उत्तराखंड में 104 हेल्थ हेल्पलाइन बना लाभार्थियों की सक्रिय निगरानी का अहम माध्यम

मेडिकल, पुलिस और अग्निशमन सेवाओं के लिए 108 नंबर से लगभग हर कोई परिचित है, लेकिन उत्तराखंड में 104 हेल्थ हेल्पलाइन पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी, शिकायत निवारण और लाभार्थियों की सक्रिय निगरानी का अहम माध्यम बन गई है। खास बात यह है कि यह व्यवस्था केवल नागरिकों की कॉल का जवाब नहीं देती, बल्कि जरूरतमंद मरीजों तक खुद पहुंचकर उनके स्वास्थ्य और उपचार की स्थिति का फॉलोअप भी करती है।

स्वास्थ्य निदेशालय, देहरादून में संचालित 104 कॉल सेंटर अब तक एक करोड़ 38 लाख से अधिक स्वास्थ्य संबंधी कॉल कर चुका है। यह व्यवस्था राज्य के सभी 13 जिलों में 27 स्वास्थ्य सेवाओं और कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों तक पहुंच बना रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने पर जोर दे रही है। इसी सोच के तहत 104 हेल्पलाइन को केवल सूचना देने वाले कॉल सेंटर के बजाय प्रोएक्टिव हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है।

अस्पताल में रजिस्ट्रेशन के बाद शुरू होता है फॉलोअप

इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रोएक्टिव ट्रैकिंग सिस्टम है। राज्य के किसी भी जिले में स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में मरीज के पंजीकरण के बाद संबंधित जानकारियाँ 104 कॉल सेंटर पहुँचाई जाती है। इसके बाद स्वास्थ्य संबंधी चुनौती से जूझ रहे लाभार्थी से नियमित रूप से संपर्क कर उसकी स्थिति की जानकारी ली जाती है।

खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के मामले में यह व्यवस्था और महत्वपूर्ण हो जाती है। गर्भावस्था के तीसरे महीने से लेकर प्रसव तक टीकाकरण और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का फॉलोअप किया जाता है। बच्चे के जन्म के बाद करीब डेढ़ वर्ष तक उसके स्वास्थ्य और टीकाकरण की स्थिति पर भी नजर रखी जाती है, ताकि जरूरी टीके और स्वास्थ्य सेवाएं समय पर मिल सकें।

27 स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी निगरानी

104 कॉल सेंटर आयुष्मान भारत योजना, आशा कार्यकर्ता, बाल स्वास्थ्य, चारधाम यात्रा, काउंसलिंग, डेंगू, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास, ई-संजीवनी, हीमोफीलिया, हेपेटाइटिस, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, एचआईवी, एचपीवी, उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह, मातृ स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, टीबी और थैलेसीमिया समेत विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों से संपर्क करता है।

इसके अलावा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और एंटी रेबीज सेवाओं के तहत लाभार्थियों को जरूरी जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए परामर्श भी दिया जाता है।

सिर्फ जानकारी नहीं, योजनाओं की डिलीवरी की भी पड़ताल

104 की भूमिका यहीं खत्म नहीं होती। कॉल सेंटर के माध्यम से मरीजों से सीधे फीडबैक लिया जाता है। केंद्र और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ और प्रोत्साहन की जानकारी भी लाभार्थियों से क्रॉस-चेक की जाती है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र व्यक्ति तक पहुंचा या नहीं।

एक दशक के सफर में 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने यह साबित किया है कि एक टोल-फ्री नंबर सिर्फ फोन उठाने की व्यवस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, निगरानी, फॉलोअप और जवाबदेही का प्रभावी तंत्र भी बन सकता है। पहाड़ी और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण उत्तराखंड में यह मॉडल दूरदराज के लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। 104 हेल्थ हेल्पलाइन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो केवल नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही, बल्कि लाभार्थियों तक स्वयं पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी और फॉलोअप सुनिश्चित कर रही है।

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में वर्तमान में संचालित डायलिसिस सुविधा को 24×7 संचालित किए जाने के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा की वर्तमान स्थिति की जानकारी लेते हुए आमजन को गुणवत्तापरक उपचार एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने अस्पतालों में उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रदेश के सभी चिकित्सालयों को नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) से प्रत्यायन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों एवं बड़े उप जिला अस्पतालों का 31 मार्च, 2027 तक एनएबीएच प्रत्यायन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इसकी प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए, ताकि अस्पतालों को निर्धारित मानकों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एनएबीएच के माध्यम से नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी की जा सकती है।

स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण एवं ई-हॉस्पिटल पर जोर
मुख्य सचिव ने प्रदेश के अस्पतालों को डिजिटाइज करते हुए ई-हॉस्पिटल की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने एकीकृत स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली को प्रदेश में तत्काल लागू करने को कहा। उन्होंने प्रणाली के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग तथा वार्षिक रखरखाव अनुबंध (एएमसी) की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

रिक्त चिकित्सकीय पदों को शीघ्र भरने पर दिया जोर
मुख्य सचिव ने चिकित्सकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के साथ ही गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे चिकित्सक जो सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवाएं देने के इच्छुक हों, उनके संबंध में सेवानिवृत्ति से पूर्व ही आवश्यक औपचारिकताएं एवं पेपर वर्क पूरा किया जाए, ताकि पद रिक्त होने की स्थिति में उन्हें उनकी इच्छानुसार स्थान पर सेवाएं देने का अवसर दिया जा सके। इसके साथ ही निजी अस्पतालों में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सकों को विजिटिंग डॉक्टर के रूप में जोड़ने की संभावनाओं पर भी कार्य करने को कहा।

डायलिसिस सुविधा 24×7 एवं किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शीघ्र शुरू करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में वर्तमान में संचालित डायलिसिस सुविधा को 24×7 संचालित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश में किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा भी शीघ्र शुरू करने को कहा। बैठक में बताया गया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार कर लिया गया है तथा विशेषज्ञ की व्यवस्था भी कर ली गई है। इस पर मुख्य सचिव ने अगले तीन माह के भीतर किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू करने के निर्देश दिए।

जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने आमजन को जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र सहजता से उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र के लिए माता-पिता को अस्पताल, नगर निगम अथवा अन्य कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिसके माध्यम से माता-पिता को जन्म प्रमाण पत्र स्वतः उपलब्ध हो सके। इसी प्रकार मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए भी मृतक के परिजनों को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। उन्होंने प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक समस्याओं को चिह्नित कर उनका तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिक से अधिक जनसेवाओं को सेवा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत लाए जाने पर भी जोर दिया।

मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी एवं सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को और अधिक सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त फैकल्टी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के वार्डों की गुणवत्ता में सुधार लाने तथा सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास करने को कहा।

मुख्य सचिव ने मेडिकल कॉलेजों में इवनिंग ओपीडी शुरू किए जाने के भी निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें।

दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों के लिये रवाना हुई चार अत्याधुनिक एम्बुलेंस, सीएम धामी ने दिखाई हरी झंडी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से एचडीएफसी बैंक की कॉर्पाेरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पहल के अंतर्गत जनहित के लिए प्रदान की गई 4 अत्याधुनिक एम्बुलेंस का फ्लैग ऑफ किया। यह पहल राज्य के दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। निजी संस्थाओं द्वारा जनहित में किया जा रहा सहयोग सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। एचडीएफसी बैंक द्वारा ब्ैत् के माध्यम से उपलब्ध कराई गईं ये एम्बुलेंस जरूरतमंद लोगों तक त्वरित चिकित्सा सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। राज्य सरकार जनभागीदारी एवं संस्थागत सहयोग के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने एचडीएफसी बैंक की इस जनकल्याणकारी पहल की सराहना करते हुए कहा कि बड़े धार्मिक आयोजनों, आपदा की स्थितियों तथा दूरस्थ क्षेत्रों में ऐसी सेवाएं अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने राज्य के अन्य पर्वतीय जनपदों और आगामी हरिद्वार कुंभ के लिए भी एचडीएफसी बैंक से सीएसआर के माध्यम से और एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की अपेक्षा की है।

बैंक अधिकारियों ने अवगत कराया कि इन एम्बुलेंस में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं एवं आवश्यक आपातकालीन उपकरण उपलब्ध हैं, जिससे जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही आगामी तीन वर्षों तक प्रत्येक एम्बुलेंस में चिकित्सक, नर्स, अटेंडेंट एवं चालक की व्यवस्था भी बैंक द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।

प्रारंभिक चरण में ये एम्बुलेंस चमोली, चंपावत, पिथौरागढ़ एवं रुद्रप्रयाग जनपदों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगी तथा भविष्य में राज्य के प्रमुख धार्मिक आयोजनों एवं आपदा प्रबंधन कार्यों में भी इनका उपयोग किया जाएगा।

इस अवसर पर विधायक राजकुमार पोरी, विनोद कंडारी, अपर सचिव मनमोहन मैनाली, एचडीएफसी बैंक के से मुस्कान सिंह (ब्रांच बैंकिंग हेड- नॉर्थ 3), संजीव कौशिक (रीजनल हेड- नॉर्थ 3), जोनल हेड उत्तराखंड बकुल सिक्का, स्टेट हेड उत्तराखंड गौरव जैन एवं आयुष सिंघल मौजूद थे।

सीएम धामी ने स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय में सुविधाओं को और सशक्त बनाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज पीपलकोटी स्थित स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय का निरीक्षण कर वहां की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अस्पताल प्रबंधन, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों से संवाद कर अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, आधुनिक उपकरणों तथा मरीजों को प्रदान की जा रही उपचार सेवाओं की विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने अस्पताल में संचालित विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं, आपातकालीन व्यवस्थाओं, जांच सुविधाओं तथा दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के उपचार की प्रक्रिया की समीक्षा की। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि सीमांत और दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को यहां गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन सोसाइटी द्वारा सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं के साथ संचालित यह चिकित्सालय पर्वतीय क्षेत्रों के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के अंतिम छोर तक रहने वाले नागरिकों को भी उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों और इस दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने चिकित्सकों और समस्त स्टाफ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जिस समर्पण भाव से सेवाएं दी जा रही हैं, वह अत्यंत प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य अवसंरचना को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती को लेकर सरकार निरंतर प्रयासरत है, ताकि आमजन को बेहतर उपचार के लिए दूर-दराज़ न जाना पड़े।

इस अवसर पर अस्पताल प्रबंधन ने मुख्यमंत्री को संस्थान की उपलब्धियों, भविष्य की योजनाओं एवं आवश्यकताओं से भी अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह निरीक्षण राज्य सरकार की जनकल्याणकारी और संवेदनशील कार्यशैली का प्रमाण है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

चौखुटिया में सीएम धामी ने की घोषणा, डिजिटल एक्स-रे मशीन होगी उपलब्ध

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अल्मोड़ा जनपद के चौखुटिया में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की क्षमता को बढ़ाते हुए इसे 30 बेड से विस्तारित कर 50 बेड का अस्पताल बनाया जाएगा। इसके साथ ही अस्पताल में अत्याधुनिक डिजिटल एक्स-रे मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पहाड़ के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। इसी उद्देश्य से चौखुटिया में उप जिला चिकित्सालय के निर्माण से संबंधित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन परिषद को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है और प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल के विस्तार से चौखुटिया और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों को लाभ मिलेगा तथा स्वास्थ्य उपचार में होने वाली देरी को रोका जा सकेगा।

प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास को लेकर सीएस की अध्यक्षता में हुई बैठक

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में आईएमए के सदस्यों द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्ता में सुधार के संबंध में अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए।

आईएमए के सदस्यों ने कहा कि उत्तराखंड का अधिकतर क्षेत्र दूरस्थ श्रेणी में आता है इस कारण यहां स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास करना एक चुनौतीपूर्ण कदम है। इसके लिए उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास हेतु 50 बैड से नीचे के क्लीनिक/ नर्सिंग होम स्थापित करने हेतु क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के मानकों में शिथिलता लाने के सुझाव दिए।

उन्होंने पंजीकरण से लेकर क्लीनिक भवन के निर्माण और क्लीनिक स्थापित करने हेतु विभिन्न प्रकार की अनापत्ति (पंजीकरण, फायर, प्रदूषण इत्यादि से संबंधित) को सरलतम बनाने की अपेक्षा की।

आईएमए के सदस्यों ने अन्य प्रदेशों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास से संबंधित बनाए गए सरलतम मानकों को भी प्रदेश में आत्मसात करने का सुझाव रखा।

इस अवसर पर मुख्य सचिव ने सचिव स्वास्थ्य को निर्देशित किया कि आईएमए के सदस्यों द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी से संबंधित सुझाए गए बिंदुओं पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए निर्देशित किया कि जो सुझाव व्यावहारिक और समय के अनुरूप किए जाने अपेक्षित हो उनको बायोलॉज में शामिल करने की कार्रवाई करें ।

उन्होंने आईएमए के सदस्यों के समन्वय से इस संबंध में अग्रिम कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर बैठक में सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर राजेश कुमार, आईएमए से प्रेसिडेंट उत्तराखंड डॉ केके शर्मा व सचिव डॉ डीडी चौधरी, अपर सचिव संतोष बडोनी, डीजी हेल्थ सुनीता टम्टा सहित संबंधित अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

मेडिकल स्टोर्स पर एफडीए की छापेमारी शुरू, सीएम ने प्रतिबंधित कफ सिरप पर सख्त कार्रवाई के दिए थे निर्देश

बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तराखंड सरकार ने प्रदेशभर में प्रतिबंधित कफ सिरप और औषधियों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफ.डी.ए.) की संयुक्त टीमें प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों की औषधि दुकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। यह अभियान हाल ही में राजस्थान और मध्य प्रदेश में खांसी की दवा (कफ सिरप) के सेवन से बच्चों की मौत की घटनाओं के बाद शुरू किया गया है। उत्तराखंड सरकार ने इसे जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए तत्परता से कार्रवाई प्रारंभ की है।

केंद्र की एडवाइजरी पर तुरंत कार्रवाई
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफ.डी.ए.) डॉ. आर. राजेश कुमार ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को आदेश जारी करते हुए कहा कि भारत सरकार की एडवाइजरी को प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू कराया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से बड़ा कोई विषय नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि औषधि निरीक्षक चरणबद्ध तरीके से कफ सिरपों के नमूने एकत्र करें और उनकी गुणवत्ता की प्रयोगशाला जांच कराएं, ताकि किसी भी दोषपूर्ण या हानिकारक दवा को बाजार से तत्काल हटाया जा सके।

बच्चों के लिए प्रतिबंधित सिरप न लिखें डॉक्टर
डॉ. आर. राजेश कुमार ने प्रदेश के सभी चिकित्सकों से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार की एडवाइजरी का संज्ञान लेते हुए वे बच्चों के लिए प्रतिबंधित कफ सिरप न लिखें। डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा यदि चिकित्सक इन सिरपों को लिखेंगे तो मेडिकल स्टोर भी उन्हें बेचेंगे। इसलिए ज़रूरी है कि डॉक्टर स्वयं भी जिम्मेदारी दिखाएं और प्रतिबंधित दवाओं से परहेज़ करें।

कौन-सी दवाएं प्रतिबंधित हैं

भारत सरकार की एडवाइजरी के अनुसार कृ

दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की खांसी या जुकाम की दवा नहीं दी जानी चाहिए।

पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में इन दवाओं का सामान्य उपयोग अनुशंसित नहीं है।

केवल विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह, सही खुराक और न्यूनतम अवधि के लिए ही इनका उपयोग किया जा सकता है।

सरकार ने विशेष रूप से Dextromethorphan युक्त सिरप और Chlorpheniramine Maleate + Phenylephrine Hydrochloride संयोजन वाली दवाओं को चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित किया है।

प्रदेशभर में छापेमारी और सैंपलिंग अभियान
प्रदेश में इस आदेश के बाद अपर आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन एवं ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी के नेतृत्व में राज्यभर में युद्धस्तर पर छापेमारी की जा रही है। स्वयं अपर आयुक्त ने देहरादून के जोगीवाला, मोहकमपुर समेत कई क्षेत्रों में औषधि दुकानों का निरीक्षण किया। सभी जिलों में औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस माह के भीतर सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और खुदरा दुकानों से सिरपों के नमूने लेकर प्रयोगशाला परीक्षण करवाएँ। ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि एफ.डी.ए. की टीमें प्रदेशभर में सक्रिय हैं। यदि किसी भी स्तर पर दोष पाया गया तो संबंधित कंपनी या विक्रेता के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का सख्त संदेश दृ जनस्वास्थ्य सर्वाेपरि
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और जनता के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रदेश में बिकने वाली हर दवा सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाली हो। जनस्वास्थ्य हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है, और बच्चों की सुरक्षा पर किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि सरकार प्रदेश में औषधि गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को और सुदृढ़ करने की दिशा में भी काम कर रही है।

बच्चों की दवा में लापरवाही अस्वीकार्य- डॉ. धन सिंह रावत
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा राज्य सरकार केंद्र की एडवाइजरी का पूरी गंभीरता से पालन कर रही है। बच्चों की दवाओं से जुड़ी किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी चिकित्सकों और औषधि विक्रेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिबंधित सिरप को न लिखें और न बेचें। यह कदम बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

जनता से अपील दृ डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को दवा न दें
एफ.डी.ए. ने राज्यभर में कफ सिरप की सैंपलिंग शुरू कर दी है। अपर आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन एवं ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने जनता से अपील की है कि वे बच्चों को कोई भी दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। यदि किसी दवा के सेवन से कोई प्रतिकूल प्रभाव दिखाई दे तो तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र या अस्पताल से संपर्क करें।

हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना से राज्य की स्वास्थ्य आपदा प्रबंधन क्षमता होगी मजबूतः सीएम

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत उत्तराखंड को स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र सरकार से बड़ा तोहफा मिला है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्य में हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (HEOC) की स्थापना को मंजूरी प्रदान की है। यह सेंटर स्वास्थ्य आपदाओं के समय राज्य की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया जा रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि HEOC के संचालन के लिए कुल नौ संविदा पदों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें वरिष्ठ सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाहकार, सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाहकार, डेटा विश्लेषक, हब इंजीनियर और डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद शामिल हैं।

धनराशि और संचालन

मंत्रालय के अनुसार HEOC के लिए धनराशि PM-ABHIM परियोजना अवधि 2021–26 तक उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवधि के बाद आगे की निरंतरता योजना की स्वीकृति पर निर्भर करेगी। राज्य सरकार से अनुरोध किया गया है कि वह इन पदों पर संविदा आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र शुरू करे और HEOC को जल्द से जल्द क्रियाशील बनाए। निधि हस्तांतरण के लिए HEOC के नाम से एक अलग बैंक खाता भी खोला जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को स्वास्थ्य सुरक्षा का बड़ा तोहफा दिया है। “हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना से राज्य की स्वास्थ्य आपदा प्रबंधन क्षमता और मजबूत होगी। उन्होंने कहा इसके माध्यम से आपात स्थितियों में समय पर और समन्वित कार्रवाई संभव हो सकेगी। मैं प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त करता हूँ,”।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उत्तराखंड के लिए हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना को मंजूरी दी है। हम जल्द ही संविदा पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करेंगे और HEOC को क्रियाशील बनाएंगे। यह सेंटर स्वास्थ्य आपदाओं के दौरान समयबद्ध प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा, जिससे जनता को सीधे लाभ मिलेगा।

राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण कदम

देशभर में HEOCs की स्थापना भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्वास्थ्य आपात स्थितियों के समय समयबद्ध कार्रवाई और बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सकेगा।
————————
मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए 28.76 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री घोषणा के तहत जनपद उत्तरकाशी के विधानसभा क्षेत्र पुरोला के अंतर्गत विकास खण्ड मोरी के ग्राम पंचायत ओडाठा के बामसू गांव में महासू देवता के पास सौन्दर्यीकरण एवं सार्वजनिक शौचालय का निर्माण किये जाने हेतु 99 लाख तथा विकासखण्ड मोरी के महासू देवता मंदिर ठडियार के सौन्दर्यीकरण एवं सार्वजनिक शौचालय निर्माण कार्य हेतु 01 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री ने जनपद पिथौरागढ़ के विधानसभा क्षेत्र धारचूला के अंतर्गत ग्राम सभा मदकोट में शिव मंदिर सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु 27 लाख के साथ ही जनपद चमोली के विधानसभा क्षेत्र बद्रीनाथ के अंतर्गत सती शिरोमणी माता अनसूया मंदिर का सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु 1.50 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मानसून सत्र 2025 में अत्यधिक वर्षा/अतिवृष्टि के कारण विभिन्न क्षेत्रों में आयी प्राकृतिक आपदा के कारण हुई हानि से राज्य आपदा मोचन निधि के अन्तर्गत जनपद पिथौरागढ़ हेतु मरम्मत एवं पुनर्निर्माण मद में 15 करोड़ तथा जनपद चमोली हेतु राहत एवं बचाव मद में 05 करोड़ व मरम्मत एवं पुनर्निर्माण मद में 05 करोड़, इस प्रकार जनपद चमोली को कुल 10 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

कांवड़ मेला 2025 में धामी सरकार ने रचा नया कीर्तिमान, लाखों श्रद्धालुओं को मिली स्वास्थ्य सेवा

उत्तराखंड की धामी सरकार ने इस वर्ष आयोजित कांवड़ मेला 2025 में स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कांवड यात्रा मार्ग में पड़ने वाले जनपदों को आकड़ों को देखें तो सावन माह के इस विशाल धार्मिक आयोजन में 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को निशुल्क, त्वरित और सुलभ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराकर राज्य सरकार ने एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत किया। भारी भीड़, सीमित संसाधन और मौसम की चुनौतियों के बीच राज्य सरकार की तैयारी सराहनीय रही। स्वास्थ्य विभाग की इस बड़ी कामयाबी के पीछे मुख्य चिकित्साधिकारी हरिद्वार डॉ आर.के सिंह की बड़ी भूमिका रही। उन्होंने विभागीय रणनीतियों बेहतर तरीके से धरातल पर उतारा व लगातार मोनिटरिंग करते रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश और नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग हरिद्वार ने मेला क्षेत्र में भीड़, सीमित संसाधनों और मौसम की चुनौती के बावजूद बेहतरीन कार्य किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा हमारी सरकार का संकल्प है कि हर श्रद्धालु को सुरक्षित, सम्मानित और स्वस्थ यात्रा मिले। कांवड़ मेले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली ने जनसेवा, प्रबंधन और तकनीक का अनूठा समन्वय दिखाया है। यह न केवल श्रद्धालुओं का भरोसा बढ़ाता है, बल्कि उत्तराखंड की सेवा भावना को भी सुदृढ़ करता है।

*आगामी कुंभ 2027 के लिए भी आदर्श मॉडल*

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा मेला क्षेत्र में कुल 2.43 लाख श्रद्धालुओं को प्राथमिक और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं। 24×7 इमरजेंसी सेवाएं निर्बाध रूप से चलीं। न तो कोई संक्रामक रोग फैला और न ही किसी बड़े हादसे की सूचना मिली। विभाग की टीम ने इस आयोजन को न केवल सुरक्षित, बल्कि नवाचार और अनुशासन का मॉडल बना दिया है, जो आगामी कुंभ 2027 के लिए भी आदर्श रहेगा।

*स्थायी व अस्थायी चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था*

35 अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए, इनमें से 25 विभाग द्वारा, और 10 निजी संस्थाओं द्वारा लगाए गए। 5 स्थानों पर कंटेनर बेस्ड स्थायी चिकित्सा केंद्र बनाए गए, जो भविष्य के आयोजनों में भी उपयोगी होंगे ।

*जियो टैगिंग और QR कोड तकनीक*

सभी शिविरों की जियो टैगिंग और QR कोडिंग की गई। श्रद्धालु QR स्कैन करके नजदीकी शिविर का लोकेशन, प्रभारी का नाम और मोबाइल नंबर जान सके।

*इमरजेंसी सेवाएं और मानव संसाधन*

45 डॉक्टर, 69 फार्मासिस्ट, 48 ईएनटी विशेषज्ञ, 58 स्टाफ नर्स, 58 एएनएम, 45 सीएचओ, 44 वाहन चालक, 108 एम्बुलेंस समेत 36 आपातकालीन वाहन, सभी पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल अलर्ट मोड पर रखे गए ।

*विशेष सुविधाएं, स्वच्छता और कचरा निस्तारण*

बर्न यूनिट, ईसीजी मशीन, स्नेक बाइट और डॉग बाइट यूनिट, व्हीलचेयर, ऑक्सीजन, फोल्डेबल बेड, फ्रंट काउंटर, हृदय रोग, एक्सीडेंट इंजरी, बर्न केस जैसी संवेदनशील समस्याओं के लिए अलग केंद्र रखे गए । सभी शिविरों से बायोमेडिकल वेस्ट का सही निस्तारण किया गया । किसी भी प्रकार का संक्रमण या बीमारी नहीं फैली, जिससे मेला क्षेत्र पूर्णतः सुरक्षित रहा।

*नशा नहीं, भक्ति से मिलेगा भोलेनाथ का आशीर्वाद*

मेला क्षेत्र में नशामुक्त कांवड़ यात्रा का संदेश व्यापक रूप से प्रचारित किया गया । हर चिकित्सा शिविर, पोस्टर, वेबसाइट और मीडिया के माध्यम से यह संदेश लोगों तक पहुंचाया गया ।

*प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग का तालमेल*

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग तीनों विभागों के बीच बेहतरीन समन्वय से मेला संचालन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा । यह आयोजन आने वाले कुंभ 2027 जैसे बड़े आयोजनों के लिए एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है । स्वास्थ्य सचिव ने कहा कांवड़ मेला 2025 में उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं न केवल कामयाब रहीं, बल्कि सेवा, नवाचार और प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया गया।

पौड़ी जनपद के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने नीलकंठ श्रावण मेले 2025 में आने वाले श्रद्धालुओं को 24×7 उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सराहनीय कार्य किया। नीलकंठ यात्रा मार्ग पर 9 स्थानों पर मेडिकल रिलीफ पोस्ट बनाई गईं। एमआरपी नीलकंठ, पुंडरासु, धाधला पानी, मौनी बाबा की गुफा, बाघखाला, वानप्रस्थ, गरुड़ चट्टी, पीपलकोटी, पीएचसी लक्ष्मण झूला, प्रत्येक पोस्ट पर 2 चिकित्सक, 2 फार्मेसी अधिकारी, 2 नर्सिंग स्टाफ, 1 कक्ष सेवक और 1 सफाईकर्मी तैनात रहा। कुल 07 एम्बुलेंस: 5 विभागीय + 2 108 सेवा, 2 मोबाइल टीमें, जिनमें 1 डॉक्टर, 1 नर्स और 1 सेवक शामिल, ऑन साइट पोस्टमार्टम के लिए लक्ष्मण झूला में 2 अतिरिक्त चिकित्सक और 1 सेवक की नियुक्ति, 24 चिकित्सक, 20 फार्मेसी अधिकारी,20 नर्सिंग अधिकारी, 10 कक्ष सेवक, 10 सफाई कर्मचारी, 7 एम्बुलेंस चालक तैनात रहा।

*मेले में श्रद्धालुओं को सफल उपचार मिला*

बुखार, उल्टी-दस्त, सांस फूलना, सामान्य व गंभीर चोटें, सर्पदंश, कुत्ते के काटने, पैरों व बदन का दर्द, छाले, त्वचा रोग, मिर्गी, कटना-फटना, हाई बीपी और शुगर संबंधी समस्याएं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.एम. शुक्ला के निर्देशन में PHC लक्ष्मण झूला में 24 घंटे कंट्रोल रूम संचालित किया गया। डॉ. राजीव कुमार को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया।

राज्य में हेल्थ और वेलनेस के अच्छे सेंटर बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किये जाएंः धामी

स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष ध्यान दिया जाए। अस्पतालों में आवश्यक संसाधनों के सुदृढ़ीकरण की दिशा में कार्य किये जाए। यह सुनिश्चत किया जाए कि अस्पताल रेफरल सेंटर न बनें। जन स्वास्थ्य सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा ओनरशिप लेकर कार्य किये जाए। ये निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को दिये।
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिये कि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और अस्पतालों में जन स्वास्थ्य सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की अलग से बैठक करें। स्वास्थ्य विभाग के तहत मुख्यमंत्री घोषणाओं की अद्यतन स्थिति से भी अवगत कराने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए टेलीमेडिसिन के माध्यम से सुपर स्पेशलिस्ट को मेडिकल कॉलेज से जोड़ने की व्यवस्था की जा रही है।

आयुष विभाग की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि उत्तराखण्ड में दो स्पिरिचुअल जोन बनाये जाने की सीएम घोषणा के क्रियान्वयन की कार्यवाही में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि योग, वेलनेस और आयुष हमारी विरासत है, राज्य में हेल्थ और वेलनेस के अच्छे सेंटर बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किये जाएं। राज्य में वेलनेस सेंटर और वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक साल का लक्ष्य बनाकर कार्य किया जाए। पुराने हेल्थ और वेलनेस सेंटरों के उन्नयन की दिशा में भी कार्य किये जाएं। जीएमवीएन, केएमवीएन और वाइब्रेंट विलेज में भी हेल्थ और वेलनेस सेंटरों की संभावनाओं पर कार्य किया जाए।

बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य की योग नीति के तहत योग निदेशालय की स्थापना की जायेगी योग केन्द्रों का पंजीकरण किया जायेगा। नये योग केन्द्रों को प्रोत्साहित किया जायेगा। राज्य में निवेशक सम्मेलन के बाद आयुष के क्षेत्र में 1100 करोड़ रूपये की ग्राउंडिंग शुरू हो चुकी है। प्रदेश में 300 आयुष्मान आरोग्य मंदिर को एन.ए.बी.एच के मानकों के अनुरूप उच्चीकृत कराया जा रहा है। 149 आयुष्मान आरोग्य मंदिर का एन.ए.बी.एच प्रमाणीकरण का कार्य पूर्ण हो चुका है।

समीक्षा के दौरान वर्चुअल माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत जुड़े थे। बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव आर राजेश कुमार, दीपेन्द्र चौधरी, श्रीधर बाबू अदांकी, निदेशक आयुष विजय कुमार जोगदण्डे, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।