सिंचाई विभाग की खुली नहर में बुजुर्ग हुए चोटिल, अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज

जनपद में विभिन्न माध्यमों से प्राप्त हो रही सड़क दुर्घटना संबंधी शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन की क्यूआरटी ने निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। लापरवाही पर सिंचाई विभाग के संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।

अपर तुनवाला प्रकरण के संबंध में घटना कैनाल रोड, अपर तुनवाला क्षेत्र की नहर की सफाई के दौरान पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध न किए जाने एवं असुरक्षित स्थिति में कार्य किए जाने के दृष्टिगत जिला प्रशासन द्वारा सिंचाई विभाग के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने की कार्रवाई की जा रही है।प्राप्त जानकारी के अनुसार एक बुजुर्ग व्यक्ति मॉर्निंग वॉक के दौरान पूर्वनिर्मित सिंचाई नहर (कैनाल) के खुले भाग में गिर गए। यह नहर सिंचाई विभाग की पुरानी संरचना है, जो सड़क से लगभग डेढ़ फीट ऊंचाई पर पेवमेंट के रूप में स्थित है। नहर की नियमित सफाई के उद्देश्य से सिंचाई विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर स्लैब हटाए गए थे।

कोहरे की स्थिति के कारण बुजुर्ग व्यक्ति खुले स्लैब को देख नहीं पाए और नहर में गिर गए। प्रथम दृष्टया यह घटना सीवर निर्माण कार्य से संबंधित नहीं पाई गई है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने समस्त कार्यवाही संस्थाओं एवं ठेकेदारों को चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्यों के दौरान कटिंग की गई सड़कों अथवा कार्यस्थलों पर किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो संबंधित विभागों एवं कार्यदायी संस्थाओं/ठेकेदारों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज किये जाएंगे। सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी स्तर पर अनदेखी स्वीकार्य नहीं की जाएगी।

जिला प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि किसी भी प्रकार के निर्माण/सफाई कार्य के दौरान पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक, रात्रिकालीन रिफ्लेक्टर एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आमजन की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

अवगत कराया गया है कि कैनाल रोड, अपर तुनवाला प्रकरण के संबंध में घटना कैनाल रोड, अपर तुनवाला क्षेत्र की है, जहां सीवर पाइपलाइन डाले जाने के उपरांत मार्ग के रेस्टोरेशन का कार्य प्रगति पर है। वर्तमान में उक्त स्थल पर रोड कटिंग से संबंधित कोई कार्य संचालित नहीं हो रहा है तथा सड़क का प्राथमिक रेस्टोरेशन कार्य पूर्ण किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री धामी उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के समापन कार्यक्रम में हुए शामिल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज परेड ग्राउंड में सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित चार दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के समापन कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोक कलाकारों, साहित्यकारों, कला-प्रेमियों एवं बड़ी संख्या में उपस्थित जनता का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह महोत्सव उत्तराखंड की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का सराहनीय प्रयास है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से लोक संस्कृति को एक सूत्र में पिरोकर भावी पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने महोत्सव के सफल आयोजन के लिए सेवा संकल्प फाउंडेशन, इसकी संस्थापक गीता धामी एवं समस्त आयोजन समिति को साधुवाद देते हुए कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन राज्य की पहचान को और अधिक सशक्त करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से लोक कलाओं, पारंपरिक वेशभूषा, हस्तशिल्प एवं कारीगरी को नजदीक से जानने और समझने का अवसर प्राप्त होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़, छोपाटी जैसे लोकगीतों तथा छोलिया, पांडव और झोड़ा-छपेली जैसे लोकनृत्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा हैं, जिन्हें संरक्षित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चार दिवसीय आयोजन में लगे स्टॉलों के माध्यम से पारंपरिक हस्तशिल्प, जैविक उत्पादों एवं उत्तराखंडी व्यंजनों के सुंदर प्रदर्शन की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में उत्तराखंड सरकार द्वारा भी राज्य के समग्र विकास के लिए अनेक योजनाएं और नीतियां प्रभावी रूप से लागू की गई हैं।

उन्होंने बताया कि ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ योजना और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा रही है। इसके साथ ही स्टेट मिलेट मिशन, फार्म मशीनरी बैंक, एप्पल मिशन, कीवी मिशन, नई पर्यटन नीति, नई फिल्म नीति, होम स्टे, वेड इन उत्तराखंड और सौर स्वरोजगार योजना जैसी पहलों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते साढ़े चार वर्षों में उत्तराखंड ने अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। किसानों की आय बढ़ाने में उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है तथा युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में भी राज्य अग्रणी बनकर उभरा है।

उन्होंने बताया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तराखंड को ‘अचीवर्स’ और स्टार्टअप रैंकिंग में ‘लीडर्स’ की श्रेणी प्राप्त हुई है। सिंगल विंडो सिस्टम को ‘टॉप अचीवर्स’ श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य सूचकांक 2023-24 में उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य खनन तत्परता सूचकांक में उत्तराखंड को श्रेणी-सी में देश में दूसरा स्थान मिला है। लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस में भी राज्य को अचीवर्स श्रेणी में स्थान मिला है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर मिले पुरस्कार ने उत्तराखंड की निष्पक्ष और पारदर्शी निर्वाचन व्यवस्था को प्रमाणित किया है।

पर्यटन क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को बेस्ट वाइल्डलाइफ और बेस्ट एडवेंचर डेस्टिनेशन के राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार 2024 में जाखोल, हर्षिल, गुंजी और सूपी गांवों को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया गया है। वर्ल्ड रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म अवार्ड में राज्य को ‘वन टू वॉच’ पुरस्कार मिला है।

कृषि और मत्स्य क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में मत्स्य विकास के लिए उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ राज्य का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। हाल ही में हैदराबाद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय विमानन सम्मेलन में राज्य को ‘बेस्ट स्टेट फॉर प्रोमोशन ऑफ एविएशन इकोसिस्टम’ सम्मान से नवाजा गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लोक कलाकारों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। लोक कलाकारों की सत्यापित सूची तैयार कर कोरोना काल में लगभग 3,200 कलाकारों को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी गई। 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध एवं अस्वस्थ लोक कलाकारों को पेंशन प्रदान की जा रही है। गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत लोक प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार लोक सांस्कृतिक लिपियों के प्रकाशन, आर्ट गैलरियों की स्थापना तथा साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। साहित्यकारों को सम्मान और ग्रंथ प्रकाशन हेतु अनुदान प्रदान किया जा रहा है तथा स्थानीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सेवा संकल्प फाउंडेशन जैसी संस्थाएं भविष्य में भी उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी।

सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी गीता धामी ने कहा कि बीते 4 दिनों से इस महोत्सव के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति को जीवंत रखने का कार्य किया गया है। इस महोत्सव में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक उत्पाद, जीवनशैली को सुंदर रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा इस महोत्सव का शुभारंभ शंखनाद से हुआ था। इस कार्यक्रम का सफल आयोजन सभी की मेहनत का फल है।

गीता धामी ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक में पूरे राज्य से लोग आए। यह मात्र संस्था का नहीं बल्कि पूरे राज्य का आयोजन है। जिसमें पूरे राज्य से लोगों ने प्रतिभाग किया है। हमने इस कौथिक के माध्यम से पूरे राज्य की संस्कृति एक मंच पर दिखाया। उन्होंने कहा युवा पीड़ी को इतिहास से जोड़ते हुए उनका भविष्य बनाना है। उन्होंने कहा हमने अपने भविष्य को अपनी जड़ों से जोड़े रखना है।

गीता धामी ने कहा कि आधुनिकता के साथ संस्कृति का संरक्षण भी बेहद जरूरी है। जब तक संस्कृति जीवित है, तब तक हमारी पहचान और सम्मान है। हमारी सनातन संस्कृति ही सबसे पुरातन संस्कृति है। हमें गर्व है कि हम उत्तराखंड और भारत के लोग हैं। उन्होंने सभी से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों की अधिक से अधिक खरीदारी करने की बात कही। उन्होंने कहा जिससे हम राज्य के अर्थव्यवस्था को बढ़ा सके और उत्तराखंड को आत्मनिर्भर उत्तराखंड बनाएं।

गीता धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू हुआ, सख्त नकल विरोधी लागू कर हजारों लोगों को रोजगार दिया है। आज उत्तराखंड नए आयाम स्थापित कर रहा है।

आज कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल, पूर्व मुख्यमंत्री पद्म भूषण भगत सिंह कोश्यारी, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, अध्यक्ष केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड पद्मश्री प्रसून जोशी, राज्यसभा सांसद कल्पना सैनी, विधायक खजान दास, विधायक दुर्गेश्वर लाल, विधायक अनिल नौटियाल, विधायक भोपाल राम टम्टा, विधायक सुरेश गढ़िया, सुरेश चौहान, अजेय कुमार, बिशना देवी, अपर्णा जोशी, डीजीपी दीपम सेठ, दायित्वधारी राज्य मंत्री हेमराज बजरंगी, मधु भट्ट, डॉ. गीता खन्ना, गीताराम गौड़, विश्वास डाबर, श्याम अग्रवाल, विनोद उनियाल, नेहा शर्मा, हरक सिंह, मुकेश कुमार, ज्योति गैरोला, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

डीएम का शिक्षा मॉडल हर कक्षा में अब स्मार्ट तकनीक, सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्रांति की शुरुआत

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिलाधिकारी सविन बंसल की विशेष पहल एवं उनके व्यक्तिगत निर्देशन में जनपद देहरादून के राजकीय संचालित माध्यमिक विद्यालयों में प्रोजेक्ट उत्कर्ष अन्तर्गत डिजिटल एवं उन्नत शिक्षण सुविधाओं के विकास हेतु एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी कदम उठाया गया है। विद्यार्थियों को आधुनिक, तकनीक-सक्षम एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनपद के सभी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के कक्षा-कक्षों को स्मार्ट शिक्षण प्रणाली से सुसज्जित किए जाने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ी पहल करते हुए जनपद के 168 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में स्मार्ट शिक्षण व्यवस्था लागू कर दी है। कुल 3.67 करोड़ रुपये की लागत से 884 स्मार्ट टीवी स्थापित किए गए हैं, जिससे प्रत्येक कक्षा को डिजिटल शिक्षण प्रणाली से जोड़ा जा रहा है।
जिले के सरकारी स्कूलों को डिजिटल रफ्तार मिलने जा रही है जिला प्रशासन की इस पहल को सरकारी विद्यालयों में शिक्षा में बड़ी पहल के तहत देखा जा रहा है। जिलाधिकारी के विशेष निर्देशन में संचालित इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक, इंटरएक्टिव एवं तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। स्मार्ट टीवी के माध्यम से अब कक्षाओं में ऑडियो-वीडियो कंटेंट, ई-लर्निंग मॉड्यूल एवं डिजिटल पाठ्यसामग्री का उपयोग किया जाएगा, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और रोचक बनेगी। यह पहल न केवल सरकारी स्कूलों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा वातावरण प्रदान कर डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।
इस योजना के अंतर्गत जिले के 06 विकास खंडों में संचालित कुल 168 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के कक्षा-कक्षों हेतु कुल 884 स्मार्ट टीवी क्रय किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक विद्यालय में डिजिटल शिक्षण सुविधा समान रूप से उपलब्ध हो तथा ग्रामीण एवं शहरी विद्यालयों के मध्य डिजिटल अंतर को न्यूनतम किया जा सके। स्मार्ट टीवी की स्थापना से विद्यालयों में शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी, रोचक एवं सहभागितापूर्ण बनेगी। इसके माध्यम से दिक्षा पोर्टल, पीएमई विद्या, ई-सामग्री, शैक्षिक वीडियो, वर्चुअल कक्षाएं तथा अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग संभव होगा। इससे विद्यार्थियों की अवधारणात्मक समझ, सहभागिता एवं शैक्षणिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है।
जिला प्रशासन द्वारा कक्षा-कक्षों के आकार एवं छात्र संख्या को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट टीवी दो आकारों में क्रय किए जा रहे जिनमें 43 इंच छोटे एवं मध्यम आकार के कक्षों हेतु तथा 55 इंच बड़े आकार के कक्षों हेतु स्मार्ट टीवी क्रय किये जा रहे हैं। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना हेतु कुल ₹3,67,00,000/- (रुपये तीन करोड़ सड़सठ लाख मात्र) की धनराशि स्वीकृत की गई है। उक्त धनराशि का प्रावधान जिला खनन निधि देहरादून से किया गया है। इससे पूर्व जिले के सभी सरकारी विद्यालयों को 5 करोड़ सीएसआर फंड से फर्नीचरयुक्त किया जा चुका है।
स्मार्ट टीवी का क्रय जैम पोर्टल के माध्यम से ई-टेंडर प्रक्रिया द्वारा पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक प्रणाली के अंतर्गत किया गया है। निविदा प्रक्रिया में देश के विभिन्न राज्यों से कुल 12 फर्मों द्वारा प्रतिभाग किया गया। निविदाओं के परीक्षण एवं चयन हेतु मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक टेंडर समिति का गठन किया गया, जिसमें एनआईसी, कोषागार तथा अन्य संबंधित विभागों के तकनीकी एवं वित्तीय विशेषज्ञों को सम्मिलित किया गया। समिति द्वारा प्राप्त निविदाओं का नियमानुसार विस्तृत तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन किए जाने के उपरांत पात्र एवं न्यूनतम दर वाली फर्म का चयन कर कार्यादेश निर्गत कर दिया गया है। आपूर्ति एवं स्थापना संपूर्ण क्रय प्रक्रिया जैम पोर्टल के माध्यम से ई-टेंडर प्रणाली द्वारा पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक ढंग से संपन्न की कार्यादेश निर्गत कर दिया गया है। आपूर्ति एवं स्थापना कार्य शीघ्र प्रारंभ करते हुए निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह पहल न केवल डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने का सशक्त प्रयास है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप तकनीक-सक्षम शिक्षण वातावरण विकसित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इसे जनपद में शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि प्रशासन विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। जनपद प्रशासन द्वारा स्मार्ट टीवी की आपूर्ति एवं स्थापना कार्य को समयबद्ध रूप से पूर्ण कराते हुए सभी विद्यालयों में शीघ्र ही डिजिटल शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

रोड कटिंग में मनमानी पड़ी भारी, अनुमति निरस्त, मुकदमा दर्ज मशीनरी जब्त

रोड कटिंग कार्य में अनुमति की शर्तों के उल्लंघन पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड (पिटकुल) की रोड कटिंग अनुमति निरस्त करते हुए कार्य को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है। पिटकुल की अनुमति पर बैन लगा दिया है। तथा एक्शियन एवं ठेकेदार पर मुकदमा तर्ज किया गया।
एलआईसी बिल्डिंग के पास विद्युत केबल अंडरग्राउंड कार्य में आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। जिसका संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधितों के विरुद्ध एक्शन लेने के निर्देश दिए है। जिसके परिपेक्ष में अनुमति निरस्त करते हुए। एक्शियन ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
उप जिलाधिकारी (न्याय) कुमकुम जोशी के नेतृत्व में क्यूआरटी टीम के निरीक्षण में पाया गया कि निर्धारित समय व शर्तों के विपरीत रोड कटिंग की जा रही थी, जिससे यातायात बाधित हुआ और आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ी। जिला प्रशासन ने पिटकुल को निर्देश दिए हैं कि सभी प्रभावित स्थलों पर तत्काल भरान कर सड़क को पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए। निर्देशों की अवहेलना की स्थिति में संबंधित अधिशासी अभियंता, ठेकेदार व अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
अधीक्षण अभियंता (परियोजना क्रियान्वयन), पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड (पिटकुल) द्वारा 135 के.वी. आराघर सब-स्टेशन से निर्माणाधीन 132 के.वी. माजरा-लालतप्पड़ एलआईएलओ लाइन को भूमिगत केबिल के माध्यम से बिछाने (कुल लंबाई 1996 मीटर, 5 रोड क्रॉसिंग सहित) हेतु रोड कटिंग की अनुमति का अनुरोध पर परियोजना समन्वय समिति, जनपद देहरादून ने 19.12.2025 को आयोजित बैठक में लिए गए निर्णय के क्रम में अधीक्षण अभियंता, नवम वृत्त, लोक निर्माण विभाग, यमुना कॉलोनी, देहरादून / सदस्य सचिव, परियोजना समन्वय समिति द्वारा पत्र 01.01.2026 के माध्यम से निर्धारित शर्तों एवं प्रतिबंधों के अधीन 16.01.2026 से 15.02.2026 तक, रात्रि 10 बजे से प्रातः 5 बजे तक रोड कटिंग की सशर्त अनुमति प्रदान की गई थी।
जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी के नेतृत्व में जिला प्रशासन की क्यूआरटी टीम द्वारा आईएसबीटी क्रॉसिंग एवं सहारनपुर रोड माजरा क्षेत्र में रोड कटिंग स्थलों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान क्यूआरटी टीम द्वारा पाया कि संबंधित एजेंसी द्वारा अनुमति आदेश में उल्लिखित शर्तों एवं प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए रोड कटिंग कार्य किया जा रहा है, जिससे आम जनमानस को भारी असुविधा, यातायात बाधा एवं सुरक्षा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन द्वारा अग्रिम आदेशों तक संबंधित स्थलों पर रोड कटिंग कार्य पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है तथा अनुमति निरस्त कर दी गई है। साथ ही अधीक्षण अभियंता (परियोजना क्रियान्वयन), पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड को निर्देशित किया गया है कि समस्त प्रभावित स्थलों पर सड़क का भरान कर यथास्थिति में रिस्टोरेशन कार्य सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शहर की सड़कों, यातायात व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा, नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने पूर्व सीएम हरीश रावत से की शिष्टाचार भेंट, कुशलक्षेम जाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता हरीश रावत से उनके डिफेंस कॉलोनी देहरादून स्थित आवास पर भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हरीश रावत का कुशलक्षेम जाना।

भेंट के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरीश रावत के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने अपनी ओर से एक आत्मीय प्रतीक के रूप में अपने खेत में उत्पादित चावल हरीश रावत को भेंट किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भेंट उत्तराखंड की कृषि परंपरा, किसानों की मेहनत और स्थानीय उत्पादों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

हरीश रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस स्नेहिल व्यवहार एवं आत्मीय भेंट के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी की यह भेंट राजनीतिक परंपराओं में आपसी सम्मान, सद्भाव और शिष्टाचार का एक सुन्दर उदाहरण है।

संविधान केवल कानून नहीं, भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर देहरादून स्थित गांधी पार्क में भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित सामूहिक वंदे मातरम् गायन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर इस गरिमामयी सामूहिक वंदे मातरम् गायन कार्यक्रम में सहभागिता करना उनके लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अवसर इसलिए भी विशेष है क्योंकि राष्ट्रगीत वंदे मातरम् अपनी रचना के 150 गौरवशाली वर्ष पूर्ण कर चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की लेखनी से निकला वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन का नारा रहा है, जिसने देशवासियों को एक साझा भावनात्मक और सांस्कृतिक पहचान प्रदान की तथा पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम के सूत्र में बाँधने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि जब गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया, तब यह केवल नारा नहीं रहा, बल्कि एकता, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण का सजीव प्रतीक बन गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् कोई सामान्य कविता नहीं है, बल्कि यह माँ भारती के प्रति आस्था, समर्पण और कर्तव्यबोध की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रगीत हजारों कंठों से एक साथ गूंजता है, तो केवल स्वर नहीं मिलते, बल्कि हृदय, विचार और संकल्प भी एक हो जाते हैं। इसी भाव को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री ने भारत विकास परिषद के सभी कार्यकर्ताओं की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस का यह दिन राष्ट्र के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1950 में स्वतंत्र भारत ने अपना संविधान लागू कर एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अपनी यात्रा आरंभ की। उन्होंने संविधान सभा के सभी सदस्यों, स्वतंत्रता सेनानियों, क्रांतिकारियों, सत्याग्रहियों और माँ भारती के अमर सपूतों को नमन करते हुए उनके संघर्ष और बलिदान को स्मरण किया। साथ ही उन्होंने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले सेना और पुलिस के वीर जवानों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राचीन सभ्यता, लोकतांत्रिक मूल्यों और हजारों वर्षों की सांस्कृतिक चेतना का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि जिस भारत के बारे में यह कहा जाता था कि इतनी विविधताओं वाला देश लोकतांत्रिक नहीं रह पाएगा, वही भारत आज विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में भारत विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आधुनिक बुनियादी ढांचे, स्मार्ट सिटी, राष्ट्रीय राजमार्गों और हवाई कनेक्टिविटी के माध्यम से विकास को नई गति मिली है। डिजिटल इंडिया, यूपीआई और तकनीकी नवाचारों ने प्रत्येक नागरिक को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीब कल्याण के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व कार्य हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों ने देश की आर्थिक नींव को मजबूत किया है तथा उत्पादन और नवाचार के क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि सेनाओं के निरंतर आधुनिकीकरण, उन्नत हथियारों और रक्षा प्रौद्योगिकी के माध्यम से सीमा सुरक्षा को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। साथ ही भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर नए आत्मविश्वास के साथ स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल घोषणाएं नहीं कीं, बल्कि ठोस निर्णय लेकर उन्हें धरातल पर उतारा है। देवभूमि की सामाजिक शांति बनाए रखने के लिए सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगा विरोधी कानून लागू किए गए हैं। ऑपरेशन कालनेमी के माध्यम से सनातन धर्म को बदनाम करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई है तथा मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सख्त भू-कानून लागू कर देवभूमि को अवैध कब्जों और माफियागिरी से सुरक्षित किया जा रहा है। समान नागरिक संहिता लागू करने वाला उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना है। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिसके तहत अब तक 100 से अधिक नकल माफियाओं को जेल भेजा जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में 27 हजार युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। उन्होंने बताया कि राज्य गठन के समय की तुलना में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 26 गुना बढ़ चुका है तथा प्रति व्यक्ति आय में लगभग 17 गुना की वृद्धि हुई है। बिजली उत्पादन में कई गुना वृद्धि और सड़कों के नेटवर्क के दोगुना होने से प्रदेश के विकास को नई गति मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पलायन निवारण आयोग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 44 प्रतिशत रिवर्स पलायन दर्ज किया गया है, जो यह दर्शाता है कि लोग अब रोजगार, सम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्य इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ देवभूमि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और उन्हें विश्वास है कि प्रदेशवासी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए उत्तराखंड सहित पूरे देश को और अधिक सशक्त बनाने में योगदान देंगे।

कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, सविता कपूर तथा अन्य जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

परेड ग्राउंड में राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने सराहनीय सेवाओं के लिए पुलिस एवं विभिन्न अधिकारियों को किया सम्मानित

गणतंत्र दिवस के अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने परेड ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और भव्य परेड की सलामी ली। कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पुलिस अधिकारियों को पदक अलंकरण कर सम्मानित किया गया साथ विभिन्न अधिकारियों को भी उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया।

   परेड ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान सूचना विभाग द्वारा ‘‘उत्तराखण्ड रजत जयंती और शीतकालीन धार्मिक यात्रा व पर्यटन’’ पर आधारित झांकी के अलावा महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, पर्यटन विभाग, उद्यान विभाग, विद्यालयी शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेड़ा), वन विभाग, उद्योग विभाग एवं संस्कृत शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों, योजनाओं तथा नीतियों पर आधारित मनमोहक झाँकियों का भी प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में सूचना विभाग की झांकी को प्रथम, संस्कृत शिक्षा विभाग को द्वितीय तथा विद्यालयी शिक्षा विभाग की झांकी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ, जिन्हें राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया।

   समारोह में सेना 14वीं डोगरा रेजीमेंट आर्मी, सी0आर0पी0एफ0, आई०टी०बी०पी०, हिमाचल पुलिस, 40वीं वाहिनी पीएसी, 40वीं वाहिनी महिला दल, उत्तराखण्ड होमगार्ड्स, प्रान्तीय रक्षक दल, एन०सी०सी बॉयज, एन०सी०सी गर्ल्स, अश्व दल, पुलिस संचार, अग्निशमन, सी०पी०यू० ने भव्य परेड में प्रतिभाग किया। परेड करने वाली टुकड़ियों में प्रथम स्थान पर सीआरपीएफ, द्वितीय स्थान पर आईटीबीपी और तृतीय स्थान पर 14वीं डोगरा रेजीमेंट आर्मी रहीं, जिन्हें राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया।

   परेड ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में राज्य के लोक कलाकारों ने सांस्कृृतिक लोक नृत्य का मनमोहक प्रदर्शन किया, जिसमें राज्य की समृद्ध संस्कृति की झलक देखने को मिली। विभिन्न सांस्कृतिक दलों द्वारा छोलिया नृत्य, गढ़वाली नृत्य, पाइप बैंड आदि का महमोहक प्रदर्शन किया गया, जिसका उपस्थित लोगों ने खूब आनंद लिया।

   कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकतंत्र सेनानियों, शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिजनों और राज्य आंदोलनकारियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया।

   परेड ग्राउंड में आयोजित इस समारोह में पूर्व राज्यपाल महाराष्ट्र एवं पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी गीता धामी, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, सांसद नरेश बंसल, सांसद महेन्द्र भट्ट, विधायक खजान दास, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव राज्यपाल रविनाथ रामन, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, एसएसपी अजय सिंह सहित पुलिस तथा प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीगण, जनप्रतिनिधि गण एवं जनसामान्य लोग भी उपस्थित रहे।

*राज्यपाल ने लोक भवन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया*

   राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर लोक भवन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई दी।

   मीडिया से वार्ता करते हुए राज्यपाल ने भारतीय संविधान के शिल्पकार बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं को नमन करते हुए लोकतंत्र की सुदृढ़ नींव रखने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने देश की स्वतंत्रता हेतु बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों, वीर शहीदों तथा सीमाओं एवं तटों पर तैनात सशस्त्र बलों के जवानों को नमन किया।

   राज्यपाल ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें अपने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत 2047’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विश्व गुरु भारत’ के संकल्प को साकार करने में सभी नागरिकों की सहभागिता पर बल दिया।

   राज्यपाल ने कहा कि 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं आधुनिक तकनीकों का सकारात्मक उपयोग राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक है। उन्होंने उत्तराखण्ड की नारी शक्ति और युवाओं द्वारा नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

   राज्यपाल ने ‘राष्ट्र सर्वाेपरि’ की भावना के साथ एकता और अखंडता बनाए रखने का आह्वान करते हुए सभी प्रदेशवासियों को देश की प्रगति में सक्रिय योगदान देने की अपील की।

*गणतंत्र दिवस के अवसर पर जिन अधिकारियों को उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया गया विवरण निम्नवत हैः-*

1-डॉ. नीरज सिंघल, निदेशक पशुपालन विभाग उत्तरखण्ड।
2- मस्तू दास, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखण्ड।
3- अरुण कुमार सिंह, अनुभाग अधिकारी सचिवालय उत्तराखण्ड।
4- राकेश सिंह असवाल, समीक्षा अधिकारी सचिवालय उत्तराखण्ड।

*गणतंत्र दिवस-2026 के अवसर पर घोषित राज्यपाल उत्कृष्ट सेवा पदक से राज्य पुलिस बल के अधिकारियों/कर्मचारियों को पदक अलंकरण किया गया-*

1- यशपाल सिंह, निरीक्षक नागरिक पुलिस एसटीएफ देहरादून।
2- नरोत्तम बिष्ट, उप निरीक्षक नागरिक पुलिस एसटीएफ देहरादून।
3- देवेन्द्र कुमार, आरक्षी 21 नागरिक पुलिस एसटीएफ देहरादून।
4- भूपेन्द्र सिंह मर्ताेलिया, मुख्य आरक्षी एसटीएफ कुमाऊँ।
5- सुनील कुमार, अपर उप निरीक्षक सशस्त्र पुलिस पौड़ी गढ़वाल।
6- सुनील रावत, मुख्य आरक्षी 114 नागरिक पुलिस, जनपद देहरादून।

गंगा तट पर संस्कृति और संगीत का अनुपम संगम, बसंतोत्सव बना आध्यात्मिक चेतना का उत्सव: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज भरत मंदिर, ऋषिकेश में आयोजित वसंतोत्सव 2026 – मैथिली ठाकुर नाइट में सम्मिलित हुए। गंगा के पावन तट पर आयोजित इस भव्य एवं भक्तिमय कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु-संतों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों तथा देश-प्रदेश के विभिन्न कोनों से आए श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पतित-पावनी मां गंगा के श्रीचरणों में नमन करते हुए कहा कि मधुबनी की शान, भजनों एवं लोकगीतों की स्वर साधिका तथा देश की सबसे युवा विधायक मैथिली ठाकुर जैसी प्रतिभा का योगनगरी ऋषिकेश की पावन धरा पर आगमन सभी के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने पूज्य संतगणों एवं देश-प्रदेश से पधारे श्रद्धालुओ का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री ने इस विशिष्ट कार्यक्रम के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गंगा के पवित्र तट पर आयोजित यह बसंतोत्सव भजन संध्या संस्कृति और संगीत के अनुपम संगम के माध्यम से लोक संस्कृति और सनातन परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास है। उन्होंने ऋषिकेश बसंतोत्सव समिति को इस भव्य और भक्तिमय आयोजन के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश आधुनिक योग और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ सनातन संस्कृति की प्राचीन पुण्य भूमि भी है। सतयुग में इस धरा पर महर्षि रैभ्य को भगवान विष्णु के दर्शन हुए, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने रावण वध के पश्चात यहीं तपस्या की तथा भरत जी ने भगवान नारायण की स्थापना कर पूजन किया। कालांतर में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा भी इस भूमि पर विशेष पूजन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैथिली ठाकुर ने अपनी साधना, प्रतिभा और संकल्प से यह सिद्ध किया है कि समर्पण, परिश्रम, भक्ति और सेवा भाव से समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैथिली ठाकुर की जीवन यात्रा यह दर्शाती है कि कला और संस्कृति केवल मंच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा भी बनती है। जब आज अनेक युवा पश्चिमी संगीत की ओर आकर्षित हो रहे हैं, तब मधुबनी से निकली इस युवा प्रतिभा ने अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए मैथिली और भोजपुरी लोक संगीत को जन-जन तक पहुंचाया है। उन्होंने वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें ‘कल्चरल एंबेसडर ऑफ द ईयर’ के नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने का उल्लेख भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे शास्त्रों में गीत और संगीत के माध्यम से की गई उपासना को ईश्वर से सीधे संवाद का मार्ग बताया गया है। सच्चे मन से की गई स्वर साधना कलाकार को समाज का पथ-प्रदर्शक बना देती है। उन्होंने कहा कि मैथिली ठाकुर जैसी विभूतियां यह स्मरण कराती हैं कि भारत की आत्मा आज भी गांवों की चौपालों, मंदिरों की घंटियों, लोकगीतों की धुनों और मां गंगा की लहरों में जीवित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज सनातन संस्कृति की धर्मध्वजा विश्व में गर्व के साथ फहरा रही है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, बद्रीनाथ-केदारनाथ धामों का पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसे कार्यों से भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिली है। इसी प्रेरणा से उत्तराखंड सरकार भी केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर, यमुना तीर्थ पुनरुद्धार जैसी परियोजनाओं पर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दून विश्वविद्यालय में “सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज” की स्थापना कर संस्कृति और दर्शन के अध्ययन को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन की स्थापना की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक संतुलन और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। यह प्रतिबद्धता कठोर निर्णयों और साहसिक कदमों के रूप में दिखाई देती है। सख्त धर्मांतरण कानून, दंगा रोधी कानून, नकल विरोधी कानून, भू-कानून, यूसीसी लागू करने सहित भ्रष्टाचार के विरुद्ध अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनसमर्थन और सहयोग से सरकार देवभूमि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प” को अवश्य पूर्ण करेगी।

अपनी मां से मांगो माफी, वरना होगा जिला बदरः डीएम

देहरादून। बेटों द्वारा प्रताड़ित विधवा ने जिन बेटों को जन्म दिया, वही मां जब अपने बेटों के हाथों पिटने लगे और हर रात जान का डर सताने लगे तब जिला प्रशासन उसके लिए ढाल बनकर खड़ा हुआ। बंजारावाला क्षेत्र की एक लाचार विधवा मां विजय लक्ष्मी पंवार ने हिम्मत जुटाकर प्रशासन से गुहार लगाई कि उसके ही बेटे नशे में उसे पीटतें है, पैसे मांगते है और जान से मारने की धमकी देते है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने गोपनीय जांच कराई। पड़ोसियों और जनप्रतिनिधियों की बातों ने उस मां के दर्द की पुष्टि की। प्रशासन ने गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की तो बेटों को पहली बार अपनी मॉ के प्रति जिम्मेदारी एवं कर्तव्यों का एहसास हुआ।

न्यायालय में दोनों बेटों ने मां से माफी मांगी, नशा छोड़ने और हिंसा न करने का शपथ पत्र दिया। कानून का डर और मां की चुप पीड़ा दोनों ने मिलकर बेटे को झकझोर दिया। विधवा मां के साथ मारपीट व जान से मारने की धमकी के मामले में जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई से दोंनो पुत्रों को अपने कर्तव्यों का बोध हुआ। गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत वाद दर्ज होने के बाद दोनों बेटों ने न्यायालय में शपथ पत्र देकर नशा छोड़ने और मां के साथ दुर्व्यवहार न करने का वचन दिया। जिला प्रशासन की चेतावनी और कानूनी शिकंजे के बाद दोंनो बेटों के व्यवहार में सुधार को देखते हुए न्यायालय ने आगे की कार्रवाई समाप्त की।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि महिलाओं, विधवाओं व निर्बल वर्ग के उत्पीड़न पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू है और भविष्य में पुनरावृत्ति होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य सचिव ने सगन्ध पौधा केन्द्र द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी ली

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने जनपद देहरादून के सेलाकुई में स्थित सगन्ध पौधा केन्द्र का भ्रमण किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सगन्ध पौधा केन्द्र द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि हाई वैल्यू फसलों के उत्पादन और प्रसंस्करण से प्रदेश के किसानों की आर्थिकी में बेहतर सुधार हो सकता है। उन्होंने सगन्ध पौधा केन्द्र द्वारा प्रदेश के किसानों को डूर स्टेप सहायता उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए सगन्ध पौधा केन्द्र को और मजबूत किए जाने पर जोर दिया, ताकि सगन्ध पौधा केन्द्र प्रदेशभर में अपनी गतिविधियों को बढ़ा सके।

मुख्य सचिव ने सभी जनपदों में उनकी जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप एरोमैटिक फसलों का चयन कर प्रदेश के अधिक से अधिक किसानों को इसमें जोड़े जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसानों को सगन्ध फसलों के उत्पादन में अपेक्षित सहयोग उपलब्ध कराया जाए। साथ ही उन्होंने 6 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में तैयार किए जा रहे सैटेलाईट सेंटर्स को भी शीघ्र शुरू किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने परफ्यूमरी एंड ऐरोमैटिक सेक्टर में उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास के अंतर्गत डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेशन कार्यक्रम संचालित किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने अपने पूर्व में दिए निर्देशों को दोहराते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को जनपदों में भ्रमण कर समीक्षा कर फीडबैक लेने के लिए लगातार दौरे करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि अन्य विभागों द्वारा संचालित फल एवं सब्जियों से जुड़े आजीविका की योजनाओं को भी इसमें शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक किसान इस सगन्ध पौध उत्पादन और प्रसंस्करण कार्य से जुड़ें इसके लिए सभी जनपदों में प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएं। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक कार्ययोजना जनवरी माह तक पूर्ण किए जाने की बात दोहराते हुए कहा कि निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण हो सकें इसके लिए जनपदों के लिए भी लक्ष्य निर्धारित किए जाएं।

इस अवसर पर निदेशक सगन्ध पौधा केन्द्र डॉ. निर्पेंद्र चौहान ने बताया कि सगन्ध पौधा केन्द्र को खुशबूदार फसलों के वाणिज्यीकरण के लिए एक सफल मॉडल के रूप में विकसित किया है, जो एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि यह एक बिज़नेस इनक्यूबेटर के तौर पर काम करता है, जो किसानों, उद्यमियों और एसेंशियल ऑयल इंडस्ट्री को सपोर्ट देता है, जिसमें खेती, प्रोसेसिंग और डिस्टिलेशन, मार्केटिंग, क्वालिटी एनालिसिस और स्टैंडर्डाइजेशन ट्रेनिंग और खुशबू वाले सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए दूसरी प्रमोशनल स्कीम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 5 नाली तक के किसानों को मुफ्त रोपण सामग्री उपलब्ध करायी जा रही है, जबकि 9 एरोमैटिक फसलों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।

निदेशक डॉ. चौहान ने बताया कि डिस्टिलेशन यूनिट और ड्रायर के लिए पर्वतीय जनपदों में 75 प्रतिशत तक सब्सिडी और मैदानी जनपदों में 50 प्रतिशत तक सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख) उपलब्ध करायी जा रही है। किसानों की सहायता के लिए 27 एसेंशियल ऑयल और एरोमैटिक उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है।

इस अवसर पर जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल भी उपस्थित थे।