आदिवासियों की प्रकृति के साथ समन्वय स्थापित कर जीवन जीने की कल्या सराहनीयः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी आदिवासी भाई-बहनों के अधिकारों को संरक्षित करने एवं उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के उद्देश्य के लिये समर्पित ‘विश्व आदिवासी दिवस’ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि विविधतापूर्ण जनजातीय संस्कृति हमारे समाज की महत्वपूर्ण विरासत है। आदिवासियों की प्रकृति के साथ समन्वय स्थापित कर जीवन जीने की कला अत्यंत सराहनीय एवं अनुकरणीय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार आदिवासी समाज के उत्थान हेतु शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के क्षेत्र में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से निरंतर कार्य कर रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध आदिवासी नेता बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर उनका भावपूर्ण स्मरण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

विशेष सहायता ऋण के लिए सीएम ने प्रधानमंत्री का जताया आभार

वित्त मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पूंजीगत निवेश 2023-24 के अन्तर्गत उत्तराखण्ड को विशेष सहायता (ऋण) के लिए 951 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य को प्रदान की गई इस विशेष सहायता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया।

वित्त मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जिन महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए 2023-24 के लिए राज्य को विशेष सहायता स्वीकृत की गई है, उनमें जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल की सुविधा के लिए 110 करोड़ रूपये, नैनीताल में मॉडल कॉलेज अपग्रेडेशन के लिए 61 करोड़ रूपये, 500 बेड के दून मेडिकल कॉलेज के लिए 60 करोड़ एवं दून मेडिकल कॉलेज कैम्पस के लिए 33.98 करोड़ रूपये की विशेष सहायता प्रदान की गई है। पीएमजीएसवाई स्टेट शेयर के लिए 56 करोड़ रूपये, रूड़की देवबंद रेल लाईन के लिए 55 करोड़ रूपये, सहसपुर में स्किल हब के लिए 25.91 करोड़ रूपये, फार्म मशीनरी बैंक के लिए 25 करोड़ रूपये, टनकपुर आईएसबीटी के लिए 25 करोड़ रूपये, देहरादून में बस डिपो/वर्कशाप के लिए 25 करोड़ रूपये एवं अल्मोड़ा सीवरेज स्कीम के लिए 20.16 करोड़ की विशेष सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त अन्य योजनाओं में भी विशेष सहायता के तहत भारत सरकार द्वारा धनराशि स्वीकृत की गई है।

मोटा अनाज पौष्टिकता के साथ लाभप्रद भीः अग्रवाल

भाजपा महिला मोर्चा की ओर से श्री अन्न (मोटा अनाज) के प्रोत्साहन हेतु टिफिन बैठक का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्रीय विधायक व मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और मोटे अनाज को बढ़ावा देने का आवाहन किया। इस मौके पर महिलाओं द्वारा टिफिन में मोटे अनाज से बने व्यंजन का लुत्फ भी उठाया गया।

सोमवार को छिद्दरवाला में आयोजित कार्यक्रम में डॉ अग्रवाल ने कहा कि मोटे अनाज को लेकर समाज में विभिन्न भ्रांतियां रहती थी, कि यह अमीर वर्ग का भोजन नहीं निर्धन और जिनके पास अनाज पर्याप्त मात्रा में नहीं है, ऐसे लोग इस मोटे अनाज यानी मिलेट को खाते हैं। डॉ अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के अथक प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित किया है और जब प्रधानमंत्री ने इसका प्रस्ताव रखा था तो विश्व के 72 देशों ने इसका समर्थन किया।

डॉ अग्रवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी आभार प्रकट किया। कहा कि मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में मोटे अनाजों यानी मिलेट के उत्पादन और विपणन के लिए इस वित्तीय वर्ष में 73 करोड़ रूपये की व्यवस्था की है। कहा कि हमारी सरकार उत्तराखंड में मोटे अनाजों के प्रोत्साहन और उसके उत्पादन के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए मोटे अनाजों को और करीब से उसके महत्व, उसकी गुणवत्ता से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि वास्तव में स्वास्थ्य की दृष्टि से मोटा अनाज विशेष लाभकारी है। हमारी सरकार का भी यही उद्देश्य है कि मोटे अनाज यानी मिलेट्स का किसान अधिक से अधिक उत्पादन करें। जिससे निश्चित ही किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी। मुझे विश्वास है कि उत्तराखंड जैसा छोटा राज्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किसानों की आय को दोगुना करने की परिकल्पना को साकार करेगा।

जिलाध्यक्ष रविन्द्र राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी का भी संकल्प है जब राज्य 2025 का होगा तो उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होने में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के साथ राज्य में मोटे अनाज यानी मिलेट्स के उत्पादन को भी दोगुना करेगा।

इस मौके पर जिलाध्यक्ष भाजपा रविन्द्र राणा, ब्लाक प्रमुख भगवान सिंह पोखरियाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र सिंह नेगी, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष कविता शाह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य विमला नैथानी, जिला महामंत्री महिला मोर्चा अनिता प्रधान, प्रदेश महिला मोर्चा आईटी सह संयोजक अंजली रावत, मंडल अध्यक्ष महिला मोर्चा समा पंवार, सोनी प्रधान, ग्राम प्रधान सोबन सिंह कैंतुरा, भगवान महर, चंद्र मोहन पोखरियाल, सरदार बलविंदर सिंह, रोशन कुड़ियाल आदि उपस्थित रहीं।

बोधिसत्व विचार श्रृंखला एक नई सोच नई पहल पुस्तक का सीएम ने किया विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में उत्तराखण्ड /25 ‘बोधिसत्व विचार श्रृंखला एक नई सोच-एक नई पहल’ पुस्तक का विमोचन किया। प्रदेश के समग्र विकास हेतु पिछले एक वर्ष में बोधिसत्व विचार श्रृंखला के तहत आयोजित विभिन्न विषयों पर आधारित 12 सत्रों में वैज्ञानिकों, समाजसेवियों बुद्धिजीवियों एवं विषय विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त विचारों का संकलन इस पुस्तक में किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बोधिसत्व विचार श्रृंखला के माध्यम से राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान की राह आसान बनाने का हमारा प्रयास रहा है। राज्य के विकास की दीर्घकालिक योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इसके लिये सभी विभागों का 10 साल का रोड़ मैप तैयार किया जा रहा है। अब तक 20 विभागों की समीक्षा की जा चुकी है। बोधिसत्व विचार श्रृंखला में प्राप्त सुझावों को इसमें सामिल किया जा रहा है। हमारा प्रयास राज्य के विकास में सभी संस्थानों का सहयोग प्राप्त करने का रहा है। पंत नगर कृषि विश्व विद्यालय को पशुपालन एवं कृषि विकास तथा तकनीकि विश्व विद्यालय को विज्ञान एवं तकनीकि का राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच बनाने में सहयोगी बनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि आदर्श चम्पावत के लिये बनायी जा रही योजनायें प्रदेश के सभी जनपदों के लिये आधार बनेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 21 वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखण्ड का दशक बताया है। हम इस दिशा में रोड मैप बना कर कार्य कर रहे हैं। राज्य के विकास में जन भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। नीति आयोग से हिमालयी राज्यों के लिये अलग से विकास का मॉडल तैयार करने की अपेक्षा की गई है। राज्य में स्थित सभी वैज्ञानिक संस्थानों को साथ लाकर समग्र एवं सर्वागीण विकास का एकीकृत मॉडल विकसित करना हमारी प्राथमिकता है जिसके माध्यम से हम प्रदेश के सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों को विकास की मुख्यधारा के जोड़ते हुए इकोलॉजी एवं इकोनॉमी में बराबर संतुलन बनाते हुए इस दशक को उत्तराखण्ड का दशक बनाने की हमारी माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आंकाशाओं को मूर्त रूप दे सकें। विज्ञान एवं तकनीक के माध्यम से उत्तराखण्ड/25 की अवधारणा के अनुरूप एक सशक्त, सक्षम एवं समृद्ध उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण के लिए उन्होंने राज्य स्थित सभी प्रतिष्ठित संस्थानों की सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा भी की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नई कार्य संस्कृति विकसित करने के लिये 10 से 5 तक कार्य करने की व्यवस्था में बदलाव लाया जा रहा है। राज्य के विकास में प्रवासी उत्तराखंडी भी अब सहयोगी बनने लगे है। लोग उत्तराखण्ड आ रहे है। राज्य में निवेश व विकास का वातावरण बन रहा है। इस वर्ष ग्लोगल इन्वेस्टर समिट का आयोजन राज्य में किया जायेगा। जिसमें प्रधानमंत्री को भी आमंत्रित किया गया है। बडी संख्या में उद्यमी देश विदेश से यहां निवेश की सोच रहे है। इसके लिये राज्य सरकार द्वारा पूरा सहयोग दिया जा रहा है तथा अनुकूल वातावरण का सृजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में चारधाम एवं हेमकुंड साहिब यात्रा, कांवड यात्रा, हरिद्वार में होने वाले स्नान, पर्वों, पूर्णागिरी सहित अन्य मेलों में लगभग 8 करोड लोग प्रतिवर्ष उत्तराखण्ड आते हैं। इस आबादी की व्यवस्थाओं के लिये भी योजनायें बनायी जानी होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुकूल औद्योगिक नीति और उदार कर लाभों से उत्पन्न पूंजी निवेश में भारी वृद्धि के कारण उत्तराखंड अब भारत में सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में से एक के रूप में उभर रहा है। इसने राज्य में निवेश करने और पहाड़ी राज्य के निरंतर विकास का हिस्सा बनने के लिए उद्योगों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। राज्य के यह समावेशी विकास का लक्ष्य आईटी क्षेत्र के बिना हासिल नहीं किया जा सकता। डिजिटल उत्तराखंड का उद्देश्य राज्य में रोजगार सृजन, स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक विकास में नए आयाम हासिल करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वस्तुतः यह संवाद श्रृंखला हम सबकी विचार यात्रा है, सामूहिक विचार यात्रा अपनी समस्याओं का समाधान अपने लोगों से विचार विमर्श कर ढूँढ़ने और जन-जन के बीच सशक्त संवाद करने की यह यात्रा लोकतंत्र का आधार तत्व है। लोक की समस्याओं का समाधान उनकी अपेक्षानुसार तभी संभव होगा जब उनसे संवाद किया जायेगा। इकोलॉजी, इकोनॉमी, टैक्नोलॉजी, एकाउंटिबिलिटी और सस्टेनबिलिटी के पाँच सशक्त स्तंभों पर व्यवस्थित मॉडल हमारे उत्तराखण्ड /25 के संकल्प के लिए आवश्यक है। हमारा संकल्प है कि उत्तराखण्ड राज्य अपने सृजन की रजत जयंती वर्ष 2025 तक एक श्रेष्ठ राज्य बनकर उभरे तथा माननीय प्रधानमंत्री जी की घोषणानुरूप् इक्कीसवीं सदी के इस तीसरे दशक में समृद्ध और सशक्त रूप में स्थापित हो। उत्तराखण्ड का यह विकास मूलक मॉडल देश के अन्य हिमालयी राज्यों के लिये भी मार्गदर्शक मॉडल बने।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रौद्योगिकी के प्रयोग से पारस्परिक दूरियों कम हुई। इस बदलाव ने भी हमारे संकल्प को सिद्धि प्रदान की और हमने ऐसी संवाद श्रृंखलाएँ आयोजित करने की पहल का मन बनाया जो नियोजनकर्ताओं, नीति निर्धारको प्रशासकों और आमजन के बीच की संवादहीनता की खाइयों को पाट सकें। यह बोधिसत्व विचार श्रृंखला ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों के संयोजन से आयोजित की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हमें अपनी पारिस्थितिकी और आर्थिकी के संतुलन को बनाए रखना है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सार्थक प्रयोग हेतु लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ाना है। नैसर्गिक प्राकृतिक सौन्दर्य युक्त उत्तराखण्ड की सभी प्राकृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक विरासतों का संरक्षण करके इसे देश-विदेश में विशिष्ट पहचान दिलाने, अपनी संस्कृति, परम्पराओं जनजातीय विशिष्टताओं, बोलियों लोककलाओं, लोकगीतों और साहित्य, तीर्थाटन, पवित्र चारधाम यात्रा, मानसखण्ड आदि को नई पहचान देने का भी हमारा प्रयास है।
कार्यक्रम के संयोजक एवं यूकास्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि उत्तराखण्ड को अपनी स्थापना के रजत जयंती कालखण्ड में भारत के श्रेष्ठ एवं अग्रणी राज्यों के रूप में विकसित करना माननीय मुख्यमंत्री जी के चिन्तन के केन्द्र में रहा है। उनकी अवधारणा रही है कि उत्तराखण्ड की विकास-यात्रा हम सब की सामूहिक यात्रा है, और उसे साक्षात में भी एक सामूहिक यात्रा का ही स्वरूप लेना चाहिए। उन्होंने यह भी देखा कि लोक और तंत्र के बीच संवादहीनता हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारगत दुर्बलता रही है, जो कालान्तर में अनेक समस्याओं का कारण बनती रही है। इसलिए, लोक के साथ संवाद स्थापित करने से ही यह सामूहिक यात्रा चरितार्थ हो सकेगी। इसी लक्ष्यपूर्ति हेतु माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा बोधिसत्व विचार श्रृंखला प्रारम्भ की गयी है। बोधिसत्व का उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केन्द्रित एक ऐसे मंच की स्थापना है जहाँ देश के मूर्धन्य मनीषी, वैज्ञानिक, युवा उद्यमी एवं जन-प्रतिनिधि एक साथ एकत्र होकर राज्य के विकास के सभी आयामों पर गहन विचार-विमर्श कर उत्तराखण्ड /25 की एक ऐसी कार्य-योजना तैयार कर सकें जो राज्य का भविष्य उत्तरोत्तर स्वर्णिम बनाने में सहायक सिद्ध हो सके। इन श्रृंखलाओं से प्राप्त सुझावों को इस पुस्तक में समाहित किया गया है।
इस अवसर पर सचिव वित्त दिलीप जावलकर, पद्यमश्री अनिल जोशी, कल्याण सिंह रावत ‘मैती’, कुलपति दून विश्व विद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल, भाभा रिसर्च सेन्टर के डॉ. डी. के. असवाल, कुलपति जी.बी.पंतनगर कृषि विश्व विद्यालय मनमोहन सिंह चौहान, तकनीकि विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो. ओंकार सिंह, निदेशक वाडिया इन्सटिट्यूट डॉ. कला चंद, कमला पंत, डॉ. मनोज पंत, डॉ. अंजन रे सहित विभिन्न संस्थानों से जुडे विषय विशेषज्ञों ने अपने विचार एवं सुझाव रखे।

मुख्यमंत्री बोले, सीएम हेल्पलाइन में शिकायतकर्ता के पूर्ण रूप से संतुष्ट होने के बाद ही शिकायत क्लोज की जाए

जन शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए जब तक शिकायतकर्ता पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हो जाता है, उनकी शिकायत फोर्सली क्लोज न की जाए, यदि कोई अधिकारी ऐसा कर रहे हैं तो उन पर सख्त कारवाई की जाए। यह निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सीएम हेल्पलाइन-1905 की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दिये। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री जन समर्पण दिवस (सहयोग से समाधान की ओर) डिजिटाइजेशन प्रक्रिया द्वारा तहसील दिवस एवं जिलाधिकारी जनता दिवस पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल सीएम हेल्पलाइन 1905 से कनेक्ट होगा। इससे तहसील दिवस एवं जिलाधिकारी के समक्ष प्रत्येक माह प्राप्त शिकायतों एवं उनमें कितनों का समाधान किया गया इसकी पूरी जानकारी प्राप्त होगी। यह सभी जानकारी डिजिटल माध्यम से प्राप्त होगी। इसके लिए अलग से रजिस्टर मेंटेन करने की आवश्यकता नहीं होगी।
लोक निर्माण विभाग और नगर निगम में एक ही दिन में कई शिकायतों के निस्तारण होने पर मुख्यमंत्री ने सचिव लोक निर्माण विभाग एवं आयुक्त गढ़वाल मण्डल इसकी जॉच करने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने सभी उच्चाधिकारियों को निर्देश दिये कि सीएम हेल्पलाईन पर आ रही शिकायतों के सबंध में शिकायतकर्ताओं से वार्ता कर उनका समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि अगली बैठकों में यह भी देखा जायेगा कि कौन अधिकारी शिकायतकर्ताओं से लगातार बातचीत कर रहे हैं और कौन लापरवाही बरत रहे हैं।

सतर्कता अधिष्ठान को मजबूत बनाने के लिए सभी विभाग नोडल अधिकारी नियुक्त करें।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि सभी विभाग सतर्कता अधिष्ठान को मजबूत बनाने के लिए अपने विभागों में एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें। सीएम हेल्पलाइन की पिछले माह हुई बैठक में सतर्कता अधिष्ठान को मजबूत करने के निर्देश दिये थे। इस सबंध में उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से इस दिशा में किये जा रहे प्रयासों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाईन 1905 के सफल संचालन के लिए कार्य कर रहे लोगों को और अधिक प्रशिक्षित किया जाए। समय-समय पर विभागीय अधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिया जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिये जिन शिकायतों के समाधान में अधिक समय लगने की संभावना है। ऐसी शिकायतों पर शिकायतकर्ताओं से बात कर उनको जानकारी दी जाय और कार्य में लेट होने की स्पष्ट वजह भी बताई जाय।

सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने वाले शिकायतकर्ताओं से मुख्यमंत्री ने फोन से बात कर वस्तुस्थिति जानी।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कुछ शिकायतकर्ताओं से फोन से वार्ता की एवं उनकी समस्याओं की जानकारी ली। कुछ शिकायतों का समाधान किया जा चुका था। जिन समस्याओं का समाधान अभी नहीं हुआ था, मुख्यमंत्री ने सबंधित अधिकारियों को शीघ्र उनका समाधान करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर देहरादून के श्री आलोक शर्मा, उत्तरकाशी के राहुल राणा, कमला चौहान, मारथा डेविड, मोहन चन्द्र उप्रेती एवं कुशलपाल सिंह राणा से बातचीत कर उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली।
बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, आनन्द बर्द्धन, डीजीपी अशोक कुमार, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, अरविन्द सिंह ह्यांकी, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, सचिन कुर्वे, विनय शंकर पाण्डेय, निदेशक आईटीडीए नितिका खण्डेलवाल अपर सचिवगण, विभागीय एचओडी एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री से मिले आईपीएस कैडर में प्रोन्नत पुलिस सेवा के अधिकारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सचिवालय में आई.पी.एस. कैडर में प्रोन्नत पुलिस सेवा के अधिकारियों ने भेंट की। इनमें प्रमेन्द्र डोभाल, कमलेश उपाध्याय, तथा ममता बोहरा शामिल थे। मुख्यमंत्री ने तीनों अधिकारियों का बैच अलंकरण कर शुभकामनाएं दी।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार, सचिव मुख्यमंत्री आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विनय शंकर पाण्डेय उपस्थित थे।

सीएम ने कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या में वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर देश के लिये अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की है।
अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सेना ने अपने शौर्य और पराक्रम से हमेशा देश का मान बढ़ाया है। हमें अपने जवानों की वीरता पर गर्व है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में भी देश के लिये बलिदान की परम्परा रही है। कारगिल युद्ध में बड़ी संख्या में उत्तराखण्ड के सपूतों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुती दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों के कल्याण के लिये वचनबद्ध है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारतीय सेना के अदम्य साहस व शौर्य का लोहा पूरी दुनिया मानती है। भारतीय सेना के वीर जवानों ने कारगिल में विपरीत परिस्थितियों में भी दुश्मन को भागने पर मजबूर किया था। कारगिल युद्ध में देश की सीमाओं की रक्षा के लिए वीर सैनिकों के बलिदान को राष्ट्र हमेशा याद रखेगा।

काशीपुर में सीएम ने किया 28 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने काशीपुर में 28.63 करोड़ की 24 विभिन्न विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलांयास किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के लाभार्थी आधारित नवनिर्मित 335 आवासों का लोकार्पण कर प्रतिकात्मक रूप से पांच लाभार्थियों को आवास की चाबी प्रदान की। मुख्यमंत्री ने इस योजना के तहत 1061 लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में दी जाने वाली धनराशि के तहत पांच लोगों को प्रथम किश्त की धनराशि तथा आवास आवंटन पत्र सौंपे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत पांच लोगों को 50-50 हजार की धनराशि के चेक भी प्रदान किये।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि गिरीताल का सौंदर्यकरण किये जाने तथा गिरीताल का प्रबन्धन नियमित रूप से कुमाऊॅ मण्डल विकास निगम को सौंपने पर विचार किया जाएगा। नगर निगम काशीपुर के अन्तर्गत ढेला नदी से चलतीकरण, मानपुर की सैनिक फार्म कॉलोनी, सिल्वर सिटी की आबादी को बचाने के लिए बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य किये जाने, काशीपुर नगर निगम के पश्चिमी भाग स्थिति आवासी जीर्ण क्षीण आवासीय भवन को ध्वस्त करके सॉपिंग कॉम्पलेक्स, पार्किंग रेस्टोरेंट एवं आवास का निर्माण किये जाने, नगर निगम स्थित डेस्क ऑफिस तथा दुकानों की छत पर हॉल का निर्माण किये जाने, टांडा तिराहा एवं चौती चौराहे के पास 8 सीटर एस्पीरेशनल टॉयलेट कॉम्पेक्स का निर्माण किये जाने की घोषणा की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नगर निगम काशीपुर की महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टालों पर प्रदर्शित उत्पादों का भी अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिन विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया है, इनसे इस क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम सर्वश्रेष्ठ उत्तराखंड बनाने के लिए अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूर्ण करने हेतु अग्रसर हैं और ये परियोजनाएं उस संकल्प को पूर्ण करने में सहायक सिद्ध होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम इसलिए भी विशेष है, क्योंकि एक ओर जहां आज प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 335 आवासों का लोकार्पण किया गया है, वहीं दूसरी ओर 1061 लाभार्थियों को पहली किश्त भी जारी की गई है। उन्होंन स्वयं के घर की मालकिन बनी महिलाओं को स्वयं का घर सौंपने को पुण्य का कार्य बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब एक गरीब को घर मिलता है, तो उसके जीवन में स्थिरता आती है और वो एक नई उम्मीद के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ता है। इसीलिए गरीबों को अपना पक्का घर देने का हमारा ये अभियान सिर्फ एक सरकारी योजना मात्र नहीं है, ये प्रदेश के एक-एक वंचित को इस बात का विश्वास देने की प्रतिबद्धता है कि सरकार उनके सशक्तिकरण के लिए दृढ़ संकल्पित है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हमारी सरकार हर गरीब तक पहुंचने का काम कर रही है। विकास कार्यों और लाभार्थियों की सहायता करते समय हमारी सरकार न किसी गरीब की जाति देखती है और न ही किसी गरीब का धर्म। हमारी सरकार गरीबों को समर्पित है, इसलिए गरीब की आवश्यकताओं को भली भांति समझती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में पिछले 9 वर्षों में करीब 4 करोड़ से अधिक पक्के घर गरीब परिवारों को मिल चुके हैं, इनमें से करीब 70 प्रतिशत घर महिलाओं के नाम पर हैं। 2014 से पहले देश में शहरी आवास योजनाओं के तहत सिर्फ 13 लाख मकान ही मंजूर किए थे और इसमें से भी केवल 8 लाख मकान ही बनाए थे। यह इस बात का सबूत है कि जब कोई सरकार ‘अंत्योदय’ को अपना ध्येय मानकर कार्य करती है तो परिणाम कितने अलग होते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा और सुशासन के आधार पर देश में विकास की एक नई परिभाषा लिखने का कार्य किया है। देश में जिस स्तर पर शोषितों और वंचितों का आज सशक्तिकरण हो रहा है वैसा आज से पहले कभी नहीं हुआ। प्रधानमंत्री जी से प्रेरणा पाकर और उनके ही मार्गदर्शन में, उत्तराखंड में भी विकास के एक नए युग का सूत्रपात हो चुका है। आज प्रदेश के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अनेकों कार्य किये जा रहे हैं। प्रदेश में हर स्तर पर कनेक्टिविटी को सुधारा जा रहा है, उद्योगों के विकास पर बल दिया जा रहा है और भविष्य की आवश्यकताओं को केंद्र में रख कर नीतियां बनाई जा रही हैं। हमारे शहर अब तेजी से आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन रहे हैं और इसी के दृष्टिगत हम निरंतर अपने शहरों को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया हैं और हमें अब अपनी पूरी क्षमता लगा कर उनके इस कथन को सत्य सिद्ध कर के दिखलाना है। हमें ‘चरैवेति चरैवेति’ के मूल मंत्र को अपना कर, विकास को गति देते हुए सर्वश्रेष्ठ उत्तराखंड के ’’विकल्प रहित संकल्प’’ को सिद्ध करना ही है। भारत के इस अमृत काल में हमारे इस संकल्प को आप सभी के एकनिष्ठ प्रयासों के बिना सिद्ध नहीं किया जा सकता है। उन्होंने इस लक्ष्य की प्राप्ति में सभी से सहयोग की अपेक्षा की। हम सब जुटें, सब जुड़ें और सब मिल कर आगे बढ़ें, तभी हम उत्तराखण्ड को देश का विकसित एवं अग्रणी राज्य बनाने में सफल होंगे।
इस अवसर पर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, मेयर ऊषा चौधरी, अध्यक्ष अनुसूचित जाति आयोग मुकेश कुमार, जिलाधिकारी उदयराज सिंह, एसएसपी मंजूनाथ टीसी, नगर आयुक्त विवेक राय सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

सीएम ने आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम से ली प्रदेश में अतिवृष्टि क जानकारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय स्थित आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम से प्रदेश में हो रही अतिवृष्टि की जानकारी ली। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से फोन पर वार्ता कर निर्देश दिए कि हर चुनौती का सामना करने के लिए प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा जाय। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी आपदा की स्थिति में लोगों को शीघ्र राहत मिले, इसके लिए पूरी तैयारी रखी जाए। जनपदों में खाद्य सामग्री, आवश्यक दवाइयों एवं अन्य आवश्यक सामग्री की पूरी व्यवस्था रखी जाए। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वर्षा के कारण सड़क, विद्युत, पेयजल व्यवस्थाएं बाधित होने की दशा में, सभी व्यवस्थाएं संबंधित विभागों से तत्काल सुचारू की जाय।

मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन को निर्देश दिए कि लक्सर, खानपुर एवं प्रदेश के अन्य ऐसे स्थानों जहां पर कम बरसात के बावजूद भी जलभराव की समस्याएं आ रही हैं, ऐसे स्थानों के लिए ड्रेनेज की उचित व्यवस्था हो, इसके लिए दीर्घकालिक प्लान बनाया जाय। सभी जिलाधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए हैं, ताकि जनपदों में कुछ भी आवश्यकता पड़ने पर शीघ्र उपलब्ध कराई जा सके। मुख्यमंत्री ने सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ द्वारा तैनात की गई फोर्स के बारे में भी जानकारी ली।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा, अपर सचिव सविन बंसल, एसीईओ आपदा प्रबंधन रिद्धिम अग्रवाल एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

पर्यावरण संरक्षण तथा प्रकृति को महत्व देने की है हमारी परम्पराः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को समर्पित लोक पर्व ‘‘हरेला‘‘ उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक परम्परा का प्रतीक है। पर्यावरण संरक्षण तथा प्रकृति को महत्व देने की हमारी परम्परा रही है। यह पर्व समृद्धि, संस्कृति के महत्व हरियाली तथा पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला सुख-समृद्धि व जागरूकता का भी प्रतीक है। हमारी आने वाली पीढ़ी को शुद्ध वातावरण मिल सके इसके लिए सबको वृक्षारोपण व पर्यावरण संरक्षण के प्रति ध्यान देना होगा। ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से आज दुनिया भर के देश चिंतित हैं। यह पर्व ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ लड़ने का भी संदेश देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण के साथ उनके संरक्षण के प्रति भी ध्यान देना होगा। वृक्षारोपण के लिये जन सहभागिता को जरूरी बताते हुए इसमें सभी संस्थाओं सामाजिक संगठनों से भी सहयोग की भी उन्होंने अपेक्षा की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड धर्म, अध्यात्म एवं संस्कृति का केन्द्र है। उत्तराखंड जैव विविधताओं वाला राज्य है, यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को आकर्षित करता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए हमारी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। हम सभी को समर्पित भाव से प्रकृति संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में निरंतर प्रयासों की जरूरत बताते हुए मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जनपद में जल स्रोतों एवं गदेरों के पुनर्जीवन एवं संरक्षण के लिए कार्य किए जाने पर भी बल दिया है। नदियों के संरक्षण एवं नदियों के पुनर्जीवन के प्रयास समय की जरूरत है। विकास एवं पर्यावरण में संतुलन के साथ आने वाली पीढ़ी को शुद्ध पर्यावरण मिले, इसके लिए भी पर्यावरण संरक्षण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे लोक पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत की पहचान है। राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने के निरंतर प्रयास हो रहे हैं। इसमें हम सबको सामुहिक रूप से जिम्मेदारी निभानी होगी तभी हम अपनी संस्कृति एवं परम्पराओं की जड़ों से जुड पायेंगे।