नकल माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई, यूटीयू परीक्षा का पेपर आउट करने वाला सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार

उत्तराखंड में भर्ती एवं शैक्षणिक परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए चल रहे अभियान के तहत दून पुलिस ने नकल माफियाओं के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) की सेमेस्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र आउट करने के आरोप में शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, झाझरा के सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है।

कोतवाली प्रेमनगर में परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार पटेल की तहरीर पर दर्ज मुकदमे के अनुसार 8 जुलाई को आयोजित यूटीयू की सम-सेमेस्टर परीक्षा से पहले आरोपी सहायक प्रोफेसर ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न छात्रों के साथ साझा किए थे। परीक्षा संपन्न होने के बाद प्रश्नपत्र का मिलान करने पर साझा किए गए प्रश्नों में काफी समानता पाई गई। विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति ने भी अपनी जांच में पाया कि परीक्षा से पूर्व छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप एवं अन्य माध्यमों पर समान प्रश्न साझा किए गए थे।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साक्ष्य संकलित किए और आरोपी सहायक प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया। मामले में बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है तथा इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि चाहे भर्ती परीक्षाएं हों या विश्वविद्यालय की परीक्षाएं, किसी भी प्रकार की नकल, प्रश्नपत्र लीक या परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता भंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लागू सख्त नकलरोधी कानून और लगातार की जा रही कार्रवाई के परिणामस्वरूप विभिन्न मामलों में अब तक 100 से अधिक नकल माफियाओं एवं उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के मेहनती और प्रतिभाशाली युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना है और इस दिशा में अभियान आगे भी पूरी सख्ती से जारी रहेगा।

सभी आपातकालीन हेल्पलाईन सेवाओं को एकीकृत आपातकालीन हेल्पलाईन 112 से तकनीकी एवं परिचालानात्मक रूप से जोड़ेंः बर्द्धन

सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति को त्वरित एवं प्रभावी ट्रॉमा चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए जाने के दृष्टिगत उच्चतम न्यायालय द्वारा सभी राज्यों को जारी किए गए आदेशों के क्रम में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने समन्वित, प्रभावी एवं समयबद्ध आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली स्थापित किए जाने हेतु सम्बन्धित विभागों के साथ समन्वय बैठक आयोजित की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सभी आपातकालीन हेल्पलाईन सेवाओं को एकीकृत आपातकालीन हेल्पलाईन 112 से तकनीकी एवं परिचालानात्मक रूप से जोड़े जाने के निर्देश दिए। उन्होंने न्यायालय द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए इसका आमजन तक प्रचार-प्रसार किए जाने की बात भी कही। कहा कि सभी आपातकालीन हेल्पलाईनों का एकीकरण हो जाने के बाद हेल्पलाइन 112 पर पुलिस, फायर एवं मेडिकल सुविधा जैसी आपातकालीन सेवाएं तत्काल मिल सकेंगी। उन्होंने इसके लिए बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप वाला ऑटोमैटिक मैकेनिल्म तैयार किया जाने की बात भी कही, ताकि मेडिकल हेल्प, फायर या पुलिस सहायता के लिए 112 पर कॉल करने वाले व्यक्ति को वांछित सहायता तत्काल उपलब्ध करायी जा सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि गुड सेमेरिटन शिकायत निवारण तंत्र के लिए राज्य स्तर पर डीजी हेल्थ को नोडल आधिकारी एवं जनपद स्तर पर सीएमओ को नोडल अधिकारी नामित करते हुए मासिक बैठकें आयोजित की जाएं एवं बैठकों का कार्यवृत्त पोर्टल पर अपलोड किए जाएं। उन्होंने सभी सार्वजनिक एवं निजी एम्बुलेंसों में एआईएस-125 मानकों का अनुपालन एवं जीपीएस/वीएलटीडी उपकरणों की स्थापना सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसकी प्रभावी निगरानी के लिए हेल्पलाईन 112 से रियल टाईम इंटीग्रेशन किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि ट्रॉमा रजिस्ट्री के लिए नोडल विभाग परिवहन विभाग होगा। उन्होंने परिवहन विभाग को राज्य स्तरीय ट्रॉमा रजिस्ट्री स्थापित करते हुए सभी चिकित्सा संस्थानों को इससे इंटीग्रेट किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसे राष्ट्रीय ट्रॉमा रजिस्ट्री से भी जोड़ा जाए। उन्होंने पीएम राहत योजना का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया।

इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, अपर सचिव विनीत कुमार, रोहित मीणा, तृप्ति भट्ट एवं संयुक्त परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम धामी ने किया उत्तराखंड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की कई योजनाओं का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए अनेक नई कल्याणकारी योजनाओं का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने श्रमिक और श्रमिक परिवारों के लिए मुख्यमंत्री स्वास्थ योजना के अन्तर्गत 02 मेडिकल मोबाइल वैन का भी फ्लैग ऑफ किया।

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार श्रमिक कल्याण के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इसी क्रम में आज शुरु की जा रही कल्याणकारी योजनाएं भी श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी। उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री पोषण योजना” के माध्यम से जहां श्रमिक परिवारों को पोषण सहायता प्रदान की जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री शिक्षा सामग्री योजना के माध्यम से श्रमिक भाई -बहनों के बच्चों को शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान से प्रेरणा लेकर शुरु की जा रही मुख्यमंत्री स्वच्छता सामग्री वितरण कार्यक्रम के जरिए श्रमिक परिवारों में हाईजिन किट का वितरण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को कौशल प्रदान करने के लिए शुरु की जा रही, मुख्यमंत्री योग एवं वेलनेस आरोग्य योजना, के अंतर्गत पात्र छात्र-छात्राओं को योग एवं वेलनेस के क्षेत्र में निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। योजना के तहत हर साल 210 बच्चों को आवासीय सुविधायुक्त प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस योजना के तहत तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 70 युवाओं को भी प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद रोजगार से जोड़ने की भी व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड पारदर्शी तरीके से कार्य कर रहा है, इसका लाभ वास्तविक श्रमिकों तक पहुंच रहा है। इसी क्रम में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के अंतर्गत शुरु मोबाइल मेडिकल वैंस के जरिए विशेष स्वास्थ्य दल दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचकर श्रमिक भाई-बहनों को उनके कार्य एवं आवास स्थल पर ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराएंगे। इस मोबाइल मेडिकल वैन में एक्स-रे, ईसीजी सहित 44 प्रकार की जाँचें पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएँगी। साथ ही इस वैन में टेली-कंसल्टेशन के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह भी मिलेगी तथा जाँच के बाद तीन महीने तक उनके स्वास्थ्य की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी। इसकी शुरुआत पौड़ी गढ़वाल और चम्पावत जनपद से हो रही है, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में श्रमिकों के मान सम्मान को बढ़ाने के लिए’’श्रमेव जयते’’ का मंत्र दिया था। इसी क्रम में राज्य सरकार भी ’’सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’’ के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए राज्य के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों को केवल श्रमशक्ति नहीं, बल्कि उत्तराखंड की विकासशक्ति मानती है।

सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि जो हाथ प्रदेश के विकास का निर्माण करते हैं, उनका और उनके परिवार का जीवन भी सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध होना चाहिए। इसी सोच के तहत एक ओर राज्य सरकार श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है। वहीं महिला श्रमिकों एवं श्रमिक परिवारों को मातृत्व के दौरान बेहतर देखभाल और पोषण के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा श्रमिक परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए भी आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

बोर्ड में पंजीकरण नवीनीकरण कराते रहें श्रमिक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार श्रमिकों को उनके कार्य के लिए आवश्यक औजार, साइकिल और सिलाई मशीन उपलब्ध कराकर उन्हें आजीविका की दृष्टि से और अधिक सशक्त बनाने का प्रयास भी कर रही है। इसके अलावा, पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को अपना घर बनाने या घर खरीदने के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, वृद्ध निर्माण श्रमिकों को मासिक पेंशन उपलब्ध कराकर उनके जीवन को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान देने का कार्य भी हमारी सरकार द्वारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आग्रह करते हुए कहा कि सभी पात्र श्रमिक उत्तराखंड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में अपना पंजीकरण समय-समय पर नवीनीकृत कराते रहें, जिससे सरकार द्वारा संचालित सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंच सके। इससे पहले बोर्ड के सचिव पीसी दुम्का ने बोर्ड की विभिन्न गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करने के साथ ही नई योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

इस मौके पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, दुर्गेश्वर लाल, राज्य सलाहकार संविदा बोर्ड के अध्यक्ष कैलाश पंत, सतर्कता समिति की अध्यक्ष गीता रावत, उपाध्यक्ष मोहनी पोखरिया, अध्यक्ष मीडिया सलाहकार समिति प्रो. गोविन्द सिंह, सचिव श्रीधर बाबू अद्यांकी, श्रमायुक्त पी. सी. दुम्का उपस्थित हुए।

नजरियाः उत्तराखण्ड में बनेगा संस्कृत आयोग, सरकार ने मांगे सुझाव

उत्तराखण्ड सरकार, राज्य में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड संस्कृत आयोग के गठन की तैयारी कर रही है। आयोग के गठन को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए देशभर के संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, गुरुकुलों, संस्कृत संस्थानों तथा संस्कृत प्रेमियों से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। इच्छुक व्यक्ति और संस्थान 10 अगस्त 2026 तक ई-मेल के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं।

संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बताया कि उत्तराखण्ड ने वर्ष 2010 में संस्कृत को राज्य की द्वितीय राजभाषा का दर्जा देकर देश में नई पहल की थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिसंबर 2025 में हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में संस्कृत के संरक्षण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उच्चस्तरीय संस्कृत आयोग बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी के बाद 15 जुलाई 2026 को सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में आयोग के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

प्रस्तावित आयोग संस्कृत शिक्षा, शोध, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, संस्कृत आधारित कौशल विकास और रोजगार, प्रशासन तथा तकनीकी क्षेत्रों में संस्कृत के उपयोग के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल माध्यमों में संस्कृत की संभावनाओं पर भी कार्य करेगा। आयोग संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए दीर्घकालिक नीतियां और कार्ययोजनाएं तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से है, जिसमें संस्कृत का विशेष स्थान है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। राज्य सरकार इसे जन-जन तक पहुंचाने और समय के अनुरूप नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

सड़कों पर पड़े कंस्ट्रक्शन मटीरियल हटाए जाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में राष्ट्रीय शुद्ध वायु कार्यक्रम की संचालन समिति की 7वीं बैठक संपन्न हुयी। मुख्य सचिव ने प्रदेश के 3 शहरों देहरादून, ऋषिकेश और काशीपुर की वायु गुणवत्ता की स्थिति जानकारी ली एवं सुधार के लिए दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि तीनों शहरों में वायु गुणवत्ता की लगातार मॉनिटरिंग की जाए।

मुख्य सचिव ने पीएम 10 और पीएम 2.5 को कम किए जाने के लिए सभी उपायों पर कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीएम 10 को कम करने के लिए शहरों की सड़कों की स्थिति को सुधारे जाने के साथ ही, धूल कणों को कम किए जाने वाले उपायों को शामिल किया जाए। उन्होंने सभी सड़कों का पक्कीकरण, फुटपाथों का निर्माण कार्य आदि पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात कही। कहा कि डेमोलिशन वेस्ट के लिए प्रॉपर डिस्पोजल मैकेनिज्म तैयार किया जाए। उन्होंने सभी स्थानीय निकायों डेमोलिशन वेस्ट के लिए उचित निस्तारण स्थल चिन्हित किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसका उचित प्रचार प्रसार भी किया जाए ताकि भवनों को ध्वस्त किए जाने के बाद अपशिष्ट को कहां डिस्पोज किया जाना है, आमजन को पता होना चाहिए। उन्होंने सड़कों पर पड़ा कंस्ट्रक्शन मटीरियल हटाए जाने के लिए कड़े कदम उठाए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने पीएम 2.5 को कम करने के लिए वाहनों एवं फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने वाले उपाय अपनाए किए जाने की बात कही। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को सख्ती से लागू किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसके लिए पीसीबी को मैनपावर बढ़ाए जाने की आवश्यकता है तो बढ़ायी जाए। जाममुक्त सड़कों के लिए चौक सुधारीकरण कार्य किए जाएं। उन्होंने पिछले वर्षों की तुलना में काशीपुर पीएम 2.5 में सुधार आने के कारणों का विश्लेषण कर अन्य शहरों में उसे लागू किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन शहरों के सुधार कार्यों का थर्ड पार्टी ऑडिट भी कराया जाए।

मुख्य सचिव ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से राष्ट्रीय शुद्ध वायु कार्यक्रम के अंतर्गत वार्षिक कार्ययोजना प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए अच्छे प्रस्ताव तैयार किए जाए। उनकी प्राथमिकता निर्धारित करते हुए सभी प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत किए जाने की बात कही। उन्होंने निर्देश दिए कि आमजन को भी इसके प्रति जागरूक करने के लिए लगातार विभिन्न भीड़भाड़ वाले स्थानों में डिस्प्ले बोर्ड में प्रदर्शन किया जाए। स्मार्ट सिटी के अंतर्गत सभी डिस्प्ले बोर्ड्स को एक्टिव किया जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सदस्य सचिव यूकेपीसीबी डॉ. पराग मधुकर धकाते एवं अपर सचिव डॉ. आनन्द श्रीवास्तव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सरकारी नौकरी को सेवा इसलिए, वह सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता हैः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व अपर सचिव आर.सी. लोहनी द्वारा लिखित पुस्तक ‘सेवा विधि‘ का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने पुस्तक को अत्यन्त उपयोगी बताते हुए इस प्रयास के लिए लोहनी के प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी सेवा में नियुक्त प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी का कर्तव्य होता है कि वह सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और पूरे समर्पण के साथ राज्य के विकास में अपनी सहभागिता निभाए। किन्तु किसी भी व्यवस्था को सुचारू, सरल और त्वरित रूप से चलाने के लिए नियमों और प्रक्रियाओं की सही जानकारी होना अनिवार्य है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद अब तक ऐसी कोई पुस्तक उपलब्ध नहीं थी, जिसमें सरकारी सेवा से जुड़े नियम, संवैधानिक प्रावधान, शासनादेश और न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णय एक ही स्थान पर सरल और व्यवस्थित रूप में मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मात्र एक पुस्तक नहीं है, बल्कि हमारे प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक व्यवहारिक मार्गदर्शिका है, जो उन्हें अपने सेवाकाल में हर कदम पर सही दिशा और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने का काम करेगी। सरकारी नौकरी को सेवा इसलिए कहा जाता है क्योंकि जब कोई व्यक्ति सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है, तो उसका हर निर्णय सीधे तौर पर समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई अधिकारी या कर्मचारी किसी नागरिक की समस्या का समाधान करता है, किसी गरीब को उसका अधिकार दिलाता है, किसी किसान, महिला, युवा या बुजुर्ग तक सरकारी योजना का लाभ पहुँचाता है, तब वो वास्तव में राष्ट्रसेवा ही कर रहा होता है। इसीलिए एक लोकसेवक के लिए केवल ईमानदारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमों, कानूनों और प्रक्रियाओं की गहरी समझ भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों, सेवा नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की स्पष्ट समझ प्रदान करेगी, जिससे वे अधिक आत्मविश्वास और दक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में आज उत्तराखंड तेजी से विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। हमारी सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। हमने शासन व्यवस्था में तकनीक का व्यापक उपयोग किया है, प्रक्रियाओं को सरल बनाया है तथा निर्णय लेने की गति को बढ़ाया है। किसी भी राज्य का विकास केवल योजनाओं या बजट से नहीं होता। उसका सबसे बड़ा आधार होता है, एक संवेदनशील, सक्षम और उत्तरदायी प्रशासनिक तंत्र। सरकार की नीतियाँ तभी सफल होती हैं, जब उन्हें धरातल पर ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ लागू किया जाए। इसलिए हमारी प्रशासनिक व्यवस्था जितनी सक्षम होगी, जनता का विश्वास भी उतना ही मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं अनुभव किया है कि कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं, जो नियमों की आत्मा को समझते हैं। वे नियमों को बाधा नहीं बनने देते, बल्कि उन्हीं नियमों के भीतर जनहित का रास्ता खोज लेते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल नियमों का पालन करना ही नहीं, बल्कि जनता का जीवन सरल बनाना है। नियम व्यवस्था बनाए रखने के लिए होते हैं, लेकिन उनका अंतिम उद्देश्य जनकल्याण होना चाहिए। जनता जब किसी समस्या को लेकर अधिकारियों के पास आती है, तो वो बहुत उम्मीद और विश्वास के साथ आती है। ऐसे में आपकी कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए कि उन्हें त्वरित, सुलभ और पारदर्शी न्याय मिले, क्योंकि हमारी सरकार का मूल मंत्र बिल्कुल स्पष्ट है-‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि‘। हमें हर प्रक्रिया का सरलीकरण करना है, समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना है, फाइलों का समयबद्ध निस्तारण करना है और जनता के चेहरे पर संतुष्टि लानी है, जिससे हम उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प को पूर्ण करने में सफल हो सकें।

पुस्तक के लेखक आर.सी. लोहनी ने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से सरकारी सेवाओं में संवैधानिक व्यवस्थाओं, अधिनियमों, नियमों, विनियमों एवं शासनादेशों तथा उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतो को ध्यान में रखा गया है। इस पुस्तक में मुख्य रूप से संवैधानिक व्यवस्थाओं एवं उनके क्रम में नियुक्ति, आरक्षण, परिवीक्षा, स्थायीकरण, ज्येष्ठता, पदोन्नति स्थानान्तरण, मृतक सरकारी सेवकों के आश्रित एवं सेवायोजन, निलंबन, अनुशासनात्मक कार्यवाही, जांच अधिकारी का दायित्व, शास्ति, शास्ति के विरूद्ध अपील, अस्थाई सरकारी कर्मचारी सेवा समाप्ति त्यागपत्र, स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति. अनिवार्य सेवा निवृत्ति, राज्य कर्मचारी आचरण, सेवानिवृत्ति के उपरांत जाच कार्यवाही, सरकारी सेवा के दौरान किये गये आपराधिक कृत्य पर अभियोजन, अवकाश के सम्बन्ध में नियम, राजभाषा अधिनियम, धारणाधिकार से सम्बन्धित सेवानियमों, नियमों, अधिनियमो तथा विनियमों एवं मा. उच्चतम न्यायालय तथा मा० उच्च न्यायालयों द्वारा समय-समय पर दिये गये निर्णयों का सार इस पुस्तक में सम्मिलित किया गया है, जो कि सरकारी अधिकारियो-कर्मचारियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, पूर्व अपर सचिव भूपेश तिवारी, जी.बी. ओली, रमेशचन्द्र शर्मा, हन्सादत्त पाण्डेय, पूर्व संयुक्त सचिव नवीन सिंह तडानी सहित डॉ. डी.एस. रावत, कर्नल(से.नि.) शिव सहरावत, वैज्ञानिक (से.नि.) पी.सी.वर्मा, उपायुक्त परिवहन सुनील शर्मा, अनुभाग अधिकारी दीपक जोशी, रणधीर अरोड़ा, पूरन सिंह रावत, अश्विनी सिंह नेगी, आर.सी.एस. बिष्ट, विकास श्रीवास्तव एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

पिथौरागढ़ की महिला मुक्केबाजों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया उत्तराखंड का मान, मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने वाली उत्तराखंड की महिला मुक्केबाजों ने भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पिथौरागढ़ की मुक्केबाज निकिता चंद, काजल फर्स्वाण और आरती धारियाल को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों के साथ ही उनके प्रशिक्षकों बृजेंद्र मल और ललित कुँवर को भी सम्मानित किया और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

हाल ही में इंडोनेशिया के जकार्ता में 3 से 15 जुलाई 2026 तक आयोजित अंडर-23 एशियन बॉक्सिंग चौंपियनशिप में उत्तराखंड की होनहार मुक्केबाज निकिता चंद ने 60 किलोग्राम भार वर्ग और काजल फर्स्वाण ने 65 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किए। दोनों खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत के बल पर उत्तराखंड और भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।

पिथौरागढ़ के बड़ालू गांव की निवासी निकिता चंद इससे पहले वर्ष 2021, 2022 और 2023 में एशियन चौंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वह वर्तमान में अपने प्रशिक्षकों श्री बृजेंद्र मल और श्री भास्कर भट्ट के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

वहीं, मुनस्यारी के भदेली गांव की निवासी काजल फर्स्वाण ने भी बॉक्सिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उनका प्रारंभिक प्रशिक्षण पिथौरागढ़ स्थित महिला आवासीय छात्रावास, खेल विभाग में हुआ, जहां उन्हें सुनीता मेहता रावत और कप्तान देवीचंद का मार्गदर्शन मिला। इसके बाद उन्होंने स्मॉल खेलो इंडिया सेंटर में कोच निखिल महर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त किया। बाद में उनका चयन एनबीए, रोहतक के लिए हुआ और वर्तमान में वह पटियाला स्थित राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग कैंप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। काजल इससे पहले अंडर-19 ।ैठब् एशियन चौंपियनशिप में रजत पदक, अंडर-23 एशियन बॉक्सिंग चौंपियनशिप में कांस्य पदक तथा 38वें नेशनल गेम्स-2025 में रजत पदक जीत चुकी हैं।

इसी क्रम में पिथौरागढ़ की एक और प्रतिभाशाली महिला मुक्केबाज आरती धारियाल ने 12 से 16 जुलाई 2026 तक रोमानिया में आयोजित गोल्ड बेल्ट बॉक्सिंग प्रतियोगिता में 54 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। गौड़ीहाट, पिथौरागढ़ की निवासी आरती वर्ष 2024 और 2025 में एलीट महिला राष्ट्रीय बॉक्सिंग चौंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। अपनी निरंतर सफलता के आधार पर उनका चयन भी पटियाला स्थित राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग कैंप के लिए हुआ है, जहां वह वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

आरती ने जिला खेल कार्यालय के तत्वावधान में संचालित स्मॉल खेलो इंडिया सेंटर में कोच निखिल महर के मार्गदर्शन में बॉक्सिंग का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इन तीनों महिला मुक्केबाजों की उपलब्धियां उत्तराखंड में खेलों के प्रति बढ़ते उत्साह और राज्य की बेटियों की प्रतिभा का प्रमाण हैं। उनकी सफलता नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की बेटियों ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प से देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। निकिता चंद, काजल फर्स्वाण और आरती धारियाल की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि उत्तराखंड की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत, उनके प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग का परिणाम है। राज्य सरकार खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा खेल सुविधाओं के विस्तार और प्रतिभावान खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन किया है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपनी प्रतिभा निखारने और बड़े मंच पर प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक अवसर और सुविधाएं मिलें। उन्होंने खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखंड की बेटियां आने वाले समय में खेलों के क्षेत्र में और भी नए कीर्तिमान स्थापित करेंगी।

इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, सहायक निदेशक खेल संजीव पौरी, जिला खेल अधिकारी शबाली गुरंग सहित अन्य अधिकारी एवं संबंधित प्रशिक्षक उपस्थित रहे।

कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए एप्पल मिशन के तहत 70 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में आयोजित आम महोत्सव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न प्रजातियों के आमों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और किसानों तथा बागवानी से जुड़े लोगों से संवाद किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आम महोत्सव के अवसर पर यहां उपस्थित होकर उन्हें अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार के आम स्वाद और गुणवत्ता के मामले में किसी से कम नहीं हैं। यहां आम की विभिन्न प्रजातियों की प्रदर्शनी उत्तराखंड की समृद्ध बागवानी क्षमता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कांवड़ मेले की तैयारियों के बीच इस महोत्सव में शामिल होना उनके लिए विशेष अवसर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की मेहनत और पसीने का सम्मान करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि एवं बागवानी को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने उल्लेखनीय कार्य किया है। कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए एप्पल मिशन के तहत 70 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। इसके साथ ही कीवी मिशन, ड्रैगन फ्रूट उत्पादन, महक क्रांति तथा सुगंधित और औषधीय पौधों पर आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिना रसायनों से तैयार प्राकृतिक परफ्यूम की देश-विदेश में मांग लगातार बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू किए गए ‘हिमालय ब्रांड’ के माध्यम से उत्तराखंड की मातृशक्ति द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को देश और दुनिया में अलग पहचान मिल रही है। बेहतर गुणवत्ता और आकर्षक पैकेजिंग के कारण उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों की ब्रांड वैल्यू लगातार बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी), नकल विरोधी कानून और धर्मांतरण विरोधी कानून सहित कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं, जिनकी देशभर में चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि सभी वर्गों के बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा के अवसर उपलब्ध हों। इसी उद्देश्य से मदरसा शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम उठाते हुए नया शिक्षा प्राधिकरण बनाया गया है, जिसमें विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सतत विकास, कृषि, बागवानी, मत्स्य, पर्यटन, निवेश और खनन सहित अनेक क्षेत्रों में उत्तराखंड देशभर में अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा राज्य को 200 करोड़ रुपये का पुरस्कार भी प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार को विकास की इस तेज रफ्तार यात्रा में और आगे बढ़ना होगा। विकास कार्य किसी भी परिस्थिति में रुकने नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि आम महोत्सव जैसे आयोजन कृषि, बागवानी और किसानों को नई पहचान देने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों से किसानों का उत्साह बढ़ता है और कृषि एवं बागवानी क्षेत्र को नई संभावनाएं मिलती हैं।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रामसिंह कैड़ा, प्रदीप बत्रा, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, भाजपा जिलाध्यक्ष हरिद्वार आशुतोष शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष रुड़की डॉ. मधु, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मेयर हरिद्वार किरण जैसल, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल, उपाध्यक्ष आपदा प्रबंधन विनय रोहिल्ला, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, ओम प्रकाश जगदग्नि, श्यामवीर सैनी, देशराज कर्णवाल, नितिन गौतम, अजीत चौधरी, शोभाराम प्रजापति, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल गोयल, शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष युवा मोर्चा विक्रम भुल्लर, भाजपा नेता लव शर्मा, आशु चौधरी, हीरा सिंह बिष्ट, सचिव विनय शंकर पांडे, पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर सचिव वंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, पुलिस अधीक्षक यातायात निशा यादव, पुलिस अधीक्षक नगर अभय प्रताप सिंह, अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, नगर मजिस्ट्रेट हर गिरी, उप जिलाधिकारी योगेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

गोदियाल को आड़े हाथों लेते हुए बोले मंदिर समिति अध्यक्ष, बोले मंदिर को चंदे में मिले दान को अपने चहेतों पर लुटाने वाले दे रहे ज्ञान

श्री बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने गोदियाल के अनर्गल आरोपों को कांग्रेस के शर्मनाक कृत्यों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। कहा, जिस तरह एक कार्यकर्ता और छात्रा की मौत के ग़मगीन माहौल में गोदियाल समेत तमाम कांग्रेसी अपने युवराज के स्वागत में बेशर्मी से नाचते नजर आए, वो उनकी खराब मानसिकता को दर्शाता है। वहीं पलटवार कर कहा, जिन्होंने समिति के करोड़ों रुपए के संसाधन अपनी सेवा में खर्च किए, जिन्होंने मंदिर को चंदे में मिले दान को अपने चहेतों पर लुटाया, उनका मंदिर पर ज्ञान और नैतिकता का पाठ देना दुर्भाग्यपूर्ण है। फिलहाल मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर गड़बड़ी और चोरी आदि सभी प्रकरण पर जांच चल रही है और जो भी दोषी पाया गया, उसे किसी कीमत पत्र बख्शा नहीं जाएगा।

पार्टी मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा, श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। यह किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे देश की श्रद्धा का विषय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की सरकार कार्य कर रही है। वर्तमान गड़बड़ी और चोरी के सामने आए दुर्भाग्यपूर्ण प्रकरण को मुख्यमंत्री ने पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता से लिया है। उनके निर्देश पर उच्च स्तरीय जांच चल रही है, इसलिए हमारा उद्देश्य किसी को बचाना या इसकी छवि को खराब करना नहीं, बल्कि हम चाहते है कि सत्य सबके सामने आना चाहिए। इन सारे मामलों में तीन तरह की जांच चल रही है।

उन्होंने कहा कि एसआईटी, विभागीय जांच, और उच्च स्तरीय जांच राज्य स्तर पर कमिश्नर की अध्यक्षता में जांच गतिमान है। आज पूर्व अध्यक्ष, श्री बद्री-केदार मंदिर समिति और वर्तमान में कांग्रेस के अध्यक्ष, गणेश गोदियाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि मंदिर के चंदा चोर आरोपों में जो दूसरा अभियुक्त गिरफ्तार हुआ है, उसने यह कहा है कि उसको ऊपर से निर्देश मिलते थे। मैं जानना चाहता हूँ कि गोदियाल जी को यह जानकारी कहाँ से मिली? क्या आरोपी से उनकी कोई बातचीत हुई है या पुलिस की जो जांच कर रही है, उसमें गोदियाल को कोई जानकारी प्राप्त हुई है? क्योंकि यह कहीं पर भी पब्लिक डोमेन में, मेरी जानकारी में यह बात नहीं है। और अगर यह बात झूठी है, तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि वह कहीं ना कहीं इस जांच को प्रभावित करने के लिए, दोषियों को बचाने के लिए, इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं।

वहीं जोर देते हुए कहा कि मंदिर में चंदा चोरी के जघन्य अपराध में जो भी कोई लिप्त होगा, उसको किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हमारे प्रदेश क मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश हैं और इस प्रकरण में उन्होंने स्पष्ट कहा भी है कि कोई भी दोषी होगा, उसको किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। और मैं स्वयं इस बात के लिए प्रतिबद्ध हूँ कि इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी अलग होकर सबके सामने आना चाहिए।

कहा, गोदियाल से पूछना चाहता हूँ कि जब वह बद्रीनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष थे, तो क्या उन्हें सारे काम के निर्देश राहुल गांधी या प्रियंका गांधी जी से मिलते थे? अगर ऐसी परंपरा थी, जिसके आधार पर वह दावा कर रहे हैं, तो मैं उनको बताना चाहता हूँ कि यह भारतीय जनता पार्टी की परंपरा नहीं है। उनके यहाँ यह परंपरा रही होगी, शायद उसी परंपरा के आधार पर वह इस तरह की बेतुकी बातें कर रहे हैं। भाजपा में कभी भी किसी गलत काम को करने की शिक्षा नहीं दी जाती है। हमारी पार्टी सनातन के मार्गदर्शन में चलने वाली पार्टी है, जहाँ किसी को दिखाने के लिए ईमानदारी का ढोंग नहीं करना पड़ता है। हमारी पार्टी स्वयं से अनुशासित होकर, अनुशासित रहने का मंत्र देकर जनसेवा की सीख देती है।

​उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति से भी नहीं है, किसी दल से भी नहीं है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए है। बद्री-केदार की पवित्रता और श्रद्धालुओं के विश्वास से कोई समझौता नहीं होगा। यदि कोई दोषी होगा, तो उसे कानून अपने अनुसार दंड मिलेग और यदि कोई निर्दाेष है, तो उस पर राजनीति करने के आरोप लगाने वालों को उनकी ही भाषा में करारा जवाब दिया जाएगा।

​कहा, जिस प्रकार उन्होंने आज कहा, जिस कर्मचारी के ऊपर यह आरोप लगे हैं वे मेरे करीबी थे, जबकि उसकी 2003 में नियुक्ति हुई थी। वह मुंबई में एक कंपनी थी, जिसमें वह कार्यरत था। वहाँ से वह आया था, उसको एक टेंपरेरी नौकरी वहाँ पर मिली थी, इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर। लगातार वह इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर काम कर रहा था। उसके बाद सरकार से जो 34 पद स्वीकृत होकर आए उसमें एक पद इंटरनेट कोऑर्डिनेटर का स्वीकृत होकर आया था। उन्होंने उसको स्थाई किया, उनके हस्ताक्षरों से वह स्थाई हुआ। उन्होंने सारे नियम-कानूनों को साइड रखते हुए, एक्ट का उल्लंघन करते हुए, आखिर उस 34 लोगों में से उसी कर्मचारी को वैयक्तिक सहायक के पद पर सीधे बिठा दिया! जबकि इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद का कोई वहाँ पर समायोजन का कोई प्रावधान नहीं है। आप पद को समायोजित नहीं कर सकते हैं। आज की तारीख में भी वह इंटरनेट कोऑर्डिनेटर का पद यहाँ पर खाली है विभाग के अंदर। और उन्होंने सीधे उसको वैयक्तिक सहायक पर पदोन्नति देकर, जो 1984 से एक पद खाली था। आखिर उनका ऐसा क्या प्रेम था? सिर्फ एक व्यक्ति को ही लगातार उन्होंने दो प्रोन्नति दे दी! 2800 ग्रेड पे से सीधे 4600 के पद पर लेकर आ गए!

​वहीं बतौर अध्यक्ष समिति के संसाधनों के दुरुपयोग और वित्तीय डकैती के आरोप लगाते हुए कहा, वह बार-बार यह कहते हैं साहब कि वैयक्तिक सहायक को अपने साथ ले गए। जबकि मैंने14 महीने का मेरा कार्यकाल है, मैंने एक भी बद्री-केदार मंदिर समिति का स्टाफ अपने साथ में नहीं रखा हुआ है। और इस बार की जो यात्रा वह ऐतिहासिक यात्रा रही है। इतनी अधिक संख्या में देश भर से तीर्थयात्री वहाँ पर आए। और मंदिर समिति के पास आप जानते हैं कि सीमित स्टाफ है। हमने निर्णय लिया कि सारा स्टाफ फील्ड में काम करेगा। कोई मेरे पास एक स्टाफ नहीं रहता है। जो आज यह बात कह रहे हैं, 10-10 लोगों का स्टाफ उनके घरों में, उनके विद्यालय में, उनके राजनीतिक फील्ड में हमेशा रहा है। उन्होंने किस तरह से मंदिर समिति का दुरुपयोग किया, किस तरह से लूटपाट मचाई, उसके प्रमाण पुख्ता हैं। 2025 में, यह कमिश्नर, तत्कालीन कमिश्नर सुशील कुमार की जांच रिपोर्ट में वह सारी चीजें यहाँ पर आई हुई हैं। गोदियाल कहते हैं कि श्मैं ₹1 भी नहीं लेता हूँ जबकि वे विधानसभा में सदस्य थे? विधायक की तनख्वाह वहाँ से लेते थे और सारा लाभ संसाधन करोड़ों रुपए का आपने बद्री-केदार मंदिर समिति से लिया था। थे!

​आरोप लगाते हुए कहा, उन्होंने अपने उस 5 साल के कार्यकाल में अधीनस्थ मंदिरों में, धर्मशालाओं मेंकृ27 धर्मशालाएं हैं हमारी, 7 हमारे संस्कृत विद्यालय हैंकृउन पर कहीं पर भी उन्होंने ₹1 भी खर्च नहीं किया। और लाखों-करोड़ों रुपया बाहर खर्च किया। इससे भी ज्यादा देखिए कि मंदिर समिति के उन्होंने जो बजट था, उसमें साफ एक्ट में प्रावधान है, क्योंकि मंदिर की आय का स्रोत दान के पैसों से, जो दानदाता हैं, उन दानदाताओं से ही मंदिर का खर्चा चलता है। लेकिन उन्होंने सारे एक्ट को, सारे नियम-कानूनों को धता बताते हुए, उन्होंने अपनी विधानसभा क्षेत्र के अंदर पैसा लगाया, उन्होंने जो अपना कॉलेज है वहाँ पर, उस कॉलेज के अंदर पैसा लगाया। उन्होंने विवेकाधीन कोष जैसे ही मंदिर समिति के धन का दुरुपयोग किया। वह चोरी की बात कर रहे हैं, चंदा चोरी? उन्होंने तो डकैती मचाई। उस चंदा डकैत ने जैसे विवेकाधीन कोष से पैसा बांटा जाता है, व्यक्तिगत लोगों को उन्होंने कई लोगों को अपनी विधानसभा के अंदर 25,000, 50,000, 1 लाख, 2 लाख, 5 लाख दिया। उन्होंने ऐसा पैसा लुटाया है और आज वह यह दुहाई देते हैं कि चंदा चोरी! चंदा चोरी!

​जबकि यह घटना हमारे संज्ञान में आई, तत्काल कठोर कार्रवाई करते हुए शो-कॉज नोटिस जारी किए, जांच समिति बना दी। माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर तत्काल उन्होंने इसकी गंभीरता को देखते हुए इस पर। इसका संज्ञान लिया और उसके बाद उन्होंने इस पर उच्च स्तरीय कमेटी बना दी और जांच आज भी गतिमान है। लगातार उसमें जो है कि जो भी इसमें संलिप्त होंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो रही है, वह जेल जा रहे हैं। लेकिन वह किस तरह से इसका राजनीतिकरण कर रहे हैं और किस तरह से लोगों को वह दिग्भ्रमित कर रहे हैं?

अभी हाल ही में परसों देखिए आप, उनकी तो संवेदनाएं मर चुकी हैं। उनके अंदर ना संवेदनाएं हैं, ना मर्यादाएं हैं। आज जिस बिटिया ने आत्महत्या की थी, उसकी फोटो लगी है उस मंच में, उसके पिताजी उस मंच पर खड़े हैं। और उसी दिन शाम को जो है कि एक कांग्रेस कार्यकर्ता की जो है कि वहाँ पर जो है कि मृत्यु हो जाती है, एक दुर्घटना घट जाती है। और देखिए वह किस प्रकार से डांस कर रहे हैं! किस प्रकार से वह नाच रहे हैं वहाँ पर! कुछ तो शर्म करे कांग्रेसी। जो वहां डांस कर रहे हैं उनकी संवेदनाएं खत्म हो गई थी और अब पोल खुल गई तो भ्रमित करने के लिए, इस मुद्दे को भटकाने के लिए, मर्यादा की बात करते हैं उनका कार्यकर्ता, वह किस तरह से उसने अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया है और किस तरह से उसने सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ उन्होंने किस तरह का किस तरह की बातें कही हैं।आपको तो किसी पर भरोसा ही नहीं! देश के निर्वाचन आयोग पर भरोसा नहीं है, देश की सीबीआई पर भरोसा नहीं है, देश की किसी जांच एजेंसी पर आपको भरोसा नहीं है। फिलहाल जांच होने दीजिए, जांच आने दीजिए, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

इस दौरान पत्रकार वार्ता में प्रदेश सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र नेगी, प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी एवं मीडिया संपर्क संयोजक हरीश चमोली भी मौजूद थे।

ग्रोथ सेंटर्स को मार्केट लिंकेज के साथ ही प्राईवेट पार्टनर्स से जोड़े जाने की आवश्यकताः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में प्रदेश में ग्रोथ सेंटर्स की प्रगति के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने सभी विभागों के अंतर्गत बनाए गए ग्रोथ सेंटर्स की प्रगति एवं संचालित गतिदिवधियों की जानकारी ली। उन्होंने ग्रोथ सेंटर्स को स्थानीय स्तर पर आर्थिकी गतिविधियों के लिए महत्त्वपूर्ण बताया। कहा कि ग्रोथ सेंटर्स को मार्केट लिंकेज के साथ ही प्राईवेट पार्टनर्स से जोड़े जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर में विभिन्न विभागों के अंतर्गत संचालित हो रहे ग्रोथ सेंटर्स को लगातार रिव्यू किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अच्छा कर रहे ग्रोथ सेंटर्स को तकनीकी एवं अन्य प्रकार का सपोर्ट उपलब्ध कराए जाने के साथ ही नॉन-फंक्शनल ग्रोथ सेंटर्स को भी फंक्शनल किए जाने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने अपने सभी उत्पादों को ट्रेसेबिलिटी, जीआई टैगिंग और ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन से जोड़े जाने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने शीप एंड वूल डेवेलपमेंट बोर्ड के अंतर्गत पशुपालकों की समस्याओं को समझने एवं उनके निस्तारण के लिए लगातार पशुपालकों के साथ संवाद एवं वर्कशॉप आयोजित किए जाने की बात कही। कहा कि यह बोर्ड की जिम्मेदारी है। यदि किसी अन्य राज्य में इस दिशा में अच्छा कार्य हो रहा है तो वहां अपनी टीम को भेजकर उनके मैकेनिज्म को समझने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने ग्रोथ सेंटर्स को मार्केट लिंकेज के साथ ही कोल्ड स्टोरेज चेन से जोड़े जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्टैण्ड अलोन माईक्रो स्टोरेज चेन विकसित की जा सकती है। इससे ग्रोथ सेंटर्स के उत्पादों को लम्बे समय तक संरक्षित रख कर आवश्यकता के अनुरूप मार्केट में उतारा जा सकेगा, ताकि उत्पाद की उचित कीमत मिल सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि हाउस ऑफ हिमालयाज के साथ सभी ग्रोथ सेंटर्स से सम्बन्धित विभागों कॉर्डिनेशन मीटिंग करवा ली जाए। कहा कि पोटेंशियल वाले नॉन-फंक्शनल ग्रोथ सेंटर्स की हैंड होल्डिंग करायी जाए। उन्होंने नाबार्ड को भी गैप्स आइडेंटिफाई करते हुए ग्रोथ सेंटर्स को फंडिंग उपलब्ध कराए जाने की बात कही। साथ ही फॉरेस्ट के ग्रोथ सेंटर्स के लिए बिजनेस प्लान तैयार कर उपलब्ध कराए जाने पर जोर दिया।

इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, एपीसीसीएफ नरेश कुमार, अपर सचिव कहकशां नसीम, आनन्द श्रीवास्तव एवं झरना कामठान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।