धामी कैबिनेट बैठक में यह रहे फैसले, जानिए…

1. परिवहन विभाग के अन्तर्गत उत्तराखण्ड मोटर यान (संशोधन) नियमावली 2026 को मंत्रीमण्डल को अनुमोदन।

मंत्रीमण्डल द्वारा परिवहन विभाग में पूर्व में सृजित पदों के सापेक्ष वर्दी निर्धारण को लेकर अनुमोदन प्रदान किया गया, जिसमें अब पुलिस विभाग के चालकों के अनुसार, प्रवर्तन चालकों का भी वर्दी का निर्धारण किया गया है।

2. कुम्भ मेला-2027 को लेकर हरिद्वार में होने वाले स्थाई एवं अस्थाई निर्माण कार्यों की स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए 01 करोड़ तक के कार्यों को मेलाधिकारी द्वारा तथा 05 करोड़ तक कार्यों को आयुक्त गढ़वाल मंडल द्वारा स्वीकृत किए जाने हेतु मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया। 05 करोड़ से अधिक के कार्यों में पूर्व की भांति शासन से स्वीकृति प्राप्त की जायेगी।

3. उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली 2026 में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी

उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली (संशोधन) 2026 के अन्तर्गत सैनिकों से संबंधित बढ़ते मामलों को देखते हुए अब जिला सैनिक कल्याण अधिकारी भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में पदेन सदस्य के रूप में नामित होंगे। इसके अतिरिक्त विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली निःशुल्क सेवा के अन्तर्गत ऐसेड अटैक विक्टिंग को भी शामिल करने का मंत्रिमंडल द्वारा दिया गया अनुमोदन।

4. औद्योगिक विकास विभाग के अन्तर्गत उत्तराखंड उप खनिज परिहार नियमावली 2023 में संशोधन करते हुए पूर्व में खनिज पर निर्धारित रॉयल्टी की दर ₹7 प्रति कुंतल से बढ़ाकर ₹8 प्रति क्विंटल किए जाने का निर्णय मंत्रीमण्डल द्वारा लिया गया।

5. पूर्व में पारित आबकारी नीति के तहत 6 प्रतिशत वैट की दरों का निर्धारण किया गया था। आबकारी नीति के अनुसार ही वाणिज्य कर विभाग द्वारा अपनी नियमावली में 6 प्रतिशत वैट की दरों के संशोधन हेतु प्रस्ताव रखा गया था, जिस पर मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया।

6. परिवहन विभाग द्वारा 250 बस क्रय करने के प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल द्वारा दी गई अनुमति।

7. परिवहन विभाग को पूर्व में शासन द्वारा 100 बस खरीदने की अनुमति दी गई थी। वर्तमान समय में जीएसटी के रेट 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत होने के चलते अब परिवहन विभाग को 100 की जगह 109 बस क्रय करने की अनुमति मंत्रीमण्डल द्वारा दी गई।

8. वन विभाग के अन्तर्गत उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली, 2016 के संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी।

उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली, 2016 में संशोधन करते हुए वन दरोगा के पद के लिए शैक्षिक अर्हता को इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक किए जाने तथा वन दरोगा की आयु सीमा को 21 वर्ष 35 वर्ष करने एवं वन आरक्षी हेतु आयु सीमा 18 वर्ष से अधिकतम 25 वर्ष किए जाने का मंत्रीमंण्डल द्वारा अनुमति दी गई। इस संबंध में कार्मिक विभाग द्वारा पूर्व में पारित वर्दीधारी नियमावली के अनुबन्ध भी लागू रहेंगे।

9. अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अन्तर्गत अक्टूबर 2025 में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025 को अधिसूचित किया गया था, इसमें अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता एवं संस्थानों की शैक्षिक उत्कृष्टता को सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने एवं अन्य कार्यों की व्यवस्था इस अधिनियम में की गई थी। इस व्यवस्था में कक्षा 01 से कक्षा 12 तक संचालित अल्पसंख्यक संस्थाओं को विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से संबद्धता लेने का प्रावधान किया गया था।

वर्तमान में राज्य में 452 मदरसे है, जिनमें लगभग 400 से अधिक मदरसो में कक्षा 01 से कक्षा 8 तक की ही पढ़ाई कराई जाती है। इन मदरसों के अनुरोध एवं उनकी सुविधा के लिए कक्षा 01 से 8 तक के संचालन करने वाले अल्पसंख्यक संस्थाओं की संबद्धता अब जिला स्तरीय शिक्षा समिति/शासन द्वारा निर्धारित सक्षम अधिकारी द्वारा निर्धारित किया जाएगा। कक्षा 09 से 12 तक के संचालन करने वाले अल्पसंख्यक संस्थाओं को विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से संबद्धता लेनी होगी। इस व्यवस्था को लागू करने हेतु मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया। अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में अध्यादेश लाने का भी अनुमोदन मंत्रीमण्डल द्वारा प्रदान किया गया।

10. कार्मिक विभाग के अन्तर्गत विभिन्न विभागों में एकल संवर्ग में एक वर्ष के भीतर प्रतीक्षा सूची प्राप्त हो गई है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाए और भविष्य हेतु एक स्पष्ट एसओपी बना ली जाए, ताकि सभी विभागों और आयोगों को इसके संबंध स्पष्टता सुनिश्चित हो सके, जिस पर मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया।

11. मा. सर्वाेच्च न्यायालय, नई दिल्ली में रिट याचिका रजनीश कुमार पांडे व अन्य बनाम भारत सरकार में 28 अक्टूबर, 2021 को निर्णय पारित हुआ था। जिसके क्रम में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 2022 में माध्यमिक स्तर हेतु विशेष शिक्षा शिक्षकों की शैक्षिक अर्हताएं तय की गई थी, उसी के अनुसार विशेष शिक्षा शिक्षक के पदों पर भर्ती हेतु उत्तराखंड विशेष शिक्षा शिक्षक नियमावली में शैक्षिक योग्यताएं रखी गई है, जिस पर मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदन दिया गया।

12. उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा शैक्षिक संवर्ग सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को कैबिनेट की मंजूरी।

उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा शैक्षिक संवर्ग सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को मंत्रिमंडल द्वारा अनुमति दी गई। पूर्व में प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता, सहायक अध्यापक के कुल 62 पद सृजित किए गए थे, परंतु उनकी सेवा नियमावली प्रख्यापित नहीं की गई थी, जिसके कारण अध्यापकों के प्रमोशन आदि प्रभावित हो रहे थे।

13. लोक निर्माण विभाग के अर्न्तगत 2023 में 2010 पदों पर जेई की भर्ती हुई थी, जिसमें दिव्यांग श्रेणी के 07 पदों पर भर्ती की जानी थी, परंतु उस समय उस कैटेगरी के लोग नहीं मिल पाने की वजह से सामान्य श्रेणी से उनकी भर्ती की गई। मा. उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार दिव्यांगजनों के पदों को 2023 से ही रिक्त रखना था। क्यांेकि यह पद रिक्त नहीं रखे जा सके, जिन्हें 2023 से ही सृजित करने के प्रस्ताव को मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमति दी गई।

14. पूर्व में 01 जनवरी, 2026 को मंत्रिमंडल का निर्णयनुसार पेंशन हेतु अर्हकारी सेवा और विधिमान्य अधिनियम के संबंध में 16 जनवरी, 2026 को वर्कचार्ज कर्मियों को पेंशन दिये जाने एवं उनकी सेवा की गणना के संबंध में शासनादेश निर्गत किये गये थे। इसके उपरांत कई कार्मिक द्वारा मा. उच्च न्यायालय में गए थे और मा. उच्च न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश जारी किये गये। मा. उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश को मंत्रीमण्डल के संज्ञानार्थ प्रस्तुत किया गया।

15. उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली, 2025 के अंतर्गत सूचीबद्ध ‘डी‘ श्रेणी के ठेकेदारों हेतु निविदा सीमा को 01 करोड़ से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ किये जाने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल द्वारा अनुमति दी गई।

16. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के क्रम में पूर्व में सरकारी कॉलेज हेतु मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना शुरू की गई थी। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा वर्तमान में 21 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों है, जहां नियमित प्राचार्य है, ऐसे महाविद्यालयों में भी मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना को लागू करने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल द्वारा अनुमति दी गई।

17. वन विभाग द्वारा वन क्षेत्रों की सीमा पर प्रस्तावित मौन पालन की नीति को मंत्रीमण्डल द्वारा दी स्वीकृति।

प्रदेश में लोगों की आर्थिकी में वृद्धि करने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने एवं मानव और हाथी संघर्ष को कम करने तथा वन क्षेत्रों की सीमा में मौनपालन की सम्भावना को देखते हुए उत्तराखंड वन सीमांत मौनपालन मधुमक्खी आधारित आजीविका एवं मानव हाथी संघर्ष न्यूनीकरण नीति को मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमति दी गई। राज्य का 70 प्रतिशत भूभाग वन अच्छादित है, जिससे वन क्षेत्रों की सीमा में मौनपालन की सम्भावना अत्याधिक है।

इन आठ अहम प्रस्तावों पर धामी कैबिनेट की लगी मोहर…

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हो गई है। बैठक में कुल 8 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सरकार की मुहर लगी है।

कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड को शिक्षा-ऊर्जा और सामरिक रूप से मजबूत करने की पहल के तहत निजी विश्वविद्यालय, ग्रीन हाइड्रोजन नीति और हवाई पट्टियों पर भी निर्णय लिया गया है।

कैबिनेट के महत्वपूर्ण निर्णय-

1- चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड के ऐसे स्वास्थ्य कार्यकर्ता / स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, जिन्होंने अपने मूल संवर्ग में न्यूनतम 05 वर्ष की सन्तोषजनक सेवा पूर्ण कर ली हो, को सम्पूर्ण सेवाकाल में एक बार म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग के आधार पर जनपद परिवर्तन करने की अनुमति प्रदान की जाएगी। जिसपर कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है।

2 – उत्तराखण्ड राज्य में आपसी समझौते के आधार पर भू-स्वामियों से लघु/मध्यम/ वृहद् परियोजनाओं हेतु भूमि की प्राप्ति किये जाने हेतु प्रक्रिया का निर्धारण” के सम्बन्ध में कैबिनेट ने लिया निर्णय।

भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013″ की सुसंगत धाराओं की प्रक्रियान्तर्गत भूमि अर्जन हेतु लगने वाले अत्याधिक समय एवं सीधे भूमि कय करने की व्यवस्था को प्रोत्साहित किये के उद्देश्य से राज्य परियोजनाओं के लिए भू-स्वामियों से लघु/मध्यम/ वृहद् परियोजनाओं हेतु भूमि की प्राप्ति किये जाने हेतु प्रक्रिया प्रस्तावित की है। इस प्रक्रिया के अन्तर्गत आपसी समझौते के आधार पर भू-स्वामियों से भूमि प्राप्त किये जाने की दशा में मुकदमेबाजी जैसे मामलों में कमी आयेगी तथा लोक जनहित की परियोजनाओं की लागत भी कम होगी।

3- जनपद उधमसिंहनगर स्थित प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक आस्थान विकसित किये जाने हेतु सिडकुल (औद्योगिक विकास विभाग) को हस्तान्तरित किये जाने के सम्बन्ध में निर्गत शासनादेश संख्याः-670/ दिनांकः 25 मार्च, 2025 में संशोधन करने के सम्बन्ध में कैबिनेट ने लिया निर्णय।

जनपद उधमसिंहनगर स्थित प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक आस्थान विकसित किये जाने हेतु सिडकुल (औद्योगिक विकास विभाग) को हस्तान्तरित की गयी है, शासनादेश की शर्त संख्या-च में “प्रश्नगत भूमि को किसी व्यक्ति एवं संस्थान या संगठन को बेचने/ पट्टे पर देने अथवा किसी अन्य प्रकार से हस्तान्तरित करने का अधिकार प‌ट्टेदार को नहीं होगा। भूमि का उपयोग आवंटन के दिनांक से 03 वर्ष की अवधि में पूर्ण कर लेना अनिवार्य होगा अन्यथा आवंटन स्वतः निरस्त समझा जायेगा।

परन्तु औद्योगिक विकास विभाग के माध्यम से राजस्व विभाग की सहमति से पट्टे पर आवंटित भूमि को समान प्रयोजन हेतु उप पट्टा (Sub-lease) करने का अधिकार पट्टेदार को होगा। पर कैबिनेट ने अपनी मंजूरी प्रदान की है।

4 – जनजाति कल्याण विभाग की योजनाओं का संचालन किये जाने के उद्देश्य से अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जनपद क्रमशः देहरादून, चमोली, ऊधमसिंहनगर एवं पिथौरागढ़ में विभागीय योजनाओं के संचालन / प्रभावी क्रियान्वयन हेतु पदों की आवश्यकता के दृष्टिगत विभागीय ढांचें को पुर्नगठित करते हुए उक्त जनपदों में 4 जिला जनजाति कल्याण अधिकारियों के पद शासनादेश सख्या-120, दिनांक 28.02.2025 के माध्यम से सृजित किये गये है। ढांचे में स्वीकृत पदों का प्राविधान सेवा नियमावली में किये जाने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली, 2025 प्रख्यापित किये जाने के संबंध में कैबिनेट ने लिया निर्णय।

5 – उत्तराखंड राज्य में गैर कृषिकारी (कृषि एवं कृषि संबंधित कार्यों तथा राजकीय पेयजल व्यवस्था को छोड़कर) उपयोग हेतु भू-जल के निकास पर जल मूल्य/प्रभार की दरें (जो तत्काल से लागू होगी) लागू किये जाने के सम्बन्ध में कैबिनेट ने लिया निर्णय।

राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने, भू- जल विकास एवं प्रबन्धन को विनियमित किये जाने तथा भू-जल के अनियन्त्रित दोहन को सीमित करने के उद्देश्य से औद्योगिक इकाईयों एवं अन्य व्यवसायिक उपयोग यथा रेजीडेंशियल अपार्टमेंट / ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी, होटल, वॉटर एमयूजमेंट पार्क, वाहन धुलाई सैन्टर, स्वीमिंग पूल इत्यादि हेतु सुरक्षित क्षेत्र, अर्ध गम्भीर क्षेत्र, गम्भीर क्षेत्र एवं अतिदोहित क्षेत्र की जल मूल्य/प्रभार की दरों लागू किए जाने के सम्बन्ध में कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है। वाणिज्यक, औद्यौगिक, अवसंरचनात्मक और रेजीडेंशियल अपार्टमेन्ट्स/ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी हेतु पंजीकरण शुल्क ₹ 5000/- देय होगा।

6 – राज्य को शिक्षा हब के रूप में विकसित करने और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी क्षेत्रों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने हेतु राज्य सरकार द्वारा यह विनिश्चय किया गया है कि जनपद देहरादून में “जी.आर.डी. उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय” नाम से निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की स्वीकृति कैबिनेट ने प्रदान की है।
उक्त विश्वविद्यालय का लक्ष्य शिक्षा का अभिनवीकरण, अध्यापन और ज्ञानोपार्जन की नवीन पद्धति के लिए और व्यक्तित्व के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करना, सामाजिक व आर्थिक रूप से वंचित वर्ग को शिक्षा प्रदान करना, राज्य विषयक शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना तथा रोजगार के संसाधन उपलब्ध कराना है।

7- उत्तराखण्ड राज्य के जनपद उत्तरकाशी स्थित चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी एवं चमोली स्थित गौचर हवाई पट्टी को भारतीय वायु सेना, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार व उत्तराखण्ड सरकार के मध्य उच्च स्तरीय बैठकों में सहमति के आधार पर सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हवाई पट्टियों को संयुक्त रूप से नागरिक व सैन्य संचालन के उद्देश्य से एडवांस लैंडिंग ग्राउण्ड (ए०एल०जी०) लीज के आधार पर रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार को हस्तान्तरित किये जाने पर कैबिनेट ने प्रदान की सहमति।

8 – राज्य में हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए “उत्तराखण्ड ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026” के प्रख्यापन को कैबिनेट ने दी मंजूरी।

भारत सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन नीति, 2022 एवं राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन 2023, आगामी दशक में भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का वैश्विक केंद्र बनाने के दृष्टिकोण से अत्यंत उपयोगी होने के परिप्रेक्ष्य में उत्तराखण्ड सरकार भी ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन के दृष्टिगत प्रदेश में स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा उत्पादन स्रोतों को प्रोत्साहित करने हेतु संकल्पित है। ग्रीन हाइड्रोजन एक स्वच्छ ऊर्जा एवं औद्योगिक ईंधन होने के कारण नेट जीरों के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा।

उत्तराखण्ड राज्य में जल विद्युत जैसे प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए किया जा सकता है। इससे राज्य में विकास एवं रोजगार को बढ़ावा देने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन रहित एवं जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों के सापेक्ष राज्य के योगदान को पूर्ण करने के साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन, बाजार निर्माण और मांग एकत्रीकरण को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड सरकार द्वारा “उत्तराखण्ड हरित हाइड्रोजन नीति, 2026” को लागू किये जाने पर कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान की है।

यह तीन प्रस्ताव जिन पर धामी कैबिनेट ने लगाई मोहर…

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक समाप्त हो गई है। बैठक (dhami cabinet metting) में तीन प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य कैबिनेट की अहम बैठक में तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है।

धामी कैबिनेट की बैठक हुई समाप्त
देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित धामी कैबिनेट की अहम बैठक में तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में आगामी हरिद्वार कुंभ मेले की तैयारियों के तहत 82 पदों पर नियुक्ति की मंजूरी दी गई है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से कुंभ मेले के सुचारू संचालन में मदद मिलेगी।

तीन प्रस्तावों को मिली कैबिनेट की मंजूरी
कैबिनेट की बैठक में शिक्षा विभाग में प्रधानाचार्य पद की सेवा नियमावली में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई है। इससे पदोन्नति, योग्यता और तैनाती प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही प्रदेश में ई-स्टैंप व्यवस्था को सरल और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उसमें भी बदलाव करने को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली है। प्रदेश में अब स्टैंप की खरीद प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से और अधिक सुगम हो सकेगी।

बैठक में लिए गए ये निर्णय राज्य के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और आगामी आयोजनों की तैयारियों को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

धामी कैबिनेट में 22 बिंदुओं पर हुई विस्तार से चर्चा, यह रहे निर्णय

उत्तराखंड कैबिनेट की मीटिंग में आवास नीति को मंजूरी मिल गई है। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की सीमा को पांच लाख तक बढ़ाया गया है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में 22 बिंदुओं पर चर्चा हुई।
यह लिए गए फैसले
सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि ऊर्जा और आवास विभाग के मामले बिजली उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी देने का फैसला लिया गया।
एलआइजी और एलएमआइजी को लेकर भी हुआ फैसला। पर्वतीय इलाकों में बाखली बनाने वालों को मिलेगी सब्सिडी।
30 जून और 31 दिसंबर को रिटायर होने वाले कर्मचारियों को पूरे साल का पेंसनरी बेनिफिट नोशनल इनक्रीमेंट दिया जाएगा।
वाहन चालकों के भत्ते के रूप में मिलेंगे 3 हजार, वर्दी भत्ते के रूप में पहले 2400 था।
मानवाधिकार आयोग में विभाग अध्यक्ष के रूप में वित्तीय अधिकार दिए जाएंगे।
डॉक्टरों के इनक्रीमेंट को लेकर हुआ फैसला।
अब लिंग परिवर्तन करने वालों को नाम परिवर्तन करना होगा आसान।
खेल विश्वविद्यालय को फिर से अध्यादेश के रूप में सदन में रखा जाएगा।
गौ सदन को लेकर हुआ फैसला। शहरी इलाकों में शहरी विकास विभाग और ग्रामीण इलाकों में पंचायतें इसे बनाएंगी, प्रोत्साहन के लिए भी प्रावधान होगा।
प्रदेश ट्रांसजेंडर बोर्ड के गठन को मंजूरी
पटवारी व कानूनगो की हड़ताल अवधि को उपर्जित अवकाश के रूप में देने को मंजूरी।
सेब, माल्टा, गलगल का वित्त विभाग के अनुमोदन से अब विभाग ही इनका न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित कर सकेगा।
रेरा के वार्षिक पर प्रतिवेदन को विधानसभा में पटल पर रखने की मंजूरी।
मुख्यमंत्री शैक्षिक भ्रमण योजना के तहत अब उच्चशिक्षा के छात्रों के साथ ही शिक्षकों को भी भारत दर्शन कराया जाएगा। प्रतिष्ठित संस्थान भी घुमाया जाएगा।
30 जून और 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों नोशनल वेतनवृद्धि
कैबिनेट ने अहम निर्णय के तहत 30 जून और 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों के पेंशन की गणना के लिए उन्हें एक नोशनल वेतनवृद्धि दी जाएगी। इससे उन्हें पद के अनुरूप पूरी पेंशन मिल सकेगी। राज्य के विभिन्न कर्मचारी संगठन इसकी लंबे समय से मांग कर रहे थे।

राज्य में राजकीय कार्मिकों के लिए वार्षिक वेतन वृद्धि की तिथि एक जनवरी और और जुलाई निर्धारित की गई है। इस तिथि से उन्हें बढ़ा हुआ वेतन दिया जाता है। वहीं राज्य में कई कर्मचारी ऐसे हैं जो अधिवर्षता आयु पूरा कर प्रतिवर्ष 30 जून और 31 जून को सेवानिवृत्त होते हैं।
इनमें कई सरकार सेवक ऐसे हैं जो एक ही वेतन स्तर पर इस तिथि में सेवानिवृत्त हो जाते हैं। उन्होंने आगामी वेतनवृद्धि इसलिए नहीं मिलती क्योंकि सरकारी सेवकों को वार्षिक वेतनवृद्धि एक वर्ष की संतोषजनक सेवा के बाद मिलती है।

इन कर्मचारियों के हितों को देखते हुए राज्य सरकार ने 30 जून और 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को पेंशन गणना के लिए नोशनल वेतन वृद्धि देेने का निर्णय लिया है। यद्यपि यह स्पष्ट किया गया है कि सेवानिवृत्ति के उपरांत मिलने वाले अन्य लाभों के लिए नोशनल वेतनवृद्धि की गणना नहीं की जाएगी।