उत्तराखंड में रेल की रफ्तार के साथ विकास की उड़ान, फ्रीज जोन समीक्षा से पहाड़ों में खुल सकती हैं नई संभावनाएं

उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना केवल परिवहन व्यवस्था को बदलने वाली योजना नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों के आर्थिक और सामाजिक भविष्य को भी नई दिशा देने वाली परियोजना मानी जा रही है। अब जब इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का अधिकांश कार्य अंतिम चरणों में पहुंच चुका है, तो राज्य सरकार उन प्रतिबंधों की समीक्षा की ओर बढ़ रही है, जो निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा कारणों से लगाए गए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास विभाग ने रेलवे फ्रिज जोन में लागू 400 मीटर प्रतिबंध की समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस दिशा में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक और संबंधित निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है तथा वहां विकास गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से अनुमति दी जा सकती है। यह पहल केवल प्रशासनिक निर्णय भर नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों की उम्मीदों से भी जुड़ी है, जो पिछले कई वर्षों से पर्यटन, आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों पर लगे प्रतिबंधों के कारण प्रभावित हो रहे हैं।

विकास की राह में बना था सुरक्षा कवच
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना देश की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय रेल परियोजनाओं में शामिल है। परियोजना के निर्माण के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तराखंड सरकार ने 9 जनवरी 2024 को रेलवे कॉरिडोर से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को फ्रीज जोन घोषित किया था। योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, सिराला, तिलवाड़ मल्ला, मलेथा, श्रीनगर, धारीदेवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर जैसे क्षेत्रों में रेलवे परियोजना की परिसीमा से 400 मीटर तक के दायरे में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए गए थे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि अनियंत्रित निर्माण कार्य रेलवे परियोजना की सुरक्षा, सुरंगों और अन्य तकनीकी ढांचों पर प्रतिकूल प्रभाव न डालें। इन प्रतिबंधों ने परियोजना को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन समय के साथ स्थानीय स्तर पर इसके प्रभाव भी सामने आने लगे। कई स्थानों पर होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट, आवासीय भवन और व्यावसायिक परियोजनाएं ठहराव का शिकार हो गईं।

पर्यटन और निवेश को मिल सकती है नई संजीवनी
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन पर आधारित है। विशेष रूप से गढ़वाल मंडल के वे क्षेत्र, जहां से रेल परियोजना गुजर रही है, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे में फ्रीज जोन प्रतिबंधों की समीक्षा को स्थानीय विकास के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। सरकार के पास विभिन्न जिलों से लगातार सुझाव पहुंच रहे थे कि रेलवे ट्रैक का अधिकांश कार्य पूरा होने के बाद वर्तमान व्यवस्था अब विकास गतिविधियों में बाधा बन रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए आवास विभाग ने जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन शुरू किया है। यदि तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रतिबंधों में आंशिक शिथिलता दी जाती है, तो रेलवे कॉरिडोर के आसपास होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, आवासीय कॉलोनियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विकास का रास्ता खुल सकता है। इससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रेल संपर्क शुरू होने के बाद इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ऐसे में पर्यटन आधारित बुनियादी ढांचे का विकास समय की आवश्यकता भी है। फ्रीज जोन समीक्षा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

जनहित और सुरक्षा के बीच संतुलन की कोशिश
राज्य सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी प्रकार की राहत रेलवे सुरक्षा से समझौता करके नहीं दी जाएगी। यही कारण है कि समीक्षा प्रक्रिया को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। डॉ. आर. राजेश कुमार के निर्देश पर जिलों से ऐसे क्षेत्रों की पहचान कराई जा रही है, जहां रेलवे निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और जहां विकास गतिविधियों को नियंत्रित एवं सुरक्षित तरीके से अनुमति दी जा सकती है। इसके साथ ही रेलवे से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं, भूगर्भीय परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों का भी परीक्षण किया जाएगा। सरकार की मंशा केवल प्रतिबंध हटाने की नहीं, बल्कि ऐसी संतुलित व्यवस्था विकसित करने की है, जिससे रेलवे परियोजना के दीर्घकालिक हित सुरक्षित रहें और स्थानीय नागरिकों को भी विकास का लाभ मिल सके।

पहाड़ों की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है नया आधार
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को उत्तराखंड की विकास यात्रा का गेम चेंजर माना जाता है। रेल संपर्क से जहां चारधाम यात्रा और पर्यटन को नई गति मिलेगी, वहीं इसके आसपास विकसित होने वाली आर्थिक गतिविधियां भी प्रदेश की तस्वीर बदल सकती हैं। फ्रीज जोन समीक्षा की यह पहल उसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें धामी सरकार विकास, निवेश और रोजगार को नई गति देने के साथ-साथ स्थानीय जरूरतों को भी प्राथमिकता दे रही है। यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो लंबे समय से ठहरी विकास योजनाओं को नई रफ्तार मिलेगी और रेलवे कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों में निवेश का अनुकूल माहौल तैयार होगा।

बयान
*डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव आवास *
“मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रेलवे फ्रीज जोन में लागू प्रतिबंधों की समीक्षा की जा रही है। जहां रेलवे परियोजना का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, वहां की स्थिति का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर आकलन कराया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि रेलवे सुरक्षा और तकनीकी मानकों से किसी प्रकार का समझौता किए बिना स्थानीय नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों को विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। जनहित और परियोजना हित दोनों को समान प्राथमिकता देते हुए व्यावहारिक समाधान तैयार किए जाएंगे।”

पीएम आवास योजना के कार्यों की धीमी चाल पर सचिव आवास सख्त, दिए ये निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत संचालित आवासीय परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए मंगलवार को सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न जिलों में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के एएचपी (अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप) घटक के अंतर्गत निर्माण कार्य कर रही कार्यदायी संस्थाओं और विकासकों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान कई परियोजनाओं में निर्माण कार्यों की धीमी गति सामने आने पर सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना केंद्र सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है और इसके कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में संयुक्त मुख्य प्रशासक दिनेश प्रताप सिंह, उप सचिव आवास धीरेन्द्र रावत, अधिशासी अभियंता विनोद कुमार चौहान, अधिशासी अभियंता सुनील कुमार, सहायक अभियंता आकांक्षा चौहान, आवास विशेषज्ञ रोहित रंजन सहित विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े विकासकों एवं कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

धीमी प्रगति पर जताई कड़ी नाराजगी
बैठक के दौरान सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने परियोजनावार प्रगति की समीक्षा करते हुए पाया कि कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य निर्धारित गति से आगे नहीं बढ़ रहे हैं। इस पर उन्होंने संबंधित विकासकों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया कि लाभार्थियों को समय पर आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाएं अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं, ऐसे में शेष कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा कर लाभार्थियों को जल्द से जल्द मकानों का कब्जा उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने सभी विकासकों को परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

15 अगस्त से पहले कार्य पूरे करने की समयसीमा
समीक्षा बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद सभी विकासकों और कार्यदायी संस्थाओं को निर्देशित किया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत संचालित सभी परियोजनाओं के निर्माण कार्य 15 अगस्त 2026 से पूर्व पूर्ण किए जाएं। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समयसीमा तक कार्य पूरे नहीं किए जाते हैं तो संबंधित विकासकों के विरुद्ध अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि समय पर कार्य पूरा करने की जिम्मेदारी पूरी तरह संबंधित कार्यदायी संस्था और विकासक की होगी।

धौलास आवासीय परियोजना पर विशेष जोर
बैठक में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) अधिकारियों को धौलास आवासीय परियोजना के अंतर्गत आवंटन संबंधी सभी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन सभी परियोजनाओं की समीक्षा की गई जो पूर्णता के अंतिम चरण में हैं। अधिकारियों को लाभार्थियों को मकानों का हस्तांतरण (की-हैंडओवर) समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक तैयारियां अभी से पूरी करने को कहा गया।

सरकार की प्राथमिकता में आवासीय परियोजनाएं
राज्य सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत पात्र परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में विभाग लगातार परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहा है ताकि निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कर लाभार्थियों को जल्द राहत दी जा सके। मंगलवार को हुई समीक्षा बैठक को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जहां सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास कार्यों में देरी अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

गरीबों के आवास का सपना समय पर पूरा हो रू डॉ. आर. राजेश कुमार
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना केवल एक निर्माण परियोजना नहीं बल्कि हजारों परिवारों के अपने घर के सपने से जुड़ी योजना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी को समय पर आवास उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं में कार्यों की गति धीमी है, वहां तत्काल सुधार लाया जाए। सभी विकासकों को तय समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने होंगे, अन्यथा अनुबंध के अनुरूप कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को भी नियमित निगरानी और स्थलीय निरीक्षण बढ़ाने के निर्देश दिए ताकि किसी प्रकार की देरी न हो और लाभार्थियों को जल्द से जल्द उनके आवास उपलब्ध कराए जा सकें।

पीएम आवास शहरी के तहत रूद्रपुर में साकार हो रहा 1872 परिवारों का आशियाने का सपना, जल्द सौंपी जाएंगी चाबियां

गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने के संकल्प के साथ उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार मिलकर एक ऐसी आवासीय परियोजना को अंतिम रूप दे रही हैं, जो हजारों लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाली है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रुद्रपुर के ग्राम बागवाला में 1872 ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की सतत निगरानी में विकसित यह परियोजना राज्य में गरीब परिवारों के लिए सुरक्षित और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण (उधमसिंह नगर) द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को अपना घर उपलब्ध कराना है, जिनके पास अब तक पक्का मकान नहीं है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद हजारों लोगों का वर्षों पुराना सपना साकार होने जा रहा है।

गरीब परिवारों के लिए उम्मीद की नई बस्ती
‘अपना घर, अपना स्वाभिमान’ की भावना के साथ तैयार की गई इस परियोजना में कुल 1872 आवासों का निर्माण किया गया है। इनमें से 832 फ्लैट पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, जबकि 512 अतिरिक्त फ्लैटों में अंतिम चरण के छोटे-मोटे कार्य तेजी से चल रहे हैं। सरकार की योजना शीघ्र ही परियोजना का लोकार्पण कर लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपने की है। सबसे बड़ी बात यह है कि छह लाख रुपये लागत वाले इन आधुनिक फ्लैटों के लिए लाभार्थी को मात्र तीन लाख रुपये ही देने होंगे। शेष राशि भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार द्वारा डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की सब्सिडी के रूप में वहन की जाएगी। इससे सीमित आय वाले परिवारों को भी सम्मानजनक आवास प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

आधुनिक सुविधाओं से लैस आवासीय परिसर
करीब 6.0281 हेक्टेयर भूमि पर विकसित इस आवासीय परियोजना का निर्माण क्षेत्रफल लगभग 39,220 वर्ग मीटर है। योजना में कुल 23 बहुमंजिला आवासीय ब्लॉक बनाए गए हैं, जिनमें आधुनिक शहरी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रत्येक फ्लैट में एक बेडरूम, ड्राइंग रूम, किचन, टॉयलेट, बाथरूम और बरामदा उपलब्ध कराया गया है। लगभग 28 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले इन आवासों को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि छोटे परिवारों को पर्याप्त सुविधा और बेहतर जीवन स्तर मिल सके। परियोजना की विशेषता यह है कि सभी भवन भूकंपरोधी तकनीक से निर्मित किए गए हैं। इसके साथ ही चौड़ी सड़कों, पर्याप्त पार्किंग, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और स्वच्छ वातावरण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर विशेष जोर
बागवाला आवासीय परियोजना को केवल मकानों का समूह नहीं, बल्कि एक आधुनिक और टिकाऊ आवासीय परिसर के रूप में विकसित किया गया है। परिसर में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), सीवरेज सिस्टम और अत्याधुनिक एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) की व्यवस्था की गई है।परियोजना में हरे-भरे पार्क, बच्चों के लिए सुरक्षित खेल क्षेत्र और सौंदर्यीकरण के व्यापक कार्य भी पूरे किए जा चुके हैं। हॉर्टिकल्चर का कार्य पूर्ण होने से परिसर का वातावरण आकर्षक और पर्यावरण अनुकूल बन गया है।

बेहतर कनेक्टिविटी से बढ़ेगी सुविधा
आवासीय परिसर का स्थान भी इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल है। बागवाला स्थित यह परियोजना मुख्य बाजार और प्रमुख मार्ग से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर है। बस स्टेशन छह किलोमीटर और रेलवे स्टेशन आठ किलोमीटर दूर स्थित है। बेहतर सड़क संपर्क और शहर के प्रमुख क्षेत्रों से नजदीकी के कारण यहां रहने वाले परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी।

पारदर्शी होगी आवंटन प्रक्रिया
सरकार ने आवास आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। पात्र लाभार्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित रैंडमाइजेशन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। आवेदन के लिए आवेदक का प्रधानमंत्री आवास योजना के एमआईएस पोर्टल पर पंजीकृत होना आवश्यक है। साथ ही आवेदक को 17 जून 2015 से पूर्व का उत्तराखंड निवासी होना चाहिए तथा उसकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। मात्र पांच हजार रुपये जमा कर आवेदन प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। शेष राशि के भुगतान के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों पर खरा परिसर
परियोजना में सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। परिसर में आरसीसी बाउंड्री वॉल और मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण पूरा हो चुका है। सभी ब्लॉकों में विद्युत कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं तथा यूपीसीएल द्वारा इलेक्ट्रिकल सेफ्टी जांच भी पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा फायर डिपार्टमेंट द्वारा फायर फाइटिंग सिस्टम का सफल परीक्षण किया जा चुका है। जलापूर्ति व्यवस्था के लिए अंडरग्राउंड टैंक और ओवरहेड टैंक स्थापित किए गए हैं, जबकि एसटीपी भी परीक्षण चरण में पहुंच चुका है।

धामी सरकार की समावेशी विकास सोच का उदाहरण
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विकसित बागवाला परियोजना उत्तराखंड में समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार ऐसी योजनाओं को गति दे रही है, जिनका सीधा लाभ आम नागरिकों और विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मिल रहा है। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की निगरानी में तेजी से आगे बढ़ी यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। आने वाले दिनों में जब हजारों परिवार अपने नए घरों में प्रवेश करेंगे, तब यह केवल मकानों का हस्तांतरण नहीं होगा, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की एक नई शुरुआत होगी। बागवाला की यह आवासीय बस्ती उत्तराखंड में गरीब परिवारों के जीवन स्तर को बदलने वाली एक नई पहचान बनने जा रही है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
सचिव आवास एवं आवास आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रुद्रपुर के बागवाला में विकसित की गई यह परियोजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। परियोजना में गुणवत्ता, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरे किए गए हैं। शीघ्र ही पात्र लाभार्थियों को आवासों का आवंटन कर चाबियां सौंपी जाएंगी, जिससे हजारों परिवारों का अपने घर का सपना साकार होगा।

सचिव आवास ने किया नैनीताल में विभिन्न विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में नैनीताल जिले में झीलों के संरक्षण, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और यातायात व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में आवास एवं राज्य सम्पत्ति विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने शनिवार को विभिन्न विकास परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा की।

सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति विभाग के डॉ आर राजेश कुमार द्वारा जनपद नैनीताल में विभिन्न विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान झीलों के पुनर्विकास, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार एवं यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु संचालित एवं प्रस्तावित परियोजनाओं की प्रगति का विस्तृत अवलोकन किया गया।

भीमताल झील के सौंदर्यीकरण हेतु व्यापक कार्ययोजना

भीमताल झील के पुनर्विकास एवं सौंदर्यीकरण हेतु लगभग ₹25.67 करोड़ की डीपीआर तैयार की गई है। इस योजना के अंतर्गत झील के आसपास स्थित प्रमुख पार्कों का पुनर्विकास, दीनदयाल पार्क के समीप बोटिंग डॉक का विकास, झील किनारे 4210 मीटर लंबा कॉबल स्टोन पैदल मार्ग, उद्यानों का सौंदर्यीकरण, पार्किंग व्यवस्था में सुधार, सोलर स्ट्रीट लाइटिंग एवं स्ट्रीट फर्नीचर की स्थापना जैसे कार्य प्रस्तावित हैं। निरीक्षण के दौरान सचिव द्वारा इन सभी कार्यों को प्रस्तावित मानकों के अनुरूप शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए।

नौकुचियाताल में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार

नौकुचियाताल झील के सौंदर्यीकरण हेतु लगभग ₹20.97 करोड़ की योजना के अंतर्गत बोटिंग स्टैंड, प्रतीक्षालय एवं टिकट काउंटर, पार्किंग सुविधा, फ्लोटिंग जेट्टी, 2089 मीटर लंबा पैदल मार्ग, गज़ीबो निर्माण, व्यूपॉइंट्स, लैंडस्केपिंग एवं सोलर लाइटिंग जैसी सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है। निरीक्षण के दौरान इन कार्यों को भी निर्धारित समयसीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

कमलताल क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं का विकास
कमलताल क्षेत्र में ओपन शॉपिंग सेंटर (प्लाज़ा), 50 मीटर लंबा पैदल पुल, 100 मीटर पैदल मार्ग, पार्किंग व्यवस्था, सोलर लाइटिंग एवं लैंडस्केपिंग जैसे कार्य प्रस्तावित हैं। यह क्षेत्र भविष्य में एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण के रूप में विकसित किया जाएगा।

भवाली में मल्टीलेवल पार्किंग एवं कॉम्प्लेक्स निर्माण

भवाली में लकड़ी टाल क्षेत्र में मल्टीलेवल कार पार्किंग एवं व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस परियोजना में बेसमेंट में पार्किंग तथा भूतल एवं प्रथम तल पर लगभग 40 दुकानों का निर्माण प्रस्तावित है। कार्य की प्रगति लगभग 96 प्रतिशत पूर्ण हो चुकी है और पूर्ण होने पर यहां 124 वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा उपलब्ध होगी। अधिकारियों को शेष कार्य शीघ्र पूर्ण कर संचालन प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।

नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र में सरोवर पार्किंग निर्माण हेतु लगभग ₹42.77 करोड़ की परियोजना स्वीकृत है, जिसके अंतर्गत 605 चार पहिया एवं 202 दो पहिया वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा विकसित की जाएगी। इसके अतिरिक्त नैनीताल क्लब के समीप नगर पालिका भूमि पर ऑटोमेटेड पार्किंग हेतु ₹30.43 करोड़ की परियोजना प्रस्तावित है, जिससे 202 चार पहिया एवं 96 दो पहिया वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा उपलब्ध होगी।

लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान सचिव द्वारा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सभी निर्माण कार्यों को गुणवत्ता एवं निर्धारित समयसीमा के अनुरूप पूर्ण किया जाए।
जहां कार्य प्रारंभ नहीं हुए हैं, वहां शीघ्र कार्य प्रारंभ करने तथा आवश्यकता होने पर संबंधित कार्यदायी संस्थाओं में परिवर्तन करने के भी निर्देश दिए गए।

अशोक पार्किंग स्थल के उपयोग पर निर्देश

नैनीताल-हल्द्वानी मार्ग स्थित अशोक पार्किंग स्थल का निरीक्षण करते हुए निर्देशित किया गया कि पूर्व में स्वीकृत धनराशि का उपयोग करते हुए पार्किंग निर्माण हेतु आवश्यक कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित की जाए, ताकि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाया जा सके।

पर्यटन और यातायात सुधार की दिशा में बड़ा कदम

यह निरीक्षण जनपद नैनीताल में पर्यटन विकास, झीलों के संरक्षण एवं यातायात प्रबंधन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से न केवल स्थानीय नागरिकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि पर्यटकों के लिए भी बेहतर अनुभव सुनिश्चित होगा।

स्थल निरीक्षण के दौरान सचिव, जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, विजयनाथ शुक्ल, प्रोजेक्ट मैनेजर, उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम, संदीप सिंह रावत, प्रोजेक्ट मैनेजर, उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम, दिवाकर बडोनी, अधिशासी अभियंता, ग्रामीण निर्माण विभाग, नैनीताल, कमलेश जोशी, प्रोजेक्ट सेल ऑफिसर, जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, नैनीताल, अनिल कुमार तड़ागी, सहायक अभियंता, जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, नैनीताल, शिवम धीमान, अभिषेक कुमार तथा अवर अभियंता, अभिषेक कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

रुद्रपुर में आवास, ट्रांसपोर्ट नगर और कॉमर्शियल हब परियोजनाओं का निरीक्षण, सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने दिए त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में आवासीय एवं शहरी विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने उधमसिंहनगर जनपद के रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र में पहुंचकर विकास प्राधिकरण की विभिन्न निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने बागवाला में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लगभग 156 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 1872 आवासों का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इन आवासों का लोकार्पण शीघ्र किया जाएगा और पात्र लाभार्थियों को आवासों की चाबियां सौंपी जाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन लाभार्थियों द्वारा अभी तक निर्धारित अंशदान जमा नहीं किया गया है, उनसे शीघ्र धनराशि जमा कराकर आवंटन प्रक्रिया को गति दी जाए।

उपाध्यक्ष विकास प्राधिकरण ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रति आवास 3 लाख रुपये की सहायता सरकार द्वारा प्रदान की जाती है, जबकि 3 लाख रुपये लाभार्थी को जमा करने होते हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 185 लाभार्थियों द्वारा पूरी धनराशि जमा की जा चुकी है, जबकि 222 लाभार्थियों को पत्र एवं दूरभाष के माध्यम से भुगतान हेतु सूचित किया गया है।

सचिव जिला विकास प्राधिकरण ने जानकारी दी कि आवास परिसर में साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण एवं पौधारोपण का कार्य तेजी से चल रहा है। परिसर में निर्मित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की टेस्टिंग भी सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। निरीक्षण के दौरान सचिव ने अधिकारियों को प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के लिए भी उपयुक्त भूमि चिन्हित करने के निर्देश दिए।

इसके बाद सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने त्रिशूल चौक के समीप लोक निर्माण विभाग की 6.5 एकड़ भूमि का निरीक्षण किया, जहां प्रस्तावित ‘कुमाऊं कॉमर्शियल कुटीर’ बहुमंजिला परियोजना विकसित की जानी है। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत आधुनिक आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों का निर्माण किया जाएगा तथा इसकी प्रारंभिक डीपीआर शासन को भेजी जा चुकी है।

सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ आर राजेश कुमार ने रामपुर रोड स्थित प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर परियोजना का भी स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार 48 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की 72 करोड़ रुपये की प्रारंभिक डीपीआर शासन को प्रेषित की गई है। सचिव ने कहा कि ट्रांसपोर्ट नगर बनने से परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे क्षेत्रीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

इसके उपरांत उन्होंने त्रिशूल चौक से मेडिकल कॉलेज तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण कार्य तथा कलेक्ट्रेट परिसर में निर्माणाधीन विकास प्राधिकरण कार्यालय का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष जिला विकास प्राधिकरण जय किशन, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी, सचिव जिला विकास प्राधिकरण पंकज उपाध्याय, नगर आयुक्त शिप्रा जोशी, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग गजेंद्र सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार आम नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। बागवाला में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित 1872 आवास लगभग तैयार हैं और हमारी प्राथमिकता है कि पात्र लाभार्थियों को जल्द से जल्द इनका लाभ मिले। सभी परियोजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0, ट्रांसपोर्ट नगर और कुमाऊं कॉमर्शियल कुटीर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के समग्र शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री धामी के निर्देशों पर आवास विभाग ने तेज की कार्रवाई, पार्किंग परियोजनाओं को मिली सैद्धान्तिक सहमति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में यातायात और पार्किंग की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जनपद चमोली के गैरसैंण और जनपद बागेश्वर के काण्डा में मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण परियोजनाओं को लेकर आवास विभाग ने विभागीय व्यय समिति की बैठकों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ आ राजेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठकों में दोनों परियोजनाओं के विस्तृत आगणनों पर चर्चा करते हुए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए अग्रेतर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। बैठकों में आवास विभाग, वित्त विभाग, नियोजन विभाग, संबंधित जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों तथा कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विभाग का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से पर्वतीय नगरों में बढ़ते वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने के साथ स्थानीय व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

गैरसैंण में 91 वाहनों की आधुनिक पार्किंग का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में गैरसैंण में मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण हेतु पेयजल निगम द्वारा ₹1504.35 लाख लागत का विस्तृत आगणन प्रस्तुत किया गया। प्रस्ताव के अनुसार भू-तल पर 36 कार पार्किंग, 7 दुकानें और 2 कार लिफ्ट का प्रावधान किया गया है, जबकि टेरेस पर 55 कार पार्किंग और 1 अतिरिक्त कार लिफ्ट प्रस्तावित है। इस प्रकार कुल 91 वाहनों की पार्किंग सुविधा विकसित की जाएगी। प्रस्ताव में बीआरसी/सीआरसी फैकल्टी हॉल और तीन क्लास रूम का भी प्रावधान रखा गया था। इस पर सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर राजेश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आवास विभाग की जिम्मेदारी केवल पार्किंग निर्माण तक सीमित है और अन्य अतिरिक्त निर्माण प्रस्तावों को हटाकर मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप संशोधित प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजना को व्यवहारिक और जनहितकारी स्वरूप में तेजी से आगे बढ़ाया जाए।

काण्डा में 53 वाहनों की पार्किंग सुविधा
बागेश्वर जनपद के काण्डा में प्रस्तावित मल्टीलेवल पार्किंग परियोजना के संशोधित आगणन पर भी विभागीय व्यय समिति ने विस्तार से विचार किया। ₹540.85 लाख लागत की इस परियोजना में भूतल पर 7 दुकानें और 26 कार पार्किंग तथा प्रथम तल पर 27 कार पार्किंग प्रस्तावित की गई हैं। इसके अलावा शौचालय सुविधा का भी प्रावधान रखा गया है। इस प्रकार कुल 53 वाहनों के लिए पार्किंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। बैठक में सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने निर्देश दिए कि पार्किंग का संचालन जिला विकास प्राधिकरण, बागेश्वर द्वारा किया जाए और दुकानों का आवंटन जिला स्तरीय समिति के माध्यम से पूर्ण पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित किया जाए। विभागीय व्यय समिति ने परियोजना की अनुमोदित लागत पर सैद्धान्तिक सहमति प्रदान करते हुए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

पर्वतीय शहरों को मिलेगी राहत – डॉ आ राजेश कुमार
सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ आ राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप पर्वतीय क्षेत्रों में आधुनिक आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मल्टीलेवल पार्किंग परियोजनाएं केवल वाहन खड़े करने की व्यवस्था नहीं हैं, बल्कि यह स्थानीय बाजारों को व्यवस्थित करने, यातायात दबाव कम करने और पर्यटन गतिविधियों को गति देने का माध्यम भी बनेंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।

एक लाख करोड़ रूपए की राष्ट्रीय योजना, उत्तराखंड को विशेष लाभः राजेश कुमार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों के समग्र विकास, आधुनिक आधारभूत ढांचे के निर्माण और नगर निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अर्बन चौलेंज फंड राज्य के लिए बड़ी सौगात साबित होने जा रही है। राज्य सचिवालय में आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें अपर सचिव आवास विनोद गिरी सहित आवास व शहरी विकास के उच्चाधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। इस महत्वपूर्ण बैठक में शहरी विकास निदेशालय, उत्तराखंड शासन द्वारा योजना को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके तहत राज्य के नगर निकाय प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर परियोजनाएं तैयार कर केंद्र सरकार को भेजेंगे।

भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित इस योजना के तहत देशभर में ₹1 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह योजना वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर तीन वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। योजना का उद्देश्य शहरों में बड़े निवेश को आकर्षित कर उन्हें विकास के नए केंद्रों के रूप में स्थापित करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उत्तराखंड के नगर निकाय इस योजना का अधिकतम लाभ उठाएं और समयबद्ध तरीके से उच्च गुणवत्ता वाले प्रस्ताव तैयार करें, ताकि राज्य के शहरों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा सके।

पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड को मिलेगा अतिरिक्त फायदा

उत्तराखंड को इस योजना में विशेष लाभ इसलिए मिलेगा क्योंकि पर्वतीय राज्य होने के कारण यहां के सभी 108 नगर निकाय क्रेडिट रीपेमेंट गारंटी योजना के दायरे में आएंगे। इससे छोटे नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतें भी बैंक ऋण लेकर बड़े विकास कार्य शुरू कर सकेंगी। जिन निकायों की वित्तीय क्षमता सीमित है, वे भी अब विकास योजनाओं को गति दे सकेंगे।

तीन क्षेत्रों में भेजे जाएंगे विकास प्रस्ताव

योजना के अंतर्गत नगर निकायों से तीन प्रमुख क्षेत्रों में परियोजनाएं मांगी गई हैं। पहला, जल एवं स्वच्छता, जिसमें पेयजल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क, सीवेज ट्रीटमेंट, वर्षा जल निकासी और कूड़ा निस्तारण शामिल हैं। दूसरा, रचनात्मक पुनर्विकास, जिसके तहत पुराने शहर क्षेत्रों, बाजारों, विरासत स्थलों और सार्वजनिक स्थानों का कायाकल्प किया जाएगा। तीसरा, सिटीज़ ऐज़ ग्रोथ हब्स, जिसमें शहरों को पर्यटन, शिक्षा, उद्योग और व्यापार के केंद्र के रूप में विकसित करने वाली योजनाओं को प्राथमिकता मिलेगी।

राज्य के कई शहरों को मिलेगा लाभ

राज्य सरकार द्वारा संभावित परियोजनाओं के उदाहरण भी तय किए गए हैं। ऋषिकेश, देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, काशीपुर, रुड़की, श्रीनगर, रामनगर और रुद्रपुर जैसे शहरों में औद्योगिक, तीर्थाटन पर्यटन और शैक्षिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रस्ताव तैयार किए जा सकते हैं।

50 प्रतिशत मार्केट फाइनेंस अनिवार्य

योजना की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि कुल परियोजना लागत का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा मार्केट फाइनेंस यानी बैंक ऋण, बॉन्ड या पीपीपी मॉडल से जुटाना होगा। केंद्र सरकार 25 प्रतिशत और शेष 25 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार अथवा नगर निकाय वहन करेंगे। इससे नगर निकायों में वित्तीय अनुशासन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
प्रदर्शन आधारित होगी फंडिंग
फंड जारी करने की प्रक्रिया भी चरणबद्ध और प्रदर्शन आधारित रखी गई है। स्वीकृति के बाद केंद्रीय सहायता तीन किस्तों में मिलेगीकृपहली किस्त 30 प्रतिशत, दूसरी 50 प्रतिशत और अंतिम 20 प्रतिशत। आगे की किस्तों के लिए परियोजना की भौतिक प्रगति, जियो टैगिंग और स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक होगा।

सुधारों की शर्तें भी लागू योजना के साथ कई

सुधारात्मक शर्तें भी जोड़ी गई हैं। नगर निकायों को संपत्ति कर सुधार, ऑडिटेड वित्तीय लेखे, डिजिटल नागरिक सेवाएं, जीआईएस आधारित सर्वे, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, जलापूर्ति सुधार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जलवायु अनुकूल शहरी नियोजन जैसे कदम उठाने होंगे।

मुख्यमंत्री ने दिए तेजी से कार्यवाही के निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी नगर निकाय शीघ्रता से अपने क्षेत्रों की प्राथमिक परियोजनाएं चिन्हित करें, कॉसेप्ट नोट तैयार करें और डीपीआर बनाकर समय पर केंद्र सरकार को भेजें। उन्होंने कहा कि राज्य के शहरों को स्वच्छ, सुगम, आधुनिक और निवेश अनुकूल बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

उत्तराखंड के शहरी भविष्य का रोडमैप
अर्बन चौलेंज फंड उत्तराखंड के शहरों के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के शहरी विकास का रोडमैप साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह योजना राज्य के शहरों की तस्वीर बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया परिवर्तनकारी योजना

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि अर्बन चौलेंज फंड उत्तराखंड के शहरी विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी योजना साबित होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सभी नगर निकायों को इस योजना का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय स्वरूप को देखते हुए यहां के नगर निकायों को विशेष लाभ मिलेगा, जिससे छोटे शहरों और नगर पंचायतों में भी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार संभव हो सकेगा। डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार नगर निकायों से गुणवत्तापूर्ण और व्यवहारिक परियोजनाएं तैयार कराने पर विशेष जोर दे रही है। जलापूर्ति, सीवरेज, स्वच्छता, ट्रैफिक प्रबंधन, पर्यटन सुविधाएं, पुराने शहर क्षेत्रों का पुनर्विकास और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह योजना शहरों को आत्मनिर्भर, आधुनिक, स्वच्छ और निवेश अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सभी नगर निकायों को समयबद्ध रूप से प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

कुंभ 2027 से पहले अतिथि गृहों की बदलेगी सूरत, आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा मानकों से होंगे सुसज्जित

राज्य में आने वाले विशिष्ट अतिथियों और अधिकारियों को उच्च स्तरीय आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने शनिवार को देहरादून से लेकर हरिद्वार तक विभिन्न राजकीय गेस्ट हाउसों का व्यापक निरीक्षण किया। यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यवस्थाओं को जमीनी स्तर पर परखने और उन्हें आधुनिक मानकों के अनुरूप ढालने की ठोस पहल के रूप में सामने आया। सचिव ने गेस्ट हाउसों की संरचना, अनुरक्षण, स्वच्छता, सुरक्षा, फर्नीचर, विद्युत एवं अग्निशमन व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा की।उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य की छवि इन अतिथि गृहों से भी जुड़ी होती है, इसलिए यहां ठहरने वाले अतिथियों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिलना अनिवार्य है। रिनोवेशन कार्यों की गुणवत्ता, किचन की साफ-सफाई, फायर सेफ्टी सिस्टम की मजबूती और समग्र सौंदर्यीकरण को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए। साथ ही आगामी कुंभ मेला 2027 को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाओं को समयबद्ध और मानक अनुरूप पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। सचिव ने कहा कि अतिथि गृह केवल भवन नहीं, बल्कि राज्य की आतिथ्य परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

*बीजापुर गेस्ट हाउस में तीन चरणों में होगा उन्नयन*
देहरादून गढ़ी कैंट स्थित राज्य अतिथि गृह बीजापुर का संयुक्त निरीक्षण आवास एवं राज्य संपत्ति सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। निरीक्षण में राज्य संपत्ति अधिकारी, मुख्य व्यवस्थाधिकारी तथा आवास एवं सिविल/विद्युत अनुरक्षण इकाई के अधिकारी उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान सचिव ने भवन की सिविल एवं विद्युत व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। प्रथम चरण में संपूर्ण रिपेयरिंग, वीवीआईपी कक्षों के उन्नयन, पुराने एवं क्षतिग्रस्त फर्नीचर के प्रतिस्थापन तथा फायर सेफ्टी सिस्टम को अत्याधुनिक बनाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। द्वितीय चरण में सभी कक्षों एवं बालकनियों में प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने और भवन के समग्र सौंदर्यीकरण पर जोर दिया गया। तीसरे चरण में ड्रॉइंग रूम, गार्ड कक्ष तथा खुले प्रांगण की मरम्मत के साथ समुचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए। सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण हों और गुणवत्ता सर्वोपरि रखी जाए। उन्होंने कहा कि राज्य अतिथि गृह बीजापुर को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर इसे एक आदर्श अतिथि गृह के रूप में विकसित किया जाएगा।

*ऑफिसर्स ट्रांजिट हॉस्टल में 2.95 करोड़ से अधिक के कार्यों को मिली रफ्तार*
बीजापुर गेस्ट हाउस के निरीक्षण के बाद सचिव रेसकोर्स स्थित ऑफिसर्स ट्रांजिट हॉस्टल पहुंचे, जहां संयुक्त निरीक्षण एवं समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर सचिव/राज्य संपत्ति अधिकारी, वरिष्ठ व्यवस्था अधिकारी, परियोजना प्रबंधक, अधिशासी अभियंता उत्तराखंड पेयजल निगम तथा विद्युत यांत्रिक खंड लोक निर्माण विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा में बताया गया कि हॉस्टल में 2 करोड़ 33 लाख 78 हजार रुपये की लागत से भवन की रंगाई-पुताई, शौचालयों के नवीनीकरण, क्षतिग्रस्त टाइल्स के प्रतिस्थापन एवं जलापूर्ति मरम्मत जैसे अनुरक्षण कार्य तेजी से चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त 2 करोड़ 95 लाख 12 हजार रुपये की लागत से फर्नीचर, फर्निशिंग, विद्युत एवं सिविल कार्यों को गति दी गई है। बैठक में पुरानी लिफ्ट को हटाकर नई आधुनिक लिफ्ट स्थापित करने, छत पर टिन शेड निर्माण, प्रथम से तृतीय तल तक गैलरी में पीवीसी/मेटल फॉल्स सीलिंग, नई इलेक्ट्रिकल वायरिंग और सीलिंग लाइट लगाने का निर्णय लिया गया। सुविधाओं के विस्तार के तहत पार्किंग स्थल के समीप 9 नए डबल/सूट कक्षों के निर्माण की योजना भी स्वीकृत की गई है। सभी कमरों में टीवी हेतु डेटा केबलिंग और नया इंटरकॉम सिस्टम स्थापित किया जाएगा। सचिव ने स्पष्ट किया कि हॉस्टल को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर अधिकारियों और अतिथियों को उच्चस्तरीय आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है।

हरिद्वार स्थित अटल बिहारी वाजपेई राजकीय अतिथि गृह, मायापुर का निरीक्षण करते हुए सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने आगामी कुंभ मेला 2027 की तैयारियों के दृष्टिगत व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान भवन की छत से पानी टपकने और कुछ कमरों में सीलन की समस्या सामने आई, जिस पर उन्होंने लोक निर्माण विभाग को तत्काल मरम्मत कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। विद्युत व्यवस्था में आवश्यक सुधार, वायरिंग की जांच और सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए। सचिव ने पुराने एवं अनुपयोगी फर्नीचर को नियमानुसार नीलामी प्रक्रिया से हटाने को कहा, ताकि परिसर को सुव्यवस्थित और आधुनिक स्वरूप दिया जा सके। उन्होंने रूम, डोरमेट्री, पार्किंग, डाइनिंग हॉल, किचन, मीटिंग हॉल एवं वीआईपी कक्षों का निरीक्षण कर साफ-सफाई एवं व्यवस्थाओं पर विशेष जोर दिया। सचिव ने कहा कि कुंभ मेला 2027 अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन है, ऐसे में हरिद्वार के अतिथि गृहों को उच्च मानकों के अनुरूप तैयार करना अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान अपर सचिव राज्य संपत्ति लक्ष्मण सिंह, अधिशासी अभियंता दीपक कुमार, अधिशासी अभियंता पंकज नयाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।