निर्माण कार्यों में कक्षाओं के साथ प्रयोगशालाओं के निर्माण को प्राथमिकता दी जाएः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न विभागों के प्रस्तावों पर सहमति प्रदान की गई। मुख्य सचिव ने विभागों के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की एवं दिशा निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने उच्च शिक्षा विभाग के डिग्री कॉलेजों के निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान कार्यदायी संस्था मंडी परिषद द्वारा विभिन्न विभागों के निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सम्बन्धित अधिकारियों को कार्यों की समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी कार्यों की समय-सीमा निर्धारित करते हुए प्रगति की कार्ययोजना प्रस्तुत किये जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं एवं कक्षाओं के साथ प्रयोगशालाओं के निर्माण को प्राथमिकता दी जाए, ताकि विद्यार्थियों की तात्कालिक आवश्यकताओं को समय पर पूरा किया जा सके। उन्होंने आवश्यकतानुसार परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करते हुए चरणबद्ध तरीके से कार्यों को पूरा किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने डिग्री कॉलेजों में परीक्षा भवन निर्माण में परीक्षा हॉल को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) के अनुकूल बनाने की संभावनाएं तलाशने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद में कम से कम एक ऐसा परीक्षा केंद्र विकसित किया जाना चाहिए, जहां कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) एवं उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की प्रतियोगी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित प्रणाली से आयोजित की जा सकें। इससे प्रदेश में परीक्षा आयोजन की क्षमता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि आईटीआई भवनों के निर्माण में सभी आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रशिक्षुओं को गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध हो सके।

जिलाधिकारी सम्बन्धित विभागाध्यक्षों से सीधे समन्वय कर समस्याओं का करें समाधानः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में जनपदों के शासन स्तर पर लंबित प्रकरणों के निस्तारण को लेकर बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने सभी जनपदों से सम्बन्धित लंबित प्रकरणों की विस्तार से जानकारी लेते हुए उनके निस्तारण की प्रगति की समीक्षा की।

मुख्य सचिव ने सम्बन्धित विभागों के विभागाध्यक्षों को आपसी समन्वय से जनपदों के लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनपद स्तर पर किसी प्रकरण के निस्तारण में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। जिलाधिकारी संबंधित विभागाध्यक्षों से सीधे संवाद कर समस्याओं का समाधान कराएं। आवश्यकता होने पर विभागीय उच्चाधिकारियों से सीधे समन्वय स्थापित कर प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जनपदों से सम्बन्धित विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने सड़कों, पुलों, भवनों तथा अन्य निर्माण कार्यों से जुड़े लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में विभागीय स्तर पर निर्णय लिया जाना है, उनमें समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जनपदों से सम्बन्धित लंबित प्रकरणों की नियमित रूप से समीक्षा करें तथा जिन मामलों में विभागाध्यक्ष स्तर पर समन्वय की आवश्यकता है, उनमें सीधे संबंधित विभागाध्यक्ष से वार्ता कर समाधान कराएं। उन्होंने कहा कि शासन और जनपदों के मध्य प्रभावी समन्वय से ही लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण संभव है।

उल्लेखनीय है कि जनपदों के शासन स्तर पर लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को यह बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक के दौरान विभिन्न जिलाधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए बताया कि इसके माध्यम से जनपदों के वर्षों से लंबित अनेक प्रकरणों का समाधान संभव हुआ है। जिलाधिकारियों ने कहा कि नियमित समीक्षा और विभागीय उच्चाधिकारियों के साथ सीधे समन्वय से लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आई है।

सीएस ने उत्तरकाशी में की जिलास्तरीय समीक्षा बैठक, योजना दीदी ई-पुस्तक का किया विमोचन

मुख्य सचिव ने कलेक्ट्रेट सभागार में जिलास्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने जनपद में संचालित जिला योजना, राज्य वित्त, 25 सूत्रीय कार्यक्रम तथा केंद्र पोषित विभिन्न विकास कार्यक्रमों व जनकल्याणकारी योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने जिले में क्रियान्वित समस्त योजनाओं की विस्तृत जानकारी को समाहित करने वाली डिजिटल पहल श्योजना दीदीश् ई-पुस्तक का विमोचन किया। बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सभी स्वीकृत निर्माण कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिये।

समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने धामों व धार्मिक स्थलों में स्वच्छता व्यवस्था के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत कूड़ा निस्तारण हेतु कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त सड़कों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बीआरओ, लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई और स्थानीय नगर निकायों को आगामी 15 अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने के अभियान चलाने का अल्टीमेटम दिया। विभागीय कार्यप्रणाली में गति लाने हेतु विभागाध्यक्षों को नियमित रूप से धरातलीय निरीक्षण करने तथा अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से लंबित प्रकरणों का शीघ्र समाधान निकालने करने के निर्देश दिये। मुख्य विकास अधिकारी को उद्यान विभाग के तहत पॉलीहाउस निर्माण एवं श्जायकाश् परियोजना के निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष धीमी प्रगति में सुधार लाने हेतु उद्यान विभाग की योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने के साथ जिला सैनिक कल्याण विभाग के अंतर्गत क्रियान्वित की जा रही सैनिक कल्याण योजनाओं की भी समीक्षा करने के निर्देश दिये।

इस दौरान जल शक्ति मंत्रालय (भारत सरकार) के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और उत्तराखंड राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के संयुक्त तत्वावधान में ष्प्रारंभ – नदी, जलीय संसाधनों का संरक्षण और जैव विविधता विरासत प्रबंधनष् परियोजना के लिए प्रशासनिक स्वीकृति एवं व्यय की मंजूरी दी गई है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा ष्स्वच्छ गंगा, निर्मल एवं अविरल यमुनाष् के संकल्प के साथ गंगोत्री और यमुनोत्री क्षेत्रों की हिमालयी नदियों के संरक्षण हेतु लगभग 3.26 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस जिला-स्तरीय मॉडल का आधिकारिक उद्घाटन किया गया।

बैठक से पूर्व मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने जिला सभागार में सिविल सोसायटी, भूतपूर्व सैनिक एवं अर्द्धसैनिक बलों के पेंशनर्स, होटल एसोसिएशन तथा विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों के साथ संवाद किया। इस दौरान प्रतिनिधियों ने क्षेत्र के विकास, पर्यटन, पूर्व सैनिकों एवं पेंशनर्स से जुड़े विषयों सहित जनहित की विभिन्न समस्याओं और सुझावों से मुख्य सचिव को अवगत कराया। प्रमुख रूप से वीबी जी रामजी योजना में ऑनलाइन उपस्थिति की समस्या, नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कूड़ा निस्तारण, सड़क एवं नेटवर्क की समस्या, उपनल में पूर्व सैनिकों के लिए समान कार्य-समान वेतन, नेलांग-जादुंग परमिट के लिए एकल खिड़की व्यवस्था तथा स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित मुद्दे रखे गए। मुख्य सचिव ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि विभिन्न वर्गों और संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद के माध्यम से क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं और समस्याओं को समझने में मदद मिलती है तथा जनहित से जुड़े विषयों का नियमानुसार परीक्षण कर समाधान की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने अवगत कराया कि प्राप्त अधिकांश समस्याओं के निस्तारण की कार्यवाही गतिमान है, जबकि शेष समस्याओं एवं मांगों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न संगठनों द्वारा उठाए गए उचित एवं जनहित से जुड़े विषयों के निस्तारण के लिए संबंधित विभागों के माध्यम से नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया गया कि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान और जनहित से जुड़े विषयों पर हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। मुख्य सचिव ने जिला मुख्यालय स्थित स्मार्ट कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर संचालित आधुनिक निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने कंट्रोल रूम में स्थापित सीसीटीवी नेटवर्क, रियल टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था के संबंध में अवगत कराया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन की सुरक्षा एवं सुविधा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए स्मार्ट निगरानी प्रणाली का और अधिक प्रभावी ढंग से संचालन सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने भटवाड़ी विकासखंड के गणेशपुर में होलिस्टिक टूरिज्म पहल के तहत संचालित वूमेन हिल्स ट्रैक एडवेंचर का अवलोकन किया। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से संवाद कर पर्यटन गतिविधियों से जुड़कर उनके अनुभवों की जानकारी ली। इस पहल के माध्यम से महिलाओं को ट्रेकिंग, गाइडिंग, कुकिंग एवं कैंपिंग का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जा रहा है। मुख्य सचिव ने महिला सशक्तिकरण और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने वाली इस पहल की जानकारी ली।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान, ब्लॉक प्रमुख भटवाड़ी ममता पंवार, ब्लॉक प्रमुख डुंडा राजदीप परमार सहित विभिन्न संगठनों के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी सहित पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय, मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह, अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएस ने की बद्री व केदार धाम मास्टर प्लान के विभिन्न निर्माण व पुनर्निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में बद्रीनाथ धाम-केदारनाथ धाम मास्टर प्लान के तहत चल रहे विभिन्न निर्माण एवं पुनर्निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने मास्टर प्लान के अंतर्गत एसेट हैंडओवर के कार्य की जानकारी ली। उन्होंने केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों के तहत सेंट्रल स्ट्रीट के अंतर्गत 6 बिल्डिंग्स को टॉप मोस्ट प्रायोरिटी पर रखते हुए, यात्रा सीजन के उपरांत कार्य शुरू कराए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सम्बन्धित स्टेकहोल्डर्स के साथ आवश्यक एग्रीमेंट साइन करने की प्रक्रिया को जल्द पूरा कराए जाने की बात कही, ताकि कार्य प्रारम्भ करने में किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने संस्कृति मंत्रालय द्वारा कराए जा रहे विभिन्न कार्यों की भी जानकारी ली। उन्होंने जिलाधिकारी को इन कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण हो सकें।

मुख्य सचिव ने मास्टर प्लान क्षेत्र से बाहर किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति न दिए जाने के महत्त्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए तत्काल जीओ जारी किए जाने की बात कही। विशेष रूप से फ्रैजाइल एवं एवलॉन्च प्रोन एरिया में किसी भी एजेंसी द्वारा निर्माण कार्य की अनुमति न दिए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों के सम्बन्ध में सुरक्षा एवं पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के फेज-1 एवं फेज-2 के अंतर्गत चल रहे विभिन्न कार्यों की प्रगति की भी जानकारी ली। उन्होंने सम्बन्धित अधिकारियों को कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। बैठक में बद्रीनाथ में निर्माणाधीन अस्पताल के सम्बन्ध में भी जानकारी ली गई। जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि अस्पताल को लगभग 15 दिनों में प्रारम्भ किए जाने की योजना है। मुख्य सचिव ने अस्पताल को निर्धारित समयसीमा में प्रारंभ करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, एपीसीसीएफ डॉ. विवेक पाण्डेय, सुरेन्द्र मेहरा, सीसीएफ प्रसन्ना कुमार पात्रो, अपर सचिव विनीत कुमार, हिमांशु खुराना एवं अभिषेक रोहिला सहित सम्बन्धित जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

ज्योलिकोट, नैनीताल दूषित पेयजल प्रकरण पर सीएस ने ली अधिकारियों के साथ बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में ज्योलिकोट, नैनीताल में दूषित पेयजल की घटना के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रकरण की विस्तृत समीक्षा की। मुख्य सचिव ने घटना पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को पेयजल की गुणवत्ता एवं जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है कि प्रदेश में मजबूत फील्ड नेटवर्क होने के बावजूद ज्योलिकोट में दूषित पेयजल की स्थिति की जानकारी समय पर प्राप्त नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि शिक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, ट्यूबवेल ऑपरेटर सहित बड़ी संख्या में फील्ड स्तर के कार्मिकों का नेटवर्क हमारे पास है। इस नेटवर्क का प्रभावी उपयोग करते हुए इनफॉर्मेशन एवं फीडबैक मैकेनिज्म विकसित किया जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में पेयजल की गुणवत्ता या अन्य स्वास्थ्य आदि से सम्बन्धित समस्या की जानकारी तत्काल प्राप्त हो सके। इसके लिए प्रभावी सूचना एवं फीडबैक मैकेनिज्म तैयार कर नियमित रूप से इसकी समीक्षा की जाए।

प्रदेशभर की वाटर सप्लाई स्कीम्स की जियो मैपिंग और भौतिक सत्यापन के दिए निर्देश

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर की प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स की जियो मैपिंग एवं जीआईएस जियो-रेफरेंसिंग कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वाटर सप्लाई सिस्टम में सोर्स से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने, स्टोरेज, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट्स आदि तक पूरे नेटवर्क की मैपिंग करायी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि अगले 15 दिनों में प्रदेशभर की प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स का भौतिक सत्यापन कराया जाए। इस दौरान सोर्स, स्टोरेज, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट्स तथा कंज्यूमर एंड पर संभावित लीकेज की जांच की जाए। स्टोरेज टैंकों की सफाई की तिथि, क्लोरीनेशन का रिकॉर्ड, क्लोरीन की उपलब्धता एवं उपयोग, पानी में कॉलीफॉर्म सहित अन्य आवश्यक पैरामीटर्स की जांच और उनका नियमित रिकॉर्ड सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पेयजल एवं सीवरेज लाइनों के क्रॉसिंग प्वाइंट्स को विशेष रूप से चिन्हित कराए जाने एवं जहां पुराने पाइप हैं, वहां उनके रिप्लेसमेंट सहित आवश्यक रेमेडियल मेजर्स लिए जाने के निर्देश दिए।

पेयजल एवं सीवरेज लाइनों की जांच के लिए एसओपी तैयार कर कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए

मुख्य सचिव ने कहा कि पेयजल लाईनों एवं सीवरेज लाइनों की जांच के लिए स्पष्ट एसओपी तैयार कर उसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इंदौर की घटना के बाद विस्तृत एसओपी जारी की गई थी, इसके बावजूद यदि कहीं पेयजल दूषित होने की स्थिति सामने आती है तो यह देखना आवश्यक है कि एसओपी का पालन किस स्तर पर नहीं हुआ और उसके कारण क्या रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में प्रमुख पेयजल परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

पेयजल की नियमित क्वालिटी टेस्टिंग भी करेगा यूकेपीसीबी, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

मुख्य सचिव ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एसटीपी, सरफेस वाटर के साथ ही प्रमुख शहरों में नियमित पेयजल की क्वालिटी टेस्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश में सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का सरप्राइज इंस्पेक्शन भी कराए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि जहां भी दूषित पेयजल अथवा इस प्रकार के मामले सामने आते हैं, वहां तत्काल स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जाए। सीएमओ एवं सीएमएस स्तर की व्यवस्थाओं को रिएक्टिवेट करते हुए डॉक्टरों की टीम को सक्रिय रखा जाए तथा अगले 15 दिनों में प्रदेशभर में आवश्यक स्वास्थ्य सर्विलांस एवं जांच की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सर्विलांस सिस्टम किस प्रकार कार्य कर रहा है, इसकी नियमित समीक्षा की जाए।

नियमित सूचना एवं फीडबैक के लिए परमानेंट सर्विलांस मैकेनिज्म किया जाए तैयार

मुख्य सचिव ने कहा कि जिला स्तर पर गठित समितियां केवल औपचारिक बैठक तक सीमित न रहें। समितियां ग्राउंड लेवल अधिकारियों के साथ ब्रेनस्टॉर्मिंग कर अपने क्षेत्रों से नियमित सूचना एवं फीडबैक प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था वन टाइम एक्सरसाइज नहीं बल्कि परमानेंट सर्विलांस मैकेनिज्म के रूप में विकसित की जानी चाहिए। इसके लिए आवश्यकता के अनुसार स्थायी स्टैंडिंग कमेटी गठित करते हुए नियमित बैठकें आयोजित की जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि विभाग को अपने सिस्टम को दुरुस्त करने के साथ-साथ इंस्टीट्यूशनल मेमोरी का भी उपयोग करना चाहिए। सेवानिवृत्त लाइनमैन एवं लंबे समय तक फील्ड में कार्य कर चुके अनुभवी कार्मिकों की सेवाएं लेकर पुराने नेटवर्क, पाइपलाइन, क्रॉसिंग एवं संवेदनशील स्थलों की जानकारी प्राप्त करते हुए उनको दुरूस्त किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में इस प्रकार की घटना होने पर प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर विभागाध्यक्षों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

इस अवसर पर सचिव डॉॅ. रणवीर सिंह चौहान, डॉ. वी. षणमुगम, सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड डॉ. पराग मधुकर धकाते, मुख्य महाप्रबन्धक जल संस्थान श्री डी.के. सिंह एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी नैनीताल श्री ललित मोहन रयाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

विभाग अपने अच्छे प्रयासों और उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी साझा करेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर विभिन्न विभागों से सम्बन्धित महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने ई-ऑफिस की क्षेत्र में विभागों की प्रगति, उत्तराखंड गवर्नमेंट एसेट्स मॉनिटरिंग सिस्टम, सिंगल यूज प्लास्टिक एवं सभी विभागों से संबंधित पेंशन एवं अन्य प्रकरणों की समीक्षा की।

मुख्य सचिव ने सर्वप्रथम ई-ऑफिस का राज्य एवं जनपद स्तरीय क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागीय सचिवों को ई-ऑफिस शतप्रतिशत लागू किये जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन विभागों में प्रगति अपेक्षाकृत कम है अथवा फाइल मूवमेंट की स्थिति संतोषजनक नहीं है, वहां नियमित समीक्षा करते हुए सुधार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विभागों द्वारा समय-समय पर किए जा रहे अच्छे कार्यों और नवाचारों को सचिव समिति की बैठकों में साझा किया जाए, ताकि ऐसे प्रयासों को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके। विभाग अपने अच्छे प्रयासों और उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी मुख्य सचिव कार्यालय के साथ भी साझा की जाए।

दो माह में सभी सरकारी परिसंपत्तियों की पोर्टल पर मैपिंग के दिए निर्देश

मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड गवर्नमेंट एसेट्स मॉनिटरिंग सिस्टम के अंतर्गत सभी सरकारी परिसंपत्तियों की अनिवार्य रूप से मैपिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगले दो माह में सभी सरकारी परिसंपत्तियों को पोर्टल पर अपलोड किया जाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सरकारी परिसंपत्ति को पोर्टल पर मैपिंग और जियोफेंसिंग किया जाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सम्बन्धित विभागों के सचिव, विभागाध्यक्ष, जिलाधिकारी तथा जनपद स्तरीय विभागों को सिस्टम पर ऑनबोर्ड करने एवं परिसंपत्तियों से सम्बन्धित आवश्यक अलर्ट जनरेट होने की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर प्रत्येक अतिक्रमण की स्थिति में समय पर अलर्ट जनरेट होना चाहिए, ताकि सम्बन्धित विभाग द्वारा तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। सभी विभागीय सचिव साप्ताहिक आधार पर इसकी समीक्षा और मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित समयावधि में परिसंपत्तियों की मैपिंग एवं अपलोडिंग पूर्ण कराएं।

सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग को हतोत्साहित करने के निर्देश

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग को हतोत्साहित करने के लिए गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए नामित अधिकारी नियमित रूप से कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग को रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जाए। उन्होंने सम्बन्धित विभाग को सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रभावी नियंत्रण के लिए ड्राफ्ट पॉलिसी शीघ्र तैयार कर लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल अभियान तक सीमित न रहते हुए नियमित रूप से कार्रवाई और मॉनिटरिंग की जाए।

सेवानिवृत्त शिक्षकों को समय पर पेंशन एवं ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित करें

मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग सहित सभी छोटे – बड़े विभागों में सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों की पेंशन एवं ग्रेच्युटी से सम्बन्धित प्रकरणों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रभावी मैकेनिज्म तैयार किया जाए, जिससे सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के तत्काल बाद पेंशन शुरू होने के साथ ही ससमय ग्रेच्युटी का भुगतान भी सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बड़े विभागों में पेंशन सम्बन्धी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रभावी ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के लंबित पेंशन प्रकरणों के समाधान के लिए विशेष कैंप आयोजित करने को कहा।

मुख्य सचिव ने सेवानिवृत्त कार्मिकों के मेडिकल रीइंबर्समेंट से सम्बन्धित प्रक्रिया को भी सरल बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्मिक जिस जनपद से सेवानिवृत्त होता है, उसी जनपद के डीडीओ के माध्यम से सेवानिवृत्त कार्मिक के मेडिकल बिलों के अनुमोदन की वर्तमान में प्रक्रिया है, उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए कि सेवानिवृत्त होने के उपरांत कार्मिक जिस जनपद में वर्तमान में निवास कर रहा है, वहां के डीडीओ के माध्यम से मेडिकल बिलों के अनुमोदन किया जा सके।

ओलंपिक-2036 के लिए प्रतिभाओं के वैज्ञानिक आधार पर चयन और प्रशिक्षण पर जोर

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने ओलंपिक-2036 के लिए उत्तराखण्ड से प्रतिभावान खिलाड़ियों को तैयार करने के उद्देश्य से खेल विभाग के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने प्रदेश की क्षमता और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप खेलों की पहचान करते हुए खिलाड़ियों को अभी से व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड के पोटेंशियल के आधार पर खेलों का चयन किया जाए। ऐसे खेलों को प्राथमिकता दी जाए, जिनमें प्रदेश के खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि खेलों को प्राथमिकताओं में और आगे लाने की आवश्यकता है। इसके लिए विभाग द्वारा स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर मिशन मोड में कार्य किया जाए।

मुख्य सचिव ने प्रतिभाओं की पहचान के लिए टैलेंट हंट जैसे कार्यक्रम व्यापक स्तर पर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चयनित खेलों में प्रतिभावान खिलाड़ियों की पहचान कर उनके लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि खिलाड़ियों के चयन के लिए एक रोबस्ट और वैज्ञानिक प्रणाली विकसित की जाए, ताकि प्रतिभा का चयन पारदर्शी एवं वैज्ञानिक मानकों के आधार पर सुनिश्चित हो सके। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रारंभिक चरण में 100 से 150 प्रतिभावान बच्चों को चिह्नित कर उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। इन बच्चों के लिए प्रो-एक्टिव होकर प्रशिक्षण, कोचिंग, फिटनेस और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने स्कूल स्तर से ही खेल प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें तैयार करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल एजुकेशन सिस्टम में खेलों को और प्रभावी ढंग से शामिल करने की आवश्यकता है। इसके लिए स्कूलों में कार्यरत पीटीआई के सेंसिटाइजेशन और ग्रूमिंग पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि वे बच्चों की खेल प्रतिभा को पहचानने और उसे निखारने में प्रभावी भूमिका निभा सकें तथा स्कूलों में सकारात्मक खेल वातावरण विकसित हो। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के साथ-साथ कोचों की क्षमता निर्माण भी महत्वपूर्ण है।

मुख्य सचिव ने वर्तमान के प्रतिभावान खिलाड़ियों को अच्छे प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण दिलाकर भविष्य के लिए प्रशिक्षित कोच के रूप में तैयार करने की दिशा में भी कार्य किए जाने की बात कही। कहा कि इससे प्रदेश में आने वाले समय में गुणवत्तापूर्ण कोचों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि बच्चों के चिन्हीकरण, कोच की उपलब्धता और प्रशिक्षण शुरू किए जाने की टाइमलाइन अभी से निर्धारित की जाए। प्रत्येक चरण के लिए स्पष्ट लक्ष्य एवं समयसीमा तय करते हुए इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि ओलंपिक-2036 को ध्यान में रखते हुए अभी से प्रतिभाओं को पहचानने, उन्हें वैज्ञानिक तरीके से तैयार करने और उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के लिए सक्षम बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने जरूरी हैं। उत्तराखण्ड में उपलब्ध खेल प्रतिभा को उचित मंच, प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित की जा सकती है।

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में वर्तमान में संचालित डायलिसिस सुविधा को 24×7 संचालित किए जाने के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा की वर्तमान स्थिति की जानकारी लेते हुए आमजन को गुणवत्तापरक उपचार एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने अस्पतालों में उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रदेश के सभी चिकित्सालयों को नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) से प्रत्यायन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों एवं बड़े उप जिला अस्पतालों का 31 मार्च, 2027 तक एनएबीएच प्रत्यायन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इसकी प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए, ताकि अस्पतालों को निर्धारित मानकों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एनएबीएच के माध्यम से नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी की जा सकती है।

स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण एवं ई-हॉस्पिटल पर जोर
मुख्य सचिव ने प्रदेश के अस्पतालों को डिजिटाइज करते हुए ई-हॉस्पिटल की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने एकीकृत स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली को प्रदेश में तत्काल लागू करने को कहा। उन्होंने प्रणाली के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग तथा वार्षिक रखरखाव अनुबंध (एएमसी) की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

रिक्त चिकित्सकीय पदों को शीघ्र भरने पर दिया जोर
मुख्य सचिव ने चिकित्सकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के साथ ही गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे चिकित्सक जो सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवाएं देने के इच्छुक हों, उनके संबंध में सेवानिवृत्ति से पूर्व ही आवश्यक औपचारिकताएं एवं पेपर वर्क पूरा किया जाए, ताकि पद रिक्त होने की स्थिति में उन्हें उनकी इच्छानुसार स्थान पर सेवाएं देने का अवसर दिया जा सके। इसके साथ ही निजी अस्पतालों में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सकों को विजिटिंग डॉक्टर के रूप में जोड़ने की संभावनाओं पर भी कार्य करने को कहा।

डायलिसिस सुविधा 24×7 एवं किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शीघ्र शुरू करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में वर्तमान में संचालित डायलिसिस सुविधा को 24×7 संचालित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश में किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा भी शीघ्र शुरू करने को कहा। बैठक में बताया गया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार कर लिया गया है तथा विशेषज्ञ की व्यवस्था भी कर ली गई है। इस पर मुख्य सचिव ने अगले तीन माह के भीतर किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू करने के निर्देश दिए।

जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने आमजन को जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र सहजता से उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र के लिए माता-पिता को अस्पताल, नगर निगम अथवा अन्य कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिसके माध्यम से माता-पिता को जन्म प्रमाण पत्र स्वतः उपलब्ध हो सके। इसी प्रकार मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए भी मृतक के परिजनों को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। उन्होंने प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक समस्याओं को चिह्नित कर उनका तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिक से अधिक जनसेवाओं को सेवा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत लाए जाने पर भी जोर दिया।

मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी एवं सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को और अधिक सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त फैकल्टी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के वार्डों की गुणवत्ता में सुधार लाने तथा सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास करने को कहा।

मुख्य सचिव ने मेडिकल कॉलेजों में इवनिंग ओपीडी शुरू किए जाने के भी निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें।

सड़कों पर पड़े कंस्ट्रक्शन मटीरियल हटाए जाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में राष्ट्रीय शुद्ध वायु कार्यक्रम की संचालन समिति की 7वीं बैठक संपन्न हुयी। मुख्य सचिव ने प्रदेश के 3 शहरों देहरादून, ऋषिकेश और काशीपुर की वायु गुणवत्ता की स्थिति जानकारी ली एवं सुधार के लिए दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि तीनों शहरों में वायु गुणवत्ता की लगातार मॉनिटरिंग की जाए।

मुख्य सचिव ने पीएम 10 और पीएम 2.5 को कम किए जाने के लिए सभी उपायों पर कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीएम 10 को कम करने के लिए शहरों की सड़कों की स्थिति को सुधारे जाने के साथ ही, धूल कणों को कम किए जाने वाले उपायों को शामिल किया जाए। उन्होंने सभी सड़कों का पक्कीकरण, फुटपाथों का निर्माण कार्य आदि पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात कही। कहा कि डेमोलिशन वेस्ट के लिए प्रॉपर डिस्पोजल मैकेनिज्म तैयार किया जाए। उन्होंने सभी स्थानीय निकायों डेमोलिशन वेस्ट के लिए उचित निस्तारण स्थल चिन्हित किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसका उचित प्रचार प्रसार भी किया जाए ताकि भवनों को ध्वस्त किए जाने के बाद अपशिष्ट को कहां डिस्पोज किया जाना है, आमजन को पता होना चाहिए। उन्होंने सड़कों पर पड़ा कंस्ट्रक्शन मटीरियल हटाए जाने के लिए कड़े कदम उठाए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने पीएम 2.5 को कम करने के लिए वाहनों एवं फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने वाले उपाय अपनाए किए जाने की बात कही। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को सख्ती से लागू किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसके लिए पीसीबी को मैनपावर बढ़ाए जाने की आवश्यकता है तो बढ़ायी जाए। जाममुक्त सड़कों के लिए चौक सुधारीकरण कार्य किए जाएं। उन्होंने पिछले वर्षों की तुलना में काशीपुर पीएम 2.5 में सुधार आने के कारणों का विश्लेषण कर अन्य शहरों में उसे लागू किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन शहरों के सुधार कार्यों का थर्ड पार्टी ऑडिट भी कराया जाए।

मुख्य सचिव ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से राष्ट्रीय शुद्ध वायु कार्यक्रम के अंतर्गत वार्षिक कार्ययोजना प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए अच्छे प्रस्ताव तैयार किए जाए। उनकी प्राथमिकता निर्धारित करते हुए सभी प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत किए जाने की बात कही। उन्होंने निर्देश दिए कि आमजन को भी इसके प्रति जागरूक करने के लिए लगातार विभिन्न भीड़भाड़ वाले स्थानों में डिस्प्ले बोर्ड में प्रदर्शन किया जाए। स्मार्ट सिटी के अंतर्गत सभी डिस्प्ले बोर्ड्स को एक्टिव किया जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सदस्य सचिव यूकेपीसीबी डॉ. पराग मधुकर धकाते एवं अपर सचिव डॉ. आनन्द श्रीवास्तव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने राज्य के विद्यालयों के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पर फोकस किए जाने के निर्देश दिए

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने जिलाधिकारियों के साथ बैठक के दौरान शिक्षा विभाग के तहत पीएम पोषण एवं समग्र शिक्षा की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने पीएम पोषण और समग्र शिक्षा की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दृष्टि से आधारभूत संरचना, एडमिशन और गुणवत्ता का मूल्यांकन पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लर्निंग आउटकम में सुधार लाए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनिंग की दिशा में भी कार्य किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने पीएम पोषण के तहत बच्चों को दिए जाने वाले मिड डे मील का सोशल ऑडिट कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग मैकेनिज्म तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी दिन किसी स्कूल में खाना नहीं बना, तो खाना ना बनने के स्पेसिफिक कारणों को राज्य स्तर पर विद्या समीक्षा केंद्रों के माध्यम से एमडीएम सेल इसकी प्रतिदिन निगरानी करते हुए राज्य परियोजना निदेशक और सम्बन्धित जनपद के जिलाधिकारी एवं सीडीओ को तत्काल अवगत करायें ताकि सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से हेल्थ चेकअप रोस्टर का शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को इस दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने की आवश्यकता है। उन्होंने स्कूलों में बालिकाओं के लिए शौचालयों की व्यवस्था एवं उनकी सफाई की व्यवस्था के लिए मैकेनिज्म तैयार किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यालयों के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पर फोकस किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि ऐसे विद्यालयों की कारणों सहित लिस्ट तैयार कर उनका निस्तारण किया जाए। उन्होंने प्रमुख सचिव ऊर्जा को ऐसे विद्यालयों को सरकारी भवनों में सॉलराइजेशन स्कीम के माध्यम से इलेक्ट्रिसिटी उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगौली, चंद्रेश कुमार यादव एवं युगल किशोर पंत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।