सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो को मजबूत बनाते हुए 15 दिन में मीटिंग कराए जाने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं के कार्य-कलापों का प्रभावी ढंग से अनुश्रवण एवं उनके कार्मिकों के अधिष्ठान सम्बन्धी विषयों के समाधान के सम्बन्ध में बैठक ली।

मुख्य सचिव ने कहा कि सार्वजनिक उद्यम एवं निगमों को 3 श्रेणियों में बांटा जाए। अच्छा प्रदर्शन कर मुनाफे में रहने वाले सार्वजनिक उपकर्म एवं निगम श्रेणी ‘ए‘ में, औसत प्रदर्शन करने वाले सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों एवं स्वायत्तशासी संस्थानों को श्रेणी ’बी’ में और निम्न प्रदर्शन करने वाले सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों एवं स्वायत्तशासी संस्थानों को ‘सी‘ श्रेणी में रखा जाए। अच्छा प्रदर्शन करने वाले निगम एवं संस्थानों को भत्तों आदि के लिए स्वतंत्रता दी जाएगी एवं अपने स्तर से निर्णय ले सकेंगे। ’बी’ और ’सी’ श्रेणी के सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम आदि अच्छा प्रदर्शन कर निर्धारित मानदण्डों को पूरा कर श्रेणी ‘ए‘ में आ सकेंगे। इससे निगमों में प्रतियोगी भावना भी जागृत होगी और प्रदर्शन में सुधार आएगा।

मुख्य सचिव ने सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो को मजबूत बनाते हुए 15 दिन में मीटिंग कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं के कार्य-कलापों का प्रभावी ढंग से अनुश्रवण एवं लक्ष्य आदि निर्धारित करने सम्बन्धी विषयों के समाधान हेतु केन्द्र सरकार द्वारा की गयी व्यवस्था को राज्य में भी लागू करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, अरविन्द सिंह ह्यांकी, विनय शंकर पाण्डेय सहित विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

कॉफी टेबल बुक दि होली गंगा का सीएम ने किया विमोचन


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय परिसर में गढ़वाल मण्डल विकास निगम द्वारा स्थापित कैन्टीन का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जी.एम.वी.एन. द्वारा प्रकाशित कॉफी टेबल बुक ‘‘दि होली गंगा’’ का भी विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिवालय परिसर में जी.एम.वी.एन. की कैन्टीन खुलने से सचिवालय कार्मिकों के साथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से सचिवालय आने वाले आगन्तुकों को भी जलपान व भोजन आदि की अच्छी सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने जी.एम.वी.एन. को कैन्टीन के माध्यम से लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।

जी.एम.वी.एन. के प्रबंध निदेशक विनोद गिरी गोस्वामी ने मुख्यमंत्री को जी.एम.वी.एन. द्वारा संचालित कार्यकलापों की जानकारी दी।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी सहित जी.एम.वी.एन. के अधिकारीगण उपस्थित थे।

सिल्क्यारा में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन का सीएम ने लिया अपडेट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने आज सचिवालय स्थित आपदा नियंत्रण कक्ष में पहुंचकर उत्तरकाशी के सिल्क्यारा में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन का अपडेट लिया तथा महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

एसीएस राधा रतूड़ी ने सिल्क्यारा में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की अद्यतन स्थिति एवं टनल में फंसे श्रमिकों की कुशलक्षेम की जानकारी ली। आपदा नियंत्रण कक्ष में सम्बन्धित अधिकारियों द्वारा अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी को जानकारी दी गई कि ढही हुई सुरंग के 40 मीटर के लिए शॉटक्रेटिंग के साथ खुदाई का कार्य प्रगति पर है। बाएं और दाएं दोनों तरफ शीर्ष से 10 मीटर ऊपर गुहा बन गई है, सुरंग के साथ चिमनी का निर्माण शुरू हो गया है।
अतिरिक्त शॉटक्रीट मशीन को आरवीएनएल पैकेज-3 से कार्य स्थल पर स्थानांतरित किया गया है। प्राधिकरण अभियंता, टीम लीडर, आरवीएनएल से भूवैज्ञानिक निदेशक, एनएचआईडीसीएल के निदेशक (ए एण्ड एफ), निदेशक (टी) और कार्यकारी निदेशक (टी) और तथा सीजीएम, एनएचएआई के भू-तकनीकी विशेषज्ञों ने ढहने वाली जगह का समय-समय पर दौरा किया है। रात भर और उसके बाद सभी विकल्पों पर विचार किया गया तथा परिणामस्वरूप जो विकल्प कार्यान्वयन के अधीन है उसके तहत अंदर फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए हाइड्रोलिक जैक की मदद से 900 मिमी व्यास वाले एमएस स्टील पाइप को धक्का देना।

अधिकारियों द्वारा एसीएस रतूड़ी को जानकारी दी गई कि सुरंग के अंदर फंसे कार्यबल के पास पानी, भोजन, ऑक्सीजन, बिजली सभी उपलब्ध हैं, छोटे भोजन के पैकेट भी संपीड़ित हवा के साथ एक पाइप के माध्यम से सुरंग के अंदर भेजे गए हैं। श्रमिकों द्वारा खाद्य सामग्री प्राप्त होने की पुष्टि की गई है। श्रमिकों द्वारा बताया गया है कि वे सभी फंसे हुए श्रमिक सुरक्षित हैं। शुक्रवार सुबह 9ः30 बजे तक 22.0 मीटर पाइप पुशिंग का काम पूरा हो चुका है। पांचवें पाइप की पॉजिशनिंग का कार्य प्रगति पर है। स्टील पाइप को सफलतापूर्वक पुश करने के लिए विशेषज्ञों द्वारा कार्य की प्रगति की निगरानी की जा रही है। एनएचआईडीसीएल के निदेशक (ए एंड एफ), निदेशक (टी), कार्यकारी निदेशक (पी) और बीआरओ, एनएचएआई, आरवीएनएल, राइट्स, भारतीय रेलवे, यूएसबीआरएल, इरकॉन, केआरसीएल, प्राधिकरण के इंजीनियर, मेसर्स नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड, एसजेवीएनएल के विशेषज्ञ और डिज़ाइनर मेसर्स बर्नार्ड बचाव अभियान की नज़दीकी निगरानी एवं श्रमिकों की जल्द निकासी के लिए साइट पर मौजूद हैं।

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि रेस्क्यू कार्यों में लगी सभी टेक्निकल एंजेसियों को शासन-प्रशासन एवं अधिकारियों द्वारा सभी आवश्यक सहयोग एवं सहायता ससमय उपलब्ध करवायी जानी चाहिए। एसीएस रतूड़ी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बचाव कार्यों में लगी एंजेसियों और जिलाधिकारी उत्तरकाशी से निरन्तर अपडेट ले रहे हैं तथा कमिशनर गढ़वाल एवं आईजी गढ़वाल के निरन्तर सम्पर्क में हैं। मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों में लगी हुई केंद्रीय एजेंसियों की टीम की हौसला अफजाई की है। केन्द्र सरकार के स्तर से भी रेस्क्यू ऑपरेशन की निरन्तर निगरानी की जा रही है तथा राज्य सरकार को पूरा सहयोग मिल रहा है।

एसीएस ने स्थानांतरण नीति को लेकर शासन ने कर्मचारी संगठनों से माँगे सुझाव

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर स्थानांतरण नीति को लेकर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने शुक्रवार को सचिवालय में प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी/शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस दौरान कार्मिक, न्याय, वित्त विभाग के अधिकारियों समेत सभी संगठनों के प्रतिनिधियों ने नई स्थानांतरण नीति पर विचार विमर्श किया।

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि कार्मिको के हितों को ध्यान रखने के साथ ही प्रदेश की जनता को बेहतर सुविधा मिले, इसी ध्येय के साथ नई स्थानांतरण नीति को लेकर सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं।

अपर मुख्य सचिव ने कार्मिक विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश में कई ऐसे स्थान हैं जो 15-20 साल पूर्व तक अति दुर्गम/दुर्गम की श्रेणी में थे एवं वर्तमान में सड़क एवं अन्य सुविधाओं की वजह से सुगम क्षेत्र में आ गये हैं ऐसे क्षेत्रों का पुनरीक्षण किया जाए। बैठक के दौरान जनपद कैडर, मण्डल कैडर और प्रदेश कैडर के कार्मिकों को एक बार सेवाकाल में गृह जनपद में तैनाती, पदोन्नति और स्थानांतरण में काउन्सलिंग कराने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए। अपर मुख्य सचिव ने सभी कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों से लिखित सुझाव शासन को देने का भी अनुरोध किया है।

इस अवसर पर अपर सचिव वित्त डॉ. वी. षणमुगम , अपर सचिव कार्मिक डॉ ललित मोहन रयाल, अपर सचिव शिक्षा योगेन्द्र यादव, अपर सचिव न्याय रजनी शुक्ला, अपर सचिव स्वास्थ्य अमनदीप कौर समेत विभिन्न कार्मिक संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

मुख्य सचिव ने नाबार्ड से ऋण के लक्ष्यों को लेकर की बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने गुरुवार को सचिवालय में विभिन्न विभागों द्वारा नाबार्ड से ऋण के लक्ष्यों के सम्बन्ध में समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि स्वीकृत प्रस्तावों के सापेक्ष विभागों द्वारा डिस्बर्शमेंट की प्रगति संतोषजनक नहीं है। सभी विभागों को इसमें तेजी लाने की आवश्यकता है। मुख्य सचिव ने नाबार्ड को भी प्रस्तावों की स्वीकृति में तेजी लाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों के सचिवों एवं विभागाध्यक्षों को ऋण वितरण एवं अदायगियों में तेजी लाने के लिए साप्ताहिक समीक्षाएं किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागों को वितरण और अदायगियों में आ रही समस्याओं का निवारण कर शीघ्र कार्यों को पूर्ण किया जाए। उन्होंने विभागीय सचिवों को आरआईडीएफ के अंतर्गत प्रस्तावों को विभागीय कैलेंडर से जोड़ते हुए स्वीकृति से लेकर डिस्बर्शमेंट तक निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराया जाए। उन्होंने प्रोजेक्ट कम्प्लीशन रिपोर्ट्स भी शीघ्र जमा कराए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि अच्छे प्रस्ताव लगातार तैयार कर प्रस्ताव वित्त को भेजे जाने के साथ ही डीपीआर नाबार्ड को भी भेज दी जाए, ताकि समय पर नाबार्ड की भी संस्तुति मिल सके। उन्होंने प्रत्येक सप्ताह और पाक्षिक रूप से प्रस्तावों की लगातार मॉनिटरिंग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने पीएम गति शक्ति उत्तराखण्ड पोर्टल पर भी लगातार अपडेट किए जाने के निर्देश दिए।

बैठक में सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि नाबार्ड से लिए जाने वाले 1090 करोड़ के ऋण के लक्ष्य के सापेक्ष विभागों ने 907.93 करोड़ के प्रस्ताव नाबार्ड को भेज दिए हैं, नाबार्ड ने 501.20 करोड़ के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। शेष प्रस्तावों का परीक्षण प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि 900 करोड़ के डिस्बर्शमेंट के लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक विभागों द्वारा मात्र 273.82 करोड़ का डिस्बर्शमेंट किया गया है।

इस अवसर पर सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, दीपेन्द्र कुमार चौधरी, एस.एन. पाण्डेय, अपर सचिव सी. रविशंकर एवं विनीत कुमार सहित विभागों के विभागाध्यक्ष एवं उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

एसीएस रतूड़ी ने राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल के संबंध में बुलाई बैठक

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के तर्ज पर उत्तराखण्ड में राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल (एसआईएसएफ) के गठन हेतु कार्ययोजना बनाने के सम्बन्ध में सचिवालय में होमगार्ड्स, विभिन्न औद्योगिक संस्थानों, बैंक अधिकारियों, सिडकुल, नागरिक उड्डयन विभाग तथा गृह विभाग के अधिकारियों की बैठक ली।

एसीएस राधा रतूड़ी ने प्रदेश में स्थित सभी बैंकों, एयरपोर्ट्स, हैलीपेड, औद्योगिक संस्थानों, सिडकुल, राज्य एवं केन्द्र सरकार के उपक्रमों एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा बलों की आपूर्ति से सम्बन्धित जानकारी गृह विभाग को जल्द प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने राज्य में केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के तर्ज पर राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल (एसआईएसएफ) गठन के निर्देश दिए हैं। इसके लिए राज्य में बैंकों को करेंसी चेस्ट की सुरक्षा एवं एयरपोर्ट्स, हैलीपेड, औद्योगिक संस्थानों, सिडकुल, राज्य एवं केन्द्र सरकार के उपक्रमों एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए कितनी संख्या में सुरक्षा बलों की आवश्यकता होगी इसके सटीक आंकड़े जुटाना आवश्यक है। एसीएस ने कहा कि राज्य में बैंकों एवं औद्योगिक आस्थानों, हैलीपैड एवं सरकारी उपक्रमों की पुख्ता सुरक्षा के लिए एक उत्तरदायी एवं संवेदनशील सुरक्षा बल की नितान्त आवश्यकता है।

बैठक में उत्तराखण्ड होमगार्ड्स विभाग को एसआईएसएफ का कार्य दिये जाने के औचित्य पर भी विस्तृत चर्चा की गई। एसीएस ने सम्बन्धित अधिकारियों को उत्तराखण्ड होमगार्ड्स के प्रस्ताव का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं।

इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, अपर सचिव सी रविशंकर, विशेष सचिव गृह रिद्धिम अग्रवाल, विम्मी सचदेवा एवं उत्तराखण्ड होमगार्ड्स विभाग, सिडकुल, नागरिक उड्डयन विभाग, गृह विभाग, विभिन्न औद्योगिक संस्थानों व बैंकों के अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखण्डः 51 सीमान्त ग्रामों का विलेज एक्शन प्लान 23 अक्टूबर तक भारत सरकार को भेजा जाएगा

अपर मुख्य सचिव गृह राधा रतूड़ी ने वर्चुअल माध्यम से गृह सचिव भारत सरकार श्री अजय कुमार भल्ला की अध्यक्षता में भारत सरकार की अति महत्वपूर्ण योजना ‘‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’’ की समीक्षा बैठक में प्रतिभाग किया। इस बैठक में चार राज्यों तथा समस्त केन्द्रीय मंत्रालयों ने प्रतिभाग किया। बैठक में गृह सचिव ने उत्तराखण्ड राज्य को 51 सीमान्त ग्रामों का विलेज एक्शन प्लान अति शीघ्र बनाकर भारत सरकार को प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव गृह विभाग उत्तराखण्ड राधा रतूड़ी ने जानकारी दी कि विलेज एक्शन प्लान 23 अक्टूबर तक प्रेषित कर दिए जाएंगे। उन्होंने भारत सरकार से अनुरोध किया कि राज्य सरकार को भी वीवीपी (वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम) के पोर्टल को देखने का अधिकार दिया जाए ताकि शीघ्र अनुपालन हो सके। एसीएस ने आग्रह किया कि चीन सीमा पर स्थित ग्रामों से आईटीबीपी एवं आर्मी द्वारा लोकल प्रोक्योरमेंट किया जाए इससे आजीविका के साधन बढ़ेगें एवं पलायन को रोका जा सकेगा। उक्त अनुरोधों पर गृह सचिव भारत सरकार द्वारा राज्य सरकार को सकारात्मक आश्वासन दिया गया।

उल्लेखनीय है कि यह उपयुक्त मुद्दों पर गत 7 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री एवं मुख्यमंत्री की बैठक पर भी चर्चा की गई थी।

विदित है कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अन्तर्गत भारत सरकार सीमावर्ती गांवों को सशक्त बनाने का काम कर रही है। इन गांवों में सरकार रोड कनेक्टिविटी, पेयजल, सौर और पवन ऊर्जा सहित बिजली, मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी, पर्यटन केन्द्र, बहुउददेशीय केंद्र और स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचा और स्वास्थ्य कल्याण केंद्रो से जोड़ना चाहती है। देश के पर्वतीय एवं सीमान्त राज्यों से इसकी शुरूआत की जा रही है।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत व्यापक विकास के लिए अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की उत्तरी सीमा से सटे 19 जिलों के 46 ब्लॉकों में 2967 गांवो की पहचान की गई है। पहले चरण में प्राथमिकता के आधार पर 662 गांव की पहचान की गई है, जिनमें अरुणाचल प्रदेश के 455 गांव, हिमाचल प्रदेश के 75, लद्दाख के 35, सिक्किम के 46 और उत्तराखंड के 51 सीमावर्ती गांवों को शामिल किया गया है।

प्रदेश में अग्निशमन सेवाओं में सुधार के संबंध में अधिकारियों की हुई बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में प्रदेश में अग्निशमन सेवाओं में सुधार के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में अग्निशमन सुविधाओं के विकास के लिए एक फुलप्रूफ योजना तैयार की जाए। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध अग्निशमन सेवाओं का गैप एनालिसिस कर इसे पूर्ण रूप से संतृप्त करने के लिए योजना तैयार किए जाने हेतु निर्देशित किया।

मुख्य सचिव ने कहा कि आवासीय भवनों को फायर स्टेशन के पास ही बनाया जाए। इससे अग्निशमन कर्मियों को भी सुविधा होगी, एक समय पर अधिक से अधिक कर्मी उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने कहा कि फायर एवं अन्य आवश्यक प्रशिक्षणों के लिए प्रदेश के भीतर ही व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। सेलाकुई फायर स्टेशन को प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने एडवांस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए ही नागपुर (महाराष्ट्र) के प्रशिक्षण केन्द्र भेजे जाने की बात भी कही।

मुख्य सचिव ने बाढ़, भूस्खलन, ध्वस्त संरचनाओं के लिए रेस्क्यू कोर्सेज पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने एसडीआरएफ और अग्निशमन सेवाओं के कार्यात्मक एकीकरण की बात भी कही। कहा कि फायर स्टेशनों को अपग्रेड किए जाने हेतु सम्पूर्ण कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने प्रदेशभर में आवश्यकतानुसार फायर स्टेशनों एवं फायर हाईड्रेंट की भी उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल उपकरणों की व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, पुलिस महानिरीक्षक नीरू गर्ग एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक निवेदिता कुकरेती सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

रिवर एंड स्प्रिंग रिजूवनेशन के लिए बनाई जा रही अथॉरिटी को चेक डैम तैयार करने में शामिल करेंः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में वर्षा जल संग्रहण के संबंध में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में वर्षा काल में अत्यधिक वर्षा होती है, परन्तु बाकी समय पर पानी की समस्या रहती है। रिवर एंड स्प्रिंग रिजूवनेशन के लिए बनाई जा रही अथॉरिटी अथवा एजेंसी के उद्देश्यों में अधिकतम संख्या में चेक डैम तैयार किए जाने को शामिल किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि वर्षा जल को चेक डैम आदि के माध्यम से रोक कर जल संग्रहण किया जा सकता है, जिससे वर्षभर पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि जल स्रोत से उत्तराखण्ड की सीमा तक सभी नदियों का मास्टर प्लान तैयार किया जाए। साथ ही राज्य जल संरक्षण की योजना तैयार की जाए, जिस पर चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल की कमी को दूर करने में यह प्रदेश की 70 प्रतिशत से अधिक वन भूमि महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे प्रदेश के अधिकतम भूभाग के जल स्रोत रिचार्ज होंगे। उन्होंने कहा कि योजनाओं के मूल्यांकन का एक मैकेनिज्म विकसित किया जाए। योजनाओं के अनुश्रवण के लिए डैशबोर्ड भी तैयार किया जाए।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी एवं जलागम प्रबंधन से नीना ग्रेवाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

एसीएस ने निराश्रित, बालश्रम से मुक्त बच्चों के तहसील स्तर पर अभियान चलाने के दिए निर्देश

एसीएस राधा रतूड़ी ने निराश्रित, बालश्रम से मुक्त बच्चों के तहसील स्तर पर अभियान चलाकर आधार कार्ड के साथ ही राशन कार्ड व आयुष्मान कार्ड बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने श्रमिकों विशेषकर खनन क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों की शिक्षा के लिए मोबाइल स्कूलों की व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं। एसीएस ने जिलाधिकारियों को राज्य में बाल विवाह रोकने के लिए विद्यालयी शिक्षा विभाग की मदद से कक्षा 8 के बाद स्कूल ड्रॉप आउट करने वाली बालिकाओं के आंकड़े जुटाने के निर्देश भी दिए।

सचिवालय में बालश्रम से सम्बन्धित समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राज्य में बालश्रम रोकने व अनाथ बच्चों के कल्याण, अच्छी शिक्षा व परवरिश के लिए जिला स्तर पर विभिन्न समितियों के स्थान पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता के एक अम्ब्रेला कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं।

एसीएस राधा रतूड़ी ने जिलाधिकारियों को निराश्रित व बालश्रम से रिस्क्यू किये गये बच्चों की पुनर्वास के दौरान उनकी प्रगति की निरन्तर मॉनिटरिंग के भी निर्देश दिए गए। उन्होंने सभी जनपदों में ऑपरेशन मुक्ति के तहत रिस्क्यू किये गए बच्चों के डाटा को निर्धारित पैर्टन पर सीआईएसएस पोर्टल पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए। एसीएस ने विशेषकर देहरादून क्षेत्र में बाल भिक्षावृति रोकने व बच्चों द्वारा ड्रग्स के प्रयोग को रोकने के लिए जॉइण्ट टास्क फोर्स गठन के निर्देश दिए । उन्होंने जनपदों में बाल विवाह रोकने के साथ ही बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं फण्ड के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा व अच्छी परवरिश को प्रोत्साहित करने की बात कही।

बैठक में पुलिस विभाग ने जानकारी दी कि उत्तराखण्ड में गत तीन वर्षों बालश्रम के 133 केस दर्ज हुए हैं। राज्य में विगत तीन वर्षाे में बाल विवाह के 22 केस दर्ज हुए हैं। राज्य में जेजे एक्ट को प्रभावी रूप से लागू करने की आवश्यकता है।

बैठक में अपर सचिव गृह निवेदिता कुकरेती, डीआईजी पी रेणुका देवी तथा वर्चुअल माध्यम से सभी जिलों के जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे।