महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर है यूसीसी: धामी

नैनीताल में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य सरकार ने प्रदेश की जनता से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का वादा किया था, जिसे सरकार ने अपने संकल्प के अनुरूप पूरा किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राज्य सरकार की जनता के प्रति प्रतिबद्धता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड गंगा, यमुना, आदि कैलाश, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसी पवित्र धार्मिक स्थलों की भूमि है, और इसी पावन भूमि से समानता, न्याय और सामाजिक समरसता का संदेश पूरे देश को दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित भावना के अनुरूप समान नागरिक संहिता को लागू कर उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि 27 जनवरी को राज्य में यूसीसी लागू होने के एक वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, जिसे राज्यभर में “यूसीसी दिवस” के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों, शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम, जनसंवाद एवं अन्य आयोजन किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यूसीसी महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समानता और सभी नागरिकों की सुरक्षा की दृष्टि से एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम साबित हुआ है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में राज्य की जनता ने सक्रिय सहयोग दिया है तथा विवाह, तलाक, वसीयत एवं अन्य प्रावधानों के अंतर्गत बड़ी संख्या में पंजीकरण कराए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी दिवस मनाने का उद्देश्य यही है कि अधिक से अधिक लोगों को इसके प्रावधानों, लाभों और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी मिले, ताकि समाज में समान अधिकार और न्याय की भावना और अधिक सशक्त हो।

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में वन्य मानव संघर्ष और जंगली जानवरों के हमलों से संबंधित प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस वर्ष कई क्षेत्रों में वन्य जीवों के कारण ग्रामीण जनता को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों में कई बच्चों, युवाओं और ग्रामीणों ने असाधारण साहस का परिचय देते हुए न केवल अपनी रक्षा की, बल्कि अन्य लोगों की जान भी बचाई।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए ठोस और दीर्घकालिक कदम उठा रही है। वन्य जीव प्रबंधन, सुरक्षा उपायों, त्वरित राहत, मुआवजा व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी को और अधिक मजबूत किया जा रहा है, ताकि भविष्य में आम नागरिकों को इस प्रकार की समस्याओं का सामना न करना पड़े।

नैनीताल में यातायात जाम की समस्या के समाधान से जुड़े प्रश्न पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मानसखंड क्षेत्र के अंतर्गत कैंचीधाम सहित कई प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल आते हैं, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों का भारी आवागमन रहता है। इसी कारण यहां यातायात दबाव बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए बाईपास, वैकल्पिक मार्ग, सड़क चौड़ीकरण और पार्किंग जैसी कई योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों—दोनों को जाम से राहत मिले और आवागमन सुरक्षित एवं सुगम हो।

आगामी चारधाम यात्रा की तैयारियों से संबंधित प्रश्न पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन—तीनों दृष्टियों से राज्य की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की यात्रा को और अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के लिए हर वर्ष की भांति सभी हितधारकों के साथ विस्तृत बैठकें की जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष के अनुभवों, सुझावों और फीडबैक के आधार पर इस वर्ष की तैयारियां और भी अधिक प्रभावी एवं बेहतर की जाएंगी। सड़क, स्वास्थ्य, सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता और आपदा प्रबंधन सहित सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो |

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता बनी तकनीकी उत्कृटता का मॉडल

उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की सेवाएं, अंग्रेजी के अलावा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध हैं। साथ ही आवेदक एआई की सहायता से भी यूसीसी की प्रक्रिया को समझने के साथ ही अपना पंजीकरण करवा सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले ही अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि, यूसीसी के तहत विभिन्न सेवाओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को बेहद सरल रखा जाए, साथ ही वेबसाइट को यूजर फ्रेंडली रखा जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति स्वयं ही अपना पंजीकरण करवा सके। इसी क्रम में आईटीडीए ने यूसीसी की वेबसाइट को आठवीं अनुसूची में शामिल 22 अनुसूचित भाषाओं — असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू, सिंधी, बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली और मणिपुरी के साथ अंग्रेजी में तैयार किया है। इस तरह आवेदक अपनी भाषा के अनुसार ना सिर्फ यूसीसी के नियम, प्रक्रिया और पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेजों की जानकारी ले सकता है, बल्कि अपनी भाषा में ही आवेदन भी कर सकता है। इस काम में एआई की भी मदद ली जा सकती है।

*हमारी सरकार पहले ही दिन से सरलीकरण से समाधान तक के मूलमंत्र लेकर चल रही है। समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जनसामान्य को पंजीकरण में किसी तरह की मुश्किल न आए। यूसीसी तकनीकी उत्कृटता का एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। यही कारण है कि बीते एक साल में यूसीसी प्रक्रिया को लेकर एक भी शिकायत नहीं आई है।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

यूसीसी का एक साल: ऑनलाइन प्रक्रिया से आसान हुआ विवाह पंजीकरण

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू हुए, आगामी 27 जनवरी को एक साल पूरा होने जा रहा है। महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों में समता कायम करने के साथ ही यूसीसी का एक महत्वपूर्ण योगदान प्रक्रियाओं के सरलीकरण के रूप में रहा है। यही कारण है कि यूसीसी लागू होने के एक साल से कम समय में 4,74,447 शादियों का पंजीकरण हो चुका है। अब पति – पत्नी कहीं से भी ऑनलाइन तरीके से विवाह पंजीकरण करवा रहे हैं। पहले उन्हें दो गवाहों के साथ तय तिथि पर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था।
समान नागरिक संहिता लागू होने से पहले, ‘उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत, विवाह पंजीकृत किए जाते थे। यह पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन थी, इसलिए पति- पत्नी को दो गवाहों के साथ विवाह पंजीकरण के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था। लेकिन यूसीसी के लगभग शत प्रतिशत विवाह पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से हो रहे हैं। जिसमें दंपत्ति या गवाह कहीं से भी, अपने रिकॉर्ड और वीडियो बयान दर्ज करा, पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। यही कारण है कि यूसीसी लागू होने के बाद एक साल से कम समय में सोमवार, 19 जनवरी 2026 की दोपहर तक 4,74,447 विवाह पंजीकरण सम्पन्न हो चुके हैं। इस तरह प्रतिदिन औसत पंजीकरण की संख्या 1400 के करीब पहुंच रही है, जबकि पिछले अधिनियम में विवाह पंजीकरण का औसत प्रतिदिन 67 का आता था। यही नहीं इस दौरान, 316 लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से ही विवाह विच्छेद करने और 68 ने लिवइन रिलेशनशिप में जाने जबकि 02 ने लिवइन रिलेशनशिप समाप्त करने का प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया है।
औसत पांच दिन पंजीकरण
यूसीसी तहत यूं तो आवेदन के बाद विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 15 दिन की समय सीमा तय है, लेकिन आवेदन करने के बाद औसत पांच दिन के भीतर ही पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त हो रहा है। जबकि पुराने अधिनियम में एक तो आवेदकों को भौतिक तौर पर पंजीकरण कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था, उस पर विवाह पंजीकरण के लिए समय सीमा भी तय नहीं थी।

*उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू करते हुए, अन्य राज्यों को दिशा दिखाई है। बीते एक साल में जितनी पारदर्शी और सरलता से यूसीसी के प्रावधानों को लागू किया गया है, उससे लोगों में पूरी प्रक्रिया के प्रति विश्वास बढ़ा है। यही कारण है कि अब बड़ी संख्या में लोग यूसीसी के तहत पंजीकरण करवा रहे हैँ। उत्तराखंड समान नागरिक संहिता हर तरह से एक मॉडल कानून साबित हुआ है।*

*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

क्षतिग्रस्त बिजली खम्बों, लटकी तारों सहित टूटी पेयजल पाईपलाईनों की मरम्मत करेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न मुद्दों की समीक्षा करते हुए दिशा निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को आमजन की समस्याओं को सुनने एवं उनके निराकरण पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विद्युत विभाग, पेयजल विभाग एवं अन्य ऐसे विभाग जो नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराते हैं, अपने कार्यक्षेत्रों का दौरा अवश्य करें। उन्होंने विभागों को निर्देश दिए हैं कि टेढ़े हो चुके बिजली के खम्बों, लटकी तारों सहित टूटी पेयजल पाईपलाईनों की मरम्मत का कार्य तत्काल कराए जाएं। उन्होंने कहा कि जब तक अधिकारी फील्ड पर नहीं उतरेंगे, आमजन की समस्याओं से अवगत नहीं होंगे। उन्होंने सभी अधिकारियों को फील्ड का दौरा नियमित रूप से किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने सभी जनपदों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) रजिस्ट्रेशन की प्रगति की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आमजन अधिक से अधिक संख्या में अपने विवाह का पंजीकरण कराएं इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएं। उन्होंने कहा कि पंजीकरण के लम्बित मामलों को तेजी से निस्तारित किया जाए। उन्होंने मैदानी जनपदों में पंजीकरण के लिए विशेष अभियान संचालित किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रायः देखा जा रहा है कि ऐसे विवाह पंजीकरण, जिनमें विवाह के समय पति-पत्नी दोनों या दोनों में से कोई एक नाबालिग रहा हो, परन्तु वर्तमान में पंजीकरण के समय दोनों बालिग हो चुके हैं, को अस्वीकार किया जा रहा है, जो कि गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे विवाह के मामलों का भी पंजीकरण किया जाए।

मुख्य सचिव ने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम- एबीएचआईएम) की जिलावार समीक्षा करते हुए प्रत्येक जनपद से प्रत्येक केन्द्र की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने ब्लॉक स्तर पर ‘ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों‘ की स्थापना के कार्य में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए। कहा कि जिन इकाइयों में निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है, उन इकाइयों में उपकरणों की व्यवस्था शीघ्र सुनिश्चित करते हुए ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों को सक्रिय किया जाए।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगौली, चंद्रेश कुमार यादव, विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव रंजना राजगुरू, विजय कुमार जोगदंडे, मनुज गोयल, अपर सचिव गृह निवेदिता कुकरेती सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

राज्य में यूसीसी लागू करने के लिए कैबिनेट में जल्द तय की जाएगी तिथि

समान नागरिक संहिता, उत्तराखण्ड 2024 अधिनियम के राज्य में क्रियान्वयन के लिए सेवानिवृत्त आई.ए.एस. शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में बनाई गई ‘नियमावली और क्रियान्वयन समिति’ ने सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को नियमावली का ड्राफ्ट सौंपा। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आई.ए.एस. शत्रुघ्न सिंह, सदस्य सामाजिक कार्यकर्ता मनु गौड़, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, अपर पुलिस महानिदेशक अमित सिन्हा और स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा मौजूद थे।

समिति द्वारा समान नागरिक संहिता, उत्तराखण्ड 2024 अधिनियम की नियमावली का ड्राफ्ट सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 2022 में प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद हमने मंत्रिमंडल की पहली बैठक में निर्णय लिया कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करेंगे। सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति बनाई गई। कमेटी के रिपोर्ट सौंपने के बाद 07 फरवरी, 2024 को राज्य विधान सभा में पारित किया गया। उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता विधेयक 2024 पर महामहिम राष्ट्रपति की सहमति के बाद 12 मार्च, 2024 को समान नागरिक संहिता उत्तराखण्ड, 2024 अधिनियम पारित हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता अधिनियम की नियमावली आज सौंपी गई है। इस नियमावली में मुख्य रूप से चार भाग है। जिसमें विवाह एवं विवाह-विच्छेद लिव-इन रिलेशनशिप, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण तथा उत्तराधिकार सम्बन्धी नियमों के पंजीकरण संबंधी प्रक्रियाएं उल्लिखित है। उन्होंने कहा कि जल्द ही मंत्रिमंडल की बैठक में इस अधिनियम को राज्य में प्रभावी रूप से लागू करने के लिए तिथि तय की जायेगी। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। जन सामान्य की सुलभता के दृष्टिगत इस समान नागरिक संहिता के लिए एक पोर्टल तथा मोबाइल एप भी तैयार किया गया है, जिससे कि पंजीकरण, अपील आदि की समस्त सुविधाएं जनसामान्य को ऑनलाइन माध्यम से सुलभ हो सके। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड में सबको समान रूप से न्याय मिले। महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विधेयक बना है। जल्द इस अधिनियम को धरातल पर उतारा जायेगा। आजादी के बाद उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन जायेगा जिसे समान नागरिक संहिता लागू करने का गौरव प्राप्त होगा।

इस अवसर पर उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, विनय शंकर पांडेय, विशेष सचिव रिद्धम अग्रवाल, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने ली यूसीसी की नियमावली बनाने को लेकर बैठक

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी तथा उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता की समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में बीजापुर अतिथिगृह में उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता की नियमावली बनाने के संबंध में समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई।

बैठक में गृह, पुलिस, स्वास्थ्य, आबकारी, अल्पसंख्यक, संस्कृति, खाद्य व नागरिक आपूर्ति, ऊर्जा, नियोजन, वित्त विभाग के सहयोग व समन्वय से उत्तराखण्ड यूसीसी की नियमावली बनाने से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्य सचिव राधा रतू़ड़ी व उत्तराखण्ड यूसीसी सदस्य श्री शत्रुघ्न सिंह ने यूसीसी के क्रियान्वयन के लिए बनने वाली नियमावली को अन्तिम रूप देने में सभी विभागों को सहयोग व समन्वय के निर्देश दिए हैं।

यूसीसी सदस्य मनु गौऱ, सुरेखा डंगवाल, पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु सहित गृह, पुलिस, स्वास्थ्य, आबकारी, अल्पसंख्यक, संस्कृति, खाद्य व नागरिक आपूर्ति, ऊर्जा, नियोजन, वित्त विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।