सीएस ने जताई पर्वतीय क्षेत्रों में युवाओं में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति पर गहरी चिन्ता

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में राष्ट्रीय नार्काे समन्वय पोर्टल (एन्कॉर्ड) की बैठक ली। मुख्य सचिव ने प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में युवाओं में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति पर गहरी चिन्ता व्यक्त की। उन्होंने युवाओं पर नशे के बढ़ते प्रकोप पर काबू करने के लिए कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए डीएम एसएसपी को महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

मुख्य सचिव ने नशे की बिक्री को रोकने के लिए प्रवर्तन को बढ़ाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे को रोकने के लिए पुलिस विभाग को कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह को नशे के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने हेतु पूरी छूट देते हुए सिंगल पॉइन्ट नोडल अधिकारी नामित किया। उन्होंने कहा कि नशे की जड़ों को काटने के लिए उन्हें जो भी आवश्यकता है, उपलब्ध करायी जाएगी। उन्होंने कहा कि नशे के लिए बने इस ईको सिस्टम को तोड़ने के लिए पूरे प्रदेश में एक साथ अभियान चलाया जाए, जिसमें प्रत्येक सम्बन्धित विभाग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को ड्रग इंस्पेक्टर को भी इस अभियान में शामिल किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि डिमांड और सप्लाइ की चौन को तोड़ने में प्रत्येक अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभानी होगी। सही तरीके से काम नहीं कर पा रहे अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक अपने जनपदों में शिक्षण संस्थानों और हॉस्टल आदि के प्रमुखों से वार्ता कर उन्हें अपने संस्थानों में मेडिकल टेस्ट करने हेतु राजी करें। उन्होंने कहा कि इसके लिए उपकरण एवं टेस्ट मैटीरियल की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को भी इसमें सहयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का मेडिकल टेस्ट कराए जाने हेतु लगातार अभियान चलाए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने वृहद स्तर पर राज्य एवं जनपदों में जागरूकता अभियान संचालित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए गृह विभाग, सूचना विभाग, उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग को एक दिन निर्धारित करते हुए वृहद स्तर पर जागरूकता अभियान संचालित किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि जागरूकता गतिविधियों में सोशल मीडिया एवं सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को भी शामिल किया जाए। प्रदेश भर में लगातार इस प्रकार के जागरूकता अभियान संचालित किए जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण एवं जिला स्तरीय समन्वय समिति की प्रत्येक माह बैठकें आयोजित करायी जाएं। उन्होंने प्रदेश में संचालित हो रहे सरकारी नशा मुक्ति केन्द्रों एवं मानसिक स्वास्थ्य केन्द्रों की क्षमता बढ़ाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपयोग में नहीं आ रहे सरकारी भवनों को भी नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य केन्द्रों के रूप में संचालित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रायवाला में ओल्ड एज होम के लिए बनाए गए भवन सहित अन्य तैयार हो चुके भवनों में अगले एक माह में नशा मुक्ति केन्द्र शुरू किए जाएं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में खाली पड़े सरकारी भवनों की रिपोर्ट तैयार कर शासन को उपलब्ध कराए जाने के भी निर्देश दिए, ताकि इन भवनों में आवश्यकता के अनुसार अन्य जनहित के कार्य शुरू किए जा सकें।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में संचालित हो रहे प्राईवेट नशामुक्ति केन्द्रों का भौतिक निरीक्षण किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो प्राईवेट संस्थान मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं, उन पर नियमानुसार कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़े जाने की आवश्यकता है, ताकि वे जल्दी से जल्दी अपनी नशे की लत को छोड़ सकें।

मुख्य सचिव ने कहा कि एनसीसी, एनएसएस और महिला मंगल दलों को भी नशे के खिलाफ लड़ाई में शामिल किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में वार्षिक हेल्थ चौकअप को बढ़ावा दिया जाए।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगोली, डॉ. आर. राजेश कुमार, डॉ. रंजीत सिन्हा, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर डॉ. वी. मुरूगेशन, आईजी लॉ नीलेश

पेयजल, टॉयलेट, सफाई, पार्किंग आदि मूलभूत सुविधाओं में लापरवाही बरतने वाले पर होगी सख्त कार्रवाई

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में कांवड़ मेला की तैयारियों के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों और कार्यदाई संस्थाओं को कांवड़ मेले के संचालन से संबंधित सभी तैयारियां को समय से पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने निर्देशित किया कि व्यवस्थित कांवड़ मेले में बाधक बनने वालों (नशे में लिप्त, उत्पात मचाने वालों, हिंसक प्रवृति को बढ़ावा देने वालों) पर सख्ती की जाए तथा मेले के दौरान बड़े डीजे साउंड पर प्रतिबंध लगाया जाए।

उन्होंने नगर निकायों को नियमित साफ सफाई, शौचालय व पार्किंग, जल संस्थान को पेयजल की निर्बाध सप्लाई, फूड सेफ्टी विभाग को खानपान की चीजों की नियमित देख- रेख, और पूर्ति विभाग को किसी भी तरह की ओवर रेटिंग पर लगाम लगाने के निर्देश दिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि साफ- सफाई, पेयजल व्यवस्था, पार्किंग इत्यादि में यदि किसी भी तरह की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित विभाग और संबंधित कार्यदाई संस्था पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य सचिव ने समय रहते संबंधित कार्यदायी संस्थाओं की बैठक करते हुए उनको आवश्यक दिशा – निर्देश जारी करने को कहा। उन्होंने सिंचाई विभाग को विभिन्न स्नान घाटों और पुलों पर बेहतर साफ- सफाई और जरूरी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कांवड़ मेला की अवधि 11 जुलाई से 23 जुलाई तक रहेगी। पंचक अवधि 13 से 17 जुलाई तक, डाक कावड़ 20 से 23 जुलाई तक तथा जलाभिषेक (श्रावण शिवरात्रि) 23 जुलाई को होगा।

बैठक में जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार द्वारा कांवड़ मेले के केंद्र बिंदु हरिद्वार कांवड़ के सफल संचालन हेतु की गई तैयारियों, यातायात व्यवस्था, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था इत्यादि का विवरण प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुत किया।
यातायात के प्रबंधन के लिए विभिन्न रूट, स्थाई – स्थाई पार्किंग, जनपद में आने वाले तथा अन्य जगह जाने वाले वाहनों के अनुरूप रूट डाइवर्जन प्लान इत्यादि से अवगत कराया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार ने अवगत कराया कि कांवड़ मेले के प्रबंधन हेतु इसको 16 सुपर जोन, 37 जोन और 134 सेक्टर में विभाजित किया गया है।

कांवड़ मेले के संचालन से संबंधित चुनौतियों तथा उनसे निपटने के लिए किए जाने वाले स्थाई- अस्थाई निर्माण कार्यों की आवश्यकता और उससे संबंधित बजटीय प्रावधानों से भी अवगत कराया गया।

देहरादून, पौड़ी और टिहरी जनपदों द्वारा भी अपनी तैयारी और बजटीय आवश्यकताओं से अवगत कराया।

बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक वी मुरुगेशन, आयुक्त गढ़वाल मण्डल विनय शंकर पांडेय, महानिरीक्षक के एस नग्नयाल सहित जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार, देहरादून, पौढ़ी व टिहरी तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

संरचनात्मक और नीतिगत दोनों तरह के प्रयासों से अपेक्षित टारगेट पूरा करते हुए रैंकिंग इंप्रूव करेंः सीएस

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद में राज्य की ओर से रखे जाने वाले बिंदुओं की तैयारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने पंचायती राज विभाग को राज्य वित्त आयोग के दिशा – निर्देशों की एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। पंचायत को अपने रेवेन्यू सोर्स जनरेट करने के लिए तीन माह के भीतर नियमावली बनाने के निर्देश दिए। नागरिकों को ग्राम पंचायत स्तर पर सभी महत्वपूर्ण सेवाओं की ऑनलाइन डिलीवरी देने के लिए ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार करने तथा इसके लिए तत्काल पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं के सर्वांगीण विकास को समर्पित योजना और कार्यक्रमों के इंप्लीमेंटेशन का स्तर इंप्रूव करने के निर्देश दिए ताकि कुपोषण, अल्प पोषण, वेस्टिंग, कम वजनी इत्यादि बाल विकास के अवरोधों में कमी लाई जा सके तथा इससे संबंधित इंडिकेटर के सूचकांक को भी बेहतर किया जा सके।

फूड सेफ्टी विभाग ने अवगत कराया कि विभाग में सैंपलिंग और एनफोर्समेंट से संबंधित कार्मिकों की शॉर्टेज है।

जिस पर मुख्य सचिव ने विभाग को संबंधित भर्ती बोर्ड को संबंधित पदों की भर्ती का अधियाचन प्रेषित करने के निर्देश दिए। साथ ही शीघ्रता से पदोन्नति की प्रक्रिया भी पूरा करने के कहा।

इस संबंध में उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सचिव और संबंधित जिलाधिकारी सैंपलिंग और इससे संबंधित लंबित मामलों के निस्तारण के लिए प्रत्येक माह इसकी समीक्षा बैठक आयोजित कर पेंडिंग कार्यों को शीघ्रता से निपटाएं।

बाल व महिला अपराधों के इन्वेस्टिगेशन में तेजी लाएं

मुख्य सचिव ने बच्चों और महिलाओं से संबंधित अपराधों में कमी लाने के लिए पोक्सो एक्ट तथा रेप के मामलों में तेजी से इन्वेस्टिगेशन पूरा करने तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट में लंबित मामलों का भी तेजी से निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने हेड क्वार्टर तथा जनपद दोनों स्तर पर इन मामलों की नियमित मॉनिटरिंग करने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने अर्बन मास्टर प्लान से संबंधित मुद्दों की समीक्षा करते हुए सभी टाउन्स में लैंड अवेलेबिलिटी की आख्या प्रस्तुत करने तथा अर्बन एरिया में अफॉर्डेबल आवास देने की सभी स्कीम का लाभार्थियों की अलग-अलग श्रेणी के अनुसार विवरण देने के निर्देश दिए।

स्मार्ट मीटर की प्रगति के संबंध में मुख्य सचिव ने ऊर्जा विभाग को निर्देश दिए कि घरेलू उपभोक्ताओं के यहां जुलाई तक तथा कमर्शियल उपभोक्ताओं के यहां सितंबर तक टारगेट पूरा करें।

उन्होंने पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समिति) को किसान समृद्धि केंद्र के रूप में परिवर्तित करने के लिए (पैक्स के कंप्यूटरीकरण, माइक्रो एटीएम वितरण, मल्टी परपज पैक्स स्थापन इत्यादि) के कार्यों की प्रगति बढ़ाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने ग्राम्य विकास और लोक निर्माण विभाग को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के टारगेट को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने इमरजेंसी सर्विस रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम छव् – 112 की गुणवत्ता में और सुधार करते हुए इसको अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

आयुष्मान योजना के संबंध में निर्देश दिए कि अन्य राज्यों के सापेक्ष तुलनात्मक प्रगति का विवरण प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।

इस दौरान बैठक में सचिव चंद्रेश कुमार व विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव विजय कुमार जोगदंडे, सोनिका, विनीत कुमार, हिमांशु खुराना, अपूर्वा पांडेय सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

राज्य कार्यकारी समिति की बैठक में कुमायूं के दो प्रकरणों पर हुई चर्चा

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में राज्य कार्यकारी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद नैनीताल के रामनगर में स्थित गर्जिया देवी मंदिर के मुख्य टीले के सुरक्षात्मक कार्याे तथा गोला नदी से सटे आपदा प्रबंधन से संबंधित बाढ़ सुरक्षात्मक व सड़क सुधार कार्यों के दो प्रकरणों पर चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने नैनीताल के रामनगर में स्थित गार्जिया देवी मंदिर के कार्यों की प्रगति प्राप्त करते हुए अवशेष सुरक्षात्मक कार्यों को तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने जनपद नैनीताल के लालकुआं के बनभूलपूरा रेलवे क्रॉसिंग से गोला पुल तक गोला नदी के अत्यधिक पानी के बहाव के चलते क्षतिग्रस्त मार्ग तथा विभागों से जुड़ी हुई सभी परिसंपत्तियों की आईआईटी रुड़की से हाइड्रोलॉजिकल स्टडी कराते हुए सुरक्षात्मक कार्यों को तत्काल पूरा करने के भी निर्देश दिए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव सचिन कुर्वे, श्रीधर बाबू अदांकी, विनोद कुमार सुमन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

बेसमेंट में पार्किंग न कराने वाले संस्थानों और संबंधित व्यक्ति पर सख्ती से होगी एनफोर्समेंट की कार्रवाई

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित बैठक में जिला प्रशासन देहरादून तथा संबंधित विभागों द्वारा देहरादून शहर को व्यवस्थित और अधिक गतिशील बनाने से संबंधित शहर के मोबिलिटी प्लान को प्रस्तुत किया गया।

जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल ने शहर के मोबिलिटी प्लान से संबंधित कार्यों में अब तक हुई प्रगति से अवगत कराया तथा शहर की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए भविष्य में किए जाने वाले कार्यों तथा दूरगामी प्लान से भी अवगत कराया।

मुख्य सचिव ने इस दौरान संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि शहर के सभी कमर्शियल संस्थाओं की बेसमेंट पार्किंग का शत – प्रतिशत उपयोग कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिए की जो भी संस्थान बेसमेंट में पार्किंग नहीं कराते उन पर सख्त एनफोर्समेंट की कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।

मुख्य सचिव ने शहर में सड़क और जंक्शन इंप्रूवमेंट के कार्यों में तेजी से प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, एमडीडीए, नगर निगम, परिवहन विभाग, पुलिस विभाग, उत्तराखंड जल संस्थान व जल निगम सभी विभागों को आपसी समन्वय से देहरादून शहर को अधिक गतिशील और सुव्यवस्थित बनाने के लिए स्पष्ट रोड मैप तैयार करने को कहा तथा प्रत्येक कार्यों को पूरा करने के लिए टाइमलाइन का निर्धारण सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने एमडीडीए को निर्देशित किया कि भवन निर्माण के मैप अप्रूवल में पार्किंग के बायलॉज का सक्ति से अनुपालन कराएं। इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव पंकज पांडेय, एमडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी, अपर सचिव विनीत कुमार, नगर आयुक्त देहरादून नमामि बंसल सहित लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग और संबंधी विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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वन पंचायतों में गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास एवं हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म प्रोजेक्ट की स्टेट लेवल मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में उत्तराखंड की वन पंचायतों में गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास एवं हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म प्रोजेक्ट की स्टेट लेवल मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे जनपदों में जहां पर जड़ी बूटी उत्पादन की तो व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं लेकिन इन मैदानी जनपदों में वन पंचायत का अस्तित्व नहीं हैं इसीलिए इन जनपदों में ग्राम पंचायत के माध्यम से जड़ी – बूटी का उत्पादन प्रारंभ करें।

उन्होंने कैंपा फंड के माध्यम से भी निजी भूमि पर हर्बल उत्पादन की संभावना तलाशने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि हर्बल उत्पादन के संबंधित सभी डाटा की ळप्ै मैपिंग करें और इसके सभी स्तर के आंकड़ों का डिजिटलीकरण भी करें।

उन्होंने हर्बल उत्पादन से संबंधित फॉरेस्ट और नॉन फॉरेस्ट एक्टिविटीज का एफडीए (फॉरेस्ट डेवलपमेंट एजेंसी) से एग्जामिन कराने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने हर्बल उत्पादन से संबंधित जुड़े हुए लोगों का एल्टीट्यूड वाइज प्रशिक्षण दस्तावेज तैयार करने के भी निर्देश दिए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि वन विभाग के अधीन वर्तमान समय में जो भी विभिन्न वनोत्पाद उपलब्ध हैं उनकी बेहतर मार्केटिंग और वैल्यू एडिंग करते हुए उसको भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ाने और स्थानीय लोगों की जीविकोपार्जन का आधार बनाएं।

मुख्य सचिव ने मानसून की तैयारियों के संबंध में की समीक्षा बैठक

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मानसून की तैयारियों के संबंध में सभी जनपदों के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून अवधि में संभावित आपदाओं का प्रभावी तरीके से सामना करने के लिए सभी विभाग अपनी-अपनी तैयारियों को पुख्ता कर लें। यदि कुछ कार्य किए जाने शेष हैं तो समय पर उन्हें पूरा कर लें।

सचिवालय में आयोजित बैठक में दोनों मंडलों के आयुक्त तथा सभी जिलाधिकारियों ने बैठक में ऑनलाइन प्रतिभाग किया।

मुख्य सचिव ने कहा कि आपदाओं का सामना करने में जहां आपदा पूर्व तैयारी महत्वपूर्ण है, वहीं त्वरित रिस्पांस टाइम भी बेहद जरूरी है। जितना बेहतर हमारा रिस्पांस टाइम होगा, उतना ही प्रभावी तरीके से हम आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्य करने तथा आम जनमानस को राहत पहुंचाने में सफल हो सकेंगे। उन्होंने आगामी मानसून सीजन के दौरान जलभराव की समस्या तथा अन्य आकस्मिकताओं से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर, नैनीताल और चंपावत के जलभराव तथा बाढ़ प्रभावित इलाकों में मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए।

राज्य में चारधाम यात्रा भी चल रही है, ऐसे में सभी रेखीय विभागों का 24 घंटे अलर्ट पर रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव दल तथा विभिन्न विभाग यह सुनिश्चित करें कि किसी भी आपदा की स्थिति में उनकी टीम त्वरित गति से मौके पर पहुंचे और बिना समय गंवाए अपने-अपने कार्यों का निष्पादन करें।

बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने आगामी मानसून सीजन को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में विभिन्न रेखीय विभागों के नोडल अधिकारियों की तैनाती हो गई है। उन्होंने बताया कि राज्य आपदा मोचन निधि तथा राज्य सेक्टर से पुनर्निर्माण और पुनर्प्राप्ति कार्यों के लिए और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 162 करोड़ की धनराशि जनपदों को जारी कर दी गई है। तैयारी और क्षमता विकास मद में प्रति जनपद एक-एक करोड़ रुपये जारी किए जाने की कार्यवाही गतिमान है। विभिन्न विभागों को भी धनराशि आवंटित की गई है।

नदियों की डिसिल्टिंग कराया जाना आवश्यक
मुख्य सचिव ने कहा कि मानसून अवधि में बाढ़ और जलभराव का एक प्रमुख कारण है, नदियों में सिल्ट का अत्यधिक मात्रा में जमा हो जाना। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में नदियों की डिसिल्टिंग कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वन क्षेत्र में डिसिल्टिंग करने में जिन भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, उनका शासन के साथ वार्ता कर समाधान निकालकर कार्यवाही की जाए।

आपदा प्रभावितों को सहायता जल्द दी जाए
मुख्य सचिव ने कहा कि आपदा के बाद जन सामान्य को राहत पहुंचाना शासन-प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आपदा प्रभावितों को सहायता जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। आपदा के बाद पुनर्निर्माण कार्यों को त्वरित गति से संचालित करने तथा नुकसान के आकलन के लिए पंचायत स्तर पर सर्वे टीम गठित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने जिलाधिकारियों की मांग पर पर्याप्त एम्बुलेंस जनपदों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

धन की कमी नहीं पर दुरुपयोग न हो
मुख्य सचिव ने कहा कि आपदा संबंधी कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं है। सभी जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि आपदा मद में जो भी धनराशि शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है, उसका शत-प्रतिशत उपयोग किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि धन का किसी प्रकार भी दुरुपयोग ना हो।

मुख्य सचिव द्वारा जारी किए गए अन्य आवश्यक दिशा-निर्देशः
बाढ़ सम्भावित क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर मौसम पूर्वानुमान के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरिक्षत स्थानों में विस्थापित किया जाए।
बाढ़ आदि की संभावना के दृष्टिगत पूर्व से ही राहत शिविरों/सुरक्षित स्थानों का चिन्हीकरण किया जाए।
बाढ़ की स्थिति में पर्याप्त संख्या में नाव, राफ्ट की व्यवस्था की जाए।
राहत शिविर में लोगों के खान-पान तथा उपचार की व्यवस्था की जाए।
पशुओं के लिये सुरक्षित स्थान का चयन तथा उनके समुचित चारे एवं उपचार की व्यवस्था हो।
मार्ग बंद होने पर तुरंत खोलने के लिए जेसीबी तथा अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
वैकल्पिक व्यवस्था के दृष्टिगत बैली ब्रिज का भण्डारण।
खाद्यान्न, पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी का भण्डारण।
दूरस्थ क्षेत्रों में रास्ता बंद होने की स्थिति में स्थानीय दुकानदारों के पास आवश्यक वस्तुओं का भण्डारण सुनिश्चित किया जाए।
मानसून के दौरान होने वाली जल जनित संक्रामक बीमारियों के उचित प्रबंधन हेतु आवश्यक औषधियों का भण्डारण।
गर्भवती महिलाओं डाटा एकत्रित करना तथा इनके प्रसव हेतु समीपस्थ निजी/सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों का चिन्हीकरण किया जाए। बिजली तथा जलापूर्ति बाधित होने पर उपकरणों का समुचित भण्डारण।
बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, पंकज कुमार पाण्डेय, एसएन पाण्डेय, सी रविशंकर, धीराज गर्ब्याल, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, अनु सचिव ज्योतिर्मय त्रिपाठी आदि अधिकारी उपस्थित रहे।

सचिवालय में हुई टिहरी झील एरिया डेवलपमेंट प्रोजेक्ट उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में एशियाई विकास बैंक सहायतित टिहरी झील एरिया डेवलपमेंट प्रोजेक्ट उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में परियोजना निदेशक द्वारा टिहरी झील एरिया डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से संबंधित चौथी एचपीसी बैठक के निर्देशों की अनुपालन आख्या प्रस्तुत की गई, साथ ही वर्तमान में गतिमान 19 उप प्रोजेक्ट की स्टेटस रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।

मुख्य सचिव ने गतिमान निविदा प्रक्रिया से संबंधित प्रकरणों एवं उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी ली।

उन्होंने टिहरी लेक एरिया डेवलपमेंट के कार्यों टूरिज्म रोड, डेवलपमेंट आफ डोबरा चांटी पार्क, अपग्रेडेशन ऑफ तिवाड़ गांव, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट इत्यादि की प्रगति की जानकारी प्राप्त करते हुए संतोष व्यक्त किया और तेजी से कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि भविष्य में किसी भी प्रोजेक्ट का कंपलीट ग्राउंड सर्वे करने के पश्चात ही डीपीआर तैयार करें ताकि प्रोजेक्ट के सभी पहलू सम्मिलित हो जाए और प्रोजेक्ट की बाद में लागत में बढ़ोतरी की संभावना भी ना रहे।

उन्होंने निर्देशित किया कि बड़े और मेजर कार्यों को छोड़कर छोटे-छोटे काम के लिए कंसल्टेंसी सर्विसेज लेने से बचें। प्रोजेक्ट/उप प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाते समय इस बात का भी ध्यान रखें कि कार्य पूरा होने के पश्चात उसका नियमित तरीके से बेहतर संचालन भी होता रहे।

मुख्य सचिव ने टिहरी एरिया के डेवलपमेंट से संबंधित अब तक विभिन्न एजेंसी द्वारा समय-समय पर किए गए कार्यों का विवरण भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सचिव पर्यटन को टिहरी झील और उसके आसपास के क्षेत्र को वर्ल्ड लेवल का टूरिस्ट हब डेस्टिनेशन बनाने के लिए विस्तृत कार्य योजना बनाते हुए अगली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे, सचिव वी. षणमुगम, परियोजना निदेशक/अपर सचिव अभिषेक रोहेला, वित्त निदेशक जगत सिंह चौहान, सहायक प्रोजेक्ट निदेशक राजेश पंत, सिविल इंजीनियर भवन एवं अवसंरचना कपिल कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड जल विद्युत निगम की 126वीं बोर्ड बैठक में अहम परियोजनाओं व कार्यों की हुई चर्चा

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में उत्तराखंड जल विद्युत निगम की 126 वीं बोर्ड बैठक आयोजित हुई; जिसमें महत्वपूर्ण परियोजनाओं और संस्थान के कार्यों पर चर्चा की गई।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2025 – 26 के लिए संस्थान के पावर हाउस का 5212 मिलियन यूनिट का जनरेशन टारगेट फिक्स किया गया।

निगम के केपीआई (की परफॉर्मेंस इंडिकेटर) के सापेक्ष वित्तीय वर्ष 2024- 25 की उपलब्धियां पर चर्चा की गई एवं वित्त वर्ष 2025- 26 हेतु टारगेट निर्धारित किए गए।

सिरकारी – भयोल- रूपसिया बगड़ परियोजना हेतु सिविल पैकेज को हाइड्रो पैकेज के साथ शामिल करने का अनुमोदन प्रदान किया गया।

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग में रिव्यू पिटीशन फाइल किए जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया।

मद्महेश्वर परियोजना को पूरा करने की अवधि में विस्तार किया गया।

निगम के वित्त वर्ष 2025 – 26 हेतु बजट का अनुमोदन प्रदान किया गया।

मनेरी भाली परियोजना हेतु रिमोट ऑपरेटेड व्हीकल (आरोवी) से सर्वे कराने का अनुमोदन प्रदान किया गया।

बोर्ड बैठक में 100 करोड़ के ऊपर के निविदा डॉक्यूमेंट के लिए भी 20 से 100 करोड़ के निविदा प्रपत्र का ही उपयोग करने का अनुमोदन प्रदान किया गया।

निगम के 30 जून अथवा 31 दिसंबर को रिटायर होने वाले कार्मिकों के लिए लिए शासन के अनुरूप नेशनल इंक्रीमेंट का लाभ प्रदान करने तथा शासन द्वारा निर्गत की गई प्रोमोशन के शिथिलीकरण नियमावली को भी अंगीकार किया गया।

बैठक में इंडिपेंडेंट निदेशक इंदु कुमार पांडेय, पराग गुप्ता व सी एम वासुदेव, प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव वित्त दिलीप जावलकर, अपर सचिव ऊर्जा रंजना राजगुरु, एमडी यूजेवीएनएल संदीप सिंघल सहित संबंधित सदस्य उपस्थित थे।

सीएस ने किया देहरादून एयरपोर्ट पर देर रात्रिकालीन लैंडिंग की सुविधा हेतु अनुरोध

उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने राज्य के विकास से जुड़े हुए विभिन्न मुद्दों के संबंध में भारत सरकार के विभिन्न सचिवों से भेंट की।

पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण का मिला आश्वासन

छह माह के भीतर निविदा प्रक्रिया की जाएगी प्रारंभ

मुख्य सचिव ने नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा से भेंट की, जिसमें पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण को लेकर चर्चा की। सचिव सिन्हा ने आश्वस्त किया कि आगामी छः माह में पंतनगर एयरपोर्ट का निर्माण हेतु Bidding Process प्रारंभ कर लिया जाएगा।

मुख्य सचिव ने देहरादून एयरपोर्ट पर देर रात्रिकालीन लैंडिंग की सुविधा हेतु भी अनुरोध किया। साथ ही हेली एम्बुलेंस सेवा को पुनः आरंभ करने, एवं पिथौरागढ़ एयरपोर्ट के सुदृढ़ीकरण को लेकर भी आग्रह किया, जिस पर नागरिक उड्डयन सचिव ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

केदारनाथ में हुई हेलीकॉप्टर की क्रैश लैंडिंग की घटना के संदर्भ में मुख्य सचिव ने यात्रियों की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से यथोचित कार्रवाई की मांग की, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

रोपवे और जल विद्युत परियोजनाओं से संबंधित प्रोजेक्ट की पर्यावरणीय क्लीयरेंस का किया गया अनुरोध

मुख्य सचिव ने वन एवं पर्यावरण सचिव तनमय कुमार से भेंट कर त्यूणी-प्लासू जल विद्युत परियोजना, ऋषिकेश-नीलकंठ रोपवे प्रोजेक्ट, एवं सिरकारी भ्योल रूपासिया बगड़ जलविद्युत परियोजना के लिए वन स्वीकृति (wild life clearance/environment clearance) प्रदान करने का अनुरोध किया।

ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए रीजनल ट्रैफिक ट्रांजिट सिस्टम का दिल्ली मेरठ से आगे ऋषिकेश तक विस्तार का अनुरोध किया गया

मुख्य सचिव ने आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कटिकिथला से मुलाकात कर आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) को दिल्ली-मेरठ मार्ग से आगे हरिद्वार और ऋषिकेश तक विस्तारित करने हेतु अनुरोध किया। यह प्रस्ताव परीक्षण और दृश्यता रिपोर्ट के आधार पर क्रियान्वयन हेतु दिया गया। साथ ही देहरादून शहर में ट्रैफिक जाम और सार्वजनिक परिवहन की समस्याओं के समाधान हेतु सुझाव के लिये अनुरोध किया।

पेयजल और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु राज्य सरकार को दी जाने वाली धनराशि जारी करने का आग्रह

मुख्य सचिव ने पेयजल एवं स्वच्छता सचिव अशोक केके मीणा के साथ बैठक कर राज्य में जल जीवन मिशन के अंतर्गत लंबित धनराशि लगभग ₹3000 करोड़ अवमुक्त किये जाने का अनुरोध किया। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत चार धाम यात्रा के दौरान ठोस स्वच्छता प्रबंधन व्यवस्था हेतु विशेष ध्यान देने की बात रखी।

राज्य में आपदा के दौरान वायु सेना को अदा किए जाने वाले शुल्क में छूट की मांग की गई

मुख्य सचिव ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात कर राज्य के आपदा एवं राहत कार्यों के अंतर्गत भारतीय वायुसेना की सेवाओं के लिए देय शुल्क को माफ किए जाने का अनुरोध किया।

एमएसएमई सेक्टर को पूर्वोत्तर राज्यों की भांति 90% लागत सहायता प्रदान करने का किया अनुरोध

मुख्य सचिव ने एमएसएमई सचिव सुभाष चंद्र लाल दास से मुलाकात कर, पूर्वाेत्तर राज्यों के भांति उत्तराखण्ड राज्य को एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा 90 प्रतिशत तक लागत सहायता धनराशि के लिय अनुरोध किया। राज्य में फ्लैट फैक्ट्री एवं टूल रूम और प्रौद्योगिकी विकास केंद्र, टेस्टिंग पैकेजिंग सेंटर जैसे केंद्रों केा विकास करने हेतु अनुरोध किया गया।

उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों के अंब्रेला ब्रांड हाउस आफ हिमालय को प्रमोट करने का किया आग्रह

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह से मुलाकात कर मनरेगा के तहत 270 करोड़ रुपए की लंबित राशि को अवमुक्त करने का अनुरोध किया। इसके अतिरिक्त ‘हाउस ऑफ हिमालय’ को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि उत्तराखण्ड के हस्तशिल्प, उत्पादों और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान मिल सके। इसके साथ ही दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ‘हाउस ऑफ हिमालय’ के आउटलेट्स खोले जाने का अनुरोध किया गया।

उत्तराखंड को सुगम्य फिल्म डेस्टिनेशन बनाने के लिए फिल्म फेस्टिवल की मेजबानी का अनुरोध किया गया

मुख्य सचिव ने सूचना एवं प्रसारण सचिव संजय जाजू से भेंट कर उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय स्तर के फिल्म फेस्टिवल की मेज़बानी और राज्य में अधिक से अधिक फिल्मों की शूटिंग को प्रोत्साहित करने की दिशा में समर्थन माँगा गया। इसके अतिरिक्त व्यय सचिव श्री वी. वुअलनम से मुलाकात कर आगामी हरिद्वार कुंभ के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह भी किया गया, ताकि आयोजन भव्य और सुव्यवस्थित रूप में संपन्न हो सके।

मुख्य सचिव ने प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों एवं सलाहकार (मा0 प्रधानमंत्री) से मुलाकात कर राज्य की विभिन्न आवश्यकता यथा कुम्भ-2027 हेतु आर्थिक सहायता, नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विस्तारीकरण व सुदृढ़ीकरण आदि हेतु अनुरोध किया गया।

प्रमुख वाहन निर्माताओं को उत्तराखंड में निवेश का दिया न्यौता

मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने उत्तराखंड निवास में प्रमुख वाहन निर्माताओं (टाटा मोटर्स, महिंद्रा, हुंडई, KIA मोटर्स, GSW आदि) के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर, देश के विभिन्न राज्यों में लागू इलेक्ट्रिक वाहन नीति को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस संबंध में उत्तराखण्ड राज्य में ईवी क्षेत्र को बढ़ावा देने हेतु निवेश संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

यूनिक और प्रभावी सर्विस, वन गेटवे तथा बेहतर मार्केटिंग के जरिए बढ़ाएं इको टूरिज्मः सीएस

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में डेवलपमेंट ऑफ इको टूरिज्म की राज्य स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एच. पी. सी.) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन विभाग तथा संबंधित अधिकारियों के साथ इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के किए जा रहे प्रयासों के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में मुख्य सचिव ने वन विभाग को निर्देशित किया कि पूरे राज्य में जबरखेत मॉडल आधारित बड़े इको टूरिज्म डेस्टिनेशन डेवलप करें। इको टूरिज्म का एक बहुत बड़ा डेस्टिनेशन हो जिसके चारों ओर छोटे-छोटे डिस्टेंस पर फॉरेस्ट टूरिज्म से संबंधित छोटे-छोटे फॉरेस्ट टूरिस्ट स्टेशन हो। जहां पर इको टूरिज्म से संबंधित विविध प्रकार की एक्टिविटी (फॉरेस्ट ट्रैकिंग, बर्ड वाचिंग, वाइल्डलाइफ सफारी, हेरिटेज ट्रेल, इको कैंपिंग, नेचर एडवेंचर, नेचर गार्डन इत्यादि) मौजूद हो। इसको एक पूरे पैकेज की भांति डेवलप करें। इस बात का भी होमवर्क करें कि इसका बेहतर संचालन कैसे संभव हो अर्थात डेस्टिनेशन के डेवलपमेंट से लेकर, उसकी मार्केटिंग और उसका प्रभावी संचालन कैसे हो इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करें।

यूनिक और स्मूथ सर्विस तथा वन गेटवे और बेहतर मार्केटिंग से इको टूरिज्म को बनाएं प्रभावी

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि शुरुआती चरण में 20 से 25 ऐसे इको टूरिज्म डेस्टिनेशन डेवलप करें जिनको डेवलप करना आसान हो और जहां पर डेवलप होने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हो। उन्होंने निर्देशित किया कि इस बात की भी संभावनाएं तलाशें कि जो डेस्टिनेशन पहले से ही मौजूद हैं अथवा जिनको विकसित किया जा रहा है उनमें और अधिक वैल्यू एडिंग क्या की जा सकती है ताकि उसको और अधिक आकर्षक बनाया जा सके। बड़े और छोटे दोनों तरह के डेस्टिनेशन डेवलप करें।

उन्होंने कहा कि नंदा देवी पिक जो की 80 के दशक से बंद है वहां पर किस प्रकार से पुनः इको टूरिज्म की संभावना है तलाशी जा सकती हैं इसकी भी स्टडी करें।

मुख्य सचिव ने वन विभाग को निर्देशित किया कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों (वन एवं वन्य जीवों) का संरक्षण करते हुए स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दें।

इस दौरान बैठक में सचिव वन सी रवि शंकर, पीसीसीएफ धनंजय मोहन, मुख्य वन संरक्षक राहुल, अपर सचिव पर्यटन डॉ पूजा गर्ब्याल, अपर सचिव वन विनीत कुमार, सीसीएफ इको टूरिज्म पी के पात्रों सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
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गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म प्रोजेक्ट की समीक्षा की

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म प्रोजेक्ट के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
मुख्य सचिव ने वन विभाग को प्रदेश में जड़ी- बूटी के विकास और संरक्षण से संबंधित वन विभाग द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी लेते हुए निर्देशित किया कि स्थानीय समुदायों और वन पंचायतों को जड़ी बूटी रोपण, इको टूरिज्म एवं मूल्य संवर्धन गतिविधियों के माध्यम से सशक्त बनाएं। उन्होंने जड़ी बूटी के विकास के माध्यम से आजीविका सृजन, कौशल विकास एवं स्थानीय आर्थिक व बुनियादी ढांचे में सुधार करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि कलस्टर लेवल फेडरेशन (स्थानीय वन पंचायत) के समन्वय से जड़ी बूटी उत्पादन के प्रोजेक्ट को इंप्लीमेंट करें।
निर्देशित किया कि प्रोजेक्ट के अंतर्गत जितनी वन पंचायतों को चिन्हित किया जा चुका है वहां पर कार्यों की प्रगति तेजी से बढ़ाएं।
इस दौरान वन विभाग ने अवगत कराया की गैर प्रकाष्ठ वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म प्रोजेक्ट की समय अवधि 10 वर्ष की है। इसका प्रथम चरण 2024 से 2029 तक तथा द्वितीय चरण 2028 से 2033 तक का है। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 628 करोड रुपए है तथा यह प्रोजेक्ट जनपद हरिद्वार एवं उधम सिंह नगर को छोड़कर राज्य के 11 जनपदों में इंप्लीमेंट किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 5000 वन पंचायतें लाभान्वित होंगी। इसके तहत 5000 हेक्टेयर वन पंचायत की भूमि पर तथा 5000 हेक्टेयर निजी भूमि पर जड़ी बूटी का वनीकरण किया जाना है।