पैसा कमाने के लिए शराब बनाया जाना उत्तराखंड के लिए आत्महत्याः खंडूड़ी

देवप्रयाग के नजदीक और टिहरी में शराब के बॉटलिंग प्लांट को मंजूरी दिए जाने के फैसले के खिलाफ वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी भी उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि पैसा कमाने के लिए शराब बनाया जाना उत्तराखंड के लिए आत्महत्या जैसी बात है। देवप्रयाग से करीब 36 किलोमीटर दूर शराब के बॉटलिंग प्लांट को मंजूरी दी गई और वहां बॉटलिंग शुरू भी हो गई है। इसके अलावा टिहरी में भी एक कंपनी को बॉटलिंग प्लांट की अनुमति दी गई है।
हालांकि, ये फैसले पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए थे, लेकिन धरातल पर अब उतर रहे हैं। शराब के बॉटलिंग प्लांट को लेकर इन दिनों राज्य में सियासत गर्माई हुई है। प्रदेश में सत्तासीन भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस मसले पर एक-दूसरे पर आरोप मढ़ने में लगे हैं।
वहीं, अब वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी भी शराब के बॉटलिंग प्लांट के विरोध में उतर आए हैं। दिल्ली में जारी वक्तव्य में पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी ने कहा कि शराब से पहाड़ के जनमानस का नुकसान हो और वहां के लोग जमीन जायदाद बेचकर शराब पिएं, इसके वे सख्त खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसी की भी, उसे यह अधिकार कतई नहीं कि वह उत्तराखंड के मूलस्वरूप एवं देवभूमि के खिलाफ जाने का काम करे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब को सुविधा के रूप में रखा जाना चाहिए न कि आय कमाने के रूप में। उन्होंने कहा कि पैसा कमाने के लिए शराब बनाया जाना गलत है और उत्तराखंड के लिए तो यह आत्महत्या जैसी बात है।

हरदा के विरोध को समझ रही जनता
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सेवा का अधिकार आयोग के भवन के उद्घाटन के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में बॉटलिंग प्लांट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत को आड़े हाथ लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले तो ये लाइसेंस हमने नहीं दिए। देवप्रयाग को लेकर गलत ढंग से प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बॉटलिंग प्लांट देवप्रयाग से 40 किमी और राष्ट्रीय राजमार्ग से 10 किमी अंदर है। उन्होंने कहा कि इसका जो विरोध किया गया, वह पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया और उनके कार्यकाल में ही ये लाइसेंस दिए गए थे। उन्होंने कहा कि हरीश रावत क्यों विरोध कर रहे हैं, जनता इसे समझ रही है।

लक्ष्मणझूला में आवाजाही को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से साझा किए विचार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि लक्ष्मण झूला उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर है। पिछले 90 सालों से यह देश व दुनिया के पर्यटकों व श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र रहा है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण झूला को संरक्षित करने के लिए यथा संभव प्रयास किये जायेंगे। इस पुल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पर आवाजाही दुबारा शुरू होने की स्थिति के सम्बन्ध में विशेषज्ञों से और सुझाव लिये जायेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारी हेरिटेज प्रोपर्टी है। इसे ठीक करने के सभी विषयों पर कार्य किया जायेगा। विशेषज्ञों की राय के बाद इसकी रेट्रोफिटिंग पर ध्यान दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारम्भ में इसके एक स्क्वायर मीटर में 200 किलो भार क्षमता आंकी गई थी। वर्तमान में इसका पिलर झुक रहा है, आज आधुनिक तकनीक के दौर में इसे कैसे ठीक किया जा सकता है यह देखा जायेगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस पुल से जन भावानायें जुड़ी हैं, इसका भी हमें ध्यान रखना होगा।
मंगलवार को ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से भेंट की, उन्होंने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि उनके संस्थान के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा लक्ष्मण झूला का जीर्णोद्धार किया जा सकता है। ग्राफिक ऐरा के प्रो. पार्थो सेन ने कहा कि अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग करके इस पुल को बचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पुल के लिए तकनीकी अध्ययन आई.आई.टी के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है उनकी सलाह के मद्देनजर ही जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसमें आवाजाही बन्द की गई है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भी यदि इसके संरक्षण में कोई तकनीकी जानकारी प्राप्त हो सकती है तो इस दिशा में भी पहल की जा सकती है। उन्होंने ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से सभी तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि आईआईटी की रिपोर्ट के हर पहलू का गहनता से अध्ययन किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से कोई भी लापरवाही नहीं बरती जायेगी जरूरत पड़ने पर लक्ष्मण झूला को बचाने के लिए अन्य विशेषज्ञों की राय भी ली जायेगी।
इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय से डा. सुभाष गुप्ता, डा. अंकुश मित्तल, डा. संजीव कुमार, डा. पवन कुमार इमानी, डा. प्रदीप जोशी, श्रीपर्णा शाह व अर्चना रावत उपस्थित थे।

मौसम विभाग का आरेंज अलर्ट, प्रशासन ने सावधानी बरतने की दी सलाह

प्रदेश के नौ जिलों में 14 और 15 जुलाई को भारी बारिश की संभावना है। अन्य जिलों में भी अच्छी बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी कर अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश जारी किए हैं।
मौसम विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार देहरादून, नैनीताल, चंपावत, ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़, चमोली, टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार जिले के कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। जबकि रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, बागेश्वर जिलों में भी कुछ स्थानों पर अच्छी बारिश की संभावना है। मौसम केंद्र निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि प्रदेश में लगातार बारिश का मौसम बना हुआ है।
अगले दो दिन प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। इस पर विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दी है। इस दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका भी बनी हुई है। हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही रोकने का सुझाव दिया गया है। साथ ही राज्य सरकार से अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है।
लगातार हो रही बारिश सड़कों पर भारी पड़ रही हैं। पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले में दर्जनभर सड़कें बोल्डरों से पट गईं हैं। जहां-तहां मार्ग बंद होने से लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। पंग्बाबे के पास बोल्डर गिरने से कैलाश यात्रा मार्ग भी बंद हो गया है। जौलजीबी-मदकोट-मुनस्यारी सड़क कई स्थानों में रोखड़ में तब्दील हो गई है। थल-मुनस्यारी सड़क भारी वाहनों के लिए बंद हो गया है। जड़बुंगा-अमल्यानी संपर्क मार्ग, हुनरी-तल्ला खुमती संपर्क मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गया है। इनके अलावा, जौलजीबी-मुनस्यारी, समकोट-मुनस्यारी मार्ग बंद हैं। बलतिर-अल्काथल सड़क एक सप्ताह से बंद है। इसे अब तक नहीं खोलने पर ग्रामीणों में रोष है। उन्होंने प्रदर्शन कर नाराजगी जताई।
बागेश्वर जिले में सात सड़कें अब भी बंद हैं। इनमें पोथिंग-शोभाकुंड मोटर मार्ग नौ दिन से बंद है। कपकोट-कर्मी-बघर, कपकोट-कर्मी-तोली सड़क पांच दिन से बंद हैं। डंगोली-कलानी, कपकोट-पोलिंग और रीमा-सनेती-बैकुड़ी भी बंद हैं। बारिश के दौरान जसपुर के ग्राम रामनगर वन में कच्चे मकान की दीवार गिरने से कैलाशो देवी (65) की मौत हो गई। नैनीताल में 80 साल पुराने पांच मंजिले मकान का एक हिस्सा शनिवार सुबह पांच बजे भरभरा कर गिर गया। यह मकान 15 साल से खाली था। नगर पालिका ने मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है। उधर, ओखलकांडा ब्लॉक की बड़ौन ग्रामसभा में शनिवार को तूफान और मूसलाधार बारिश से छह घरों की छतें उखड़ गईं। बारिश के पानी से घरों के अंदर रखा सामान भीग गया। पेड़ गिरने से विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
इससे बड़ौन में 150 परिवार अंधेरे में रात काटने को मजबूर हैं। पिछले दो दिन में हुई बारिश से मुनस्यारी और धारचूला में 25 मकान खतरे की जद में आ गए है। धारचूला से मिली जानकारी के मुताबिक कालिका-खुमती सड़क पर खुमती के पास एक मकान सड़क से निकले मलबे में दब गया।

रोडवेज की सवारी कृपया ध्यान दें, छाता लेकर सफर करना सुनिश्चित करें

अगर आप उत्तराखंड रोडवेज की बसों में सफर कर रहे हैं तो बारिश की बूंदों से बचने का इंतजाम साथ लेकर चलें। यहां सड़कों पर आयु सीमा पूरी करने के बावजूद दौड़ रही निगम की जर्जर बसों की स्थिति यही है। स्थानीय मार्गों पर ही नहीं, बल्कि लंबी दूरी के लखनऊ जैसे मार्ग पर बसों की छत टपक रही और यात्री खड़े होकर सफर करने को मजबूर हो रहे। बसें कहां दम तोड़कर खड़ी हो जाएं, कोई गारंटी नहीं। कमोवेश यह स्थिति हर डिपो की है।
रोडवेज की करीब 450 बसें आयु सीमा पूरी कर चुकी हैं मगर प्रबंधन इन्हें रास्ते पर दौड़ाए जा रहा। लंबे अर्से से इन बसों की जर्जर हालात ठीक करने की मांग कर्मचारी उठाते रहे हैं, लेकिन प्रबंधन एवं सरकार की उदासीनता से बसों की हालत ठीक नहीं हो पा रही है। सरकार पिछले आठ माह से सूबे में 300 नई बसें लाने का दावा कर रही है, मगर बसें कब आएंगी, इसका कुछ मालूम नहीं। मौजूदा समय में प्रदेश में बारिश की वजह से रोडवेज के बस अड्डे तो पानी से जलमग्न हो ही रहे, बसें भी इसमें पीछे नहीं हैं।
कहीं बसों में खिड़कियों से पानी अंदर आ रहा तो कहीं छतों के जरिए। देहरादून से पांवटा, ऋषिकेश, सहारनपुर, हरिद्वार आदि स्थानीय मार्गों पर चलने वाली बसों में छत टपकना तो आम बात है ही, अब लखनऊ जाने वाली ग्रामीण डिपो की साधारण सेवा में छत टपकने की शिकायतें आ रहीं। दून के ग्रामीण डिपो से ज्यादातर मैदानी मार्गों पर साधारण बसों का संचालन होता है और इसी डिपो की हालत सबसे जर्जर है। लखनऊ जाने वाली 3043 नंबर की बस की पूरी छत गुरूवार को टपकने लगी। यह हालात बने कि यात्रियों को सीट से उठकर खड़े होकर सफर करना पड़ा। सामान तक भीग गया। ग्रामीण डिपो समेत हरिद्वार और रुड़की, ऋषिकेश, कोटद्वार, काशीपुर तक में जर्जर बसों की समस्या से यात्रियों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा। सबसे ज्यादा मुसीबत उस वक्त खड़ी होती है जब बस में जगह नहीं होती और रास्ते में बारिश होने लगती है।

वाइपर भी नही, ऐसे कैसे सुरक्षित सफर करेंगे यात्री
तेज बारिश में वाइपर की कमी चालकों को खटक रही है। बसों में वाइपर लगाने के नाम पर कितना पैसा पानी में बहा यह तो प्रबंधन जाने, लेकिन चालकों का कहना है कि डिपो कार्यशाला के जिम्मेदार उन्हें मौत के मुंह में ढकेलने का पूरा इंतजाम किए हुए हैं। बसों की मरम्मत के नाम पर कागजों में काम हो रहा है। चालकों ने बताया कि पुरानी बसों में शीशे के फ्रेम भी खराब हैं, जिससे खिड़की रास्ते पानी बसों के अंदर आता है। बसों में वाइपर नहीं होने से तेज बरसात में हादसे का खतरा बना रहता है।

अगले माह तक मिलेंगी 300 नई बसें
रोडवेज के महाप्रबंधक दीपक जैन के मुताबिक, आयु सीमा पूरी कर चुकी ज्यादातर बसों को हटाया जा चुका है। मार्गों पर जिन बसों को भेजा जाता है, वह कार्यशाला से जांच के बाद जाती हैं। जिन पुरानी बसों में छतों के टपकने की शिकायत आ रही, उन्हें ठीक कराया जाएगा। निगम की 300 नई बसें अगले माह तक पहुंच जाएंगी।

यातायात दबाव कम करने के लिए मेट्रो परियोजना जरुरी

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून, हरिद्वार जैसे शहरों में यातायात के बढ़ते दबाव को कम करने के लिये यातायात के सुविधायुक्त वैकल्पिक साधनों पर ध्यान देने पर बल दिया है।
मुख्यमंत्री आवास कार्यालय स्थित सभागार में उत्तराखण्ड मेट्रो रेल परियोजना के सम्बन्ध में मैसर्स डोपलमेयर लि0 तथा अल्ट्रा पी.आर.टी लि. द्वारा एम.आर.टी.एस की रोप वे एवं पर्सनल रेपिड ट्रांसपोर्ट (पी.आर.टी) प्रणालियों से सम्बन्धित प्रस्तुतीकरण का अवलोकन करते हुए यह निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिये। इस मौके पर नगर विकास मंत्री मदन कौशिक एवं मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह भी प्रस्तुतीकरण के दौरान मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के बड़े शहरों की जनसंख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। इससे शहरों में आबादी का दवाब बढ़ रहा है तथा यातायात की समस्या पैदा हो रही है, इसके समाधान के लिये उन्होंने रोप-वे पी.आर.टी व मैट्रो जैसी योजनाओं पर ध्यान देने को कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों के मध्य घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थान की कमी के दृष्टिगत अवागमन के ये साधन उपयुक्त हो सकते हैं, उन्होंने इसके लिये शहरों की स्थिति के अनुकूल व्यावहारिक योजना तैयार करने के भी निर्देश दिये।

डोपलमेयर लि. के प्रबन्ध निदेशक विक्रम सिंघल ने अपने प्रस्तुतीकरण में बताया कि उनके द्वारा अमेरिका जापान सहित 95 देशों में रोप-वे व पी.आर.टी योजनायें संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि शहरों में आवागमन के लिये रोप वे पी.आर.टी व मैट्रो जैसी परियोजनायें बेहतर साधन साबित हो रहे हैं। जबकि अल्ट्रा पी.आर.टी लि. यू.के, के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नितिन कुमार ने अपने प्रस्तुतीकरण में इससे सम्बन्धित योजनाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर सचिव आवास नितेश कुमार झा, उपाध्यक्ष एम.डी.डी.ए डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव, प्रबन्ध निदेशक उत्तराखण्ड मैट्रो रेल परियोजना जितेन्द्र त्यागी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

टिहरी के नैनबाग में भी शराब की बॉटलिंग करने की तैयारी

देवप्रयाग के निकटवर्ती इलाके डडुवा भंडाली के बाद अब टिहरी जिले के ही नैनबाग में भी शराब की बॉटलिंग करने की तैयारी की जा रही है। हाइलैंड बॉटलस नाम के इस प्लांट को स्थापित करने की अनुमति मिल चुकी है। अब केवल बॉटलिंग की अनुमति मिलनी बाकी है। इसके वजूद में आने के बाद टिहरी जिले में यह दूसरा बॉटलिंग प्लांट होगा।
डडुआ भंडाली में बॉटलिंग प्लांट लगाने की अनुमति वर्ष 2016 में दी गई थी और इसी साल जून में प्लांट में बॉटलिंग का लाइसेंस जारी किया गया। यहां बॉटलिंग की गई शराब की पहली खेप बाजार में पहुंचने पर यह बात सार्वजनिक हुई। स्थानीय लोग बॉटलिंग प्लांट का विरोध कर रहे हैं। इस बीच, इसी जिले के जौनपुर ब्लाक के नैनबाग में एक और बॉटलिंग प्लांट स्थापित करने की तैयारी का पता चला है।
आबकारी विभाग के सूत्रों के अनुसार हाइलैंड बाटलस के नाम इस प्लांट को स्थापित करने की प्रक्रिया भी वर्ष 2016 में शुरू की गई थी। अगस्त 2018 में यहां प्लांट स्थापित करने की अनुमति दे दी गई थी, लेकिन अभी बॉटलिंग का लाइसेंस नहीं दिया गया है। संपर्क करने पर जिला आबकारी अधिकारी रेखा जुयाल भट्ट ने पुष्टि की कि नैनबाग में बॉटलिंग प्लांट की स्थापना के लिए अनुमति दी गई है, लेकिन अभी बॉटलिंग की अनुमति नहीं दी गई है।

एसडीएम ने किया प्लांट का निरीक्षण
एसडीएम अनुराधा पाल ने बुधवार को डडुवा भंडाली पहुंचकर बॉटलिंग प्लांट का निरीक्षण किया। प्लांट के दस्तावेजों के का अवलोकन करने साथ ही प्लांट में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी जुटाई। प्लांट में काम कर रहे स्थानीय लोगों से सुविधाओं के बारे में जानकारी जुटाई। एसडीएम ने बताया कि प्लांट के दस्तावेज सही पाए गए हैं। यहां पर बॉटलिंग की गई शराब का एक बैच की पिछले महीने बाजार में आपूर्ति की गई।

बीयर और मिनरल वाटर प्लांट तैयार
डडुवा भंडाली में एक ही कैंपस में तीन फैक्ट्री खोलने की तैयारी है। बॉटलिंग प्लांट के अलावा यहां पर एक बीयर प्लांट और एक मिनरल वाटर प्लांट भी बनाया गया है। हालांकि, बीयर और मिनरल वाटर प्लांट अभी संचालित नहीं हो रहे हैं। बॉटलिंग प्लांट की अनुमति मिल गई है, लेकिन यहां बीयर बनाने के लिए लाइसेंस नहीं दिया गया है। बताया गया कि बॉटलिंग प्लांट संचालकों ने बीयर प्लांट और मिनरल वाटर प्लांट बनाने के लिए भी वर्ष 2016 में आवेदन कर दिया था, लेकिन अभी इनका लाइसेंस नहीं मिल पाया है।

खुशखबरीः सरकार ने ओपीडी में सस्ता इलाज देने की तैयारी की

अटल आयुष्मान योजना में कार्ड धारकों को अब ओपीडी में भी सस्ता इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। मंत्रिमंडल की अगली बैठक में इस प्रस्ताव को लाया जाएगा।
वर्तमान में आयुष्मान योजना के तहत मरीज के भर्ती होने पर भी पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा है। ओपीडी में इलाज कराने वाले मरीजों का योजना का लाभ नहीं मिलता है।
अब सरकार सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में भी मरीजों को भी इलाज मुहैय्या कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए दो अलग-अलग श्रेणियों के लिए दरें तय की जाएगी।
त्रिवेंद्र सरकार ने अटल आयुष्मान योजना के तहत कार्डधारकों को ओपीडी में भी कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने के लिए कवायद शुरू कर दी है। जिन लोगों के पास आयुष्मान योजना का हेल्थ कार्ड होगा।
उन्हें सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सकेगी। जिसमें पंजीकरण शुल्क, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सिटी स्कैन, ब्लड और शुगर जांच, एक्स-रे समेत अन्य जांचें शामिल होंगी। जबकि जिन लोगों के पास कार्ड नहीं है, उन्हें इलाज की सुविधा नहीं मिलेगी।

प्रदेश में 31 लाख लोगों के बन चुके कार्ड
प्रदेश में अब तक अटल आयुष्मान योजना के तहत 31 लाख लोगों के हेल्थ कार्ड बनाए गए हैं। जिसमें 44 हजार 460 लोगों ने योजना में अपना इलाज कराया है। इन पर करीब 45 करोड़ की धनराशि खर्च हुई है। माना जा रहा है कि ओपीडी में इलाज की सुविधा मिलने से प्रदेश में कार्ड धारकों की संख्या 50 से 60 लाख तक पहुंच सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव नितेश कुमार झा ने बताया कि अटल आयुष्मान योजना में कार्ड धारकों को सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में इलाज की सुविधा देने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है। जिसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में रखा जाएगा।

राज्य सरकार के फैसले से महंगाई बढ़ने के आसार!

केंद्र सरकार के बाद अब उत्तराखंड सरकार ने पेट्रोल और डीजल महंगा कर दिया है। प्रदेश मंत्रिमंडल ने पेट्रोल पर पूर्व में दी गई ढाई रुपये और डीजल एक रुपये प्रति लीटर की छूट को वापस ले लिया है। ये छूट सरकार ने अक्टूबर 2018 में दी थी। नई दरें लागू होने के बाद राजधानी देहरादून में पेट्रोल 75.08 रुपये और डीजल 66.73 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा।
बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में उनके आवास पर हुई बैठक में 12 में से 11 प्रस्तावों पर मुहर लगी। कैबिनेट ने गैरसैंण में भूमि खरीदने पर लगे प्रतिबंध को भी हटा दिया है। कैबिनेट मंत्री व शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा कि 2012 में तत्कालीन सरकार गैरसैंण में भूमि खरीदने पर रोक लगाई थी। लेकिन रोक के बावजूद वहां स्टांप पेपर पर भूमि खरीदी व बेची जा रही है, जिससे कई तरह के कानूनी वाद पैदा हो रहे हैं। इन सारी बाद पर विचार करने के बाद कैबिनेट में भूमि खरीद पर रोक हटाने का फैसला लिया। कैबिनेट ने सभी तरह के अवैध निर्माण को नियमित कराने के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना को तीन माह के लिए बढ़ा दिया है। सरकार ने इस योजना को एक जनवरी से छह माह के लिए लागू किया था।

मंत्रिमंडल के अन्य फैसले
1.गुर्जर परिवारों के लिए विस्थापन मार्गदर्शक नियमावली को मंजूरी। वन मंत्री की अध्यक्षता में बनाई गयी उपसमिति के आधार पर बनायी गयी यह नियमावली कार्बेट में झिरना, ढेला रेंज के 57 गुर्जर परिवारों से संबंधित है। इसके अंतर्गत प्रत्येक परिवार को पांच लाख परिवार रुपये एवं सामुदायिक कार्य के लिए सामूहिक रूप से प्रत्येक परिवार के लिए एक एकड़ के आधार पर 57 एकड़ की भूमि देने का प्रावधान किया गया है।
2. पेट्रोल और डीजल पर सेस लगाया। इसके बाद अब पेट्रोल पर 2.50 रुपये और डीजल पर सेस एक रुपये बढ़ाया गया।
3. गैरसैंण तहसील के आदि बदरी, सिलबाटा, पंचाली, महाचैरी पटवारी क्षेत्र के 27 गांवों से भूमि क्रय का प्रतिबंध हटा। 2012 में विजय बहुगुणा की कांग्रेस सरकार ने भूमि की अनियंत्रित खरीद फरोख्त को रोकने का तर्क देते हुए यह प्रतिबंध लगाया था।
4. उत्तराखंड भवन निर्माण विकास निधि विनिमय 2011 में संशोधन।
5.महायोजना के अंतर्गत सड़क चैड़ीकरण के अंतर्गत नागरिक द्वारा दी गई भूमि के अनुपात में राज्य सरकार भवनों के ऊपरी तल के विस्तार की अनुमति देगी। यदि तीन मीटर भवन के अग्रभाग में सड़क के लिए छोड़ा जाता है तो उसका 125 प्रतिशत भवन के ऊपर विस्तार किया जा सकता है।
6. केंद्र के स्तर पर जीएसटी में हुए संशोधनों को मंजूरी। राज्य सरकार विधानसभा के पटल पर इन संशोधनों को रखेगी। ये संशोधन समाधान योजना, ई कामर्स रिटर्न फाइलिंग और व्यापारियों की ओर से टैक्स रिटर्न फाइल करने से संबंधित हैं।
7.उत्तराखंड सचिवालय विनियमितीकरण नियमावली में संशोधन करते हुए निगम कार्यालयों के 91 कार्मिकों को सचिवालय संवर्ग के लिए स्वीकार किया जाएगा।
8. उत्तराखंड परिवहन विभाग प्रवर्तन कर्मचारी वर्ग की सेवा नियमावली में संशोधन। प्रवर्तन सिपाही के लिए शैक्षिक अर्हता हाईस्कूल से इंटर की गई।
9.राष्ट्रीय राजमार्ग में कई स्वामित्व के लोगों की भूमि अवैध मानी गई थी। कैबिनेट ने ऐसे लोगों की ओर से 12 साल का भूमि से संबंधित रिकार्ड जमा करने पर भवन का मुआवजा देने के प्रस्ताव को संस्तुति दी।
10. उत्तराखंड निजी सुरक्षा अभिकरण नियमावली को मंजूरी। भारत सरकार की नियमावली का नियम 25 के आधार पर राज्य सरकार ने नियमावली बनाई है।
11. उत्तराखंड राजकीय प्राथमिक शिक्षा सेवा नियमावली 2012 में शिक्षामित्र की पात्रता के संबंध में संशोधन किया गया।

तो कम्पाउडिंग से रुकेगा अनधिकृत निर्माण, कैबिनेट का ये कैसा फैसला

अनधिकृत निर्माण को न्यूनतम करने के लिए सरकार ने कैबिनेट में नियमों और मानकों में ढील देते हुए एक बार फिर कई कदम उठाए हैं। इसके पीछे मंशा ये ही है कि भवन निर्माण की जटिलताओं को कम से कम किया जाए, साथ ही ज्यादा से ज्यादा अवैध निर्माणों के नियमितीकरण के लिए रास्ता खुल सके। सरकार का मानना है कि नियमों में शिथिलता के बाद अवैध निर्माण के लिए कम से कम गुंजाइश रहेगी। इसके बावजूद, यदि अवैध निर्माण किए जाते हैं, तो इसके लिए भारी भरकम जुर्माने की भी सरकार व्यवस्था करने जा रही है।
त्रिवेंद्र सरकार ने इस वर्ष की शुरुआत में वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की थी। यह योजना छह महीने चलकर जून 2019 में खत्म हो गई। हालांकि इसका बहुत ज्यादा लाभ नहीं मिल पाया। इसकी वजह ये भी रही कि सरकार का इन पिछले महीनों में चुनावी चुनौती से निबटने में ज्यादा ध्यान रहा। अब स्थिति सामान्य होने के बाद सरकार ने इस योजना में कुछ एक बातों को और शामिल करते हुए तीन महीने के लिए इसकी अवधि बढ़ा दी है।
सरकार ने भवन उपविधि में भी आमूलचूल संशोधन किए हैं। आवास मंत्री मदन कौशिक के अनुसार, हमने यह कोशिश की है कि अवैध निर्माण के लिए कोई गुंजाइश न रहने पाए। इसलिए छोटी-छोटी तकनीकी बातों का भी ध्यान रखा गया है। इसके बावजूद, यदि अवैध निर्माण किए जाते हैं, तो यह बर्दाश्त नहीं होंगे। इसके लिए जल्द ही जुर्माना राशि को बढ़ाने की व्यवस्था भी की जा रही है।

वन टाइम सेटलमेंट की अब ये होगी व्यवस्था
पूर्व व्यवस्था में एकल आवासीय भवन में बैक सेटबैक में 40 प्रतिशत निर्माण की अनुमन्यता है, जिसकी ऊंचाई सात मीटर तक अनुमन्य है। संशोधित प्राविधान के अनुसार, 40 प्रतिशत निर्माण दस मीटर तक की ऊंचाई तक अनुमन्य होगा। यानी अतिरिक्त तीन मीटर ऊंचाई अनुमन्य होगी। 150 वर्ग मीटर तक भूखंड में बैक सेटबेक 100 फीसदी तक कंपाउंडिंग हो सकेगी। व्यवसायिक मामलों में पूर्व प्राविधान के साथ अतिरिक्त दस फीसदी तक की सुविधा दी गई है।

बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और उद्योगों के विकास पर जोरः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने संतुलित, समावेशी और विकासपरक बजट पेश करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट, मजबूत देश के लिए मजबूत नागरिक की संकल्पना को दर्शाता है। लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने की रूपरेखा रखी गई है। आम जन के कल्याण की योजनाओं के साथ-साथ देश में इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और उद्योगों के विकास पर जोर दिया गया है। पांच साल में बुनियादी सुविधाओं पर 100 लाख करोड़ खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में गांव, गरीब और किसान के कल्याण पर खास ध्यान दिया गया है। हर घर शौचालय व हर व्यक्ति को घर के बाद अब हर घर नल का लक्ष्य रखा गया है। 45 लाख रुपए तक के घर पर ब्याज में 3.5 लाख रुपए की छूट का प्रावधान कर मध्यम वर्ग को राहत दी गई है।
‘‘यह टीम इंडिया का बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘‘सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास’’ के संकल्प को पूरा करने वाला बजट है। किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं, कारीगरों व छोटे उद्यमियों सभी का ध्यान रखने वाला बजट है। इसमें ‘मजबूत देश के लिए मजबूत नागरिक’ पर विशेष बल दिया गया है। वर्तमान में क्रय शक्ति समानता के आधार पर दुनिया की तीन ट्रिलियन डॉलर की तीसरी सबसे बड़ी भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे ले जाना वाला बजट है। इसमें रोजगार सृजन के लिए निवेश को प्रोत्साहित किया गया है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में 17 आईकानिक टूरिस्ट डेस्टीनेशन विकसित किए जाएंगे। इससे निश्चित रूप पर्यटन को मजबूती मिलेगी। आम आदमी के साथ ही उद्योगों को बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास जोर दे रहे हैं। नए औद्योगिक कोरिडोर बनाने का लक्ष्य रखा है, उड़ान से छोटे शहरों को हवाई सफर से जोड़ा है। वन नेशन वन ग्रिड व इलेक्ट्रीक वाहनों पर टैक्स छूट स्वागत योग्य है।
छोटे उद्यमियों का विशेष ध्यान रखा गया है। पीएम कर्मयोगी मानधन योजना से छोटे दुकानदारों को पेंशन का फायदा दिया जाएगा। एमएसएमई से ज्यादा रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। एमएसएमई के लिए अलग पोर्टल बनाया गया है, छोटे मंझोले उद्योगों के लिए 59 मिनट में लोन पास की व्यवस्था की जा रही है। उच्च शिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता सुधारने पर पर भी फोकस किया गया है। राष्ट्रीय रिसर्च फाउंडेशन बनाने से क्वालिटी रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर योजना के केंद्र बिंदु में गांव, गरीब और किसान हैं। 2022 तक पीएम आवास योजना के तहत 1.95 करोड़ जरूरतमंदों को घर देने का लक्ष्य है, पिछले पांच साल में 1.5 करोड़ घर बनाए गए। हर गांव में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था की जाएगी। पीएमजीएसवाई के तहत 1.25 लाख किलोमाटर सड़कों का निर्माण और अपग्रेडेशन का लक्ष्य रखा गया है। बांस, शहद और खादी पर आधारित 100 नए क्लस्टर बनाए जा रहे हैं। जीरो बजट फार्मिंग व अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने की पहल खास तौर पर उल्लेखनीय है। 10 हजार नए फार्मर-प्रोड्यूसर संगठन बनाए जाएंगे। एग्रो रूरल इंडस्ट्री सेक्टर में 75 हजार स्किल्ड एंटरप्रन्योर्स तैयार किए जाएंगे। नारी तू नारायणी के भाव को चरितार्थ करते हुए मुद्रा योजना से प्रत्येक महिला को 1 लाख तक का लोन का प्रावधान किया गया है। महिला एसएचजी को जनधन अकाउंट से पांच हजार रुपए तक ओवरड्राफ्ट की सुविधा दी गई है।