आरटीआई से सरकारी कार्मिकों में ईमानदारी से कार्य करने की प्रवृति बढ़तीहै-मुख्य सचिव

सचिवालय के लोक सूचना अधिकारियों को आरटीआई की बेहतर जानकारी हेतु प्रोत्साहित करते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि सूचना के अधिकार के मजबूत होने से व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने के साथ ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लगता है। आरटीआई से सरकारी कार्मिकों में ईमानदारी से कार्य करने की प्रवृति बढ़ती है। सूचना का अधिकार अधिनियम आने से नागरिकों को सरकार के कार्याे की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार मिला है।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने शुक्रवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड सूचना आयोग द्वारा सचिवालय के सभी विभागों के लोक सूचना अधिकारियों के लिए आयोजित कार्यशाला में प्रतिभाग किया।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि उत्तराखण्ड सूचना आयोग द्वारा सचिवालय के विभिन्न विभागों के लोक सूचना अधिकारियों हेतु आरटीआई पर यह कार्यशाला आयोजित करना सराहनीय पहल है। आरटीआई की बेहतर जानकारी होने से लोक सूचना अधिकारी अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन अधिक कुशलता से कर पाएंगे। इससे अधिक से अधिक अपीलों का निस्तारण प्राथमिक स्तर पर ही हो जाएगा। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि जिला स्तर तथा विभागीय स्तर पर भी आरटीआई पर कार्यशालाओं को आयोजन किया जाना चाहिए। उन्होंने आयोग के कार्यों को अधिकाधिक ऑनलाइन करने की बात कही जिससे अधिकाधिक पारदर्शिता बढ़ेगी तथा दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को सुविधा होगी।
कार्यशाला में सूचना आयुक्त योगेश भट, सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी सहित विभिन्न विभागों के लोक सूचना अधिकारी मौजूद रहे।

शैक्षिक भ्रमण पर उत्तराखंड आए सीआरपीएफ के प्रशिक्षु अधिकारी

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से सचिवालय में शैक्षिक भ्रमण पर उत्तराखंड आए सीआरपीएफ के प्रशिक्षु अधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट की। मुख्य सचिव और सीआरपीएफ के प्रशिक्षु अधिकारियों के मध्य राज्य में आपदा प्रबंधन, सीमांत गांवो में विकास कार्य और राज्य में संचालित विकास योजनाओं के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में राज्यों की सहायता में सीआरपीएफ की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। देशव्यापी उपस्थिति के साथ, राज्य पुलिस के साथ सहयोग करते हुए, विभिन्न परिस्थितिजन्य मांगों के साथ तेजी से समायोजन करने की इसकी उल्लेखनीय क्षमता ने सीआरपीएफ को व्यापक रूप से स्वीकृत बलों में से एक होने की प्रतिष्ठा प्रदान की है।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को उज्जवल भविष्य हेतु शुभकामनाएं दी।

मुख्य सचिव ने 31 जुलाई तक डीपीआर भेजने के निर्देश दिए

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने लोक निर्माण, सिंचाई, पशुपालन, स्कूली शिक्षा, कौशल तथा तकनीकी शिक्षा विभाग को 24 घण्टे की डेडलाइन देते हुए अवशेष 383.11 करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट तत्काल नाबार्ड को भेजने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मुख्य सचिव ने 31 जुलाई की समय सीमा निर्धारित करते हुए सभी विभागों को वित्त विभाग को डीपीआर भेजने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने विभागों को भविष्य में नाबार्ड की समयसीमा के अनुसार ही अपने प्रोजेक्ट के बजट बनाकर समयबद्धता से भेजने की सख्त हिदायत दी है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने विभागों को अपने प्रोजेक्ट के प्रस्ताव, आहरण, प्रोजेक्ट कम्पलीशन सर्टिफिकेट (पीसीसी), प्रोजेक्ट कम्पलीशन रिपोर्ट (पीसीआर) को ऑनलाइन जमा करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने विभागों को प्रोजेक्ट पूरे होने पर एक सप्ताह के भीतर प्रोजेक्ट कम्पलीशन सर्टिफिकेट तथा छः माह के भीतर प्रोजेक्ट कम्पलीशन रिपोर्ट (पीसीआर) जमा करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही राधा रतूड़ी ने विभागों को शहरी अवसंरचना विकास निधि (यूआईडीएफ) के तहत पार्किंग, मलिन बस्तियों के पुनर्विकास एवं शहरी वनीकरण के प्रोजेक्ट को शीर्ष प्राथमिकता पर नाबार्ड को भेजने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव रतूड़ी ने विभागों को सख्त हिदायत दी है कि नाबार्ड को सिर्फ उच्च गुणवत्ता वाले तथा योग्य प्रोजेक्ट ही प्रस्तावित किए जाने चाहिए। प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता भी विभागों द्वारा ही तय की जानी चाहिए तथा विभागों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि फण्डिंग की डुप्लीकेसी ना हो। उन्होंने अपेक्षाकृत छोटे प्रोजेक्ट को नाबार्ड में प्रस्तावित ना करने का सुझाव दिया है। मुख्य सचिव ने विभागों को दिए गए लक्ष्य के 50 प्रतिशत प्रोजेक्ट 30 जून, 60 प्रतिशत प्रोजेक्ट 31 जुलाई तथा 100 प्रतिशत प्रोजेक्ट 15 अगस्त तक वित्त विभाग को भेजने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने वित्त विभाग को भी प्रतिपूर्ति हेतु बिल नाबार्ड में जमा कराने हेतु प्रत्येक चार माह का टारगेट दिया है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सभी विभागों को कड़ाई से स्पष्ट किया है कि प्रतिपूर्ति लेने में असफल होने वाले विभागों को इस सम्बन्ध में भविष्य में कार्यशैली में सुधार करना होगा। मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को जल स्रोतों एवं नदियों के पुनर्जीवीकरण के प्रोजेक्ट नाबार्ड हेतु प्रस्तावित करने के निर्देश दिए।
बुधवार को सचिवालय में नाबार्ड की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक की अध्यक्षता के दौरान मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि राज्य के ग्रामीण विकास में नाबार्ड द्वारा प्राप्त होने वाली वित्तीय सहायता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
बैठक में जानकारी दी गई कि वित्त विभाग द्वारा कुल 360.47 करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट प्राप्त किए गए हैं जिनमें सिंचाई विभाग से 77.40 करोड़ के 10 प्रोजेक्ट, लोक निर्माण विभाग से 193.11 करोड़ के 89 प्रोजेक्ट, तकनीकी शिक्षा से 66.96 करोड़ के 4 प्रोजेक्ट, पशुपालन से 9.52 करोड़ का 1 प्रोजेक्ट, ग्रामीण निर्माण विभाग से 13.4811 करोड़ के 5 प्रोजेक्ट हैं। वर्ष 2023-24 में राज्य को नाबार्ड द्वारा कुल अनुमोदित 904.4 करोड़ के सापेक्ष भुगतान 954.9 करोड़ रहा है। वर्ष 2024-25 के लिए आरआईडीएफ के तहत 1200 करोड़ का अनुमोदित लक्ष्य तथा 969 करोड़ रूपये का प्रतिपूर्ति लक्ष्य रखा गया है।
राज्य में नाबार्ड के तहत ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) से 2.05 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिचाई सुविधाओं का सृजन एवं पुनर्द्धार किया गया है। लगभग 14,766 किमी ग्रामीण सड़कों के नेटवर्क का निर्माण एवं सुधार किया गया है। 27307 मीटर ब्रिज का निर्माण हो चुका है। 23.77 लाख ग्रामीण आबादी को पेयजल सुविधा मिल चुकी है। 241 स्कूल एवं आईटीआई का निर्माण एवं पुनर्द्धार हो चुका है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव आनंद वर्धन, सचिव दिलीप जावलकर, सीजीएम नाबार्ड सहित वित्त, लोक निर्माण, सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

मौसम के पूर्व चेतावनी के आधार पर लोगों को नियमित अलर्ट मोड पर रखें-धामी

15 जून से पहले मानसून के दृष्टिगत सभी तैयारियां पूर्ण की जाय। सभी विभाग 15 जून तक आपदा प्रबंधन के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती करना सुनिश्चत करें। एसटीपी प्लांट और पुराने पुलों का सेफ्टी ऑडिट किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि बिजली की तारों से कोई घटना घटित न हो। मानसून सीजन के दृष्टिगत मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए आपातकालीन स्थिति में हेली एम्बुलेंस की व्यवस्था रखी जाए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आगामी मानसून की तैयारियों की बैठक के दौरान ये निर्देश अधिकारियों को दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिवृष्टि से पिछले सालों में क्या चुनौतियां सामने आई और किन-किन क्षेत्रों में अधिक आपदाएं आई एवं इस तरह की चुनौतियों का सामना करने के लिए शासन और जनपद स्तर पर क्या तैयारियां की गई हैं, इसका पूरा एक्शन प्लान प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने निर्देश दिये कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मौसम के पूर्वानुमान की सटीक जानकारी लोगों तक समय पर पहुंचे। मौसम के पूर्व चेतावनी के आधार पर लोगों को नियमित रूप से अलर्ट मोड पर रखें। उन्होंने कहा कि मौसम के पुर्वानुमान और जन जागरूकता से अतिवृष्टि और आपदा के प्रभाव को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि जनपदों में ऐसे क्षेत्र जहां भू-स्खलन की समस्याएं रहती हैं, उन्हें चिन्हित कर जो भी आवश्यक व्यवस्थाएं करवाने की आवश्यकता है, समय पर की जाए। जिन क्षेत्रों में बरसाती नदी और नाले उफान पर आते हैं, उनके लिए भी वैकल्पिक व्यवस्थाओं के लिए अभी से प्लान बना कर रखे जाएं। मानसून के दृष्टिगत विभिन्न कार्यों के लिए शासन स्तर से जो धनराशि की आवश्यकता है, उसका यथाशीघ्र प्रस्ताव भेजा जाए। अतिवृष्टि के कारण फसलों को होने वाले नुकसान का तुरंत आकलन कर मानकों के अनुसार यथाशीघ्र क्षतिपूर्ति की व्यवस्था रखी जाए। मानसून के दृष्टिगत पर्वतीय जनपदों में आवश्यक दवाओं, खाद्य सामग्री एवं अन्य मूलभूत आवश्यकताओं से संबंधित सभी व्यवस्थाएं पर्याप्त मात्रा में रखी जाए। आपदा कि स्थिति में रिस्पांस टाइम कम से कम रखा जाए। मानसून अवधि में सभी जिलाधिकारी मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार अपने जनपदों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यकतानुसार छुट्टी की घोषणा करें, स्कूल जाने के पैदल मार्गों में नदी और नाले वाले स्थानों पर वैकल्पिक मार्ग तलाशे जाएं। हर जनपद में बड़े रपटे चिन्हित किये जाएं एवं वहां पर सुरक्षा की दृष्टि से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि आपदा के दृष्टिगत त्वरित राहत एवं बचाव कार्य के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था रखी जाए। आपदा प्रबंधन की दृष्टि से अल्मोड़ा जनपद के सरियापनी में एसडीआरएफ बटालियन खोलने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन की दृष्टि से विभिन्न विभागों द्वारा शासन से जो धनराशि की मांग की जा रही है, वह धनराशि यथाशीघ्र संबंधित विभागों को दी जाए। जिलाधिकारियों द्वारा भी विभिन्न पदों में जो धनराशि की मांग की जा रही है, उन्हें भी शीघ्र धनराशि अवमुक्त की जाए। जिन विभागों को पहले की धनराशि अभी तक अवमुक्त नहीं हुई है, वह शीघ्र दी जाए, इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि मानसून अवधि में सड़कें, विद्युत और पेयजल लाईन बाधित होने की स्थिति में उनकी सुचारू व्यवस्थाओं के लिए रिस्पांस टाईम कम से कम रखा जाए और वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने निर्देश दिये कि अतिवृष्टि से पिछले वर्ष के जो कार्य अभी तक पूर्ण नहीं किये गये हैं, उन्हें 15 जून तक पूर्ण किया जाए।
बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद् विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, एल. फैनई, डीजीपी अभिनव कुमार, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन, सचिव आर. मीनाक्षी सुदंरम, शैलेश बगोली, अरविन्द सिंह ह्यांकी, दिलीप जावलकर, सचिन कुर्वे, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डेय, सचिव आर. राजेश कुमार, एस.एन.पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, वर्चुअल माध्यम से कुमांऊ कमिश्नर दीपक रावत एवं सभी जिलाधिकारी उपस्थित रहे।

15 दिनों में उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ की वेबसाइट और पोर्टल तैयार करने के निर्देश

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सम्बन्धित अधिकारियों को अगले 15 दिनों में उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ की वेबसाइट एवं पोर्टल तैयार करने की डेडलाइन दी हैं। इसके साथ ही एसीएस ने देश और दुनियाभर में रह रहे उत्तराखण्ड मूल के प्रवासियों का सटीक डाटा बेस प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने जानकारी दी कि जल्द ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप राज्य में प्रत्येक वर्ष प्रवासी उत्तराखण्ड दिवस मनाने की परम्परा आरम्भ की जाएगी। सचिवालय में उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ के गठन की औपचारिकताओं को जल्द से जल्द पूरा करने के सम्बन्ध में बैठक लेते हुए एसीएस राधा रतूड़ी ने उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ से जुड़े अधिकारियों को हिदायत दी कि उत्तराखण्ड मूल के प्रवासियों के लिए लॉंच की जाने वाली वेबसाइट पर प्रवासियों को पंजीकरण की सुविधा दी जाए तथा वेबसाइट पर ही उनकी शिकायतों निवारण हेतु सिस्टम विकसित जाए। एसीएस ने उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ के गठन के लिए अन्य राज्यों के प्रवासी सेल के तुलनात्मक अध्ययन के पश्चात उत्तराखण्ड हेतु एक ठोस एक्शन प्लान बनाने तथा फोकस एरिया तय करने के निर्देश दिए। राधा रतूड़ी ने निर्देश दिए हैं कि उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ में उत्तराखण्ड मूल के प्रवासियों के भूमि सम्बन्धित एवं अन्य मुद्दों व शिकायतों के निवारण हेतु भी व्यवस्था की जाय।
आज के बैठक में उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ के कार्यालय में अधिकारियों एवं कार्मिकों तैनाती, उत्तराखण्ड मूल के प्रवासियों के संबंध में डाटा बेस तैयार करने हेतु देश के विभिन्न राज्यों, शहरों और विदेशों में उत्तराखण्डी प्रवासियों के संगठनों, एसोसिएशन एवं संस्थानों से सहयोग लेने के सम्बन्ध में निर्णय लिए गए।
एसीएस राधा रतूड़ी ने कहा कि उत्तराखण्ड प्रवासी प्रकोष्ठ दुनिया भर में रह रहे उत्तराखण्ड मूल के लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने वाले सेतु का कार्य करेगा। इसके साथ ही यह प्रकोष्ठ प्रवासियों के निवेश प्रस्तावों पर शीघ्र कार्यवाही, उनकी समस्याओं के समाधान तथा सरकार एवं प्रवासियों के बीच बेहतर सामंजस्य बनाने में मदद करेगा।
बैठक में सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम, विनय शंकर पाण्डेय, महानिदेशक सिडकुल रोहित मीणा, सदस्य सुधीर नौटियाल सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहे।

ड्रोन के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए ड्रोन पॉलिसी का प्रचार प्रसार करने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को सचिवालय में प्रदेश को ड्रोन पॉलिसी के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि ड्रोन क्षेत्र में नवोन्मेषी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। इसके लिए देश के प्रौद्योगिकी संस्थानों से सहयोग लेने के लिए अनुबंध किए जाएं।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड मोस्ट हेलीकॉप्टर फ्रेंडली स्टेट है। इससे एक ओर हैली सेवा को अत्यधिक फायदे हैं। उन्होंने कहा कि ड्रोन कॉरिडोर के लिए जीरो रिस्क एरिया पर फोकस किया जाए। कहा कि पिटकुल और यूपीसीएल की बहुत सी हाई टेंशन और लो टेंशन लाइन्स को ध्यान में रखते हुए यूपीसीएल और पिटकुल से आपसी सामंजस्य स्थापित किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि ड्रोन के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए ड्रोन पॉलिसी का प्रचार प्रसार किया जाए। साथ ही प्रदेश के युवाओं को ड्रोन के क्षेत्र में प्रशिक्षण और रोजगार की दिशा में भी कार्य किए जाने की आवश्यकता है। कहा कि प्रदेश के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों से ड्रोन के विभिन्न प्रकार के कोर्स कराए जा सकते हैं।
इस अवसर पर सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, निदेशक आईटीडीए विनीत कुमार एवं आईजी (सुरक्षा) राजीव स्वरूप सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सड़कों से गौ वंश को हटाने के लिए युद्ध स्तर पर हो गौशालाओं का निर्माण-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने बुधवार को सचिवालय में प्रदेश में गौशालाओं के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में अधिक से अधिक गौशालाओं का निर्माण शीघ्र से शीघ्र किया जाए ताकि प्रदेश की सड़कों से गायों को हटाकर गौशालाओं में शिफ्ट किया जा सके।
मुख्य सचिव ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में शहरी विकास एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जिला परिषद के अंतर्गत यह कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि योजना से प्रदेश को पूर्ण रूप से सैचुरेट करने के लिए बजट की व्यवस्था मिसिंग लिंक से की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि गौशालाओं को बड़ा बनाया जाए ताकि आने वाले 10-15 सालों तक उन्हें फिर से बढ़ाने की आवश्यकता न पड़े। इसके लिए पूर्व में भेजे गए छोटी गौशालाओं के प्रस्तावों को वापस लौटाकर अगले एक हफ्ते में बड़ी गौशालाओं के प्रस्ताव मांगे जाएं। उन्होंने अधिकारियों से अगले 10 दिन में सड़कों को लावारिस गायों से मुक्त किए जाने के लिए टाईमलाईन सहित कार्ययोजना प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि गौशालाओं के मैनेजमेंट और मॉनिटरिंग के लिए मैकेनिज्म भी तैयार किया जाए।
इस अवसर पर सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, एच.सी. सेमवाल एवं अपर सचिव अरूणेन्द्र चौहान सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश, सचिव स्थलीय निरीक्षण कर वास्तुस्थिति का ले जायजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में लोक निर्माण विभाग की बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि 30 नवम्बर तक सड़को को पूर्ण रूप से गड्ढा मुक्त बनाया जाय। सचिव लोक निर्माण विभाग एवं अन्य सर्कल ऑफिसर सड़कों का स्थलीय निरीक्षण करें। उन्होंने निर्देश दिये कि निर्धारित समयावधि में सड़को के गड्ढ़ा मुक्त न होने की स्थिति में और कार्यों के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों पर मौके पर ही निलंबन की कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे कभी भी सड़कों के निर्माण कार्यों एवं पैच वर्क से संबधित कार्यों का औचक निरीक्षण कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि स्मार्ट सिटी के कार्यों और आतंरिक सड़क मार्गों के कार्यों में भी युद्धस्तर पर कार्य किये जाएं। शहर में सड़कों के निर्माण कार्य रात्रि के समय तेजी से किये जाएं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये जो भी सड़के बनाई जा रही हैं, उनमें गुणवत्तापूर्वक कार्य हो, इसकी निगरानी के लिए सचिव लोक निर्माण विभाग को नोडल अधिकारी बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जहां पर भी निर्माण कार्य प्रगति पर है वहां पर बैरिकेटिंग सही तरह से लगे, इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि लोगों को आवागमन के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। सड़कों पर डिवाईडर, रिफ्लेक्टर, साइनेज लाईटिंग की अच्छी व्यवस्थाएं रखने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और आपदा प्रबंधन पर 6वीं अन्तरराष्ट्रीय कांग्रेस दो बड़े आयोजन होने इसके दृष्टिगत भी सभी तैयारियां समय पर पूर्ण कर ली जाएं। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि जिन क्षेत्रों में पानी का बहाव अधिक होता है, ऐसे क्षेत्रों में व्हॉइट टापिंग तकनीक का प्रयोग किया जाए। सड़कों से संबंधित जो भी योजनाएं बनाई जा रही हैं, वे आगामी 50 साल की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि यह भी सुनिश्चित किया जाए की सड़कों पर बिजली के तार न झूल रहे हों। सड़कों के चौड़ीकरण के दौरान बिजली के पोल को भी सड़कों से बाहर शिफ्ट किया जाए। सड़कों पर किसी को भी अतिक्रमण न करने दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन एवं तीर्थाटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। राज्य में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में हर साल तेजी से वृद्धि हो रही है। इसके लिए रोड कनेक्टिविटी का मजबूत होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि सड़कों के विस्तार और विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हमें तेजी से आगे बढ़ना होगा।

सिलक्यारा में राहत एवं बचाव में जुटी एजेंसियों को दी जाए हर संभव मदद
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि सिलक्यारा उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सुरंग में फंसे श्रमिकों के राहत एवं बचाव कार्यों में लगी एजेंसियों को हर संभव मदद दी जाए। श्रमिकों के परिजनों से भी निरंतर समन्वय स्थापित कर उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। जिला प्रशासन उत्तरकाशी के साथ लगातार समन्वय बनाकर किसी भी प्रकार की आवश्यकता पड़ने पर शीघ्र सहायता करने के भी निर्देश मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सभी विभाग राहत और बचाव कार्य में लगी टीमों के साथ समन्वय बना कर रखें।

बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, अपर सचिव विनीत कुमार, नगर आयुक्त देहरादून मनुज गोयल एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए सचिवालय में खुला आउटलेट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में मिलेट बेकरी आउटलेट का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य के मोटे अनाजों पर आधारित उत्पादों को बढ़ावा देने और महिला स्वयं सहायता समूहों की आजीविका में वृद्धि करने के उद्देश्य से सचिवालय परिसर में मिलेट बेकरी का आउटलेट शुभारंभ किया गया है।
राज्य में ग्रामीण महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों द्वारा स्थानीय मंडुआ, झंगोरा, ज्वार, चौलाई इत्यादि अनाजों के उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इन उत्पादों के मूल्य संवर्धन के लिए जनपद देहरादून के रायपुर ब्लॉक तथा जनपद पौड़ी के पौड़ी ब्लॉक में 2 मिलेट उत्पादों की बेकरी प्रारम्भ की गयी है। मिलेट बेकरी में मंडुआ तथा झंगोरा का प्रसंस्करण कर बिस्किट, ब्रेड तथा पिज्जा बेस व अन्य उत्पाद तैयार किये जा रहें है। अन्तर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष 2023 के अन्तर्गत स्थानीय मोटे अनाजों के उत्पादन और उपभोग को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में अनेक कार्यक्रम किये जा रहे हैं।
राज्य सरकार द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। वर्ष 2025 तक सवा लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक 40 हजार 270 महिलायें लखपति दीदी बनायी जा चुकी है। चयनित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को बेकरी विशेषज्ञ के माध्यम से बेकरी उत्पाद हेतु प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है जिससे अधिक संख्या में समूहों द्वारा बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता तथा पोषण से युक्त बेकरी उत्पाद तैयार कर लोगों को उपलब्ध करा सके।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव राधिका झा एवं ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

ठोस कूड़ा प्रबंधन के लिए कार्य योजना तैयार करें-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने बुधवार को सचिवालय में प्रदेश के सभी स्थानीय निकायों में ठोस कूड़ा प्रबन्धन के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को ठोस कूड़ा प्रबंधन के लिए कार्य योजना तैयार किए जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी स्थानीय निकायों से 100 प्रतिशत सेग्रीगेशन ऐट सोर्स लागू किया जाए।
मुख्य सचिव ने सभी स्थानीय निकायों में कूड़ा उठाने वाले वाहनों की संख्या की जानकारी माँगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों के लिए आवश्यक वाहनों की शीघ्र व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कहा कि सड़कों से बड़े डस्टबिन हटाए जाने चाहिए। उन्होंने सभी यूएलबी से आवासीय भवनों, व्यावसायिक भवनों और संस्थानों से श्रेणीवार घर-घर से कूड़ा उठान और कूड़े का स्रोत से पृथक्करण (सेग्रीगेशन एट सोर्स) की रिपोर्ट भी तलब की। उन्होंने इसके लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग और थर्ड पार्टी सर्वे की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिये।
मुख्य सचिव ने पेयजल निगम द्वारा संचालित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के सम्बन्ध में भी जानकारी ली। उन्होंने सभी एसटीपी का थर्ड पार्टी सर्वे और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिये गए। मुख्य सचिव ने प्रमुख सचिव शहरी विकास को भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर अपनी टीम दुरुस्त किए जाने के निर्देश दिये।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर के सुधांशु सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।