ष के भीतर उप जिला चिकित्सालयों तथा ब्लॉक स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सूरत बदल दी जाएगी। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को प्रथम चरण के अंतर्गत जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउण्ड, एक्स-रे मशीन, पौथालॉजी जांच की व्यवस्था करने तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों गाइकनोलॉजिस्ट, चाइल्ड स्पेशिलिस्ट, ऑर्थाेपैडिक सर्जन, एनेस्थीसिया, डेनटिस्ट आदि की तैनाती के निर्देश दिये गये हैं, जबकि दूसरे चरण में एक वर्ष के भीतर उप जिला अस्पतालों एवं ब्लॉक स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में पौथोलॉजी जांच, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता के साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जो चिकित्सक लम्बे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे हैं उनके विरूद्ध एक सप्ताह के भीतर कार्यवाही की जाय।
बैठक में सचिव स्वास्थ्य डॉ. पंकज पाण्डेय, मिशन निदेशक एनएचएम सोनिका, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा आशीष श्रीवास्तव, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. तृप्ति बहुगुणा, निदेशक चिकित्सा डॉ. शैलजा भट्ट, डॉ. विनीता शाह, डॉ. सरोज नैथानी, डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, वित्त नियंत्रक खजान पाण्डे, उप निदेशक, सहायक निदेशक, एनएचएम के प्रभारी अधिकारी, आईईसी अधिकारी जेसी पाण्डेय सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

मिशन स्माईल अभियान के तहत एम्स ऋषिकेश में 60 बच्चों के निशुल्क होंगे कटे होंठ व तालू के ऑपरेशन

एम्स ऋषिकेश में मिशन स्माइल अभियान के तहत कटे होंठ और तालू के निशुल्क आपरेशन किए जाएंगे। संस्थान में बुधवार से चार दिनों तक लगातार ऑपरेशन होंगे। जिनमें मिशन के तहत्र पंजीकृत 60 बच्चों और युवाओं की सर्जरी की जाएगी।

एम्स ऋषिकेश के प्लास्टिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल मागो व चिकित्सक डॉ. देवरति चटोपाध्याय ने बताया कि एम्स संस्थान में 2016 से अब तक 320 मरीजों की सफल सर्जरी की जा चुकी है। यह सभी मरीज बेहतर तरीके से अपनी निजी जिन्दगी जी रहे हैं। बताया कि मिशन स्माइल एक 80 जी- और एफसीआरए पंजीकृत मेडिकल चौरिटेबल ट्रस्ट है, जो कि कटे होंठ, कटे तालू और चेहरे की अन्य विकृतियों के साथ पैदा हुए बच्चों के जीवन को खुशहाल बनाने के लिए निशुल्क सर्जरी की सेवा प्रदान करता है। संस्था इस मुहिम को लेकर समर्पित होकर कार्य कर रही है। संस्था 2002 से मिशन स्माइल के तहत अब तक 61,000 से अधिक कटे होंठ व कटे तालू ग्रस्त रोगियों को मुफ्त चिकित्सा प्रदान कर चुकी है। इस संस्था से एम्स ऋषिकेश वर्ष 2016 से जुड़कर इस तरह के ग्रसित मरीजों की सेवा में जुटा हुआ है। मिशन स्माइल ने इस मिशन के अंतर्गत भारत में अब तक 110 से अधिक चिकित्सा मिशन संचालित किए हैं। एम्स ऋषिकेश में 6 अप्रैल से 9 अप्रैल-2022 तक भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड की सीएसआर पहल के तहत मिशन स्माइल के तहत पंजीकृत 60 बच्चों, युवाओं व अन्य लोगों के कटे होंठ, कटे तालू की मुफ्त सर्जरी की जाएगी। इनमें उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश आदि प्रांतों के मरीज शामिल हैं। इस चिकित्सा मिशन में प्लास्टिक चिकित्सा विभाग, एनेस्थिसियोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, डेंटिस्ट्री, स्पीच थैरपी और नर्सिंग स्टाफ मिलकर एम्स ऋषिकेश में एक टीम की तरह कार्य करेगी।

सीएम ने डा. निधि उनियाल का ट्रांसफर रोकने का दिया आदेश

दून मेडिकल कालेज कॉलेज की वरिष्ठ महिला चिकित्सक डा. निधि उनियाल के मामले पर मुख्यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी ने संज्ञान लिया है। सीएम धामी ने (CM Orders to cancel resignation of Dr Nidhi Uniyal after her scuffle with secretary’s wife) तत्‍काल प्रभाव से डा. निधि उनियाल का ट्रांसफर रोकने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने इस मामले में कमेटी बनाकर जांच के निर्देश दिए हैं।

दरअसल डॉ. निधि को गुरुवार को दिन में स्वास्थ्य सचिव की पत्नी की जांच के लिए उनके घर बुलाया गया था। डॉ निधि गाड़ी में बीपी इंस्ट्रूमेंट भूल गई थी, इसी बात को लेकर आईएएस की पत्नी डॉक्टर पर भड़क गई थी। डॉ निधि पर सचिव की पत्नी से माफी मांगने का दबाव बनाया गया लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इसके एक घंटे बाद ही उनका अल्मोड़ा ट्रांसफर कर दिया जाता है। पूरे घटनाक्रम से क्षुब्ध होकर डॉ निधि ने इस्तीफा दे दिया था। सोशल मीडिया पर डॉ निधि को न्याय दिलाने की आवाज उठने लगी है।

मामले का संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्यमंत्री डॉ धन सिंह रावत ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और प्रकरण के बारे में अवगत कराया। मुख्यमंत्री धामी ने महिला डॉक्टकर का स्‍थानांतरण स्‍थागित करने के लिए मुख्‍य सचिव को निर्देश दिए। उन्‍होंने इस प्रकरण की जांच के लिए कमेटी बनाने के लिए भी कहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव डॉ. संधू ने अपर मुख्य सचिव मनीषा पवार को उपरोक्त प्रकरण की तथ्यात्मक जांच करते हुए अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

डॉ. निधि उनियाल राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वरिष्ठ फिजिशियन एवं एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उन्होंने बताया कि गुरुवार को वो ओपीडी में मरीज देख रही थीं। इस दौरान अस्पताल प्रशासन ने उन्हें स्वास्थ्य सचिव डॉ. पंकज पांडेय की पत्नी की तबीयत जांचने उनके घर जाने के लिए कहा। डॉ. निधि ने बताया कि उनका बीपी इंस्ट्रूमेंट बाहर कार में छूट गया था, इस पर सचिव की पत्नी नाराज हो गईं और उनके बारे में अशालीन शब्दों का इस्तेमाल किया। बाद में अस्पताल प्रशासन ने उन्हें सचिव की पत्नी से माफी मांगने के लिए कहा, जिस पर डॉ. निधि ने अपनी गलती न होने की बात कही। दोपहर बाद करीब तीन बजे उन्हें स्वास्थ्य सचिव की ओर से जारी आदेश थमाया गया, जिसमें उन्हें सोबन सिंह जीना राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा से संबद्ध करने की बात लिखी थी। इससे डॉ निधि बेहद आहत हुईं और उन्होंने कुछ ही देर बाद अपना इस्तीफा स्वास्थ्य सचिव को भेज दिया। बहरहाल मुख्यमंत्री ने डॉ. निधि का ट्रांसफर रद्द कर मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

विश्व क्षय दिवस पर एमआईटी में राष्ट्रीय क्विज प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

ढालवाला स्थित मॉडर्न इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में विज्ञान विभाग और आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में विश्व क्षय दिवस पर ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान निदेशक रवि जुयाल, कोआर्डिनेटर आईक्यूएसी प्रो. ज्योति जुयाल, विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. कौशल्या डंगवाल, कार्यक्रम समन्वयक डा. सुनील कुमार सिंह, उप समन्वयक डा. माधुरी कौशिश ने संयुक्त रूप से किया।

कहा कि तपेदिक या ट्यूबरकुलोसिस एक संक्रामकबीमारी है, यदि इसे प्रारंभिक अवस्था में नहीं रोका गया तो यह जानलेवा साबित हो सकती है। यह रोग एक बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है, जो मनुष्यों के फेफड़ों के साथ-साथ हड्डियों, आंतों, मूत्र तथा प्रजनन अंगों पर बुरा असर डालता है। ये बीमारी भी कोरोना के जैसे ही फैलती है। विभिन्न प्रकार की औषधियों से इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इस क्विज़ में देशभर से 175 से अधिक प्रतियोगियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में डा. कमलेश कुमार भटट, डा. अनिता पांडेय, अश्विनी कुमार, शुभम ग्वाड़ी आदि शामिल रहे।

एम्स ऋषिकेश के आई बैंक ने 200 लोगों को दी नेत्र ज्योति

अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश का आई बैंक नेत्रहींन लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। संस्थान में नेत्र कोष की स्थापना के बाद से अब तक 200 पीड़ित लोगों को सफलतापूर्वक कॉर्निया प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं। संस्थान ने भारत से नेत्रहीनता का अभिशाप मिटाने के लिए लोगों से नेत्र दान का संकल्प लेने का आह्वान ​किया है। कहा गया है कि आई डोनेशन के प्रण से ही लोग अंधता से मुक्ति पा सकते हैं।
गौरतलब है कि एम्स ऋषिकेश में 26 अगस्त 2019 को आई बैंक की स्थापना की गई थी। नेत्र कोष की स्थापना के बाद से संस्थान में लगभग 2 साल 7 माह के अंतराल में अब तक 200 लोगों को सफलतापूर्वक कॉर्निया प्रत्यारोपण से नेत्र ज्योति प्राप्त हो चुकी है। संस्थान के नेत्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजीव मितल ने बताया कि एम्स ऋषिकेश में कॉर्निया प्रत्यारोपण की सभी विश्वस्तरीय आधुनिकतम सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि नेत्र दान महादान के संकल्प के साथ मृत्यु उपरांत अपनी आंखें दान करने के इच्छुक व्यक्ति अपने इस संकल्प को साकार करने के लिए एम्स आई बैंक में संपर्क कर सकते हैं। ऋषिकेश आई बैंक से ऑनलाइन जुड़कर कोई भी व्यक्ति इस महान कार्य में अपना योगदान सुनिश्चित कर सकते हैं। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रो. संजीव मित्तल ने बताया कि अब तक ऋषिकेश आई बैंक में 506 लोग नेत्रदान करने का संकल्प पत्र भर चुके हैं। नेत्र बैंक की टीम व एम्स अस्पताल के कर्मचारी नेत्रदान को लेकर जनजागरुकता मुहिम में जुटे हैं और इसके लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि हमारे विभाग की कॉर्निया- प्रत्यारोपण सर्जन डॉक्टर नीति गुप्ता द्वारा 200 रोगियों की आंखों की नष्ट हो चुकी पुतली ( कॉर्निया) के ऑपरेशन सफलता-पूर्वक किए जा चुके हैं। संस्थान में देश के विभिन्न प्रांतों से मरीज यहां अपना नेत्र प्रत्यारोपण के लिए पहुंच रहे हैं। जिनमें उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों के कई मरीजों का एम्स नेत्र कोष में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण कर उनके जीवन को रोशन किया जा चुका है। खास बात यह है कि एम्स आई बैंक में कॉर्निया प्रत्यारोपण के तहत अब तक जिन नेत्रहीन बच्चों को कॉर्निया प्रत्यारोपित किया गया है वह अब अपनी शिक्षा ग्रहण कर पा रहे हैं। संस्थान की आई बैंक की निदेशक डा. नीति गुप्ता ने बताया कि हम सबको नेत्रदान महादान के अभियान से जुड़ना चाहिए और नेत्रहीन लोगों के अंधेरे जीवन में उजियारा लाने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी के जीवन को रोशनी से भरने से बढ़कर कोई दूसरा परोपकार नहीं है। नेत्रदान का संकल्प लेने वाले व्यक्ति ऋषिकेश आई बैंक, एम्स ऋषिकेश के दूरभाष नंबर 90685 63883 पर संपर्क कर सकते हैं।

राजकीय चिकित्सालय में नवजात की मौत पर परिजनों का हंगामा

राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश पर नगरक्षेत्र के अलावा अन्य जनपद जैसे टिहरी, पौड़ी के दुर्गम क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवा का भी बोझ है। ऐसे में इस अस्पताल को स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित सरकार ने हर मानकों में संतुलित करना चाहिए। मगर, समीपवर्ती एम्स होने के चलते इस अस्पताल की स्थिति बिगड़ती चली गई।

ताजा वाकया आज ही का है, जब एक दुर्गम क्षेत्र दोगी पट्टी का परिवार महिला की डिलीवरी के लिए राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश आता है। यहां महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया। सभी के चेहरे पर मुस्कान आती है, मगर एकाएक बच्चा मृत हो जाता है। पलभर के लिए आई खुशी गम में बदल जाती है। ऐसे में परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा दिए।

नवजात के पिता अनिल सिंह ने बताया कि बच्चे के जन्म के बाद चिकित्सकों ने कहा कि बच्चे को लेकर हायर सेंटर जाइए। क्यों कि हमारे यहां पेट्रियोटिक वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस वेंटिलेटर के अभाव में उनके बच्चे की जान चली गई। नवजात के पिता का आरोप है कि जब बच्चे का वजन ज्यादा था, उसका सिर भी बड़ा चिकित्सकों द्वारा बताया गया, तो फिर यह डिलीवरी केस लिया ही क्यों गया? उनका यह भी कहना है कि जब यहां बच्चे से संबंधित वेंटिलेटर ही नहीं है तो उन्हें पहले ही क्यों न बताया गया?

बता दें कि पीड़ित के एक बेटे का करीब 10 वर्ष पूर्व निधन हो गया था। उधर, सीएमएस रमेश सिंह राणा ने इस मामले में जांच की बात कही है।

कोरोना से आज राज्य में कोई बुरी खबर नहीं

राज्य से आज कोविड-19 के संबंध में कोई बुरी खबर नहीं है। आज कोविड से होने वाली मौतों पर विराम लगा है। कोविड की तीसरी लहर के बाद से पहली बार ऐसा हुआ है कि आज के दिन कोई मौत नहीं हुई है, जबकि राज्य में 16 जनवरी के बाद से हर दिन किसी न किसी मरीज की मौत हो रही थी। लेकिन शनिवार को जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार राज्य के किसी भी अस्पताल में किसी संक्रमित की मौत नहीं हुई है। हेल्थ बुलेटिन के अनुसार शनिवार को राज्य में कुल 96 नए मरीज मिले और 86 मरीजों को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किया गया।

इसके बाद अब राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 942 रह गई है। शनिवार को अल्मोड़ा में आठ, चमोली में आठ, चम्पावत में चार, देहरादून में 29, हरिद्वार में 16, नैनीताल में आठ, पौड़ी में 12, रुद्रप्रयाग में एक, टिहरी में दो, यूएस नगर में तीन जबकि उत्तरकाशी जिले में पांच नए संक्रमित मिले हैं।
शनिवार को राज्य में कोरोना संक्रमण की दर 1.01 प्रतिशत जबकि मरीजों के ठीक होने की दर 95 प्रतिशत से अधिक चल रही है। राज्य में कोरोना की तीसरी लहर में अभी तक कोरोना के 91 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। शनिवार को 11 हजार से अधिक लोगों ने कोरोना रोधी टीके की डोज लगाई है।