जनसहभागिता से तैयार होगा आम जनता का बजट, रांसी में सीएम की मौजूदगी में हुआ व्यापक मंथन

जनपद पौड़ी के रांसी स्थित बहुउद्देश्यीय भवन में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए जनप्रतिनिधियों, कृषकों, उद्यमियों, व्यापारियों, महिला समूहों, पर्यटन व्यवसायियों, मत्स्य पालकों, कृषि वैज्ञानिकों, स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों ने सहभागिता करते हुए आगामी बजट के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा जनहितकारी बजट तैयार करना है, जो प्रदेश की जमीनी आवश्यकताओं, क्षेत्रीय विशेषताओं और जनअपेक्षाओं के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण का रोडमैप है, जिसमें प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

इस संवाद कार्यक्रम में शामिल होकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव देने के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि समाज के प्रत्येक वर्ग जैसे पर्यटन व्यवसायियों, व्यापारियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, किसानों और उद्यमियों की अपेक्षाएं और आवश्यकताएं बजट में समुचित रूप से परिलक्षित हों। उन्होंने कहा कि इस संवाद के दौरान अनेक व्यावहारिक और दूरदर्शी सुझाव प्राप्त हुए हैं, जो राज्य के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि हमने बजट निर्माण की प्रक्रिया को पारदर्शी, सहभागी और जनोन्मुखी बनाने का संकल्प लिया है। सीमांत क्षेत्रों सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर जनता से संवाद कर सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक वर्ग की भागीदारी इसमें सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है और व्यापार, उद्योग, पर्यटन, कृषि एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य में होमस्टे, स्वरोजगार और निवेश के नए अवसर सृजित हुए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिला है। सरकार का लक्ष्य किसानों को उद्यमी के रूप में विकसित करना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट पूर्व संवाद के दौरान प्राप्त सभी सुझावों का गंभीरता से परीक्षण कर उन्हें आगामी बजट और नीतिगत निर्णयों में यथासंभव शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा बजट प्रस्तुत करना है, जो आकार में व्यापक, प्रभाव में ठोस और पूरी तरह जनहित पर केंद्रित हो, ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सके।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को आत्मनिर्भर एवं अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि प्रदेश ने वित्तीय अनुशासन और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहभागिता से तैयार होने वाला यह बजट राज्य की विकास यात्रा को और अधिक गति प्रदान करते हुए समृद्ध और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संवाद के दौरान ग्रामीण विकास को गति देने के लिए अनुदान में वृद्धि, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था सुदृढ़ करने, सीवर लाइन एवं शौचालय निर्माण, पंचायतों को सशक्त बनाने, बंजर भूमि के उत्पादक उपयोग तथा ग्राम स्तर पर सोलर प्लांट संचालन जैसे सुझाव प्राप्त हुए। शहरी क्षेत्रों के लिए नगर निकायों के संसाधन बढ़ाने, सोलर सिटी की अवधारणा को बढ़ावा देने, पार्किंग व सफाई व्यवस्था सुदृढ़ करने तथा शहरी आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण पर बल दिया गया।

कृषि एवं उद्यान क्षेत्र में पर्वतीय कृषि को प्रोत्साहन, बागवानी एवं उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा हेतु प्रभावी उपाय, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, कोल्ड स्टोरेज एवं क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने के सुझाव सामने आए। कृषकों के तकनीकी प्रशिक्षण, जिला स्तर पर प्रसंस्करण केंद्रों की स्थापना तथा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

उद्योग एवं एमएसएमई क्षेत्र में पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योग स्थापना हेतु पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज अनुदान, मशीनरी पर विशेष छूट, सेवा क्षेत्र आधारित उद्योगों को बढ़ावा तथा स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन की मांग रखी गई। आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों को उद्योगों से सीधे जोड़ने, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और पलायन रुके, इस पर भी सुझाव दिए गए।

महिला सशक्तिकरण के अंतर्गत प्रत्येक जनपद में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराने तथा स्थानीय सेवाओं में महिलाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई। गौशालाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने, जैविक खाद उत्पादन को प्रोत्साहन देने तथा मत्स्य पालन के लिए आधुनिक तकनीकों एवं बायोफ्लॉक टैंकों को बढ़ावा देने के सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।

पर्यटन क्षेत्र में होमस्टे के लिए रियायती ऋण सुविधा, हैली सेवा का विस्तार, वैकल्पिक मार्गों का निर्माण, छोटे पर्यटन स्थलों का विकास, संस्कृत ग्रामों एवं सांस्कृतिक स्थलों को पर्यटक ग्राम के रूप में विकसित करने, नेचर एवं एग्री-टूरिज्म को बढ़ावा देने तथा स्थानीय उत्पादों के विपणन के लिए ठोस नीति बनाने की आवश्यकता बताई गई।

ऊर्जा क्षेत्र में ऊर्जा नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने, कृषि एवं उद्योग आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहन देने हेतु कर एवं शुल्क में राहत तथा ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के सुझाव भी प्राप्त हुए।

बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम में स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि जनसहभागिता के आधार पर तैयार होने वाला बजट ही प्रदेश के समग्र विकास की नींव बनेगा। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पर्यटन, कृषि, लघु उद्योग एवं आधारभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आगामी बजट जनअपेक्षाओं के अनुरूप होगा और पौड़ी सहित पूरे प्रदेश के संतुलित विकास को नई दिशा देगा।

वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने सभी होमस्टे संचालकों, एमएसएमई उद्यमियों, लखपति दीदियों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस संवाद का उद्देश्य आगामी बजट को जनभावनाओं, स्थानीय आवश्यकताओं और विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप दिशा देना है, ताकि वित्तीय संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करते हुए अधिकतम जनकल्याण सुनिश्चित किया जा सके। राज्य में आधारभूत संरचना, पर्यटन, कनेक्टिविटी, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर सकारात्मक प्रगति हो रही है, जिससे विकास की नई संभावनाएं साकार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने विकास की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रत्येक रुपया पारदर्शिता के साथ सही व्यक्ति तक पहुंचे और उसका अधिकतम जनहित में उपयोग हो। बजट पूर्व संवाद इसी सहभागी सोच का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने सभी से अपेक्षा की कि वे अपने संक्षिप्त, व्यवहारिक एवं दूरदर्शी सुझाव प्रस्तुत कर आगामी बजट को और अधिक जनोन्मुखी, प्रभावी एवं विकासोन्मुख बनाने में सहभागी बनें।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने सभी जनप्रतिनिधियों, हितधारकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के संवाद से जनता की सहभागिता और विश्वास और अधिक सुदृढ़ होता है। उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझाव प्रदेश के संतुलित, समावेशी एवं सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होंगे।

बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम का संचालन अपर सचिव मनमोहन मैनाली द्वारा किया गया। कार्यक्रम में कृषि, उद्योग, व्यापार, पंचायत, शहरी विकास आदि से जुड़े 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। जिला पंचायत पौड़ी की अध्यक्षा रचना बुटोला, मेयर नगर निगम श्रीनगर आरती भंडारी, ऋषिकेश शंभू पासवान, कोटद्वार शैलेन्द्र रावत, रुड़की अनीता देवी अग्रवाल, नगर पालिकाध्यक्ष पौड़ी हिमानी नेगी, आयुक्त गढ़वाल/सचिव उद्योग विनय शंकर पांडे, पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप, संयुक्त सचिव सुरेन्द्र सिंह रावत, आयुक्त ग्राम विकास अनुराधा पाल, अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव, डॉ. सौरभ गहरवार, अभिषेक रोहिला, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत, अपर ज़िलाधिकारी अनिल गर्ब्याल, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, जिलाध्यक्ष भाजपा कमल किशोर रावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कृषक, उद्यमी, जनप्रतिनिधि तथा हितधारक मौजूद रहे।

प्रदेश की आर्थिकी को सशक्त बनाने को सीएम ने किया हितधारकों के साथ संवाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेश की आर्थिकी को सशक्त बनाने हेतु ’बजट – पूर्व संवाद’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उद्योग जगत, डेयरी विकास, पर्यटन व्यवसाय, औद्यानिकी क्षेत्र के लोगों, शिक्षाविद् एवं वैज्ञानिकों, व्यापारियों, प्रगतिशील कृषकों, पशुपालकों , मत्स्य पालकों, लखपति दीदी, जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने मुख्यमंत्री को आगामी बजट के संबंध में सुझाव दिए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बजट संवाद हेतु एकत्रित सभी हितधारकों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2024-25 के लिए जल्द ही बजट पेश करने जा रही है। विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी जनता से बजट के लिए महत्वपूर्ण सुझाव मांगे हैं। बजट निर्माण में जन सहभागिता महत्वपूर्ण होती है। बजट को जनता के सुझावों के आधार और जनभावनाओं के अनुरूप बनाया जाना अत्यंत आवश्यक है। जनता की आकांक्षाओं और क्षमता को बेहतर ढंग से समझने के लिए जनसंवाद, बजट निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। अर्थव्यवस्था की प्रगति का सीधा सम्बन्ध आम जनता के गुणवत्तापूर्ण जीवन से होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट प्रदेश की आर्थिक स्थिति और भविष्य का दर्पण है। बजट का केंद्रीय बिंदु उत्तराखण्ड का समग्र विकास है। सतत विकास, समावेशी विकास और नवाचार तथा प्रौद्योगिकी पर आधारित विकास राज्य सरकार मूल मंत्र है। उत्तराखंड को हर क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद ( ळैक्च्) बढ़ाना जरूरी है, जिसके लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा। प्रत्येक राज्यवासी जब अपने क्षेत्र में अच्छा कार्य करेंगें तभी हमारा प्रदेश चहुँमुखी प्रगति करेगा और अर्थव्यवस्था में वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। प्रदेश में भारतमाला, पर्वतमाला, डेडिकेटेड रेल फ्रंट कॉरिडोर आदि परियोजनाओं से व्यापार और उद्यम को नई ऊंचाई प्राप्त हुई है। प्रधानमंत्री जी के आशीर्वाद से मानसखंड मंदिर माला, ऑल वेदर रोड, एलिवेटेड रोड, रोपवे परियोजना, वंदे भारत, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग जैसी अनेक महत्वाकांक्षी परियोजनाएं प्रदेश में चल रही हैं। जिससे प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य में गुणात्मक परिवर्तन दिख रहे हैं। राज्य सरकार ने कई नीतियों में आवश्यक परिवर्तन कर अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित करवाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्राथमिक क्षेत्र के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा, पर्यटन, तथा उद्योग के क्षेत्र में निवेश हेतु सकारात्मक माहौल बनाया है। दिसम्बर 2023 में आयोजित उत्तराखण्ड वैश्विक निवेशक सम्मेलन-2023 में 3.56 लाख करोड़ रूपये के एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किए गए। निवेश प्रस्तावों से प्रदेश में बेहतर परिणाम आ सके। उस दिशा में हम प्रयत्नशील हैं। उन्होंने कहा हमारी नीयत साफ, सोच स्पष्ट, दृष्टि व्यापक है। अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना और उभरती हुई गतिशीलता हमें यह भरोसा दे रही है कि आने वाले समय में अर्थव्यवस्था में और गति आयेगी और हम सबके सामूहिक प्रयास, प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होंगें।

वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि हमने बजट को जनता का बजट बनाने पर काम किया है। जन सहभागिता से बजट तैयार हो इस पर निरंतर कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा संपूर्ण प्रदेश से बजट पर सुझाव मांगे जा रहे हैं। हम सामूहिक प्रयास से उत्तराखंड राज्य को आगे ले जाने का काम करेंगे। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में निश्चित ही उत्तराखंड राज्य देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनेगा। आज हम इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी एग्रीकल्चर इनोवेशन के क्षेत्र में कई काम कर रहे हैं और यह काम निरंतर आगे चलते रहेंगे।

बजट के संबंध में सलाह देते हुए कुलपति दून यूनिवर्सिटी डॉ. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पीएचडी स्कॉलर स्टूडेंट्स हेतु रिसर्च की गुणवत्ता बढ़ाए जाने के क्रम में राज्य सरकार द्वारा बजट में प्रावधान होना चाहिए। पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर राम शर्मा ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालय को प्रोत्साहित करने के लिए बजट में प्रावधान किया जाना चहिए। टिहरी जिला पंचायत अध्यक्ष सोना सजवाण ने कहा कि पंचायत के विकास हेतु बजट में राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार पंचायतों हेतु वित्त अनुदान बढ़ना चाहिए।

महानिदेशक यू कास्ट प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि राज्य में नॉलेज कैपिटल और ह्यूमन कैपिटल पर निवेश किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा हमें राज्य में नॉलेज बेस्ड इकोनॉमी को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही प्रत्येक जनपद में डिस्ट्रिक्ट साइंस , टेक्नोलॉजी, इन्नोवेशन सेंटर्स की स्थापना के लिए भी बजट में प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा GEP ( gross environment product) के आंकलन के लिए भी बजट में अलग से प्रावधान होना चाहिए। साथ ही सरकार ने CSR की तर्ज पर ISR (इंटेलेक्चुअल सोशल रिस्पांसिबिलिटी ) को भी राज्य में बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा बदलते समय को देखते हुए ए.आई के लिए भी बजट में प्रावधान होना चाहिए।

उद्योग जगत से जुड़े विपिन गुप्ता ने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए बजट में प्रावधान बढ़ाना चाहिए। साथ ही थ्री व्हीलर वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन में परिवर्तित करने के लिए भी बजट में प्रावधान होना चाहिए। श्री पंकज गुप्ता ने कहा कि स्थानीय संसाधनों से स्थानीय लोगों को ही रोजगार मिले। इसके लिए अलग से नीति आनी चाहिए एवं बजट में प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने बजट में राज्य सरकार की ओर से हरिद्वार देहरादून रेल लाइन ट्रैक को डबल किए जाने हेतु बजट अनुमोदित किए जाने की बात कही। उद्यमी श्री अनिल गोयल ने कहा कि व्यापारियों को आपदा से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके इसके लिए बजट में अलग से प्रावधान होना चाहिए।

होमस्टे चलाने वाले हरिद्वार के अभ्युदय शर्मा ने कहा कि होम स्टे को और अधिक बढ़ावा देने, होमस्टे के प्रचार प्रसार हेतु बजट में प्रावधान करने चाहिए। लैंसडाउन से आए संदीप सिंह रावत ने बताया कि पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए सरकार ने बजट में अलग से सहायता फंड की व्यवस्था करनी चाहिए। सहसपुर से आई लखपति दीदी गीता मौर्य ने स्वयं सहायता समूह को मिलने वाले ऋण की रकम बढ़ाए जाने की बात कहीं। चंबा से आए श्री संतोष नेगी ने मशरूम की खेती के दौरान ट्रांसपोर्ट में आने वाली रकम को सब्सिडी के माध्यम से दिए जाने की बात उठाई। उन्होंने भूसे ( सुखा चारा) को दुग्ध समितियों के माध्यम से मशरूम उत्पादको तक पहुंच जाने की भी बात कही। टिहरी गढ़वाल के कृषक कुंदन सिंह पवार ने एप्पल मिशन की तर्ज पर स्टोन फ्रूट मिशन को भी बजट में शामिल कर शुरू किए जाने की बात कही।

इस दौरान कार्यक्रम में दर्जा मंत्री विश्वास डावर, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्धन, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, बीवीआरसी पुरुषोत्तम, अपर सचिव रणवीर सिंह चौहान अपर सचिव युगल किशोर पंत, मनमोहन मैनाली एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

प्रदेश की आर्थिकी को सशक्त बनाने को सीएम ने किया विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि समूहों के साथ संवाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेश की आर्थिकी को सशक्त बनाने के लिये कृषि, बागवानी, उद्योग, व्यापार आदि समूह के प्रतिनिधियों से संवाद कर उनके सुझाव एवं विचारों से अवगत हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सबको मिलकर उत्तराखण्ड को सशक्त राज्य बनाने का संकल्प लेना होगा।
उन्होंने कहा कि इस संवाद से प्राप्त होने वाले सुझावों को आगामी बजट में समावेश करने के प्रयास किये जायेंगे। सुझाव देने वालों को अपने अपने क्षेत्रों की क्रीम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे 21 वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखण्ड का दशक बनाने में भी निश्चित रूप से मदद मिलेगी।

प्रदेश के विकास में जन सहभागिता को जरूरी बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर सीमित हैं इसलिये हमें स्वरोजगार के माध्यम से रोजगार देने को आंदोलन बनाना होगा। समस्याओं एवं सुझावों का भी हमें मिलकर समाधान ढूंढना है। हमारा प्रयास अंत्योदय की अवधारणा को सर्व स्पर्शी विकास के साथ पूर्ण करने का है। यही हमारा मूल मंत्र भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास में अभिनव पहल के साथ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विषय विशेषज्ञों के सुझावों पर भी हम कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम चौपाल जन समस्याओं के समाधान एवं उनके सुझावों को जानने का माध्यम बन रहे हैं। होम स्टे योजना भी ग्रामीण आर्थिकी एवं स्वरोजगार के माध्यम बन रहे हैं। वे स्वयं जनपदों के भ्रमण के दौरान होम स्टे में निवास कर रहे हैं। इसका अनुभव अविस्मरणीय एवं आत्मीयता के भाव वाला रहता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पास गंगा, यमुना, काली, शारदा जैसी नदियों के साथ 71 प्रतिशत भू-भाग वन व पर्वतों वाला है। देवों की हमारे ऊपर कृपा है। हमारे प्रदेश का हर क्षेत्र एक डेस्टिनेशन है। हम अपनी इन समृद्ध विरासतों के साथ आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में भारत के अमृत काल का लक्ष्य भी देश व देशवासियों को विकास के नये शिखर पर पहुंचाना है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत प्रगतिशील देश के रूप में पहचान बना रहा है। कोरोना के बावजूद हमारी अर्थव्यवस्था विश्व में 10 वीं से 5वें स्थान पर पहुंची है। देश आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। निर्यात बढ़ रहा है, डिजिटल ट्रांजेक्शन 40 प्रतिशत देश में हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास में नवाचार के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। यह संवाद समस्याओं के समाधान की भी राह प्रशस्त करेगा, इसकी भी उन्होंने उम्मीद जतायी।

वित्त मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल ने कहा कि बजट से पूर्व विषय विशेषज्ञों से सुझाव एवं विचार आमंत्रित करने के ऐसे प्रयास गत वर्ष भी किये गये थे। यहां प्राप्त सुझावों को बजट का हिस्सा बनाने के प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास में हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को अग्रणी राज्यों में शामिल करने के प्रयासों में सरकार के साथ समाज के सभी जिम्मेदार नागरिक एवं विषय विशेषज्ञों की भी बड़ी भूमि रहती है।
अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर आपसी संवाद की यह अभिनव पहल की गई है। इससे अर्थ व्यवस्था को मजबूती तथा विकास की गति को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विकास, नागरिकों की क्षमता, योग्यता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराना तथा नागरिकों के जीवन में खुशहाली लाने के प्रयासों में ऐसे आयोजन प्रेरणा का भी कार्य करते हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान एवं मेयर सुनील उनियाल गामा ने भी अपने विचार रखे।
इस अवसर पर जिन्होंने अपने सुझाव रखे उनमें इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता, उत्तराखण्ड होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप साहनी, दून स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के प्रो. ममगाई, सीआईआई की अध्यक्ष सोनिया गर्ग, अध्यक्ष व्यापार मण्डल अनिल गोयल, नथुवावाला वार्ड मेम्बर स्वाति डोभाल, प्रधान संघ ऊधम सिंह नगर के अध्यक्ष भास्कर, आंचल समिति के अध्यक्ष दुष्यंत सिंह रावत, एपल फेडरेशन उत्तराखण्ड के अध्यक्ष विपिन पैन्यूली, चम्पावत के वागवान हरीश चन्द्र जोशी, मौन उत्पादक संघ की अध्यक्ष निर्मला नेगी, अध्यक्ष स्वर्णा जैविक बासमती उत्पादक संघ यशपाल सिंह राणा आदि शामिल थे।
इस अवसर पर सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, दिलीप जावलकर, डॉ पंकज कुमार पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में विषय विशेषज्ञ एवं अधिकारी गण उपस्थित थे।