एम्स में प्रेशर इंजरी एविडेंस बेस्ड नर्सिंग एप्रोच विषय पर हुई कार्यशाला आयोजित

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में डिपार्टमेंट ऑफ नर्सिंग सर्विसेस की ओर से प्रेशर इंजरी एविडेंस बेस्ड नर्सिंग एप्रोच विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेशर इंजरी की तत्काल पहचान, बचाव व उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि प्रेशर इंजरी मैनेजमेंट को अंतरराष्ट्रीय स्तर की दक्षता लाने के लिए एम्स ऋषिकेश प्रयासरत है, इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मानक के तहत संस्थान में नर्सिंग ऑफिसर तैयार किए जा रहे हैं। एम्स ऋषिकेश से दक्ष नर्सेस निकट भविष्य में देश ही नहीं दुनियाभर में मरीजों को बेहतर नर्सिंग सेवाएं देंगे।
संस्थान में शुक्रवार को आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता, डीएचए प्रो. यूबी मिश्रा व फोरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. वीके बस्तिया ने संयुक्तरूप से शुभारंभ किया।
डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने कहा कि हॉस्पिटल में प्रेशर इंजरी मैनेजमेंट व ट्रीटमेंट में नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिसे संबंधित पेशे से जुड़े लोगों को ठीक से समझने की आवश्यकता है, वह तभी अस्पताल में आने वाले मरीजों की बेहतर चिकित्सा में मददगार साबित हो सकते हैं।
प्रो. यूबी मिश्रा ने प्रेशर इंजरी के इतिहास पर प्रकाश डाला, जिसमें उन्होंने इस दिशा में लगातार आ रहे बदलावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इस कार्य में फ्लोरेंस नाईटेंगल के योगदान को भी याद किया।

इस अवसर पर संस्थान के पीएमआर विभाग की प्रोफेसर डा. राजलक्ष्मी अय्यर ने प्रेशर इंजरी ओवरव्यू के बारे में जानकारी दी। डिपार्टमेंट ऑफ बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी की डा. मधुबरी वाथुल्या ने प्रेशर इंजरी की ग्रेड क्लासिफिकेशन के बारे में बताया।

एएनएस कमलेश व वंदना ने एविडेंस बेस्ड नर्सिंग मैनेजमेंट के बाबत जानकारी दी। इस अवसर पर डा. अनुभा अग्रवाल, डा. प्रदीप अग्रवाल, डा. मनीष शर्मा, एएनएस पुष्पा, कल्पना, जितेंद्र, ज्योतिष, नर्सिंग ऑफिसर अज्जो उन्नीकृष्णन, पंकज पुनजोत आदि मौजूद थे।

धनवीर सिंह भंडारी का मिली व्हीलचेयर क्रिकेट में उपकप्तान की कमान

टिहरी जनपद के धनवीर सिंह भंडारी महाराष्ट्र में होने वाले व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के त्रिकोणीय सीरीज में उत्तराखंड वॉरियर्स व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के उप कप्तान होंगे।

यह सीरीज DCCBI(Divyang cricket control board of India) द्वारा 3 दिसंबर को दिव्यांग दिवस के अवसर पर आयोजित की जानी थी परंतु कोविड-19 के चलते यह सीरीज अब 26 से 28 जनवरी के बीच महाराष्ट्र में उत्तराखंड, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बीच खेली जाएगी। इस सिरीज के लिए उत्तराखंड की टीम काफी उत्साहित है क्योंकि उन्हें पूरे एक वर्ष से अधिक समय के बाद कोई भी सीरीज खेलने का मौका मिल रहा है इससे पहले उन्होंने अक्टूबर 2019 में अपना अंतिम मैच ग्वालियर के रूप सिंह स्टेडियम में दिल्ली के खिलाफ खेला था जिसमें की उत्तराखंड की टीम विजय रही थी।

वह अपने इस विजय अभियान को आगे भी बढ़ाना चाहेगी इसी लिए वह 23 जनवरी से अपने 15 सदस्यों वाली टीम के साथ अपना सफर शुरू करेगी। इन 15 सदस्यों वाली टीम में ऋषिकेश से 2 खिलाड़ियों का चयन हुआ है यह दोनों खिलाड़ि अलग-अलग सड़क हादसों के कारण दिव्यांग हो गए थे इनमें से धनवीर सिंह भंडारी जो कि इस टीम के वाइस कैप्टन हैं उनका 2009 में एक सड़क हादसे के कारण स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हो गई थी और वही दूसरे खिलाड़ी हैं मनु सिंह वह भी 2016 में एक सड़क हादसे के कारण अपना एक पैर गवा चुके हैं जो कि वर्तमान में उत्तराखंड व्हीलचेयर क्रिकेट की टीम के साथ रुद्रपुर मैं एक जुट होकर तैयारी कर रहे हैं।

देवडोली कार्यक्रम को लेकर पर्यटन मंत्री से मिला देवभूमि शोभायात्रा समिति का दल

कुम्भ महापर्व 2021 में देवडोली शोभायात्रा की व्यवस्था हेतु मोहन सिंह रावत गॉंववासी के नेतृत्व में देवभूमि लोक संस्कृति विरासतिय शोभायात्रा समिति का एक प्रतिनिधि मंडल ने संस्कृति एवं पर्यटन सतपाल महाराज से भेंट की। बैठक में पर्यटन सचिव दलीप जावलकर, संस्कृति विभाग से महानिदेशक आनंद स्वरूप, निदेशक वीना भट्ट उपस्थित थे।

मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि देवडोली के कार्यक्रम में कोरोना नियमों तथा सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुये कार्यक्रम को ऐतिहासिक व अविस्मरणीय बनाया जायेगा।
प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि कुम्भ महापर्व में उत्तराखंड सहित भारत के सुदूर क्षेत्रो हिमाचल, असम, मुम्बई आदि स्थानों से देवडोलियाँ स्नानार्थ हरिद्वार पधारती हैं, जिसकी व्यवस्था शासन-प्रशासन द्वारा के जाती रही है।

कार्यक्रमानुसार 2021 के कुम्भ महापर्व में 24 अप्रैल को देवडोलियाँ पूर्वाह्न 11 बजे तक ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर एकत्र होकर 2 बजे अपराह्न नगर का भव्य परिभ्रमण करने के पश्चात रात्रि विश्राम हेतु हरिद्वार पहुंचेगी। 25 अप्रैल को हर की पैड़ी तक समस्त डोलियां समूह में दक्ष प्रजापति कनखल से शोभायात्रा के साथ ब्रह्मकुंड में स्नानोपरांत पंतदीप में पंडाल में एकत्र होकर श्रद्धलुओं, सन्त-महात्माओं व शासन द्वारा देवी-देवताओं का पूजन-अर्चना किया जायेगा। तदुपरान्त वे अपने गंतव्य दिशा में प्रस्थान करेगे।

समिति ने जानकारी दी कि उक्त कार्यक्रम में 100 से 150 देव डोलियां, ध्वज तथा उनके साथ पर्वतीय क्षेत्र के पारंपरिक वाद्य यंत्र, ढोल, दमाऊ, रणसिंहा आदि रहेंगे जिनके संख्या 5000 के लगभग होगी।

सामिति ने उक्त कार्यकम हेतु प्रशासनिक एवं अन्य व्यवस्थाये के अपेक्षा शासन से की। जिसमे ऋषिकेश में उचित स्थान पर पांडालादि के सम्पूर्ण व्यवस्थायें जिसमे एक सभा व प्रवचन हाल, चार कक्ष, भोजनालय, जल व शौचालय आदि की व्यवस्था।

हरिद्वार में 24 अप्रैल को 500 व्यक्तियों की भोजन व आवास आदि की व्यवस्था। 24 अप्रैल को ऋषिकेश व 25 अप्रैल को हरिद्वार में शोभायात्रा की सुरक्षा पंतदीप में देवडोली की पूजन सम्मानदि के पश्चात प्रसाद वितरण । पूर्व वर्षों की भांति उत्तराखंड संस्कृति विभाग की और से स्मृति चिन्ह भेंट। तथा पर्यटन विभाग द्वारा 13 जिलों में देवडोलियों के स्वागत के होल्डिंग व बैनर लगवाये जाए।

प्रतिनिधि मंडल में डॉ. धीरेन्द्र रांगड़, गजेंद्र सिंह कंडियाल, ज्योति सजवाण, आशाराम व्यास, शिवप्रसाद चमोली, हर्षमणी व्यास, यतेंद्र कंडियाल आदि थे।

जनता दरबार में शिकायतकर्ता के साथ सद्भावपूर्ण व्यवहार पर रखा जाए फोकसः मेयर अनिता

नगर निगम का आज वार्ड संख्या दो, तीन और चार में जनता दरबार कार्यक्रम आयोजित किया गया। निगम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में लोगों की समस्याओं को सुनकर निस्तारण किया गया। वहीं, फरियादियों ने जनता दरबार के लिए मेयर अनिता की सराहना की।

मेयर अनिता ममगाईं ने बताया कि सभी वार्डो में जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण को लेकर जनता दरबार कार्यक्रम का आयोजन शुरू किया गया है। जिससे जनसमस्याओं के निदान के लिए जरूरी कदम उठाये जा सके। जनता दरबार में क्षेत्र के सामाजिक लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित कराई जा रही है। उन्होंने बताया जनता दरबार में नगर निगम क्षेत्र में हो रही हर तरह की समस्या के साथ-साथ सरकार की योजनाओं के बारे में भी बताया जा रहा है। कैंप लगाकर विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन और सरकार की अन्य योजनाओं को आम लाभ लोगों तक पहुंचाने का काम भी किया जाएगा।

मेयर अनिता ने बताया कि जनता दरबार में दर्जनों शिकायतें आईं। जिसमें टैक्स, सीवरेज, बिजली की समस्या अधिक रही। इस दौरान पार्षद रूपा देवी, पार्षद वार्ड प्रियंका यादव, शकुंतला शर्मा, एसएनए एलम दास, सतीश चंद्र जोशी (तहसील), विजय डोभाल (पूर्ति निरीक्षक खाद्य एवं आपूर्ति विभाग), वीरेंद्र सिंह राणा (अवर अभियंता जल संस्थान), सूरज पिंडेल (अधिशासी अभियंता जल संस्थान), अशोक सिंह (सीवरेज जल संस्थान), ब्रह्मपाल सिंह (जेई बिजली विभाग) एसआई उत्तम रमोला, निशांत अंसारी (टैक्स निरीक्षक), जेई तरुण लखेड़ा, दीपक सेमवाल, सुंदर पवार, सुजीत यादव, किशन मण्डल, चंद्रेश्वर यादव आदि उपस्थित रहे।

कैबिनेट फैसले में एससी-एसटी और ओबीसी छात्र-छात्राओं को मिली बड़ी राहत

देहरादून। उत्तराखंड समाज कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा नौ तक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के 42 हजार से अधिक छात्रों को पिछले वर्षों से अटकी छात्रवृत्ति मिल सकेगी। प्रदेश मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को यह फैसला लिया।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में समाज कल्याण विभाग के इस प्रस्ताव के तहत राज्य के बजट से आठ करोड़ 15 लाख 34 हजार रुपये जारी करने का निर्णय लिया गया। अब राज्य सरकार अपने बजट से इन छात्रों की छात्रवृत्ति देगी। अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के करीब वर्ष 2017-18 व 2018-19 के 22 हजार 492 छात्रों के लिए तीन करोड़ 79 लाख 19 हजार रुपये की धनराशि के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। जबकि ओबीसी के वर्ष 2018-19 के छह हजार और वर्ष 2019-20 के 14 हजार 142 छात्रों के लिए चार करोड़ 36 लाख 15 हजार रुपये मंजूर किए गए।

कैबिनेट ने कोविडकाल में छात्रवृत्ति के आवेदनों में 100 प्रतिशत भौतिक सत्यापन न होने के कारण जिलाधिकारी को अधिकार दिया कि वह रैंडम आधार पर 10 प्रतिशत सूची का सत्यापन करेंगे। साथ ही विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऑनलाइन फार्म भरने में यदि कोई गलती छूट जाती है तो आवेदन रद न किया जाए, बल्कि गलती सुधारने का अवसर दिया जाए।

शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि बैठक में कुल 16 प्रस्ताव आए, जिनमें से 15 पर निर्णय हुआ, जबकि एक प्रस्ताव स्थगित हुआ। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश राज्य के लिए आवंटित ऐसे कर्मचारी जो लंबे समय से उत्तराखंड में कार्यरत हैं, उन्हें यह लिखकर देना होगा कि वे उत्तराखंड कैडर में रहना चाहते हैं, लेकिन वरिष्ठता सूची में उन्हें उत्तराखंड मूल संवर्ग के कर्मचारियों से नीचे रहना होगा। ऐसा करने पर उनके वेतन या भत्तों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने दिया जाएगा।

निकाय में घर होने पर भी जिपं अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख सदस्यता नहीं जाएगी

परिसीमन के कारण जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के अध्यक्षों, ब्लाक प्रमुखों, व सदस्यों के घर यदि शहरी निकाय में आए हैं तो उनकी सदस्यता समाप्त नहीं होगी। प्रदेश मंत्रिमंडल ने पंचायती राज अधिनियम के तहत संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कौशिक के मुताबिक, जब वे चुने गए थे, तब वे उनके घर ग्रामीण क्षेत्र में थे।

कुंभ के कार्य को कई हिस्सों में बांटने का अधिकार

कैबिनेट ने आयुक्त और मेलाधिकारी को कुंभ गतिमान और अस्थाई कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए उनके अधिकारों में बढ़ोतरी की है। वे एक कार्य को कई हिस्सों में बांट सकेंगे। उन्हें एक सप्ताह के भीतर टेंडर करने होंगे। स्वीकृत गतिमान कार्यों में आवश्यकता होने पर वे 50 प्रतिशत खर्च की सीमा स्वयं बढ़ा सकेंगे। राज्य सरकार ने आयुक्त को पांच करोड़ और मेलाधिकारी को दो करोड़ के काम कराने का अधिकार पहले ही दे रखा है।

यूपी की दो कार्यदायी संस्थाएं बाहर, आरईएस को 10 करोड़ के काम

कैबिनेट ने अपनी कार्यदायी संस्था की सूची से यूपी राजकीय निर्माण निगम और यूपी समाज कल्याण निर्माण निगम को बाहर कर दिया है। राज्य की सूची में 21 कार्यदायी संस्थाएं हैं। साथ ही कैबिनेट ने ग्रामीण अभियंत्रण विभाग(आरईएस) को अब पांच करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ तक के कार्य करने का अधिकार दे दिया है। आरईएस शहरी निकाय व प्राधिकरण के कार्यों में सैंटेज नहीं लेगा।

अशासकीय स्कूलों और कॉलेजों के संस्कृत शिक्षकों का मानदेय बढ़ेगा

प्रदेश के अशासकीय स्कूल और कॉलेजों के संस्कृत के शिक्षकों का मानदेय बढ़ेगा। बृहस्पतिवार को कैबिनेट की बैठक में इसके प्रस्ताव को पास किया गया। कहा गया कि संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

प्रदेश में अशासकीय स्कूलों में पढ़ा रहे संस्कृत के शिक्षकों को अब तक दस हजार रुपये मानदेय मिलता था, लेकिन अब पांच साल से बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को 15 हजार रुपये मानदेय मिलेगा।

जबकि पांच से दस साल से पढ़ा रहे शिक्षकों को 25 हजार रुपये एवं दस साल से अधिक समय से पढ़ा रहे शिक्षकों को 30 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। इसके अलावा जो शिक्षक यूजीसी के मानक के अनुसार पीएचडी और एमफिल करने वाले हैं उन्हें पांच हजार रुपये हर महीने अतिरिक्त मानदेय दिया जाएगा।

ये फैसले भी हुए
– हरिद्वार में ध्यानकुंज के समीप साधु संतों की भू समाधि के लिए सिंचाई विभाग की 4.384 हैक्टेयर भूमि दी जाएगी ।
– अल्मोड़ा में चैबटिया में दिगौत में केंद्रीय विद्यालय बनेगा। सिंचाई खंड की भूमि 0.206 हैक्टेयर भूमि निशुल्क आबंटित होगी।
– पर्यटन विकास परिषद में तकनीकी कर्मचारियों की छह पदों की मंजूरी।
– राज्य औषधि नियंत्रक सेवा नियमावली को मंजूरी।
– कोविड में ली गई 140 एंबुलेंस का संचालन मैसर्स कैंप संस्था करेगी। कुंभ में काम आएंगी ये एंबुलेंस। 132 एंबुलेंस पहुंची।

ई-ऑफिस बनने के बाद से 4621 पत्रावलियों का हुआ निस्तारण


मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा भी ई-ऑफिस प्रणाली से पत्रावलियों का निस्तारण प्रारम्भ कर दिया है। सचिवालय में मुख्यमंत्री ने 4 पत्रावलियों का निस्तारण ई-ऑफिस के तहत किया गया। इनमें मुख्यमंत्री घोषणा के तहत देहरादून में स्थापित होने वाले शहीद स्मारक, खेरासेंण में सामुदायिक बारात घर की स्थापना, त्यूणी में फायर यूनिट की स्थापना तथा स्वास्थ्य विभाग की चिकित्सकों से सम्बन्धित पत्रावली सम्मिलित रही। प्रदेश में 21 जनवरी 2020 को ई-ऑफिस प्रणाली का शुभारम्भ हुआ था। इस एक वर्ष की अवधि में 4621 पत्रावलियों का निस्तारण इस प्रक्रिया के तहत किया गया है। अकेले गुरूवार का ही 26 पत्रावलियों का निस्तारण किया गया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि ई-आफिस प्रणाली से कार्य संचालन में से सचिवालय के कार्यों में उत्तरदायी, प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित होगी। इससे फाइल निस्तारण के कार्य में तेजी आयेगी और कार्य प्रबंधन में सुधार आयेगा। इससे उच्च स्तर पर प्रभावी समीक्षा भी की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि इससे महत्वपूर्ण विषयों के ऑनलाईन होने से कार्यों में शीघ्रता व पारदर्शिता आयेगी।

मुख्यमंत्री ने सड़कों के निर्माण कार्य को दी 5 करोड़ रूपए की स्वीकृति

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की घोषणा के अन्तर्गत पूर्व विधायक स्व. राजेंद्र शाह की आदमकद प्रतिमा के लिए 11.96 लाख की स्वीकृति दी गई है। इस धनराशि को एकमुश्त जारी करने की भी मुख्यमंत्री ने सहमति दी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोक निर्माण, शिक्षा, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, पर्यटन और धर्म संस्कृति समेत कुछ अन्य विभागों से संबंधित विकास कार्यों की स्वीकृति दी है। लोक निर्माण के तहत विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण के लिए करीब 5 करोड़ की स्वीकृति जारी की है।

राज्य योजना के तहत जनपद उत्तरकाशी के विधानसभा क्षेत्र यमुनोत्री के विकासखंड चिन्यालीसौड़ के अंतर्गत मरगांव-जसपुर-चमियारी से उलण मोटर मार्ग के नवनिर्माण के लिए 3.30 करोड़ की स्वीकृति दी है। चालू वित्त वर्ष में इस मोटर मार्ग के लिए 10 हजार की स्वीकृति प्रदान की है। इससे इस मोटर मार्ग का निर्माण सुनिश्चित हो गया है। इस विधानसभा क्षेत्र में इस योजना समेत कुल 41.14 करोड़ की स्वीकृतियां जारी कर दी हैं।

हरिद्वार के खानपुर में दो खड़जा मार्ग के निर्माण कार्य के लिए 55.19 लाख की स्वीकृति जारी की गई है। ऊधमसिंहनगर के रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के बुक्सौरा में आनंद सिंह के घर से फाल सिंह के घर तक मार्ग निर्माण के लिए 21.68 लाख की मंजूरी दी है। रुद्रपुर में ही एनएच-74 से प्रेमनगर अलखदेवी मार्ग के चैड़ीकरण का कार्य भी मंजूर कर दिया है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने 5.29 लाख की स्वीकृति दी है। गदरपुर दिनेशपुर मदकोटा मोटर मार्ग के 04 किलोमीटर से श्यामनगर तक मार्ग का सुदृढ़ीकरण और निर्माण कार्य के लिए 1.73 करोड़ की स्वीकृति दी है।
पर्यटन विभाग के तहत नैनीताल जिले में भीमताल में करकोटक की चोटी का पर्यटन की दृष्टि से विकास और सौंदर्यीकरण के लिए मुख्यमंत्री ने 94.92 लाख की मंजूरी दी है। इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष में 50 लाख की धनराशि अवमुक्त करने के भी आदेश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कुल 951 अनाच्छित बस्तियों में रह रहे बच्चों को केंद्र सरकार से अनुमन्य दरों पर परिवहन सुविधा मुहैया कराने की भी मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दी है। केंद्र सरकार से इसके लिए कुल 2743 बच्चों को 6 हजार रुपए प्रति बच्चा प्रति वर्ष की दर से कुल 164.58 लाख रुपए अनुमोदित किया गया है।

टिहरी जिले के राजकीय इंटर कालेज ठेला, नैलचामी मे 4 कक्षा कक्षों के निर्माण को भी मुख्यमंत्री ने सहमति दी है। कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग ने इसके लिए 45 लाख का इस्टीमेट भेजा था। इसमें से 40 फीसदी राशि 18 लाख जारी करने पर स्वीकृति दी गई है। टिहरी के ही थौलधार विकासखंड के राजकीय इंटर कालेज बगियाल में दो कक्ष-कक्षों केनिर्माण के लिए 42.28 लाख की मंजूरी दी गई है। मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में ही क्यारी स्थित राजकीय इंटर कालेज में दो कक्षा कक्षों की मंजूरी के लिए भी 42.28 लाख की सहमति दी है।

डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत राजकीय इंटर कालेज इठारना का जीर्ण शीर्ण भवन ध्वस्त कर नया भवन बनाया जाएगा। इसके लिए 4.53 करोड की मुख्यमंत्री ने सहमति दी है। पहली किश्त के रूप में 40 फीसदी यानि 1.81 करोड़ की राशि जारी करने की स्वीकृति दी है। देहरादून के राजकीय प्राथमिक विद्यालय डोभालवाला की मरम्मत कार्य के लिए 8.99 लाख की स्वीकृति दी है। पहली किश्त 3.60 लाख अवमुक्त करने की सहमति दी है।

युवा कल्याण व पीआरडी विभाग के तहत विधानसभा क्षेत्र ज्वालापुर के ग्राम नौकराग्रांट बुग्गावाला में मिनी स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा।इसके लिए मुख्यमंत्री ने 96.85 लाख के सापेक्ष 40 फीसदी धनराशि यानि 38.74 लाख की वित्तीय स्वीकृति दी है।

मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग के तहत तहसील लक्सर मे अंबेडकर वृद्ध आश्रम विष्णु विहार कालोनी गोरधनपुर रोड के लिए घोषणा मद से 10 लाख की अनुदान सहायता स्वीकृत की है। अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास योजना के तहत 61 निर्माण कार्यों के लिए 3.38 करोड़ अवमुक्त किए जाने पर सहमति दी है। समाज कल्याण विभाग में व्यवसायिक तथा विशेष सेवाओं के लिए भुगतान में विभागीय आनलाइन पेंशन पोर्टल की सुरक्षा आडिट के भुगतान के लिए 66 हजार की राशि मंजूर की गई है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के तहत 31 निर्माण कार्य के ले 1.47 करोड़ की मंजूरी दी गई है। इसमें ऊधमसिंह नगर में 12, नैनीताल में 18 और देहरादून में एक निर्माण कार्य होना है।

पेयजल और स्वच्छता विभाग के तहत अल्मोड़ा के सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र में सुनौली अनुसूचित बस्ती दाड़िमखोला, थापला व बसौली में 3 हैंडपंप लगाए जाने हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री ने 9.41 लाख की स्वीकृति के साथ ही इस राशि को जारी करने निर्देश दिए हैं।

आबकारी विभाग में ट्रैक और ट्रैस प्रणाली लागू की जाएगी। इस प्रणाली को लागू करने के लिए मुख्यमंत्री ने 4.63 करोड़ के बजट प्राविधान किए जाने के संबंध में विभागीय प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आपदा प्रबंधन विभाग के तहत चिन्यालीसौड़ के आपदा प्रभावित कान्सी के प्रभावित परिवारों को अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। आपदा प्रबंधन विभाग के तहत पिथौरागढ़, देहरादून, हरिद्वार को क्रमशः 1 करोड़, 3 करोड़ और 5 करोड़ कुल 9 करोड़ की राशि अवमुक्त करने की मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दी है। लेकिन राज्य कार्यकारी समिति की आगामी बैठक में इसकी कार्यात्तर स्वीकृति ली जाएगी।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने विश्व बैंक सहायतित परियोजना उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट दृएएफ के अंतर्गत हो रहे कार्यों के लिए 50 करोड़ की स्वीकृति दी है। इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 50 पुलों का निर्माण, 5 नदी किनारे सुरक्षित निर्माण कार्य, यूएसडीएमए भवन निर्माण कार्य, 7 ढलान स्थिरीकरण कार्य तथा एसडीआरएफ मुख्यालय निर्माण कार्य चल रहा है। साथ ही प्रोजेक्ट के अधीन आकस्मिक आपातकालीन व्यवस्थाओं के घटक के तहत 140 एंबुलेंस, 1000 फालर बेड्स, 4 सीटी स्कैन मशीन व लैब सुदृढीकरण कार्य होना है।

जिला गंगा सुरक्षा समिति की हुई वर्चुअल बैठक, पौराणिक नदियों को नाला कहना गलत


जनपद में नमामि गंगे कार्यों की समीक्षा एवं सम्बंधित कार्यों की प्रगति हेतु गठित जिला गंगा सुरक्षा समिति देहरादून की 36 वीं बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्पन्न हुई। इससे पूर्व में सम्पन्न हुई बैठकों में जिलाधिकारी देहरादून द्वारा दिये गए निर्देशों पर कृत कार्यवाही तथा वर्तमान में संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए मुख्य विकास अधिकारी निकिता खंडेलवाल द्वारा विभागवार निर्देश दिए। बैठक में जिला गंगा सुरक्षा समिति के नामित सदस्य पर्यावरण विद विनोद जुगलान ने तीर्थ नगरी ऋषिकेश में पौराणिक रम्भा एवं सरस्वती नदियों को नमामि गंगे परियोजना में नाला शब्द प्रयोग किये जाने पर आस्था पर चोट पहुंचने का मामला उठाया था। जिसके प्रत्योत्तर में उपजिलाधिकारी ऋषिकेश वरुण चैधरी ने बैठक की अध्यक्षता कर रही मुख्य विकास अधिकारी को स्पष्ट किया कि पूर्व में जिलाधिकारी महोदय द्वारा दिये गए निर्देश के अनुपालन में 1938 से पूर्व के भूअभिलेखों की जाँच में पाया गया है कि उक्त नदियों के लिए किसी भी स्थान पर नाला शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। नमामि गंगे योजना में त्रुटिवश पौराणिक नदियों को नाला कह कर संबोधित किया गया है। जो कि महज एक भूल है। इसलिए भविष्य में भी इन पौराणिक नदियों को नदियों के नाम से ही जाना जाएगा।

गौरतलब है कि पर्यावरणविद विनोद जुगलान द्वारा इन नदियों के संरक्षण संवर्धन को स्थानीय प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम पत्र भी प्रेषित किया गया था,जिसका संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार द्वारा एसपीएमजी उत्तराखंड को पत्र लिखकर संज्ञान लेने के निर्देश पूर्व में दिए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त समिति के नामित सदस्य द्वारा गंगा नदी के तटीय क्षेत्र में मृतपशुओं के निस्तारण का मामला भी उठाया गया। साथ ही ऋषिकेश वन क्षेत्र अंतर्गत 15 हेक्टेयर प्लांटेशन के निकट ग्राम सभा खड़क माफ की खाली पड़ी 10 एकड़ भूमि पर बर्ड टूरिज्म विकसित करने का सुझाव दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर युवाओं को नेचर गाईड के रूप में रोजगार के अवसर और सरकार और पंचायत सहित ग्रामीणों को राजस्व की प्राप्ति भी होगी।

मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि उनका सुझाव नोट कर लिया गया है और अगली बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। नगर निगम ऋषिकेश के सहायक नगर आयुक्त ऐलम दास ने बताया कि त्रिवेणी घाट पर गंगा अवलोकन केंद्र की स्थापना के लिए टिन शेड का निर्माण कराया जा रहा है और दिव्यांगों की गंगा तक पहुंच के लिए रैम्प की सुविधा की गई है। इसके अतिरिक्त पेयजल, जल संस्थान, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, वनविभाग के कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई।

किसान संयुक्त मोर्चा ने लिया 23 जनवरी को ट्रैक्टर से राजभवन कूच करने का फैसला

23 जनवरी को ट्रैक्टर ट्राली के साथ किसान संयुक्त मोर्चा के तहत राजभवन कूच की तैयारियां जोरों पर है। आज बैठक के जरिए इसका निर्णय किया गया।

छिद्दरवाला ग्रामसभा के गुरूद्वारे में आज किसान संयुक्त मोर्चा की बैठक की गई। इसमें सर्वसहमति से 23 जनवरी को राजभवन कूच का निर्णय लिया गया। एआईसीसी सदस्य जयेंद्र रमोला ने किसान कानून को काला कानून बताया। उन्होंने बताया कि इस कानून के विरोध में विशाल ट्रैक्टर रैली के जरिए राजभवन कूच किया जाएगा।

किसान पंचायत में सरदार गुरदीप सिंह, सरदार गोविन्द सिंह, सरदार इन्द्रजीत सिंह, हाजी मीर हसन, सरदार तेजेन्द्र सिंह, गोकुल रमोला, अंशुल त्यागी, उमेद बोरा, सरदार बलबीर सिंह, सुरेन्द्र सिंह, दिनेश पाल सिंह आदि मौजूद रहे। बैठक का संचालन मनोहर सिंह सैनी ने किया।

किसानों का हित पहला लक्ष्यः त्रिवेंद्र सिंह रावत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सितारगंज चीनी मिल के संबंध में बैठक लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि आगामी पेराई सत्र तक सितारगंज चीनी मिल दुबारा शुरू हो जाय। इसके लिए पूरी योजना जल्द बनाई जाय। किसानों का हित पहला लक्ष्य होना चाहिए। सितारगंज में निर्मित इन्फ्रास्ट्रक्चर का सही उपयोग होना जरूरी है। इससे गन्ना उत्पादकों को गन्ने की बिक्री में परेशानी नहीं होगी व अन्य लोगों के रोजगार भी बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि सितारगंज चीनी मिल को आगामी पेराई सत्र से शुरू करने के लिए अभी से प्रक्रिया शुरू की जाय। इसके लिए टेक्निकल टीम एवं विशेषज्ञों की राय ली जा सकती है।

बैठक में विधायक सौरभ बहुगुणा, ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एस.एस.नेगी, मुख्यमंत्री के तकनीकी सलाहकार डॉ. नरेन्द्र सिंह, अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार, सचिव अमित नेगी, राधिका झा, निदेशक शूगर फेडरेशन चन्द्रेश यादव, अपर सचिव डा. वी. षणमुगम आदि उपस्थित थे।