हरक सिंह भाजपा और मंत्रिमंडल से बर्खास्त

भाजपा ने बड़ा कदम उठाते हुए काबीना मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत को मंत्रीमंडल से बर्खास्त कर दिया। साथ ही छह साल के लिए पार्टी से भी निष्कासित कर दिया। सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आज यह कार्रवाई की गई। हरक पिछले काफी दिनों से विधानसभा चुनाव में मनमाफिक टिकट के लिए दबाव की राजनीति कर रहे थे। उनके कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाओं को देखते हुए आज भाजपा ने यह कदम उठा लिया। अपनी बहु अनुकृति रावत के लिए लैंसडौन सीट से टिकट की मांग खारिज होने से नाराज हरक आज दोपहर दिल्ली रवाना हो गए थे। माना जा रहा था कि हरक कांग्रेस में शामिल हो सकते है।
सूत्रों के अनुसार पार्टी के नेताओं ने हरक से बातचीत का प्रयास भी किया, लेकिन उनके बढ़ते कदमों को थमते न देख भाजपा ने कड़ा फैसला लेने का निर्णय कर लिया। देर रात संपर्क करने पर सीएम कार्यालय ने हरक की मंत्रीमंडल से बर्खास्तगी की पुष्टि की।

भाजपा के अनुशासन की बार बार मखौल उड़ा रहे थे हरक
कैबिनेट मंत्री डॉ हरक सिंह रावत पिछले पाँच सालों से बार बार भारतीय जनता पार्टी के अनुशासन की मखौल उड़ा रहे थे। यही कारण रहा कि अब कांग्रेस में जाने की चर्चाओं के बीच भाजपा को उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा। दरअसल डॉ हरक सिंह रावत पिछले पांच सालों में कई बार पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुके थे।
डॉ हरक सिंह रावत को लेकर भाजपा के ग्रास रुट कार्यकर्ताओं में पहले से ही नाराजगी थी। उनके साथ ही कॉंग्रेस से आये नेताओ को पार्टी में ज्यादा ही तवज्जो दिए जाने से पार्टी में अंदरखाने खासी नाराजगी थी। आम कार्यकार्ता बाहर से आए नेताओं को कभी भी तवज्जो नहीं चाहते थे।
इसके बावजूद डॉ हरक सिंह रावत और उनके सहयोगी पार्टी को पांच सालों तक चलाते रहे। भाजपा नेतृत्व ने हर सम्भव कोशिश की की हरक सिंह रावत को पार्टी से जोड़ा रखा जाए लेकिन अब पानी सर से ऊपर होने और उनके कांग्रेस में शामिल होने के निर्णय के बाद पार्टी को उनके खिलाफ कदम उठाना पड़ा।

कैबिनेट छोड़ इस्तीफा देकर निकल गए थे
डॉ हरक सिंह रावत कुछ दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित हो रही कैबिनेट की बैठक छोड़ निकल गए थे। उनकी नाराजगी का कारण उस समय कोटद्वार मेडिकल कॉलेज का प्रस्ताव न आना था लेकिन जानकारों का कहना है कि हरक उस वक्त भी लैंसडाउन सीट से अपनी बहू के लिए टिकट की मांग कर रहे थे। हरक की नाराजगी की वजह से भाजपा में हडकंप मच गया था और 24 घंटे तक हरक को मानाने के प्रयास किए जाते रहे। मुख्यमंत्री और हरक के बीच वार्ता के बाद उस मामले का अंत हो पाया था।

बहू के लिए टिकट मांग दिखा रहे थे बागी तेवर
अपने साथ लैंसडोन से बहू अनुकृति गुसाईं के लिए टिकट की मांग को लेकर कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत लगातार बागी तेवर अपनाए हुए थे। भाजपा कोर कमेटी की बैठक में पहुंचने की बजाय दिल्ली के चक्कर काट रहे थे। पार्टी पर लगातार दबाव बनाए हुए थे। हरक सिंह रावत हमेशा दबाव की राजनीति के लिए जाने जाते रहे हैं।
वे भाजपा पर लगातार हर बार किसी न किसी चीज के लिए दबाव बनाए हुए थे। पहले उन्होंने कोटद्वार मेडिकल कालेज के नाम पर कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा देने की धमकी देकी र भाजपा को असहज किया। हालांकि उस दौरान हरक को मना लिया गया। मेडिकल कालेज को मंजूरी देने के साथ 25 करोड़ की स्वीकृति भी दी गई।
इसके बाद भी हरक पार्टी पर दबाव बनाए हुए थे। इस बार दबाव अपने लिए केदारनाथ सीट और बहू अनुकृति गुसाईं के लिए लैंसडोन सीट का बनाया जा रहा था। भाजपा में बात न बनती देख, वो कांग्रेस में बहू के लिए विकल्प तलाशने लगे। उनकी यही तलाश उन पर भारी पड़ी।

भाजपा का कड़ा संदेश
भाजपा के इस फैसले के अनुशासन के लिहाज से कड़ा संदेश माना जा रहा है। पिछले काफी समय से हरक बगावती तेवर अपनाए हुए थे। पिछले दिनों कैबिनेट बैठक में इस्तीफे की धमकी दे चुके रावत लगातार कांग्रेस नेताओं के संपर्क में भी थे। हरक के आगे हर बार घुटने टेकने से खुद भाजपा के भीतर पसंद नहीं किया जा रहा था। हरक को बर्खास्त कर भाजपा ने साफ कर दिया है कि अब वो किसी दबाव में आने वाली नहीं है।

20 सीटों पर उम्मीदवार बदलने के मूड में भाजपा

उत्तराखंड विधानसभा के लिए प्रत्याशियों के नाम तय करने में भाजपा नेतृत्व को तगड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। हालांकि सूत्र बता रहे हैं कि चुनाव समिति की बैठक में 50 विधानसभा क्षेत्रों से आए नामों पर तकरीबन सहमति हो चुकी है। लेकिन 20 विधानसभा सीटों पर माथापच्ची के बाद असमंजस की स्थिति है। अब इसे केंद्रीय नेतृत्व और संसदीय बोर्ड पर छोड़ा गया है।
प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में विधानसभा वार आए नामों पर विचार हुआ। मंत्रियों, वरिष्ठ विधायकों की सीटों पर एक-एक नाम, ऐसी सीटें जिसमें पार्टी के पास सकारात्मक फीड बैक है पर एक से दो नाम का पैनल बनाया गया है। जिन सीटों पर पार्टी की स्थिति कमजोर है या कांग्रेस के कब्जे वाली हैं, वहां तीन-तीन नामों के पैनल भेजे गए हैं। इन्हीं सीटों पर पार्टी सहमति के बिंदू नहीं पहुंच पाई है।

गढ़वाल मंडल विधानसभा सीट –
थराली- पूर्व विधायक स्व. मगन लाल शाह की पत्नी विधायक हैं और टिकट मांग रही हैं लेकिन पार्टी वहां ज्यादा मजबूत प्रत्याशी तलाश रही है।
पौड़ी-विधायक मुकेश कोली के खिलाफ पार्टी के खेमा लामबंद है। पार्टी सर्वे के नतीजे भी कोली के लिए सहज नहीं बताए जा रहे।
कोटद्वार-हरक सिंह रावत के कांग्रेस में लौटने के बाद स्थिति बदल गई है।
पुरोला-इस सीट पर कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं और भाजपा के पूर्व प्रत्याशी माल चंद कांग्रेस में चले गए हैं।
घनसाली-संगठन के सर्वे में विधायक शक्तिलाल शाह की स्थिति बहुत मजबूत नहीं बताई जा रही।
टिहरी-चर्चा है कि पार्टी इस सीट पर कांग्रेस से एक बड़े चेहरे को मैदान में उतार सकती है।
झबरेड़ा-पार्टी की सर्वे रिपोर्ट और कार्यकर्ताओं का फीड बैक विधायक देश राज कर्णवाल के अनुकूल नहीं माना जा रहा।
पिरान कलियर-यह सीट कांग्रेस के कब्जे वाली है और पार्टी अभी तय नहीं कर पा रही है कि किस चेहरे पर दांव लगाया जाए।
राजपुर रोड-इस सीट पर खजानदास विधायक हैं और इस बार पार्टी के भीतर सीट पर नए विकल्प की चर्चा हो रही है।
गंगोत्री-इस सीट पर पार्टी प्रत्याशी चयन को लेकर असमंजस में है। पूर्व विधायक की पत्नी टिकट मांग रही हैं।
भगवानपुर-इस सीट पर पार्टी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री सुबोध राकेश को प्रत्याशी बनाया था। लेकिन वह पार्टी छोड़कर बसपा में चले गए। पार्टी यहां मजबूत प्रत्याशी की खोज में है।

’कुमाऊं मडंल में ये सीटें फंसी’
नैनीताल-इस सीट पर संजीव आर्य विधायक थे, लेकिन पार्टी छोड़ने के बाद अब भाजपा को इस सीट पर टक्कर के प्रत्याशी की तलाश है। पार्टी कांग्रेस नेत्री सरिता आर्य को साधने की कोशिश कर रही है।
जागेश्वर-कांग्रेस के कब्जे वाली सीट पर पार्टी को मजबूत प्रत्याशी चाहिए।
अल्मोड़ा-इस सीट पर रघुनाथ सिंह चौहान विधायक हैं। क्षेत्र में पार्टी उनका विकल्प तलाश रही है।
रानीखेत-यहां कांग्रेस के करन माहरा विधायक हैं। भाजपा इस सीट पर मजबूत चेहरे की तलाश में है।
गंगोलीहाट-भाजपा की मीना गंगोला विधायक हैं। यहां भी पार्टी ज्यादा मजबूत विकल्प खोज रही है।
काशीपुर-काशीपुर में भाजपा विधायक हरभजन सिंह चीमा अपने बेटे को प्रत्याशी बनाना चाहते हैं। लेकिन पार्टी के अन्य दावेदार भी टिकट मांग रहे हैं।
बाजपुर-विधायक यशपाल आर्य के भाजपा छोड़ देने के बाद परिस्थितियां बदली हैं और पार्टी मजबूत विकल्प खोज रही है।
रामनगर-रामनगर सीट पर भी पार्टी को मजबूत विकल्प की तलाश है।
हल्द्वानी-इस सीट पर भी भाजपा में टिकट को लेकर मारामारी है।

डोईवाला सीट पर त्रिवेंद्र का नाम टॉप पर
सूत्रों के मुताबिक, डोईवाला विधानसभा सीट पर नामों का जो पैनल बनाया गया है उसमें पहले स्थान पर पूर्व मुख्यमंत्री व सिटिंग विधायक त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम बताया जा रहा है। लेकिन उनके नाम पर अंतिम फैसला पार्टी की बैठक और संसदीय बोर्ड में ही होगा।

11 जिलों की 30 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम का एलान

समाजवादी पार्टी ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। पहली सूची में 11 जिलों की 30 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम का एलान किया गया है। समाजवादी पार्टी उत्तराखंड में अभी तक हुए विधानसभा चुनावों में अपना खाता खोलने में कामयाब नहीं हो पाई है। इस बार सपा बदले हुए तेवरों के साथ मैदान में है। नई हवा है, नई सपा है के नारे के साथ पार्टी इस विधानसभा चुनाव में ताल ठोक रही है।
इस कड़ी में रविवार को सपा के राष्ट्रीय सचिव और उत्तराखंड प्रभारी राजेंद्र चौधरी ने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की। इनमें उत्तरकाशी जिले की पुरोला सीट से चयन सिंह, गंगोत्री से पंडित विजय बहुगुणा, बदरीनाथ से वीरेंद्र कैरूनी, थरोली से किशोर कुमार, कर्णप्रयाग से गजेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया गया है। पौड़ी गढ़वाल जिले की यमकेश्वर विधानसभा सीट से विपिन बडोनी, पौड़ी से राजेंद्र प्रसाद, श्रीनगर से सुभाष नेगी, चौबट्टाखाल से जय प्रकाश टम्टा, लैंसडौन से संदीप रावत को टिकट दिया गया है। पिथौरागढ़ जिले की धारचूला सीट से मनोज प्रसाद, डीडीहाट से सुरेंद्र सिंह गुरुंग, पिथौरागढ़ से रमेश सिंह बिष्ट, गंगोलीहाट से गोपाल दास खुमति को पार्टी प्रत्याशी बनाया गया है।
बागेश्वर जिले के कपकोट से हरी राम शास्त्री, बागेश्वर से लक्ष्मी देवी, अल्मोड़ा जिले की द्वाराहाट सीट से गणेश कांडपाल, सल्ट से मुकेंद्र बंगारी, रानीखेत से सुनीता रिखाड़ी, सोमेश्वर से बलवंत आर्य, अल्मोड़ा से अर्जुन सिंह भाकुनी व जागेश्वर से रमेश सनवाल को टिकट दिया गया है। चम्पावत जिले की लोहाघाट सीट से मो. हारून, नैनीताल जिले की हल्द्वानी सीट से सोएब अहमद, ऊधमसिंह नगर की कालाढूंगी सीट से राजेंद्र कुमार वालिया, काशीपुर से सरदार बलजिंदर सिंह, बाजपुर से मनीषा, हरिद्वार जिले की रुड़की विधानसभा सीट से राजा त्यागी, देहरादून जिले की धर्मपुर विधानसभा सीट से मो नासिर व कैंट विधानसभा सीट से डा राकेश पाठक को पार्टी प्रत्याशी घोषित किया गया है।

सरकार ने नई एसओपी की जारी, जानें क्या है पाबंदी

कोरोना के बढ़ते केसों के बीच उत्तराखंड सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है। कोविड 19 संक्रमण के चलते राजनीतिक दलों के सार्वजनिक स्थानों पर रैली, धरना-प्रदर्शन पर भी 22 जनवरी तक रोक रहेगी। राजनीतिक दलों के किसी भवन में होने वाले कार्यक्रमों में सभागार की क्षमता के 50 प्रतिशत अथवा 300 लोगों तक, जो भी कम होगा वहीं मान्य होगा। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र और 12 वीं कक्षा तक सभी शैक्षणिक संस्थानों को 22 जनवरी तक बंद रखने का निर्णय किया है।
रविवार शाम मुख्य सचिव और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सीईओ डॉ. एसएस संधु ने कोविड 19 के लिए संशोधित एसओपी जारी की। 11 जनवरी को जारी एसओपी की अवधि आज समाप्त हो गई थी। मुख्य सचिव के अनुसार कोविड के तहत लागू प्रतिबंधों को 22 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है। नाइट करफ्यू, व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए तय समयावधि पूर्व की तरह लागू रहेगी।

ये रहेंगे बंद-
– आंगनबाड़ी केंद्र, 12 वीं कक्षा तक के सभी सरकारी, सहायताप्राप्त व निजी स्कूल
– स्वीमिंग पूल, वाटर पार्क भी रहेंग बंद
– राजनीतिक दलों की गतिविधियों पर 22 तक पांबदी, इंडोर कार्यक्रम को सशर्त छूट

यह मानक रहेंगे जारी
नाइट कर्फ्यू रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक लागू रहेगा। जिम, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल, स्पा, सैलून, थिएटर, ऑडिटोरियम, मीटिंग हॉल केवल 50 फीसदी क्षमता के संचालित होंगे। खेल संस्थान, स्टेडियम, खेल के मैदान खिलाडियों के प्रशिक्षण के लिए 50 फीसदी क्षमता के साथ खोले जा सकेंगे।

इसी प्रकार खुले अथवा बंद स्थान पर होने वाले विवाह समारोह,
शवयात्रा आदि में केवल 50 फीसदी क्षमता में ही लोग शामिल हो सकते हैं।
इसी प्रकार होटल, रेस्तरा, ढाबों में भी 50 प्रतिशत का मानक लागू होगा व होटालों के कांफ्रेंस हाल, स्पा, जिम का भी 50 प्रतिशत क्षमता में प्रयोग किया जा सकेगा। इन सभी में कोविड 19 के लिए तय मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।

स्कूलों में नियमित रूप से ऑनलाइन पढ़ाइ-सुंदरम
उत्तराखंड में स्कूल 22 जनवरी तक बंद रहेंगे लेकिन पढ़ाई पूर्व की तरह ऑनलाइन माध्यम से शुरू कर दी जाएगी। शिक्षा सचिव आर. मीनाक्षीसुंदरम ने कहा कि सभी अधिकारियों को इस बाबत निर्देश दे दिए गए हैं। बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए शिक्षक छात्रों को आनलाइन माध्यम से नियमित रूप से तैयारी कराएं। छोटी कक्षाओं में छात्र-छात्रों की पढ़ाई को भी पूर्व की तरह ऑनलाइन, वाट़सअप आदि विभिन्न माध्यमों के जरिए शुरू कर दिया जाए।

दल बदल को तैयार बैठे है सियासी कद्रदान

कांग्रेस पार्टी में पहली सूची जारी होने से पहले ही नैनीताल में पार्टी को बड़ा झटका लग सकता है। इस सीट से दावेदारी पेश कर रही पूर्व विधायक और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सकती हैं। सरिता आर्या ने कहा है कि अगर पार्टी में सम्मान नहीं मिलेगा तो उनके सामने दूसरे विकल्प खुले हैं। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार देर रात उनकी भाजपा नेताओं से मुलाकात हुई। इस मुलाकात में भाजपा के प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रहलाद जोशी, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक मौजूद थे।
शुक्रवार रात करीब साढ़े दस बजे डालनवाला स्थित भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के फ्लैट में यह मुलाकात करीब एक घंटे चली। बताया जा रहा है कि भाजपा सरिता आर्य को नैनीताल विधानसभा सीट से प्रत्याशी बना सकती है। सरिता कांग्रेस से टिकट की दावेदारी पेश कर चुकी हैं, लेकिन इस सीट पर विधायक रहे संजीव आर्य को पार्टी हाईकमान पहले ही प्रत्याशी बनाने का वादा कर चुका है। संजीव के पार्टी में आने के बाद से ही सरिता आर्य के तेवर तल्ख हैं। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उन्हें मनाने के प्रयास किए, लेकिन वह टिकट से इतर कुछ भी मानने को तैयार नहीं है। बताते चलें कि सरिता आर्य वर्ष 2012 के चुनाव में विधायक बनीं थीं। जबकि वर्ष 2017 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान में सरिता प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष हैं।
सूत्र बताते हैं कि ऐसा रणनीति के तहत किया जा रहा है, ताकि टिकट मिलने के बाद किसी के पाला बदलने से फजीहत न हो। कुछ सीटों पर पार्टी अब भी किसी के आने का इंतजार कर रही है। वहीं महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य कहा है कि अगर पार्टी में सम्मान नहीं मिलेगा तो उनके सामने दूसरे विकल्प खुले हैं। मीडिया के सवाल पर आज कांग्रेस मुख्यालय में उन्होंने कहा वह भाजपा का भी दामन थाम सकती हैं।
वहीं एक और बयान में पूर्व विधायक और प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सरिता आर्य ने कहा डालनवाला स्थित जिस बिल्डिंग की बात कही जा रही है, उसमें दूसरे लोग भी रहते हैं। मैं फ्लैट संख्या 27 में शुक्रवार रात अपने एक रिश्तेदार से मिलने गई थी। कांग्रेस पार्टी छोड़ने का मेरा कोई इरादा नहीं है। मुझे तो बाद में पता चला, इस बिल्डिंग में भाजपा के कोई नेता भी रहते हैं।

भाजपा जल्‍द करेगी प्रत्‍याशियों की लिस्‍ट जारी

उत्तराखंड भाजपा मुख्यालय में पार्टी के प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक हुई। बैठक में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रत्याशी चयन को दावेदारों के पैनल पर चर्चा की गई। मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी ने शनिवार को कोर ग्रुप की बैठक के बाद कहा कि वह खटीमा से चुनाव लड़ेंगे। उन्‍होंने कहा कि विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी जल्‍द ही प्रत्‍याशियों की सूची भी जारी करेगी। बैठक खत्म होने के बाद केंद्रीय मंत्री एवं प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रहलाद जोशी ने बताया कि बैठक में चुनाव की रणनीति पर चर्चा की गई और बदली परिस्थितियों में चुनाव प्रचार किस तरह होगा, इसकी रणनीति तय की गई। इसके अलावा चुनाव से सम्बंधित अन्य विषयों पर भी विमर्श किया गया। उधर, सूत्रों ने बताया कि बैठक में विधानसभा सीटों के लिए तैयार पैनल पर भी विमर्श हुआ और सूची को शार्टलिस्ट किया गया।

रविवार को पार्टी नेतृत्व को सौंपी जाएगी दावेदारों के पैनल की सूची
बैठक के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि दावेदारों के पैनल की सूची रविवार को दिल्ली में पार्टी नेतृत्व को सौंपी जाएगी। वहां रविवार को पार्टी के केंद्रीय नेताओं के साथ बैठक भी है। उन्होंने यह भी कहा कि हम अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं। भाजपा की प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी चयन के मद्देनजर सभी 70 सीटों के लिए पैनल को अंतिम रूप दे दिया गया। प्रदेश भाजपा मुख्यालय में समिति की बैठक करीब डेढ़ घंटे चली। अब यह पैनल दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड को सौंपा जाएगा, जो टिकट का निर्धारण करेगा।
बैठक में केंद्रीय मंत्री और प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रहलाद जोशी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत व विजय बहुगुणा, भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम, सह प्रभारी रेखा वर्मा, प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय, प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र भंडारी व सुरेश भट्ट, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज व धन सिंह रावत, राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल आदि मौजूद हैं।

कांग्रेस ने उत्तराखंड में भी लागू किया एक परिवार एक सीट का फार्मूला

कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी ने उत्तराखंड की सभी 70 सीटों पर सहमति बनाकर संभावित उम्मीदवारों का पैनल तय कर लिया है। संभावना है कि शनिवार देर रात तक पार्टी उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर सकती है। पार्टी फिलहाल 40 नामों की ही घोषणा करने जा रही है।

सीटिंग विधायकों का नाम पहली सूची में
स्क्रीनिंग कमेटी के बाद कांग्रेस ने राज्य की 70 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार पहली सूची में सीटिंग विधायकों के अलावा पिछले चुनाव में एक या दो हजार वोट के अंतर से हारे नेताओं का नाम शामिल रहेगा। इसके गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह, यशपाल आर्य, संजीव आर्य समेत कुछ नाम ऐसे हैं, जिन पर किसी को कोई संशय नहीं है। इस सूची में उन नेताओं का नाम भी शामिल हो सकता है, जो बुरे दौर में भी पार्टी के साथ मजबूती के साथ खड़े रहे। इनमें कई पूर्व विधायकों और मंत्रियों का नाम शामिल है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि स्क्रीनिंग कमेटी की अब तक तीन बैठकें हो चुकी हैं, जो बहुत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई हैं। राज्य की 70 विधानसभा सीटों में से अधिकांश सीटों पर एक उम्मीदवार और कुछ सीटों पर दो उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर लिया गया है। जिसे शनिवार को सीईसी के सामने रखा जाएगा। शनिवार देर शाम तक पहली लिस्ट आ सकती है।

कांग्रेस ने उत्तराखंड में भी लागू किया एक परिवार एक सीट का फार्मूला
कांग्रेस नेतृत्व ने एक परिवार एक सीट का फार्मूला उत्तराखंड में भी लागू किया है, लेकिन भाजपा से लौटे आर्य परिवार की दोनों सीटें वर्तमान विधायक के नाते पक्की मानी जा रही हैं। ऐसे में हरीश रावत लड़ेंगे तो बेटे आनंद और बेटी अनुपमा का टिकट फंस जाएगा। किशोर उपाध्याय पर भी नेताओं की अलग-अलग राय है। लिहाजा उन पर भी फैसला नेतृत्व को लेना है।

चुनाव आयोग ने इंडोर मीटिंग की अनुमति दी, लेकिन 22 तक रैली और रोड शो की मनाही

चुनाव आयोग ने 22 जनवरी तक चुनावी राज्यों, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में चुनावी रैलियों और रोड शो पर रोक लगा दी है। हालांकि, आयोग ने पार्टियों और उम्मीदवारों को कुछ राहत देते हुए इंडोर मीटिंग की अनुमति दी, लेकिन इसमें शर्त होगी कि इन बैठकों में केवल 300 लोग या फिर हॉल या वेन्यू की 50 प्रतिशत क्षमता के साथ ही मीटिंग कर सकते हैं।
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को अधिकतम 300 व्यक्तियों या 50 प्रतिशत हॉल की क्षमता के साथ इनडोर बैठकें आयोजित करने की अनुमति दी है। आयोग ने राजनीतिक दलों को आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों और कोविड-19 पर व्यापक दिशानिर्देशों का पालन करने का भी निर्देश दिया।
चुनाव आयोग ने राज्य और जिला प्रशासन को चुनाव आचार संहिता और महामारी नियंत्रण उपायों से जुड़े सभी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
8 जनवरी को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड मणिपुर, गोवा और पंजाब के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए, चुनाव आयोग ने 15 जनवरी तक सार्वजनिक रैलियों, रोड शो और इसी तरह के फिजिकल प्रचार कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाने का एक अभूतपूर्व कदम उठाया था। अब यह प्रतिबंध एक और हफ्ते के लिए बढ़ा दिया गया है।
आयोग ने चुनाव प्रचार के लिए 16-सूत्रीय दिशानिर्देशों को भी लिस्टेड किया था, जिसके तहत सार्वजनिक सड़कों और चौराहे पर श्नुक्कड़ सभाओंश् (कोने की बैठकों) पर प्रतिबंध लगा दिया था।
इसमें डोर-टू-डोर कैंपेन के लिए लोगों की संख्या को पांच तक सीमित कर दिया गया था। साथ ही मतगणना के बाद प्रत्याशीओं के विजय जुलूसों पर भी रोक लगा दी गई।

पूर्व मुख्यमंत्री के घर विधायकों का जमावड़ा

उत्तराखंड में सर्दी सितम ढहा रही है। धूप निकलने के बाद भी लोग ठिठुर रहे हैं, लेकिन सियासत यहाँ गर्म है। सियासत की ये गर्मी दिखाई दी पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के डिफेंस कॉलोनी आवास पर। जहां भाजपा के करीब 9 विधायक उनसे मिलने पहुंचे थे। ये वो विधायक थे जो आजकल चर्चाओं में है।
जिनमें टिहरी से भाजपा के सीटिंग विधायक धन सिंह नेगी, पौड़ी से मुकेश कोली, लैंसडाउन से दलीप सिंह रावत, प्रताप नगर से विजय सिंह पवार, नानकमत्ता से प्रेम सिंह राणा, रुद्रप्रयाग से भरत चौधरी शामिल रहे। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत से मुलाकात करने वाले अधिकतर विधायक ऐसे हैं कि जिनके टिकट काटे जाने को लेकर संगठन में चर्चाएं जोर शोर से चल रही है।
आपको बता दें कि कल शनिवार को भाजपा कोर ग्रुप की बैठक होनी है। जिसमें उम्मीदवारों के चयन को लेकर विस्तृत चर्चा होगी। जिला पदाधिकारियों के फीडबैक को लेकर भी इस में चर्चा की जाएगी। ऐसे में यह कहा जाये कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से मिलकर यह सभी विधायक अपने कटते हुए टिकट को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

कोरोना से बचाव और सुरक्षा को लेकर सीएम ने दिए निर्देश

चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के निजी दौरे से हल्द्वानी पहुंचे। उन्होंने कोरोना की गाइड लाइन के बीच आम जनता के स्वास्थ्य व सुरक्षा के दृष्टिगत आवश्यक जानकारी भी ली। निजी दौरे पर आए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसी क्रम में कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर हल्द्वानी के सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में मरीज़ों से अस्पताल की व्यवस्थाओं की जानकारी लेने के साथ मरीज़ों के तिमारदारों से भी बात की। उन्होने वहाँ मौजूद लोगों से कोरोना व अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं और दवाइयों की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी हासिल की। मुख्यमंत्री धामी ने जन औषद्धि केंद्र का निरीक्षण कर जनता को सस्ते दामों में मिल रही दवाइयों की जानकारी भी ली। सुशीला तिवारी हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मुख्यमंत्री को जनपद स्तर पर चल रही स्वास्थ्य सेवाओ की जानकारी भी दी। उन्होने कोविड के खतरों को लेकर आम जनता के स्वास्थ्य सुविधाओं की और विशेष ध्यान देने को भी कहा।
सीएम धामी ने अस्पताल के बाहर सपजजसम उपतंबसमे विनदकंजपवद के द्वारा आम मरीजों व तीमारदारों के लिए 5 रुपये में भोजन सुविधा सेवा में शामिल हुए और इस सेवा कार्यक्रम के संचालन को बारीकी से समझा। इस दौरान मकर संक्रांति के उत्सव पर बनी विशेष खिचड़ी भी ग्रहण करने के साथ प्रदेश की समस्त जनता व उपस्थित जनता को मकर संक्रांति के उत्सव की भी बधाई दी। इसके उपरांत निजी दौरे पर आए प्रदेश के मुख्यमंत्री ने डीआरडीओ द्धारा संचालित कोविड अस्पताल पहुँच कर वहाँ व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली। इस दौरान उन्होने अस्पताल में मौजूद सीसीटीवी कैमरों से संस्थान में चल रहे स्वास्थ्य सुविधाओं को भी देखा। विदित हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 दिन पूर्व कोरोना से संबंधित मामलों को लेकर देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ इस दिशा में वर्चुअल बैठक की थी। वही सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इस महामारी के खतरे से निपटने के लिए हर संभव मदद का आश्वासन देने के साथ घबराने की नहीं बल्कि सतर्कता बरतने पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया था।