सीएम ने राज्य के विभिन्न विकास कार्यों के लिये स्वीकृत किये 24 करोड़

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा जनपद हरिद्वार के विधानसभा क्षेत्र भगवानपुर में 200 हैण्डपम्प का निर्माण किये जाने हेतु ₹ 1.43 करोड़, रूडकी शहर सीवरेज हेतु ₹ 3.16 करोड तथा न्यू हरिद्वार मॉडल कालौनी और गोविन्दपुरी में क्षतिग्रस्त वितरण पाईप लाईन का प्रतिस्थापन हेतु ₹ 4.50 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री द्वारा उत्तराखण्ड राज्य में स्थापित गढ़वाल एवं कुमायूं परिक्षेत्र में स्थित जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में मानकों के परीक्षण हेतु ऑटोमैटिक एनालाइज़र सिस्टम आईएस 3025 पार्ट 82 – 83 क्रय किये जाने हेतु ₹ 2.54 करोड की योजना स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री द्वारा जनपद देहरादून की गडूल नदी (सौंग नदी की सहायक नदी) का पुनर्जीवन/ट्रीटमेंट के विभिन्न कार्य हेतु ₹ 6.02 करोड एवं जनपद उत्तरकाशी की कमल गंगा नदी का पुनर्जीवन/ट्रीटमेंट के विभिन्न कार्य हेतु ₹ 4.17 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा क्षेत्र चम्पावत में ओखलढूंगा झील के सुरक्षात्मक एवं विकास कार्य हेतु ₹ 74.38 लाख, जनपद उधमसिंहनगर के विधानसभा क्षेत्र नानकमत्ता में बंगाली कालौनी के नव निर्मित दुर्गा मंदिर के सौन्दर्यकरण हेतु ₹ 56.51 लाख, विधानसभा क्षेत्र अल्मोडा के सेराघाट में मॉ मंगला भगवती माता मंदिर परिसर में धर्मशाला का निर्माण किये जाने हेतु ₹ 72.83 लाख की धनराशि स्वीकृत किये जाने के साथ ही विधानसभा क्षेत्र हरिद्वार के न्याय पंचायत लालढांग के अन्तर्गत लाला ओम प्रकाश ज्ञानदीप कन्या इंटर कालेज की चाहर दीवारी के निर्माण हेतु ₹ 53.18 लाख स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

उत्तराखण्ड के विकास में नीति आयोग का सदैव सकारात्मक सहयोग प्राप्त हुआः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से नीति आयोग के सदस्य प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास के नेतृत्व में नीति आयोग की टीम ने भेंट की। इस अवसर पर उत्तराखण्ड के समग्र एवं सतत विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, जनसांख्यिकीय चुनौतियों तथा विकास की संभावनाओं के अनुरूप प्रभावी एवं दूरदर्शी नीति निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के विकास में नीति आयोग का सदैव सकारात्मक सहयोग प्राप्त हुआ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी राज्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नीति आयोग का मार्गदर्शन एवं सहयोग मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय, तीर्थाटन, पर्यटन प्रधान राज्य के लिए नीति निर्माण में केवल स्थायी आबादी ही नहीं, बल्कि राज्य की फ्लोटिंग पॉपुलेशन को भी विशेष महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की स्थायी आबादी की तुलना में प्रतिवर्ष लगभग सात से आठ गुना अधिक लोग उत्तराखण्ड आते हैं, जिससे स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, परिवहन तथा अन्य बुनियादी सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए योजनाओं के निर्माण एवं संसाधनों के आवंटन में इस तथ्य का समुचित समावेश आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ जनजागरूकता और स्वास्थ्य शिक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्रभावी रूप से मिल सके।

मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास को राज्य की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि इस दिशा में निरंतर और परिणामोन्मुख प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने बच्चों को कुपोषण से मुक्त बनाने तथा महिलाओं में एनीमिया की समस्या के प्रभावी समाधान के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार कर उसे धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में कृषि, बागवानी, पर्यटन, जल संसाधन, जैव विविधता, कौशल विकास तथा अन्य संभावनाओं वाले क्षेत्रों में विषय विशेषज्ञों के साथ नीति आयोग के सहयोग से नियमित सेमिनार एवं विचार-विमर्श आयोजित किए जाएं। इससे राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवहारिक एवं नवाचार आधारित नीतियां तैयार करने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने जल संरक्षण को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रभावी एवं दीर्घकालिक योजनाओं पर विशेष रूप से कार्य किया जाना चाहिए। साथ ही, प्रदेश के लोगों की आजीविका के संसाधनों में वृद्धि, स्थानीय रोजगार सृजन तथा सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बेहतर नीति निर्धारण एवं समन्वित प्रयास सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और नीति आयोग के बीच समन्वित प्रयासों से उत्तराखण्ड के सर्वांगीण एवं संतुलित विकास को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, अपर सचिव नरेन्द्र भण्डारी, डॉ. संदीप तिवारी, एसीईओ सेतु मनोज पंत, सलाहकार एवं कार्यक्रम निदेशक नीति आयोग डॉ. सोनिया पंत, उप सचिव नीति आयोग दीपक कुमार विशेष कार्याधिकारी नीति आयोग डॉ. शोभित कुमार मौजूद थे।

सीएम के आदेश पर बदरीनाथ धाम चढ़ावा मामले पर उच्चस्तरीय समिति गठित

श्री बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे आदि के संबंध में प्राप्त कथित अनियमितताओं की शिकायतों एवं प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखण्ड शासन ने मामले की गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।

समिति के अध्यक्ष आयुक्त गढ़वाल मंडल होंगे। समिति में प्रबंध निदेशक, एनएचएम संदीप तिवारी तथा कार्यालय महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।

सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार समिति मंदिर में प्राप्त होने वाले दान-चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करेगी तथा 15 दिनों के भीतर अपनी जांच आख्या एवं संस्तुतियां शासन को प्रस्तुत करेगी।

जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर समिति किसी भी अधिकारी, विशेषज्ञ अथवा अन्य संबंधित व्यक्ति का सहयोग एवं परामर्श प्राप्त कर सकेगी। साथ ही समिति दान-चढ़ावे के प्रबंधन तंत्र को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों एवं सुझावों से भी शासन को अवगत कराएगी।

केदानाथ धाम में जिन 6 ब्लॉक्स का कार्य शुरू किया जाना है, उन्हें तत्काल शुरू कराया जाएः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में केदारनाथ पुनर्निर्माण और पुनर्विकास कार्य एवं बद्रीनाथ मास्टर प्लान कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने केदारनाथ पुनर्निर्माण से सम्बन्धित कार्यों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने प्रत्येक कार्य के भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के साथ ही पूर्ण होने की समयसीमा की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने कहा कि केदानाथ धाम में जिन 6 ब्लॉक्स का कार्य शुरू किया जाना है, उन्हें तत्काल शुरू कराया जाए। उन्होंने निर्धारित समय पर कार्य पूर्ण कराए जाने हेतु प्रत्येक कार्य की लगातार मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को केदारनाथ धाम यात्रा क्षेत्र के लिए एक व्यापक एवं एकीकृत कूड़ा प्रबंधन योजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के कूड़े के डिस्पोजल की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी वित्तीय, तकनीकी और अन्य सहयोग की आवश्यकता होगी, वह उपलब्ध करायी जाएगी।

मुख्य सचिव ने बद्रीनाथ मास्टरप्लान फेज 1 और फेज 2 के कार्यों की प्रगति की भी विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने प्रत्येक कार्य की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की जानकारी ली एवं प्रत्येक कार्य के पूर्ण होने की समयसीमा के अनुसार कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट में निहित सभी प्रकार के कंटेंट और आर्ट वर्क को साथ साथ शुरू कराया जाए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि केदारनाथ धाम एवं बद्रीनाथ धाम में जो भी असेट्स एवं सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं, उनके ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के लिए फ्रेमवर्क तैयार कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि इनके संचालन के लिए संस्थाएं पूर्व निर्धारित रहेंगी तो हैंड ओवर करने के उपरांत मेंटेनेंस आदि की जिम्मेदारी निर्धारण में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर सचिव धीराज गर्ब्याल, अपर सचिव विनीत कुमार एवं सम्बन्धित जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

सीएस की अध्यक्षता में हुई नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति की बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने प्राईमरी सेक्टर पर जोर देते हुए, ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (आरआईडीएफ) के तहत् अधिक से अधिक प्रोजेक्ट शामिल किए जाने के निर्देश विभागों को दिए।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने प्रोजेक्ट अगले तीन दिन में पोर्टल पर अपलोड किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गतिमान परियोजनाओं की प्रतिपूर्ति के लिए भी प्रस्ताव शीघ्र अपलोड किए जाएं, ताकि समय से प्रतिपूर्ति जारी की जा सके। उन्होंने धीमी गति से चल रहे प्रोजेक्ट्स पर भी चिंता जाहिर करते हुए पुरानी परियोजनाओं को प्राथमिकता पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव स्लो गोईंग प्रोजेक्ट्स की साप्ताहिक समीक्षा करते हुए कार्यों को पूर्ण कराएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभागों द्वारा एकीकृत दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रोजेक्ट तैयार करने पर ही किसी क्षेत्र में योजनाओं का उचित लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। कृषि-बागवानी क्षेत्र में सम्पूर्ण लिंकेज के साथ एक से अधिक क्लस्टर्स को शामिल करते हुए बड़े प्रोजेक्ट बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में एक क्षेत्र के आसपास के सभी क्लस्टर्स को कोल्ड चेन, इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्टेशन आदि की सुविधा एक ही प्राजेक्ट के अंतर्गत मिल सके।

मुख्य सचिव ने इसके लिए नाबार्ड से तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराए जाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि नाबार्ड को गतिशक्ति पोर्टल का एक्सेस उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह सभी परियोजनाओं का अध्ययन कर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 4, 5 क्षेत्र चिन्हित करते हुए इन चिन्हित क्षेत्रों के एक सम्पूर्ण लिंकेज प्लान तैयार करने में तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध करा सकें। इस पर नाबार्ड ने शीघ्र एक टीम लगाए जाने के आश्वासन दिया।

मुख्य सचिव ने कहा कि उद्यान विभाग को पॉलीहाऊस परियोजना को शीघ्र से शीघ्र पूर्ण कराए जाने हेतु सचिव स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा करते हुए लगातार निगरानी किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पशुपालन विभाग को भी सभी जनपदों में बड़े स्तर के अस्पतालों को स्थापित कर दूरस्थ क्षेत्रों में पशुओं के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जो प्रोजेक्ट पूर्ण हो चुके हैं, उन प्रोजेक्ट्स के पूर्ण होने का प्रमाण-पत्र एवं रिपोर्ट, शीघ्र से शीघ्र नाबार्ड को उपलब्ध कराए जाएं।

बैठक के दौरान बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 1 हजार करोड़ के प्रस्ताव का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 500 करोड़ से अधिक के प्रस्ताव शासन को प्राप्त हो गए हैं। इनमें से कुल 271 करोड़ के प्रस्ताव नाबार्ड को प्राप्त हो गए हैं, इन 271 करोड़ के प्रोजेक्ट्स में से 210 करोड़ की डीपीआर नाबार्ड को प्राप्त हो गई हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, सी. रविशंकर, धीराज सिंह गर्ब्याल एवं सीजीएम नाबार्ड पंकज यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के पत्रकारों को सीएम ने उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत, तीव्र विकास, पर्यटन संभावनाओं एवं सुशासन मॉडल से कराया अवगत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में छत्तीसगढ़ से आए पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की।

मुख्यमंत्री ने सभी पत्रकारों का देवभूमि उत्तराखण्ड आगमन पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड केवल प्राकृतिक सौन्दर्य और आध्यात्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि तीव्र गति से विकास के नए आयाम स्थापित करने वाला राज्य भी बन रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के पत्रकारों का उत्तराखण्ड भ्रमण राज्य की सांस्कृतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक एवं विकास यात्रा को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परम्पराओं, लोक संस्कृति तथा हिमालयी सभ्यता के कारण देश-विदेश में विशिष्ट पहचान रखता है। यहां स्थित चारधाम, पंचकेदार, पंचबदरी, पंचप्रयाग, हेमकुंड साहिब, पूर्णागिरि, जागेश्वर, आदि कैलाश एवं ओम पर्वत जैसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार पर्यटन को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाकर कार्य कर रही है। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ साहसिक पर्यटन, ईको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन तथा होमस्टे आधारित पर्यटन को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। पर्यटन स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी तथा विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना विकसित किए जाने के कारण उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा के बाद सीमांत क्षेत्र के इस आध्यात्मिक स्थल को वैश्विक पहचान मिली है। इसके परिणामस्वरूप आदि कैलाश सहित सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में उत्तराखण्ड में 25 करोड़ से अधिक पर्यटक एवं श्रद्धालु पहुंचे हैं, जो राज्य की बढ़ती लोकप्रियता तथा पर्यटन क्षेत्र में विकसित हुई आधुनिक सुविधाओं का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को वर्षभर पर्यटन के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। विशेष रूप से शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जिससे चारधाम एवं अन्य धार्मिक स्थलों के आसपास स्थित शीतकालीन गद्दी स्थलों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा केदार एवं भगवान बदरीविशाल की नगरी को विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त बनाने के उद्देश्य से केदारनाथ एवं बदरीनाथ मास्टर प्लान के अंतर्गत व्यापक पुनर्विकास कार्य किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से तीर्थयात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विशेष मार्गदर्शन में इन दोनों धामों में अभूतपूर्व विकास कार्य हुए हैं, जिससे श्रद्धालुओं की सुविधा और यात्रा अनुभव में उल्लेखनीय सुधार आया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सड़क, रेल एवं हवाई संपर्क के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के पूरा होने से उत्तराखण्ड तक पहुंच और अधिक सुगम होगी तथा पर्यटन और निवेश को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में सड़क नेटवर्क का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। साथ ही रेल सेवाओं एवं हवाई सेवाओं का भी लगातार विस्तार हो रहा है, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटकों को बेहतर और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के विकास पर राज्य सरकार विशेष ध्यान दे रही है। सड़क, पुल, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार, पेयजल एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन विकास के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड आज सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेश, उद्योग, स्वरोजगार, महिला सशक्तीकरण, युवाओं के कौशल विकास, कृषि, बागवानी तथा ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। राज्य सरकार विकास और विरासत के संतुलन के साथ उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ हैं। उनके माध्यम से समाज तक सही और सकारात्मक जानकारी पहुंचती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ से आए पत्रकार उत्तराखण्ड की विकास यात्रा, पर्यटन संभावनाओं, सांस्कृतिक विरासत और जनकल्याणकारी पहलों को निकट से जानने के बाद अपने अनुभवों को व्यापक स्तर पर साझा करेंगे, जिससे देवभूमि उत्तराखण्ड की सकारात्मक छवि देशभर में और अधिक सुदृढ़ होगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पत्रकारों के माध्यम से समस्त छत्तीसगढ़वासियों को आगामी कुंभ में देवभूमि उत्तराखण्ड आने का सादर आमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि कुंभ भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का विराट पर्व है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ छत्तीसगढ़ के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में देवभूमि पहुंचकर इस दिव्य एवं भव्य आयोजन के साक्षी बनेंगे तथा उत्तराखण्ड के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक वैभव का अनुभव करेंगे।

पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत एवं समय प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने उत्तराखण्ड में हो रहे विकास कार्यों, बेहतर आधारभूत संरचना, पर्यटन क्षेत्र में हुए परिवर्तन तथा राज्य सरकार की जनहितकारी पहलों की सराहना की।

इस अवसर पर सचिव विनय शंकर पाण्डेय, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, संयुक्त निदेशक के. एस. चौहान, छत्तीसगढ़ सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक धनंजय राठौर तथा छत्तीसगढ़ से आए 20 से अधिक पत्रकार उपस्थित रहे।

यूजेवीएन की बैठक हुई संपन्न, विभिन्न प्रस्तावों को मिली मंजूरी, बजट भी हुआ पास

यूजेवीएन लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन एवं अध्यक्ष यूजेवीएन लिमिटेड आनंदवर्धन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। प्रबंध निदेशक के रूप में स्थायी पदभार ग्रहण करने के उपरांत अजय कुमार सिंह ने पहली बार निदेशक मंडल की बैठक में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव एवं अध्यक्ष आनंदवर्धन सहित निदेशक मंडल के सभी सदस्यों ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं एवं बधाई दी।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गई। इसके साथ ही उपनल के माध्यम से कार्यरत कार्मिकों को उत्तराखंड सरकार के शासनादेश के अनुरूप ष्समान कार्य के लिए समान वेतनष् के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।

राज्य की ऊर्जा अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में निदेशक मंडल ने 81 मेगावाट क्षमता की आराकोट-त्यूणी जलविद्युत परियोजना तथा 600 मेगावाट क्षमता की इच्छाड़ी पंप्ड स्टोरेज परियोजना से संबंधित प्रथम चरण की सभी आवश्यक स्वीकृतियां शीघ्र प्राप्त करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।

बैठक में 300 मेगावाट क्षमता की लखवाड़ बहुद्देशीय परियोजना के शीयर ज़ोन उपचार से जुड़े अतिरिक्त कार्यों हेतु वित्तीय स्वीकृति भी प्रदान की गई। साथ ही उत्तराखंड सिंचाई विभाग से हस्तांतरित सौंग पंप्ड स्टोरेज परियोजना की सभी आवश्यक औपचारिक स्वीकृतियां संबंधित विभागों से शीघ्र प्राप्त करने के निर्देश भी दिए गए।

लखवाड़ बहुद्देशीय परियोजना की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से निदेशक मंडल ने केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तैनाती के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की।

बैठक में मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन एवं अध्यक्ष यूजेवीएन लिमिटेड आनंदवर्धन, प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षीसुंदरम, स्वतंत्र निदेशक इंदू कुमार पाण्डे, बी.पी. पांडे, पराग गुप्ता, अपर सचिव वित्त गंगा प्रसाद, प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह, निदेशक (परियोजनाएं) सुरेश चन्द्र बलूनी, अधिशासी निदेशक सुधाकर बडोनी, राजीव अग्रवाल, आशीष जैन, जी.एस. बुदियाल तथा यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक पी.सी. ध्यानी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर उत्तराखंड सरकार प्रतिबद्धः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, देहरादून शाखा द्वारा चकराता रोड देहरादून स्थित स्थानीय होटल में नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को डॉक्टर्स डे की शुभकामनाएं दीं तथा उत्कृष्ट चिकित्सकों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने भारत रत्न डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती एवं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन चिकित्सा सेवा, मानव कल्याण और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक केवल रोगों का उपचार करने वाले विशेषज्ञ नहीं होते, बल्कि वे समाज में विश्वास, उम्मीद और जीवन की नई ऊर्जा का संचार करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में चिकित्सकों को विशेष सम्मान दिया गया है। चिकित्सक अपनी सेवा, संवेदना और समर्पण से मानवता की सबसे बड़ी सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में चिकित्सक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच भी जनसेवा कर रहे हैं और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती के महत्वपूर्ण आधार हैं।

उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और समस्त स्वास्थ्य योद्धाओं के योगदान को याद करते हुए कहा कि संकट के उस दौर में स्वास्थ्य कर्मियों ने अपने कर्तव्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी। अनेक चिकित्सकों ने मानव जीवन की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान तक दिया, उनका त्याग सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उत्तराखंड में आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से लाखों जरूरतमंद परिवारों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिल रही है। प्रदेश में अब तक 62 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं तथा लगभग 12 लाख से अधिक मरीजों को 2300 करोड़ रुपये से अधिक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग संस्थानों और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में पांच मेडिकल कॉलेज संचालित हैं जबकि दो मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं। इसके साथ ही नर्सिंग शिक्षा को भी मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को बढ़ाया जा रहा है। हल्द्वानी में आधुनिक कैंसर संस्थान का निर्माण प्रगति पर है। जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। किच्छा में एम्स के सेटेलाइट सेंटर का निर्माण भी अंतिम चरण में है।

उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसके साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में हेली एंबुलेंस सेवा भी लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्तियों पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सकों की सुरक्षा, सम्मान और उनके बेहतर कार्य वातावरण को सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। किसी भी चिकित्सक के साथ हिंसा या अभद्र व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक जैसे डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेलीमेडिसिन स्वास्थ्य सेवाओं में नए अवसर लेकर आई हैं, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत समर्पित मानव संसाधन ही है। मरीज के लिए चिकित्सक उपचार के साथ विश्वास और संवेदना का प्रतीक होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, चिकित्सा संस्थानों, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और समाज के सामूहिक प्रयासों से उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में सेवा दे रहे चिकित्सकों का योगदान विशेष रूप से सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने सभी चिकित्सकों से अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने का आह्वान किया और कहा कि स्वस्थ चिकित्सक ही स्वस्थ समाज के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड का प्रत्येक नागरिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ सके और सभी के सहयोग से एक स्वस्थ, सशक्त एवं आत्मनिर्भर उत्तराखंड का निर्माण किया जाएगा।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारी, चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉक्टर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों में तेजी, 45 दिन में आधारभूत सुविधाएं पूरी करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत संचालित परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने की दिशा में आवास विभाग ने अपनी निगरानी और सख्त कर दी है। इसी क्रम में सचिव आवास/आयुक्त आवास विकास परिषद डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के एएचपी घटक के अंतर्गत विभिन्न आवासीय परियोजनाओं में किए जा रहे बाह्य विकास कार्यों की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया। बैठक में विद्युत आपूर्ति, पेयजल व्यवस्था तथा सड़क निर्माण से जुड़े कार्यों की स्थिति की समीक्षा करते हुए संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी कार्य पूर्ण करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।

बैठक में संयुक्त मुख्य प्रशासक दिनेश प्रताप सिंह, उप सचिव आवास रजनीश जैन, अधिशासी अभियंता विनोद कुमार चौहान, सहायक अभियंता आकांक्षा चौहान, आवास विशेषज्ञ रोहित रंजन (पीएमयू) तथा आवास अनुभाग से रंजीत रावत सहित विभिन्न विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने परियोजनावार प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके आधार पर सचिव आवास ने लंबित कार्यों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।

समीक्षा बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि लाभार्थियों को सभी आवश्यक नागरिक सुविधाओं से युक्त बेहतर जीवन उपलब्ध कराना इसका प्रमुख उद्देश्य है। इसी दृष्टिकोण से परियोजनाओं में विद्युत कनेक्शन, जलापूर्ति नेटवर्क और सड़क संपर्क जैसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया कि आवासों का निर्माण पूर्ण होने के बाद भी यदि बाह्य विकास कार्य लंबित रहते हैं तो लाभार्थियों को योजना का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता है। इसलिए सभी एजेंसियां समन्वित रूप से कार्य करते हुए शेष कार्यों को तेजी से पूरा करें।

30 से 45 दिन में कार्य पूर्ण करने के लिए तैयार होगी विस्तृत कार्ययोजना
बैठक में विस्तृत चर्चा के उपरांत सभी कार्यदायी संस्थाओं को निर्देशित किया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवंटित विद्युत, जलापूर्ति और सड़क निर्माण के सभी लंबित कार्य आगामी 30 से 45 दिनों के भीतर पूर्ण करना सुनिश्चित करें। इसके लिए प्रत्येक एजेंसी को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें प्रत्येक गतिविधि की समयसीमा, जिम्मेदार अधिकारी तथा कार्य पूर्ण होने की संभावित तिथि का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा। सचिव आवास ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल निर्माण कार्यों की प्रगति से नहीं, बल्कि लाभार्थियों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने से तय होती है। इसलिए सभी विभाग निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य करें और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न होने दें।

विभागों के बीच बेहतर समन्वय से दूर होंगी बाधाएं
बैठक के दौरान यह भी निर्देश दिए गए कि कार्यों के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं का समय रहते समाधान किया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों, स्थानीय निकायों और कार्यदायी संस्थाओं के बीच नियमित समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे परियोजनाओं से जुड़े सभी हितधारकों के साथ निरंतर संवाद स्थापित करें तथा भूमि, तकनीकी स्वीकृति, संसाधन उपलब्धता अथवा अन्य प्रशासनिक समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। सचिव आवास ने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

नियमित मॉनिटरिंग से सुनिश्चित होगी समयबद्ध पूर्णता
समीक्षा बैठक में परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग पर भी विशेष जोर दिया गया। सचिव आवास ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक परियोजना की प्रगति की सघन निगरानी की जाए और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत सभी परियोजनाओं को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध ढंग से पूर्ण करना सभी संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
प्रधानमंत्री आवास योजना केंद्र और राज्य सरकार की अत्यंत महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना है। हमारा प्रयास है कि लाभार्थियों को केवल आवास ही नहीं, बल्कि सभी आवश्यक आधारभूत सुविधाओं से युक्त बेहतर जीवन वातावरण उपलब्ध कराया जाए। समीक्षा बैठक में सभी कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि विद्युत, जलापूर्ति और सड़क निर्माण से जुड़े शेष कार्य 30 से 45 दिनों के भीतर पूर्ण किए जाएं। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से योजना के लंबित कार्य शीघ्र पूरे होंगे और लाभार्थियों को समय पर सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

उत्तराखंडः एक बार फिर आपके द्वार पहुंच रही आपकी धामी सरकार

जन समस्याओं के निराकरण के लिए गत वर्ष चलाए गए ‘जन जन की सरकार-जन जन के द्वार’ कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए, प्रदेश सरकार एक बार फिर जनता के द्वार पहुंच रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 4 जुलाई से 15 दिन का इस विशेष अभियान संचालित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें संबंधित विभागों अधिकारी- कर्मचारी शामिल होकर, जन समस्याओं का निराकरण करेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि लोगों को जन समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़े, बल्कि विभाग अधिकारी कर्मचारी खुद लोगों के पास पहुंच शिकायतों का निस्तारण करें। मुख्यमंत्री की इसी सोच को केंद्र में रखते हुए प्रदेश सरकार ने गत दिसंबर माह से 45 दिन का ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान शुरु किया था। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल के सफल पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक बार फिर ये अभियान शुरु होने जा रहा है। इस बार 4 जुलाई से मनाए जा रहे सेवा पखवाड़ा (15 दिवस) के तहत यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिसके तहत जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर शिविर आयोजित करते हुए, जन समस्याओं का निराकरण किया जाएगा, साथ ही लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा।

पिछली बार 5 लाख से अधिक की थी जनभागीदारी
दिसंबर माह में शुरु किए गए 45 दिन के ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तहत 681 शिविरों का आयोजन किया गया, जिसमें 5,33,452 नागरिकों ने प्रत्यक्ष तौर पर भागीदारी निभाई, यही नहीं इस दौरान करीब 33 हजार जन शिकायतों का त्वरित समाधान किया गया। इस अभियान को गवर्नेंस की बेस्ट प्रैक्टिस के रूप भी सराहा गया।

लोगों को बिना किसी भागदौड़ के सरकारी सेवाएं मिली, यही सुशासन की पहली सीढ़ी है। इसी क्रम में सभी जनपदों में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का दूसरा चरण शुरु किया जा रहा है। इसमें सभी सक्षम अधिकारियों, कर्मचारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड