वन्य जीव संघर्ष के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले 18 को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एफ.आर.आई कैंपस, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए वन्यजीव सप्ताह-2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वन्य जीव संघर्ष के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले, एवं अपनी जान की परवाह किए बगैर दूसरे की जान बचाने वाले कुल 18 लोगों को भी सम्मानित किया। इस सम्मान के साथ ही मुख्यमंत्री ने सभी 18 लोगों को 51 हज़ार की धनराशि देने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों एवं वन्यजीव फोटोग्राफी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने वन्य जीव पर आधारित निबंध प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से हर जिले में कम से कम एक नए पर्यटन स्थल की पहचान करने और उसकी प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखते हुए वहां पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा हल्द्वानी में चिड़ियाघर की परिकल्पना को सरकार ने अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है। सरकार इस दिशा में तेजी से कार्य करेगी जिससे यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है। सनातन संस्कृति ने हमेशा मानव और जीव-जगत के बीच सह-अस्तित्व का संदेश दिया है। देवी-देवताओं के साथ जुड़े पशु-पक्षी भी इसी भाव को प्रकट करते हैं। प्राचीन समय से प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण हमारी जीवन पद्धति का हिस्सा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा वन्यजीव सप्ताह के दौरान प्रदेशभर में जन-जागरूकता के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा राज्य सरकार का संकल्प है कि वन्यजीवों के जंगल सुरक्षित और उनके रास्ते खुले रहें। राज्य सरकार, विकास परियोजनाएं के साथ ही वन्यजीवों की सुविधा को भी प्राथमिकता में रख रही है। इस सोच का उदाहरण दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर है।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड राज्य – हिमालय, घने जंगल, नदियां, झीलें और समृद्ध जैव-विविधता से आच्छादित है। राज्य की सबसे बड़ी पूंजी यहां की प्रकृति है, जिम कॉर्बेट, राजाजी जैसे नेशनल पार्क हमारी पहचान हैं। जहां वर्ष भर लाखों पर्यटक आते हैं। उन्होंने कहा सरकार की प्राथमिकता प्रकृति के साथ संतुलन बनाते हुए वाइल्डलाइफ टूरिज्म को आगे बढ़ाने की है। जहां जंगल भी सुरक्षित रहें और इको-टूरिज्म, होमस्टे जैसी गतिविधियों से स्थानीय लोगों की आय भी बढ़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्स्थापन की परियोजना का दूसरा चरण भी शुरू होने जा रहा है। उन्होंने कहा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्नो लेपर्ड पर्यटन की अच्छी संभावनाएं हैं। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से इस दिशा में तेजी से काम आगे बढ़ाने के निर्देश दिए, जिससे हिम तेंदुए के संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जाए। उन्होंने कहा वन्यजीव भी सुरक्षित रहें और इससे लोगों को भी कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा राज्य में जंगलों की निगरानी प्रणाली को भी मजबूत किया जा रहा है। साथ ही कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन की दिशा में भी निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी है। राज्य सरकार, राज्य में इको-टूरिज्म को बढ़ावा दे रही है, ताकि जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को वहीं रोजगार मिले और वे प्रकृति के संरक्षण में भी सहयोग करें। मुख्यमंत्री ने कहा एक लाख युवाओं को “सीएम यंग ईको-प्रिन्योर” बनाने की दिशा में भी कार्य आगे बढ़ रहा है। इस योजना के माध्यम से नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, इको-टूरिज्म और वन्यजीव पर्यटन से जुड़े कौशल को रोजगार और उद्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में इको क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए वन्यजीवों से जुड़ी शैक्षिक यात्राएं शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा राज्य सरकार इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन बनाकर विकास को आगे बढ़ा रही है। ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी हमारी प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “मिशन LiFE” हमें पर्यावरण की रक्षा हमारी रोजमर्रा की आदतों का हिस्सा बनने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में GEP (ग्रास इन्वायरनमेंट प्रोडक्ट) के माध्यम से जल, जंगल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यांकन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार का संकल्प वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ प्रभावित नागरिकों की मदद करना भी है। सरकार ने वन्यजीव हमले में मृत्यु होने पर दी जाने वाली अनुग्रह राशि को ₹ 6 लाख से बढ़ाकर ₹ 10 लाख किया है। वन्यजीव हमले में घायल होने वाले नागरिकों के इलाज का खर्च भी अब राज्य सरकार द्वारा ही वहन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड आने वाले सभी पर्यटकों से भी आह्वान किया कि जब भी वे जंगल सफारी, राष्ट्रीय उद्यान या धार्मिक स्थल पर जाएं तो वहां गंदगी न फैलाएं, प्लास्टिक न छोड़ें और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। उन्होंने कहा सभी का प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि हमारा राज्य, देवभूमि के साथ वन भूमि भी है। यहां 71 प्रतिशत से ज्यादा वन भूमि का क्षेत्र है।राज्यवासियों की आजीविका में भी वन्य जीव का महत्वपूर्व योगदान है। वन्यजीव , प्रकृति के साथ रोजगार के लिए भी जरूरी। उन्होंने कहा वन्यजीवों की सुरक्षा सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस वर्ष की थीम ” जुड़े आवास – वन्य जीवन का विकास* है। उन्होंने कहा ह्यूमन वाइल्डलाइफ कंफ्लिक्ट को रोकने के लिए कई कॉरिडोर का निर्माण कार्य किया जा रहा है।

वन मंत्री ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा और आजादी भी उतनी महत्वपूर्ण है जितना आम जन की। उन्होंने कहा राज्य सरकार द्वारा वनों को आम आदमी की आजीविका से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने पर भी तेजी से कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा निश्चित ही ऐसे कार्यक्रम विशेष रूप से हमारी युवा पीढ़ी में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत करेंगे।

इस पर विधायक सविता कपूर, राजीव तलवार, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद बिष्ट, प्रमुख सचिव वन आर.के सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक (हाफ) कपिल लाल , प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना गैरवाल, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सड़क सुरक्षा को लेकर डीएम ने सभी, दुर्घटना संभावित संवेदनशील क्षेत्रों में जागरूकता साइनेज स्थापित करने के दिए निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, सड़क सुरक्षा साइनेज, खराब स्ट्रीट एवं ट्रैफिक लाइटों की मरम्मत, मसूरी क्षेत्र में रेस ड्राइविंग पर प्रभावी कार्रवाई तथा मानसून के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों एवं गड्ढों की मरम्मत सहित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में लगेंगे स्पष्ट एवं प्रभावी जागरूकता साइनेज
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित करते हुए वहां पर्याप्त संख्या में स्पष्ट एवं प्रभावी जागरूकता साइनेज लगाए जाएं, ताकि वाहन चालकों को संभावित खतरों के प्रति समय रहते सचेत किया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से आशारोड़ी टनल के आसपास के क्षेत्र सहित अन्य दुर्घटना संभावित स्थानों पर सड़क सुरक्षा से संबंधित आवश्यक उपाय प्राथमिकता से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत आशारोड़ी क्षेत्र में आवश्यक सुरक्षा उपाय किए गए हैं। यहां 58 साइन बोर्ड, 485 मीटर रंबल स्ट्रिप्स, 1880 मीटर मीडियन मार्कर तथा 500 मीटर सोलर स्टड्स स्थापित किए जा चुके हैं।

जिलाधिकारी ने नगर क्षेत्र में खराब पड़ी स्ट्रीट लाइट एवं ट्रैफिक लाइटों का संज्ञान लेते हुए स्मार्ट सिटी के माध्यम से तत्काल मेंटिनेंस कराकर उन्हें ऑपरेशनल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में खराब लाइटों की मरम्मत एवं रखरखाव में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

मसूरी में रेस ड्राइविंग पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश
जिलाधिकारी ने मसूरी क्षेत्र में रेस ड्राइविंग की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध नियमानुसार प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही संवेदनशील एवं अधिक यातायात वाले मार्गों पर आवश्यक निगरानी एवं प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत किया जाए।

नगर निगम क्षेत्र की 92 सड़कों को गड्ढामुक्त करने हेतु 46 अधिकारियों की तैनाती
निर्माण कार्यों एवं मानसून अवधि में नगर निगम देहरादून क्षेत्रांतर्गत विभिन्न प्रमुख मार्गों के क्षतिग्रस्त होने तथा सड़कों को गड्ढामुक्त किए जाने हेतु जिलाधिकारी ने 46 जिला स्तरीय अधिकारियों की तैनाती की है।

नामित अधिकारी अपने-अपने आवंटित मार्गों का स्थलीय निरीक्षण करते हुए सड़क पर मौजूद गड्ढों, क्षतिग्रस्त हिस्सों तथा आवश्यक मरम्मत एवं सुधारात्मक कार्यों को चिन्हित करेंगे।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा संबंधित मार्ग की स्थिति की फोटो सहित विस्तृत सूचना एवं आख्या तैयार की जाएगी। यह रिपोर्ट संबंधित सड़क विभाग एवं कार्यदायी संस्था को आवश्यक मरम्मत एवं सुधारात्मक कार्रवाई हेतु उपलब्ध कराई जाएगी। जिलाधिकारी ने सभी नामित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने आवंटित मार्गों का स्थलीय निरीक्षण निर्धारित अवधि में पूर्ण करते हुए 02 दिवस के भीतर रिपोर्ट जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, देहरादून को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सड़क की स्थिति, चिन्हित गड्ढों एवं क्षतिग्रस्त हिस्सों की जानकारी फोटो सहित स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए, ताकि संबंधित विभाग द्वारा आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध रूप से सुनिश्चित की जा सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल यातायात नियमों के अनुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित सड़क संरचना, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, स्पष्ट साइनेज, प्रभावी निगरानी एवं समयबद्ध मरम्मत भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, उप जिलाधिकारी मुख्यालय रविन्द्र ज्वांठा, पुलिस मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 मनोज कुमार शर्मा, क्षेत्राधिकारी यातायात, अधीक्षण अभियंता लोनिवि ओमपाल सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी अनिता चमोला, अधिशासी अभियंता लोनिवि दीपक यादव एवं भृगु द्विवेदी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित एनएच, एनएचएआई एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

आर्थिक संसाधनों के अभाव में किसी भी बच्चे का उपचार नहीं होने दिया जाएगा प्रभावितः डीएम

जिले में दुर्लभ (रेयर) बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत चिन्हित बच्चों के उपचार, रेफरल प्रक्रिया, आर्थिक सहायता एवं चिकित्सकीय प्रगति की स्वयं नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

भारत सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत जनपद में अब तक 32 बच्चों का चिन्हीकरण किया गया है। इनमें से 22 बच्चों का उपचार आरबीएसके के अंतर्गत किया जा रहा है, जबकि 10 ऐसे बच्चे चिन्हित किए गए हैं, जो आरबीएसके के दायरे में नहीं आते हैं। इन 10 बच्चों के उपचार के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर सीएसआर फंड से रू0 9.60 लाख की धनराशि मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपलब्ध कराई गई है, जिसके माध्यम से बच्चों का उपचार कराया जा रहा है।

जिला प्रशासन के सहयोग से प्रेमनगर निवासी 10 वर्षीय उमेश, बैराज निवासी 13 वर्षीय आयशा, डोईवाला निवासी 9 वर्षीय वंशिका, रायपुर निवासी 2 वर्षीय अक्ष, मेहूवाला निवासी 3 वर्षीय आरिस, मांडूवाला निवासी 15 वर्षीय बाबू एवं प्रदीप, मांडूवाला निवासी 20 वर्षीय रंजीत, डोईवाला निवासी 5 वर्षीय शमशाद तथा जोगीवाला निवासी 5 वर्षीय दिव्यांश का उपचार कराया गया है। इनमें कई बच्चों की सर्जरी के साथ-साथ लंबे समय तक नियमित चिकित्सकीय पर्यवेक्षण की आवश्यकता है।

गंभीर एवं दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित ऐसे बच्चे, जिनके अभिभावक महंगे उपचार का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं हैं तथा जिन्हें सर्जरी अथवा लंबे समय तक उपचार की आवश्यकता है, उनका उपचार देश के विभिन्न विशेषज्ञ एवं उच्च चिकित्सा सुविधाओं से युक्त संस्थानों में कराया जा रहा है। रेयर डिजीज के उपचार में कई बार अत्यधिक व्यय होने के साथ उपचार की अवधि भी लंबी होती है। ऐसे में उपचार को निरंतर बनाए रखने के लिए समयबद्ध आर्थिक एवं प्रशासनिक सहयोग आवश्यक है। डीएम द्वारा आवश्यकता के अनुसार सीएसआर फंड के साथ-साथ राइफल क्लब फंड से भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आर्थिक कारणों से किसी भी बच्चे का उपचार बाधित न हो।

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र बच्चे के उपचार में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति, चिकित्सकीय रेफरल, अनुमोदन तथा वित्तीय सहायता से संबंधित सभी औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण की जाएं, ताकि बच्चों को समय पर उपचार मिल सके। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि आरबीएसके योजना के अंतर्गत उपलब्ध सहायता के बाद भी किसी बच्चे के उपचार के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होती है, तो जिला प्रशासन द्वारा राइफल क्लब फंड से आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि “आर्थिक संसाधनों के अभाव में किसी भी बच्चे का उपचार प्रभावित नहीं होना चाहिए।”

जिलाधिकारी ने कहा कि गंभीर एवं दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों को सभी चिन्हित बच्चों के प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा उनके अभिभावकों से निरंतर संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रत्येक बच्चे के उपचार की वर्तमान स्थिति, चिकित्सकीय प्रगति, रेफरल प्रक्रिया, आर्थिक सहायता की उपलब्धता तथा उपचार से संबंधित अन्य व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय, संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी बच्चे के उपचार में प्रशासनिक अथवा वित्तीय बाधा उत्पन्न न हो। उन्होंने जिले में रेयर डिजीज से पीड़ित बच्चों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया निरंतर जारी रखने के निर्देश दिए, ताकि कोई भी पात्र बच्चा उपचार एवं आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।

बीते तीन माह में बाल कल्याण समिति के समक्ष 236 प्रकरण प्रस्तुत हुए, जिनमें 120 का हुआ निस्तारणः डीएम

जिलाधिकारी व अध्यक्ष जिला बाल संरक्षण इकाई, देहरादून डा. आशीष चौहान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में देर शाम बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति, बाल कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 तथा बाल भिक्षावृत्ति निवारण प्रयास/इंटेंसिव केयर सेंटर, साधु राम इंटर कॉलेज की त्रैमासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में बाल संरक्षण, पुनर्वास, दत्तक ग्रहण, शिक्षा, स्वास्थ्य, बालश्रम, बाल विवाह एवं बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन से संबंधित कार्यों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रकरण में बच्चे के सर्वाेत्तम हित, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पुनर्वास को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। बाल संरक्षण से जुड़े सभी विभाग एवं संस्थाएं आपसी समन्वय से प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें तथा लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय की जाए।

बैठक में बताया गया कि विगत तीन माह में बाल कल्याण समिति के समक्ष 236 प्रकरण प्रस्तुत हुए, जिनमें 120 का निस्तारण किया जा चुका है। संस्थागत बालगृहों में निवासरत 06 बच्चों को दत्तक ग्रहण हेतु विधिक रूप से मुक्त किया गया। वित्तीय वर्ष 2026 में अब तक 05 बच्चों को दत्तक ग्रहण में दिया गया है। वर्ष 2016 से अब तक जनपद से कुल 109 बच्चों को देश एवं विदेश में दत्तक ग्रहण में दिए जाने की जानकारी दी गई।

चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 की समीक्षा में अप्रैल-जून के दौरान 200 तथा जुलाई से अब तक 174 प्रकरण प्राप्त होने की जानकारी दी गई। बाल विवाह के 02 मामले तथा बालश्रम के 46 प्रकरण प्राप्त हुए हैं। जिलाधिकारी ने पारिवारिक समस्याओं एवं अन्य संवेदनशील प्रकरणों में काउंसलिंग और नियमित फॉलोअप के निर्देश दिए।

जनपद में संचालित 19 राजकीय एवं स्वैच्छिक बालगृहों की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने आवास, भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं को मानकों के अनुरूप बनाए रखने तथा कमियों का समयबद्ध समाधान कराने के निर्देश दिए। समीक्षा अवधि में बालगृहों के 16 निरीक्षण किए गए। संस्थाओं में कार्यरत 156 कार्मिकों में से 138 का पुलिस सत्यापन हो चुका है तथा शेष का सत्यापन शीघ्र कराने को कहा गया।

बालगृहों में निवासरत 302 बच्चों की दस्तावेजी स्थिति की समीक्षा में बताया गया कि 236 के आधार कार्ड, 95 के आयुष्मान कार्ड एवं 116 के राशन कार्ड बनाए जा चुके हैं तथा 219 बच्चे विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। शेष बच्चों के दस्तावेज प्राथमिकता से तैयार कराने के निर्देश दिए गए।

बैठक में बाल भिक्षावृत्ति एवं बालश्रम उन्मूलन अभियान की समीक्षा में बताया गया कि दिसंबर 2024 से अब तक 744 बच्चों को चिन्हित/रेस्क्यू किया गया, जिनमें 111 बाल भिक्षावृत्ति, 173 कूड़ा बीनने वाले, 101 बालश्रम, 307 ड्रॉपआउट एवं 52 अन्य श्रेणी के बच्चे शामिल हैं। इनमें से 216 बच्चों का विद्यालयों में प्रवेश कराया गया है। जिलाधिकारी ने रेस्क्यू के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, काउंसलिंग एवं पुनर्वास के लिए प्रभावी फॉलोअप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने मिशन वात्सल्य के तहत ब्लॉक, ग्राम, नगर निकाय एवं वार्ड स्तर पर बाल संरक्षण समितियों को सक्रिय करने तथा उपलब्ध अनटाइड अनुदान की 5 प्रतिशत धनराशि बच्चों के कल्याण एवं सुरक्षा पर नियमानुसार व्यय करने के निर्देश दिए। साथ ही अनाथ एवं परित्यक्त बच्चों के प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, दत्तक ग्रहण, अन्य राज्यों के बच्चों को गृह राज्य भेजने तथा बच्चों के अभिलेख अद्यतन रखने की कार्रवाई समयबद्ध रूप से करने को कहा।

बैठक में संयुक्त मजिस्ट्रेट हर्षिता सिंह, अध्यक्ष जिला बाल कल्याण समिति नमिता ममगाईं, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, पुलिस क्षेत्राधिकारी वंदना वर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर हीपसकपलंस, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेंद्र कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

फर्जी तरीके से लोन दिलाने वाले एजेंटों के नेटवर्क को तोड़ने डीएम ने कसी कमर

जनपद में ऋण एवं ऋण बीमा से संबंधित फर्जीवाड़े की लगातार प्राप्त हो रही शिकायतों को जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने गंभीरता से लिया है। इस संबंध में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनपद में कार्यरत एनबीएफसी एवं एचएफसी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित कर ऋण वितरण प्रक्रिया, एजेंटों की भूमिका, रिकवरी एवं फर्जीवाड़े की शिकायतों की विस्तृत समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा कि जनमानस की मजबूरी एवं आर्थिक आवश्यकताओं का लाभ उठाकर फर्जी तरीके से ऋण दिलाने, अनावश्यक दस्तावेज तैयार करने अथवा एजेंटों के माध्यम से धोखाधड़ी करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आए दिन जनपद में ऋण फर्जीवाड़े से संबंधित शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, जिन्हें किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने ऐसे मामलों पर प्रभावी निगरानी एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी ने लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) को संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सम्मिलित करते हुए समिति गठित करने के निर्देश दिए। समिति ऋण फर्जीवाड़े से संबंधित शिकायतों, संदिग्ध ऋण प्रकरणों तथा एजेंटों की गतिविधियों की नियमित समीक्षा करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि इस प्रकार के प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा प्रत्येक माह संबंधित संस्थाओं एवं अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की जाए। उन्होंने एलडीएम को मासिक समीक्षा बैठक की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने कहा कि गंभीर एवं संदिग्ध ऋण फर्जीवाड़े के मामलों की आवश्यकता अनुसार एसआईटी से जांच कराई जाएगी। जांच में किसी बैंक, वित्तीय संस्था, एजेंट अथवा अन्य व्यक्ति की संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायतें भी प्राप्त हो रही हैं कि कई मामलों में ऋण लेने वाले व्यक्ति की वास्तविक आर्थिक क्षमता एवं पुनर्भुगतान क्षमता का समुचित परीक्षण किए बिना एजेंटों के माध्यम से ऋण स्वीकृत कराए जा रहे हैं। इस प्रकार की अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि किसी भी संस्था अथवा उसके प्रबंधन की संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित प्रबंधक एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने जनपद में संचालित सभी एनबीएफसी एवं एचएफसी को निर्देशित किया कि उनके द्वारा वितरित ऋणों एवं लंबित रिकवरी मामलों की विस्तृत सूची उपलब्ध कराई जाए। इन सूचनाओं का परीक्षण कर संदिग्ध मामलों को चिन्हित किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार जांच एवं कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वित्तीय संस्थाओं को अपनी ऋण वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। किसी भी स्तर पर एजेंटों अथवा बिचौलियों द्वारा नियमों के विपरीत कार्य किए जाने की शिकायत मिलने पर संबंधित संस्था को भी जवाबदेह माना जाएगा।

जिलाधिकारी ने जनपद के सभी उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में टास्क फोर्स गठित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक उप जिला अधिकारी अपने क्षेत्र में संचालित एनबीएफसी एवं एचएफसी की विस्तृत सूची तैयार करें। इसके अतिरिक्त क्षेत्र में सक्रिय मनीलेंडरों एवं ऋण उपलब्ध कराने के नाम पर कार्य कर रहे एजेंटों का विवरण भी संकलित करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन द्वारा इन गतिविधियों की गहन जांच करते हुए संदिग्ध नेटवर्क की पहचान की जाएगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि ऋण दिलाने के नाम पर आमजन को भ्रमित करने और उनकी मजबूरी का फायदा उठाने वाले एजेंटों एवं फर्जी एजेंसियों के पूरे नेटवर्क को तोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाएगी जो रोजगार, व्यवसाय अथवा अन्य आर्थिक आवश्यकता के लिए ऋण प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले लोगों को धोखे का शिकार बना रहे हैं। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि को भी संदिग्ध एवं फर्जी तरीके से संचालित एजेंसियों की जानकारी उपलब्ध कराने तथा आवश्यक सूचनाओं का आदान-प्रदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन आमजन के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सभी संबंधित विभागों एवं वित्तीय संस्थाओं को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए ऐसे मामलों की रोकथाम एवं दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, उप जिलाधिकारी मुख्यालय रविन्द्र ज्वांठा, लीड बैंक प्रबंधक राजीव भाटिया, भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि भरत कुमार सहित विभिन्न एनबीएफसी एवं एचएफसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पुलिस लाइन देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने किया प्रतिभाग

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पुलिस लाइन, देहरादून में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर पुलिस लाइन परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं और धार्मिक विरासत समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं उपदेशों से परिचित होने का अवसर मिलता है।

मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन सत्य, धर्म, कर्तव्य, कर्म और लोककल्याण की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया कर्मयोग का संदेश आज भी पूरी मानवता के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने प्रदेशवासियों से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने और समाज एवं प्रदेश के विकास में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने भी सभी प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में गीता धामी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, अन्य जनप्रतिनिधि, मुख्य सचिव सहित पुलिस महानिदेशक एवं शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा अन्य प्रशासनिक कार्मिक उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री धामी को प्रदेशभर से आई बहनों ने बांधा रक्षा सूत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्य सेवक सदन में प्रदेशभर से आई बहनों ने रक्षा सूत्र बांधा तथा उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने बहनों का आत्मीयता से स्वागत करते हुए उनका आभार व्यक्त किया और सभी प्रदेशवासियों को रक्षा बन्धन की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा बन्धन भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पावन पर्व है। प्रदेश की मातृशक्ति और बहनों का स्नेह एवं आशीर्वाद उन्हें उत्तराखण्ड की सेवा तथा राज्य के विकास के लिए निरंतर नई ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि हमारी मातृशक्ति परिवार की मजबूत आधारशिला होने के साथ ही समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तीकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी अभियान, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी अनेक योजनाओं से महिलाओं और बेटियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण और स्वावलंबन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य सरकार की सेवाओं में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए अवसर बढ़ाने के साथ ही उनके आर्थिक सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लखपति दीदी की परिकल्पना को उत्तराखण्ड में तेजी से धरातल पर उतारा गया है और प्रदेश में 3 लाख 09 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय उत्पादों, कृषि, हस्तशिल्प और विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों के माध्यम से अपनी आजीविका मजबूत करने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तीकरण योजना और मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने के लिए भी राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति ने राज्य निर्माण से लेकर राज्य के विकास तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, कृषि, स्वरोजगार, उद्यमिता और सामाजिक क्षेत्र सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी क्षमता का परिचय दे रही हैं। मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी से ही सशक्त उत्तराखण्ड और विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकता है।

इस अवसर पर गीता पुष्कर धामी, विधायक सविता कपूर, आशा नौटियाल, भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष रुचि भट्ट एवं प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आई मातृशक्ति मौजूद थी।

मुख्यमंत्री ने टपकेश्वर महादेव की शोभायात्रा में पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख समृद्धि की कामना की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टपकेश्वर महादेव की भव्य शोभायात्रा में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत कृष्णा गिरी महाराज, महंत दिगम्बर भरत गिरी महाराज एवं टपकेश्वर सेवा दल के अध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर शोभायात्रा का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने भगवान टपकेश्वर महादेव से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराएं हमारी अमूल्य धरोहर हैं। इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में आस्था, एकता और आपसी सद्भाव को सुदृढ़ करने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री ने शोभायात्रा के आयोजन से जुड़े सभी संत-महात्माओं, आयोजन समिति के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान टपकेश्वर महादेव की कृपा समस्त प्रदेशवासियों पर बनी रहे और उत्तराखण्ड निरंतर प्रगति एवं समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ता रहे।
शोभायात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान टपकेश्वर महादेव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

अवार्ड समारोह में ऋषिकेश के लाल विजय कर्नाटक ने किया नाम रोशन, फोटोग्राफी में मिला एक्सीलेंस अवॉर्ड

ऋषिकेश। सुमन विहार, बापूग्राम, ऋषिकेश निवासी विजय कर्नाटक को शिक्षा एवं फोटोग्राफी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उत्तराखंड इन्फ्लुएंसर एंड क्रिएटर मीट के अंतर्गत आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें Creator Category – Education & Photography के तहत Certificate of Honor प्रदान किया गया।

23 अगस्त 2026 को रुड़की स्थित गोल्डन लीफ में आयोजित उत्तराखंड इन्फ्लुएंसर एंड क्रिएटर मीट में यह सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम का आयोजन एवं संयोजन चेरुब जैन द्वारा किया गया। सम्मान के दौरान विजय कर्नाटक के शिक्षा, रचनात्मकता और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की गई।

विजय कर्नाटक कंप्यूटर साइंस एवं शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े शिक्षाविद् हैं। वे लंबे समय से शिक्षण एवं शोध के साथ-साथ डिजिटल कंटेंट और फोटोग्राफी के माध्यम से युवाओं एवं विद्यार्थियों को ज्ञानवर्धक और सकारात्मक संदेश देने का कार्य कर रहे हैं। शिक्षा और रचनात्मक डिजिटल गतिविधियों के प्रति उनकी सक्रियता ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई है।

सम्मान मिलने पर विजय कर्नाटक ने आयोजकों एवं उत्तराखंड इन्फ्लुएंसर एंड क्रिएटर मीट की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का सम्मान जिम्मेदारी को और बढ़ाता है तथा भविष्य में शिक्षा, रचनात्मकता और समाजहित से जुड़े कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

विजय कर्नाटक को मिला यह सम्मान शिक्षा और रचनात्मकता के क्षेत्र में उनके निरंतर प्रयासों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन एवं उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक अजीता लौंगजाम सहित भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं परिवीक्षार्थी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन सादगी, समर्पण, परिश्रम और राष्ट्रसेवा की भावना का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कर देश के द्वितीय सर्वाेच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उपराष्ट्रपति जी की यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। राज्यसभा के सभापति के रूप में भी उन्होंने संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय वन सेवा में चयनित सभी परिवीक्षार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां के पर्वत, नदियां, वन एवं समृद्ध जैव विविधता प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे में वनों का संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा दायित्व भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती के दौर में वन अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने परिवीक्षार्थियों का आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीक एवं प्रशासनिक दक्षता का उपयोग करते हुए वन संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों को भी प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि ‘प्रकृति के प्रहरी’ हैं और उन्हें अपने अधिकारों के साथ अपनी जिम्मेदारियों तथा अपने ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को भी सर्वाेच्च स्थान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जा रहा है। ‘मिशन स्पथ्म्’ और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करते हुए कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में देश के सबसे बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियानों में से एक के माध्यम से लगभग 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समर्पित फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स का गठन किया गया है। चारधाम यात्रा मार्ग पर डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया गया है, जिसे शीघ्र ही प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि विकास परियोजनाएं पर्यावरण की कीमत पर न हों। राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरने वाले दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर लगभग 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना आधुनिक बुनियादी ढांचे और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का प्रभावी उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वन उपज के परिवहन को सुगम बनाने के लिए राज्य में नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू किया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में होने वाली जनहानि के मामलों में अनुग्रह राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है। वन पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए उत्तराखंड वन पंचायती नियमावली में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। साथ ही, वनाग्नि से निपटने वाले फायर वॉचर्स के लिए जीवन बीमा की व्यवस्था तथा पिरुल एकत्रीकरण के माध्यम से ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बायोफेंसिंग, त्वरित प्रतिक्रिया दल तथा 24 घंटे सक्रिय वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य वन संरक्षण के साथ-साथ इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच ऐसा संतुलन स्थापित करना है, जिसमें प्रकृति और वन्यजीव सुरक्षित रहें तथा वनों पर निर्भर स्थानीय समुदायों की आजीविका और समृद्धि भी सुनिश्चित हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय वन सेवा के युवा अधिकारी भी इसी संतुलित दृष्टिकोण को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाकर देश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकल्प रहित संकल्प’ के अनुरूप देश में वनों और पर्यावरण के व्यापक संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में युवा वन अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी परिवीक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे जहां भी अपनी सेवाएं दें, राष्ट्रहित, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें।