उत्तराखण्ड के विकास में नीति आयोग का सदैव सकारात्मक सहयोग प्राप्त हुआः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से नीति आयोग के सदस्य प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास के नेतृत्व में नीति आयोग की टीम ने भेंट की। इस अवसर पर उत्तराखण्ड के समग्र एवं सतत विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, जनसांख्यिकीय चुनौतियों तथा विकास की संभावनाओं के अनुरूप प्रभावी एवं दूरदर्शी नीति निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के विकास में नीति आयोग का सदैव सकारात्मक सहयोग प्राप्त हुआ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी राज्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नीति आयोग का मार्गदर्शन एवं सहयोग मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय, तीर्थाटन, पर्यटन प्रधान राज्य के लिए नीति निर्माण में केवल स्थायी आबादी ही नहीं, बल्कि राज्य की फ्लोटिंग पॉपुलेशन को भी विशेष महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की स्थायी आबादी की तुलना में प्रतिवर्ष लगभग सात से आठ गुना अधिक लोग उत्तराखण्ड आते हैं, जिससे स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, परिवहन तथा अन्य बुनियादी सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए योजनाओं के निर्माण एवं संसाधनों के आवंटन में इस तथ्य का समुचित समावेश आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ जनजागरूकता और स्वास्थ्य शिक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्रभावी रूप से मिल सके।

मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास को राज्य की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि इस दिशा में निरंतर और परिणामोन्मुख प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने बच्चों को कुपोषण से मुक्त बनाने तथा महिलाओं में एनीमिया की समस्या के प्रभावी समाधान के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार कर उसे धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में कृषि, बागवानी, पर्यटन, जल संसाधन, जैव विविधता, कौशल विकास तथा अन्य संभावनाओं वाले क्षेत्रों में विषय विशेषज्ञों के साथ नीति आयोग के सहयोग से नियमित सेमिनार एवं विचार-विमर्श आयोजित किए जाएं। इससे राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवहारिक एवं नवाचार आधारित नीतियां तैयार करने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने जल संरक्षण को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रभावी एवं दीर्घकालिक योजनाओं पर विशेष रूप से कार्य किया जाना चाहिए। साथ ही, प्रदेश के लोगों की आजीविका के संसाधनों में वृद्धि, स्थानीय रोजगार सृजन तथा सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बेहतर नीति निर्धारण एवं समन्वित प्रयास सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और नीति आयोग के बीच समन्वित प्रयासों से उत्तराखण्ड के सर्वांगीण एवं संतुलित विकास को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, अपर सचिव नरेन्द्र भण्डारी, डॉ. संदीप तिवारी, एसीईओ सेतु मनोज पंत, सलाहकार एवं कार्यक्रम निदेशक नीति आयोग डॉ. सोनिया पंत, उप सचिव नीति आयोग दीपक कुमार विशेष कार्याधिकारी नीति आयोग डॉ. शोभित कुमार मौजूद थे।

उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रही सरकार, चारधाम यात्रा ने बनाए नए कीर्तिमान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रेमनगर आश्रम हरिद्वार में आयोजित पूज्य मोरारी बापू की श्रीराम कथा के समापन समारोह में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हरिद्वार की पावन धरा पर उन्हें अद्वितीय आध्यात्मिक सुख और आनंद की अनुभूति हो रही है। उन्होंने पूज्य मोरारी बापू का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मोरारी बापू केवल श्रीराम कथा के वाचक नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों, विचारों और जीवन-दर्शन के जीवंत संवाहक हैं, जिन्होंने विश्वभर में भारतीय संस्कृति, सनातन दर्शन और अध्यात्म का संदेश पहुंचाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब विश्व युद्ध, हिंसा और आतंकवाद जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भारत की सनातन संस्कृति का ष्वसुधैव कुटुम्बकम्ष् का संदेश पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है और उत्तराखंड सरकार देवभूमि को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर तथा प्राचीन मंदिरों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण की योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक यात्राओं ने इस वर्ष नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि चारधाम यात्रा में पिछले सभी रिकॉर्ड टूट रहे हैं और दो माह के भीतर ही 45 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसी प्रकार हेमकुंड साहिब यात्रा में डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं, जबकि कैलाश मानसरोवर यात्रा में 55000 से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जहाँ पहले पूरे वर्ष में सीमित संख्या में ही यात्रियों को भेजा जाता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 5 जुलाई को कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रथम दल को रवाना करने का सौभाग्य भी उन्हें प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड में विकसित हो रहे बेहतर बुनियादी ढांचे, सुरक्षित यात्रा प्रबंधन और श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने आगामी कुंभ-2027 को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि कुंभ केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति का महापर्व है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास भी और विरासत भी के मंत्र के साथ देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक गरिमा और सनातन परंपरा के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि संतों के आशीर्वाद और जनसहभागिता से उत्तराखंड आध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन आश्रम ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, राज्य मंत्री सुनील सैनी, देशराज कर्णवाल, नितिन गौतम, अजीत चौधरी, शोभाराम प्रजापति, आदेश सैनी, जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल तत्काल प्रभाव से निलंबित, बीकेटीसी में अनुशासनहीनता पर बड़ी कार्रवाई

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने अनुशासन एवं प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

समिति द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नौटियाल के विरुद्ध पदीय दायित्वों के निर्वहन में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने पर 03 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। साथ ही मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया।

प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जांच समिति की प्रारंभिक आख्या का परीक्षण करने पर आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट पाए गए। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है। समिति ने यह भी माना कि कर्मचारी को वर्तमान पद पर बनाए रखने से जांच प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इन्हीं तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए जांच की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता देय होगा। साथ ही उन्हें बीकेटीसी कार्यालय, जोशीमठ (जनपद चमोली) से संबद्ध किया गया है। इस अवधि में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी तथा उन्हें जांच एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही में अपेक्षित सहयोग देना अनिवार्य होगा।

बीकेटीसी ने स्पष्ट किया है कि समिति प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं अनुशासन सर्वाेच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता के मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सीएम के आदेश पर बदरीनाथ धाम चढ़ावा मामले पर उच्चस्तरीय समिति गठित

श्री बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे आदि के संबंध में प्राप्त कथित अनियमितताओं की शिकायतों एवं प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखण्ड शासन ने मामले की गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।

समिति के अध्यक्ष आयुक्त गढ़वाल मंडल होंगे। समिति में प्रबंध निदेशक, एनएचएम संदीप तिवारी तथा कार्यालय महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।

सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार समिति मंदिर में प्राप्त होने वाले दान-चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करेगी तथा 15 दिनों के भीतर अपनी जांच आख्या एवं संस्तुतियां शासन को प्रस्तुत करेगी।

जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर समिति किसी भी अधिकारी, विशेषज्ञ अथवा अन्य संबंधित व्यक्ति का सहयोग एवं परामर्श प्राप्त कर सकेगी। साथ ही समिति दान-चढ़ावे के प्रबंधन तंत्र को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों एवं सुझावों से भी शासन को अवगत कराएगी।

सीएम धामी ने वन क्लिक से 9.80 लाख लाभार्थियों को ₹145.42 करोड़ की पेंशन राशि की जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाज कल्याण विभाग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग की सभी योजनाएं केवल वर्तमान आवश्यकताओं को नहीं, बल्कि अगले 25 वर्षों की चुनौतियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाएं। उन्होंने कहा कि योजनाएं ऐसी हों जो समय के साथ निरंतर प्रभावी बनी रहें तथा अन्य राज्यों के लिए भी बेस्ट प्रैक्टिस का उदाहरण बनें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाबू जगजीवन राम बालक छात्रावास, डोईवाला (देहरादून), बाबू जगजीवन राम बालक छात्रावास, पाइनस (नैनीताल) तथा बाबू जगजीवन राम बालिका छात्रावास, सोमेश्वर (अल्मोड़ा) के निर्माण कार्य हर हाल में अक्टूबर माह तक पूर्ण किए जाएं, ताकि अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को शीघ्र बेहतर आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का इंटीग्रेशन किया जाए तथा योजनाओं के क्रियान्वयन एवं निर्माण कार्यों में वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के प्रभावी उपयोग का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि 60 वर्ष की आयु पूर्ण करते ही पात्र नागरिक स्वतः वृद्धावस्था पेंशन के दायरे में आ जाएं, जिससे उन्हें किसी प्रकार की अनावश्यक प्रक्रिया से न गुजरना पड़े और समय पर पेंशन का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास सभागार में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं की माह जून-2026 की देय पेंशन राशि का डीबीटी (वन क्लिक) के माध्यम से हस्तांतरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कुल 9,80,950 लाभार्थियों को लगभग ₹145 करोड़ 42 लाख की पेंशन राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की। इसमें केंद्र सरकार का अंश लगभग ₹7 करोड़ 2 लाख तथा राज्य सरकार का अंश लगभग ₹138 करोड़ 40 लाख रहा।

माह जून-2026 में वितरित इस राशि में वृद्धावस्था पेंशन के 6,11,245 लाभार्थियों को ₹91.69 करोड़, विधवा पेंशन के 2,35,850 लाभार्थियों को ₹35.38 करोड़, दिव्यांग पेंशन के 88,787 लाभार्थियों को ₹13.32 करोड़, किसान पेंशन के 27,207 लाभार्थियों को ₹3.26 करोड़, परित्यक्ता पेंशन के 8,258 लाभार्थियों को ₹99.10 लाख, भरण-पोषण अनुदान के 7,297 लाभार्थियों को ₹51.08 लाख, तीलू रौतेली पेंशन के 2,179 लाभार्थियों को ₹26.15 लाख तथा बौना पेंशन के 127 लाभार्थियों को ₹1.52 लाख की सहायता प्रदान की गई।

बैठक में बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना की भी समीक्षा की गई। यह योजना अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को माध्यमिक, उच्च एवं विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा के लिए छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराने हेतु संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार प्रति छात्र ₹3.25 लाख तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है तथा आवश्यकता होने पर राज्य सरकार अतिरिक्त टॉप-अप राशि देकर आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण छात्रावासों का निर्माण सुनिश्चित करती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, हमारी सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी और प्रभावी व्यवस्था विकसित करना है जो आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं को भी पूरा करे। सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान प्रत्येक पात्र नागरिक का अधिकार है। उत्तराखण्ड में ऐसा सुशासन मॉडल विकसित किया जाएगा, जिसे देश के अन्य राज्य भी अपनाने के लिए प्रेरित हों।

बैठक में कैबिनेट मंत्री खजान दास, समाज कल्याण सचिव सहित समाज कल्याण विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव बर्द्धन ने जानी राज्य के कलस्टर विद्यालयों की प्रगति

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से जिलाधिकारियों के साथ बैठक की गई। बैठक के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई एवं दिशा निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर में हरेला पर्व को बड़े स्तर पर मनाये जाने के लिए सभी जनपदों को एक्शन प्लान तैयार किये जाने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि इस पर्व को आमजन से जोड़े जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस पर्व से अधिक से अधिक लोगों को जोड़े जाने के लिए स्कूल, एनजीओ न्याय पंचायत, ग्राम पंचायत आदि को जोड़ते हुए वृहद स्तर पर हरेला का आयोजन किया जाए।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में क्लस्टर विद्यालयों की प्रगति पर भी चर्चा की। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों के साथ प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में छात्र व छात्राओं को यातायात सुविधा दिए जाने के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि क्लस्टर विद्यालयों के माध्यम से सरकार छात्र व छात्राओं को वो सभी सुविधाएं एक जगह पर देने का प्रयास कर रही है, जो उन्हें मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्लस्टर विद्यालयों को सभी आवश्यक सुविधाओं से परिपूर्ण करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। चिन्हित क्लस्टर विद्यालयों में से श्लो हैंगिंग फ्रूटश् जैसे विद्यालयों को शुरूआती चरण में लिया जा सकता है। मुख्य सचिव ने आयुक्त गढ़वाल एवं आयुक्त कुमाऊँ को इस सम्बन्ध में साप्ताहिक समीक्षा करते हुए, क्लस्टर विद्यालयों में शीघ्र से शीघ्र विद्यार्थियों को यातायात सुविधा उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव नितेश कुमार झा, रविनाथ रमन, डॉ. वी. षणमुगम, चंद्रेश कुमार यादव एवं विनोद कुमार सुमन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

केदानाथ धाम में जिन 6 ब्लॉक्स का कार्य शुरू किया जाना है, उन्हें तत्काल शुरू कराया जाएः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में केदारनाथ पुनर्निर्माण और पुनर्विकास कार्य एवं बद्रीनाथ मास्टर प्लान कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने केदारनाथ पुनर्निर्माण से सम्बन्धित कार्यों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने प्रत्येक कार्य के भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के साथ ही पूर्ण होने की समयसीमा की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने कहा कि केदानाथ धाम में जिन 6 ब्लॉक्स का कार्य शुरू किया जाना है, उन्हें तत्काल शुरू कराया जाए। उन्होंने निर्धारित समय पर कार्य पूर्ण कराए जाने हेतु प्रत्येक कार्य की लगातार मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को केदारनाथ धाम यात्रा क्षेत्र के लिए एक व्यापक एवं एकीकृत कूड़ा प्रबंधन योजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के कूड़े के डिस्पोजल की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी वित्तीय, तकनीकी और अन्य सहयोग की आवश्यकता होगी, वह उपलब्ध करायी जाएगी।

मुख्य सचिव ने बद्रीनाथ मास्टरप्लान फेज 1 और फेज 2 के कार्यों की प्रगति की भी विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने प्रत्येक कार्य की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की जानकारी ली एवं प्रत्येक कार्य के पूर्ण होने की समयसीमा के अनुसार कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट में निहित सभी प्रकार के कंटेंट और आर्ट वर्क को साथ साथ शुरू कराया जाए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि केदारनाथ धाम एवं बद्रीनाथ धाम में जो भी असेट्स एवं सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं, उनके ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के लिए फ्रेमवर्क तैयार कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि इनके संचालन के लिए संस्थाएं पूर्व निर्धारित रहेंगी तो हैंड ओवर करने के उपरांत मेंटेनेंस आदि की जिम्मेदारी निर्धारण में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर सचिव धीराज गर्ब्याल, अपर सचिव विनीत कुमार एवं सम्बन्धित जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

सीएस की अध्यक्षता में हुई नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति की बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने प्राईमरी सेक्टर पर जोर देते हुए, ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (आरआईडीएफ) के तहत् अधिक से अधिक प्रोजेक्ट शामिल किए जाने के निर्देश विभागों को दिए।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने प्रोजेक्ट अगले तीन दिन में पोर्टल पर अपलोड किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गतिमान परियोजनाओं की प्रतिपूर्ति के लिए भी प्रस्ताव शीघ्र अपलोड किए जाएं, ताकि समय से प्रतिपूर्ति जारी की जा सके। उन्होंने धीमी गति से चल रहे प्रोजेक्ट्स पर भी चिंता जाहिर करते हुए पुरानी परियोजनाओं को प्राथमिकता पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव स्लो गोईंग प्रोजेक्ट्स की साप्ताहिक समीक्षा करते हुए कार्यों को पूर्ण कराएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभागों द्वारा एकीकृत दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रोजेक्ट तैयार करने पर ही किसी क्षेत्र में योजनाओं का उचित लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। कृषि-बागवानी क्षेत्र में सम्पूर्ण लिंकेज के साथ एक से अधिक क्लस्टर्स को शामिल करते हुए बड़े प्रोजेक्ट बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में एक क्षेत्र के आसपास के सभी क्लस्टर्स को कोल्ड चेन, इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्टेशन आदि की सुविधा एक ही प्राजेक्ट के अंतर्गत मिल सके।

मुख्य सचिव ने इसके लिए नाबार्ड से तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराए जाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि नाबार्ड को गतिशक्ति पोर्टल का एक्सेस उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह सभी परियोजनाओं का अध्ययन कर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 4, 5 क्षेत्र चिन्हित करते हुए इन चिन्हित क्षेत्रों के एक सम्पूर्ण लिंकेज प्लान तैयार करने में तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध करा सकें। इस पर नाबार्ड ने शीघ्र एक टीम लगाए जाने के आश्वासन दिया।

मुख्य सचिव ने कहा कि उद्यान विभाग को पॉलीहाऊस परियोजना को शीघ्र से शीघ्र पूर्ण कराए जाने हेतु सचिव स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा करते हुए लगातार निगरानी किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पशुपालन विभाग को भी सभी जनपदों में बड़े स्तर के अस्पतालों को स्थापित कर दूरस्थ क्षेत्रों में पशुओं के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जो प्रोजेक्ट पूर्ण हो चुके हैं, उन प्रोजेक्ट्स के पूर्ण होने का प्रमाण-पत्र एवं रिपोर्ट, शीघ्र से शीघ्र नाबार्ड को उपलब्ध कराए जाएं।

बैठक के दौरान बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 1 हजार करोड़ के प्रस्ताव का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 500 करोड़ से अधिक के प्रस्ताव शासन को प्राप्त हो गए हैं। इनमें से कुल 271 करोड़ के प्रस्ताव नाबार्ड को प्राप्त हो गए हैं, इन 271 करोड़ के प्रोजेक्ट्स में से 210 करोड़ की डीपीआर नाबार्ड को प्राप्त हो गई हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, सी. रविशंकर, धीराज सिंह गर्ब्याल एवं सीजीएम नाबार्ड पंकज यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कांवड़ यात्रा मार्ग पर नियमित कूड़ा उठान, परिवहन, कीटनाशक छिड़काव, फॉगिंग व पथ प्रकाश व्यवस्था करेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में 30 जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर सम्बन्धित विभागों, जनपदों के ज़िलाधिकारियों एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने सभी सम्बन्धित विभागों को अपने स्तर से सभी तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि 30 जुलाई से 11 अगस्त, 2026 तक कांवड़ मेले के दौरान रूट प्लान और भीड़ प्रबंधन की तैयारियाँ कर ली जाएँ। उन्होंने कहा की 31 जुलाई से 04 अगस्त, 202ये तक पंचक काल के दौरान कांवड़ मेले में अत्याधिक भीड़ रहेगी, जिसके लिए विशेष तैयारियाँ किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप कांवड यात्रियों के लिए कांवड पटरियों व प्रमुख पड़ाव स्थल पर पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित कराने के साथ ही मोबाइल शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि नियमित कूड़ा उठान, परिवहन, कीटनाशक छिड़काव, फॉगिंग व पथ प्रकाश व्यवस्था को समुचित रूप से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कांवड़ यात्रा मार्ग में अस्थायी सेक्टर चिकित्सालय, बी.एल.एस. एम्बुलेन्स, बाइक एम्बुलेन्स, प्राथमिक उपचार केन्द्र आदि की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कावंड मेला के दौरान हरिद्वार आने वाले वाहनों की पार्किंग के लिए पार्किंग स्थलों की मरम्मत एवं विस्तारीकरण का कार्य शीघ्र पूर्ण कर लिया जाए। साथ ही, कांवड यात्रा के सुचारू संचालन हेतु राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवश्यक बैरिकेटिंग व साफ-सफाई तथा मार्ग सुधारीकरण का कार्य शीघ्र पूर्ण कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने यूपीसीएल द्वारा पॉवर सप्लाई ऑडिट कराये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा आने वाले समय के लिए यात्रा मार्गों में विद्युतीकरण की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित किए जाए। उन्होंने कांवड यात्रा के दौरान खाद्य पदार्थों का निरीक्षण एवं सैम्पलिंग हेतु टीमों को गठित किए जाने के साथ ही स्थायी व अस्थायी खाद्य स्टॉलों, धार्मिक भण्डारों, होटलों, ढाबों, दुकानों, आपूर्ति वाहनों, रेस्टोरेन्ट, दुग्ध पदार्थ विक्रेता का निरीक्षण व नमूना संग्रहण का कार्य के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कांवड़ के दौरान कानून एवं शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए सभी आवश्यक क़दम उठाए जाने के भी निर्देश दिए हैं। राज्यों के साथ अंतर्राज्यीय बैठक शीघ्र आयोजित कराते हुए अन्य राज्यों से सहयोग का अनुरोध शीघ्र कर लिया जाए।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, विनोद कुमार सुमन, धीरज गर्ब्याल, अपर सचिव रीना जोशी, आयुक्त गढ़वाल आनन्द स्वरूप, जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित, जिलाधिकारी देहरादून आशीष चौहान, डीएम पौड़ी स्वाति एस. भदौरिया, डीएम टिहरी नीतिका खंडेलवाल सहित इन जनपदों के पुलिस अधीक्षक भी उपस्थित थे।

सीएम का देश-विदेश में बसे उत्तराखंडवासियों से विकसित और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में निरंतर सहयोग का किया आह्वान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुंबई में आयोजित प्रवासी उत्तराखंडवासियों के भव्य सम्मेलन में प्रदेश और देश-विदेश में बसे उत्तराखंड मूल के लोगों के साथ आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यसेवक के रूप में पिछले पाँच वर्षों की विकास यात्रा, जनसेवा के संकल्प तथा विकसित उत्तराखंड के विजन को साझा करते हुए प्रवासी समाज को राज्य के विकास का महत्वपूर्ण भागीदार बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक राजधानी मुंबई में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को जीवंत बनाए रखने वाले प्रवासी उत्तराखंडवासियों के बीच उपस्थित होकर उन्हें विशेष आत्मीयता और गर्व की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरी चाहे कितनी भी हो, उत्तराखंड और उसके प्रवासी परिवारों के बीच भावनात्मक संबंध सदैव अटूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी उत्तराखंडवासी अपनी मेहनत, संस्कार, उपलब्धियों और उत्कृष्ट कार्यों के माध्यम से देश-दुनिया में राज्य की प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं तथा वे वास्तव में उत्तराखंड के सांस्कृतिक दूत और सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के प्रति प्रवासी समाज का स्नेह, समर्पण और जुड़ाव राज्य की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभूमि से यह भावनात्मक संबंध नई पीढ़ी को भी उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़े रखने का कार्य कर रहा है। उन्होंने इस अवसर पर सभी प्रवासी संगठनों और उपस्थित उत्तराखंडवासियों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रवासी उत्तराखंडवासियों की प्रतिभा, अनुभव और विशेषज्ञता को उत्तराखंड के विकास से जोड़ने के उद्देश्य से प्रवासी उत्तराखंड परिषद का गठन किया है। इसके माध्यम से देश-विदेश में रहने वाले उत्तराखंडवासी राज्य की विकास योजनाओं, निवेश, नवाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार प्रवासी समाज के सुझावों और अनुभवों को विकास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार मानती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के दौरान भी प्रवासी उत्तराखंडवासियों ने सदैव आगे बढ़कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के आह्वान पर अब तक देश-विदेश में रह रहे 27 प्रवासियों ने उत्तराखंड के 29 गांवों को गोद लिया है, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सकारात्मक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से मुंबई में रहने वाली प्रख्यात अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी द्वारा अपने पैतृक गांव को गोद लेने के निर्णय की सराहना करते हुए इसे मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और देवभूमि के देवी-देवताओं के आशीर्वाद से उत्तराखंड आज विकसित राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बागवानी, पर्यटन, कनेक्टिविटी, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण सहित सभी क्षेत्रों में योजनाबद्ध ढंग से कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि एक जनपद-दो उत्पाद, हाउस ऑफ हिमालयाज, स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, कीवी मिशन, होम-स्टे योजना, वेड इन उत्तराखंड, लखपति दीदी, सौर स्वरोजगार योजना सहित अनेक पहलों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को नीति आयोग के एसडीजी इंडेक्स में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में श्अचीवर्सश् तथा स्टार्टअप रैंकिंग में श्लीडर्सश् श्रेणी में स्थान मिला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय कमी आई है तथा जी-20 बैठकों, राष्ट्रीय खेलों, शीतकालीन यात्रा और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे आयोजनों ने उत्तराखंड की वैश्विक पहचान को नई मजबूती प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से राज्य को 3.76 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था में निरंतर वृद्धि हुई है, प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, राज्य का बजट एक लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है तथा उद्योगों और स्टार्टअप्स की संख्या में भी निरंतर विस्तार हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन आधारित नीतियों के सकारात्मक परिणामस्वरूप प्रदेश में होटल और होम-स्टे की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा रिवर्स पलायन को भी नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी रोजगार के लिए गांव छोड़ने को विवश थे, वे अब नए अवसरों के साथ अपनी मातृभूमि लौट रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक मूल्यों और जनसांख्यिकीय संतुलन के संरक्षण के लिए भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के माध्यम से सुशासन को और अधिक मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के माध्यम से हजारों युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है जहां पहाड़ का पानी और जवानी प्रदेश के विकास में ही योगदान दें तथा किसी भी युवा को मजबूरी में पलायन न करना पड़े। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर गांव, आधुनिक सुविधाएं, बेहतर शिक्षा, रोजगार और मजबूत आधारभूत संरचना के माध्यम से उत्तराखंड को देश का अग्रणी और विकसित राज्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने देश-विदेश में बसे सभी प्रवासी उत्तराखंडवासियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, अनुभव, निवेश, नवाचार और सामाजिक योगदान के माध्यम से उत्तराखंड के विकास में इसी प्रकार सक्रिय भागीदारी निभाते रहें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और प्रवासी समाज के साझा प्रयासों से उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाने का संकल्प अवश्य साकार होगा।

इस अवसर पर प्रवासी उत्तराखंडवासियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आत्मीय स्वागत करते हुए राज्य सरकार की विकास यात्रा, जनहितकारी निर्णयों तथा उत्तराखंड को नई पहचान दिलाने के प्रयासों पर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में भी राज्य के विकास और जनकल्याण के कार्यों में सक्रिय सहयोग देने का संकल्प दोहराया।

इस अवसर पर प्रवासी उत्तराखंड संगठनों के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, उद्योग जगत से जुड़े प्रवासी उत्तराखंडवासी तथा बड़ी संख्या में मुंबई एवं आसपास के क्षेत्रों में निवासरत प्रवासी उत्तराखंडवासी उपस्थित रहे।