विश्वप्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के खुले कपाट, अखंड ज्योति के हुए दर्शन


श्री बदरीनाथ धाम के कपाट आज मंगलवार को वैदिक मंत्रोचार एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान से आज मेष लग्न पुष्य नक्षत्र में प्रातः 4 बजकर 15 मिनट पर खोल दिये गये है। ग्रीष्म काल में निरंतर भगवान बदरीविशाल की पूजा- अर्चना होगी।

मंदिर तथा मंदिर मार्ग को श्री बदरी-केदार पुष्प सेवा समिति द्वारा लगभग 20 क्विंटल फूलों से सजाया गया था‌। प्रातः तीन बजे से ही कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो गयी श्री कुबेर जी बामणी गांव से लक्ष्मी द्वार से मंदिर प्रांगण पहुंचे। श्री उद्धव जी भी मुख्य द्वार से अंदर पहुंचे। ठीक प्रातः 4 बजकर 15 मिनट पर श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुले इस अवसर पर कुछ ही लोग अखंड ज्योति के गवाह बने। रावल द्वारा गर्भगृह में प्रवेशकर मां लक्ष्मी को उनके परिक्रमा स्थित मंदिर में विराजमान किया तत्पश्चात भगवान के सखा उद्धव जी एवं देवताओं के खजांची श्री कुबेर मंदिर गर्भगृह में विराजमान हो गये। डिमरी पंचायत प्रतिधियों द्वारा भगवान बदरीविशाल के अभिषेक हेतु राजमहल नरेन्द्र नगर से लाये गये तेल कलश( गाडू घड़ा) को गर्भ गृह में समर्पित किया।

इसके साथ ही भगवान को माणा गांव के महिला मंडल द्वारा शीतकाल में कपाट बंद करते समय औढाया गया घृतरू कंबल उतारा गया तथा प्रसाद स्वरूप बांटा गया। भगवान के निर्वाण दर्शन के बाद अभिषेक किया गया। तत्पश्चात भगवान बदरीविशाल का श्रृंगार किया गया। इस तरह निर्वाण दर्शन से श्रृंगार दर्शन की प्रक्रिया पूरी होती है। इस संपूर्ण पूजा प्रक्रिया में रावल, डिमरी भीतरी वडुवा, आचार्यों, हक हकूकधारियों, तीर्थ पुरोहितों की भूमिका रही।
श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने पर प्रथम महाभिषेक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से जनकल्याण एवं आरोग्यता की भावना से समर्पित किया गया है। श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सभी श्रद्धालुजनों को बधाई दी है तथा सभी के आरोग्यता की कामना की। कहा कि लोग अपने घरों में रहकर पूजापाठ करें।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कपाट खुलने पर प्रसन्नता जताई कहा कि कोरोना की समाप्ति के बाद चारधाम यात्रा पुनः शुरू होगी।

पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर बधाई दी है कहा कि श्री बदरीनाथ धाम को आध्यात्मिक हब के रूप में विकसित करने हेतु शासन के स्तर पर प्रयास जारी है। कई संस्थाये इसके लिए आगे आ रही है।

गढ़वाल आयुक्त व उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने कहा कि श्री बदरीनाध धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारों धामों के कपाट खुलने पर प्रसन्नता जताई। कहा अभी यात्रियों को यात्रा की अनुमति नहीं है लेकिन स्थितियां सामान्य होने पर यात्रा को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा सकता है।
कपाट खुलने के अवसर पर रावल ईश्वरीप्रसाद नंबूदरी, देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.डी.सिंह, उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चैहान, उप मुख्य कार्याधिकारी सुनील तिवारी, डिमरी पंचायत पदाधिकारी आशुतोष डिमरी, विनोद डिमरी, तहसील दार चंद्रशेखर वरिष्ठ पुलिस जिला प्रशासन आईटीबीपी, सेना के अधिकारी मौजूद रहे।

देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी. डी. सिंह ने बताया कि देवस्थानम बोर्ड द्वारा मंदिर परिसर,बस टर्मिनल तथा स्वागत कार्यालय, आवासों में पर्याप्त सेनिटाईजेशन किया है, कपाट खुलने के दौरान कोविड बचाव मानकों का पालन हुआ मास्क पहनना, सोशियल डिस्टेंसिंग, सेनिटाईजर, थर्मल स्क्रीनिंग का प्रयोग हो रहा है।
देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने जानकारी दी कि श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही मंदिर परिक्रमा स्थित मंदिरों माता लक्ष्मी मंदिर, हनुमान जी, गणेश जी, श्री आदि केदारेश्वर, श्री शंकराचार्य मंदिर, माता मूर्ति मंदिर माणा तथा पंच बदरी में एक श्री भविष्य बदरी मंदिर के कपाट भी खुल गये है जबकि चारधामों में से श्री यमुनोत्री धाम के कपाट 14 मई, श्री गंगोत्री धाम के 15 मई, श्री केदारनाथ धाम के कपाट 17 मई को खुल चुके है। तृतीय केदार तुंगनाथ जी एवं चतुर्थ केदार रूद्रनाथ जी के कपाट भी 17 मई को खुल गये है। द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर के कपाट 24 मई को खुल रहे हैं जबकि श्री हेमकुंड गुरूद्वारा साहिब तथा लोकपाल श्री लक्ष्मण मंदिर के कपाट खुलने की तिथि अभी तय नहीं है।

कल खुलने जा रहे बदरी विशाल के कपाट, मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनायें

आदि गुरू शंकराचार्य की गद्दी, उद्धव, कुबेर रावल ईश्वरीय प्रसाद नंबूदरी एवं श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के प्रतिनिधि तेल कलश गाडू घड़ा सहित श्री योगध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर से श्री बदरीनाथ धाम पहुंचे।

कल ब्रह्म मुहुर्त 4 बजकर 15 मिनट में श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। इस अवसर हेतु श्री बदरी-केदार पुष्प सेवा समिति ने श्री बदरीनाथ धाम को फूलों से सजाया है।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने श्रद्धालुओं को शुभकामनायें देते हुए घर से ही पूजा अर्चना करने का आग्रह किया है।

देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि कपाट खुलने की तैयारिया पूर्ण कर दी गयी है। आदिगुरू शंकराचार्य की जयंती पर आज श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ में सादगी पूर्वक आदि गुरू शंकराचार्य का स्मरण किया गया। रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने आदि गुरू शंकराचार्य महाराज की वैदिक परंपराओं को अक्षुण बनाये रखने का आवह्वान किया।
इस अवसर पर उप मुख्य कार्याधिकारी सुनील तिवारी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, डिम्मर उम्मटा डिमरी पंचायत अध्यक्ष आशुतोष डिमरी, डिमरी केंद्रीय पंचायत अध्यक्ष विनोद डिमरी आदि मौजूद रहे।

श्री केदारनाथ धाम के खुले कपाट, पीएम ने नाम से किया गया रूद्राभिषेक

ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ धाम के कपाट विधि विधान पूर्वक मंत्रोचारण के साथ आज सोमवार मेष लग्न, पुनर्वसु नक्षत्र में प्रातरू पांच बजे खुल गये हैं। कपाट खुलने की प्रक्रिया प्रातरू तीन बजे से शुरू हो गयी थी। रावल भीमाशंकर एवं मुख्य पुजारी बागेश लिंग तथा देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.डी. सिंह एवं जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग मनुज गोयल ने पूरब द्वार से मंदिर मुख्य प्रांगण में प्रवेश किया।

मुख्य द्वार पर पूजा अर्चना की मंत्रोचार के पश्चात ठीक पांच बजे भगवान केदारनाथ मंदिर के कपाट खोल दिये गये। मंदिर के कपाट खुलने के पश्चात मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने स्यंभू शिवलिंग को समाधि से जागृत किया तथा निर्वाण दर्शनों के पश्चात श्रृंगार तथा रूद्राभिषेक पूजाएं की गयी। श्री केदारनाथ धाम में भी प्रथम रूद्राभिषेक पूजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से की गयी तथा जनकल्याण की कामना की गयी। कोरोना महामारी को देखते हुए चारधाम यात्रा अस्थायी तौर पर स्थगित है धामों में केवल पूजापाठ संपन्न हो रही है यात्रियों को आने की अनुमति नहीं है। केदारनाथ के कपाट खुलते समय पूजापाठ से जुड़े चुंनिंदा लोग मौजूद रहे। धाम में मौसम सर्द है मंदिर के कुछ दूरी पर बर्फ मौजूद है। तथा रास्ते में कहीं- कहीं हिमखंड नजर आ रहे है।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर प्रसन्नता ब्यक्त की है तथा भी के आरोग्यता की कामना की है। कहा है कि कोरोना महामारी के कारण अस्थाई तौर पर यात्रा स्थगित है सभी लोग वर्चुअली दर्शन करें तथा अपने घरों में पूजा-अर्चना करें।

पर्यटनमंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि कोरोना महामारी समाप्त होगी तथा शीघ्र चारधाम यात्रा शुरू होगी। उल्लेखनीय है कि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की पहल पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से जनकल्याण की भावना के साथ सभी धामों में प्रथम पूजा संपन्न करवायी जा रही है।

श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर ऋषिकेश के दानीदाता सौरभ कालड़ा ग्रुप द्वारा श्री केदारनाथ मंदिर को 11 क्विंटल फूलों से सजाया गया था। इस अवसर पर रावल भीमाशंकर लिंग, केदार लिंग, मुख्य पुजारी बागेश लिंग, देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.डी. सिंह, जिलाधिकारी मनुज गोयल, पुलिस क्षेत्राधिकारी अनिल मनराल बीकेटीसी पूर्व सदस्य शिवसिंह रावत, एसडीएम रवीन्द्र वर्मा, तहसीलदार जयराम बधाड़ी, धर्माधिकारी आचार्य औंकार शुक्ला, मंदिर प्रशासनिक अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, प्रबंधक अरविंद शुक्ला एवं प्रदीप सेमवाल, पारेश्वर त्रिवेदी, महावीर तिवारी,मृत्युंजय हीरेमठ, विपिन कुमार आदि मौजूद रहे।

पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने बताया की श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के पश्चात केदारनाथ मास्टर प्लान कार्यों में अधिक गति आयेगी।

कपाट खुलने के दौरान कोरोना बचाव मानकों का पालन किया गया। मास्क, सेनिटाईजर, थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य किया गया। उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने कपाट खुलने के लिए एसओपी द्वारा ब्यापक दिशा निर्देश जारी किये हैं। केदारनाथ में जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ तथा स्वास्थ्य विभाग, विद्युत, जल संस्थान की टीम अपना कार्य कर रही हैं।

देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 18 मई प्रातः 4 बजकर 15 मिनट पर खुल रहे है। आज श्री योगध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर से आदि गुरू शंकराचार्य की गद्दी के साथ उद्धव, कुबेर तथा तेलकलश (गाडू घड़ा) श्री बदरीनाथ धाम पहुंचेगा। तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट आज दोपहर में खुल रहे है जबकि चतुर्थ केदार रूद्रनाथ के कपाट भी आज खुल रहे हैं। द्वितीय केदार मदमहेश्वर के कपाट 24 मई को खुल रहे हैं। जबकि गुरूद्वारा श्री हेमकुंड साहिब एवं श्री लक्ष्मण मंदिर के कपाट खुलने की तिथि अभी निश्चित नहीं है।

17 मई को श्री केदारनाथ धाम के खुलेंगे कपाट

श्री केदारनाथ धाम के कपाट सोमवार 17 मई को प्रातः 5 बजे खुलेंगे। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने श्रद्धालुओं को शुभकामनायें दीं हैं। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि अपने घरों में रहकर पूजा- अर्चना करें।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि देवस्थानम बोर्ड एंव मंदिर समितियों द्वारा चारों धामों में पहली पूजाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से जनकल्याण हेतु की जा रही हैं। बीते कल शाम श्री केदारनाथ भगवान की पंचमुखी डोली केदारनाथ धाम पहुंची। कल सोमवार को प्रात: 5 बजे श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंंगे। जबकि श्री यमुनोत्री धाम के कपाट 14 मई तथा श्री गंगोत्री धाम के कपाट 15 मई को खुल चुके है।

श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 18 मई को प्रात: 4 बजकर 15 बजे खुल रहे है। श्री नृसिंह मंदिर से आदि गुरू शंकराचार्य जी की गद्दी, रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी के साथ योगध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर पहुंच गयी है। कल शाम उद्धव एवं कुबेर के साथ ही आदि गुरू शंकराचार्य की गद्दी श्री बदरीनाथ धाम पहुंच जायेगी।

कोविड के दृष्टिगत चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित किया जा चुका है। नित्यनियम से पूजा – अर्चना चलेगी। धामों में पूजपाठ से जुड़े लोगों को जाने की अनुमति है तथा कोरोना बचाव मानकों का पालन हो रहा है।

देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा.हरीश गौड़ ने बताया कि श्री बदरीनाथ धाम तथा श्री केदारनाथ धाम में देवस्थानम बोर्ड ने कपाट खुलने की तैयारियां पूरी कर ली है। सेनिटाईजेशन, साफ-सफाई, बिजली-पानी की आपूर्ति, रावल, पुजारियों, वेदपाठियों हेतु आवास ब्यवस्था की गयी है। मास्क पहनना, सोशियल डिस्टेंसिंग, थर्मल स्क्रीनिंग को अनिवार्य किया गया है।

देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.डी सिंह केदारनाथ धाम में ब्यवस्थाओं का अवलोकन कर रहे है। गढ़वाल आयुक्त/ उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने चारधाम के कपाट खुलने के अवसर पर कोविड गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

पीएम मोदी के मार्गदर्शन में आपदा के बाद पुनर्निमाण के कार्य अब अंतिम चरण मेंः तीरथ सिहं रावत

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत व केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में श्री केदारनाथ उत्थान ट्रस्ट व तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की पब्लिक सेक्टर कंपनियों के मध्य श्री बद्रीनाथ धाम को स्मार्ट स्प्रीचवल टाउन के रूप में विकसित करने को लेकर लगभग 100 करोड़ के कार्यों के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। समझौता पत्र पर पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से सचिव तन्नू कपूर व उत्तराखंड की ओर से पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने हस्ताक्षर किए।

सचिवालय में वर्चुअल रूप से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा व मार्गदर्शन में वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद पुनर्निर्माण के कार्य शुरू हुए थे जो कि अब अपने अंतिम चरणों में हैं। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री ने बदरीनाथ धाम के कायाकल्प का भी निर्णय लिया। यहां आगामी 100 वर्षों की आवश्यकताओं के मद्देनजर सुविधाओं का विकास कुल 85 हेक्टेयर भूमि में चरणबद्ध तरीके से कार्य किये जाने हैं। बदरीनाथ धाम में यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के विशेष प्रयास किये जा रहे हैं।

इसी के साथ यहां पर व्यास गुफा, गणेश गुफा व चरण पादुका आदि का भी पुनर्विकास किया जाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदरीनाथ धाम के विकास में तेल कंपनियों का योगदान सराहनीय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का फोकस क्षेत्र में होमस्टे को बढ़ावा देने पर है ताकि श्रद्धालुओं को यहां आने पर सस्ती सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी तीन वर्षों में बदरीनाथ धाम के कायाकल्प के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने बदरीनाथ धाम में किये जा रहे कार्यों के लिए विशेष तौर पर प्रधानमंत्री जी व पेट्रोलियम मंत्री का विशेष आभार जताया।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उत्तराखण्ड के चार धामों का विशेष महत्त्व है। बदरीनाथ धाम के कायाकल्प को लेकर तेल कंपनियां प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बदरीनाथ व केदारनाथ धामों की भांति ही उत्तरकाशी में गंगोत्री व यमनोत्री धामों के लिए भी कुछ कार्य कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम को प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप स्मार्ट स्प्रीचवल टाउन के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां पर अलकनंदा नदी के तटबंध कार्यों के अलावा प्लाजा, जल निकासी, सीवेज, लाइट, सीसीटीवी, पीए सिस्टम, शौचालय, पुल आदि के सौंदर्यीकरण व पुनर्निर्माण के कार्य होने प्रस्तावित हैं।

प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि श्री बदरीनाथ धाम का धार्मिक के साथ ही आर्थिक महत्व भी है। यहां से हजारों लोगों को रोजगार भी मिलता है। उन्होंने कहा कि पुनर्निर्माण कार्यो के दौरान हमें इस बात का भी ध्यान रखना है कि यहां पर पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे। प्रथम चरण में यहां पर अस्पताल के विस्तारीकरण का कार्य प्रस्तावित है। इसके अलावा रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, तटबंधों में सुदृढ़ीकरण, लैंड सकेपिंग, भीड़ होने पर होल्डिंग एरिया, पुलों की रेट्रोफिटिंग आदि कार्य होने हैं। मौके पर मुख्य सचिव ओमप्रकाश भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से एक वीडियो भी दिखाया गया जिसमें यहां होने वाले विभिन्न कार्यों के बारे में बताया गया।

महाकुंभ का मुख्य शाही स्नान सफलता पूर्वक सम्पन्न


कुम्भ मेला का मुख्य शाही स्नान सकुशल और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो गया। मेष संक्रांति के स्नान पर विगत के कुम्भ मेलों में घटित कुछ अप्रिय घटनाओं के इतिहास एवं कोविड की अभूतपूर्व चुनौतियों को देखते हुए शाही स्नान को सुव्यवस्थित व निर्विघ्न संपन्न कराना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा था। इन चुनौतियों के बीच मुख्य शाही स्नान बिना किसी अप्रिय घटना के सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। सायं तक 13 लाख 51 हजार श्रद्धालु कुम्भ क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर स्नान कर चुके थे।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कुम्भ मेले के मुख्य शाही स्नान के सकुशल सम्पन्न होने पर मेले से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों, स्वयं सेवी संस्थाओं सहित सभी जनमानस को बधाई देते हुए हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 की चुनौतियों का सामना करते हुए मेले से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मिकों ने जिस मनोयोग से कुम्भ की व्यवस्थाओं को संभाला तथा देश-विदेश के श्रद्वालुओं को सुविधाएं उपलब्ध करायी, वह सराहानीय है। शाही स्नान सकुशल सम्पन्न होने से राज्य सरकार की दिव्य-भव्य एवं सुरक्षित कुम्भ की परिकल्पना भी साकार हुई है। मुख्यमंत्री ने कुम्भ मेले से सफल आयोजन का सामूहिक प्रयासों का भी नतीजा बताते हुए साधु-संतों, अखाडों, मेला क्षेत्र की जनता, व्यापारियों, गंगा सभा, तीर्थ पुरोहितों, मीडियाकर्मियों, स्वयंसेवी संगठनों आदि का भी अत्यधिक उल्लेखनीय सहयोग रहा है। जिसके लिए सभी लोग बधाई के पात्र है।

मेला अधिकारी दीपक रावत ने शाही स्नान सम्पन्न होने के बाद मीडिया सेंटर कुम्भ मेला में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुम्भ मेलों के बैसाखी के शाही स्नानों में कुछ छोटी मोटी घटनाएं हुई थी, इसलिए मेला प्रशासन व पुलिस के आपसी सहयोग से इसे सफल बनाने की पूरी कोशिश की थी और इसमें हम सब सफल रहे। उन्होंने इस सफलता के लिए पुलिस, स्वयंसेवी संस्थाओं व सफाई कर्मियों के अलावा व्यापारी व आम जनता का भी आभार प्रकट करते हुए कहा कि थोड़ी बहुत परेशानी के बावजूद उन्होंने पूरे दिल से प्रशासन का साथ दिया। उन्होंने बताया कि कोरोना के मध्यनजर जिला स्वास्थ्य विभाग व मेले में जुड़ी अन्य एजेंसियों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 50 हजार टेस्ट हो रहे हैं।

पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल ने बताया कि मेला क्षेत्र की सीमाओं पर श्रद्धालुओं के कोबिड सर्टिफिकेट की सघन जांच हो रही है, जिस कारण सर्टिफिकेट न होने पर अब तक 56 हजार श्रद्धालुओं को सीमा से ही वापस लौटाया जा चुका है। उन्होंने शाही स्नान को सफलता से आयोजित करने में राज्य की पुलिस सहित केन्द्रीय अर्द्धसैनिक बलों, अन्य राज्यों की पुलिस एवं पी.एस.सी., होमगार्ड्स आदि की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इस बार पुलिस, केन्द्रीय सुरक्षाबलों के अतिरिक्त पहली बार एन.एस.जी को भी तैनात किया गया था। कोरोना काल के बावजूद शाम तक करीब 13 लाख 51 हजार लोग गंगा में पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुम्भ मेला जनमेजय खण्डूड़ी नेग मेला में सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी दी।
नोडल अधिकारी सूचना मनोज श्रीवास्तव ने देशभर के मीडिया के साथ साथ स्थानीय मीडिया का धन्यवाद करते हुए कहा कि खासकर स्थानीय मीडिया ने मेला प्रशासन के मिलकर एक मेजबान की भूमिका भी निभाई और कुम्भ की महत्ता को पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री तीरथ ने वर्चुअली प्रेसवार्ता कर दी शाही स्नान को लेकर अपडेट

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि हरिद्वार महाकुंभ 2021 के दूसरे शाही स्नान का आयोजन भी कोविड 19 की गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए दिव्यता व भव्यता के साथ संपंन हो गया है। सुरक्षित और सफल आयोजन में सहयोग के लिए सभी सहयोगियों का आभार।

सचिवालय में पत्रकारों से वर्चुअली बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हुए शाही स्नान में अखाड़ों के संत समाज से लेकर लाखों की तादाद में श्रद्धालुओं ने हरिद्वार कुंभ 2021 में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ कमाया। उन्होंने प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बताया सोमवती अमावस्या पर हुए दूसरे शाही स्थान को लेकर श्रद्धालुओं में बहुत उत्साह रहा। सुबह आठ बजे तक ही 15 लाख श्रद्धालू स्नान कर चुके थे। वहीं सायं 6 बजे जो आंकड़ा आया है उसमें स्नान करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 28 लाख पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी उम्मीद है कि शाही स्नान के समापन तक करीब 35 लाख श्रद्धालु स्नान कर लेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड की विपरीत परिस्थितियों में हो रहे कुंभ के आयोजन में चुनौतियां बहुत हैं। लेकिन हमारी सरकार ने उस चुनौती का स्वीकार किया है और कुंभ को दिव्यता और भव्यता के साथ सुरक्षित ढंग से संपंन कराया जा रहा है। कहा कि मेले में संत समाज की हर सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उनके स्वागत में कोई कमी नहीं है। किसी श्रद्धालू को भी कहीं परेशानी का सामना ना करना पड़े इसका अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कुंभ में व्यवस्थाएं दुरूस्त करने के लिए हर अखाड़े के स्नान का समय निर्धारित है। और श्रद्धालुओं के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में टीका उत्सव के लिए व्यवस्थाएं पूरी की गई हैं। और टीकाकरण को जनपद से लेकर ब्लाक व न्याय पंचायत स्तर पर कराने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। कहा कि टीकाकरण को लेकर अन्य प्रांतों की अपेक्षा हम बहुत बेहतर स्थिति में हैं। इसके लिए भारत सरकार की ओर से मिल रहे सहयोग के लिए मुख्यमंत्री ने उन्होंने हृदय से आभार जताया।

श्रृंगेरी मठ के पीठाधीश्वर ने जाना श्री भरत मंदिर का प्राचीन इतिहास

श्रृंगेरी मठ के पीठाधीश्वर का श्री भरत मंदिर आगमन पर भरत मंदिर परिवार एवं ऋषि कुमारों ने वेद मंत्रों द्वारा भव्य स्वागत हुआ। अनंत विभूषित शंकराचार्य योगानंन्दइसबना महाराज द्वारा ऋषिकेश नारायण श्री भरत महाराज के दर्शन किए गए। साथ ही सनातन धर्म की रक्षा के लिए नवी शताब्दी में उत्तर भारत प्रवास की यादें ताजा की गईं।

प्रातः स्मरणीय स्वामी की ओर से मुख्य मंदिर में स्थित विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियों के बारे में अपने शिष्यों को विस्तार से बताया। श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य महाराज द्वारा शंकराचार्य को मंदिर परिवार का भ्रमण कराते हुए श्री भरत मंदिर के प्राचीन इतिहास के बारे में बताया। आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित ऋषिकेश नारायण श्री भक्त भगवान की मूर्ति को देखकर स्वामी जी भाव विह्वल हुए एवं समस्त भरत मंदिर परिसर की अच्छी देखभाल करने के लिए साधुवाद दिया। तत्पश्चात शंकराचार्य का काफिला हरिद्वार के लिए रवाना हो गया।

इस अवसर पर हर्षवर्धन शर्मा, वरुण शर्मा, हरि नारायणाचार्य, बंशीधर पोखरियाल, आईडी जोशी, पंडित रवि शास्त्री, धीरेंद्र जोशी आदि उपस्थित रहे।

कलश यात्रा लेकर गंगा तट पर पहुंची मेयर ने परखी शाही स्नान की तमाम व्यवस्थाएं

आस्था के महाकुंभ सोमवती अमावस्या के दूसरे शाही स्नान पर मेयर अनिता ममगाई ने देश और दुनिया भर के लोगों को महापर्व की बधाई दी। कृष्ण कुंज आश्रम से शहर के संतों, महंतो और महामंडलेश्वर के साथ कलश यात्रा लेकर त्रिवेणी घाट पहुंची।

मेयर अनिता ममगाईं ने इस मौके पर कहा कि गौ, गंगा और गायत्री की पावन भूमि में इन दिनों कुंभ क्षेत्र होने की वजह से इसकी आभा में चार चांद लगे हुए हैं। उन्होंने स्नानार्थियों को सोमवती अमावस्या पर्व की शुभकामनाएं दीं। वहीं, मेयर ने कुंभ पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं से केंद्र सरकार द्वारा जारी कोरोना की गाइडलाइन का पालन करने की अपील भी की।

कहा कि भगवान शिव की आराधना की प्रतीक पुण्यदायी मौनी और सोमवती अमावस्या का बड़ा महात्म्य है। इससे पूर्व संत समाज द्वारा निकाली गई धार्मिक यात्रा में शिरकत करते हुए नगर की हृदय स्थली त्रिवेणी घाट पहुंची मेयर ने तमाम व्यवस्थाओं का बारीकी के साथ जायजा लिया। गंगा स्नान के दौरान किसी भी तरह की कोई चूक ना हो जाए इसको लेकर मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को उन्होंने आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए।

महंत रामकृपालु को श्रद्धांजलि देकर नए महंत बने श्याम चरण महाराज

श्री भरत मिलाप आश्रम में आज ब्रह्मलीन महंत रामकृपालु महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वहीं, श्याम चरण दास महाराज नए महंत बनाए गए।

मायाकुंड में श्री भरत मिलाप आश्रम में आयोजित पट्टाभिषेक कार्यक्रम के शुभारंभ में सभी आगन्तुकों ने ब्रह्मलीन महंत रामकृपालु महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री विरक्त वैष्णव षड्दर्शन संप्रदाय के महामंडलेश्वर रामानंद आश्रम के महंत स्वामी अभिराम दास महाराज की अध्यक्षता एवं महामंडलेश्वर ईश्वर दास महाराज के संचालन में श्याम चरण दास महाराज का पट्टाभिषेक किया गया। उन्हें महंताई की चादर ओढ़ाकर श्री भरत मिलाप आश्रम के महंत की जिम्मेदारी सौंपी गई। ब्रह्मलीन राम कृपालु दास महाराज के शिष्य गोपाल बाबा ने बताया कि श्याम चरण दास महाराज उनके गुरु भाई हैं और उन्हें आश्रम की जिम्मेदारी मिली है।

मौके पर महामंडलेश्वर अभिराम दास महाराज, रामेश्वर दास महाराज, महामंडलेश्वर दयाराम दास महाराज, महामंडलेश्वर ईश्वर दास महाराज, रामानुजाचार्य गोपाल आचार्य महाराज, डॉ. नारायण दास महाराज, महंत दुर्गादास, महंत विष्णु दास, महामंडलेश्वर राम नरेश आचार्य, लोकेश दास महाराज, पुजारी वृंदावन दास महाराज, सुरेश दास महाराज, केदारनाथ श्रीनिवास, विजयानंद महाराज, मां साध्वी वंदना मिश्रा, मेयर अनीता मंमगाईं, अरविंद पांडे, परमानंद दास महाराज, पंडित रवि शास्त्री, राम चैबे, अभिषेक शर्मा, गुरविंदर सलूजा, आईडी जोशी, रमाकांत भारद्वाज, धीरेंद्र जोशी, अमित गांधी, मनोज तिवारी आदि उपस्थित रहे।