राहतः चिकित्सकों के 763 पदों पर सीधी भर्ती करने की प्रक्रिया

(एनएन सर्विस)
रिक्त पदों को भरने के लिए शासन द्वारा उत्तराखण्ड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को अध्याचन भेजा गया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर राज्य में साधारण ग्रेड चिकित्साधिकारियों के 763 रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गई है। उत्तराखण्ड प्रान्तीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के तहत साधारण ग्रेड चिकित्साधिकारियों के रिक्त पदों को भरने के लिए शासन द्वारा उत्तराखण्ड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को अध्याचन भेजा गया है। बोर्ड से रिक्त 763 पदों पर सीधी भर्ती के लिए तत्काल विज्ञप्ति प्रकाशित कर चयन की कार्यवाही प्राथमिकता से करने की अपेक्षा की गई है।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि 763 चिकित्सकों की भर्ती से राज्य के हेल्थ सिस्टम को मजबूती मिलेगी। प्रदेश के हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर में काफी सुधार किया गया है। आज हर जिले में आईसीयू की सुविधा है। चिकित्सकों की संख्या पहले की तुलना में दोगुनी की गई है। टेली रेडियोलोजी और टेली मेडिसिन शुरू की गई। हम कोविड-19 के संक्रमण को नियंत्रित करने में सफल रहे है। उत्तराखण्ड सर्वाधिक रिकवरी रेट वाला राज्य है। हमारे यहां मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। कोरोना काल में 400 नए डाक्टरों की भर्ती की गई, 273 आईसीयू बेड, 165 वेंटिलेटर और 33 बाईपेप मशीनों की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही 13 जिला अस्पतालों/बेस अस्पतालों में आक्सीजन सप्लाई पाईप लाईन का निर्माण किया जा रहा है।

देना होगा बाजार मूल्य पर किराया, राज्य सरकार का अधिनियम अंसवैधानिक

हाईकोर्ट नैनीताल ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में पूर्व मुख्यमंत्रियों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधा देने वाले अधिनियम-2019 को अंसवैधानिक घोषित करते हुए उसे निरस्त कर दिया है। सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को अब बाजार भाव के हिसाब से किराया चुकाना होगा।
अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने बताया कि न्यायालय ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन मानते हुए यह निर्णय दिया। अधिवक्ता कोर्ट ने कहा कि अधिनियम के प्रावधान स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हैं। न्यायालय ने अधिनियम को भारत के संविधान के अनुच्छेद 202 से 207 के उल्लंघन में पाया है। अब सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को बाजार मूल्य से किराए का भुगतान करना होगा।
कोर्ट ने कहा कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों के रूप में उन्हें दी गई अन्य सभी सुविधाओं के लिए खर्च किए गए धन की गणना करने और उसकी वसूली के लिए राज्य उत्तरदायी होगा। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम के प्रावधान शक्तियों को अलग करने के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने 23 मार्च को मामले में सभी पक्षकारों को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद मंगलवार को निर्णय सुनाया गया है।
मामले के अनुसार, देहरादून की रुलक संस्था ने राज्य सरकार के उस अध्यादेश को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी, जिसके द्वारा राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के किराए को बाजार रेट के आधार पर भुगतान करने से छूट दे दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सभी पूर्व सीएम पर करीब 15 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा, किराया करीब पौने तीन करोड़ है, जिसकी वसूली के आदेश कोर्ट ने पिछले वर्ष छह माह में करने के आदेश दिए थे।

क्या है अधिनियम
रूलक सामाजिक संस्था के चेयरपर्सन अवधेश कौशल की ओर से हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस पर कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से बकाया वसूलने के आदेश जारी किए थे। इस आदेश के खिलाफ पूर्व सीएम व महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा ने हाईकोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल की लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी नहीं सुनी और उन्हें पुराना बकाया चुकाने का आदेश जारी रखा।
इसमें भगत सिंह कोश्यारी ने बकाया चुकाने की हैसियत न होने की बात कही तो फिर कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि क्यों न उनकी संपत्ति की जांच करा ली जाए। हाईकोर्ट में जब सरकार तथ्यों और तर्कों के आधार पर कुछ न कर पाई तो भगत सिंह कोश्यारी के लिए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों का बकाया माफ करने और सुविधाएं जारी रखने के लिए अध्यादेश ले आए। अधिवक्ता की ओर से बताया गया कि कैबिनेट में गुपचुप निर्णय करके अध्यादेश को मंजूरी के लिए राजभवन भेज दिया गया था। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला सहित अन्य सुविधाएं देने के मामले में सरकार ने राज्य का एक्ट नहीं बनाया।
सरकार ने उत्तर प्रदेश का एक्ट लागू करना स्वीकार किया लेकिन उसे संशोधित नहीं किया। पिछले वर्ष कोर्ट में दिए गए हलफनामे में लागू एक्ट में लखनऊ का उल्लेख कर दिया, जबकि उत्तर प्रदेश के अधिनियम में साफ तौर पर अंकित था कि सुविधा सिर्फ लखनऊ में दी जा सकती है। इसलिए राज्य सरकार को यह स्वीकार करना पड़ा कि उत्तराखंड में इस संबंध में कोई अधिनियम प्रभावी नहीं है।
वहीं, अधिवक्ता ने बताया कि 1981 में यूपी में बने अधिनियम में साफ उल्लेख था कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों को पद पर बने रहने तक सरकारी आवास मुफ्त मिलेगा। पद से हटने के 15 दिन में उन्हें आवास खाली करना होगा। 1997 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस नियम में बदलाव कर कहा कि अब पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास आवंटित किया जाएगा।
एक्ट में यह भी उल्लेख था कि आवास सिर्फ लखनऊ में ही दिया जाएगा, बाहर नहीं। 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड बनने के बाद यह नियम यहां निष्प्रभावी हो गया। राज्य सरकार ने यूपी के एक्ट को उत्तराखंड के लिए मोडिफाई नहीं किया लेकिन कोर्ट में बताया कि सरकार ने 2004 में लोकसेवकों को प्रतिमाह एक हजार रुपये किराये पर आवास देने के रूल्स बनाए थे। इसमें कहा गया कि ट्रांसफर होने के बाद अधिकतम तीन माह तक लोकसेवक आवंटित आवास में रह सकते हैं, फिर हर हाल में खाली करना होगा। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने बताया कि रूल्स सरकारी लोक सेवकों के लिए है, यह पूर्व मुख्यमंत्रियों पर लागू नहीं हो सकता।

साप्ताहिक बंदी पर निगम कर्मचारियों के साथ जुटी रही महापौर

महापौर अनीता ममगाई ने रविवार को हो रही साप्ताहिक बंदी का लाभ उठाते हुए पूरे बाजार क्षेत्र को एक बार फिर से सैनेटाइज करवाया। बता दें कि शहर के व्यापारियों द्वारा महापौर से अनलॉक वन में बाजार में लोगों की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर सैनेटाइजेशन कराने का आग्रह किया गया था। जिस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए महापौर रविवार सुबह से ही मोर्चे पर डट गई। तमाम प्रमुख बाजारों और यहां पड़ने वाले आश्रमों और धर्मशालाओं में सैनेटाइजेशन कराया।
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए नगर निगम लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को शहर के तमाम प्रमुख बाजारों में सैनिटाइजर का छिड़काव किया गया। महापौर अनिता ममगाई की अगुवाई में नगर निगम अमले ने सैनिटाइजर टैंकर और फॉगिंग मशीनो के साथ मुख्य बाजार में छिड़काव किया। हरिद्वार रोड़, त्रिवेणी घाट बाजार, रेलवे रोड, मुखर्जी मार्ग, देहरादून मार्ग सहित विभिन्न बाजारों में निगम प्रशासन की ओर से सप्ताहिक अवकाश पर जोरदार तरीके से सैनेटाइजेशन कराया गया। महापौर ने दुकानों के बाहर सेनेटाइजर का छिड़काव की कमान खुद संभाली। क्षेत्रवासियों से घरों से बाहर न निकलने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील भी की।
महापौर अनीता ममगाई ने बताया कि वैश्विक महामारी को देखते हुए मार्च माह से ही निगम का फोकस सैनेटाइजेशन पर रहा है। लेकिन कुछ कपड़ों की दुकानों एवं अन्य व्यापारिक प्रतिषठानों में सेनेटाइजिंग मे दिक्कतें आ रही थी जिसे देख आज साप्ताहिक बंदी पर बाजारों को पूर्ण सैनेटाइजेशन कराया गया है। उन्होंने बताया कि अभियान के लिए उपजिलाधिकारी, सहायक नगर आयुक्त और सैनेट्री इंस्पेक्टर को आदेशित किया गया है कि अपनी निगरानी में यह कार्य पूर्ण करायें। महापौर के अनुसार अनलॉक वन में अब सरकार का ध्यान लोगों की परेशानियों को दूर करने के साथ अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पूरी तरह से बाजारों को खोलने पर है। आने वाले दिनों में शहर के बाजारों में भी लोगों की आवाजाही और बढ़ेगी जिसके लिए आज बाजारों को पूरी तरह से सैनेटाइजेशन कराया गया है। आगे भी यह अभियान समय-समय पर निरंतर जारी रहेगा। इस दौरान पार्षद गुरविंदर सिंह, राजपाल ठाकुर, पवन शर्मा, हितेंद्र पवार, राजेश भट्ट, संजय पंवार आदि मौजूद रहे।

टिकटॉक को आ गया बाय-बाय करने का समय, स्वदेशी एप मित्रों हो रहा पॉपुलर

भारत में टिकटॉक का बाय-बाय करने का वक्त आ गया है। भारत के युवाओं की जुबां पर अब टिकटॉक नहीं बल्कि स्वदेशी निर्मित एप मित्रों का नाम है। अभी तक इस एप को 50 लाख से ज्यादा युवा गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर चुके है। इसे आईआईटी रूड़की के पूर्व छात्रों ने बनाया है। इसे टिकटॉक का क्लोन भी कहा जा रहा है।

आईआईटी के पूर्व छात्रों का कहना है कि एप लांच करते समय हमें ऐसे ट्रैफिक की उम्मीद नहीं थी। इसे बनाने के पीछे लोगों को सिर्फ भारतीय विकल्प देना था। आईआईटी रुड़की में वर्ष 2011 में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ब्रांच से पासआउट छात्र शिवांक अग्रवाल ने अपने चार साथियों के साथ मित्रों एप बनाया है।

11 अप्रैल को हुआ था मित्रों एप लांच
पेटीएम के पूर्व सीनियर वाइस प्रेजिडेंट दीपक के ट्वीट के बाद इसकी चर्चा हर किसी की जुबान पर है। अचानक बड़ी संख्या में लोगों के एप डाउनलोड करने से नेटवर्क ट्रैफिक भी प्रभावित होने लगा। टीम मेंबर ने बताया कि वास्तव में 11 अप्रैल को एप लांच करते समय यह नहीं सोचा था कि इसे इतनी सफलता मिलेगी। टिकटॉक को पीछे छोड़ना जैसी कोई बात नहीं है। हमारा उद्देश्य लोगों को सिर्फ एक भारतीय विकल्प देना था। लोग इसका इस्तेमाल करना चाहेंगे या नहीं यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हमें लोगों से जो आशीर्वाद मिला, उससे हम बहुत खुश हैं। उन्होंने बताया कि हमें किसी ने फंड नहीं दिया है, उनका फंड लोगों का प्यार ही है।

मित्रों स्वदेशी नाम, इसलिए देना उचित
टीम मेंबर ने बताया कि मित्रों का अर्थ मित्र ही है। एक तो यह भारतीय उपभोक्ताओं को भारतीय मंच के जरिए सेवा देने के लिए है। हम स्वदेशी नाम देकर भारतीय नामों के खिलाफ पूर्वाग्रहों को भी दूर करना चाहते हैं।

ग्रीन टैक्स लगाकर आय बढ़ायेगा देहरादून नगर निगम

देहरादून नगर निगम क्षेत्र में प्रवेश करने पर अब प्रवेश शुल्क देना होगा। मनाली जैसे शहरों की तर्ज पर देहरादून नगर निगम ने शहर में प्रवेश करने पर बाहरी वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाने की तैयारी की है। महापौर सुनील उनियाल गामा की अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई। टैक्स कितना होगा, कौन से वाहन इसके दायरे में आएंगे और किन्हें छूट रहेगी, इसका प्रारूप तैयार कर शासन को भेजने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जायेगी।
महापौर सुनील उनियाल गामा ने बताया कि देहरादून में पंजीकृत वाहनों को छूट रहेगी। कोरोना संक्रमण के चलते ठप पड़े कार्यो को शुरू करने और नगर निगम को फिर से पटरी पर लाने के लिए कसरत शुरू हो गई है। इसी के मद्देनजर गुरुवार को महापौर ने निगम कार्यकारिणी की बैठक बुलाई। निगम की कार्यकारिणी के जनवरी में चुने जाने के बाद यह पहली बैठक रही। निगम के सभा हॉल में हुई बैठक में शारीरिक दूरी के साथ महापौर और नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय की मौजूदगी में बैठक शुरू हुई।
इसमें मुख्य एजेंडा निगम की आय बढ़ाने का रहा। इस दौरान महापौर ने प्रस्ताव रखा कि मनाली व कुछ अन्य शहरों में बाहरी राज्यों के वाहनों से ग्रीन टैक्स वसूला जाता है। मसूरी में भी ऐसी व्यवस्था है। ऐसे में देहरादून में भी ये टैक्स लगाया जाना चाहिए। इसे पार्षदों की ओर से हरी झंडी दे दी गई। महापौर गामा ने बताया कि निगम अधिकारी इस बारे में प्रारूप तैयार करेंगे और शासन से मंजूरी के बाद नगर निगम क्षेत्र में सभी सीमाओं पर टोल-बैरियर लगाकर टैक्स की वसूली की जाएगी। वहीं, बैठक में तय हुआ कि नए ग्रामीण वार्डों में सफाई की व्यवस्था प्रभावी बनाने के लिए एक जून से सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। ऐसे 29 ग्रामीण वार्ड हैं, जहां मौजूदा समय में महज पांच-आठ सफाई कर्मचारी हैं। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में शहर की तर्ज पर बस स्टैंड भी बनाए जाएंगे।

सुबह सात से शाम चार बजे तक ही खुलेंगी दुकाने, पढ़े पूरी खबर…

त्रिवेन्द्र सरकार ने ऑरेंज और ग्रीन जोन में आवश्यक वस्तुओं के अलावा अन्य दुकानों को खोलने की अनुमति दे दी है। लेकिन शॉपिंग कॉम्पलेक्स, रेस्टोरेंट, मॉल, सिनेमा घर, बार, होटल आदि पर लगी रोक लाॅकडाउन-4 में भी बरकरार रहेगी। जबकि अन्य दुकानों को सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक खोला जा सकेगा। जिन शहरों में अलग-अलग दिनों में अलग-अलग वस्तुओं की दुकानों को खोलने की जो रोस्टर वाली व्यवस्था बनाई गई थी, उसे समाप्त कर दिया गया है। अब पूरे प्रदेश में सभी दुकानें सभी दिन निर्धारित समय अवधि के लिए खुलेंगी।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में कोई भी जिला रेड जोन में नहीं है, जिससे भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप ऑरेंज और ग्रीन जोन में सभी दुकानों को खोला जा सकता है। अभी तक सुबह सात से शाम चार बजे तक दुकान खोलने का प्रावधान किया गया है।

-केंद्र सरकार की गाइडलाइन-
हवाई सेवाएं वर्जित।
स्कूल और कॉलेज नहीं खुलेंगे।
होटल और रेस्टोरेंट नहीं खुलेंगे, रेस्टोरेंट होम डिलीवरी के लिए किचन चला सकते हैं।
सिनेमा, शॉपिंग सेंटर, इंटरटेनमेंट पार्क, बार, ऑडिटोरियम नहीं खुल सकते।
स्पोटर्स काम्पेक्स और स्टेडियम में दर्शक नहीं जा सकते, प्रशिक्षण और मैच हो सकेंगे।
धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम वर्जित।
धार्मिक स्थानों पर पूजा हो सकती है, लेकिन श्रद्धालु नहीं जा सकते।
कंटेनमेंट जोन में पूर्ण लॉकडाउन, बफर जोन में राहत।
मुख्य सचिव ने बताया कि इसमें बदलाव नहीं किया गया है। सरकारी कार्यालय खोलने और स्टाफ की उपस्थिति को लेकर लॉकडाउन तीन में बनाई व्यवस्था ही जारी रहेगी। सुबह दस से शाम चार बजे तक कार्यालय खुलेंगे। शाम चार से अगली सुबह सात बजे तक लॉकडाउन की स्थिति रहेगी। वहीं, वाहनों को ऑड ईवन के फॉर्मूले पर चलाने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिये गये है।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण को लेकर तय होने वाले कंटेनमेंट जोन में पूरी तरह से लॉकडाउन रहेगा। इसके साथ एक क्षेत्र को बफर जोन चिह्नित करने का प्रावधान भी है। बफर जोन में निगरानी रहेगी, लेकिन कंटेनमेंट जोन की तरह पाबंदी नहीं होगी। प्रदेश में अभी सात कंटेनमेंट जोन हैं। देहरादून जिले में चार, हरिद्वार में दो और ऊधमसिंहनगर जिले में एक है।

50 प्रतिशत यात्री क्षमता के साथ खुलेंगे सार्वजनिक परिवहन

राज्य सरकार ने ऑरेंज और ग्रीन जोन वाले जिलों में वाहनों को आधी क्षमता के साथ संचालन की अनुमति दे दी है। परिवहन विभाग इसके लिए जल्द ही एसओपी जारी करने वाला है। किसी जिले के रेड जोन में आने की स्थिति में वहां सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह से बंद रहेगा। जबकि इंटर स्टेट परिवहन सामान्य तौर पर प्रतिबंधित है, लेकिन राज्यों की आपसी सहमति के आधार पर प्रवासियों को लाने के लिए बसें चलाई जा सकेंगी।
अभी प्रदेश में कोई भी जिला रेड जोन में नहीं होने से पूरे प्रदेश में बसों सहित अन्य सार्वजनिक परिवहन का संचालन करने का निर्णय ले लिया गया है। एक जिले से दूसरे जिले के बीच बसों के संचालन से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि वाहन की क्षमता से आधी सवारी को ही लेकर जाया जा सकेगा।
राज्य सरकार ने इंटर स्टेट परिवहन के संचालन को भी सहमति दी है, जिसके लिए नोडल अधिकारी, मंडलायुक्त और जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश में परिवहन विभाग को निर्देशित किया गया है कि सार्वजनिक परिवहन की एसओपी (स्टेंडर्ड ऑपरेंटिंग प्रोसिजर) तैयार कर लें, जिसके बाद संचालन शुरू हो सकेगा। संचालन में सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पूरी तरह से पालन होगा।
इस नियम का करना होगा पालन
उत्तराखंड में लॉकडाउन-4 में अब वाहनों का संचालन होने लगेगा। लेकिन अधिक आबादी वाले आठ शहरों में निजी वाहनों का संचालन ऑड-ईवन नंबर प्लेट के हिसाब से होगा। एक दिन ऑड नंबर और दूसरे दिन ईवन नंबर के चैपहिया वाहन चलाएं जा सकते हैं। वहीं, दोपहिया वाहन सभी दिन चल सकेंगे। उल्लंघन करने वालों पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि देहरादून, हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर, हरिद्वार, कोटद्वार, रुड़की, ऋषिकेश में सरकार ने सड़कों पर वाहनों की सीमित संख्या रखने के लिए ऑड-ईवन की व्यवस्था बनाई है। जिलों को इस संबंध में निर्देश जारी किए जाएंगे, जिसके बाद यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। यह व्यवस्था प्राइवेट वाहनों के लिए रहेगी।

ड्राइवर भाई इस मुसीबत में ऐसा व्यवहार मत करो हमारे भाईयों के साथ!

पंजाब के भटिंडा से 18 प्रवासियों को लेकर पहंुची जीएमओयू बस के ड्राइवर ने उन्हें दुगड्डा में उतार दिया। इससे उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि बाद में पुलिस ने जीएमओयू की दूसरी बस की व्यवस्था की और कुछ प्रवासियों को पौखाल के लिए रवाना किए। जबकि कुछ टैक्सी बुक कर घरों के लिए रवाना हुए।
पौखाल क्षेत्र के मुंडगांव के युवाओं ने पुलिस को बताया कि लॉकडाउन के चलते वे भटिंडा में फंस गए थे। उन्होंने गांव आने के लिए प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर आवेदन किया था। उन्हें बीती 16 मई को भटिंडा से देहरादून लाया गया। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद शासन की ओर से उन्हें अगले दिन बसों से पौड़ी लाया गया। जहां फिर से स्वास्थ्य जांच के बाद दुगड्डा ब्लॉक के पौखाल क्षेत्र के 18 लोगों को जीएमओयू की बस से रवाना किया गया, लेकिन बस ड्राइवर उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने के बजाय दुगड्डा में ही छोड़कर चला गया।
कई मिन्नतें करने के बावजूद ड्राइवर ने उनकी नही सुनी। जिससे दुगड्डा जाने के लिए उन्हें काफी परेशानी हुई। उन्होंने बताया कि जिनके पास पैसे थे, वे टैक्सियां बुक कराकर अपने घर चले गए, लेकिन जिनके पास पैसे नहीं थे, उन्होंने किसी माध्यम से पुलिस को इसकी सूचना दिलवाई। दुगड्डा चैकी इंचार्ज ओमप्रकाश ने तत्काल मदद करते हुए दूसरी बस की व्यवस्था कर प्रवासियों के लिए व्यवस्था की।

सीएम पोर्टल में शिकायत करने से डाॅक्टर नाराज, मरीज को कर दिया डिस्चार्ज

अल्मोड़ा जिला अस्पताल में भर्ती आयुष्मान कार्डधारक मरीज ने बाजार की दवाइयां लिखने पर सीएम पोर्टल पर शिकायत कर दी। जिसकी जांच शुरू होने पर मरीज का इलाज कर रहे वरिष्ठ फिजीशियन नाराज हो गए और सोमवार सुबह मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। जबकि सूत्रों के अनुसार, मरीज डिस्चार्ज की हालत में नही था।
मामला गर्माने के बाद अस्पताल प्रशासन ने चिकित्सक को लिखित रूप से चेतावनी दी और भविष्य में सभी डॉक्टरों को बाहर की दवाएं नहीं लिखने के निर्देश दिए हैं। हवालबाग ब्लॉक के पाखुड़ा गांव निवासी रमेश सिंह (56) लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार है। बीती नौ मई को उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉ. पीएस टाकुली रमेश का इलाज कर रहे थे।
मरीज के गुर्दे खराब होने के साथ ही उसे शुगर और सेफ्टीसीमिया आदि बीमारियां हैं। मरीज की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। मरीज की देखरेख में जुटे परिजनों के साथ ही हीरा ढुंगरी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया कि आयुष्मान कार्ड धारक होने के बावजूद डॉ. टाकुली बाजार की दवाएं लिख रहे थे।
रविवार को उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल में डाॅक्टर की शिकायत कर दी। शिकायत दर्ज होने के बाद रविवार रात को ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पूछताछ शुरू कर दी। इससे नाराज डॉक्टर ने अगली सुबह अस्पताल पहुंचते ही सबसे पहले गंभीर बीमार मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर बाहर बैठा दिया। मजबूरी में परिजन मरीज को घर ले गए जबकि उसकी हालत नाजुक बनी है। राजेंद्र सिंह ने पत्रकारों को बताया कि इस संबंध में दोबारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर मरीज को बाहर करने की भी शिकायत दर्ज करा दी है।
जिला अस्पताल अल्मोड़ा के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ.आरसी पंत ने मीडिया को बताया कि जिला अस्पताल में नौ मई से भर्ती किए रमेश सिंह की हालत काफी गंभीर थी। उन्हें डिस्चार्ज करने की जानकारी मिलने के बाद डॉ. पीएस टाकुली से जानकारी ली गई है और भविष्य में रोगियों के लिए बाजार की दवाएं नहीं लिखने के भी निर्देश दिए गए हैं। यदि रमेश सिंह के परिजन जिला अस्पताल में रमेश का इलाज कराना चाहते हैं तो उसे इलाज दिया जाएगा। पूर्व में बाजार से खरीदी गई दवाओं का भुगतान भी दिलाया जाएगा। मामले में लिखित शिकायत मिलने पर जांच भी कराई जाएगी।

जिला प्रशासन ने जनपद के हॉट स्पॉट क्षेत्र के लिए उपलब्ध कराई आवश्यक सामग्री

देहरादून जनपद के देहरादून क्षेत्र में 10 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों के माध्यम से प्रति पैकेट रू0 43 की दर से 500 पैकेट विक्रय किया गया। इसी क्रम में जनपद के विभिन्न चयनित स्थानों पर प्रशासन द्वारा अधिकृत 21 मोबाईल वैन के माध्यम से सस्ते दरों पर 122.36 क्विंटल फल-सब्जियों का विक्रय किया गया। जिला प्रशासन की टीम द्वारा जनपद के ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र में अवस्थित बीस बीघा, शिवा एन्कलेव ऋषिकेश में खाद्य एवं दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाई गयी। जिला पूर्ति विभाग द्वारा आजाद कालोनी में 41 गैस सिलेण्डर वितरित किये गये। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अन्तर्गत आजाद कालोनी में 967, तथा बीस बीघा ऋषिकेश में 471 उपभोक्ताओं को खाद्यान उपलब्ध कराया गया। दुग्ध विकास विभाग द्वारा आज कुल 1297 ली0 दूध विक्रय किया गया। आजाद कालोनी में 3 मोबाईल वैन के माध्यम से फल एवं सब्जियां उपलब्ध करवाई गयी।

कोविड-19 के संक्रमण के दृष्टिगत जिला आपदा परिचालन केन्द्र देहरादून में जन सहायता हेतु स्थापित कन्ट्रोलरूम में कुल 134 कॉल प्राप्त हुई हैं, जिसमें, ई-पास हेतु 115, भोजन के लिए 5, राशन हेतु 10, कृषि से सम्बन्धित 4 कॉल प्राप्त हुई। कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम के दृष्टिगत उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ ए.के डिमरी, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी जी.सी कण्डवाल द्वारा स्पोर्टस कालेज रायपुर में अन्य जनपदों को जाने वाले 775 व्यक्तियों को प्रशिक्षण दिया गया तथा मास्क भी वितरित किये गये।प्रधानमंत्री जनधन खाताधारकों द्वारा जनपद में विभिन्न बैंकों से 3237 लाभार्थियों द्वारा अपने जनधन खाते से धनराशि की निकासी की गयी। आज मोबाईल एटीएम आजाद कालोनी, क्षेत्र में जनसुविधा हेतु उपलब्ध रही। जनपद में मनरेगा कार्यों के अन्तर्गत आतिथि तक 703 निर्माण कार्य प्रारम्भ किये गये, जिनमें 7360 श्रमिकों को सैनिटाईजेशन एवं सामाजिक दूरी का अनुपालन करवाते हुए उक्त कार्य में योजित कर रोजगार उपलब्ध कराया गया।