केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की हुई समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में ऋषिकेश बाईपास, अल्मोड़ा-दन्या-पनार-घाट मार्ग, ज्योलिकोट-खैरना-गैरसैंण-कर्णप्रयाग मार्ग और अल्मोड़ा-बागेश्वर-काण्डा-उडियारी बैंड मार्ग के निर्माण से संबंधित प्रस्तावों के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित राज्य के अनेक महत्वपूर्ण मामलों को प्रमुखता से उठाते हुए राज्य के प्रस्तावों को स्वीकृति दिए जाने का अनुरोध किया।

बैठक में राज्य की प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं पर हुई चर्चा में बताया गया कि ऋषिकेश बाईपास परियोजना-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-07 के अंतर्गत तीनपानी से योगनगरी होते हुए खारास्रोत तक 12.67 किमी लंबाई में चार लेन बाईपास का निर्माण प्रस्तावित है। जिसकी अनुमानित लागत 1161.27 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के अंतर्गत 4.876 किमी लंबाई में तीन हाथी कॉरिडोर हेतु एलिवेटेड मार्ग, चन्द्रभागा नदी पर 200 मीटर लंबा सेतु तथा रेलवे पोर्टल पर 76 मीटर लंबाई का आरओबी प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त श्यामपुर रेलवे क्रॉसिंग पर 318 करोड़ रुपये की लागत से 76 मीटर लंबाई का आरओबी प्रस्तावित किया गया है। जिससे नेपाली फार्म से ऋषिकेश नटराज चौक तक यातायात निर्बाध हो सकेगा। अल्मोड़ा-दन्या-पनार-घाट मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309बी के 76 किमी लंबाई वाले हिस्से में 988 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से दो लेन चौड़ीकरण का प्रस्ताव किया गया है।
ज्योलिकोट-खैरना-गैरसैंण-कर्णप्रयाग मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-109 के अंतर्गत 235 किमी लंबाई में दो लेन चौड़ीकरण का संरेखण प्रस्ताव है।
अल्मोड़ा-बागेश्वर-काण्डा-उडियारी बैंड मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309ए के अंतर्गत पैकेज 1, 2 और 5 में कुल 84.04 किमी लंबाई में 1001.99 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रस्तावित हैं। काण्डा से बागेश्वर खंड (पैकेज-02) के लिए वनभूमि हस्तांतरण प्रस्ताव पर भारत सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में सड़क अवसंरचना को विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। उत्तराखण्ड की सड़कें केवल तीर्थाटन और पर्यटन को ही नहीं, बल्कि उद्योग, सीमावर्ती सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रही हैं। यह परिवर्तन केवल सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि दूरदर्शी नेतृत्व और स्पष्ट विज़न का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सतत प्रयासों से उत्तराखण्ड सुगम, सुरक्षित, आधुनिक और भविष्य उन्मुख सड़क नेटवर्क के साथ विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

चारधाम यात्रा को सुगम, सुलभ एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्गों पर 12,769 करोड़ रुपये की चारधाम महामार्ग परियोजना स्वीकृत की गई है। उत्तराखण्ड में कुल 3,723 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क राज्य को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ रहा है। इनमें से लगभग 597 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग एनएचएआई द्वारा डिज़ाइन एवं क्रियान्वित किए गए हैं, जिनमें से 336 किलोमीटर से अधिक परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। लगभग 193 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसकी अनुमानित लागत 15,890 रुपये करोड़ से अधिक है। इन परियोजनाओं के माध्यम से हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी और काठगोदाम जैसे धार्मिक, शहरी और औद्योगिक केंद्रों को चौड़ी, सुरक्षित एवं सुगम सड़कों से जोड़ा गया है। काशीपुर-सितारगंज (77 किमी), रुद्रपुर-काठगोदाम (50 किमी) तथा हरिद्वार-नगीना (67 किमी) जैसे चार-लेन कॉरिडोर से औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि मंडियों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के अंतर्गत गणेशपुर-देहरादून खंड में लगभग 30 किमी लंबा छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे विकसित किया गया है, जिसमें सुरंग और 18 किमी लंबा एलिवेटेड सेक्शन भी शामिल है। इस परियोजना पर 1,995 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इसके अतिरिक्त देहरादून बाईपास (12 किमी, 716 करोड़ रुपये) और हरिद्वार बाईपास (15 किमी, 1,603 करोड़ रुपये) जैसी परियोजनाओं से शहरी क्षेत्रों में यातायात दबाव में कमी लाने में प्रभावी सिद्ध होंगे। भारत-नेपाल सीमा पर बनबसा आईसीपी कनेक्टिविटी को 4 किमी लंबाई और 366 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय आवागमन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। वहीं रुद्रपुर-काशीपुर बाईपास तथा हरिद्वार से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क से सीधे जोड़ रहे हैं।

सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य में ब्लैक स्पॉट सुधार, क्रिटिकल जंक्शनों पर एक्सेस कंट्रोल, प्रभावी साइनेज और आधुनिक रोड सेफ्टी उपाय लागू किए जा रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में ऑपरेशन और मेंटेनेंस परियोजनाओं के माध्यम से सड़कों को वर्षभर सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मसूरी-देहरादून कनेक्टिविटी (40 किमी, 4,000 करोड़ रुपये), हरिद्वार-हल्द्वानी हाई-स्पीड कॉरिडोर (197 किमी, 10,000 करोड़ रुपये), ऋषिकेश बाईपास (13 किमी, 1,200 करोड़ रुपये), देहरादून रिंग रोड तथा लालकुआं-हल्द्वानी-काठगोदाम बाईपास जैसी परियोजनाएं तैयारी एवं डीपीआर चरण में हैं। इनसे गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों की आपसी कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी। पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में एलिवेटेड रोड, वाइल्डलाइफ अंडरपास और न्यूनतम भूमि उपयोग जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं, जिससे विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।
सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में सिविल कार्य लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इस प्रतिशत सिविल कार्य में सुरंग के बीचों-बीच दीवार निर्माण का काम पांच-छह माह में पूरा कर लिया जाएगा और इसके बाद इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल कार्य शुरू किया जाएगा। मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है।

बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर समुचित कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में गतिमान परियोजनाओं को गुणवत्ता बनाए रखते हुए तेज गति से निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत पूर्ण किया जाए।

बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, हर्ष मल्होत्रा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

डिफेंस प्रोडक्शन हब बनेगा उत्तराखंडः धामी

सीएम धामी ने उत्तराखंड को डिफेंस प्रोडक्शन हब के रूप में स्थापित करने का संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार युवाओं में टेक्नॉलजी के प्रति रूझान पैदा करने का प्रयास करने के साथ ही युवाओं को इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ाकर उत्तराखण्ड को ड्रोन एवं रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देहरादून छावनी के जसवंत ग्राउंड में आयोजित ‘‘सूर्या ड्रोन टेक 2025’’ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए तथा ड्रोन प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड द्वारा सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एस.आई.डी.एम.) के सहयोग से आयोजित यह दो दिवसीय प्रदर्शनी (29-30 अप्रैल, 2025) देश में विकसित अत्याधुनिक ड्रोन प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित कर रही है, जो बहुआयामी सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप हैं और ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ अभियान से प्रेरित हैं।

इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य में ड्रोन तकनीक आपदा राहत कार्यों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इसलिए हमारी सरकार का प्रयास है कि हमारे युवा न केवल ड्रोन विशेषज्ञ बनें, बल्कि नागरिक उपयोग के लिए भी टेक्नोलॉजी आधारित समाधान विकसित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी नई औद्योगिक नीतियों में रक्षा उत्पादन और टेक इनोवेशन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सूर्या ड्रोन टेक 2025 विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रतिभा का समागम है।
इस प्रकार के आयोजन न केवल आधुनिक तकनीकी उपलब्धियों के प्रदर्शन हेतु विशिष्ट मंच प्रदान करते हैं, बल्कि हमारे नौजवानों को ड्रोन और तकनीकी के क्षेत्र में इनोवेशन के लिए प्रेरित भी करते हैं। यह उत्तराखंड को ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक ठोस कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रोन तकनीक में विविधता भारत की आत्मनिर्भर तकनीकी क्षमताओं का जीवंत प्रमाण है। यह देखकर गर्व होता है कि भारत अब न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि तकनीकी इनोवेशन में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। ड्रोन तकनीक आज सुरक्षा से लेकर शिक्षा, आपदा प्रबंधन, कृषि तथा प्रत्येक क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में ड्रोन टेक्नोलॉजी और सैन्य क्षेत्र में नवाचार को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। सैन्य क्षेत्र में नवाचार की महत्ता को समझते हुए हमारी सरकार भी उत्तराखंड में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है।

सूर्या ड्रोन टेक-2025 के इस कार्यक्रम में मध्य कमान और सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चर्स के सभी सदस्य, ड्रोन विशेषज्ञ, स्टार्टअप्स, डैडम्’ै, एनसीसी कैडेट्ड और स्कूली छात्र मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने भारतीय दूतावास ताशकंद में व्यापार निवेश पर किया वर्चुवली संबोधित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड के परिपेक्ष में भारतीय दूतावास ताशकन्द में आयोजित व्यापार निवेश तथा पर्यटन संवर्द्धन से संबंधित कार्यक्रम को वर्चुवली सम्बोधित किया।

मुख्यमंत्री ने ताशकंद में भारतीय दूतावास द्वारा उत्तराखंड में व्यापार, निवेश और पर्यटन के अवसरों को उजागर करने के लिए उत्तराखण्ड दिवस के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह हमारे लिए गौरव का विषय है कि पहली बार उत्तराखंड की उज्बेकिस्तान में इस प्रकार का अभिनव मंच मिल रहा है। एक ऐसा देश जिसके साथ भारत 2011 से आपसी संबंध साझा करता आ रहा है।

मुख्यमंत्री ने प्रवासी उत्तराखण्ड वासियों से विभिन्न क्षेत्रों में निवेश का आह्वान करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड के प्रवासी बंधुओं की सुविधा के लिए राज्य में प्रभावी व्यवस्था बनाई गई है। उत्तराखण्ड में हाल ही में देश व विदेश में रह रहे उत्तराखण्ड वासियों का सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें बड़ी संख्या में प्रवासी बंधुओं के द्वारा प्रतिभाग कर राज्य के विकास में सहयोगी बनने का आश्वासन दिया गया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि देवभूमि उत्तराखंड, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत, आध्यात्मिक स्थलों, वेलनेस टूरिज्म आयुर्वेद और एडवेंचर टूरिज्म के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। भारत के प्रमुख शहरों के साथ अच्छी हवाई कनेक्टिविटी, विश्व स्तरीय सड़कों का नेटवर्क, अच्छी कानून व्यवस्था और स्थिर राजनीतिक नेतृत्व, उत्तराखण्ड को देश विदेश के निवेशकों के लिये एक आदर्श राज्य बनाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का मुख्य सेवक होने के नाते वे उज्बेकिस्तान के पर्यटकों और निवेशकों को उत्तराखण्ड की इन विशेषताओं का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करते है। विशेष रूप से, उत्तराखंड का आयुष एवं वेलनेस टूरिज्म जिसकी ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। निवेश की दृष्टि से उत्तराखंड में पर्यटन हॉस्पिटेलिटी आयुर्वेदिक चिकित्सा, जैविक कृषि और हर्बल दवाओं में अपार संभावनाएं है।

उन्होंने कहा कि आज विश्वमर में पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेद को लेकर लोगों में रुचि बढ रही है, और इस क्षेत्र में दोनों देशों के मध्य सहयोग के अनेकों अवसर मौजूद है। हमारी सरकार इस संबंध को और मजबूत बनाने के लिए दोनों देशों के युवाओं को भी शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है, यही नही शैक्षणिक साझेदारी को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तराखंड में संचालित आईआईटी रुड़की पहले से ही समरकंद विश्वविद्यालय के साथ जल विज्ञान, जल प्रबंधन पर साझा कार्यक्रम चला रहा है। भविष्य में भी राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों को शामिल करते हुए. इस तरह के शैक्षणिक आदान-प्रदान को सशक्त बनाने के लिए भी हमारे प्रयास जारी रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्बेकिस्तान की हस्तशिल्प कलाएं और उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरे हस्तशिल्प, बांस कला और ऊन बुनाई जैसे पारंपरिक शिल्पकारों के बीच आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करती है। यह कार्यक्रम दोनों पक्षों के बीच व्यापार पर्यटन और सांस्कृतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री ने उज्बेकिस्तान के सभी नागरिकों को उत्तराखंड आने और यहां की प्राकृतिक सुंदरता एवं समृद्ध संस्कृति को अनुभव करने के लिए भी आमंत्रित किया।

निवेशकों को पूरी तरह से भाया उत्तराखंड, राज्य सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की

उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट में उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण हेल्थकेयर सुविधाओं के विस्तार की प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए निवेशकों ने सरकार के प्रयासों के साथ पूरा समर्थन व सहयोग प्रदान करने का भरोसा दिलाया। समिट के शुरूआती दौर तक राज्य के हेल्थकेयर एवं फार्मा सेक्टर में लगभग साढे अठारह हजार करोड़ के पॅूंजी निवेश के एमओयू किए जा चुके हैं। सरकार और निवेशकों ने निश्चय किया है कि प्रस्तावित निवेश को जमीन पर उतारने के लिए अगले दौर की कार्रवाई तेजी से पूरी की जाएगी।

इन्वेस्टर्स समिट में हेल्थकेयर सेक्टर पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की मंत्री श्रीमती रेखा आर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व के चलते उत्तराखंड विकास की राह में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने राज्य के तेजी से विकास तथा रोजगार के नए व बेहतर अवसरों के सृजन के लिए नीतियों में जरूरी बदलाव करने के साथ ही निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड संभावनाओं, संसाधनों व क्षमताओं से परिपूर्ण और निवेश के लिए सर्वथा उपयुक्त राज्य है। राज्य सरकार ने निवेशकों की सहूलियतों का समुचित ध्यान रख कस्टमाइज्ड नीतियां तय कर प्रक्रियाओं और नियमों को सरल व सुविधाजनक बनाया है। जिसके चलते निवेशकों का राज्य के प्रति भरोसा बढा है और वह अधिकाधिक निवेश के प्रति रूचि दिख रहे हैं। उन्होंनें कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड के विकास के सारथी बनने वाले निवेशकों का विश्वास कभी भंग नहीं होने देगी और कोई भी समस्या आने पर मजबूती से उनके साथ खड़ी रहेगी। श्रीमती आर्या ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक गुणवत्तापूर्ण व सर्वसुलभ बनाने के लिए सरकार सर्वाेच्च प्राथमिकता से काम कर रही है। उन्होंने सरकार के इन प्रयासों में सहयोग करने तथा दूरस्थ पर्वतीय इलाकों तक बेहतर हेल्थ केयर सुविधाएं जुटाने के लिए निजी क्षेत्र से निरंतर सहयोग का आह्वान करते हुए कहा कि देवभूमि में उनका निवेश पुण्य का भी सबब बनेगा।

कार्यक्रम में उत्तराखंड के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सचिव डा. आर. राजेश कुमार ने उत्तराखंड के हेल्थकेयर एवं फार्मा सेक्टर में निवेश की संभावनाओं व जरूरतों को रेखांकित करते हुए राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं और इससे जुड़ी नीतियों के बारे में जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता में वृद्धि तथा गुणवत्तापूर्ण हेल्थकेयर की बढ़ती मांग के चलते हमें निरंतर बढ़ती आबादी की स्वास्थ्य संबंधित जरूरतों को पूरा करने के लिए निजी क्षेत्र के सहयोग की नितांत आवश्यकता है। सरकार व निजी क्षेत्र के सम्मिलित प्रयासों से हम हर क्षेत्र तक स्तरीय हेल्थकेयर सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही जन-समुदाय के जीवन की गुणवत्ता को भी सुधार सकते हैं। राज्य में निजी क्षेत्र के जरिए कुछ अस्पतालों तथा 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन के अनुभव का उल्लेख करते हुए डा. राजेश कुमार ने कहा कि हेल्थ एवं फार्मा सेक्टर में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने नीतियों में अनुकूल बदलाव करने के साथ की अनेक सहूलियतों का प्राविधान किया है। राज्य सरकार ने हरिद्वार मेडिकल कॉलेज, हर्रावाला देहरादून स्थित 300 बेड के सुपर स्पेशलिटी कैंसर अस्पताल, मोतीनगर हल्द्वानी स्थित 200 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, हरिद्वार स्थित 200 बेड के एमसीएच सेंटर को लीज-ऑन एंड ट्रांसफर मॉडल पर निजी क्षेत्र के सहयोग से संचालित करने का निश्चय किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य में हेल्थकेयर पर निवेश की प्रचुर संभावनाएं हैं।

समिट के हेल्थकेयर सत्र में अपोलो हेल्थ केयर में सीएफओ कृष्णन अखिलेश्वरन, टाटा 1एमजी के वाइस प्रेसिडेंट डा. प्रशांत नाग, ग्राफिक एरा हॉस्पिटल के चेयरमैन प्रो. कमल घनशाला, हेल्थकेयर रोडिक कंसल्टेंट प्रा.लि. के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आलोक सक्सेना, कृष्णा डाईग्नोस्टिक की प्रतिनिधि करिश्मा, एनएचएम उत्तराखंड की मिशन डायरेक्टर स्वाति एस भदौरिया ने विचार रखे। संचालन स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक डा. अमित शुक्ला ने किया।