राज्य के मेडिकल कॉलेजों की दशा सुधारने को एम्स तैयार

-श्रीनगर, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज गोद लेने को तैयार एम्स प्रशासन

ऋषिकेश।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के नए निदेशक प्रोफेसर डॉ. रविकांत वर्मा ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखण्ड राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने की जरूरत है। डॉक्टरों की कमी के चलते इसमें दिक्कत आती है। इसलिए वह श्रीनगर और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज को गोद लेने को तैयार हैं। उनके मेडिकल स्टूडेंट दोनों कॉलेजों में मरीजों का उपचार कर सकते हैं। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, राज्य सरकार और सेना के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि एम्स में तेजी से संसाधन जुटाए जा रहे हैं। डॉक्टर और स्टॉफ की कमी जल्द दूर हो जाएगी। आने वाले दिनों में बदलाव देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्ती में स्थानीय को प्राथमिकता दी जाएगी। एम्स के विस्तार के लिए राज्य सरकार से भूमि मांगी गई है। इस मामले में वह मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस में 960 बेड होंगे जिसमें 500 बेड सामान्य, 300 बेड सुपर स्पेसिशियलिटीज, 50आईसीयू, 50 ट्रामा सेंटर, 30 पीएमआर और 30 बेड आयुष विंग के बनाए जाने हैं।

जेनेरिक दवा लिखने के खिलाफ अस्पताल में एमआर का प्रदर्शन

ऋषिकेश।
सोमवार को एसोसिएशन की ऋषिकेश इकाई से जुड़े सदस्यों ने जेनेरिक दवा लिखने के विरोध में अस्पताल परिसर में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। यूनियन के अध्यक्ष सतीश सेमवाल ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में सिर्फ जेनेरिक दवाएं लिखने का निर्णय पूरी तरह से अव्यवहारिक है। उन्होंने कहा कि पहले दवाओं की कीमतें लागत के आधार पर तय होती थीं, अब मूल्य निर्धारण बाजार के नियंत्रण में है। ऐसे में बाजार में दवाएं नहीं मिलने पर आखिरकार लोगों को इलाज के दौरान परेशानियां उठानी पड़ेंगी।
सेमवाल ने बताया कि इससे फार्मा सेक्टर भी प्रभावित होगा। हजारों लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि फिलहाल यूनियन मौजूदा परिस्थितियों का आंकलन कर रही है। यह फैसला वापस नहीं हुआ तो संगठन जल्द ही आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरेगा। प्रदर्शन करने वालों में देवेंद्र जोशी, योगेंद्र शर्मा, विक्रम वशिष्ठ, दीप ममगाईं, निखिल मेहरा, सुमित शर्मा आदि शामिल थे।

अल्ट्रासाउंड न होने से नाराज महिलाओं ने सीएमएस को घेरा

ऋषिकेश।
मंगलवार को राजकीय अस्पताल में अल्ट्रासांउड केन्द्र बंद था। दूरदराज से गर्भवती महिलाएं जोखिम लेकर अस्पताल आईं थीं लेकिन घंटों इंतजार के बाद उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा था। काफी इंतजार के बाद जब अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ तो बाकी बची महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर अव्यवस्था को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए मुख्य गेट बंद कर दिया। वे नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन करने लगीं। उन्होंने कार्यालय पहुंच कर सीएमएस का घेराव किया और उनसे तीखी नोंकझोक की। महिलाओं के तेवर को देख अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस के बीच-बचाव पर सीएमएस ने अल्ट्रासाउंड कराने की बात कही। सीएमएस ने अवकाश पर गए चिकित्सक को अल्ट्रासाउंड करने के लिए अस्पताल बुला लिया। जिस पर महिलाओं का गुस्सा शांत हुआ। मौके पर सुरेश डिमरी, ज्योतिष डिमरी, शैलेन्द्र प्रसाद, संजय, शांति बाला, परमानंद, सुशीला, हिमानी, सरोजबाला आदि मौजूद रही।

नाइट शिफ्ट के चलते अल्ट्रासाउंड चिकित्सक अवकाश पर रहे जिस कारण परेशानी हुई। महिलाओं की शिकायत पर चिकित्सक को अस्पताल बुलाया गया। जिस पर दूर से आने वाली महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए गए।
डॉ. अशोक कुमार गैरोला, सीएमएस, राजकीय अस्पताल ऋषिकेश।

स्टॉफ ने दिखाए महिलाओं को तेवर
ऋषिकेश। अल्ट्रासाउंड के लिए पीड़ित महिलाएं मुखर रहीं। सीएमएस द्वारा चिकित्सक बुलाए जाने पर महिलाएं अल्ट्रासाउंड कक्ष में पहुंची जिनमें कई गर्भवती थीं। अल्ट्रासाउंड कक्ष में तैनात दो कर्मचारी महिलाओं की शिकायत पर नाराज दिखे। महिलाओं के पर्ची जमा करने और सीएमएस द्वारा अल्ट्रासांउड करने की जानकारी देने पर दोनों पहले तो महिलाओं से ही उलझने लगी। फिर बाद में कक्ष से यह कहकर चलती बनी कि सीएमएस को ही पर्ची जमा कराओ, वहीं करेंगे अल्ट्रसाउंड।

रेडियोथेरेपी की नई तकनीक पर मंथन

ऋषिकेश।
शनिवार को सीआरआई सभागार में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का मुख्य अतिथि डॉ. एसएन सेनापति और सीआरआई के निदेशक डॉ. सुनील सैनी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। कार्यशाला में एम्स दिल्ली, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुम्बई, पीजीआई चंडीगढ़ और सीएमसी वेल्लौर से आए रेडियोथेरेपी के 90 छात्रों ने भाग लिया। मुख्य वक्ता डॉ. राकेश कपूर, डॉ. विनीता गोयल, डॉ. डीएन शर्मा व डॉ. एम अशरफ ने छात्रों को रेडियोथेरेपी की नई तकनीकी की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि रेडियोथेरेपी की नई तकनीक इंटेसिव मॉडयूलेटेड रेडियोथेरेपी (आईएमआरटी) डोज द्वारा कैंसर फैलने की गति को धीमा किया जा सकता है।
इंडियन कॉलेज ऑफ रेडिएशन ऑकोलॉजिस्ट के चेयरमैन डॉ. एसएन सेनापति ने किडनी, गॉल ब्लैडर व प्रोस्टेट टैस्टिस कैंसर के इलाज की आधुनिक तकनीक को साझा किया। सीआरआई निदेशक डॉ. सुनील सैनी ने कहा कि कैंसर एक तेजी से फैलने वाली बीमारी के रूप में सामने आ रही है। जिसका मुख्य कारण अनियमित दिनचर्या और खान-पान है। ध्रूमपान, तम्बाकू सेवन और शराब को इसका मुख्य कारण बताया।
समारोह का संचालन कर रही डॉ. मीनू गुप्ता ने बताया कि कैंसर से बचाव के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य की जांच जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि पुरुषों को 50 की उम्र के बाद प्रोस्टेट कैंसर के लिए स्पैरिपिक एंटीजन टेस्ट कराना चाहिए। महिलाओं को भी रूटीन हेल्थ चेकअप कराने की सलाह दी। मौके पर डॉ. वाइएस बिष्ट, डॉ. विजेंद्र चैहान, डॉ. मुस्ताख अहमद, डॉ. मीनू गुप्ता, डॉ. विपुल नौटियाल, डॉ. राकेश कपूर व डॉ. मनीष पांडे आदि उपस्थित रहे।

प्रो. रविकांत ने एम्स निदेशक का कार्यभार संभाला

ऋषिकेश।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में नए निदेशक प्रोफेसर डॉ. रविकांत ने शनिवार को कार्यभार संभाल लिया। पहले दिन उन्होंने अधिकारियों और फैकल्टी मेंबर से संस्थान की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। साथ ही उन्हें एम्स में इमरजेंसी सेवाएं शुरू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। एम्स ऋषिकेश निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे डॉ. संजीव मिश्रा के स्थान पर किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के कुलपति प्रो. रविकांत का केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने चयन किया था। बीते साल जुलाई में प्रो. राजकुमार ने त्यागपत्र दे दिया था। तभी से एम्स जोधपुर के निदेशक प्रोफेसर डॉ. संजीव मिश्रा एम्स ऋषिकेश का भी अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे थे। इससे संस्थान के कामकाज पर असर पड़ा। शनिवार को नए निदेशक प्रो. रविकांत ने एम्स पहुंचकर कार्यभार संभाला।
संस्थान में अधिकारियों और फैकल्टी मेंबर ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने सभी के साथ बैठक कर एम्स की प्रगति रिपोर्ट जानी। साथ ही निर्माणाधीन कार्यों औक मेडिकल सेवाओं की मौजूदा स्थिति के बारे में चर्चा की। प्रो. रविकांत ने अधिकारियों और फैकल्टी को संस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने, इमरजेंसी सेवाओं की शुरुआत और शेष निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए जरूरी निर्देश दिए।

प्रदेश में खुलेंगे दो होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज

देहरादून।
बुधवार को लोअर नेहरूग्राम में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इन दो राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों में एक रायपुर व दूसरा कोटद्वार में खोला जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन कॉलेजों की स्थापना के लिए भूमि चयन व अन्य औपचारिकताएं तुरंत शुरू कर दी जाएं। शुरुआत में यदि जिला होम्योपैथिक कार्यालय या अन्य जगह कक्षाएं संचालित करने की गुंजाइश बनती है तो इसके भी प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने जिला होम्योपैथिक कार्यालय में डिस्पेंसरी संचालित करने की भी घोषणा की। रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डिस्पेंसरी के संचालन के लिए एक डॉक्टर, फार्मेसिस्ट व अन्य स्टाफ की तुरंत व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा माहौल बनाना होगा किसी बीमार व्यक्ति के लिए आयुष अंतिम नहीं, पहला विकल्प बने। पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक आधार दिया जाए और शोधपरक सोच के साथ आगे बढ़ाएं। ताकि उत्तराखंड बाकी राज्यों के लिए भी मिसाल बने। इससे पूर्व कार्यक्रम अध्यक्ष एवं रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने क्षेत्र में होम्योपैथिक कॉलेज व नवनिर्मित कार्यालय में होम्योपैथिक डिस्पेंसरी खोलने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि होम्योपैथिक कॉलेज की भूमि के लिए वह व्यक्तिगत तौर पर प्रयास करेंगे। कार्यक्रम में ब्लाक प्रमुख बीना बहुगुणा, निदेशक आयुर्वेद डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी, निदेशक होम्योपैथी डॉ. बीएस कनवासी, जिला होम्योपैथी अधिकारी डॉ. जेपी नौटियाल, ग्राम प्रधान रमेश थापा, बीडीसी सदस्य लक्ष्मी नेगी आदि उपस्थित रहे।

एम्स में आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन

ऋषिकेश।
बुधवार को एम्स ऋषिकेश के आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार कर परिसर में ही धरना देते हुए एम्स प्रशासन से गुहार लगाईं। प्रशासन को सौंपे पत्र में कर्मचारियों ने आउटसोर्सं कपंनी पर कर्मचारियों का मनचाहा वेतन काटने का गंभीर आरोप लगाया है। कर्मचारियों ने पीएफ मानकों के अनुरूप नही काटने, 2016 से महंगाई भत्ता की स्वीकृति एम्स प्रशासन से मिलने के बाद भी कर्मचारियों को इसका लाभ न देने की बात कही। कहा कि जानकारी लेने पर निकालने की धमकी दी जाती है। एम्स प्रशासन से वार्ता के बाद दोपहर 12 बजे कर्मचारी अपने काम पर लौट गए। कर्मचारियों के कार्यबहिष्कार से एम्स में कुछ समय के लिए व्यवस्थाएं चरमरा गई। एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने बताया कि एम्स प्रशासन ने कर्मचारियों के मांग पत्र को गंभीरता से लिया है। कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान हो, इसके लिए आउटसोर्स कंपनी को तलब किया जा रहा है। आउटसोर्स कंपनी को नियम और ठेका शर्तों का पालन करना होगा।

व्यवस्था परिवर्तन मंच ने किया युवाओं को जागरूक

ऋषिकेश।
शुक्रवार को सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक परिसर में रक्तदान शिविर का मंच के प्रदेश अध्यक्ष डा. राजे सिंह नेगी ने शुभारंभ किया। शिविर में ब्लड डोनेशन के लिए 30 से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया। जिसमें से 24 युवाओं को रक्तदान के लिए ही स्वस्थ पाया गया। शेष युवाओं में हीमोग्लोबिन, वजन और ब्लड प्रेशर की कमी मिली। ब्लड बैंक प्रभारी डा. मुकेश पांडेय ने रक्तदाताओं को स्वस्थ रहने के लिए समुचित खानपान, पानी का अधिक उपयोग करने की सलाह दी। साथ ही रक्तदान को प्रेरित किया।
इस दौरान मंच अध्यक्ष डा. नेगी ने विश्व स्वास्थ्य दिवस पर प्रकाश डाला। बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा हर व्यक्ति को समुचित उपचार देने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से यह दिन निर्धारित किया। ताकि दुनिया में रक्ताल्पता, पोलियो, टीबी, मलेरिया, एड्स, स्वाइन फ्लू जैसी बिमारियों की रोकथाम की जा सके।
शिविर में शहर के अलावा हरिपुरकलां, श्यामपुर, गुमानीवाला, बापूग्राम, ढालवाला, चौदहबीघा, आदि इलाकों से युवाओं ने प्रतिभाग किया। मौके पर ज्योत्सना थपलियाल, भूपेंद्र फरस्वाण, संदीप पांडेय, विक्की कठैत, राजा ढिंगरा, एचबी नौडियाल, उत्तम सिंह असवाल, लक्ष्मण धर्मशक्तू, वीरेंद्र नौटियाल, रवि कुकरेती, धूर्म ंसह रावत, द्वारिका भट्ट, नितेश अग्रवाल, बलराम शाह आदि ने सहयोग किया।

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर एसआरएचयू ने किया लोगों को जागरूक

डोईवाला।
विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मानसिक चिकित्सा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रजत रे ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संस्था के आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में 350 मिलियन लोग अवसाद से ग्रसित हैं। बताया कि अवसाद के कई कारण हंै। जिसमें व्यक्ति का विपरीत परिस्थितियों के साथ तालमेल करने में असफल रहने पर नकारात्मक हो जाना प्रमुख है। उन्होंने मरीजों को पुरानी बातें भूलकर तनाव से बचने की सलाह दी।
सामुदायिक चिकित्सा विभाग की ओर से डॉ. एके श्रीवास्तव की अगुवाई में कुड़कावाला डोईवाला में अवसाद को लेकर जागरूकता रैली निकालने के साथ नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। जिसमें एमबीबीएस के छात्रों ने राइका तेलीपाड़ा में नुक्कड़ नाटक व पोस्टर प्रर्दशनी से बच्चों को अवसाद के लक्षणों व उपचार की जानकारी दी। साथ ही रैली से लोगों को सही जीवनशैली अपनाने को जागरूक किया।
सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. जयंती सेमवाल ने बताया कि आजकल के समय में उम्रदराज व व्यस्क व्यक्तियों के अलावा युवा वर्ग भी अवसाद की चपेट में तेजी से आ रहा है। इसका कारण युवकों को अपने करियर में कड़ी प्रतिस्पद्र्धा एक कारण है। जिससे लक्ष्य तय करने में उन्हें अवसाद जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। इस अवसर पर डॉ. एके श्रीवास्तव, डॉ. शिल्पी, डॉ. रजनीश, फरजाना अंसारी, रीता भट्ट व आराधना मौजूद थे।

160 किलो की महिला ने दिया स्वस्थ बच्ची को जन्म

ऋषिकेश।
हार्मोनल अंसुतलन के कारण 34 वर्षीय देहरादून निवासी संजना का वजन 160 किग्रा है। संजना के पहले से दो बच्चे हैं। तीसरी बार जब संजना ने गर्भधारण किया तो प्रसव की जटिलताओं के कारण दून के ज्यादातर चिकित्सकों ने उनका केस लेने से मना कर दिया। ऐसे में उन्होंने एम्स ऋषिकेश से संपर्क किया। अत्यधिक जटिलता के कारण एम्स के डॉक्टरों ने संजना को हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट रेफर किया।
यहां पर महिला रोग चिकित्सक डॉ. देवनंदा चौधरी ने संजना की प्रारंभिक जांचों के बाद सर्जरी का फैसला लिया। बताया कि संजना के पहले दोनों बच्चे भी सर्जरी से ही पैदा हुए थे। हालांकि इस बार बहुत ज्यादा वजन और हाई ब्लड प्रेशर के कारण सर्जरी में जटिलाताएं और भी बढ़ गईं। बच्चे के गले में गर्भनाल भी लिपटी हुई थी। कुछ घंटों की जटिल सर्जरी के बाद संजना ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
सर्जरी सफल बनाने में डॉ. दीपमाला, डॉ. गुरजीत खुराना, डॉ. पारुल का विशेष योगदान रहा। स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने हाईरिस्क सर्जरी सफल बनाने वाले डॉक्टरों की टीम को बधाई दी। साथ ही उन्होंने संजना और बच्चे के स्वास्थ्य लाभ की कामना की।