स्वास्थ्य संवाद-2021 में बोले सीएम, दिसम्बर तक राज्य में शत प्रतिशत कोविड वैक्सीनैशन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में स्वास्थ्य संवाद 2021 कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं किस तरह और बेहतर हो सकती हैं, इस उद्देश्य से यह संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य से बड़ा कोई धन नहीं है। कोविड के दौरान राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में अनेक कार्य किये गये हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। कोविड की संभावित तीसरी लहर के दृष्टिगत सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। उत्तराखण्ड के बाहर से आने वाले लोगों को भी ध्यान में रखते हुए व्यवस्था की गई है।

प्रधानमंत्री ने उपलब्ध कराई पर्याप्त वैक्सीन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कोविड के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार से राज्य को हर संभव मदद मिली है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी एवं केन्द्र सरकार का आभार भी व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र से राज्य को प्रर्याप्त कोविड वैक्सीन मिल रही है। 15 दिसम्बर तक राज्य में शत प्रतिशत टीकाकरण किया जायेगा।

कोविड से प्रभावित लाखों लोगों को मिला पैकेज से लाभ
राज्य के सीमित संसाधन होने के बावजूद भी प्रदेश में कोविड 19 से प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों के लिए राज्य सरकार द्वारा राहत पैकेज दिये गये हैं। चिकित्सा क्षेत्र के लिए 205 करोड़ रूपये का पैकेज दिया गया है। जिससे लगभग 3 लाख 74 हजार लोग लाभान्वित होंगे। पर्यटन, परिवहन, संस्कृति क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी 200 करोड़ का राहत पैकेज दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों, आगंनबाड़ी कार्यकत्रियों, आशा फैसिलिटेटर, पटवारी से नायब तहसीलदार तक, विकास से सम्बन्धित विभागों के कार्मिकों एवं कांस्टेबल से सब इंस्पेक्टर तक को कोविड में सराहनीय कार्यों के लिए प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर हुआ मजबूत
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार, रूद्रपुर एवं पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज की कार्यवाही गतिमान है, इन मेडिकल कॉलेज के खुलने से राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधगणों द्वारा भी कोविड टीकाकरण के लिए लोगों को जागरूक किया जाय। कोविड टीकाकरण अभियान के रूप में लिया जा रहा है। विधानसभा क्षेत्रों में समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर लगाये जायेंगे।

कोविड के प्रति जागरूकता
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूती प्रदान करने के लिए इस तरह के स्वास्थ्य संवाद कारगर साबित होंगे। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देशभर में वैक्सीन के लिए महा अभियान चलाया जा रहा है। राज्य में भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत द्वारा भी कोविड की संभावित तीसरी लहर से बचाव के लिए सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना नियंत्रित तो हुआ है, लेकिन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जागरूकता अभियान लगातार चलते रहें।

प्रदेश में 44 लाख लोगों के बने आयुष्मान कार्ड
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के माध्यम से लोगों को कैशलेस उपचार की सुविधा दी जी रही है। इस योजना के तहत अभी तक 44 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं। इसी तरह राजकीय कार्मिक, पेंशनर्स एवं उनके आश्रितों को भी राज्य सरकार द्वारा कैशलेस उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है।

207 प्रकार की निशुल्क जांचें
राज्य सरकार द्वारा सभी सरकारी चिकित्सालयों में 207 प्रकार की पैथोलॉजी जांच सुविधा निःशुल्क दी जा रही है। कोविड के दृष्टिगत अस्पतालों में ऑक्सीजन बेड, आईसीयू बेड, वेंटिलेटर एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस कार्यक्रम के तहत 08 जनपदों में डायलिसिस की सुविधा प्रदान की जा रही है, शेष जनपदों में भी यह सुविधा जल्द प्रदान की जायेगी। राज्य में 930 हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर संचालित किये जा रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूती प्रदान करनी होगी। कोविड से बचाव के लिए सबको मिलजुल कर कार्य करना होगा। कोविड की संभावित तीसरी लहर के दृष्टिगत व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाना होगा।

खुशियों की सवारी का फ्लैग ऑफ
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रसव उपरान्त जच्चा बच्चा को अस्पताल से घर तक निःशुल्क छोड़ने के लिए ’खुशियों की सवारी’ को फ्लैग ऑफ किया।

इस अवसर पर विधायकगण, जिला पंचायत अध्यक्षगण, जनप्रतिनिधिगण एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

अंधतत्व निवारण को नगरभर में निकली साइकिल रैली, नेत्रदान का हुआ आह्वान

एम्स ऋषिकेश के तत्वावधान में आयोजित नेत्रदान पखवाड़े के तहत आज नगरभर में साइकिल जनजागरूकता रैली निकाली गई। इसके माध्यम से लोगों से ब्लाइंडनेस को कम करने के लिए नेत्रदान का संकल्प लेने का आह्वान किया गया। एम्स निदेशक ने इस रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस मौके पर उन्होंने समाज से अंधतत्व निवारण हेतु इस तरह के जनजागरूकता कार्यक्रमों को नितांत आवश्यक बताया, साथ ही रैली में प्रतिभाग करने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया। रैली में 150 से अधिक लोग शामिल हुए। जनजागरूकता रैली एम्स से बैराज मार्ग, कोयल घाटी, हरिद्वार रोड तिलक रोड, अंबेडकर चौक होते हुए आगे बढ़ी व देहरादून रोड स्थित जीजी आईसी, हीरालाल मार्ग, परशुराम चौक होते हुए एम्स परिसर में सम्पन्न हुई।

ऋषिकेश आई बैंक की ओर से आयोजित रैली में एम्स फैकल्टी सदस्यों, वरिष्ठ चिकित्सकों, पीजी डॉक्टरों, सिक्योरिटी गार्ड्स, संस्थान के आई बैंक स्टाफ के सदस्यों के साथ ही रेड राइडर्स ग्रुप, ब्लू राइडर्स, ऋषिकेश साइकिल ग्रुप, लायंस क्लब के सदस्यों, विभिन्न स्कूल कॉलेजों के छात्रों व स्थानीय गणमान्य नागरिकों ने बढ़चढ़कर प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर संस्थान के डीन प्रोफेसर मनोज गुप्ता, आईबीसीसी प्रमुख व वरिष्ठ सर्जन प्रोफेसर बीना रवि, डीएचए प्रो. यूबी मिश्रा, संस्थान के नेत्ररोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजीव कुमार मित्तल, आई बैंक की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. नीति गुप्ता, वरिष्ठ चिकित्सक डाक्टर रोहित गुप्ता, डा.पीके पांडा, डा.अनुभा अग्रवाल, डा.अनुपम, डा. रामानुज सामंता, जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल, विधि अधिकारी प्रदीप पांडे, विक्रम सिंह के अलावा नगर के गणमान्य व्यक्तियों में जयेंद्र रमोला, राकेश मियां, गोपाल नारंग, शैलेंद्र बिष्ट, ज्योति प्रकाश शर्मा, नीरज शर्मा, जितेंद्र बिष्ट, सरदार बूटा सिंह, यशपाल सिंह चौहान आदि मौजूद थे।

श्रीनगर में इंस्टीट्यूट आफ गवर्नमेंट मेडिकल सांइस एंड रिसर्च की सीएम ने की समीक्षा


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर गढवाल में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली गवर्नमेंट इन्स्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च की समीक्षा बैठक की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़े चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ सरलीकरण, समाधान व निस्तारण के मंत्र के आधार पर लोगों को स्वास्थ्य लाभ मुहैया कराएं। आगामी 3 महीनों में मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के लिए कौन से प्रोजेक्ट पूरे किए जाने हैं तथा कौन सी योजनाएं व उपकरण केंद्र सरकार की ओर से यहां पर मंगवाये जा सकते हैं, उन पर विशेष ध्यान केंद्रित किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि श्रीनगर का मेडिकल कॉलेज पहाड़ी क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण स्थान है। श्रीनगर के मेडिकल कॉलेज को सभी सुविधाओं से लैस किया जाएगा। साथ ही मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य संबंधी प्रस्तावों को भी शीघ्र पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के मेडिकल तथा पैरामेडिकल स्टाफ के कार्यों की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि कोविड काल के दौरान मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के स्टाफ ने बेहतरीन कार्य किया है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री डॉ धन सिंह रावत जी के नेतृत्व में खिरसू ब्लॉक में शत प्रतिशत वैक्सीनेशन हुआ है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज गढ़वाल क्षेत्र की लाइफ लाइन है। कोरोना काल में श्रीनगर मेडिकल कालेज के चिकित्सकों ने बढ़ चढ़कर कार्य किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की बदौलत ही जुलाई माह तक रिकॉर्ड 30 लाख लोगों को वैक्सीन लगाई जा सकी है। उन्होंने कहा कि श्रीनगर मेडिकल कालेज कि विकास कार्य हेतु 15 करोड़ की डी पी आर स्वीकृत हो गई है।

इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष भाजपा मदन कौशिक, केबिनेट मंत्री डॉ हरक सिंह रावत, सतपाल महाराज, विधायक मुकेश सिंह कोली, विनोद कंडारी, जिला पंचायत अध्यक्ष शांति देवी, गढ़वाल मण्डल आयुक्त रविनाथ रमन, जिलाधिकरी डॉ विजय कुमार जोगदण्डे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पी रेणुका देवी, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य सीएम रावत आदि उपस्थित थे।

एम्स ऋषिकेश में शुरू हुआ स्पेशल लंग क्लीनिक

यदि आप धूम्रपान करते हैं और आपको लम्बे समय से खांसी की शिकायत के साथ थकान महसूस हो रही है, तो सावधान हो जाएं। यह लंग कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार कैंसर से होने वाली मौतों में सर्वाधिक मौतें लंग कैंसर की वजह से होती हैं। ऐसे मरीजों के लिए एम्स ऋषिकेश में अब स्पेशल लंग क्लीनिक शुरू किया गया है। इस क्लीनिक का संचालन प्रत्येक शुक्रवार को किया जाएगा।
फेफड़े के कैंसर में फेफड़ों के किसी भाग में कोशिकाओं की अनियंत्रित व असामान्य वृद्धि होने लगती है। चिकित्सकों के अनुसार कईदफा फेफड़े के कैंसर का शुरुआती दौर में पता नहीं चल पाता है और यह अंदर ही अंदर बढ़ता जाता है। लिहाजा इसके लक्षण अक्सर विलंब से पता चलते हैं।
इस बाबत एम्स निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि फेफड़े का कैंसर एक गंभीर बीमारी है लेकिन आधुनिक मेडिकल साइंस में हुई प्रगति के कारण अब कैंसर से छुटकारा संभव है। लक्षणों के आधार पर समय पर उपचार शुरू कर दिए जाने से कैंसर की गंभीर स्थिति से बचाव किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश में लंग कैंसर के लिए स्पेशल क्लीनिक संचालित किया जा रहा है। इस बीमारी के समुचित इलाज के लिए एम्स में सभी तरह की आधुनिक मेडिकल सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उपलब्ध है।
पल्मोनरी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. मयंक मिश्रा ने बताया कि बीड़ी-सिगरेट आदि धूम्रपान का सेवन करना फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के तम्बाकू उत्पाद, खैनी, गुटखा, सिगार का सेवन करने, धुएं के संपर्क में रहने, घर या कार्य स्थल पर एस्बेस्टस या रेडॉन जैसे पदार्थों के संपर्क में आने और पारिवारिक इतिहास होने के कारण भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है।

आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में लंग कैंसर के मरीजों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एम्स ऋषिकेश में इस बीमारी से ग्रसित औसतन 40 से 50 मरीज प्रति माह आ रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर एम्स के पल्मोनरी विभाग में अलग से लंग क्लीनिक संचालित किया जा रहा है। इस क्लीनिक में केवल लंग कैंसर से ग्रसित मरीज ही देखे जाएंगे।
फेफड़ों के कैंसर के लक्षण
लंबे समय से खांसी-बलगम की शिकायत, खांसी में खून आना, सांस फूलना, सीने में दर्द, वजन का कम होना, चेहरे या गले में सूजन, आवाज बदल जाना, भूख कम लगना, लगातार थकान महसूस होना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।
शुक्रवार को संचालित होगा लंग क्लीनिक
पल्मोनरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मयंक मिश्रा जी ने बताया कि लंग क्लीनिक प्रत्येक शुक्रवार को अपराह्न 2 से 4 बजे तक संचालित होगा। इस क्लीनिक में केवल वही मरीज देखे जाएंगे, जिन्हें पल्मोनरी विभाग की जनरल ओपीडी से रेफर किया गया हो। लिहाजा जरूरी है कि मरीज पहले पल्मोनरी की ओपीडी में अपना परीक्षण करा लें। क्लीनिक में पल्मोनरी विभाग के अलावा, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के विशेषज्ञ चिकित्सक भी मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे।

प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ ने कोविड घोटाले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की

प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ ने कोरोना जांच घोटाले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है। न्यायिक जांच पूरी होने तक चिकित्सकों पर कार्रवाई न करने की भी मांग संघ ने की है। मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव व स्वास्थ्य महानिदेशक को भेजे ज्ञापन में संघ पदाधिकारियों ने कहा कि सभी कमियों या जांच में ठीकरा हमेशा चिकित्सकों पर ही फोड़ा जाता रहा है। इस एक तरफा कार्रवाई का संघ विरोध करता है। भविष्य में संबंधित चिकित्सकों की वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए प्रकरण में उनसे उच्च स्तर के अधिकारियों से ही जांच कराई जाए।
संगठन के प्रांतीय महासचिव डॉ. मनोज वर्मा ने कहा कि सीडीओ हरिद्वार की जांच के आधार पर मेलाधिकारी डॉ. एएस सेंगर व अपर मेलाधिकारी डा एनके त्यागी पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। संघ का मानना है कि डॉ. सेंगर व डॉ. त्यागी ने जो भी निर्णय लिए या कार्य किए वह उच्चाधिकारियों के लिखित व मौखिक निर्देशों के बगैर नहीं किए गए होंगे। ऐसे में संघ इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग करता है। कोविड नियंत्रण की विषम परिस्थितियों में इन अधिकारियों की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए न्यायिक जांच पूरी होने तक उनपर कार्रवाई ना की जाए। उन्होंने कहा कि एसपीएस चिकित्सालय ऋषिकेश के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनएस तोमर पर कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटा दिया गया था। फिर संयुक्त चिकित्सालय, नरेंद्रनगर में दो चिकित्सकों के पूरे कोविड-19 नियंत्रण में कार्य करने के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिख दिया गया। अन्य मामलों में भी चिकित्सकों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जा रही रही है। जबकि कोविड नियंत्रण में सभी चिकित्सकों ने संक्रमण के खतरे के बावजूद, सीमित संसाधनों के साथ पूरे समर्पण से अनवरत अपनी सेवाएं दी है। अभी तीसरी लहर की संभावना भी बनी हुई हैं। इस तरह कार्रवाई से चिकित्सकों का मनोबल गिरेगा और तीसरी लहर के प्रभावी नियंत्रण में भी समस्याएं आएंगी।
बैठक में डॉ नरेश नपलच्याल, डॉ एसएन सिंह, डॉ प्रदीप राणा, डॉ आशुतोष भारद्वाज, डॉ प्रताप रावत, डॉ पंकज शर्मा, डॉ पीयूष त्रिपाठी, डॉ मनु जैन, डॉ आलोक जैन, डॉ आरके टम्टा, डॉ मुकेश राय, डॉ संजीव कटारिया, डॉ परमार्थ जोशी आदि उपस्थित रहे।

एम्स ऋषिकेश में शुरू हुआ 11वां एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में 13वां विश्वस्तरीय एटीएलएस एवं 11वां एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम विधिवत शुरू हो गया। जिसमें एम्स के साथ ही अन्य मेडिकल संस्थानों के 16 चिकित्सक एवं 16 सीनियर नर्सिंग ऑफिसर व नर्सिंग ऑफिसर टर्सरी केयर सेंटर में भर्ती होने वाले दुर्घटना में घायल ट्रॉमा मरीजों के उपचार संबंधी प्रशिक्षण ले रहे हैं।

आज एडवांस सेंटर फॉर कंटिनिवस प्रोफेशनल डेवलपमेंट (एसीसीपीडी विभाग) में एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत की देखरेख में तीन दिवसीय एटीएलएस एवं एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। निदेशक ने कहा कि दुनिया का कोई भी ट्रॉमा सिस्टम ट्रेंड ट्रॉमा चिकित्सकों एवं नर्सिंग ऑफिसर्स के बिना प्रभावी नहीं हो सकता। बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए इस तरह का विश्वस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम नितांत आवश्यक है, इसकी सबसे मुख्य वजह यह है कि पहाड़ी क्षेत्रों में विभिन्न तरह की दुर्घटनाओं के कारण ट्रॉमा के मामले सर्वाधिक होते हैं, लिहाजा प्रत्येक हैल्थ केयर वर्कर को टर्सरी केयर लेवल पर चिकित्सा कार्य करने के लिए यह प्रशिक्षण लेना जरुरी है, तभी वह दुर्घटना में घायल मरीजों की ठीक प्रकार से देखभाल कर सकते हैं।
उनका कहना है कि ट्रॉमा मैनेजमेंट एक टीमवर्क है, लिहाजा उसकी ट्रेनिंग भी विश्वस्तरीय मानकों के तहत कराई जानी जरुरी है। ट्रेनिंग प्रोग्राम डा. अजय कुमार व दीपिका कांडपाल के संयोजन में आयोजित किया जा रहा है।
ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम की अगुवाई में आयोजित एटीएलएस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बतौर प्रोग्राम डायरेक्टर डा. मधुर उनियाल व ट्रेनिंग फैकल्टी डा. फरहान उल हुदा, डा. अजय कुमार,डा. जितेंद्र चतुर्वेदी, डा. दिवाकर कोयल, डा. अंकिता काबि, दिल्ली एम्स ट्रामा सेंटर से डा. दिनेश बगराई ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया, जबकि एटीसीएन कोर्स में महेश देवस्थले, डा. राजेश कुमार, चंदू राज बी., अरुण वर्गीस, जोमोन चाको ने प्रशिक्षणार्थियों को ट्रॉमा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया।

नेहरू ग्राम में लगा टीकाकरण शिविर, वैक्सीन को बताया आवश्यक

नगर निगम ऋषिकेश पार्षद राजेंद्र बिष्ट ने कहा कि तीसरी लहर को रोकने के लिए हर हालत में टीकाकरण अनिवार्य है, यही तीसरी लहर को रोकने में कारगर हथियार है। पार्षद ने 400 टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित करते हुए टीकाकरण शिविर लगाया। 

इंदिरा नगर, नेहरुग्राम में विस्थापित पार्क में आयोजित शिविर का शुभारंभ पूर्व प्रधानाचार्य दिवाकर भानु प्रताप सिंह रावत, ज्योति सजवाण, डॉ एके शर्मा, ब्रज सिंह बिष्ट, घनश्याम अग्रवाल ने संयुक्त रूप से किया। पूर्व प्रधानाचार्य रावत ने कहा कि कोविड-19 लहर को रोकने के लिए टीकाकरण सबसे अहम हैं। सरकार को जल्द से जल्द बच्चों के लिए भी वैक्सीन बना लेनी चाहिए। जिससे तीसरी लहर को रोका जा सके। पार्षद राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट ने कहा कि आज 400 टीकाकरण का लक्ष्य रखा है जिसे वह लगभग पूर्ण कर चुके हैं और भविष्य में भी इस तरह के शिविर लगाए जाते रहेंगे। इस दौरान घर-घर जाकर भी बुजुर्ग व अस्वस्थ्य लोगों को वैक्सीन लगाई गई।  

इस अवसर पर डॉ दीपक सकलानी, डॉ लवित, डॉ अमन नौटियाल, आशा कार्यकर्ती आशा, रीना, आशा, कमलेश, एएनएम शांति, आशा ,मीरा, आशा, पूनम आदि उपस्थित रहीं। 

छह दिसंबर से एम्स में आयोजित होगी सोसाइटी ऑफ यंग बायोमेडिकल साइंटिस्ट्स प्रतियोगिता

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में सोसाइटी ऑफ यंग बायोमेडिकल साइंटिस्ट्स, भारत के तत्वावधान में 6 से 10 दिसंबर 2021 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैव चिकित्सा अनुसंधान प्रतियोगिता वार्षिक वैज्ञानिक कार्यक्रम का निदेशक एम्स प्रोफेसर रवि कांत ने पोस्टर जारी किया।

सोसाइटी के अध्यक्ष व आयोजन सचिव रोहिताश यादव ने बताया कि एम्स, ऋषिकेश तथा पीजीआईएमईआर-चंडीगढ़ में सोसाइटी द्वारा आयोजित पहले और दूसरे राष्ट्रीय जैव चिकित्सा अनुसंधान प्रतियोगिता के सफल समापन के बाद एम्स ऋषिकेश में तीसरी वार्षिक अनुसंधान प्रतियोगिता देश के राष्ट्रीय महत्व के 7 अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर आयोजित की जाएगी।

राष्ट्रीय महत्व व युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने वाली उक्त प्रतियोगिता की पहल 15 अक्टूबर 2018 को एम्स ऋषिकेश से शुरू की गई थी, जो आज बहुत बेहतर तरीके से संचालित हो रही है तथा इस आयोजन के जरिए देश के युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

प्रो. रवि कांत जी ने संस्थान की ओर से इस प्रतियोगिता के पुरस्कार की धनराशि के तौर पर 1 लाख रुपए देने की घोषणा की है।

कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने रखी प्रदेश से बाहर कैशलेस उपचार की मांग

सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने विधानसभा स्थित कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक ली। जिसमें कर्मचारियों को गोल्डन कार्ड के उपयोग में आ रही व्यवहारिक दिक्कतों को दूर करते हुए संशोधित प्रस्ताव कैबिनेट की अगली बैठक में लाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये साथ ही एनएचएम के तहत स्वीकृत विभिन्न पदों पर की जा रही भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिये।
कैबिनेट मंत्री डा. धन सिंह रावत ने विधानसभा में अपने कक्ष में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक ली। जिसमें विभागीय अधिकारियों के साथ ही सचिवालय संघ एवं शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने भी प्रतिभाग किया। कर्मचारियों को गोल्डन कार्ड के माध्यम से उपचार के दौरान आ रही व्यवहारिक दिक्कतों पर चर्चा के उपरांत विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को गोल्डन कार्ड के उपयोग संबंधी संशोधित प्रस्ताव कैबिनेट की अगली बैठक में लाने के निर्देश दिये। डॉ. रावत ने कहा कि गोल्डन कार्ड में आ रही व्यवहारिक दिक्कतों को शीघ्र दूर किया जायेगा। इसके साथ ही आयुष्मान कार्ड से वंचित लोगों के लिए भी नियमों में शिथिलीकरण किया जा रहा है। उन्होंने मिशन निदेशक एनएचएम को राज्यभर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत मेडिकल ऑफिसर, नर्सेज, एएनएम, लैब टेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्नीशियन आदि की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिये। बैठक में महानिदेशक स्वास्थ्य को महानिदेशालय स्तर पर रिक्त पदों को भरे जाने, चिकित्साधिकारियों के प्रोन्नति संबंधी प्रस्ताव, नर्सिंग भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने तथा सूबे के जिला चिकित्सालयों में रेडियोलॉजिस्ट के रिक्त पदों को भरने का प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजने का निर्देश दिये।
बैठक में सचिवालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी, राजकीय शिक्षक संघ के महासचिव सोहन सिंह माजिला ने राजकीय कर्मचारियों एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सीजीएचएस कार्ड के समान सुविधाएं प्रदान करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की गलतियों के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को राज्य से बाहर के चिकित्सालयों में कैशलेस सुविधा मुहैया कराई जाय।
बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम सोनिका, महानिदेशक स्वास्थ्य डा. तृप्ति बहुगुणा, सचिवालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी, राजकीय शिक्षक संघ के महासचिव सोहन सिंह मांजिला सहित विभागीय अधीकारी उपस्थित रहे।

सांसद बलूनी की पहल ला रही है रंग, कैंसर अस्पताल की होगी स्थापना

उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी के प्रयासों से उत्तराखंड में टाटा कैंसर अस्पताल की स्थापना चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। प्रमाणिक कार्यशैली में विश्वास करने वाले बलूनी उत्तराखंड को शीघ्र ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी सौगात देने वाले हैं। इस संबंध में आज एटॉमिक एनर्जी के मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह के अध्यक्षता में नई दिल्ली में एक बैठक आयोजित हुई।
टाटा कैंसर अस्पताल प्रबंधन तेजी से उत्तराखंड में कैंसर अस्पताल की स्थापना के लिए कार्य कर रहा है। उनके अधिकारियों के दौरे जारी हैं। राज्य सरकार के साथ निरंतर उनका समन्वय चल रहा है। आज केंद्रीय परमाणु ऊर्जा मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ राजेंद्र अच्युत बड़वे, उपनिदेशक डॉ पंकज चतुर्वेदी, उत्तराखंड शासन के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, चिकित्सा शिक्षा के महानिदेशक रविशंकर और उत्तराखंड कैंसर हॉस्पिटल के डॉक्टर उपस्थित थे।
सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी कार्यकाल में पूरे देश में हर क्षेत्र में नए आयाम जुड़े हैं। इससे उत्तराखंड भी अछूता नहीं है। गत 7 वर्षों में उत्तराखंड में आम जनता अपने आसपास बदलते हुए उत्तराखंड को और विकास की हर दृष्टि में बढ़ते उत्तराखंड को अनुभव कर कर रही है। सांसद बलूनी ने कहा कि वह निजी तौर पर जानते हैं कि भले ही कैंसर के क्षेत्र में विज्ञान में बहुत तरक्की कर ली है, अनेक रोगों पर विजय हासिल कर ली है, पर आज भी कैंसर समाज में मानसिक तनाव और भय की दृष्टि से देखा जाता है। ऐसे में राज्य में टाटा कैंसर इंस्टिट्यूट की स्थापना से हम राज्य की जनता को सस्ता और उच्च कोटि का प्रमाणिक उपचार तो देंगे ही, साथ ही समय पर जांच कराने से रोगी शीघ्र स्वस्थ भी हो सकेगा।