सड़कों पर पड़े कंस्ट्रक्शन मटीरियल हटाए जाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में राष्ट्रीय शुद्ध वायु कार्यक्रम की संचालन समिति की 7वीं बैठक संपन्न हुयी। मुख्य सचिव ने प्रदेश के 3 शहरों देहरादून, ऋषिकेश और काशीपुर की वायु गुणवत्ता की स्थिति जानकारी ली एवं सुधार के लिए दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि तीनों शहरों में वायु गुणवत्ता की लगातार मॉनिटरिंग की जाए।

मुख्य सचिव ने पीएम 10 और पीएम 2.5 को कम किए जाने के लिए सभी उपायों पर कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीएम 10 को कम करने के लिए शहरों की सड़कों की स्थिति को सुधारे जाने के साथ ही, धूल कणों को कम किए जाने वाले उपायों को शामिल किया जाए। उन्होंने सभी सड़कों का पक्कीकरण, फुटपाथों का निर्माण कार्य आदि पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात कही। कहा कि डेमोलिशन वेस्ट के लिए प्रॉपर डिस्पोजल मैकेनिज्म तैयार किया जाए। उन्होंने सभी स्थानीय निकायों डेमोलिशन वेस्ट के लिए उचित निस्तारण स्थल चिन्हित किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसका उचित प्रचार प्रसार भी किया जाए ताकि भवनों को ध्वस्त किए जाने के बाद अपशिष्ट को कहां डिस्पोज किया जाना है, आमजन को पता होना चाहिए। उन्होंने सड़कों पर पड़ा कंस्ट्रक्शन मटीरियल हटाए जाने के लिए कड़े कदम उठाए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने पीएम 2.5 को कम करने के लिए वाहनों एवं फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने वाले उपाय अपनाए किए जाने की बात कही। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को सख्ती से लागू किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसके लिए पीसीबी को मैनपावर बढ़ाए जाने की आवश्यकता है तो बढ़ायी जाए। जाममुक्त सड़कों के लिए चौक सुधारीकरण कार्य किए जाएं। उन्होंने पिछले वर्षों की तुलना में काशीपुर पीएम 2.5 में सुधार आने के कारणों का विश्लेषण कर अन्य शहरों में उसे लागू किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन शहरों के सुधार कार्यों का थर्ड पार्टी ऑडिट भी कराया जाए।

मुख्य सचिव ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से राष्ट्रीय शुद्ध वायु कार्यक्रम के अंतर्गत वार्षिक कार्ययोजना प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए अच्छे प्रस्ताव तैयार किए जाए। उनकी प्राथमिकता निर्धारित करते हुए सभी प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत किए जाने की बात कही। उन्होंने निर्देश दिए कि आमजन को भी इसके प्रति जागरूक करने के लिए लगातार विभिन्न भीड़भाड़ वाले स्थानों में डिस्प्ले बोर्ड में प्रदर्शन किया जाए। स्मार्ट सिटी के अंतर्गत सभी डिस्प्ले बोर्ड्स को एक्टिव किया जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सदस्य सचिव यूकेपीसीबी डॉ. पराग मधुकर धकाते एवं अपर सचिव डॉ. आनन्द श्रीवास्तव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने राज्य के विद्यालयों के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पर फोकस किए जाने के निर्देश दिए

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने जिलाधिकारियों के साथ बैठक के दौरान शिक्षा विभाग के तहत पीएम पोषण एवं समग्र शिक्षा की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने पीएम पोषण और समग्र शिक्षा की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दृष्टि से आधारभूत संरचना, एडमिशन और गुणवत्ता का मूल्यांकन पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लर्निंग आउटकम में सुधार लाए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनिंग की दिशा में भी कार्य किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने पीएम पोषण के तहत बच्चों को दिए जाने वाले मिड डे मील का सोशल ऑडिट कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग मैकेनिज्म तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी दिन किसी स्कूल में खाना नहीं बना, तो खाना ना बनने के स्पेसिफिक कारणों को राज्य स्तर पर विद्या समीक्षा केंद्रों के माध्यम से एमडीएम सेल इसकी प्रतिदिन निगरानी करते हुए राज्य परियोजना निदेशक और सम्बन्धित जनपद के जिलाधिकारी एवं सीडीओ को तत्काल अवगत करायें ताकि सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से हेल्थ चेकअप रोस्टर का शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को इस दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने की आवश्यकता है। उन्होंने स्कूलों में बालिकाओं के लिए शौचालयों की व्यवस्था एवं उनकी सफाई की व्यवस्था के लिए मैकेनिज्म तैयार किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यालयों के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पर फोकस किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि ऐसे विद्यालयों की कारणों सहित लिस्ट तैयार कर उनका निस्तारण किया जाए। उन्होंने प्रमुख सचिव ऊर्जा को ऐसे विद्यालयों को सरकारी भवनों में सॉलराइजेशन स्कीम के माध्यम से इलेक्ट्रिसिटी उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगौली, चंद्रेश कुमार यादव एवं युगल किशोर पंत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा एवं विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा एवं विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दृष्टिकोण से प्रदेश में सरकारी एवं ग़ैर सरकारी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी ली एवं दिशा निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप मॉडिफाई किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को अपना 5 वर्ष का प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी सरकारी विश्वविद्यालय को NAAC एवं NIRF एक्रेडिटेशन प्राप्त किए जाने पर फोकस किए जाने की बात कही। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को सभी गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए अल्पकालीन, मध्यकालीन एवं दीर्घकालिक प्लान तैयार किए जाने की बात भी कही। उन्होंने अपनी सभी 11 यूनिवर्सिटी को मूल्यांकन एवं रैंकिंग के लिए मैकेनिज्म तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने सभी सरकारी एवं एडेड कॉलेज को अगले 8-10 दिन में स्टेट लेवल रैंकिंग पैरामीटर्स तैयार किए जाने का टास्क दिया।

मुख्य सचिव ने छात्र छात्राओं की ट्रेसिंग मैकेनिज्म भी तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोर्सेस के साथ ही इंटर्नशिप पार्टिसिपेशन को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए विश्वविद्यालयों को इंडस्ट्री, एनजीओ और सोसाइटीज को भी जोड़े जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालय को विदेशी भाषाओं सिखाने पर भी फोकस किए जाने बात कही। कहा कि स्वास्थ्य विभाग को भी इसमें प्रोएक्टिव होकर काम करने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, अपर सचिव मनुज गोयल, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो दीवान एस रावत, प्रो नवीन चंद्र लोहानी, प्रो एन के जोशी एवं प्रो सतपाल सिंह बिष्ट सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

ग्रोथ सेंटर्स को मार्केट लिंकेज के साथ ही प्राईवेट पार्टनर्स से जोड़े जाने की आवश्यकताः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में प्रदेश में ग्रोथ सेंटर्स की प्रगति के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने सभी विभागों के अंतर्गत बनाए गए ग्रोथ सेंटर्स की प्रगति एवं संचालित गतिदिवधियों की जानकारी ली। उन्होंने ग्रोथ सेंटर्स को स्थानीय स्तर पर आर्थिकी गतिविधियों के लिए महत्त्वपूर्ण बताया। कहा कि ग्रोथ सेंटर्स को मार्केट लिंकेज के साथ ही प्राईवेट पार्टनर्स से जोड़े जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर में विभिन्न विभागों के अंतर्गत संचालित हो रहे ग्रोथ सेंटर्स को लगातार रिव्यू किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अच्छा कर रहे ग्रोथ सेंटर्स को तकनीकी एवं अन्य प्रकार का सपोर्ट उपलब्ध कराए जाने के साथ ही नॉन-फंक्शनल ग्रोथ सेंटर्स को भी फंक्शनल किए जाने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने अपने सभी उत्पादों को ट्रेसेबिलिटी, जीआई टैगिंग और ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन से जोड़े जाने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने शीप एंड वूल डेवेलपमेंट बोर्ड के अंतर्गत पशुपालकों की समस्याओं को समझने एवं उनके निस्तारण के लिए लगातार पशुपालकों के साथ संवाद एवं वर्कशॉप आयोजित किए जाने की बात कही। कहा कि यह बोर्ड की जिम्मेदारी है। यदि किसी अन्य राज्य में इस दिशा में अच्छा कार्य हो रहा है तो वहां अपनी टीम को भेजकर उनके मैकेनिज्म को समझने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने ग्रोथ सेंटर्स को मार्केट लिंकेज के साथ ही कोल्ड स्टोरेज चेन से जोड़े जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्टैण्ड अलोन माईक्रो स्टोरेज चेन विकसित की जा सकती है। इससे ग्रोथ सेंटर्स के उत्पादों को लम्बे समय तक संरक्षित रख कर आवश्यकता के अनुरूप मार्केट में उतारा जा सकेगा, ताकि उत्पाद की उचित कीमत मिल सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि हाउस ऑफ हिमालयाज के साथ सभी ग्रोथ सेंटर्स से सम्बन्धित विभागों कॉर्डिनेशन मीटिंग करवा ली जाए। कहा कि पोटेंशियल वाले नॉन-फंक्शनल ग्रोथ सेंटर्स की हैंड होल्डिंग करायी जाए। उन्होंने नाबार्ड को भी गैप्स आइडेंटिफाई करते हुए ग्रोथ सेंटर्स को फंडिंग उपलब्ध कराए जाने की बात कही। साथ ही फॉरेस्ट के ग्रोथ सेंटर्स के लिए बिजनेस प्लान तैयार कर उपलब्ध कराए जाने पर जोर दिया।

इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, एपीसीसीएफ नरेश कुमार, अपर सचिव कहकशां नसीम, आनन्द श्रीवास्तव एवं झरना कामठान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर सीएस बोले, 2031 तक पूर्ण करें कार्य

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्य सचिव ने परियोजना निर्माण के विभिन्न चरणों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने परियोजना के अंतर्गत विभिन्न स्थलों पर चल रहे निर्माण कार्यों को बारीकी से जानकारी ली एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना एक राष्ट्रीय स्तर की महत्त्वपूर्ण परियोजना है। बहुत से राज्यों को इससे लाभ पहुंचेगा। उन्होंने एमडी यूजेवीएनएल को इस महत्त्वपूर्ण योजना को वर्ष 2031 तक निर्माण कार्य पूर्ण किए जाने का लक्ष्य दिया। कहा कि कार्य समय पर पूर्ण किए जाने हेतु सभी संस्थाएं अगले 2, 3 दिन में प्लान कर अवगत कराएं। उन्होंने इसके लिए आवश्यक मशीन और मैनपावर बढ़ाए जाने पर जोर दिया। ज्ञात हो कि जल विद्युत निगम द्वारा परियोजना पूर्ण होने का लक्ष्य दिसंबर 2034 निर्धारित किया गया था।

मुख्य सचिव ने कहा कि निर्माण कार्य समय पर पूरा करने को पर्ट चार्ट तैयार कर उसका शतप्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजना को पूर्ण किए जाने के लिए गुणवत्ता और समयबद्धता को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने परियोजना से सम्बन्धित विशेषज्ञों द्वारा सभी अनिवार्य तकनीकी परीक्षण अनिवार्य रूप से कर लिये जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि यह सभी संस्थानों की जिम्मेदारी है कि परियोजना का कार्य समय से पर हो। उन्होंने कार्यदायी संस्था एलएंडटी और उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम के अधिकारियों को मौके पर रह कर अपने स्तर से दैनिक, पाक्षिक और मासिक रूप से समीक्षा किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने केंद्रीय जल आयोग द्वारा अपेक्षित सभी तकनीकी परीक्षण को शीघ्र से शीघ्र पूर्ण करा कर उपलब्ध कराया जाए।

मुख्य सचिव ने अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा वितरण कार्य शीघ्र पूर्ण कराया जाए, प्रभावित लोगों से लगातार संवाद कर मामलों का निस्तारण किया जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, एमडी उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम ए. के. सिंह, महाप्रबंधक एलएंडटी प्रभु कुमार एवं प्रोजेक्ट मैनेजर विष्णु मोहन श्रीवास्तव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस बर्द्धन ने की शहरी विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में शहरी विकास विभाग से सम्बन्धित योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड के सभी शहरी स्थानीय निकायों को साफ-सुथरा वातावरण, सुरक्षित पेयजल, जलवायु-अनुकूल और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर शहर बनाये जाने की दिशा में विभाग को निरंतर कार्य किए जाने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने प्रदेश के अंतर्गत सभी यूएलबी में वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण और स्रोत पर कचरे का पृथक्करण कार्य 100 प्रतिशत सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पुराने डंप साइट्स का सुधारीकरण कार्य को भी तेजी प्रदान करते हुए शीघ्र से शीघ्र कार्य पूर्ण कराए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि विभाग के विज़न के अनुरूप सभी शहरी निकायों को आत्म निर्भर बनाना है। इसके लिए शहरी निकायों को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इनसे सम्बन्धित अधिकारियों और सम्बन्धित अनुभाग अधिकारियों, विभागीय अधिकारियों को अच्छे से प्रबंधन किए गए देश-विदेश के शहरों का एक्सपोजर ट्रिप कराए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा कि इससे अपने शहरों को अच्छे से मैनेज करने में सहायता मिलेगी।

मुख्य सचिव ने पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए स्रोत के साथ ही पेयजल लाइन के अंतिम छोर पर भी वाटर क्वालिटी सेंसर लगाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहरी विकास को डिजिटल गवर्नेंस पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है। कहा कि सभी शहरी निकायों को शीघ्र से शीघ्र ऑनबोर्ड किया जाए।

इस अवसर पर सचिव नितेश कुमार झा एवं अपर सचिव अभिषेक रुहेला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव बर्द्धन ने जानी राज्य के कलस्टर विद्यालयों की प्रगति

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से जिलाधिकारियों के साथ बैठक की गई। बैठक के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई एवं दिशा निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर में हरेला पर्व को बड़े स्तर पर मनाये जाने के लिए सभी जनपदों को एक्शन प्लान तैयार किये जाने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि इस पर्व को आमजन से जोड़े जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस पर्व से अधिक से अधिक लोगों को जोड़े जाने के लिए स्कूल, एनजीओ न्याय पंचायत, ग्राम पंचायत आदि को जोड़ते हुए वृहद स्तर पर हरेला का आयोजन किया जाए।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में क्लस्टर विद्यालयों की प्रगति पर भी चर्चा की। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों के साथ प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में छात्र व छात्राओं को यातायात सुविधा दिए जाने के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि क्लस्टर विद्यालयों के माध्यम से सरकार छात्र व छात्राओं को वो सभी सुविधाएं एक जगह पर देने का प्रयास कर रही है, जो उन्हें मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्लस्टर विद्यालयों को सभी आवश्यक सुविधाओं से परिपूर्ण करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। चिन्हित क्लस्टर विद्यालयों में से श्लो हैंगिंग फ्रूटश् जैसे विद्यालयों को शुरूआती चरण में लिया जा सकता है। मुख्य सचिव ने आयुक्त गढ़वाल एवं आयुक्त कुमाऊँ को इस सम्बन्ध में साप्ताहिक समीक्षा करते हुए, क्लस्टर विद्यालयों में शीघ्र से शीघ्र विद्यार्थियों को यातायात सुविधा उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव नितेश कुमार झा, रविनाथ रमन, डॉ. वी. षणमुगम, चंद्रेश कुमार यादव एवं विनोद कुमार सुमन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

केदानाथ धाम में जिन 6 ब्लॉक्स का कार्य शुरू किया जाना है, उन्हें तत्काल शुरू कराया जाएः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में केदारनाथ पुनर्निर्माण और पुनर्विकास कार्य एवं बद्रीनाथ मास्टर प्लान कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने केदारनाथ पुनर्निर्माण से सम्बन्धित कार्यों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने प्रत्येक कार्य के भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के साथ ही पूर्ण होने की समयसीमा की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने कहा कि केदानाथ धाम में जिन 6 ब्लॉक्स का कार्य शुरू किया जाना है, उन्हें तत्काल शुरू कराया जाए। उन्होंने निर्धारित समय पर कार्य पूर्ण कराए जाने हेतु प्रत्येक कार्य की लगातार मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को केदारनाथ धाम यात्रा क्षेत्र के लिए एक व्यापक एवं एकीकृत कूड़ा प्रबंधन योजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के कूड़े के डिस्पोजल की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी वित्तीय, तकनीकी और अन्य सहयोग की आवश्यकता होगी, वह उपलब्ध करायी जाएगी।

मुख्य सचिव ने बद्रीनाथ मास्टरप्लान फेज 1 और फेज 2 के कार्यों की प्रगति की भी विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने प्रत्येक कार्य की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की जानकारी ली एवं प्रत्येक कार्य के पूर्ण होने की समयसीमा के अनुसार कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट में निहित सभी प्रकार के कंटेंट और आर्ट वर्क को साथ साथ शुरू कराया जाए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि केदारनाथ धाम एवं बद्रीनाथ धाम में जो भी असेट्स एवं सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं, उनके ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के लिए फ्रेमवर्क तैयार कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि इनके संचालन के लिए संस्थाएं पूर्व निर्धारित रहेंगी तो हैंड ओवर करने के उपरांत मेंटेनेंस आदि की जिम्मेदारी निर्धारण में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर सचिव धीराज गर्ब्याल, अपर सचिव विनीत कुमार एवं सम्बन्धित जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत अगले एक हफ़्ते में मरीजों की सामान्य जाँच आंकलन कार्य को 100 प्रतिशत पूर्ण करने के निर्देश

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने ज़िलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक के दौरान टीबी मुक्त भारत अभियान की कुछ जनपदों में धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। मुख्य सचिव ने ऐसे जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि दिए जाने के निर्देश दिए हैं, जिनका मरीजों का सामान्य जाँच आंकलन प्रतिशत 60 प्रतिशत से कम रहा है।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा के दौरान कड़ी नाराजगी व्यक्त की। मुख्य सचिव ने अगले एक हफ़्ते में मरीजों की सामान्य जाँच आंकलन कार्य को 100 प्रतिशत पूर्ण किये जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसके लिए उच्च संवेदनशील और जोखिम वाले गांवों को प्राथमिकता के आधार पर लिए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने डीजी हेल्थ स्तर पर इस अभियान की प्रतिदिन समीक्षा और निगरानी किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कम स्क्रीनिंग वाले जनपदों पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात कही। उन्होंने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत स्क्रीनिंग बढ़ाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान को प्रभावी तरीके से संचालित किए जाने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने मातृ स्वास्थ्य के तहत् प्रसवपूर्व देखभाल में सुधार लाने के लिए गर्भावस्था की प्रथम तिमाही पर पंजीकरण बढ़ाए जाने पर विशेष ध्यान दिये जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। उन्होंने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान और उनका बेहतर प्रबन्धन सुनिश्चित किए जाने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जनपदों में एएनसी जांच बढ़ाए जाने की बात भी कही। कहा कि सभी जनपदों में जन्म प्रतीक्षा गृहों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग के वन स्टॉप सेंटर्स को भी इस हेतु प्रयोग किया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि मानसून सीजन के दृष्टिगत दूरस्थ क्षेत्रों में चिन्हित हाई-रिस्क महिलाओं को बर्थ वेटिंग होम्स में शिफ्ट किया जाए। हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी और प्रसव के बाद हाई-रिस्क माताओं की पहचान और मैनेजमेंट को मज़बूत किया जाए, ताकि रोकी जा सकने वाली मातृ-मृत्यु दर को कम किया जा सके।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव एल. फैनाई, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगौली, नितेश झा, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, चंद्रेश कुमार यादव, डॉ. आर. राजेश कुमार, बृजेश कुमार संत, विनय शंकर पाण्डेय, डॉ . एस. एन. पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, आयुक्त दीपक रावत एवं आनन्द स्वरूप सहित जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

किसानों का पंजीकरण कार्य पूर्ण करने को लगातार दैनिक प्रगति को बढ़ाने पर फोकस करें: बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ वीडियोकॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा कर महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने प्रदेश में एग्री स्टैक से सम्बन्धित कार्यों को प्रदेश के किसानों के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अंश निर्धारण के कार्य में में देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल और हरिद्वार जनपद को विशेष कदम उठाये जाने की आवश्यकता है, उन्होंने कहा कि सभी जिलाधिकारियों को प्रोएक्टिव होकर कार्य करना होगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि फर्टिलाइजर्स का वितरण का कार्य भी किसान पंजीकरण के आधार पर ही होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि लगातार मॉनिटरिंग करते हुए दैनिक प्रगति को बढ़ाने पर फोकस किया जाए ताकि किसानों का पंजीकरण कार्य पूर्ण किया जा सके। उन्होंने इसके लिए कैम्प आयोजित कर किसान पंजीकरण का कार्य शीघ्र से शीघ्र पूर्ण कराये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसान पंजीकरण कार्य पूर्ण ना होने से पीएम किसान और उर्वरक का वितरण अटक सकता है।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे के कार्य में भी तेजी लाए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सर्वेक्षण कर्मियों की कमी को देखते हुए इसमें स्वयं सहायता समूहों और युवा मंगल दलों सहित उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों को लगाये जाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान कर यह कार्य कराया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने एग्री स्टैक से सम्बन्धित सभी कार्यों में तेजी लाये जाने के लिए किसानों को जागरूक किए जाने की भी बात कही। इससे युवा आपदा मित्र प्रशिक्षण ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि एग्री स्टैक बहुत महत्त्वपूर्ण है, समय से यह सभी कार्य पूर्ण ना होने से भारत सरकार की बहुत सी स्कीम्स का लाभ किसानों को मिलना बंद हो सकता है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, डॉ . वी. षणमुगम, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, एस. एन. पाण्डेय एवं श्रीमती रंजना राजगुरु सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।