मुख्यमंत्री धामी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री से की शिष्टाचार भेंट, कोयला आधारित संयंत्रों से 400 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत आवंटन की मांग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बागेश्वर में बने ताम्र शिल्प पर आधारित उत्पाद तथा उत्तराखण्ड की महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार की गई सामग्री भेंट की। प्रधानमंत्री ने राज्य की महिलाओं के परिश्रम की सराहना की तथा उनका आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का उत्तराखण्ड को वेडिंग डेस्टिनेशन बताये जाने के प्रति आभार व्यक्त करते हुये कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद उत्तराखण्ड में शादियों के लिये देश विदेश से बडी संख्या में लोगों द्वारा बुकिंग की जा रही है, इससे राज्य के लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उत्तराखण्ड में वेडिंग डेस्टिनेशन विकसित किये जाने के लिए 150 करोड़ रूपये के निवेश भी प्राप्त हुये हैं। भेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से कर्णप्रयाग-ग्वालदम मार्ग में सीमा सड़क संगठन द्वारा किये जा रहे कार्यों में तेजी लाने, पर्यटन और सैन्य आवगमन तथा आम जनमानस के लिए अत्यन्त उपयोगी 189 कि0 काठगोदाम-भीमताल, ध्यानाचुली-मोरनोला-खेतीखान- लोहाघाट-पंचेश्चर मोटर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में अधिसूचित करने एवं मानसखण्ड मन्दिर माला परियोजना के अन्तर्गत मानसखण्ड मन्दिरों को जोड़ने वाले 20 मार्गों हेतु 01 हजार करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों एवं पर्यटकों को मानसखण्ड मन्दिर माला के दर्शन करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए गढ़वाल तथा कुमायूं को जोड़ने वाले मार्गों का उच्चीकरण किया जाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि मानसखण्ड मन्दिर माला मिशन के अन्तर्गत चिन्हित 48 पौराणिक मन्दिरों में से 16 मन्दिरों में अवस्थापना विकास के कार्य शुरू हो चुके हैं। जागेश्वर धाम हेतु 150 करोड़ रूपये का मास्टर प्लान बनाया गया है। मानसखण्ड मन्दिरों के प्रचार-प्रसार हेतु ‘भारत गौरव मानसखण्ड एक्सप्रेस’’ ट्रेन देश के विभिन्न स्थानों से उत्तराखण्ड के काठगोदाम, टनकपुर रेलवे स्टेशनों के लिये संचालित किये जाने का अनुरोध किया। मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के अन्तर्गत कुमाऊँ क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध पूर्णागिरी धाम को विकसित करने के लिये शारदा कॉरिडोर के विकास की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। मानसखण्ड माला मिशन के अन्तर्गत कुमाऊँ क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध कैंची धाम के विकास हेतु मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। पिथौरागढ़ स्थित सीमान्त गांव गुंजी (आदि कैलाश क्षेत्र) को अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किये जाने के लिए मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है। गुंजी को’’शिव नगरी’’थीम के आधार पर विकसित किये जाने हेतु छः घटक कला संस्कृति, कौशल, ज्ञान, ध्यान, विज्ञान तथा विश्राम, में विभाजित किया गया है। प्रथम चरण में स्वदेश दर्शन योजना-2.0 के अन्तर्गत गुंजी में साधना केन्द्र, ईको ट्रेल, संसाधन केन्द्र, हेरिटेज ग्राम विकसित करना और साहसिक गतिविधियां प्रस्तावित हैं। राज्य सरकार द्वारा गुंजी तथा आदि कैलाश एवं ओम पर्वत के लिये हेली सेवाएं उपलब्ध कराये जाने हेतु सर्वे कर लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी-विश्वनाथ की तर्ज पर हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर विकसित करने का कार्य नव गठित उत्तराखण्ड निवेश एवं आधारिक संरचना बोर्ड (यू.आई.आई.डी.बी) द्वारा किया जायेगा। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु पीपीपी मोड में सात हेलीपोर्ट तैयार करने का प्रस्ताव है जिसमें से दो हेलीपोर्ट हेतु भूमि चिन्हित कर ली गयी है। प्रारम्भिक चरण में हरिद्वार एवं देहरादून में हेलीपोर्ट तैयार किये जाने प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के स्थानीय उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग के लिए अम्ब्रेला ब्रांड के रूप में हाउस ऑफ हिमालयाज का प्रधानमंत्री द्वारा लोकार्पण किया गया। लोकार्पण के बाद राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों द्वारा हाउस ऑफ हिमालयाज से जुडने के लिए उत्साह दिखाया गया है। प्रथम चरण में मिलेटस, राजमा, पर्वतीय दालें, लाल चावल, हल्द्वी, पहाड़ी नमक, शहद, एरोमेटिक एण्ड हर्बल टी, नैनीताल मोमबत्ती, ऐपण, पिछौड़ा को शार्टलिस्ट किया गया है। राज्य के सभी जी0आई0 उत्पादों को हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रान्ड में विशेष रूप से फोकस किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के त्वरित विकास के रोडमैप में आगामी पाँच वर्षों में राज्य की जीएसडीपी को दोगुना किया जाना लक्ष्यान्वित किया गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त किये जाने हेतु राज्य के आधारभूत ढाँचे में व्यापक वृद्धि प्रस्तावित की गयी है जिससे राज्य में औद्योगिकीकरण, सेवा क्षेत्र जिसमें पर्यटन से जुड़ा आधारभूत ढाँचा मुख्य है, कृषि एवं वानिकी तथा शिक्षा आदि क्षेत्रों में मुख्य रूप से निवेश आकर्षित किया जाना प्रस्तावित है, जिस कारण निकट भविष्य में विद्युत की मांग में तेज वृद्धि आशान्वित है। राज्य में निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण में पर्यावरणीय कारणों से हो रहे विलम्ब के फलस्वरूप, राज्य में विद्युत की मांग के सापेक्ष विद्युत/ उपलब्धता में अन्तर लगातार बढ़ता जा रहा है जिसका अन्तर उपरोक्त कारणों से भविष्य में और अधिक हो जायेंगा। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से राज्य को केन्द्रीय पूल के कोयला आधारित संयंत्रों से 400 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत स्थायी रूप से आवंटित किये जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिथौरागढ़ क्षेत्र की धौलीगंगा तथा गौरी गंगा क्षेत्र में बहने वाली नदियां राज्य के अन्तर्गत बहने वाली गंगा एवं उसकी सहायक नदियों से इतर हैं। उक्त क्षेत्र की जल विद्युत परियोजनाओं बौकांग बेलिंग (330 मेगावाट) एवं सेलाउर्थिग (202 मेगावाट) की स्वीकृतियां प्रदान किये जाने का भी मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को यह भी अवगत कराया कि उत्तराखण्ड राज्य में जून 2013 में आयी आपदा के पश्चात मा० सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 13.08.2013 को पारित ओदश एवं जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा दिये गये निर्णय के कारण गंगा एवं उसकी सहायक नदियों में प्रस्तावित 44 जल विद्युत परियोजनाओं कुल क्षमता लगभग 4800 मे0वा0 का विकास एवं निर्माण स्थगित है। राज्य की विद्युत ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु उत्तराखण्ड को खुले बाजार से प्रतिवर्ष लगभग 1000 करोड़ की ऊर्जा क्रय करनी पडती है, जो कि पर्वतीय राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ डालता है। अतः राज्य की बढती जरूरतों को पूरा करने के लिये तत्काल चरणबद्ध रूप से अन्य नदी घाटियों में प्रस्तावित परियोजनाओं के निर्माण हेतु सकारात्मक कार्यवाही करना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से उत्तराखण्ड राज्य में गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के अतिरिक्त अन्य नदी घाटियों पर स्थित परियोजनाओं के त्वरित विकास एवं निर्माण के अनुमति प्रदान किये जाने हेतु जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार को यथोचित निर्देश देने का भी अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि राज्य में हो रहे शहरीकरण के दृष्टिगत ‘‘चार नई टाउनशिप’’ विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। जिसमें दो पर्वतीय क्षेत्रों में और दो मैदानी क्षेत्रों में बनाने की योजना है। राज्य की आयुष नीति-2023 के अन्तर्गत विभिन्न सेक्टरों के निवेश पर टॉप-अप के रूप में 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत की सब्सिडी अतिरिक्त रूप से प्रदान की जा रही है। राज्य पर्यटन नीति, 2023 के माध्यम से वेलनेस रिसोर्ट/आयुर्वेद/योग/नेचुरोपैथी रिसोर्ट को 50 प्रतिशत तक की पूंजीगत सहायता तथा श्रेणी बी और श्रेणी सी क्षेत्रों में स्थापित होने वाले वेलनेस केन्द्र/आयुर्वेद/योग/नेचुरोपैथी रिसोर्ट को 5 प्रतिशत की अतिरिक्त पूंजीगत सहायता प्रदान की जा रही है। ‘‘उत्तराखण्ड स्टेट मिलेट मिशन’’ वर्ष 2023-24 से वर्ष 2027-28 (05 वर्षों) के लिए लागू किया गया है। ‘‘राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना’’ के तहत प्रदेश में सहकारी संस्थाओं के माध्यम से संयुक्त सहकारी खेती, साईलेज, पोल्ट्री वैली, गोट वैली, दुग्ध उत्पादन, ट्राउट फार्मिंग, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी उत्पादन इत्यादि पर सफलतापूर्वक कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्देशन में उत्तराखण्ड राज्य ईज ऑफ डुईंग बिजनेस, निवेश प्रोत्साहन तथा स्टार्ट अप क्षेत्र में निरंतर विकास कर रहा है और भारत सरकार द्वारा निर्गत की जाने वाली रैंकिंग में लगातार उत्तम श्रेणी प्राप्त कर रहा है। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय कार्यक्रम के अन्तर्गत एक पंचकोणीय औद्योगिक/व्यवसायिक गलियारे की स्थापना की जा रही है। जिसका उद्देश्य भारत वर्ष में औद्योगिक विनिर्माण एवं सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) की क्षमता को बढ़ाते हुए देश में त्वरित व समावेशी विकास और लाभकारी रोजगार प्राप्त करना है। जिसके कम मे भारत सरकार व राज्य सरकार उत्तराखण्ड के संयुक्त प्रयासों से 1002 एकड़ भूमि पर एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर खुरपिया आई.एम.सी. खुरपिया का निर्माण 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी के अन्तर्गत किया जा रहा है। उक्त परियोजना लगभग रू0 1100 करोड़ की लागत से की जा रही है, जिसमें राज्य द्वारा उपलब्ध करायी गयी भूमि का मूल्य रू0 410 करोड़ है। उत्तराखण्ड राज्य में उक्त परियोजना के माध्यम से लगभग ₹15000 करोड़ का निवेश आने की प्रबल समभावनाएँ है और साथ ही लगभग 50000 युवाओं को प्रत्यक्ष रुप से रोजगार प्राप्त होने की भी सम्भावनाएँ है। उत्तराखण्ड राज्य में स्थापित किये जा रहे आई.एम.सी. खुरपिया जिला उधमसिंह नगर की परियोजना का अनुमोदन देने का भी अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को यह भी अवगत कराया कि इन्वेस्टर समिट में हुए करारों को ग्राउंड करने के लिए राज्य की ओर से विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। एम०ओ०यू० की मॉनिटरिंग के लिए ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया गया है। राज्य में तीन फूड पार्क के प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। देहरादून में आईटी पार्क 2 स्थापित किया जा रहा है। एयरपोर्ट के नजदीक आई.टी. टावर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। उद्योगों को भूमि उपलब्ध कराने के लिए सिडकुल द्वारा काशीपुर, सितारगंज, रुद्रपुर, हरिद्वार तथा देहरादून में नए औद्योगिक आस्थान विकसित किये जा रहे हैं। देहरादून में छरबा को एजुकेशन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है जबकि ऊधमसिंह नगर जनपद में नॉलेज पार्क विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता से जुड़े सदस्यों की आकस्मिक दुर्घटना की स्थिति में उनके परिवारजनों को सामाजिक सुरक्षा जैसे सेवाओं का लाभ पहुँचाने के दृष्टिगत् “सहकारी किसान समृद्धि कार्ड योजना’ प्रारम्भ की जाएगी, जिसके अन्तर्गत वितरित होने वाले कार्ड का नाम “नमो सहकारी कवच कार्ड“ किया जाना प्रस्तावित है।

नई दिल्ली पहुंचे सीएम धामी, सिलक्यारा टनल पर मीडिया से की बातचीत

नई दिल्ली पहुंचने पर मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग हादसे में 41 श्रमिकों को सकुशल बाहर निकालना एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन के चलते ही यह बचाव अभियान सफलतापूर्वक पूरा हो सका। केन्द्र सरकार की ओर से भेजी गई विशेषज्ञ बचाव एजेंसियों की बदौलत हम श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाब हो सके। 17 दिन 41 जिंदगियों के लिए पूरा देश प्रार्थना कर रहा था।

सीएम धामी ने कहा कि सिल्क्यारा सुरंग मामले में प्रधानमंत्री अगर पर्याप्त संसाधन और मानवीय सहायता प्रदान नहीं करते तो यह अभियान सफल नहीं हो पाता। 12 नवम्बर की सुबह दीपावली की सुबह यह हादसा हुआ। उसी दिन शाम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फोन करके मुझसे घटना की पूरी जानकारी ली। सुरंग में फंसे सभी 41 श्रमिकों को किसी भी कीमत में सकुशल बाहर निकालना हमारी प्राथमिकता थी। उनकी प्रेरणा से राज्य सरकार मजबूती के साथ बचाव अभियान में जुटी। बचाव में लगी टीमों का मनोबल बढ़ा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हमें आश्वस्त किया कि आप मोर्चे पर डटें रहें, मिशन को अंजाम तक पहुंचाने में संसाधनों और विशेषज्ञों की कोई कमी नहीं रहेगी। शुरू से लेकर अंत तक प्रधानमंत्री जी ने मार्गदर्शन किया और पल-पल की जानकारी लेते रहे। उन्होंने सिलक्यारा सुरंग से सकुशल बाहर निकाले गए श्रमिकों से फोन पर बातचीत कर उनके स्वास्थ्य और कुशलक्षेम की जानकारी ली और हौसला भी बढ़ाया। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री जी ने निर्देश दिया कि सुरंग से निकालने के बाद श्रमिकों के स्वास्थ्य देखभाल, घर छोड़ने व परिजनों आदि के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि श्रमिकों और उनके परिजनों को घर तक छोड़ने की व्यवस्था भी की जाए।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केंद्र में मोदी के नेतृत्व में सरकार आने के बाद एक बड़ी तब्दीली ये आई है कि देश और दुनिया में कहीं भी संकट आया हो, भारत सरकार ने अपने नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। मोदी सरकार ने मुसीबत में आ गए विदेश में रह रहे लोगों को कभी बेसहारा नहीं छोड़ा। ऐसा पहले की सरकारों में नहीं हुआ करता था। ये बड़ा बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद आया है। यही विश्वास सुरंग में फंसे मजदूरों को और उनके परिजनों को था कि प्रधानमंत्री जी हर संसाधन उपलब्ध कराकर मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालेंगे।

देश जानता है कि वह पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने श्रमिकों को उच्च कोटि का सम्मान केवल शब्दों से ही नहीं दिया है व्यवहार में भी दिखाया है। वह काशी में मजदूरों के चरण धोते हैं। नई संसद के उद्घाटन में श्रमिकों के साथ भागीदारी करते हैं उनसे संवाद करते हैं। श्रमिकों पर पुष्प वर्षा करते हुए देश ने पहली बार किसी प्रधानमंत्री को देखा है। यह प्रधानमंत्री का ही मानस है कि उन्होंने दिल्ली में बहुउद्देशीय विश्वकर्मा भवन के निर्माण के द्वारा श्रमिकों के प्रति अपने अगाध सम्मान को प्रदर्शित किया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति का ही नतीजा है कि भारत ने न सिर्फ संकटकाल में अपने नागरिकों को बचाया है बल्कि जल, थल, नभ में सफल अभियान चलाकर कई विदेशी नागरिकों के जीवन की भी रक्षा कर दुनिया के सामने मानवता और जबरदस्त टीम वर्क के कई उदाहरण पेश किए हैं। ताजा उदाहरण हमास और इजरायल के युद्ध के बाद फंसे हुए भारतवासियों को सुरक्षित स्वदेश लाना हो, रूस यूक्रेन युद्ध में भारतीयों के लिए दोनों देशों के द्वारा युद्ध रुकवाना हो, हमारे नागरिकों की सुरक्षित वापसी प्रधानमंत्री जी के कार्यकाल में गारंटी बन गई है। यह प्रधानमंत्री जी द्वारा आज विश्व में भारत की प्रतिष्ठा का प्रभाव है कि सूडान, यमन और अफगानिस्तान की अस्थिरता के समय भारतीयों को सुरक्षित भारत लाकर प्रधानमंत्री जी ने देशवासियों को एक भरोसा दिलाया है कि वह एक संवेदनशील अभिभावक की तरह है अपने नागरिकों की पल-पल चिंता करते हैं। कोरोना महामारी के समय पूरी दुनिया से भारतीय सुरक्षित अपने देश लौटे। इसी विश्वास ने हमें शक्ति दी और सिल्कयारा से सभी श्रमिक पूरी तरह सुरक्षित बाहर निकाले गए।

नई दिल्ली पहुंचे सीएम धामी, मीडिया से वार्ता में यूसीसी पर बोले ये…

नई दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड सदन में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट बनाने वाली विशेषज्ञ समिति के सदस्यों से मुलाकात की। माना जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने समिति के सदस्यों से ड्राफ्ट पर भी चर्चा की। मीडिया से वार्ता में उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट मिलने के बाद प्रदेश सरकार इसका विधिक परीक्षण करेगी। इसके बाद इसे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह अन्य राज्यों से भी अपेक्षा करेंगे कि देवभूमि से समान नागरिक संहिता एक्ट बनाने का जो सिलसिला शुरू हुआ है, उसे वे भी लागू करें।

मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता के लिए गठित समिति को इस पर काम करते हुए एक वर्ष से अधिक का समय हो गया है। समिति ने विभिन्न धर्मों, राजनीतिक दलों व विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तियों से चर्चा की है। समिति ने ड्राफ्ट पूरा कर लिया है। कुछ समय बाद समिति इसे सरकार को सौंप देगी। सरकार विधिक परीक्षण करने के बाद इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि जब इसका ड्राफ्ट सामने आएगा, तब इससे जुड़े सभी संशय दूर हो जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि समान नागरिक संहिता के ड्राफ्ट में उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थिति व दो अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे होने के कारण सामरिक दृष्टि का भी ध्यान रखा गया है। उत्तराखंड धर्म व संस्कृति का केंद्र है। इसलिए उत्तराखंड में रहने वाले लोगों के लिए एक समान कानून होना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री से मिले सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री, भारी उद्योग मंत्रालय डॉ महेन्द्र नाथ पाण्डेय से शिष्टाचार भेंट की।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से राज्य में इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन जल्द बनाने के लिए अनुरोध किया। उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स एवं बैटरी उत्पाद में निवेश के लिए सहायता का अनुरोध किया। साथ ही ऑटोमोटिव उद्योग में नवाचार और नई तकनीक पर शोध एवं प्रोत्साहन के लिए उत्तराखंड में इंडस्ट्री पार्टनर के साथ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू करवाने का आग्रह किया ताकि प्रदेश में दक्षता विकास, औद्योगिक विकास के साथ साथ औद्योगिक निवेश भी आये। राज्य में निवेश बढ़ने से रोज़गार सृजन के अवसर बढ़ेंगे।

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉ महेंद्र नाथ पांडेय ने राज्य में औद्योगिक विकास के लिए केंद्र सरकार से हर संभव सहयोग के प्रति आश्वस्त किया।

उत्तराखंड सदन से सीएम ने रवाना किया जोशीमठ आपदा को राहत सामग्री वाहन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन में भाजपा उत्तराखंड प्रकोष्ठ, फरीदाबाद व हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेंस सहित अन्य संस्थाओं द्वारा जोशीमठ में आई आपदा हेतु उपलब्ध कराई जा रही राहत सामग्री के वाहनों को रवाना किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उनका आभार व्यक्त करते हुये कहा कि ऐसे समय पर सामग्री के माध्यम से सभी लोग सहायता के लिए आ रहे हैं। हमारा भी प्रयास है कि सभी की सहायता हो। केंद्र सरकार के सहयोग से जोशीमठ के पुनर्वास और प्रभावितों को राहत पहुंचाने का कार्य हो रहा है। अन्य संस्थाओ द्वारा भी राहत सामग्री भेज कर मदद की जा रही है।

इस अवसर पर भाजपा फरीदाबाद उत्तराखंड प्रकोष्ठ जिला सचिव भारती भाकुनी, जिला संयोजक चंदन नेगी, उत्तराखंड प्रकोष्ठ जिला कार्यकारिणी में जिला सह संयोजक गिरीश चंद सती, आईटी प्रमुख मनीष डंगवाल आदि उपस्थित थे।

मानसखंड झांकी के टीम समस्यों ने राष्ट्रपति से की मुलाकात

नई दिल्ली में उत्तराखण्ड सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग के संयुक्त निदेशक एवं झांकी के टीम लीडर केएस चैहान के नेतृत्व में 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर प्रदर्शन हेतु चयनित “मानसखण्ड” पर आधारित उत्तराखण्ड की झांकी के कलाकारों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में भेंट की। पूरे देश से आये झांकी के कलाकारों द्वारा राष्ट्रपति के समक्ष सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर प्रदर्शन के लिए चयनित विभिन्न राज्यों की झांकियों के कलाकारों के साथ ही उत्तराखण्ड की झांकी के कलाकारों को भी राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में आमंत्रित किया गया था।

राष्ट्रीय रंगशाला में आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए प्रस्तुत

रक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय रंगशाला शिविर, नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में विभिन्न प्रदेशों एवं मंत्रालयों की झांकी कलाकारों द्वारा प्रेस के सम्मुख अपने-अपने राज्यों की सांस्कृतिक झलक पेश की गयी। उत्तराखण्ड राज्य के कलाकारों द्वारा उत्तराखण्ड की पारंपरिक वेशभूषा में राष्ट्रीय रंगशाला में आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसे उपस्थित लोगों द्वारा सराहा गया। साथ ही इन 16 राज्यों के कलाकारों द्वारा भी अपने-अपने प्रदेश की झांकी के साथ पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुति दी गई। गणतंत्र दिवस समारोह में इस वर्ष 17 राज्यों की झांकी सम्मिलित की गई है।

उल्लेखनीय है कि गणतंत्र दिवस परेड के लिए उत्तराखंड की झांकी में सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक एवं नोडल अधिकारी के.एस. चैहान के नेतृत्व में उत्तराखंड राज्य से 18 कलाकार गणतंत्र दिवस परेड में उत्तराखंड झांकी में भाग ले रहे हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर उत्तराखण्ड की ओर से प्रदर्शित की जाने वाली झांकी का विषय “मानसखण्ड” रखा गया है। गणतंत्र दिवस समारोह पर कर्तव्य पथ उत्तराखंड राज्य की झांकी मार्च पास्ट करते हुए चतुर्थ स्थान पर देखने को मिलेगी। झांकी के अग्र तथा मध्य भाग में कार्बेट नेशनल पार्क में विचरण करते हुए हिरन, बारहसिंघा, घुरल, मोर तथा उत्तराखण्ड में पाये जाने वाली विभिन्न पक्षियों व झांकी के पृष्ठ भाग में प्रसिद्ध जागेश्वर मन्दिर समूह तथा देवदार के वृक्षों को दिखाया जायेगा साथ ही उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक कला ‘ऐपण’ का भी झांकी के मॉडल में समावेश किया गया है। झांकी के साथ उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए छोलिया नृत्य का दल सम्मिलित किया गया है। झांकी का थीम सांग उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि कर्तव्य पथ पर इस बार उत्तराखण्ड की झांकी “मानसखण्ड” सबके लिये आकर्षण का केन्द्र रहेगी। उन्होंने बताया कि श्री केदारनाथ व श्री बदरीनाथ की तर्ज पर कुमाऊ के पौराणिक मंदिरों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मानसखण्ड मंदिर माला मिशन योजना पर काम किया जा रहा है। गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर मानसखण्ड पर आधारित झांकी का प्रदर्शन होगा। देश विदेश के लोग मानसखण्ड के साथ ही उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति से भी परिचित होंगे। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक भूमि उत्तराखण्ड में जहाँ एक ओर जीवन दायिनी गंगा, यमुना बहती है तथा दूसरी ओर चार-धाम पवित्र तीर्थस्थल विद्यमान हैं। उत्तराखण्ड आध्यात्मिक शांति और योग के लिये अनुकूल धरती है। इसलिए उत्तराखण्ड को देवभूमि भी कहा जाता है।

उत्तराखण्ड राज्य की झांकी का निर्माण स्मार्ट ग्राफ आर्ट एडवर्टाइजिंग प्रा0लि0 के निदेशक सिद्धेश्वर कानूगा द्वारा किया जा रहा है।

इसके साथ ही गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड के लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जायेगा।

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में आयोजित उत्तराखण्ड दिवस में मुख्यमंत्री ने की शिरकत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली के प्रगति मैदान मे चल रहे 41वें भारत अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के तहत उत्तराखण्ड पवेलियन में उत्तराखण्ड दिवस समारोह एवं इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस अवसर पर नाट्यशाला थियेटर में उत्तराखण्ड के लोक कलाकारों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। इस वर्ष व्यापार मेले की थीम “वोकल फार लोकल, लोकल टू ग्लोबल” रखी गयी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के विकास में उत्तराखण्ड के साथ प्रवासी उत्तराखण्ड वासियों का बड़ा योगदान है। राज्य के विकास की यह हम सबकी सामूहिक विकास यात्रा है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रवासी उत्तराखण्डवासी हमारे राज्य के ब्रांण्ड एम्बेसडर हैं। उन्होंने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला जैसे आयोजन विभिन्न राज्यों की प्रगति से परिचित का अवसर प्रदान करते हैं। यह व्यापार मेला उत्तराखण्ड के लोगों की जीवन्त सहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उत्तराखण्ड पवेलियन में “वोकल फार लोकल, लोकल टू ग्लोबल” थीम के अनुसार उत्तराखण्ड में हो रहे सतत विकास का प्रस्तुतीकरण, राज्य सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों की जानकारी के साथ-साथ प्रदेश के हथकरघा एवं हस्तशिल्प, राज्य के कृषि एवं उद्यान क्षेत्र के उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है, जिससे राज्य को पहचान मिलेगी।

उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश के लिए अच्छी कानून व्यवस्था, स्वच्छ पर्यावरण, रेल, सड़क तथा वायु परिवहन की सुविधाए सस्ती एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति तथा अप्रदूषित जल संसाधन उपलब्ध हैं। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश को निवेश के लिए एक सर्वाधिक उपयुक्त डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार सक्रियता के साथ प्रयास किया जा रहा है। विगत वर्षाे में हमारे द्वारा निवेश के अनेक अवसरों के अधिकाधिक उपयोग का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में उत्तराखण्ड राज्य निवेशकों के लिए न केवल एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में प्रतिस्थापित हुआ है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में राज्य सरकार सतत प्रयत्नशील है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश और देशवासियों में आशा, विश्वास और नई ऊर्जा का संचार हुआ है। उनके नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। वैश्विक स्तर पर भारत का मान, सम्मान एवं स्वाभिमान बढ़ा है। देश में नई कार्य संस्कृति की शुरुआत हुई है। समरस, समर्थ एवं शक्तिशाली भारत की पहचान देश व दुनिया में हुई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन का कार्य कर ही है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन एवं केन्द्र सरकार के सहायोग से प्रदेश में रेल लाइन के निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है। रोड़ नेटवर्क, चारधाम, ऑलवेदर रोड, भारत माला श्रृंखला की सड़कें एक कोने से दूसरे कोने को जोड़ने का कार्य कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 5 नवम्बर, 2021 को बाबा केदार की भूमि से कहा कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा, इसी का प्रतिफल है कि इस बार चारधाम यात्रा में लगभग 46 लाख से अधिक रिकार्ड संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालु कांवड यात्रा में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने का हमारा प्रयास निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि हेमकुण्ड साहिब व केदारनाथ धाम के लिए रोपवे का शिलान्यास हो चुका है। जो यात्रा तीन से चार दिन में होती थी वह अब कुछ ही घंटों में हो सकेगी, यात्रा अब सुगम, सरल होगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड अनेक प्रकार की प्राकृतिक संपदाओं से युक्त है। प्रदेश का लगभग 70 प्रतिशत भूभाग प्राकृतिक सुंदरता व वनों से घिरा हुआ है जो पर्यटन, उद्यानिकी के लिये अनुकूल है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में जो बेस्ट प्रैक्टिसेज हुई हैं उनको अपना कर हम विकास के मॉडल को खड़ा कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पूरे देश व दुनिया को शुद्ध जल व पर्यावरण देने का कार्य करता है, प्रदेश के विकास का मॉडल इकोलाजी व इकोनॉमी दोनों को संतुलित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार के अवसर को बढ़ाने के लिये हमने नीतियों में संशोधन कर आवश्यक सुझावों को भी जोड़ा है। प्रदेश में फिल्म सिटी, होटेल्स के लिए स्थान चयनित कर निवेशकों को आकर्षित करने का कार्य किया जा रहा है, इसके लिये लैंड बैंक की व्यवस्था की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी अल्मोड़ा में आजीविका महोत्सव आयोजित किया गया था, आजीविका महोत्सव में रूरल बिजनेस इक्यूबेटर (आर0बी0आई0) की संख्या में एक साल के अन्दर 03 गुना वृद्धि हुई है। राज्य के परम्परागत उत्पाद तथा हस्त निर्मित उत्पादों को देश-विदेश में पहचान मिलने से राज्य के लोगों की आजीविका एवं आर्थिकी में वृद्धि होगी तथा रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के प्रवासियों तथा देश व विदेश से आने वाले निवेशकों को हर सम्भव सुविधा एवं सहायता उपलब्ध कराने के लिए कृत संकल्पित है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य आपके साथ मिलकर एक समृद्ध उत्तराखण्ड का निर्माण करना है। प्रदेश सरकार सदैव आपके सहयोगी की भूमिका में आपके साथ है और हम सब मिलकर ही एक आदर्श उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण की परिकल्पना को पूर्ण कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रवासी उत्तराखण्ड वासियों से पर्व व त्योहारों पर अपने पैतृक स्थान में आने तथा उत्कृष्ट उत्तराखण्ड बनाने में अपना योगदान देने की भी अपील की।

इस अवसर पर सांसद अजय टम्टा, सचिव उद्योग डॉ पंकज कुमार पाण्डेय, सचिव संस्कृति हरि चंद्र सेमवाल, स्थानिक आयुक्त उत्तराखण्ड अजय मिश्रा, उद्योग निदेशक सुधीर चन्द्र नौटियाल, संस्कृति निदेशक बीना भट्ट, पैवेलियन निदेशक के0 सी0 चमोली आदि उपस्थित थे।

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री की अध्यक्षता में हुई किशाऊ बांध बहुउद्देशीय परियोजना बैठक, सीएम भी हुए शामिल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में किशाऊ बांध बहुद्देशीय परियोजना पर आयोजित बैठक में प्रतिभाग किया। बैठक में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वर्चुअल प्रतिभाग किया।

बैठक में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने परियोजना के संबंध में अपने-अपने राज्य का पक्ष रखा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि परियोजना डीपीआर की लागत बढ़ने की दशा में विद्युत घटक लागत को स्थिर रखा जाए अथवा बढ़ी हुई विद्युत घटक लागत को अन्य चार लाभार्थी राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान व दिल्ली द्वारा वहन किया जाए। ताकि राज्य के उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राष्ट्रीय परियोजना, उत्तराखण्ड के विकास हेतु मील का पत्थर साबित होगी क्योंकि परियोजना विकास की अवधि में स्थानीय निवासियों व ग्रामीणों को आय वृद्धि के विभिन्न संसाधन यथा स्थाई व अस्थाई रोजगार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध होंगे। क्षेत्र के विकास व जनकल्याण हेतु समय- समय पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से क्षेत्र विशेष हेतु लाभप्रद योजनाएं विकसित की जाएगी, जिससे पलायन की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण किया जा सकेगा।

केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज की बैठक में उठाए गए बिंदुओ पर विचार विमर्श कर जल्द ही अगली बैठक आयोजित की जाएगी।

गौरतलब है कि किशाऊ बहुउद्देशीय बाँध परियोजना के क्रियान्वयन का कार्य उत्तराखण्ड एवं हिमाचल प्रदेश सरकार के संयुक्त उपक्रम किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। इस परियोजना को फरवरी 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है। किशाऊ बाँध परियोजना एशिया का दूसरी सबसे बड़ी बाँध परियोजना होगी। जिसे इसकी ऊंचाई 236 मीटर एवं लम्बाई 680 मीटर होगी। किशाऊ परियोजना उत्तराखण्ड राज्य के जनपद देहरादून एवं हिमाचल प्रदेश के जनपद सिरमौर में टोंस नदी पर प्रस्तावित है, इसमें 1324 एम0सीए०एम० जीवत भण्डारण द्वारा 97076 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, 617 एम०सी०एम० पेयजल एवं औद्योगिक उपयोग हेतु जल प्राप्त होगा, जिससे तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान की सिंचाई आवश्यकता तथा दिल्ली की पेयजल आवश्यकता की पूर्ति की जा सकेगी, साथ ही साथ 660 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन होगा, जिससे 1379 एम०यू० हरित विद्युत ऊर्जा प्राप्त होगी जो कि उत्तराखण्ड व हिमाचल प्रदेश को बराबर-बराबर प्राप्त होगी।

केन्द्रीय जल आयोग द्वारा परियोजना की कुल लागत मार्च, 2018 के मूल्य स्तर के अनुसार रू० 11550 करोड़, जिसमें जल घटक की लागत रु. 10013.96 करोड़ एवं विद्युत घटक की लागत रु. 1536.04 करोड़ आंकी गई है। वर्तमान में परियोजना की डीपीआर का कार्य प्रगति पर है, जिसमें परियोजना की लागत बढ़ने का अनुमान है।
राष्ट्रीय परियोजना होने के दृष्टिगत परियोजना के क्रियान्वयन हेतु जल घटक लागत (सिंचाई एवं पीने का पानी) का 90 प्रतिशत वित्तीय पोषण भारत सरकार द्वारा एवं 10 प्रतिशत वित्तीय पोषण लाभार्थी राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा तथा विद्युत घटक लागत को उत्तराखण्ड व हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा संयुक्त रूप से बराबर-बराबर वहन किया जाना है।

बैठक में उत्तराखण्ड से सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम, हरि चंद्र सेमवाल व जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार के अधिकारी उपस्थित थे।

वित्त मंत्री अग्रवाल ने किया नई दिल्ली में निर्माणाधीन उत्तराखंड निवास का निरीक्षण

उत्तराखण्ड के वित्त मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल ने नई दिल्ली में निर्माणाधीन भवन ‘उत्तराखण्ड निवास’ का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य, गुणवत्ता बनाए रखते हुए तय की गई समय सीमा में पूरा करना सुनिश्चित किया जाए। कैबिनट मंत्री प्रेम चन्द अग्रवाल ने उत्तराखण्ड निवास के नक्शे का अवलोकन करते हुये भवन के सभी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी ली। इसके अलावा निर्माणाधीन भवन में गाड़ियों की पार्किंग व्यवस्था की भी जानकारी ली।

उल्लेखनीय है कि 3, गोपीनाथ बारदोलाई मार्ग, चाणक्यपुरी नई दिल्ली में जून 2020 से उत्तराखण्ड निवास का काम शुरू किया गया। भवन में तीन बेसमेंट होंगे। भवन में भू-तल को सम्मिलित करते हुए कुल सात तल बनाए जाएंगे। भवन उत्तराखण्ड वास्तुकला शैली में बनाया जायेगा। ग्रीन भवन की तर्ज पर बनाए जा रहे इस भवन का अपना सीवेज सोधन संयत्र होगा। भवन में 50 किलो वाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट भी है। उत्तराखण्ड निवास का निर्माण कार्य संभावित 2023 तक पूरा कर लिया जायेगा।

इस अवसर पर स्थानिक आयुक्त डॉ0 वीवीआरसी पुरूषोत्तम व उत्तराखण्ड पेयजल निगम के सहायक अभियन्ता अरविन्द सैनी उपस्थित थे।