स्मार्ट सिटी का काम धरातल पर उतारने के निर्देश

जिलाधिकारी डाॅ आर राजेश कुमार ने सीईओ स्मार्ट सिटी का भी कार्यभार ग्रहण किया। कार्यभार ग्रहण करने उपरान्त उन्होंने स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों को स्मार्ट सिटी कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से तेजी लाने के साथ गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिये। उन्होंने शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के कार्यों हेतु खोदी गई सड़कों जहां कार्य गतिमान है वहां पर चेतावनी बोर्ड लगाते तथा जंहा कार्य पूर्ण हो चुका है ऐसे स्थानों पर सड़क समतलीकरण करते हुए गड्डा मुक्त बनाने के भी निर्देश दिये।

डॉ राजेश कुमार ने स्मार्ट सिटी के पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अधिकारी एसी कमरे में ना बैठे हैं प्रत्येक अधिकारी जिम्मेदारी के साथ फील्ड में स्थलीय निरीक्षण करते रहें और जनता जनार्दन को हो रही असुविधाओं को भी दूर करते रहें।

स्मार्ट सिटी के नए सीईओ राजेश कुमार ने अधिकारियों को साफ कर दिया है कि किसी भी स्थिति में जनता के साथ किसी भी तरह की परेशानी ना हो और अगर परेशानी होती है तो उसका समाधान तुरंत किया जाए। डॉ राजेश कुमार ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि अधिकारी एसी कमरे में ना बैठ कर फील्ड में उतरे।

अपना स्तर खुद घटा रहे मीडिया संस्थान, भ्रामक खबरों से बचना चाहिए

उत्तराखंड में आज दिनभर से एक खबर को लेकर जमकर चर्चा हो रही है। दरअसल इस चर्चा का विषय मीडिया की घटती विश्वसनीयता है। यह इसलिए क्यूंकि आज सुबह से ही राज्य सरकार के दो विज्ञापन को लेकर आधारहीन खबरें प्रकाशित की जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि बिना तथ्यों की जानकारी के एक मनगढ़ कहानी बनाकर खबर के रूप में प्रसारित किया जा रहा है। दरअसल ताजा मामला मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के विज्ञापन से जुड़ा हुआ है। जिस पर कतिपय समाचार पोर्टल पर मुख्यमंत्री के तस्वीर के साथ विभागीय मंत्री की फोटो न लगाए जाने को लेकर भ्रामक स्थिति उत्पन्न की जा रही है।

एक नजर कोर्ट के आदेश पर

दरअसल 13 मई 2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया गया था कि सरकारी विज्ञापनों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की फोटो ही लगाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कर्नाटक सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार समेत कई राज्यों की सरकार ने इस बार सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर से पुनर्विचार याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए ’18 मार्च 2016 को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई व न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष की पीठ ने यह आदेश संशोधित करते हुए निर्णय दिया कि सरकारी विज्ञापन में मुख्यमंत्री की फोटो लगाई जा सकेगी, इसके अलावा कोर्ट ने इसी आदेश में विभागों के कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्रियों को भी फोटो लगाने हेतु अनुमति प्रदान की है. इस आदेश के तीसरे बिंदु में स्पष्ट कहा गया है कि यदि विभागीय मंत्री की फोटो लगती है तो उसमें मुख्यमंत्री की तस्वीर नहीं लगाई जाएगी यानी कि राज्य सरकार के विज्ञापन में या तो मुख्यमंत्री या फिर विभागीय मंत्री की तस्वीर ही लगाई जाएगी।

मनगढ़त खबरें लिखकर टीआरपी बटोरने की कोशिश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ज्यादातर राज्य सरकारों द्वारा सरकारी विज्ञापनों में मुख्यमंत्री की ही तस्वीर लगाई जाती हैं, यह बात अलग है कि अगर विभाग अलग से विज्ञापन प्रकाशित कर रहा है तो उसमें विभागीय मंत्री की तस्वीर लगाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी के बिना कतिपय न्यूज पोर्टल इस तरह के मनगढ़त खबरें लिखकर टीआरपी बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। लिहाजा जनता के बीच भी भ्रामक जानकारी दी जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष का सरकार पर हमला, बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रही है सरकार

कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बीच उत्तराखंड सरकार ने आज से कक्षा 9 से 12 वीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खोल दिए हैं। जबकि संक्रमण से बचाव के लिए अभी बच्चों का कोविड टीकाकरण तक शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में स्कूली बच्चों को बिना सुरक्षा कवच के स्कूल जाना पड़ रहा है। जिससे बच्चों में संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर संक्रमण का असर ज्यादा होने को लेकर विशेषज्ञ पहले ही आगाह कर चुके हैं। सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस सवाल खड़ा कर रही है। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आधी-अधूरी तैयारियों के साथ स्कूल खोलने का फैसला बच्चों की जान से खिलवाड़ करने वाला है। हम स्कूल खोलने का विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन बच्चों को संक्रमण से बचाव के लिए स्कूलों में किस तरह की इंतजाम किए गए हैं। इसे लेकर पहले पूरी तैयारियां की जानी चाहिए थी। सभी स्कूलों में पूर्ण इंतजाम होने के बाद स्कूल खोले जाने चाहिए थे। प्रीतम सिंह ने कहा कि पहली लहर में कोरोना संक्रमण काबू में आने के बाद सरकार ने स्कूल खोलने का फैसला लिया था। लेकिन स्कूलों में बच्चों और अध्यापकों के संक्रमित होने पर फिर से स्कूल बंद करने पड़े। सरकार अपने पूर्व के फैसलों से सबक नहीं ले रही है। एक तरफ सरकार व स्वास्थ्य विभाग कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बच्चों को संक्रमण से बचाव व उपचार की तैयारियां कर रही है। वहीं, दूसरी तरफ आधी अधूरी तैयारियों के बीच जो स्कूल खोलने का फैसला लिया है हम उसका विरोध कर रहे हैं।

’शिक्षकों और कर्मचारियों का नहीं हुआ पूर्ण वैक्सीनेशन’

नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि सरकार ने आनन-फानन स्कूल खुलवाकर बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने का काम किया है। उनकी जानकारी में आया है कि स्कूलों के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का अभी तक वैक्सीनेशन नहीं हुआ है। 20 फीसदी से अधिक शिक्षकों एवं कर्मचारियों का अभी वैक्सीनेशन भी नहीं हुआ है। सरकार ने किसी भी जिम्मेदारी से बचने के लिए कह दिया है कि स्कूल में उन छात्रों को ही प्रवेश मिल रहा है, जिनके पास अभिभावकों का सहमतिपत्र है। यानि आप समझ सकते हैं कि सारी जिम्मेदारी अभिभावकों की होगी। लंबे समय से बंद स्कूलों में साफ-सफाई न होने कई स्कूलों में झाड़ियां उग आई हैं। इन स्कूलों में सफाई नहीं की गई है। ऐसे में आप खुद समझ सकते हैं कि सरकार को बच्चों की कितनी चिंता है।

’बिना बजट कहां से होगा सैनिटाइज’

नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि उनकी जानकारी में आया है कि स्कूलों के पास सैनिटाइजेशन करवाने तक के लिए अलग से फंड की व्यवस्था नहीं है। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को सैनिटाइज करने के आदेश तो जारी किए गए हैं, लेकिन इसके लिए बजट उपलब्ध नहीं कराया गया है। स्कूल खुलने से पहले विभाग को इसके लिए बजट की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

’स्कूलों में नहीं है शौचालय और पानी की सुविधा’

प्रतीम सिंह ने कहा कि राज्य के 1170 स्कूलों में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। वहीं 2109 स्कूलों में बच्चों को पीने के पानी की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है और सरकार कह रही है कि उत्तरखंड खुले में शौच मुक्त हो चुका है। यही नहीं एक रूपये में हर घर नल, हर घर जल पहुंचाया जा रहा है। सरकार की पोल खुद सरकारी स्कूल खोल रहे हैं।

नई रोड धंसी, विस अध्यक्ष का चढ़ा पारा, मौके पर बुलाकर लगाई लताड़

एम्स रोड, ऋषिकेश में सामान से भरे ट्रक के रोड में धँस जाने की सूचना मिलते ही स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता विपुल सैनी को दूरभाष पर एम्स रोड में डामरीकरण में हुई अनियमिता के लिए खूब फटकार लगायी और कहा कि विभाग की इस घोर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देशित करते हुए कहा है कि शीघ्र एम्स रोड का निरीक्षण कर खामियों का पता लगाया जाए और जानकारी दी जाए ताकि दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।
निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता उपेंद्र गोयल को मौके पर बुलाया गया और स्पीकर ने ट्रक फंसने की वजह पूछी। उपेंद्र गोयल ने कहा है कि सड़क के नीचे पानी की पाइपलाइन की वजह से यह घटना हुई है जिस पर स्पीकर ने कहा कि मोटर मार्ग निर्माण से पूर्व तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए थी ताकि इस प्रकार की घटना ना होती। इस दौरान स्पीकर ने सड़क मार्ग निरीक्षण करते हुए दोनों तरफ पानी से भरे हुए गड्ढों पर भी नाराजगी व्यक्त की।
ज्ञात हो कि नवंबर माह मे एम्स रोड के डामरीकरण का कार्य पूर्ण हुआ था। उस दौरान निर्माणाधीन कार्य का विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बीच-बीच में निरीक्षण भी किया गया और साथ ही विभाग के अधिकारियों को कार्य में गुणवत्ता के सख्त निर्देश दिए थे। मौके पर लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता उपेंद्र गोयल सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह नेगी आदि उपस्थित थे।

धामी के मुख्यमंत्री बनने से गढ़वाल से संगठन में प्रभावी चेहरा लाने की तैयारी

आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अब भाजपा पर सबकी नजरें टिकी हैं कि क्या सत्तारूढ़ पार्टी भी कांग्रेस की तर्ज पर रणनीति बना रही है। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, इस बात की खासी संभावना है कि भाजपा भी जल्द कार्यकारी अध्यक्ष के फार्मूले पर कदम आगे बढ़ा सकती है।
उत्तराखंड छोटा सा राज्य है मगर राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से यह हमेशा चर्चा में रहा है। यहां राजनीतिक उठापटक कितनी ज्यादा है, यह इस तथ्य से समझा जा सकता है कि राज्य गठन के बाद के 20 वर्षों में यहां 11 मुख्यमंत्री बन चुके हैं। पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में 11वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उत्तराखंड की पहली अंतरिम सरकार में दो, पहली निर्वाचित सरकार में एक, दूसरी में तीन, तीसरी में दो और अब चैथी सरकार में तीन मुख्यमंत्री।
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने करारी शिकस्त का स्वाद चखा और वह 70 सदस्यीय विधानसभा में 11 सीटों तक सिमट गई। लाजिमी तौर पर कांग्रेस फिर सत्ता में वापसी की कोशिशों में जी जान से जुटी हुई है। पार्टी में गुटबाजी और अंतर्कलह भी थमा नहीं है। ऐसे में कांग्रेस ने संगठन में संतुलन साधने के लिए पांच अध्यक्ष बनाने का फैसला किया। गणेश गोदियाल के रूप में ब्राह्मण चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष की कमान दी गई। साथ में चार कार्यकारी अध्यक्ष की टीम भी, ताकि हर तबका संतुष्ट रहे।
साफ है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के साथ चार कार्यकारी अध्यक्ष का फार्मूला सुविचारित रणनीति के तहत अमल में लाई है। इससे राजनीतिक गलियारों में इस बात के कयास लगने शुरू हो गए हैं कि भाजपा भी इसके जवाब में कोई इसी तरह का कदम उठा सकती है। इस बात को इसलिए भी बल मिल रहा है क्योंकि गढ़वाल मंडल के पर्वतीय जिलों और ब्राह्मण वर्ग से किसी नेता को संगठन में अहमियत देने की बात उठ रही है। गत मार्च में भाजपा नेतृत्व ने सरकार और संगठन, दोनों के मुखिया बदल दिए थे। त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए कुमाऊं मंडल से बंशीधर भगत प्रदेश अध्यक्ष थे।

गढ़वाल मंडल से कई पार्टी नेताओं के नाम की चर्चा
उस वक्त मुख्यमंत्री गढ़वाल से और राजपूत चेहरा तो प्रदेश अध्यक्ष कुमाऊं से और ब्राह्मण। अब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मदन कौशिक प्रदेश अध्यक्ष हैं। ब्राह्मण हैं और हरिद्वार से विधायक। वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले से हैं जबकि तराई में ऊधमसिंह नगर जिले की खटीमा सीट से विधायक हैं। धामी के जरिये भाजपा ने कुमाऊं मंडल के लिहाज से क्षेत्रीय व जातीय संतुलन तो बना लिया, मगर इससे गढ़वाल मंडल से एक कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया। इस कड़ी में भाजपा विधायक महेंद्र भट्ट, विनोद चमोली के साथ ही संगठन के लिहाज से अत्यंत तजुर्बेकार ज्योति गैरोला के नाम इन दिनों इंटरनेट मीडिया में खासी चर्चा में हैं।

सरकार में समान प्रतिनिधित्व हासिल होने का तर्क
हालांकि भाजपा के कई नेता इससे इत्तेफाक नहीं रखते। वैसे उनका तर्क भी वाजिब है कि सरकार में गढ़वाल मंडल को बराबर प्रतिनिधित्व हासिल है। 12 सदस्यीय धामी मंत्रिमंडल में आधे, यानी छह मंत्री गढ़वाल मंडल से हैं। इनमें से तीन अकेले पौड़ी जिले से हैं, हरक सिंह रावत, सतपाल महाराज और धन सिंह रावत। टिहरी से सुबोध उनियाल, देहरादून से गणेश जोशी और हरिद्वार से यतीश्वरानंद। कुमाऊं मंडल में ऊधमसिंह नगर जिले से मुख्यमंत्री के अलावा दो मंत्री यशपाल आर्य और अरविंद पांडेय आते हैं। इनके अलावा पिथौरागढ़ से बिशन सिंह चुफाल, अल्मोड़ा से रेखा आर्य व नैनीताल जिले से बंशीधर भगत।

शौर्य का प्रतीक मिग-21 लड़ाकू विमान पहुंचा दून

वायु सेना के शौर्य का प्रतीक मिग-21 लड़ाकू विमान अब गढ़ी कैंट के चीड़बाग में निमार्णाधीन युद्ध स्मारक (शौर्य स्थल) की शान बढ़ाएगा। रविवार को विमान यहां पहुंच गया है। जिसे विधिवत पूजा अर्चना के बाद युद्ध स्मारक पर उतारा गया।

छावनी परिषद देहरादून की मुख्य अधिशासी अधिकारी तनु जैन ने कैंट बोर्ड कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि देश के सैन्य इतिहास में देवभूमि के रणबांकुरों के शौर्य के असंख्य किस्से दर्ज हैं। उनके इस अदम्य साहस और बलिदान के प्रतीक के रूप में पूर्व राज्य सभा सदस्य तरुण विजय की पहल पर युद्ध स्मारक की नींव रखी गई थी। युद्ध स्मारक में मिग-21 रखने का प्रस्ताव करीब दो साल पहले कैंट बोर्ड की बैठक में पास हुआ था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया के विशेष प्रयास से विमान यहां पहुंच गया है।

इधर, पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं युद्ध स्मारक के अध्यक्ष तरुण विजय ने बताया कि देश के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए तैयार हो रहे शौर्य स्थल में नभ, जल और थल तीनों सेनाओं की निशानियां रखी जानी हैं। मिग-21 दून पहुंच गया है। युद्ध स्मारक की शान बढ़ाने के लिए चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) विपिन रावत की ओर से दो राइफल पहले ही दी जा चुकी हैं। इसके अलावा नौ सेना के साहस के प्रतीक के रूप में एक जहाज की सिफारिश भी रक्षा मंत्रालय से की गई है।

भारत में मिग 21 लड़ाकू विमान का इस्तेमाल 1964 से शुरू हुआ है। ये इकलौता ऐसा विमान है जिसका इस्तेमाल दुनियाभर के करीब 60 देशों ने किया है। मिग 21 एविएशन के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक संख्या में बनाया गया सुपरसोनिक फाइटर जेट है। पाकिस्तान के साथ हुए 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में भी मिग 21 ने मुख्य भूमिका निभाई थी। मिग 21 लड़ाकू विमान की रफ्तार 2229 किमी प्रति घंटा की है। इसमें टर्बोजेट इंजन लगा हुआ है, जो विमान को सुपरसोनिक रफ्तार देता है।

नाबालिग से दुष्कर्म का इनामी आरोपित गिरफ्तार

एसओजी व पटेलनगर कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने मुंबई जाकर नाबालिग से दुष्कर्म के इनामी आरोपित को गिरफ्तार किया है। आरोपित 2017 में जेल से जमानत पर छूटने के बाद फरार हो गया था और पुलिस से बचने के लिए नाम बदलकर पंजाब व महाराष्ट्र में रह रहा था। रविवार को पत्रकारों से वार्ता में एसएसपी डा. योगेंद्र सिंह रावत ने बताया कि पटेलनगर कोतवाली में दर्ज एक दुष्कर्म के मामले में आरोपित मुनाजिर निवासी ग्राम बलवा महलगांव अररिया बिहार 2017 से जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद फरार चल रहा था।

न्यायालय में पेश न होने के कारण अदालत ने इसी वर्ष आरोपित को भगोड़ा घोषित किया था। आइजी गढ़वाल ने 2020 में आरोपित पर पांच हजार रुपये इनाम घोषित किया। आरोपित की तलाश में पुलिस ने उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन वह हर बार पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाता था। पुलिस को सूचना मिली कि मुनाजिर ठाणे (मुंबई) में है। 27 जुलाई को एसओजी की एक टीम को मुंबई भेजा गया तो पता लगा कि आरोपित अंजार नाम से पठानवाड़ी में रहकर मजदूरी कर रहा है। 29 जुलाई को पुलिस ने ठाणे में आरोपित को दहिसर चेक नाका, होटल सागर के सामने से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित को पुलिस दो दिन का ट्रांजिट रिमांड लेकर शनिवार रात को देहरादून पहुंची।

एसएसपी ने बताया कि वर्ष 2015 में मुनाजिर बंजारावाला से 12 साल की बच्ची को बहला-फुसलाकर बिहार ले गया। वहां आरोपित ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। कुछ दिन बाद पुलिस ने बच्ची को पानीपत हरियाणा से बरामद करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

सीएम के जीरो पेंडेसी और सुशासन पर सख्त ध्यान देने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय से लेकर जिलों के नौकरशाहों को जीरो पेंडेसी और सुशासन पर सख्त ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। कहा कि जिलास्तर के कार्यों का हल मौके पर ही निकाला जाए। रविवार को मुख्यमंत्री धामी ने ट्वीट करते हुए अफसरों को जीरो पेंडेसी को गंभीरता से लेने की हिदायत दी। कहा कि अफसर एक कार्य योजना तहत ऐसे कार्यों को लें और नियत समय के भीतर उनका निराकरण करें। उन्होंने साफ हिदायत दी है कि जिलों के कार्य अनावश्यक रूप से शासन को नहीं भेजे जाएं और मौके पर इन्हें हल करें।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जिलास्तर से छोटे-मोटे काम शासन को भेजे जाने से जहां ऐसे कार्यों के निस्तारण में वक्त लग जाता है, वहीं संबंधित लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। उनके सामने भविष्य में यदि ऐसा कोई मामला आता है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। कहा कि वे प्रदेश के हर क्षेत्र की समस्याओं से वाकिफ हैं उनका इरादा हर उत्तराखंडी के चेहरे पर मुस्कान लाना है। इसके लिए अफसर सुशासन पर जोर दें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड के प्रति भावनात्मक लगाव है। राज्य की समस्याओं से वे भी पूरी तरह से वाकिफ हैं और इनके हल और राज्य के विकास के लिए उनका लगातार मार्गदर्शन भी मिल रहा है। आल वेदर रोड, भारत माला, ऋषिकेश से कर्णप्रयाग से ट्रेन, चारधाम को ट्रेन से जोड़ने आदि महत्वकांक्षी योजनाएं इसके उदाहरण हैं।

प्रत्येक कार्य दिवस पर जनसमस्याएं सुनें
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि जिन योजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा, उनके लोकापर्ण की भी व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने अफसरों को प्रत्येक कार्य दिवस पर सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक जनता की समस्याएं सुनने के निर्देश दिए हैं।

देश में लगातार पांचवें दिन कोरोना के 40 हजार मामले

देश में रविवार को रात ग्यारह बजे तक कोरोना विषाणु संक्रमण के 40,715 मामले सामने आए जबकि 419 लोगों की संक्रमण की वजह से मौत हुई। देश में लगातार पांचवें दिन 40 हजार से अधिक कोरोना के मामले सामने आए। ये आंकड़े राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों की ओर से जारी किए गए।
वहीं, केरल में भी लगातार पांचवें दिन 20 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए। पांच राज्यों में एक हजार से अधिक और सात हजार से कम मामले सामने आए जबकि 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सौ से कम मामले दर्ज किए गए। देश में सबसे अधिक कोरोना संक्रमण के मामले केरल में दर्ज किए गए। केरल स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक राज्य में कोरोना के 20,728 मामले सामने आए जबकि 56 लोगों की मौत हुई। केरल में 27 जुलाई को 22,129, 28 जुलाई को 22,056, 29 जुलाई को 22,064, 30 जुलाई को 20,772 और 31 जुलाई को 20,624 मामले दर्ज किए गए थे।
रविवार को महाराष्ट्र में 6,479, आंध्र प्रदेश में 2,287, तमिलनाडु में 1,990, कर्नाटक में 1,875, ओड़ीशा में 1,437, मिजोरम में 861, मणिपुर में 832, असम में 754, पश्चिम बंगाल में 701, मेघालय में 589, तेलंगाना में 455, अरुणाचल प्रदेश में 266, त्रिपुरा में 222, छत्तीसगढ़ में 214, सिक्किम में 206, जम्मू कश्मीर में 145, हिमाचल प्रदेश में 134, पुदुचेरी में 90, दिल्ली में 85, नगालैंड में 73, गोवा में 59, बिहार में 45, उत्तर प्रदेश में 36, झारखंड में 32, हरियाणा में 29, पंजाब में 26, गुजरात में 23, उत्तराखंड में 22, मध्य प्रदेश में 17, राजस्थान में 10 मामले आए। लद्दाख में 10, लक्षद्वीप में छह, अंडमान निकोबार में दो और चंडीगढ़ में एक मामला दर्ज किया गया।

उत्तराखण्ड में 16472 लाभार्थियों को दिये गए आवास स्वीकृति पत्र-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण के अंतर्गत चिन्हित लाभार्थियों को आवास स्वीकृति पत्र सौंपे। सीएम कैम्प कार्यालय परिसर स्थित जनता दर्शन हॉल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के लाभार्थियों को प्रथम किश्त की राशि डीबीटी द्वारा ऑनलाईन जारी की। उन्होंने कार्यक्रम में सौ से अधिक लोगों को आवास स्वीकृति पत्र वितरित किए।

साझेदार के तौर पर काम कर रही है सरकार
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में प्रदेश के लाभार्थियों को आवास बन जाने के बाद सामान आदि के लिए पांच-पांच हजार रूपए दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सबका साथ- सबका विकास- सबका विश्वास के ध्येय वाक्य के साथ सरकार नहीं बल्कि साझेदार के तौर पर काम कर रही है।

प्रधानमंत्री जी ने योजनाओं का लाभ गरीबों तक पहुंचाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की योजनाएं समाज में अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को सीधे लाभ पहुंचा रही है। पहले योजनाएं बनती थीं पर उसका लाभ पात्र लोगों तक नहीं पहुंचता था। परंतु प्रधानमंत्री जी ने दूरदर्शिता के साथ पहले सभी के जनधन योजना में खाते खुलवाए और अब उन खातों में डीबीटी द्वारा योजना की राशि सीधे लाभार्थी को दी जा रही है। स्वच्छ भारत मिशन, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि आदि योजनाओं से करोड़ों भारतीयों को लाभ मिला है।

केंद्र के सहयोग से उत्तराखण्ड में विकास को मिल रही गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का उत्तराखण्ड से विशेष लगाव है। केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य में अनेक महत्वपूर्ण विकासपरक योजनाएं चल रही हैं। सड़कों के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। जल्द ही देहरादून से दिल्ली केवल दो घंटे में जा पाएंगे। चार धाम परियोजना, भारतमाला परियोजना से विकास को नई गति मिल रही है। रेलवे का काफी विस्तार हुआ है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल पर तेजी से काम हो रहा है। टनकपुर-बागेश्वर का सर्वे ब्राडगैज पर करने का केन्द्र से अनुरोध किया है।

जलजीवन मिशन से मिलेगा सभी को स्वच्छ पेयजल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जलजीवन मिशन बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है। इसमें हर घर को नल से जल पहुंचाने पर काम कर रहे हैं। राज्य में केवल एक रूपए में गामीण घरों में पानी का कनेक्शन दे रहे हैं। स्वच्छ जल हर व्यक्ति को मिलना ही चाहिए और सरकार उसी दिशा में काम कर रही है।

अटल आयुष्मान योजना को और अधिक व्यावहारिक बनाया जाएगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रारम्भ की गई आयुष्मान योजना विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है। उत्तराखण्ड में इसमें प्रत्येक व्यक्ति को आच्छादित किया गया है। योजना को अधिक व्यावहारिक तरीके से लागू करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं ताकि हर गरीब इसका लाभ आसानी से उठा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2027 तक उत्तराखण्ड को विश्व प्रसिद्ध पर्यटन प्रदेश बनाने पर काम कर रहे हैं। राज्य सरकार कोविड से प्रभावित लोगों को राहत दे रही है। चारधाम यात्रा और पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए लगभग 200 करोड़ का पैकेज दे रहे हैं। इसी प्रकार हेल्थ सेक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए 205 करोड़ का पैकेज दिया जा रहा है। राज्य में 24 हजार सरकारी रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया आरम्भ की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के दृष्टिगत बेरोजगार युवाओं को भर्ती में एक साल की आयुसीमा में छूट प्रदान की गई है। जबकि एनडीए, सीडीएस, लोकसेवा आयोग की प्रारम्भिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले युवाओं को मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिये 50 हजार की धनराशि दी जायेगी। अगले चार माह में कोविड का पूर्ण वैक्सीनेशन का लक्ष्य लिया गया है।
कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण के लाभार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि लाभार्थियों का चयन पूरी पारदर्शिता से किया गया है। सहायता राशि डीबीटी द्वारा लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को लगातार मॉनिटरिंग करने और योजना का लाभ अन्य पात्र लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं, महिलाओं, गरीबों और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए काम कर रही हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद को मिले।

प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण फेज 2
अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का शुभारम्भ वर्ष 2016 में किया गया। जिसका उद्देश्य सभी बेघर, कच्चे तथा जीर्ण-शीर्ण मकानों में रह रहे परिवारों को बुनियादी सुविधायुक्त पक्का आवास उपलब्ध कराया जाना है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के द्वित्तीय फेज में एस.ई.सी.सी- 2011 सर्वे में आवास की पात्रता सूची में सम्मिलित होने से छूटे हुए कुल 94286 परिवारों को आवास प्लस के माध्यम से चिन्हित किया गया है। जिसमें से 29142 अपात्र परिवारों को हटाने के पश्चात् वर्तमान में राज्य में कुल 65144 परिवार पीएमएवाई-जी हेतु पात्र पाए गए है। जिसमे कुल 2865 परिवार भूमिहीन (देहरादून 102, हरिद्वार 42, नैनीताल 68, पिथौरागढ़-3, ऊधमसिंह नगर-2662) है।
भारत सरकार द्वारा द्वितीय फेज में आवास प्लस सूची से वित्तीय वर्ष 2020-2021 हेतु 13399 लक्ष्य तथा वित्तीय वर्ष 2021-2022 हेतु 3073 लक्ष्य सहित कुल 16472 आवास निर्माण का लक्ष्य राज्य को आवंटित किया गया है। जिसमें कुल 2865 परिवार भूमिहीन (देहरादून 102, हरिद्वार 42, नैनीताल 68 पिथौरागढ़ 3, ऊधमसिंह नगर 2662) है।
उपरोक्त प्राप्त 16472 आवास के लक्ष्यों की पूर्ति हेतु राज्य को रूपये 226.99 करोड धनराशि की आवश्यकता होगी। जिसके सापेक्ष भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 के लक्ष्य 13399 के लिए प्रथम किश्त रू0 60,000ध्- की दर से केन्द्राश कुल रू0 35.39 करोड़ तथा राज्यांश कुल रू०. 3.93 करोड़ सहित कुल रू0 39.32 करोड अवमुक्त किए गए है। वर्तमान में राज्य स्तर पर विगत अवशेष रू. 47.74 करोड़ एवं उक्त अवमुक्त रू. 39.32 करोड़ सहित कुल रु. 87.06 करोड़ की धनराशि उपलब्ध है। जिसे लाभार्थियों के खाते में आन-लाईन अवमुक्त किया जा रहा है। द्वित्तीय किश्त की धनराशि लाभार्थियों के खाते में शीघ्र प्रेषित की जायेगी।

प्रति आवास 1 लाख 30 हजार की अनुदान राशि
अपर सचिव एवं आयुक्त ग्राम्य विकास वंदना ने बताया कि पीएमवाई-जी के तहत नये आवासों के निर्माण हेतु प्रति आवास अनुदान राशि 130,000.00 अनुमन्य है। जिसका भुगतान तीन किश्तों में यथा प्रथम किश्त रु 60,000, द्वित्तीय किश्त रु 40,000 एवं तृतीय किश्त रु 30,000 को ऑन-लाईन सीधे पात्र लाभार्थी के बैंक खाते में किया जाता है। इसके अतिरिक्त मनरेगा से लाभार्थी स्वयं के आवास निर्माण में 95 दिवस की मजदूरी प्रति दिवस रू. 204 की दर से कुल रू0 19.380ध्- प्राप्त कर सकता है तथा मनरेगा ध् स्वजल से शौचालय निर्माण हेतु रू. 12,000ध्- प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही लाभार्थी पेयजल सुविधा, उज्जवल गैस कनेक्शन विद्युत कनेक्शन की सुविधा भी प्राप्त कर सकता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण प्रथम फेज
प्रथम फेज की जानकारी देते हुए बताया कि एसईसीसी सर्वे 2011 में पात्र पाये गये 12662 परिवारों को आवास आंवटित किया गया है, जिसमें से 12425 आवासों को पूर्ण कराते हुए कुल रु. 169.87 करोड़ की धनराशि का व्यय किया गया है। प्रथम फेज के सभी 539 भूमिहीन परिवारों को भूमि पट्टा एवं आवास आवंटित किया जा चुका है। प्रथम फेज में कन्वर्जेन्स के माध्यम से लाभार्थी परिवार को स्वयं के आवास निर्माण में अकुशल मजदूरी हेतु मनरेगा से 95 मानव दिवस हेतु कुल 865811 मानय दिवस सृजित करते हुए कुल रु. 1510.68 लाख का व्यय किया गया है। इसके साथ ही मनरेगा ध् स्वजल से 12425 शौचालयों का निर्माण हेतु रु. 12,000ध्- की दर से कुल रु. 14.91 करोड़ का व्यय किया गया है। इसके अतिरिक्त कन्वर्जेन्स के तहत कुल 3920 परिवारों को उज्जवला गैस कनेक्शन की सुविधा प्रदान की गयी है। कुल 8113 लाभार्थियों को पेयजल सुविधा उपलब्ध करायी गयी तथा कुल 7733 लाभार्थियों को विद्युत कनेक्शन की सुविधा प्रदान की गयी है।