कैग ने खोली भारतीय रेला सेवा की पोल!

नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) ने रेल मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाते हुए स्टेशनों व ट्रेनों में परोसा जाने वाला खाना यात्रियों के खाने योग्य नहीं बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे के खाने में कीलें निकली। पेंट्रीकार में चूहे एवं काकरोच पाए गए।
इससे अधिक गंभीर बात यह है कि रेलवे ही ठेकेदारों को घटिया, बासी, कम मात्रा और अधिक दरों पर खाना देने के लिए मजूबर करती है। यात्रियों को ब्रांडेड के बजाए दूसरी कंपनियों का बोलतबंद पानी दिया जाता है। इतना ही नहीं 22 ट्रेनों में पेय, काफी, चाय और शूप तैयार करने में सीधे नल से आ रहे अशुद्ध जल का उपयोग किया जा रहा है।
कैग ने शुक्रवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रेलवे की खानपान सेवाओं की कलई खोल दी है। कैग ने रेलवे अफसरों के साथ संयुक्त जांच में पाया कि खाना बनाने में साफ सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता। बेस किचन व पेंट्रीकार कॉकरोच-चूहे घूमते हैं। लखनऊ-आनंद विहार डबल डेकर (ट्रेन नंबर 12583) में एक यात्री के कटलेट में खाते समय कील निकली। इसी प्रकार एक अन्य ट्रेन कानपुर दिल्ली शताब्दी की शिकायत पुस्तक में भी खाने में कील निकलने की शिकायत दर्ज है। दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेनों (ट्रेन नंबर 12260 व 12269) में कॉकरोच व चूहे देखे गए। इसी प्रकार जांच के दौरान वेलकम ड्रिंक को नल के पानी से बनाते हुए देखा गया।
कैग ने कहा कि खाने की रसीद यात्रियों को नहीं दी जाती है। ट्रेनों की कोच में मैन्यू नहीं लगया जाता है जिससे खाने की दरें व मात्रा पता चल सके। यात्रियों को घटिया खाना कम मात्रा में परोसा जाता है, और तय मूल्य से अधिक पैसा लिया जाता है। यह स्थिति यात्री ट्रेनों व रेलवे स्टेशनों दोनो जगह की बनी हुई है।
रेलवे खानपान की गुणवत्ता की जांच और नियंत्रण प्रभावी ढ़ग से लागू करने में विफल साबित हुआ है। रेलवे बोर्ड से लेकर जोनल रेलवे तक शिकायत प्रणाली व्यवस्था लागू की गई, लेकिन इनकी संख्या में कमी नहीं आ रही है। कैग ने रिपोर्ट में कहा है कि खानपान नीति में बार बार परिर्वतन कर आईआरसीटीसी से लेने और फिर देने के फैसले से खानपान व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। 2010 से इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
कैग व रेलवे के संयुक्त जांच में पाया गया कि जोनल रेलवे ने मास्टर प्लान बनाकर सभी स्टेशनों व ट्रेनों में खानपान आपूर्ति की ठीक प्रकार से निगरानी नहीं की। लंबी दूरी की ट्रेनों में पेंट्रीकार नहीं थी। ट्रेनों में खाना आपूर्ति के लिए रेलवे मात्र तीन फीसदी बेस किचन का प्रयोग करती है, शेष बेस किचन कैटरिंग ठेकेदारों द्वारा रेल परिसर से बाहर बनाया जाता है। यहां रेलवे का निगरानी तंत्र नहीं है। इसलिए खाना बनाने की गुणवत्ता, बेस किचन की साफ सफाई, कम मात्रा में खाना पैक करना आदि अनियमितताएं होती है।
रेलवे ने बेस किचन, कैटरिंग यूनिट, विशिष्ठ बेस किचन जैसे फूड प्लाजा, फूड कोर्ट, फास्ट फूड यूनिट, ट्रेन साइड वेडिंग लगाने की दिशा में ठोस काम नहीं किया। कैग ने सिफारिश की है कि आईआरसीटीसी को खानपान सेवा को देने के नियम को सरल बनाया जाना चाहिए। पेंट्रीकार में गैस बर्नर के स्थान पर इलेक्ट्रिकल चूल्हा लगाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर घोषित हुए नीट के परिणाम


सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) की ओर से आयोजित नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (नीट) की परीक्षा में पंजाब होनहारों ने बाजी मारी है। श्री मुक्तसर साहिब के नवदीप सिंह ने 700 में से 697 अंक लेकर देश में पहला रैंक हासिल किया है। वहीं, हिसार में रहने वाली नितिका गोयल ने देशभर में 8वां रैंक हासिल कर लड़कियों के वर्ग में टॉप किया है। उसने 700 में से 690 अंक हासिल किए हैं। नीतिका मूलरूप से बठिंडा की रहने वाली हैं। इसके अलावा हिसार की अदित‍ि व पूर्वा ने क्रमशः 22वां व 26वां रैंक हासिल किया।
पहला रैंक प्राप्त करने वाले मुक्तसर के ग्रीन एवेन्यु की गली नंबर एक के निवासी नवदीप के पिता गोपाल सिंह गांव चड़ेवान के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रिंसिपल हैं, जबकि उसकी मां सिमरजीत कौर एलआइसी की मुलाजिम हैं। परिवार में माता पिता के अलावा नवदीप का एक छोटा भाई है, जो दसवीं में पढ़ता है। वहीं, नितिका के पिता राकेश गोयल बठिंडा जिला के खेतीबाड़ी विकास अफसर हैं। माता रानी देवी सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज में लेक्चरर हैं।

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टॉप करने की नहीं थी उम्मीद: नवदीप
नवदीप ने इस सफलता का श्रेय माता पिता व अपने शिक्षकों को दिया। उन्होंने बताया कि किसी भी परीक्षा में सफलता के लिए दृढ़ निश्चय की आवश्यकता होती है, तभी सफलता मिलती है। उनके माता पिता ने बताया कि नवदीप शुरू से ही डॉक्टर बनना चाहता था। स्थानीय अकाल अकेडमी दसवीं करने वाले नवदीप ने दसवीं में 10 सीजीपीए प्राप्त किए थे, जबकि बारहवीं में उसने मुक्तसर के ही शिवालिक पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 88 फीसद अंक हासिल किए थे। नवदीप ने कहा कि उसे अच्छे रैंक हासिल करने की तो उम्मीद थी, लेकिन पहला रैंक प्राप्त होगा, यह उम्मीद नहीं थी। नीट की परीक्षा की कोचिंग उसने चंडीगढ़ के हेलिक्स इंस्टीट्यूट से ली है। वह अब नई दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल इंस्टीट्यूट में दाखिल लेगा। पिता ने बताया कि नवदीप की फिजिक्स भी बहुत अच्छी है।

चैलेंज ने नीतिका को बनाया टॉपर
नितिका गोयल ने नीट में देशभर में 8वां रैंक प्राप्त कर किया है। मैगनेट इंस्टीट्यूट बठिंडा की छात्रा नितिका ने बताया कि वह इस टेस्ट को चैंलेज मान कर चली थी। इंस्टीट्यूट ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि निकिता अपने भाई से बेहतर परफॉर्म कर सकेगी। उसके भाई निखिल ने नीट में एआइआर-142 प्राप्त किए थे। नितिका ने इस चुनौती को स्वीकार किया और 8वां रैंक हासिल किया। मैगनेट इंस्टीट्यूट की एमडी पिंकी शिवरावणी ने बताया कि नितिका ने दो साल रेगुलर उनके पास पढ़ाई की और कभी भी कोई टेस्ट मिस नहीं किया। वह हर टेस्ट में प्रथम ही आती थी। नितिका ने बताया कि एक बार दसवीं में वह दिमागी तौर पर बीमार हो गई और उनकी आंखें सूजने लगी। काफी लंबा इलाज चला, लेकिन वह पूरी तरह से ठीक हो गई। उसी दिन से यह फैसला कर लिया था दिमाग रोग विशेषज्ञ ही बनना है। नितिका एम्स में एआइआर-95 व जेआइपीएमईआर पांडुचेरी में 76वां रैंक प्राप्त कर चुकी है।

एएनएम की लापरवाही से सड़क में जन्मा बच्चा


भटवाड़ी गांव की रहने वाली इंद्रा देवी अपनी गर्भवती बहू लक्ष्मी को लेकर निजी वाहन बुक कर जखोली स्थित एएनएम सेंटर पहुंची। इंद्रा देवी के अनुसार उन्होंने एएनएम से प्रसव पीड़ा का हवाला देकर बहू को भर्ती करने का आग्रह किया। इंद्रा का आरोप है कि एएनएम बसंती सकलानी ने कहा के प्रसव कक्ष की सफाई नहीं हुई है। ऐसे में वह पीड़ित महिला को भर्ती नहीं कर सकती। एएनएम का कहना था कि यह सीएमओ का निर्देश है। इंद्रा के अनुसार वह करीब आधे घंटे एएनएम की मनुहार करती रही।
इस बीच आसपास के लोग भी एकत्र हो गए और उन्होंने भी एएनएम को समझाने का प्रयास किया। जब बात नहीं बनी तो इंद्रा अपनी बहू को लेकर लौटने लगीं, लेकिन सड़क पर खड़े वाहन तक पहुंचने से पहले ही प्रसव वेदना बढ़ गई। इंद्रा ने आसपास की महिलाओं की सहायता से किसी तरह प्रसव कराया।
एएनएम बसंती का कहना है कि सुबह-सुबह प्रसव कक्ष की सफाई नहीं हुई थी। सीएमओ के निर्देश के अनुपालन में उन्होंने गंदे कक्ष में प्रसव करना उचित नहीं समझा। हालांकि जब महिला का दर्द बढ़ गया तो प्रसव में उन्होंने मदद की।
दूसरी ओर सीएमओ सरोज नैथानी ने बताया कि कुछ समय पहले उन्होंने चौरा एएनएम केंद्र का निरीक्षण किया था। प्रसव कक्ष में गंदगी मिलने पर उन्होंने एएनएम को सफाई के निर्देश दिए और ताकीद की थी कि साफ सुथरे कक्ष में ही प्रसव कराया जाए। घटना को गंभीर बताते हुए उन्होंने कहा कि इसकी जांच करा दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

नर्सिंग का उद्देश्य जिंदगी की रक्षा करना: रेनु धस्माना

ऋषिकेश।
एसआरएचयू नर्सिंग निदेशक डॉ. रेनू धस्माना ने नर्सेस दिवस की शुभकामनाएं देते हुए इसका महत्व बताया। बोलीं कि नोबल नर्सिंग सेवा की शुरुआत करने वाली फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्म दिवस के तौर पर अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है। नर्सिंग का मतलब जिंदगी की रक्षा करना है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को लगन के साथ काम करने की सलाह दी। उन्होंने मौजूद छात्र-छात्राओं को नर्सिंग देखभाल को और बेहतर और उच्च स्तर पर ले जाने के लिए प्रेरित किया।
हिमालयन कॉलेज ऑफ नर्सिंग ऑडिटोरियम में अंतरराष्ट्रीय नर्सेस डे पर करीब 28 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। ग्रुप डांस जिसकी थीम रेंज ऑफ मोशन एक्सरसाइजिज रही, इसमें हिमालयन हॉस्पिटल व कॉलेज ऑफ नर्सिंग की छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। ग्रुप डांस में अक्षिता एड ग्रुप जीएनएम ने प्रथम स्थान, जीएनएम द्वितीय वर्ष से मोनिका शाह एंड ग्रुप ने दूसरा स्थान व हिमालयन हॉस्पिटल स्टाफ नर्स से श्वेता एंड ग्रुप ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता जिसकी थीम नर्स सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त एवं नेतृत्व करने के लिए एक आवाज पर आधारित रही, इसमें हॉस्पिटल स्टाफ से प्रथम स्थान तनुजा बडवाल, द्वितीय स्थान काजल गिरी बीएससी नर्सिंग चौथे वर्ष व अक्षिका पॉल बीएससी नर्सिंग द्वितीय वर्ष की छात्रा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। डॉ. संचिता पुगाजंडी ने कहा कि नर्सिंग एक दर्पण की तरह है, जिसके जरिए लोग मरीज को केयर साफ-साफ देख सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया। संचालन हरलीन कौर ने किया। आयोजित कार्यक्रम में डॉ. कैथी, कमली प्रकाश, उपमा जॉर्ज, हरलीन कौर प्रिति प्रभा ने सहयोग दिया।

राज्य के मेडिकल कॉलेजों की दशा सुधारने को एम्स तैयार

-श्रीनगर, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज गोद लेने को तैयार एम्स प्रशासन

ऋषिकेश।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के नए निदेशक प्रोफेसर डॉ. रविकांत वर्मा ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखण्ड राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने की जरूरत है। डॉक्टरों की कमी के चलते इसमें दिक्कत आती है। इसलिए वह श्रीनगर और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज को गोद लेने को तैयार हैं। उनके मेडिकल स्टूडेंट दोनों कॉलेजों में मरीजों का उपचार कर सकते हैं। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, राज्य सरकार और सेना के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि एम्स में तेजी से संसाधन जुटाए जा रहे हैं। डॉक्टर और स्टॉफ की कमी जल्द दूर हो जाएगी। आने वाले दिनों में बदलाव देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्ती में स्थानीय को प्राथमिकता दी जाएगी। एम्स के विस्तार के लिए राज्य सरकार से भूमि मांगी गई है। इस मामले में वह मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस में 960 बेड होंगे जिसमें 500 बेड सामान्य, 300 बेड सुपर स्पेसिशियलिटीज, 50आईसीयू, 50 ट्रामा सेंटर, 30 पीएमआर और 30 बेड आयुष विंग के बनाए जाने हैं।

जेनेरिक दवा लिखने के खिलाफ अस्पताल में एमआर का प्रदर्शन

ऋषिकेश।
सोमवार को एसोसिएशन की ऋषिकेश इकाई से जुड़े सदस्यों ने जेनेरिक दवा लिखने के विरोध में अस्पताल परिसर में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। यूनियन के अध्यक्ष सतीश सेमवाल ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में सिर्फ जेनेरिक दवाएं लिखने का निर्णय पूरी तरह से अव्यवहारिक है। उन्होंने कहा कि पहले दवाओं की कीमतें लागत के आधार पर तय होती थीं, अब मूल्य निर्धारण बाजार के नियंत्रण में है। ऐसे में बाजार में दवाएं नहीं मिलने पर आखिरकार लोगों को इलाज के दौरान परेशानियां उठानी पड़ेंगी।
सेमवाल ने बताया कि इससे फार्मा सेक्टर भी प्रभावित होगा। हजारों लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि फिलहाल यूनियन मौजूदा परिस्थितियों का आंकलन कर रही है। यह फैसला वापस नहीं हुआ तो संगठन जल्द ही आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरेगा। प्रदर्शन करने वालों में देवेंद्र जोशी, योगेंद्र शर्मा, विक्रम वशिष्ठ, दीप ममगाईं, निखिल मेहरा, सुमित शर्मा आदि शामिल थे।

अल्ट्रासाउंड न होने से नाराज महिलाओं ने सीएमएस को घेरा

ऋषिकेश।
मंगलवार को राजकीय अस्पताल में अल्ट्रासांउड केन्द्र बंद था। दूरदराज से गर्भवती महिलाएं जोखिम लेकर अस्पताल आईं थीं लेकिन घंटों इंतजार के बाद उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा था। काफी इंतजार के बाद जब अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ तो बाकी बची महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर अव्यवस्था को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए मुख्य गेट बंद कर दिया। वे नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन करने लगीं। उन्होंने कार्यालय पहुंच कर सीएमएस का घेराव किया और उनसे तीखी नोंकझोक की। महिलाओं के तेवर को देख अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस के बीच-बचाव पर सीएमएस ने अल्ट्रासाउंड कराने की बात कही। सीएमएस ने अवकाश पर गए चिकित्सक को अल्ट्रासाउंड करने के लिए अस्पताल बुला लिया। जिस पर महिलाओं का गुस्सा शांत हुआ। मौके पर सुरेश डिमरी, ज्योतिष डिमरी, शैलेन्द्र प्रसाद, संजय, शांति बाला, परमानंद, सुशीला, हिमानी, सरोजबाला आदि मौजूद रही।

नाइट शिफ्ट के चलते अल्ट्रासाउंड चिकित्सक अवकाश पर रहे जिस कारण परेशानी हुई। महिलाओं की शिकायत पर चिकित्सक को अस्पताल बुलाया गया। जिस पर दूर से आने वाली महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए गए।
डॉ. अशोक कुमार गैरोला, सीएमएस, राजकीय अस्पताल ऋषिकेश।

स्टॉफ ने दिखाए महिलाओं को तेवर
ऋषिकेश। अल्ट्रासाउंड के लिए पीड़ित महिलाएं मुखर रहीं। सीएमएस द्वारा चिकित्सक बुलाए जाने पर महिलाएं अल्ट्रासाउंड कक्ष में पहुंची जिनमें कई गर्भवती थीं। अल्ट्रासाउंड कक्ष में तैनात दो कर्मचारी महिलाओं की शिकायत पर नाराज दिखे। महिलाओं के पर्ची जमा करने और सीएमएस द्वारा अल्ट्रासांउड करने की जानकारी देने पर दोनों पहले तो महिलाओं से ही उलझने लगी। फिर बाद में कक्ष से यह कहकर चलती बनी कि सीएमएस को ही पर्ची जमा कराओ, वहीं करेंगे अल्ट्रसाउंड।

रेडियोथेरेपी की नई तकनीक पर मंथन

ऋषिकेश।
शनिवार को सीआरआई सभागार में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का मुख्य अतिथि डॉ. एसएन सेनापति और सीआरआई के निदेशक डॉ. सुनील सैनी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। कार्यशाला में एम्स दिल्ली, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुम्बई, पीजीआई चंडीगढ़ और सीएमसी वेल्लौर से आए रेडियोथेरेपी के 90 छात्रों ने भाग लिया। मुख्य वक्ता डॉ. राकेश कपूर, डॉ. विनीता गोयल, डॉ. डीएन शर्मा व डॉ. एम अशरफ ने छात्रों को रेडियोथेरेपी की नई तकनीकी की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि रेडियोथेरेपी की नई तकनीक इंटेसिव मॉडयूलेटेड रेडियोथेरेपी (आईएमआरटी) डोज द्वारा कैंसर फैलने की गति को धीमा किया जा सकता है।
इंडियन कॉलेज ऑफ रेडिएशन ऑकोलॉजिस्ट के चेयरमैन डॉ. एसएन सेनापति ने किडनी, गॉल ब्लैडर व प्रोस्टेट टैस्टिस कैंसर के इलाज की आधुनिक तकनीक को साझा किया। सीआरआई निदेशक डॉ. सुनील सैनी ने कहा कि कैंसर एक तेजी से फैलने वाली बीमारी के रूप में सामने आ रही है। जिसका मुख्य कारण अनियमित दिनचर्या और खान-पान है। ध्रूमपान, तम्बाकू सेवन और शराब को इसका मुख्य कारण बताया।
समारोह का संचालन कर रही डॉ. मीनू गुप्ता ने बताया कि कैंसर से बचाव के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य की जांच जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि पुरुषों को 50 की उम्र के बाद प्रोस्टेट कैंसर के लिए स्पैरिपिक एंटीजन टेस्ट कराना चाहिए। महिलाओं को भी रूटीन हेल्थ चेकअप कराने की सलाह दी। मौके पर डॉ. वाइएस बिष्ट, डॉ. विजेंद्र चैहान, डॉ. मुस्ताख अहमद, डॉ. मीनू गुप्ता, डॉ. विपुल नौटियाल, डॉ. राकेश कपूर व डॉ. मनीष पांडे आदि उपस्थित रहे।

प्रो. रविकांत ने एम्स निदेशक का कार्यभार संभाला

ऋषिकेश।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में नए निदेशक प्रोफेसर डॉ. रविकांत ने शनिवार को कार्यभार संभाल लिया। पहले दिन उन्होंने अधिकारियों और फैकल्टी मेंबर से संस्थान की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। साथ ही उन्हें एम्स में इमरजेंसी सेवाएं शुरू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। एम्स ऋषिकेश निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे डॉ. संजीव मिश्रा के स्थान पर किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के कुलपति प्रो. रविकांत का केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने चयन किया था। बीते साल जुलाई में प्रो. राजकुमार ने त्यागपत्र दे दिया था। तभी से एम्स जोधपुर के निदेशक प्रोफेसर डॉ. संजीव मिश्रा एम्स ऋषिकेश का भी अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे थे। इससे संस्थान के कामकाज पर असर पड़ा। शनिवार को नए निदेशक प्रो. रविकांत ने एम्स पहुंचकर कार्यभार संभाला।
संस्थान में अधिकारियों और फैकल्टी मेंबर ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने सभी के साथ बैठक कर एम्स की प्रगति रिपोर्ट जानी। साथ ही निर्माणाधीन कार्यों औक मेडिकल सेवाओं की मौजूदा स्थिति के बारे में चर्चा की। प्रो. रविकांत ने अधिकारियों और फैकल्टी को संस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने, इमरजेंसी सेवाओं की शुरुआत और शेष निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए जरूरी निर्देश दिए।

प्रदेश में खुलेंगे दो होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज

देहरादून।
बुधवार को लोअर नेहरूग्राम में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इन दो राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों में एक रायपुर व दूसरा कोटद्वार में खोला जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन कॉलेजों की स्थापना के लिए भूमि चयन व अन्य औपचारिकताएं तुरंत शुरू कर दी जाएं। शुरुआत में यदि जिला होम्योपैथिक कार्यालय या अन्य जगह कक्षाएं संचालित करने की गुंजाइश बनती है तो इसके भी प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने जिला होम्योपैथिक कार्यालय में डिस्पेंसरी संचालित करने की भी घोषणा की। रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डिस्पेंसरी के संचालन के लिए एक डॉक्टर, फार्मेसिस्ट व अन्य स्टाफ की तुरंत व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा माहौल बनाना होगा किसी बीमार व्यक्ति के लिए आयुष अंतिम नहीं, पहला विकल्प बने। पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक आधार दिया जाए और शोधपरक सोच के साथ आगे बढ़ाएं। ताकि उत्तराखंड बाकी राज्यों के लिए भी मिसाल बने। इससे पूर्व कार्यक्रम अध्यक्ष एवं रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने क्षेत्र में होम्योपैथिक कॉलेज व नवनिर्मित कार्यालय में होम्योपैथिक डिस्पेंसरी खोलने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि होम्योपैथिक कॉलेज की भूमि के लिए वह व्यक्तिगत तौर पर प्रयास करेंगे। कार्यक्रम में ब्लाक प्रमुख बीना बहुगुणा, निदेशक आयुर्वेद डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी, निदेशक होम्योपैथी डॉ. बीएस कनवासी, जिला होम्योपैथी अधिकारी डॉ. जेपी नौटियाल, ग्राम प्रधान रमेश थापा, बीडीसी सदस्य लक्ष्मी नेगी आदि उपस्थित रहे।