सीएम ने 212 महिला लाभार्थियों को प्रथम किश्त के रूप में 1 करोड़ 55 लाख 40 हजार रुपये की हस्तांतरित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन, में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने योजना के द्वितीय चरण के अंतर्गत 212 नई महिला लाभार्थियों को प्रथम किश्त के रूप में 1 करोड़ 55 लाख 40 हजार रुपये तथा योजना के प्रथम चरण की 276 महिला लाभार्थियों को द्वितीय किश्त के रूप में 1 करोड़ 20 लाख 76 हजार 875 रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की। इस प्रकार आज कुल 488 महिला लाभार्थियों को 2 करोड़ 76 लाख 16 हजार 875 रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदान की गई। ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के प्रथम चरण में 10 फरवरी 2026 को 484 महिला लाभार्थियों को 03 करोड़ 45 लाख की सहायता राशि प्रदान की गई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी मातृशक्ति होती है। जब महिलाएं सशक्त होती हैं तो परिवार, समाज और राष्ट्र भी सशक्त बनता है। उत्तराखण्ड की माताएं और बहनें परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं। राज्य सरकार का संकल्प प्रत्येक महिला को सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का सशक्त आधार उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का उद्देश्य एकल, निराश्रित, विधवा, परित्यक्ता एवं तलाकशुदा महिलाओं के साथ-साथ एसिड अटैक पीड़िताओं, अन्य आपराधिक घटनाओं से प्रभावित महिलाओं तथा ट्रांसजेंडर को स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना के अंतर्गत महिलाओं को उनके निवास स्थान अथवा स्थानीय क्षेत्र में स्वरोजगार स्थापित करने के लिए अधिकतम 2 लाख रुपये तक की परियोजना स्वीकृत की जाती है, जिसमें 75 प्रतिशत तक अनुदान राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि महिलाओं को सम्मानपूर्वक अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। महिला आरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी अभियान तथा तीन तलाक जैसी कुप्रथा की समाप्ति जैसे ऐतिहासिक निर्णयों ने महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में सशक्त भागीदारी प्रदान की है। राज्य सरकार भी प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना तथा मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार 15 हजार से अधिक महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों एवं लखपति दीदियों को इन्क्यूबेशन सुविधा उपलब्ध करा रही है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की लगभग 5 लाख महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। 7 हजार से अधिक ग्राम संगठन तथा 500 से अधिक क्लस्टर संगठन महिलाओं के सामूहिक नेतृत्व को सशक्त बना रहे हैं। वहीं, 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। राज्य सरकार महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन के लिए भी सुदृढ़ व्यवस्था विकसित कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया है। साथ ही, समान नागरिक संहिता लागू कर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें समान न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना प्रदेश की हजारों महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखेगी।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना प्रदेश की एकल महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता, सम्मान और आत्मविश्वास का नया अध्याय लिख रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को सहायता की पात्र नहीं, बल्कि विकास की साझेदार मानते हुए उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य कर रही है। योजना के माध्यम से एकल महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बनकर सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकें। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, विपणन और उद्यमिता से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने लाभार्थी महिलाओं से इस अवसर का पूरा लाभ उठाकर अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना की लाभार्थी महिलाओं ने राज्य सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना को आगे बढ़ाने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर सचिव महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास चन्द्रेश कुमार, निदेशक बंशीलाल राणा एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

आंगनबाड़ी कार्यकत्री और एएनएम के माध्यम से गर्भवती माताओं का ट्रेकिंग सिस्टम अपडेट रखेंः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि बच्चों में कुपोषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जच्चा और बच्चा दोनों का स्वस्थ रहना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि राज्य में आंगनबाड़ी कार्यकत्री और एएनएम के माध्यम से गर्भवती माताओं का ट्रेकिंग सिस्टम अपडेट रखा जाए। एनीमिया की कमी को दूर करने के लिए महिलाओं को मिलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चत की जाए। आंगनबाड़ी के माध्यम से बच्चों और माताओं को दिये जाने वाले पुष्टाहार की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। पुष्टाहार की आकस्मिक रूप से गुणवत्ता जांच भी की जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि कुपोषण से मुक्ति, मातृ-शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए राज्य के कुछ गांवों को आकांक्षी गांवों के रूप में लिया जाए। कुपोषण से मुक्ति के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को आपसी समन्वय के साथ संचालित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत राज्य में बालिकाओं को बेहतर शिक्षा और आत्मनिर्भर बनाने के लिए बनाई गई योजनाओं को और अधिक व्यवहारिक बनाया जाय। महिला सशक्तिकरण की दिशा में महिलाओं के कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिये जाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये।

बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, चन्द्रेश यादव, निदेशक महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास प्रशांत आर्य उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कनिष्ठ सहायक के पदों पर चयनित 16 अभ्यर्थियों को प्रदान किये नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से कनिष्ठ सहायक के पद पर चयनित 16 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। इनमें महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के 12 तथा संस्कृति विभाग के 4 अभ्यर्थी शामिल थे।

मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज से आपके जीवन का नया अध्याय प्रारम्भ हो रहा है। आप सबकी कड़ी मेहनत तथा माता पिता एवं गुरूजनों के आशीर्वाद से आपको यह सफलता मिली है। इस सफतला के बाद आपको नये जीवन में मानक तय करने होंगे। अपनी प्रतिभा, क्षमता तथा योग्यता के बल पर अपनी कार्य पद्धति में अपना सर्वाेत्तम देने का प्रयास करना होगा। अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ नये जीवन की शुरुआत आत्म अनुशासन और नियमित दिनचर्या के साथ करें। जन सेवा करने का आप सबको जो अवसर मिला है, इसमें अपनी सामर्थ्य का पूरा उपयोग करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य का जीवन अमूल्य है। कई जन्मों के बाद मनुष्य जीवन प्राप्त होता है। इसे ईश्वर का वरदान समझे तथा अपने दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा के साथ करें। इससे आप सभी को आत्म संतोष भी प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे अच्छे एवं बुरे कार्यों का पूरा हिसाब ईश्वर रखते है इसलिये अपने कार्यक्षेत्र में भूलकर भी गलत कार्य न करें। आपके अच्छे कार्यों का लाभ आपको तो मिलेगा ही इससे समाज भी लाभान्वित होता है।

इस अवसर पर सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास हरिचन्द सेमवाल, निदेशक महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास प्रशान्त आर्य, निदेशक संस्कृति बीना भट्ट सहित अन्य अधिकारी एवं नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी उपस्थित थे।

आंगनवाड़ी कर्मियों को फिर दिया सीएम ने तोहफा, अब 2 लाख का बीमा भी होगा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सनातन धर्म इंटर कॉलेज रेस कोर्स में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान आंगनवाड़ी संगठन द्वारा मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए मानदेय वृद्धि करने पर आभार व्यक्त किया गया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की, कि सभी आंगनवाड़ी कर्मियों को 2 लाख का वार्षिक दुर्घटना बीमा पॉलिसी उपलब्ध करवाई जायेगी। आंगनवाड़ी कर्मियों का मासिक मानदेय डिजिटल तरीक़े से सीधे उनके खाते मे दिया जायेगा। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के 25 प्रतिशत पद आंगनवाड़ी सहायिकाओं, जिन्होंने 10 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूर्ण की हो और आवश्यक शैक्षिक योग्यता पूरी करती हो, के द्वारा भरे जायेंगे। प्रदेश में जिन लोगों पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू नहीं होता है, उन्हें दिसंबर 2021 से मार्च 2022 तक प्रत्येक माह कुल 20 किलोग्राम खाद्यान्न/प्रति कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से सेनेटरी नैपकिन के लिए जो एक रुपये का भुगतान करना पड़ता था वो अब निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के निर्माण में मातृशक्ति की बड़ी भूमिका है, महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार द्वारा अनेक कार्य किये जा रहे हैं। उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आन्दोलन में मातृशक्ति की अहम भूमिका निभाई। सरकार जनता की साझीदार के रूप में कार्य कर रही है। बीते पाँच महीनों में सरकार ने 500 से ज़्यादा निर्णय लिए और उन पर शासनादेश जारी किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि 2025 तक राज्य हर क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बने। खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में नई खेल नीति बनाई गई है। हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी वर्कर का मानदेय बढ़ाकर उनके ऋण को चुकाने का प्रयास किया है। विपरीत परिस्थितियों में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां किस प्रकार कार्य करते हैं, यह सब बखूबी जानते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके दोनों बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा भी आंगनबाड़ी केंद्र में ही हुई है, इसलिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के मेहनत से भलीभांति अवगत हैं। राज्य के विकास के लिए नारी का सशक्त होना जरूरी है। राज्य में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल के बाद सरकार के पास आय के संसाधनों में भी कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने मानदेय बढ़ाने में कंजूसी नहीं की। सरकार ने आजीविका से जुड़ी प्रदेश की महिलाओं को मजबूत करने के लिए 119 करोड़ रूपये का कोविड राहत पैकेज जारी किया। इसके अलावा सरकार ने आशा, उपनल समेत तमाम विभागों में कार्यरत कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाया है।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश में होने वाली विभिन्न गतिविधियों में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का अहम योगदान होता है। हर क्षेत्र में आंगनवाड़ी बहनों द्वारा सहयोग दिया जाता है। आंगनवाड़ी बहनों के हित में राज्य सरकार द्वारा हर संभव कार्य किये जा रहे हैं। महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। बीते पांच वर्षों में आंगनवाड़ी केंद्रों को ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य एवं पोषण की धुरी मानते हुए आंगनवाड़ी केंद्रों में गैस सिलिंडर, पेयजल, शौचालय, स्वच्छता किट, प्री स्कूल किट, मेडिसिन किट तथा किचन गार्डन आदि अनेक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं हैं। ग्राम स्तर पर आंगनवाड़ी कार्मिकों की सशक्त एवं सक्रिय उपस्थिति का परिणाम है कि आंगनवाड़ी के केंद्रों के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 9 लाख लाभार्थियों को पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है।
इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, महेंद्र भट्ट, भरत चौधरी, सचिव महिला एवं बाल विकास एच.सी.सेमवाल, मंच संचालिका डॉ. कंचन नेगी, संबंधित विभागीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां मौजूद रही।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सरकार बढ़ाने जा रही मानदेय

प्रदेश सरकार 35 हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने जा रही है। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, इसके लिए विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार कर इसे मंजूरी के लिए वित्त विभाग को भेजा गया है। वित्त की मंजूरी के बाद प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में एक से दो हजार रुपये का इजाफा होगा। इसके अलावा एक महीने के भीतर सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। 
प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 7500 रुपये, मिनी कार्यकर्ताओं को 4750 रुपये एवं सहायिकाओं को 3750 रुपये मानदेय दिया जा रहा है। सरकार आंगनबाड़ी एवं मिनी कार्यकर्ताओं के मानदेय में दो हजार एवं सहायिकाओं के मानदेय में 1500 रुपये की बढ़ोत्तरी कर सकती है।