सीएम धामी ने संत समागम और हरि कथा को जीवन का सर्वोच्च सौभाग्य बताया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज देहरादून स्थित रेंजर्स ग्राउंड में विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित संतजनों, श्रद्धालुओं एवं गणमान्य नागरिकों का अभिनंदन करते हुए कार्यक्रम की गरिमा को नमन किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजनों में सम्मिलित होना जीवन का अत्यंत सौभाग्यपूर्ण क्षण होता है। उन्होंने संतों के सानिध्य और उनके मार्गदर्शन को जीवन के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि ऐसे अवसर व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति और आत्मिक शांति की ओर अग्रसर करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कथा व्यास ‘धर्मरत्न’ परमपूज्य देवकीनंदन ठाकुर महाराज के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके जीवन को भक्ति, साधना और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराज जी ने अल्पायु में ही श्रीमद्भागवत महापुराण को कंठस्थ कर समाज को आध्यात्मिक दिशा देने का कार्य प्रारंभ कर दिया था, जो अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि महाराज जी का अनुशासन और तपस्या समाज के लिए अनुकरणीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे सेवा कार्य मानवता के कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विशेष रूप से “प्रियाकांत जू विद्या धन योजना” के माध्यम से बेटियों की शिक्षा के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं और समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं।

मुख्यमंत्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण को आध्यात्मिक चेतना का आधार बताते हुए कहा कि यह ग्रंथ भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और धर्म का समन्वय प्रस्तुत करता है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उपदेशों के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों का सरल समाधान मिलता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब भौतिकता की दौड़ में मनुष्य मानसिक रूप से अशांत है, ऐसे में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण आंतरिक शांति और आत्मबोध का मार्ग प्रशस्त करता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण, केदारनाथ और बद्रीनाथ धामों का पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर तथा महाकाल लोक जैसी परियोजनाएं भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्स्थापित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। केदारखंड और मानसखंड के मंदिरों के सौंदर्यीकरण के साथ ही हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार का कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना कर भारतीय संस्कृति, दर्शन और इतिहास के अध्ययन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इसी क्रम में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है। साथ ही समानता और न्याय की स्थापना हेतु समान नागरिक संहिता लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।

उन्होंने अंत में कहा कि सरकार समाज में समरसता, सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

इस अवसर पर विभिन्न संत-महात्मा, विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

संतो के समागम में, मुख्यमंत्री धामी का यूसीसी लागू करने पर हुआ सम्मान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आचार्य शिविर, सेक्टर-09, गंगेश्वर मार्ग, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में आयोजित समानता के साथ समरसता कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर सभी संतो ने उत्तराखंड राज्य में सर्वप्रथम समान नागरिक संहिता लागू करने पर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। संतो द्वारा पुष्पमाला के साथ मुख्यमंत्री को सम्मानित भी किया गया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी संतो को धन्यवाद अर्पित करते हुए कहा कि त्रिवेणी की पवित्र भूमि और महाकुंभ के शुभ अवसर पर पूज्य संतों का आशीर्वाद मिलना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत की कल्पना में पूज्य संतों का आशीर्वाद सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा समान नागरिक संहिता लागू करना, विकसित भारत की ओर कदम बढ़ाना है। मेरा जो सम्मान संतों ने किया है, वो उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक का सम्मान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 विधानसभा चुनाव से पहले हमने उत्तराखंड की जनता के सामने समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प रखा था। उन्होंने कहा जनता ने हमें अपना आशीर्वाद दिया। सरकार बनने के बाद सबसे पहले मंत्रिमंडल की बैठक में समान नागरिक संहिता के लिए कमेटी का गठन किया गया। जिसके बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड की राज्य सरकार ने देश की आजादी के बाद सबसे पहले उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू किया।

मुख्यमंत्री ने कहा देवभूमि में किसी भी धर्म, जाति के रहने वाले लोगों के लिए अब समान कानून हैं। प्रधानमंत्री के आशीर्वाद के कारण ही हम उत्तराखंड में यूसीसी लागू कर पाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने भी समान कानूनों का प्रावधान किया था। उत्तराखंड देवभूमि है, हमारा राज्य गंगा, यमुना, चार धामों, आदि कैलाश, संतों का प्रदेश है। उत्तराखंड राज्य में प्रत्येक घर का सदस्य सेना में है। देश के हर स्थान में देवभूमि का युवा, मां भारती की सेवा कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा महाकुंभ हमारी सनातन संस्कृति की विशालता का एक प्रतीक सूत्र है। महाकुंभ के अवसर पर सभी महान संतों का आशीर्वाद मिलना उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। हमारी सनातन संस्कृति सदैव समरसता और समानता की संभावक रही है। सनातन संस्कृति हम सबको समानता का अधिकार देना सिखाती है। सनातन संस्कृति की प्रेरणा से राज्य सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने का साहसिक निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता न्याय और समानता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। देवभूमि उत्तराखंड से समान नागरिक संहिता की यह गंगा अवश्य ही संपूर्ण देश में जाएगी। यह समान कानून देश को दिशा दिखाने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा यूसीसी प्रधानमंत्री के एक भारत श्रेष्ठ भारत के संकल्प को भी पूरा करती है। यह हमारी भावी पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने 2022 में दिल्ली में श्रद्धा वॉकर की हत्या की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद इस प्रकार की घटना पूर्ण रूप से बंद हो जाएगी। उन्होंने कहा अब हमारी बेटियों के साथ कोई भी ऐसा अपराध नहीं कर पाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा उन्हें पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में सभी राज्यों में यूसीसी लागू किया जाएगा।

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि उत्तराखंड जैसा दिव्य स्थान कोई नहीं है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री सभी संतो के बेहद प्रिय हैं। महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि भारत के सभी संत मुख्यमंत्री धामी के साथ हैं। छोटा राज्य होने के बाद भी उत्तराखंड सबसे बड़ा बन गया है, जिसमें समान नागरिक संहिता सबसे पहले लागू हो गई है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री धामी ने यूसीसी लागू करके भारत को बल दिया है। अब उत्तराखंड के साथ अन्य राज्य भी यूसीसी लागू करने की ओर कदम बढ़ाएंगे।

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी लागू कर समाज में भेदभाव को खत्म कर दिया है। उत्तराखंड सरकार ने यह साबित कर दिया है कि वो भारतीय परंपराओं के प्रति कितने संवेदनशील है। उन्होंने कहा हम सभी संत गण अत्यंत गौरवान्वित है कि हम जिस राज्य से आते हैं, जहां हम रहते हैं, जो हमारी जन्मभूमि, कर्मभूमि है, उस राज्य के मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता लागू करके दिखा दिया है। उन्होंने कहा यूसीसी कि कमेटी ने स्वयं जाकर साधु संतों से भी संवाद किया था।

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि हमारे देश के सभी साधु संत आज मुख्यमंत्री धामी के सम्मान के लिए यहां उपस्थित है। अब दूसरे राज्यों में भी मुख्यमंत्री धामी के कारण यूसीसी लागू होगा।

स्वामी चिदानंद मुनि महाराज ने कहा कि चार धामों, उत्तराखंड की पावन धरती, मां गंगा, मां यमुना ने मुख्यमंत्री धामी को चुना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तराखंड की पवित्र भूमि से विशेष प्रेम है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री धामी ने उपासक के रूप में उत्तराखंड की सेवा का संकल्प लिया है। पूरे कुंभ मेले में कई कार्यक्रम हुए पर इस कार्यक्रम में पूरे विश्व को दिखाया है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता की मांग को पूरी करके भारत माता का मान बढ़ाया है। उत्तराखंड को जो लोग बदलने की सोचते थे उन सब पर मुख्यमंत्री धामी ने नकेल कसी है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करके सर्व समाज की बात की है। इस देश में आत्म मंथन करके जो अमृत आया, वो समान नागरिक संहिता है। उन्होंने कहा यूसीसी लागू करके मुख्यमंत्री धामी ने भारत के लिए एक नई राह दिखाई है।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी जी महाराज, महंत रविंद्रपुरी महाराज, महंत हरि गिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर नारायण गिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर साध्वी निरंजन ज्योति, महामंडलेश्वर स्वामी आशुतोषानंद गिरी महाराज एवं अन्य संतगण बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।